तनवी को अब ये बात इतनी बुरी भी नही लग रही थी की सोनू ने अपनी बहन के सामने ही अपना लंड निकाल रखा है…
जब उसकी खुद की बहन ने पहल करके अपना नंगा जिस्म उसके सामने दिखा दिया था तो सोनू को भी पूरा नंगा होने में भला क्या प्राब्लम होनी थी…और वैसे भी वो दोनो ये कह ही चुके थे की ऐसे एक दूसरे को देखना उनके लिए आम बात है.
तनवी की तो चूत एक बार फिर से रिसने लगी सोनू का लंड देखकर…
आज से पहले उसने चुदने के बारे में उतना नही सोचा था जितना अब सोच रही थी
सोनू के लंड की चमक रही नसें उसे अपने पास बुला रही थी, वो उन नसों को अपनी चूत की अंदरूनी दीवारों से घिसता हुआ महसूस करना चाहती थी…
उसके कड़क लंड को अंदर लेकर अपनी वर्जीनिटी उसे सोंपना चाहती थी, पूरी तरह से तृप्त होकर वो अपनी जवानी का असली मज़ा लेना चाहती थी.
पर ये इस वक़्त मुमकिन नही था…
क्योंकि अपनी पहली चुदाई वो इस तरह से नही करवा सकती थी, जहां उसके प्रेमी की बहन भी मोजूद हो.
पर हाँ , इस वक़्त उसे अपने प्रेमी को खुश ज़रूर करना था, इसलिए ज़्यादा सोचे समझे बिना वो सोनू की तरफ सरकने लगी…जैसे कोई नागिन अपने नाग के पास रेंगकर आती है.
सोनिया ने जब ये देखा तो वो समझ गयी की अब क्या होने वाला है…
वैसे मन तो उसका भी कर रहा था की झपटकर सोनू के लंड पर टूट पड़े, उसे निगल जाए और तब तक चूसती रहे जब तक उसमे से गरमा गरम खीर निकल कर उसके मुँह में ना गिरने लगे.
पर वो भी मजबूर थी
अभी तक जो उसने तनवी के सामने दर्शाया था, वही उनके हिसाब से काफ़ी था
उसके आगे बढ़ने का मतलब होता की अपने अवैध रिश्तों का खुद ही परदा फ़ाश कर देना जो वो कम से कम आज तो नही करना चाहती थी…
जो इस वक़्त उत्तेजना की वजह से बुरी तरह तप रहा था…
वो उसके मन की दशा का अनुमान आसानी से लगा सकती थी
2 जवान लड़कियों के नंगे बदन को देखकर उसके मन और लंड पर जो बीती थी, वो उसके चेहरे पर सॉफ दिख रही थी.
और इस वक़्त उसकी उत्तेजना और चेहरे के एक्शप्रेशन सिर्फ़ तनवी ही दूर कर सकती थी, इसलिए जैसे ही उसकी नज़रें तनवी से मिली, सोनिया ने पलके झुका कर उसे अपने भी के पास जाने की अनुमति दे दी…
वो तो वैसे भी जा ही रही थी पर सोनिया की स्वीकृति के बाद तो उसमें जैसे एक नया जोश सा आ गया, वो एक ही छलाँग में उसके करीब जा पहुँची और उससे लिपट कर जोरों से उसे किस्स करने लगी.
दोनो एक दूसरे के होंठों को चूस रहे थे….चबा रहे थे…जिस्मों को मसल रहे थे…
जैसे डिस्टेन्स रीलेशन में रहने वाले प्रेमी – प्रेमिका होटल रूम में मिलते ही एक दूसरे पड़ते हैं,ठीक वैसे ही..
अगर उन्होने कपड़े भी पहने होते तो सिर्फ़ एक मिनट में वो भी नोच कर फेंके जा चुके होते, पर यहां तो उसकी भी चिंता नही थी, वो दोनो पहले से ही नंगे थे..
तनवी ने अपनी नन्ही ब्रेस्ट को उसके मुँह की तरफ कर दिया ताकि सोनू उसे चूस्कर बड़ा कर सके…
सोनू भी अपने काम में लग गया, उसकी छातियों को चूसता हुआ वो उसकी कसी हुई गांड को ज़ोर-2 से दबा रहा था.. शायद सोच रहा था की उसकी गांड जैसा उभार और कसाव उसकी छातियों में भी होता तो कितना मज़ा आता..
पर अभी के लिए उसे इसी से काम चलाना था.
तनवी के हाथ उसके लंड पर जा पहुँचे, उसे तो ऐसा लगा जैसे उसने कोई लोहे की गर्म रोड पकड़ ली हो…
वो अपनी नाज़ुक हथेलियों से उसके लंड को उपर नीचे करने लगी…
उसके लंड की नसों की चुभन उसकी नाज़ुक हथेलियों पर सॉफ महसूस हो रही थी..
ऐसा लग रहा था जैसे तनवी ने किसी कठोर पेड़ की डाली पड़की हुई है अपने हाथ में..
अत्यधिक उत्तेनज़ा के मारे तनवी के मुँह से लार निकल कर बाहर गिरने लगी…
और वो सीधा लंड के उपर ही टपकी.
सोनू सुलग कर रह गया उसकी गर्म लार को महसूस करके..
”आआआआआआआआआअहह…… सककककक इट बैबी….. सक्क इट….”
ये एक ऐसा काम था जिसके लिए इस वक़्त कमरे में मोजूद दोनो चूतें मचल रही थी…
पर लंड सिर्फ़ तनवी के हिस्से में लिखा था इस वक़्त.
उस नागिन ने अपना फन नीचे किया और सोनू की नागमणि एक ही झटके में निगल कर उसे पूरा का पूरा अपने अंदर समा लिया.
”आआआआआआआआआआआहह……… सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स…”
एक साथ दो सिसकारियाँ सुनी गयी कमरे में
और दूसरी …
ना ना…
तनवी की नही
बल्कि सोनिया की
जो दूर बैठी अपना मुँह खोलकर, अपनी चूत में उंगलियाँ पेलकर, उसे ऐसा करते हुए तब तक देखती रही
जब तक वो सोनू के कड़क लंड को निगल नही गयी…
और जैसे ही उसने निगला, सोनिया के मुँह से भी सिसकारी निकल गयी.
जैसे वो लंड तनवी के मुँह में नही , बल्कि उसके खुद के मुँह में आया हो….
और लंड वाली फीलिंग लेने के लिए, उसने अपनी चूतरस से भीगी पाँचों उंगलियों को एक साथ चिपकाया, उसको कोन जैसी शक्ल में ढाला और अपने मुँह में लेकर चूसने लगी….
.. उउम्म्म्ममममममम…..
कसम से, कुतिया को खुद की उंगली चूसने में भी इस वक़्त उतना ही मज़ा मिल रहा था जितना उसे अपने भाई के लंड को चूसने पर मिला था.
पर असली मज़ा तो तनवी को मिल रहा था….
जो उसके भाई के लंड को अपने बाप का माल समझ कर इतनी बुरी तरह से चूस रही थी जैसे आज उसे जड़ से उखाड़ कर घर ही ले जाएगी…
पर सोनू को भी शायद ऐसी उत्तेजना पसंद थी, इसलिए वो खुद भी उसे ज़ोर-2 से लंड को चूसने के लिए उकसा रहा था…
उसने तो अपने लंड को उसके गले से नीचे उतार कर उसे चौक सा कर दिया था, बेचारी ने बड़ी मुश्किल से उसे बाहर निकाला, वरना उसने वहीं उल्टी मार देनी थी.
तनवी की नज़र जब अपनी सहेली पर पड़ी तो उसने देखा की कैसी लालायित नज़रों से वो उसे देख रही है…
तनवी का दिल पासीज सा गया….
उसने अपने घर पर एक बिल्ली पाली हुई थी, और जब भी वो भूखी होती थी तो ऐसी ही नज़रों से वो सबको देखती थी, तनवी को अपनी वो पुस्सी याद आ गयी सोनिया की आँखे देखकर…
वो समझ गयी की उसे भी इस वक़्त भूख लगी है…
और वो भी लंड की भूख…
तनवी तो मज़े से उसके भाई के लंड की डिश खा रही थी, पर दूर बैठी उसकी बेस्ट फ्रेंड किसी भूखी बिल्ली की तरह उसे ऐसा करते देख रही थी….
उसने मन में कुछ सोचा और फिर इशारा करके उसने सोनिया को अपनी तरफ आने को कहा.
सोनिया के साथ -2 सोनू भी चोंक गया की वो उसे क्यो बुला रही है…
हालाँकि दोनो भाई-बहन इस वक़्त यही चाहते थे पर उन्होने सोचा नही था की तनवी खुद ये काम उनसे करवाएगी.
सोनिया उठकर करीब आई तो तनवी बोली : “आई नो की तुम्हे कैसा फील हो रहा है….तुम एक काम करो..यहाँ आओ…और इसे सक्क करो…”





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