ये गलत है(भाई-बहन का प्यार) – Update 19 | Incest Sex Story

ये गलत है(भाई-बहन का प्यार) - Incest Sex Story
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अगले दिन जब सोनू स्कूल गया तो उसे अपनी लाइफ का सबसे बड़ा सरर्प्राइज़ मिला… तनवी उसी के स्कूल में थी.

तनवी ने अपने पापा की एप्रोच लगाकर उसी के स्कूल में ट्रान्स्फर ले लिया था…
सोनू जानता था की उसके पापा उनके एरिया के निगम पार्शद थे, उनके अंडर में वहां के सारे स्कूल आते थे और सोनू को ये सोचने की ज़्यादा ज़रूरत नही थी की वो वहां किसलिए आई है… वो ज़्यादा से ज़्यादा टाइम उसके साथ बिताना चाहती थी…

पर सोनू के लिए तनवी का आना एक मुसीबत जैसा था…
क्योंकि स्कूल में उसके साथ साक्षी भी थी…उसके सामने वो तनवी को कैसे हेंडल कर पाएगा..

पर एक बात तो उसे अपने फेवर में लग रही थी की तनवी उसके पीछे पड़ी है,ना की वो तनवी के पीछे…
इसलिए कम से कम वो तनवी को तो बता ही सकता है की उसका साक्षी के साथ चक्कर है…
साक्षी को तनवी के बारे में बताने का मतलब था की अपने हाथ में आए लड्डू को फेंक देना..जो वो हरगीस नही चाहता था..

तनवी ने जब सोनू को देखा तो वो सीधा उसके पास आ गयी

और हाथ मिलाकर उसे बताने लगी की कैसे उसने अपने पापा को पटा कर वहां एडमिशन ले लिया है.
हालाँकि उसका सेक्शन अलग था, पर सोनू जानता था की वो उससे मिलने का कोई ना कोई जुगाड़ निकाल ही लेगी पर सबसे पहले उसे साक्षी के बारे में बताना ज़रूरी था.

सोनू : “चलो,ये तो अच्छी बात है की तुम भी अब यहीं आ गयी… बट एक बात मैं तुम्हे बताना चाहता हूँ !! ”

पर वो बोल पता इससे पहले ही तनवी बोल पड़ी : “अपनी सेट्टिंग साक्षी के बारे में ना… मुझे पता है…. डोंट वरी…”

सोनू अवाक सा होकर उसे देखकता रह गया… यानी सोनिया ने उसे सब बता दिया था.

तनवी : “एंड डोंट वरी सोनू, मैं तुम्हारे और साक्षी के बीच नही आने वाली….बस मेरा थोड़ा एक्सट्रा ख्याल रख लेना..”

इतना कहते हुए उसने सोनू को किसी चालू लड़की की तरह आँख मार दी..
और अपना हाथ भी जो अभी तक सोनू के हाथ में था, उसे थोडा दबा सा दिया.

तभी पीछे से साक्षी आ गयी…
सोनू का हाथ अभी तक तनवी के हाथ में था…
उसने हड़बड़ाते हुए अपना हाथ छुड़ाया…
पर साक्षी तब तक वो देख चुकी थी…
और उसके चेहरे के एक्शप्रेशन सब बयान कर रहे थे…

पर वो कुछ बोल पाती उससे पहले ही तनवी बोल पड़ी : “हाई साक्षी….कैसी हो… अभी सोनू तुम्हारे बारे में ही बता रहा था… तुम दोनो के बारे में मुझे सब पता है… मैं इसकी सिस्टर सोनिया की बेस्ट फ्रेंड तनवी हूँ … एंड तुम दोनो इस बात की फ़िक्र ना करो, मैं ये बात किसी को नही बताउंगी … इनफेक्ट कभी मेरी कोई हेल्प चाहिए हो तो बता देना…. ओके बाइ… मैं चलती हूँ ….मेरा पहला दिन है आज…और मैं अपनी क्लास मिस नही करना चाहती”

इतना कहकर वो भागती हुई अपनी क्लास में चली गयी…
सोनू ने भी आराम से उसे सब समझाया..
शुक्र था की वो सोनू की बात समझ गयी.

पर तब तक साक्षी के दिमाग़ में एक प्लान आ चुका था….
जिस अंदाज से तनवी ने उन्हे किसी भी तरह की हेल्प करने की पेशकश की थी, साक्षी का दिमाग़ उसी बात को लेकर घूम रहा था…
इसलिए अगले पीरियड से पहले वो तनवी से मिलकर आई और उसने अपने प्लान के बारे में उसे बताया…
और उससे हेल्प करने की बात कही…
वो बाते करते हुए दोनो के चेहरों पर शैतानी मुस्कुराहट थी.

स्कूल का हाफ टाइम होने पर साक्षी ने सोनू से कहा की अगला पीरियड बंक कर देना…
कुछ काम है तुमसे.

सोनू ने सोचा की शायद वो उससे कोई बात करना चाहती है…
इसलिए उसने भी बिना सोचे समझे हाँ कर दी..

अगले पीरियड के टाइम वो उसका हाथ पकड़ कर उपर ले जाने लगी तो सोनू ने उसे टोका… यानी स्कूल के टॉप फ्लोर पर.
पर वो उसे लगभग घसिट्टी हुई उपर वाले फ्लोर पर ले गयी…
उस फ्लोर में कोई क्लास नही लगती थी..
सोनू ये तो समझ चुका था की वो क्या करना चाहती है, पर उसे डर था की कोई ना कोई वहां आकर उन्हे देख लेगा..
पर उपर पहुँचने के बाद उसने जब तनवी को वहां देखा तो उसका चेहरा फिर से चकित हो उठा.

साक्षी : “डोंट वरी…. कोई नही आएगा… और कोई आया तो साक्षी बाहर ही है, हमें बता देगी…”

इतना शरारत भरा आइडिया साक्षी का ही हो सकता था…
उसे वैसे भी इस तरह के एडवेंचर करने में काफ़ी मज़े आते थे…
तनवी को अपनी तरफ मिला कर वो उससे चोकीदारी करवाना चाहती थी…
पर जो भी था, अब तक सोनू का लंड बुरी तरह से खड़ा हो चुका था.

 

क्लास में घुसते ही दोनो एक दूसरे को बेतहाशा चूमने लगे…
चूसने लगे…
एक दूसरे को चूमते हुए दोनोके चेहरे पर एक प्यार भरी मुस्कान थी

सोनू उसके हर अंग को दबा दबा कर उसके शरीर का नाप लेने में लगा था…
साक्षी भी बिफरी हुई बकरी की तरह उसके हर हमले से काँप सी जाती और उससे और बुरी तहर से लिपट कर चूमने लगती…

ये सारा नज़ारा बाहर खड़ी तनवी बड़े चाव से देख रही थी….
उसका खुद का हाथ अपनी छाती पर था…
अपनी अविकसित छातियों को मसल-2 कर वो उनकी रासलीला देख रही थी.

वो सब देखते हुए उसे कल की बाते याद आ रही थी जब यही सोनू उसके नन्हे-2 निप्पलों को मुँह में लेकर किसी बच्चे की तरह उसका दूध पी रहा था…
वो पल याद आते ही उसके तन बदन में एक कसक सी उठी, जो एक सिसकारी के रूप में बाहर निकल आई.

साक्षी को तो नही, पर सोनू को वो सिसकारी सुनाई दे गयी….
और जब उसने उसकी तरफ देखा तो दोनो की नज़र मिलते ही एक अजीब सी फीलिंग आई दोनो के मन में ….
पर उस फीलिंग को अभी बयान करना पोस्सिबल नही था.

और ना जाने क्यो, इस वक़्त साक्षी से ज़्यादा सोनू का ध्यान तनवी की तरफ था…
हालाँकि कल ही उसके साथ उसने काफ़ी मज़े लिए थे, पर एक अधूरी सी प्यास जो रह गयी थी, वो उसके मन में अभी तक अटकी सी पड़ी थी.

इसी बीच साक्षी ने सोनू के लंड को पकड़ कर ज़ोर से मसल दिया और उसके सामने बैठ कर उसकी जीप खोलने लगी…
उसे इस बात से कोई फ़र्क नही पड़ रहा था की बाहर खड़ी तनवी उन्हे देख रही होगी, उसे तो बस इस वक़्त किसी भी कीमत पर सोनू का लंड चूसना था…जिसके लिए वो ना जाने कब से तड़प रही थी…

जैसे ही वो लंड बाहर आया, साक्षी के साथ-2 तनवी के मुँह में भी पानी भर गया….
कल तो वो सोनू के लंड को सिर्फ़ पकड़ ही पाई थी, ना तो उसे देखा था और ना ही उसे चूमा या चूसा था…
अब उसे सच में साक्षी से ईर्ष्या सी हो रही थी….
वो सोनू के लंड को पूरा बाहर निकाल चुकी थी और उसपर गीली-2 पप्पियाँ देने में लगी थी….
जब उसका लंड पूरा खड़ा हो गया तो उसे वो अपने चेहरे पर किसी डंडे की तरह मारने लगी….
पर जैसे ही उसने अपना मुँह बड़ा करके उसे अंदर लेना चाहा, तनवी चीख पड़ी : “कोई आ रहा है….. जल्दी बंद करो….”

साक्षी और सोनू के तो होश ही उड़ गये…
दोनो ने आनन-फानन में अपने कपड़े ठीक किए और बाहर निकल आए…
तब तक तनवी वहां से निकल कर सीडियां उतर चुकी थी.

बाहर कोई आया ही नही था….
ये सब तनवी की जलन का परिणाम था, जो लंड उसके मुँह में नही जा पाया वो भला साक्षी के मुँह में जाता हुआ कैसे देख सकती थी.

पर एक बात तो उसने सोच ही ली थी की आज किसी भी कीमत पर वो उसके लंड को चूस कर रहेगी.

स्कूल के बाद तनवी और सोनू एक साथ ही निकले…
दोनो का घर एक तरफ ही था. आज उन्होंने रिक्शा नहीं किया, पेडल ही चल दिए.

रास्ते मे सोनू ने उससे पूछा : “वहां कोई नही आया था ना…”

तनवी चुप रही

सोनू : “बोलो, कोई नही था ना….”

तनवी : “नही…”

सोनू : “फिर क्यो बोला तुमने… मैने कहा था ना की हमारे बीच जो भी है वो अलग है, साक्षी से तो तुम्हे कोई प्राब्लम थी ही नही, फिर ऐसा क्यों किया”

वो चलते-2 रुक गयी और सोनू को देखकर बोली : “वो सिर्फ़ इसलिए की जो काम मैं नही कर पाई, वो करने जा रही थी… एक बार मैं कर लू, फिर वो चाहे जितनी बार भी करे, मुझे कोई फ़र्क नही पड़ता…”

सोनू : “कौन सा काम….”

तनवी ने आस पास देखा, कोई भी नही था… वो उसके और करीब आई और सीधा उसके लंड को पकड़ कर बोली : “ये वाला…सकिंग का…”

सोनू डर सा गया….
कैसी डेयरिंग थी इस लड़की में …
कल से आज तक इसके रंग कैसे बदल से गये थे…
सरेआम उसके लंड को पकड़ कर बोल रही थी की उसे चूसना है.

और इससे पहले वो उसे कुछ बोल पता, तनवी ने उसका हाथ पकड़ा और उसे लेकर सड़क के साइड में बने एक चर्च की तरफ ले जाने लगी.

ये काफ़ी पुराना सा चर्च था…सोनू अक्सर शाम को उसके सामने बने मैदान में अपने दोस्तों के साथ क्रिकेट खेलने जाया करता था.

सोनू बोलता रह गया पर तनवी ने उसकी एक ना सुनी और उसे लगभग घसीटती हुई सी चर्च के पीछे की तरफ ले आई….
ये एक सुनसान सा इलाक़ा था…
सिर्फ़ चर्च के उपर बनी खिड़कियो से ही वहां देखा जा सकता था…
पर इस वक़्त चर्च में कोई नही था, इसलिए वहां से किसी के देखने का सवाल ही नही था.

सोनू समझ गया की जबसे तनवी ने उन्हे क्लास मे देखा था, तभी से उसके अंदर खुरक हो रही है.

अब शायद वो अपना वो काम करके रहेगी, जिसके लिए उसे साक्षी से जलन हो रही थी.

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