अब आगे
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अब तो तनवी से ज़रा भी सब्र नही हो रहा था….
उसे किसी भी कीमत पर सोनू का लंड चूसना था…
उसका गला तर हो रहा था ये सोचकर ही की उसमें अब सोनू का लंड जाएगा…
वो उठ कर बेड से नीचे आ गयी…. और सोनू के सामने आकर बैठ गयी…
सोनू की नज़रें एक पल के लिए तनवी की तरफ गयी और फिर जब उसने अपना सिर उसके लंड की तरफ झुका दिया तो उसने उपर की तरफ देखा, जहां से उसकी बहन उन्हे वो सब करते हुए देख रही थी… तनवी ने ऊपर से ही उसके लैंड पर एक किस्स की और फिर उसकी जीप खोलकर अपना हाथ अंदर डाल दिया…
एक पल के लिए तो दोनों लड़कियों का दिल धड़कना ही भूल गया…
तनवी का इसलिए की उसने सोनू का धधकता हुआ लंड अपने हाथ में पकड़ लिया था…
और सोनिया का इसलिए की उस एहसास को उसने खुद महसूस किया था…
और ये भी सोचा की काश वो पकड़ पाती सोनू के लंड को इस वक़्त…
पर अभी के लिए वो कम से कम उसे देख तो सकेगी…
पहली बार…
अपने भाई के लंड को….
भले ही दूर से..
पर देख तो सकेगी.
पर अभी के लिए शायद उपर वाले को ये भी मंजूर नही था…
कार से निकलकर उनकी मॉम दरवाजे पर पहुँच गयी और उन्होने बेल बजाई.
एक ही पल में अफ़रा तफ़री सी मच गयी….
सोनू ने हड़बड़ाते हुए उसके हाथ को बाहर निकाला और जीप बंद की….
सोनिया तो इतना डर गयी की बेल की आवाज़ सुनते ही उसका शरीर काँप सा गया… और उसका बेलेन्स बिगड़ गया जिसकी वजह से वो धड़ाम से नीचे आ गिरी.
अपने कपड़े पहनती तनवी ने जब साथ वाले स्टोर से वो आवाज़ सुनी तो उसने सोनू की तरफ देखा
वो बोला : “कुछ नही… शायद बिल्ली होगी…. चूहे काफ़ी है ना स्टोर में , इसलिए बिल्ली वहां अक्सर घुस जाती है… तुम जल्दी से कपड़े पहनो…. मोंम आ चुकी है…”
उधर गिरने के बाद, एक पैर से लड़खड़ाती हुई सोनिया किसी तरह से नीचे पहुँची और दरवाजा खोला… उसके चेहरे के उड़े हुए रंग देखकर उसकी माँ परेशान हो गयी.
”हे बेबी…. क्या हुआ….. सब ठीक तो है ना….”
दर्द की वजह से सोनिया से खड़ा नही हुआ जा रहा था… वो सोफे पर बैठ गयी और अपना पैर पकड़ कर सुबकने लगी…
उसकी मोंम को काफ़ी चिंता हो गयी… सोनिया ने बताया की बेल सुनकर वो जब नीचे आ रही थी तो सीडियो पर पैर टेडा हो गया… और शायद मोच आ गयी है..
मों : “ओह्ह्ह माय बैबी…. आराम से आना चाहिए था ना… और वो कहां है… सोनू…”
वो शायद उसे डाँटने के लिए तैयार हो रही थी… और उसी वक़्त अपना हुलिया ठीक करके सोनू और तनवी नीचे आ गये..
सोनिया की मोंम ने तनवी को देखा…
जैसे कुछ समझने की कोशिश कर रही हो….
उसी की वजह से पहले भी सोनिया को काफ़ी डांट पड़ती थी…
जिसकी वजह से बाद में सोनिया को होस्टल जाना पड़ा था…
पर वो इस वक़्त कुछ नही बोली…
और सोनिया के लिए अंदर से दवाई लाने चली गयी…
पर उनके हाव भाव से सॉफ पता चल रहा था की उन्हे इस वक़्त सोनू और तनवी पर काफ़ी गुस्सा आ रहा था.
सोनिया ने तुरंत तनवी को घर जाने को कहा, ताकि उसकी माँ का मूड और खराब ना हो…
पर जाते-2 भी तनवी की हिम्मत तो देखो, उसने करीब आकर झट्ट से एक किस्स सोनू के होंठों पर की और उन्हे बाइ बोलती हुई बाहर निकल गयी…
सोनिया ने जब घूरकर सोनू को देखा तो उसने झेंपते हुए अपना सिर घुमा लिया…
पर अगले ही पल वो उसके करीब आया और उसके पैरों को पकड़कर अपनी गोद में रखा और धीरे-2 उन्हे दबाने लगा.. चिंता के भाव साफ़ नजर आ रहे थे
इसी बीच सोनिया की माँ आईओडेक्स ले आई और सोनू को कहा की वो अपनी बहन के पैरों पर उसे लगाए…
उसे भला क्या प्राब्लम हो सकती थी, उसने बॉम लगानी शुरू कर दी..
हल्की मोच थी, इसका आश्वासन करके उनकी माँ कपड़े चेंज करने अपने रूम में चली गयी…
सोनू अपनी बहन के पैरों मे मरहम लगाने लगा…
हर बार हाथ लगने से वो ऐसे कराह उठती जैसे उसकी चूत में लंड जा रहा हो..
सोनू मन ही मन ये सोचकर मुस्कुरा रहा था की जब असली में इसकी चुदाई होगी तो कितना चिल्लाएगी ये…
उसे मुस्कुराता हुआ देखकर वो बोली : “बड़ी हँसी आ रही है…. तनवी की कोई बात याद करके हंस रहा है ना…”
उसने मुस्कुराते हुए सोनिया को देखा और बोला : “अब इतना भी कुछ ख़ास नही है… नॉर्मल सी थी…. तुमने भी देखा ना…”
सोनिया बुदबुदाई : “हाँ ….सब देखा…. आज अगर मोंम ना आई होती तो पता नही तुम दोनो क्या कर र्बैठते… ”
सोनू : “अब इतना भी पागल नही हूँ मैं की पहली ही बार में फक… आई मीन… सब कुछ कर लू…”
सोनिया आँखे नचाते हुए बोली : “पर जो किया था, वो भी कम नही था…. कैसे उसे अपने फेस के उपर बिठा कर चपड़ -2 करके चाट रहा था….छी:….कितने गंदे हो तुम”
उसने उसके पैरों को उमेठते हुए कहा : “अच्छा जी…. यानी ये सब तुम्हे गंदा लगता है…. वहाँ की सकिंग करवाना …या करना….. ह्म्म्म …”
सोनू ने ये कहकर एकदम से उसे चुप सा करा दिया….
अब भला वो क्या बोलती की वो सब उसे क्यो बुरा लग रहा था….
उसके खुद के साथ हुआ होता तो अच्छा लगता ना, तनवी के साथ क्यों किया सोनू ने, बस इस बात का गुस्सा था उसे…पर वो बोलती भी कैसे, उनकी मीटिंग उसी ने तो अर्रेंज कराई थी
वो चुप सी हो गयी`….
तब तक उनकी मॉम वापिस आ गयी , उन्होने हॉट वॉटर बॉटल से उसकी सिकाई करनी शुरू कर दी..और तब तक करती रही जब तक उसे आराम नही आ गया…
डिन्नर के बाद उनकी मॉम ने आईओडेक्स सोनू को देते हुए कहा की सोने से पहले एक बार और मालिश कर देना अपनी बहन की…
सोनू ने आईओडेक्स ली और सोनिया का हाथ पकड़कर उपर जाते हुए धीर से बोला : “चलो दी…. आपकी मालिश कर दूँ ….”
दोनो के चेहरे पर अर्थपूर्ण मुस्कान थी.
वो अभी भी लंगड़ा कर चल रही थी…
इसलिए सोनू ने उसे अपनी बाजू का सहारा दिया, ताकि वो आसानी से उपर जा सके..
हालाँकि उसकी माँ ने कहा था की उपर चड़ने में तकलीफ़ है तो नीचे ही सो जा, पर आज की रात वो भला कैसे नीचे सो जाती…
आज तो उसे सोनू से काफ़ी बातों का जवाब लेना था.
रूम में आने के बाद दोनो ने अपने-२ कपडे चेंज किये, सोनिया ने टी शर्ट और एक कॉटन की स्कर्ट पेहेन ली, सोनू ने सेंडो के साथ शॉर्ट्स
उन्होंने कुछ देर इधर- उधर की बात की…
अपने-2 मोबाइल्स देखे…
और जब 11 बजे उनकी माँ ने उपर आकर सोनिया का हाल चल एक बार और पूछा…
और सोनू से कहा भी की अब उसे बॉम लगा दे…
फिर गुड नाइट बोलकर वो नीचे चली गयी.
उसके पैर को अपनी गोद में रखकर वो उसपर बॉम लगाकर मालिश करने लगा..
सोनिया के चिकने पैरों की बनावट देखकर सोनू को कुछ-2 हो रहा था…
सोनिया भी अपने भाई के लंड की गर्माहट अपने तलवों पर महसूस कर पा रही थी..
उसके दिमाग़ में इस वक़्त वही सब घूम रहा था जो कुछ घंटो पहले इसी बेड पर चल रहा था….
वो सोच रही थी की क्या उसमें इतनी हिम्मत आ पाएगी कभी की वो सोनू के साथ वो सब कर सके….
उन्हे करते हुए देखना और सोचना अलग बात थी…
पर उसे करने के लिए जो हिम्मत चाहिए थी, वो पता नही उसमे कभी आ पाएगी या नही…
अपने रीति रिवाजों की बेड़ियां तोड़कर वो इन रिश्तों के बंधन से मुक्त हो पाएगी या नही…
अपने भाई के ‘ये ग़लत है’ तर्क का वो जवाब तो बड़ी आसानी से दे देती थी…
पर वो ‘ग़लत’ काम वो खुद कर पाएगी या नही…..
अनेकों उलझने थी उसके मन में ..
पर अब उन उलझनों को सुलझाने का वक़्त आ चुका था…
वो ऐसे ही बैठकर या रोशनदान से छुपकर तमाशा देखना नही चाहती थी…
उसे ही अपनी तरफ से पहल करनी होगी…
समाज की इन बेड़ियों को उसे ही उतारकर फेंकना होगा..
अपने भाई को भी उसे ही समझना होगा…..
उसे अपनी जैसी मानसिकता में ढालना होगा…
ताकि वो उनके नये रिश्ते को ‘ये ग़लत है’ ना कह सके.
सोनिया के मन में चल रही बातों से बेख़बर सोनू अपनी ही धुन में उसकी मांसल टांगो को निहारने में लगा था…
पहले और अब में उसके अंदर काफ़ी बदलाव आ चुके थे…
अपनी बहन को देखने के नज़रिए में , उसके साथ कुछ करने की सोच में और अपने हर सैक्स एडवेंचर में उसके बारे में सोचने की आदत में काफ़ी बदलाव आए थे…
पर इन सब बातों का पता अब तक सोनिया को नही था…
वरना इतनी देर से जो अंतर्द्वंद उसके मन में चल रहा था, वो कब का ख़त्म हो जाता….
और सोनिया अभी के अभी वो सब कर देती जिसके लिए उसका मन उसे उकसा रहा था…
ललचा रहा था.
पर उसे कुछ तो करना ही था… और इसके लिए आज से अच्छा मौका उसे मिल ही नही सकता था…
वो सोनू से बोली : “यार…. मेरे घुटने में भी लगी थी…. थोड़ा यहाँ भी मालिश कर दे…”
वो तो कब से इसी फिराक़ में था की थोड़ा उपर हाथ लगाए…
सोनिया के कहने की देर थी और उसने अपने हाथ उपर खिसकाने शुरू कर दिए…
और वो साला ऐसा हरामी निकला की अपने हाथ सीधे घुटनो पर नही रखे..बल्कि उसकी पिंडलियों को सहलाता हुआ, उन्हे दबाता हुआ, धीरे – २ उपर तक गया…
उसकी कड़क पिंदलियों की मछलियाँ महसूस करके उसके मन में गुदगुदी सी हो रही थी..
और जब घुटने पर हाथ रखा तो सोनिया के मुँह से एक बार फिर से वही सिसकारी निकल गयी जैसे नीचे निकली थी… पर इस बार सिसकारी में दर्द का एहसास कम था, मादकता का ज़्यादा.
”सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स…. उम्म्म्मममममममममम…”
और वो इसलिए क्योंकि उसके घुटने पर कोई चोट लगी ही नही थी…
सोनू की उंगलियों को इतने उपर महसूस करके उसका शरीर काँपने सा लगा.
सोनू ने उसकी टाँग को उठाकर अपनी जाँघ पर रख लिया… दोनो की नंगी टांगे आपस में घर्षण सा करने लगी…
सोनू जिस अंदाज में उसके घुटनों की मालिश कर रहा था, ऐसा लग रहा था की दोनो किसी ट्रेन में बैठे है…
और दोनो के शरीर एक ही मोशन में आगे पीछे हो रहे थे.
सोनू ने थोड़ी हिम्मत अपनी तरफ से भी दिखाई और अपनी लंबी उंगलियों को फेलाकर उसने उसकी जाँघ को भी सहलाना शुरू कर दिया..
”आआआआआआआअहह ऐसे ही करो…सोनू….. धीरे-2 …”
यानी की उसे भी कोई आपत्ति नही थी की वो उसकी जांघे सहला रहा है…
जैसे-2 सोनू की उंगलियाँ उपर जा रही थी, एक अजीब सी तपिश का एहसास हो रहा था उसे…
कमरे में इतनी गर्मी तो नही थी… पर वहां हाथ रखकर उसे गर्मी लग रही थी…
शायद इसलिए लड़कियों को हॉट कहा जाता है क्योंकि उनमे से इतनी गर्मी जो निकलती है.
धीरे-2 सोनू का हाथ उसकी स्कर्ट के अंदर जाने लगा…
आज पता नही उसके अंदर ये हिम्मत कहा से आ रही थी, पर जो भी हो रहा था उससे सोनिया को बहुत मज़ा आ रहा था… उसकी तो मन की मुराद जैसे पूरी हो रही थी…
सोनू ने जब देखा की सोनिया ने तो अपनी आँखे बंद कर रखी है तो उसने उसकी स्कर्ट को पकड़ कर बिल्कुल उपर कर दिया… ये सोचकर की जब इतना हो ही चुका है तो सोनिया की पेंटी भी देख ली जाए…
पर ऐसा करने के बाद उसे लाइफ का सबसे बड़ा झटका लगा…
सोनिया ने पेंटी पहनी ही नही थी..
जैसे की उसकी आदत थी, सोते समय वो अंडरगार्मेंट्स उतार देती थी, आज भी ऐसा ही हुआ…
और सोनू के सामने थी सोनिया की नंगी चूत.
अपनी बहन की कच्ची चूत को देखकर वो हक्का बक्का सा रह गया…
सोनिया को भी ये एहसास हो चुका था की उसकी कुँवारी चूत से परदा उठ चुका है…
इसलिए उसने मुस्कुराते हुए अपनी आँखे खोल दी.
सोनिया : “क्या हुआ सोनू…. रुक क्यों गया …. करता रह ना, इतना मज़ा आ रहा था….”
जब गहरी साँसे लेते हुए सोनिया ने ये बात बोली तो सोनू समझ गया की वो जान चुकी है की सोनू ने उसकी सबसे कीमती चीज़ देख ली है….
इससे पहले की उसके मन में एक बार फिर से सिद्धांतो की लड़ाई शुरू हो, सोनू ने तुरंत अपने हाथों की थिरकन उसकी चिकनी जाँघ पर फिर से शुरू कर दी.
सोनिया ने आँखे फिर से बंद कर ली…
उसकी बंद आँखो के पीछे फिर से वही झरोखे वाला सीन दिखने लगा….
जिसमें सोनू उसकी फ्रेंड तनवी की चूत सहला रहा था….
फ़र्क सिर्फ़ ये था की इस वक़्त सोनिया को तनवी के बदले खुद का चेहरा दिखाई दे रहा था…
बिस्तर भी वही था…. सोनू भी वही था…. इसलिए तनवी भी वो खुद ही बन गयी.
उसने सोनू के हाथ को पकड़कर अपनी जाँघ पर और ज़ोर से दबा दिया….. और फुसफुसाई : “कैसा लग रहा है ….”
सोनू : “ह्म्*म्म्म….. ठीक….. तुम्हे….?”
सोनिया ने जवाब मे उसके हाथ को थोड़ा और उपर खिसका दिया…..
और एक मादक सी अंगड़ाई लेती हुई वो पीछे की तरफ लूड़क गयी….
अब वो अपने बिस्तर पर लेटी हुई, अपनी नंगी चूत के दर्शन कराती हुई, सोनू के सामने पड़ी थी…
जैसे कह रही हो की ‘आ जा मेरे भाई… कर ले अपने मन की इच्छा पूरी…. जो भी करना है… कर ले…. ‘ये ग़लत नही है’….”
पर उसके मन की बाते भला वो कैसे सुनता….
हालाँकि वो समझ तो चुका था की सोनिया उसे खुला निमंत्रण दे रही है की उसकी चूत को पकड़ कर मसल दे, पर ऐसा करने में उसके हाथ काँप रहे थे….
तनवी के साथ हालाँकि उसने पहली बार किया था, पर वो काम उसने आसानी से कर दिया था….
सोनिया की चूत पर हाथ लगाने में उसे झिझक सी हो रही थी..
पर उसकी इस झिझक को सोनिया ने ही ख़त्म कर दिया….
उसने सोनू का हाथ पकड़ा और अपनी धधक रही चूत पर रख कर ज़ोर से दबा दिया….
दोनो भाई-बहन के मुँह से एकसाथ सिसकारी निकली.
सोनिया को तो ऐसा लगा की उसकी चूत से लावा निकल कर बाहर आ जाएगा….
और सोनू को उस लावे की गर्मी के एहसास ने झुलसा कर रख दिया….
सोनिया ने अपनी स्कर्ट को पूरा उपर खींच लिया… और अपनी छूट के उपर हाथ रखकर उसे मसलने लगी…. सोनू ने अपनी एक उंगली उसकी चूत में डाल दी….
”आआआआआआआआआआहह ओह एसस्स्स्स्स्स्स्स्सस्स….”
ये ठंडी सिसकारी इस बात का संकेत था की सोनिया को अपनी चूत में भाई की उंगली का एहसास बहुत अच्छा लगा है….
बस फिर क्या था, भाई ने एक और उंगल डाल दी अंदर….
ऐसा लग रहा था की उस छोटी सी चूत में वो दोनो उंगलियाँ जाकर फँस गयी है….
पर अंदर से निकल रहे लुब्रीकेट ने वो घिसाई का काम आसान कर दिया…
और जल्द ही वो उसकी चूत में तेज़ी से उंगलियाँ अंदर बाहर करने लगा…..
सोनिया ने उपर वाले हिस्से को संभाल रखा था और सोनू ने अंदर वाले को.
और जल्द ही वो लावा बाहर निकल आया जो काफ़ी देर से उसके अंदर उबल रहा था
सोनिया के लिए ये एहसास ही बहुत था की आज लाइफ मे पहली बार उसकी चूत को किसी ने टच किया है…
और वो उसका खुद का सगा भाई है…
इसी बात ने उसके अंदर एक जबरदस्त ऑर्गॅज़म को बनाकर बाहर धकेल दिया….
और सोनू के हाथ उसकी चूत से निकले नारियल पानी से सन गये.
”आआआआआआआआअहह ओफफफफफफफफफफफफफफफफफ्फ़ सोनू……. उम्म्म्मममममममममममम…..”
उसने उपर उठते हुए सोनू को अपनी बाहों में ज़ोर से जकड़ लिया….
बड़ा अजीब सा एंगल बना हुआ था….
वो उसकी गोद में अधलेटी हुई सी उसके सीने से लगी हुई गहरी साँसे ले रही थी…
सोनू का हाथ अभी तक उसकी चूत पर ही था…..
और दूसरा हाथ उसकी पीठ सहला रहा था.
रोज रात को एक दूसरे के साथ मास्टरबेट करने वाले दोनो भाई बहन एक दूसरे से लिपटे हुए थे….
वो एक कदम और आगे बढ़ चुके थे.
सोनू सोच ही रहा था की कैसे अपना हाथ निकालकर वहां से उठे और अपने बेड पर जाए की तभी उसे एहसास हुआ की सोनिया का हाथ उसकी जाँघो से होता हुआ उसके लंड के ठीक उपर आकर रुक गया…
सोनू ने एकदम से अपनी गले लगी बहन को थोड़ा पीछे किया और उसके चेहरे को फटी आँखो से देखने लगा…
पर उसके मुँह से कुछ निकला ही नही…
सोनिया उसके खड़े हुए लंड को अपने हाथ में पकड़ कर धीरे से बोली : “अब मेरी बारी….”




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