अब आगे
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दूसरी तरफ, जब सोनिया की नींद खुली तो सुबह के 11 बजने वाले थे….
ऐसी गहरी नींद की तो उसे आदत थी…
ख़ासकर जब उसकी छुट्टियां चल रही हो.
वो एक मादकता से भरी अंगड़ाई लेकर उठ बैठी…
उसका टॉप बूब्स के उपर चड़ा हुआ था…
रात को सोते वक़्त उसने निक्कर भी उतार दी थी, इसलिए नीचे सिर्फ़ एक पेंटी थी…
सोनिया ने अपनी टॉप उतार फेंकी और अपनी आँखे मलते हुए शीशे के सामने जाकर खड़ी हो गयी…
हुस्न से लदे अपने जवान जिस्म को देखकर उसे रश्क सा आ गया…
और रात की बाते याद करके एक बेचैनी भी…
तभी उसे जैसे कुछ याद आया ….
और वो पलट कर ज़मीन पर कुछ तलाशने लगी…
और वो था उसके भाई के लंड से निकला रस…
जो सोनू ने उसकी तरफ देखकर झाड़ा था.
उसे ज़मीन पर उसके वीर्य के सूखे निशान मिल ही गये…
वो अंदाज़ा लगाने की कोशिश करने लगी की वो कहां खड़ा था….
और फिर ना जाने किस आवेश में वो भर गयी की ठीक उसी लकीर पर लेट गयी , जो उसके लंड से निकले रस से बनी थी….
और उसकी आँखो ने अपने सामने वो देखना शुरू कर दिया, जो वो देखना चाहती थी…
अपने नंगे भाई को लंड हिलाते हुए.
वो ठंडे फर्श पर लेटी हुई, अपनी चूत को रगड़ने लगी…
और अपने पैरों से कुछ दूर उसे सोनू भी दिखाई देने लगा…
ठीक उसी अवस्था में…
अपनी नशे से भरी आँखो से उसे सोनू अपने पैरों के पास खड़ा हुआ दिखाई दे रहा था…
अपना लंड हिलाता हुआ.
बस फिर क्या था
वो बावली सी हो गयी
अपनी पेंटी और ब्रा को उसने नोच कर फेंक डाला
और ‘अभी के लिए लंड समान’ अपनी उंगलियों को चूत में डालकर खुद को ही चोदने लगी.
वो जानती थी की इस वक़्त घर में उसके सिवा कोई नही है…
इसलिए जितना चाहे वो चिल्ला भी सकती थी.
”आआआआआआआआआआआहह……. सोन्नूऊऊुुउउ……. उम्म्म्मममममममममम”
अपनी उंगलियों से उसने चूत की अंदरूनी दीवारों को रगड़ डाला…
उसे ऐसा महसूस हो रहा था जैसे वो उंगलियाँ जीभ की तरह उसकी चूत को चाट रही है.
काश ऐसे ही किसी दिन उसका भाई उसकी चूत को चाट ले.
उसका शरीर तीरकमान की तरह हवा में उठ गया….
और वो जोर से चिल्लाई
”तो चाटsssss ना…… रोका किसने है सोनू…… सकक्क माय पुस्स्सी………. भेनचोदsssss”
एक हाथ से अपनी छाती को दबाते हुए उसने दो उंगलियों से अपनी चूत की मालिश तेज़ी से करनी शुरू कर दी
वो फर्श के उपर, अपने भाई के सूखे वीर्य पर, किसी नागिन की तरह मचल रही थी…..
लहरा रही थी…
नाच रही थी..
लोटनियां मार कर उस सूखे वीर्य को अपने जिस्म की गर्मी से पिघला कर फिर से जिंदा कर रही थी.
और इस बीच उसे सोनू भी दिख रहा था…जैसे किसी लेटेस्ट टेक्नालाजी से उसने प्रोजेक्टर चला कर उसे सामने खड़ा कर रखा हो…
”साआले………. कैसे मुझे देखकर मास्टरबेट कर रहा था….. उम्म्म्ममममम… अब क्या हुआ……. तेरे अहह असूलों को…….. उम्म्म्मममममम वो….. भाई बहन…. वाले…….. डायलोग को……. साला ……. हर मर्द बस……. इसी का दीवाना है…….. फिर वो….. चाहे….. भाई हो ……. या कोई और……… अब….तो ….तुझे …… ये सब….. ग़लत नही लगता ना…….. बोल साले…… भेनचोद …….. अहह बोल ना……… चाट ना……… ”
वो अपनी ही धुन में बुदबुदाती हुई……
अपने भाई को सामने खड़े होकर मूठ मारते हुए देखकर…..
अपनी फुददी को मसलती चली गयी…..
और अंत में आकर….
उसकी चूत से गर्म पानी का फव्वारा सा निकला…….
जो ठीक उसी तरह से उछल कर दूर तक गया…
जैसे कल रात सोनू के लंड की पिचकारी उस तक आई थी.
अपनी चूत की पिचकारी की धार का उसे आज पता चला.
उसके बाद चूत से निकला नर्म और गर्म पानी निकल कर उसकी जांघो की तरफ जाने लगा.
और ठीक उसी वक़्त उसके सामने मुठ मार रहे सोनू के लंड से भी पिचकारी निकल कर उसके पूरे शरीर पर पड़ी.
भले ही ये सब उसके जहन में चल रहा था…
पर अपने बदन पर उसके सफेद रस की बूंदे उसने सॉफ महसूस की.
ऐसा लगा जैसे तपते रेगिस्तान में ठंडे पानी की बौछार पड़ गयी हो.
और अपनी गीली उंगलियों को उसने खुद ही चाट लिया….
सोनू के लंड का रस समझकर.
और वो कसमसाते हुए ज़मीन पर मचलती हुई अपने ऑर्गॅज़म से उभरने की कोशिश करने लगी
और उठने की भरसकर कोशिश करते हुए वो 1-2 बार लड़खड़ा भी गयी….
ऐसे ऑर्गॅज़म के बाद कमज़ोरी आना स्वाभाविक ही है.
वो मुस्कुराइ और बोली : “साले सोनू…. तू मुझे मरवाएगा एक दिन…. ऐसा ही चलता रहा तो तुझे मोंम के सामने ही पकड़ कर चाट जाउंगी किसी दिन…”
और लड़खड़ाते हुए पैरों से बाथरूम की तरफ चल दी…
फ्रेश होने के बाद , नहा धोकर वो ऐसे ही नंगी बाहर निकल आई….
उसका मन तो कर रहा था की आज वो कुछ पहने ही नही…
जब सोनू घर आए तो उसका स्वागत ऐसे ही नंगी होकर करे…
ऐसी नॉटी बातें उसके दिमाग़ में अक्सर आया करती थी….
वो सोचने लगी की कब उसकी लाइफ में ऐसा मौका आएगा जब वो अपने मन की बात पूरी कर सकेगी.
वो ये सोच ही रही थी की उसके मोबाइल की घंटी बज उठी….ये तनवी का फोन था.
तनवी : “हाय …कैसी है तू….”
सोनिया : “बस…. मज़े में …. तू सुना…. आज स्कूल नही गयी क्या….?”
तनवी : “नही यार… आज मैने छुट्टी मार ली…. शाम की तैयारी जो करनी थी…”
सोनिया : “ओये होये…. क्या बात है…. तैयारी तो ऐसे बोल रही है जैसे तेरी फर्स्ट नाइट हो…”
तनवी : “शायद हो भी जाए मेरी फर्स्ट नाइट…”
ना जाने सोनिया के बदन में ये सुनकर आग सी लग गयी.
वो तड़प कर बोली : “ओये…रेहन दे…. मेरे भाई को फँसाने के काम ना कर तू ऐसे…. समझी….”
तनवी को भी शायद सोनिया से ऐसे बर्ताव की उम्मीद नही थी….
एक पल के लिए तो वो भी चुप सी हो गयी….
पर तब तक सोनिया संभल चुकी थी….
उसे ये एहसास हुआ की वो क्या बोल गयी है.
सोनिया : “अरी पागल…. मेरे कहने का मतलब ये है की ना तो तुझे इस बात की नॉलेज है और ना ही सोनू को…. कुछ गड़बड़ हो गयी तो दोनो फँस जाओगे…. इसलिए मैने ये कहा… बाकी तुम दोनो देख लेना.”
बेचारी तनवी ओके के सिवाए कुछ और ना बोल पाई
सोनिया ने बात घुमाते हुए कहा
“अच्छा , बता ना… कैसी तैयारी कर रही है….”
ये सुनकर तनवी का ध्यान एक बार फिर से अपनी तरफ आ गया…
वो चहकते हुए बोली : “मैने ना… एक न्यू सेट लिया है… ब्रा-पेंटी का…. बड़ा ही सैक्सी है…. और हर जगह के हेयर भी रिमूव कर लिए है…. ही ही…”
सोनिया : “वाव….. नोट बेड …. नोट बेड …. यानी, आज तू पूरी तैयारी करके आ रही है….”
वैसे कहना तो वो ये चाहती थी की ब्रा के लायक तेरी चुचियां है भी नही, फिर ली किसलिए…पर बोली नही..
तनवी (शरमाते हुए) : “हाँ अभी तक तो यही सोचा है…. बाकी तेरे भोंदू भाई के उपर है…. वो कितना आगे तक ले जाता है…. मैं तो कुछ भी करने को रेडी हूँ आज ”
सोनिया : “यार… तू कितनी लक्की है….. काश ये सब मैं भी देख पाती….”
तनवी : “हा हा… बेशरम है तू एक नंबर की…. तेरा भाई है वो…. मेरा और कोई बीएफ होता तो शायद मैं तुझे साथ में बिठा लेती… पर अपने भाई को वो सब करता देखकर तुम तुझे इन्फेक्ट तुम दोनों को कितना ओकवर्ड लगेगा… ये तो सोच ज़रा…”
सोनिया ने मन में सोचा ‘वो तो मैं देख ही लूँगी… सोनू ने मुझे प्रोमिस किया है…. वो अपने प्रोमिस से कभी पीछे नही हटता”
सोनिया : “चल ठीक है फिर…. घर पर बोल कर आना की रात को लेट हो जाएगी… हमने एक साथ स्टडी करनी है…. ओके ”
तनवी : “हाँ , वो तो मैने बोल दिया है…. मम्मी को पता है की आजकल तू आई हुई है… इसलिए उन्होने एक ही बार में परमिशन दे दी… हे हे”
सोनिया : “ओके देन, शाम को मिलते है…. बाइ”
और उसने फोन रख दिया…
फोन रखने के बाद उसने एक बार फिर से अपने नंगे बदन को शीशे के आगे खड़े होकर निहारा…
और धीरे से बुदबुदाई ‘पता नही तनवी में उसे क्या मिलेगा…. असली माल तो मेरे पास है….”
ये कहते हुए उसने अपनी नन्ही और अल्हड़ ब्रेस्ट को पकड़कर निचोड़ डाला….
और अपने हिप्स की मोटाई को दबाकर महसूस करने लगी.
एक नॉर्मल सी टी शर्ट और टाइट जीन्स पहनी.
दोपहर को जब सोनू स्कूल से वापिस आया तो उसके चेहरे की चमक देखकर वो समझ गयी की आज भी साक्षी के साथ उसने कुछ किया है…. पर उसने ज़्यादा पूछा नही उसके बारे में , क्योंकि दोनो को अभी शाम के लिए ज़्यादा एक्साइटमेंट थी.
खाना खाने के बाद सोनिया ने जब उससे पूछा की क्या प्लान है शाम का तो सोनू उसे लेकर उपर आ गया…
और अपने रूम के साथ बने स्टोर रूम का दरवाजा खोलने लगा.
सोनिया चिल्लाई : “अर्रे सोनू, इसे मत खोलना, इसमें तो चूहे भरे पड़े है…”
सोनू : “दी, ऐसा कुछ नही है…. यहाँ सब क्लियर है… वो बचपन में मोंम हमे डराया करती थी, ताकि हम लोग इसमें ना घुस पाए… ट्रस्ट मी, कोई चूहा नही है यहाँ …”
सोनू ने दरवाजा खोला और अंदर आ गया….
छोटे से स्टोर में सब कबाड़ भरा पड़ा था…
सोनू एक टेबल पर चढ़ गया, उपर की दीवार में एक छोटा सा रोशनदान था, जहाँ से सोनू ने उस दिन तनवी और सोनिया की बातें सुनी थी छुप कर..
सोनू ने अपना हाथ बढ़ाकर सोनिया को भी उस स्टूल के उपर खींच लिया.
बिल्कुल पर्फेक्ट जगह थी वो….
उपर के छोटे से जाली वाले रोशनदान से दूसरे कमरे का सब कुछ दिख रहा था…
सोनिया ये देखकर बहुत खुश हुई, उसे अपने भाई का ये प्लान काफी पसंद आया, वहां से वो उन दोनों की रासलीला साफ़ देख सकेगी
सोनिया की हाईट थोड़ी कम थी, इसलिए उसे उचक कर देखना पड़ रहा था…
सोनू ने उसकी कमर पर हाथ रखकर उसे सहारा दिया और थोड़ा उचका दिया.
ऐसा करते हुए वो उसके लंड वाले हिस्से से टकरा गयी… और एकदम सोनिया के दिमाग़ की बत्ती जल उठी.
इस मौके का फायदा उठाने के लिए.
वो बोली : “मुझे तो यहाँ से कुछ दिखाई ही नही दे रहा …. थोड़ा और उपर उठाओ ना…”
सोनू चाहता तो नीचे उतार कर स्टूल के उपर कोई ऐसी चीज़ रख सकता था, जिसके बाद वो आराम से दूसरी तरफ देख पाती… पर वो भी समझ गया की सोनिया के दिमाग़ में शरारत चल रही है.
उसने सोनिया की कोमल कमर में हाथ रखकर थोड़ा उचकाया, और जान बूझकर उसने उसकी उभरी हुई गांड को अपने लंड के उपर लाकर रोक दिया.
उफफफफफफफ्फ़ क्या फीलिंग थी….. ऐसा लग रहा था किसी टाइट से पिल्लो के अंदर लंड फँस गया है उसका.
और सोनिया भी उस पल और उसके लंड को पूरा फील कर रही थी
वो बोली : “बड़े चालू होते जा रहे हो तुम आजकल…. ये सब ना अपनी उस गर्लफ्रेंड के साथ करना….”
सोनू ने उसके कान में कहा : “मेरी गर्लफ्रेंड तो तुम हो….”
उसने पीछे की तरफ होते हुए अपने आप को सोनू के उपर छोड़ दिया…
और बोली : “सच्ची ???”
उसने इस ठंडी आवाज़ में ये कहा की सोनू तो डर सा गया की कहीं उसने उसे ग़लत ना समझ लिया हो….
वो बोला : “आई मीन दी, तुम तो शुरू से मेरे साथ रही हो… मेरी हर बात जानती हो…. मेरी बेस्ट फ्रेंड हो ना तुम….. और बेस्ट फ्रेंड गर्लफ्रेंड से कम थोड़े ही होती है….”
सोनिया उसकी तरफ घूम गयी और अपनी नुकीली छातिया उसकी छाती में दबाकर बोली : “अच्छा जी… आजकल बड़ी बातें करना सीख गया है….”
सोनू चाहता तो वही के वही उसे चूम लेता,
पर उसकी हिम्मत ही नही हुई…
हालाँकि सोनिया इसके लिए बिल्कुल तैयार थी…. पर ये सोनू नही जानता था.
सोनू नीचे उतार आया और बोला : “रूको, मैं उसे थोड़ा उँचा कर देता हूँ ….”
इतना कहकर उसने न्यूसपेपर्स का एक बंडल उठा कर टेबल पर रख दिया….अब सोनिया को दूसरी तरफ का सॉफ दिखाई दे रहा था..
उसके बाद दोनो नीचे आ गये.
सोनिया उसे बार-2 छेड़ती रही की आज तो तेरे मज़े होने वाले है… वगेरह..वगेरह…
शाम को ठीक 6 बजे तनवी आ गयी.
अब असली खेल शुरू होने वाला था.








