मोड़… जिंदगी के – Update 14
#14 The real identity…
वो डिवाइस कोई ट्रांसमीटर या रिकॉर्डर जैसा नही था, बल्कि उसमे कुछ ऐसा सिस्टम था की रिसीवर उठाने पर एक्टिव होता और उसमे जो भी रिकॉर्ड होता वो सिर्फ एक बार बजता, दुबारा से वो कभी बिना रीसेट किए हुए नही बजता।
अमर आश्चर्यचकित हो कर कभी उस डिवाइस को और कभी फोन के कटे हुए तार को देख रहा था। फिर वो फोन और डिवाइस हाथ में लेकर बाहर आता है, और उसको स्टडी की लाइट जलती दिखती है, और वो उसकी तरफ चला जाता है।
अमर जैसे ही स्टडी का दरवाजा खोलता है उसे वहां रमाकांत जी, और आनंद बैठे हुए मिलते हैं। रमाकांत जी अमर को देख कर उसको अंदर बुलाते हैं, पर जैसे ही उनकी नजर उसके हाथ में रखे फोन और डिवाइस पर जाती है, वो मुस्कुरा देते हैं।
रमाकांत जी: आनंद, आखिर इसको ये मिल ही गया। फिर भी एक इंजीनियर और एक्स आर्मीमैन होने के बावजूद बहुत समय ले लिया इसने, है ना?
आनंद भी पलट कर अमर को देखता है।
अमर लगभग चीखते हुए: क्यों??
रमाकांत जी: आओ पहले आराम से बैठो, आनंद बेटा अनामिका को बुला लाओ, अब सच बताने का समय आ गया है।
आनंद उठ कर बाहर चला जात है, और अमर रमाकांत जी के सामने एक सिंगल सीटर सोफे पर बैठ जाता है। उसके चेहरे पर हवाइयां उड़ रही होती है उस समय। थोड़ी देर बाद अनामिका और आनंद आ कर उसके सामने पड़े सोफे पर बैठ जाते हैं।
अमर: क्या हो रहा है यहां? ये सब है क्या आखिर?
अनामिका: है क्या? बस वही जो तुम दूसरों की जिंदगी के साथ कर रहे थे, खेल।
अमर: मतलब?
अनामिका: मतलब कि ये सब एक खेल था तुम्हारे साथ। तुम पृथ्वी राजदान, जो दूसरों की जिंदगी से खेलता है, अब हम उसकी जिंदगी से खेल लिए।
अमर को अपना नाम, पृथ्वी राजदान सुनते ही झटका सा लगता है और वो सर पकड़ कर बेहोश हो जाता है। ..

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