मैं और मेरा परिवार – Family Sex Story | Update 93

मैं और मेरा परिवार – Family Sex Story
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थोड़ी देर रिया के साथ बाते करने के बाद मैं मोना के भाई के साथ बैठ कर बाते करने लगा.

अवी-तुम्हारे तो मज़े है मोना के बाद तो तुम्हारा ही नंबर है

मोना का भाई -कहाँ यार . मुझे इतनी जल्दी कहाँ शादी करनी है

अवी-क्यू

मोना का भाई -पहले तो मज़े करूँगा फिर शादी

अवी-कैसे मज़े

मोना का भाई -तू तो बच्चा है अभी तक मज़ा करने का मतलब भी नही पता तुम्हे

अवी-तो बता दे ना

मोना का भाई -लड़कियो के साथ मज़े करने की बात कर रहा हू

अवी-क्या लड़कियो के साथ,किस के साथ किए है.

मोना का भाई -गिनती भी नही कर सकता इतनी लड़कियो के साथ मज़ा कर चुका हू

अवी-क्या बात है.मान गये. कोई मुझे भी दिला दो

मोना का भाई -देखते है .

अवी-(तू बस सपने देख .मैं खुद कुछ करता हू) जल्दी करना भाई

अवी-वैसे किसी एक का नाम तो बता दे

मोना का भाई -वो भी बता देंगे.लेकिन बाद मे

अवी-कही कुछ किया भी है या फिर

मोना का भाई -किया है. बस शादी हो जाने दे फिर बताउन्गा

अवी-इंतेज़ार करूँगा

ऐसे ही बाते करते रहे. फिर मैं अपने घर आ गया. घर आने के बाद मैं तीनो चाचियो के साथ बैठ कर बाते करने लगा. बाते करने के बाद मैं सो गया

नेक्स्ट डे

कल शादी है. गाओं मे हर तरफ शादी की बाते हो रही थी. आज मैं मोना के घर जाने से पहले पूजा बुआ के घर चला गया.

पर पूजा बुआ ने आज चुदाई करने से मना कर दिया था. कह रही थी कि कल शादी है उसके बाद करेंगे.

मुझे समझ मे नही आया कि शादी और चुदाई ना करने का क्या संबंध है.शायद कुछ ऑर वजह होगी और बुआ ने मुझे शादी की वजह बता दी.

फिर मैं दोपहर मे मोना के घर चला गया. आज रात दुल्हन को हल्दी लगाते है. रात भर सब मज़ा करेंगे.

देखते ही देखते शाम हो गयी.मैं ने चाची को बता दिया कि मैं आज मोना के घर रुक ने वाला हू.

फिर खाना खाने का टाइम हो गया.सब का खाना खा कर हो गया . आधे गाओं वाले मोना के घर तो आधे दूल्हे के घर खाना खा रहे थे. खाना खाने के बाद दुल्हन को हल्दी लगाने लगे. दुल्हन के साथ साथ लड़किया और औरतें आपस मे होली मे जैसे रंग लगाते है वैसे ही हल्दी एक दूसरो लगा रहे थे.

माला और रिया का चेहरा हल्दी लगाने से पीला हो गया था. रिया ने मेरे गालो पर भी हल्दी लगा दी.

जब रिया मुझे हल्दी लगा रही थी तब माला मुझे देख रही थी. माला का चेहरा पहले हल्दी से पीला हो गया था और अब मेरी तरफ देख कर लाल हो गया.

पर मुझे माला से कुछ लेना देना नही था .मैं भी रिया को हल्दी लगाने लगा. हल्दी के साथ खेलने मे मज़ा आ रहा था. फिर हल्दी लगाना बंद हो गया.

देखते देखते रात के 11.00 बज गये.. सब के सोने का इंतेज़ाम करने लगा. माला के माता पिता भी मोना के घर ही सोने वाले थे.माला मुझे देख कर और मुझे सुनाई दे इस तरह से अपनी मा के साथ बाते कर रही थी.

माला अपने घर सोने के लिए मा से कह रही थी. पहले उसकी मा ने मना कर दिया फिर माला के ज़ोर देने पर मान गयी.

लेकिन वो अकेले घर कैसे जाएगी .माला ने अपनी मा को कहा कि वो अवी के साथ चली जाएगी.माला के मा ने मुझे पूछा कि माला को घर छोड़ दो .

मुझे अब माला से कोई लेना देना नही था. मैं ने मना कर दिया. पर माला ने कहा कि मेरे साथ चलो. मैं ने कुछ नही कहा.

माला मुझे जबर दस्ती अपने साथ ले गयी.मैं ज़्यादा तमाशा नही करना चाहता था इस लिए मैं माला के साथ जाने लगा.

माला चुप चाप चल रही थी.उसके चेहरे पे गुस्सा दिख रहा था. पता नही किस पर गुस्सा थी. थोड़ी देर मे माला का घर आ गया. माला ने ताला खोल दिया.

मैं वापस जाने के लिए पलट गया. माला ने मेरा हाथ पकड़ लिया.

मुझे अपने साथ घर के अंदर ले गयी. मैं घर मे जाकर बेड पर बैठ गया. माला ने घर का गेट बंद कर दिया. और मेरे पास आकर बैठ गयी.

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