मैं और मेरा परिवार – Family Sex Story | Update 92

मैं और मेरा परिवार – Family Sex Story
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गाओं मे आने के बाद मैं घर चला आया. मैं ने छोटी चाची को अपने कमरे बुला लिया .छोटी चाची को मैं जब भी अपने कमरे मे बुलाता तो चाची अपना काम छोड़ कर मेरे पास आ जाती. आज तो मेरा चेहरा देख कर छोटी चाची मेरे पीछे पीछे ही कमरे मे आ गयी.

सी चाची-क्या हुआ अवी, तुमने अपना चेहरा किसी मुरझाए हुए फूल(फ्लवर) तरह क्यू बनाया है.

अवी-चाची वो माला …मैं बताते हुए रुक गया(माला ने कहा था कि मेरी चाची मेरी शादी उसके साथ नही होने देंगी. माला ने कहा था कि चाची मेरी शादी 26 27 साल का होने के बाद करेंगी. मुझे पहले देखना होगा कि माला की बात कितनी % सही है)

सी चाची-क्या हुआ माला को.

अवी-मुझे माला अच्छी लगती है. मैं माला के साथ शादी करना चाहता हू.

सी चाची-मेरा बेटा इतना बड़ा हो गया कि उसे शादी करनी है.चल बता कौन है माला जो मेरे बेटे को पसंद आ गयी.

अवी-वो मोना की सहेली जिसके बारे मे मैं ने आपको बताया था.

सी चाची-ये वही है ना जिसको कोई भाई बहन नही है. अपने माता पिता की अकेली बेटी है.

अवी-हाँ ,उसी माला के साथ मुझे शादी करनी है.

सी चाची-फिर तो हमे जल्दी करनी होगी. उसके माता पिता तो उसकी शादी जल्दी करेंगे. और एक तो तुम्हारी उमर कम है .तुम्हे कम से कम 21 22 साल का तो होना होगा.तभी तुम्हारी शादी माला के साथ हो पाएगी.मैं सुमन दीदी से बात करती हू और कल ही जाकर माला के माता पिता से मिलकर तुम्हारी और माला की शादी की बात करूँगी उनको 2 3 साल रुकने को भी बोल दूँगी.

अवी-(चाची ने जो बात कही वो सुनकर मैं शॉक्ड हो गया) चाची आप माला और मेरे लिए नाराज़ तो नही हो

सी चाची-नाराज़! कैसी बात करते हो तुम,तुम्हारी खुशी मे ही तो हमारी खुशी है.और वैसे भी एक ना एक दिन तो तुम्हे शादी करनी है.ये अच्छा हुआ कि तुम ने खुद अपनी लाइफ पार्ट्नर पसंद कर ली.

पर एक बात है मुझे पहले तुम्हे पढ़ाना था फिर 26 27 साल की उमर मे तुम्हारी शादी करवा देती.पर कोई बात नही पहले शादी कर लेते है और फिर पढ़ाई कर लेना. जैसे मैं ने शादी के बाद पढ़ाई की थी वैसे ही तुम भी कर लेना.

अवी-चाची की बात सुनकर मैं रोने लगा और चाची के गले लग गया. और रोते हुए चाची को माला के साथ जो मेरी बात हुई वो बता दी.

सी चाची-इतने बड़े हो गये हो और ऐसे बच्चो की तरह रो रहे हो. चलो अपनी आँखे सॉफ करो. और चाची ने मेरी आँखो पर किस किया

अवी-थोड़ी देर रोने के बाद मैं नॉर्मल हो गया.

सी चाची-तुमने ये बात पहले क्यू नही बताई.

अवी-वो मैं ..

सी चाची-तुम देखना चाहते थे कि माला की बात सही है कि नही.

अवी-हाँ

सी चाची-तो फिर क्या पता चला

अवी-चाची माला ने ऐसा क्यू किया

सी चाची-माला ने तुम्हारे साथ ग़लत किया और सही भी किया

अवी-मैं कुछ समझा नही

सी चाची-देखो अवी ,मुझे प्यार के बारे मे ज़्यादा तो पता है नही .पर प्यार के बारे में मूज़े 2 3 बाते पता है.

प्यार का मतलब ही होता है सॅक्रिफाइस.माला ने भी यही किया.माला ने अपने फॅमिली के लिए तुम्हारे प्यार को सॅक्रिफाइस किया.माला ने प्यार से पहले अपनी फॅमिली के बारे मे सोचा है.

प्यार का एक और मतलब होता है कि अपने पार्टनर पर ट्रस्ट करना. माला ने तुम पर ट्रस्ट नही किया. माला को तुम्हे एक चान्स देना चाहिए था. हम तो तय्यार थे तुम्हारी शादी करने के लिए.

पर माला ने पहले ही अपना फ़ैसला सुना दिया. उसने आँखे बंद करके अपनी लाइफ का फ़ैसला किया.

उसे लगता है कि जिसके साथ वो शादी करने वाली है वो उसके माता पिता का भी ख़याल रखेगा.क्या हम उसके माता पिता का ख़याल नही रख सकते थे . ठाकुर के बाद गाओं मे हमारे पास सबसे ज़्यादा ज़मीन है .

मैं तो अभी भी माला की शादी तुम्हारे साथ करा सकती हू. उसके माता पिता को मेरी बात मानने पर मज़बूर कर सकती हू.पर मुझे लगता है माला तुम्हारे लिए सही लड़की नही है.

माला कुछ ज़्यादा ही समझदार है और साथ मे बेवकूफ़ है. तुम माला को भूल जाओ.तुम्हे माला से भी अच्छी लड़की मिल जाएँगी.

अवी-पर माला को कैसे…

सी चाची-माला को अपने साथ साथ उसके माता पिता के बारे मे सोचना है. आगे जाकर माला का होने वाला पति उसके माता पिता का भी ध्यान रखे. इस बारे मे सोच कर माला ने शादी करने को हाँ कर दी होगी.तुम माला के बारे मे सोचना छोड़ दो. और रही बात उसे भूल जाने की तो वो तुम्हे करना होगा.

अवी तुम्हे माला पसंद है .क्यू कि उसने तुम्हारी मदद की पर तुम ने भी उसकी मदद की थी इस लिए उसने तुम्हारा अहसान चुका दिया. अगर तुम हर मदद करने वाली से प्यार करोगे तो कितनो के साथ शादी करोगे.प्यार ऐसे थोड़ी होता है.

तुम तो सबकी मदद करते हो और वो सब भी तुम्हारी मदद करते है.तो क्या सब के साथ प्यार करोगे. तुम ने मोना की भी मदद की थी अगर मोना ने भी तुम्हारी मदद की तो क्या उसके साथ भी शादी करोगे.

किसी की मदद को प्यार समझो गे तो कैसे चलेगा. मेरी बात मानो माला को भूल जाओ .

अवी-आप ने सही कहा मुझे माला को भूलना होगा.

सी चाची-ये हुई ना बात. थोड़ी देर आराम करो और फिर जब तुम अपनी आँखे खॉलोगे तो माला को अपने दिमाग़ से निकाल कर नयी सुरुआत करना.

चाची मुझे समझा कर चली गयी और मैं भी थोड़ी देर के लिए सो गया.

फिर मैं ने माला को भूलने का फ़ैसला किया और फिर शाम को मैं मोना के घर चला गया.

आज मोना के घर मेहमान ज़्यादा थे. मोना अपनी सहेलियो के साथ मिलकर मेहंदी लगा रही थी. मोना के साथ माला और रिया भी थी.

रिया मेहंदी लगा कर रेडी हो चुकी थी. रिया मेरे पास आकर मुझे मेहंदी दिखा रही थी. रिया के हाथ पर मेहंदी अच्छी लग रही थी. मैं रिया से हंस कर बाते करने लगा.

जब भी मैं रिया के साथ बाते करता तो माला मेरी तरफ देखती. पर अब मुझे माला के साथ कुछ लेना देना नही था. अब माला और मेरा रास्ता अलग हो गया था.

थोड़ी देर रिया के साथ बाते करने के बाद मैं मोना के भाई के पास जा कर बैठ गया.

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