मोनू के साथ बाते करने के बाद मेरे लिए बस एक ही काम बचा था वो था माला का गाओं आने का इंतज़ार करना.
इंतज़ार करते हुए दिन निकल रहे थे. पर मैं सिर्फ़ माला के बारे मे सोच कर देवदास नही बन ना चाहता था.
इस लिए जब भी बड़ी चाची और सीमा चाची घर से बाहर चली जाती तब मैं रति के साथ चुदाई कर लेता.रति मेरे साथ चुदाई कर के खुश थी.रति को मेरे और छोटी चाची के बारे मे पता नही था.
कभी कभी पूजा बुआ के घर जाकर पूजा बुआ के साथ भी चुदाई कर लेता.जब तक राज की एग्ज़ॅम चालू थी तब तक मैं आराम से पूजा बुआ की चुदाई कर लेता. पर 1 हफ्ते मे ही कविता ,लीना और राज के एग्ज़ॅम ख़तम हो गये.जिस से मुझे पूजा बुआ के साथ चुदाई करने के लिए ज़्यादा मोका नही मिल रहा था.
अब मैं दोपेहर मे कभी पूजा बुआ के घर तो कभी नेहा बुआ के घर तो कभी नीता बुआ के घर जाकर कोमल ,कविता ,लीना और राज के साथ मिल कर खेलने लगा . साथ खेलने मे मज़ा आ रहा था. कोमल तो कभी घर से बाहर नही जाती थी. उसके लिए ये अच्छा हुआ.
जब भी हम नेहा बुआ या नीता बुआ के घर खेलते थे तब मैं जल्दी घर वापस आ जाता. घर आने के बहाने से पूजा बुआ के घर चला जाता.और पूजा बुआ की चूत मार लेता.
घर पर भी मेहमान आ रहे थे. कभी बड़ी चाची की मा आ जाती तो कभी सीमा चाची की. छोटी चाची की बहेन भी आई थी छोटी चाची को देखने के लिए.
घर मे हर दिन अब रोनक रहने लगी. मुझे जब भी मोका मिलता मैं रति की चुदाई कर लेता. रति भी खुश थी और मंगला काकी भी. पर दोनो अलग वजसे खुश थी. रति खुश थी चुदाई के वजह से थी. और मंगला काकी रति के लिए खुश थी. काकी को लगता कि उसकी बेटी अब बुरा काम नही कर रही है. और साथ ही पैसे भी काम रही थी.
कब दिन निकल गये पता भी नही चला.देखते ही देखते मोना की शादी का दिन पास आ गया.
अब मोना की शादी को बस 1 हफ़्ता बाकी था. मैं ने मोना के भाई से साथ दोस्ती बना ली.मोना के भाई के साथ मैं ने दोस्ती इस लिए की क्यू कि मुझे उसके घर मे जाने के लिए कोई परेशानी ना हो..
गाओं मे पहली बार ऐसी शादी हो रही थी. जिस मे दूल्हा और दुल्हन हमारे ही गाओं के थे. गाओं मे शादी से 1 हफ्ते पहले ही शादी का माहॉल सुरू हो गया था.
मैं अब मोना के भाई के साथ मिल कर उसकी मदद करने लगा. मोना को पता नही था कि मैं ने उसके साथ चुदाई की है.
गाओं की लड़किया भी मोना को मिलने आ रही थी और मोना के साथ बाते करती. रिया भी मोना के साथ रहने लगी. रिया ज़्यादातर मोना के घर ही रहती थी. शादी की वजह से महेमान भी आने लगे थे.
जब भी मैं मोना के घर जाता मुझे रिया वही मिल जाती थी. अब मैं रिया के साथ खुल कर बाते करने लगा.रिया भी मुझसे बात करने का कोई मोका नही चूकती. वो बस देखती रहती की कब मैं बात करना सुरू करू और वो बात को आगे बढ़ाए.
मुझे लग रहा था कि रिया की एग्ज़ॅम मे मदद करने का मुझे इनाम ज़रूर मिलेंगा.
शादी को 3 दिन बाकी थे. मैं हमेशा की तरह मोना के घर चला गया. मोना का भाई समान लेने के लिए सहर जा रहा था.उसने मुझे साथ चलेने को कहा पर मैं ने मना कर दिया .
मोना के भाई के जाने के बाद मैं मोना के घर मे काम करने लगा .तभी मोना की मा ने मुझे आवाज़ लगाई. मैं मोना की मा के पास चला गया. मोना की मा ने मुझे समान को मोना के कमरे मे रखने को कहा. मैं समान को ले कर मोना के कमरे मे चला गया.
मोना के कमरे मे मोना के साथ रिया और माला बैठी थी. मैं ने माला को देखा .वो भी मुझे देख रही थी. मैं ने जिस वजह से मोना के भाई के साथ दोस्ती की वो पूरी हो गयी.
मुझे माला से मिलने का मोका मिला. मैं समान को मोना के कमरे मे रख कर बाहर चला गया.
बाहर आने के बाद मैं माला का इंतज़ार करने लगा.लेकिन माला बाहर नही आई.
मैं बार बार मोना के कमरे की ओर देखने लगा. जब भी कोई मोका मिलता मोना के कमरे मे जाने का तो मैं छोड़ता नही.
जब भी मैं कमरे मे जाता माला एक बार मेरी तरफ ज़रूर देखती. मैं भी उसकी ओर देखता. मुझे लगता कोई और भी मेरी तरफ देख रहा है पर मैं तो माला को देख कर सब भूल ही जाता.
ऐसा करते करते शाम हो गयी. मैं अपने घर की ओर निकल गया. रास्ते मे मोना का भाई मिल गया. वो मुझे वापस अपने साथ घर ले कर आ गया.
मैं ने फिर एक बार मोना के कमरे मे जाकर देखा .वहाँ पर सिर्फ़ मोना और रिया थी.शायद माला घर चली गयी थी.
मैं उदास मन से घर चला आया.

Leave a Reply
You must be logged in to post a comment.