मैं और मेरा परिवार – Family Sex Story | Update 80

मैं और मेरा परिवार – Family Sex Story
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मैं कोमल के साथ पढ़ाई करने लगा. शाम 4.00 बजे राज मुझे और कोमल को बुलाने आ गया. राज ने कहा कि मा ने लीना दीदी के घर बुलाया है. मैं फिर डरने लगा . कही चाची को कुछ हुआ तो नही.

मैं और कोमल राज के साथ नीता बुआ के घर आ गया.

नीता बुआ के घर से शोर सुनाई दे रहा था. मैं हिम्मत करके घर के अंदर चला गया. घर के अंदर जाते ही मैं शॉक्ड हो गया.

घर मे पूजा बुआ ,नेहा बुआ ,नीता बुआ, चाचा, छोटी चाची, सीमा चाची, बड़ी चाची बैठ कर बाते कर रहे थे. सब के चेहरे पर खुशी दिख रही थी. दूसरी तरफ कविता लीना राज मिठाई खा रहे थे.

मुझे घर मे देख कर छोटी चाची मेरे पास आ गयी.और मुझे गले लगा लिया. मुझे तो कुछ समझ मे नही आ रहा था. छोटी चाची ने मेरे सर पे किस किया. बड़ी चाची और सीमा चाची ने भी मेरे पास आकर मुझे गले लगाया….

पूजा बुआ ने बताया कि तीनो चाची माँ बन ने वाली है. अभी वो सहर जाकर डॉक्टेर से मिल कर आई है.

चाचा ने कहा कि ये सब महाराज के आशीर्वाद से हुआ है. अगर महाराज ना होते तो पता नही मैं बाप भी बन सकता कि नही.

ब चाची-राज सुनो मंगला काकी के घर जाओ और मंगला काकी को कहो कि हमने बुलाया है .राज उठ कर घर के बाहर चला गया.

नेहा बुआ ज़्यादा खुश नज़र नही आ रही थी. पूजा बुआ और नीता बुआ की खुशी का कोई ठिकाना नही था.चाचा का भी यही हाल था.चाचा तो कभी सोफे बैठ ते तो कभी खड़े हो जाते. चाचा को तो खुशी के मारे कुछ समझ मे नही आ रहा था कि वो क्या करे और क्या ना करे. चाचा कभी मुझे गले लगा देते तो कभी मुझे मिठाई खिला देते.

छोटी चाची ने मुझे अपने पास बैठा दिया. छोटी चाची सब से ज़्यादा खुश थी. होना भी चाहिए था. उनके दिमाग़ की वजह से ये सब मुमकिन हो पाया.

मैं भी खुश था.क्यू खुश नही होता. मैं बाप जो बन गया था. इतनी कम उमर मे मैं बाप बन ने वाला था. वो भी तीन बच्चो का. पता नही तीन भी हो सकते है या फिर 4 या 5 भी हो सकते है.

मैं अपनी खुशी पर कंट्रोल रख रहा था. मैं खुश था पर दिखा नही रहा था. जितना एक भतीजे को दिखना चाहिए उतना दिखा रहा था.

सी चाची-अवी तुम्हे तो खुश होना चाहिए. तुम्हारे भाई बहन आ रहे है.

अवी-मुझे तो सब से ज़्यादा खुशी हुई है.

ब चाची-तू तो मेरा बेटा है. और हमेशा रहेगा. तेरे भाई बहन भी आ जाएगे तो भी तू ही मेरा पहला बेटा रहेगा.

इतना कह कर बड़ी चाची ने मुझे गले लगा लिया

सी चाची-सही कहा दीदी. हम पहले जितना प्यार अवी से करते थे आगे भी उतना ही प्यार करेंगे.

मैं छोटी चाची की बात सुनकर और खुश हो गया. मुझे पता है छोटी चाची जो कहती है वो करती है.

थोड़ी देर ऐसे ही बाते होती रही. आधे घंटे के बाद कोमल घर चली गयी पढ़ाई करने.

चाचा भी शहर से जो मिठाई लाई थी वो गाओं मे बाँटने चले गये. थोड़ी देर बाद मंगला काकी भी आ गयी. चाची ने मंगला काकी को मा बन ने वाली बात बता दी. काकी ये बात सुनकर खुश हो गयी …

फिर मैं और चाची अपने घर आ गये. चाची ने तीनो बुआ और मंगला काकी को रात मे खाने पर बुला लिया.

मेरा कल सेकेंड लॅंग्वेज का पेपर था. उसकी तय्यारी हो गयी थी. इसी लिए मैं भी दावत मे खाना खाने लगा. कोमल भी 1 घंटे के लिए पढ़ाई छोड़ कर हमारे घर आ गयी.

आज का दिन सब के लिए दीवाली से कम नही था. खाना खाने मे आज मज़ा आया. आज कितने दिनो बाद पूरा परिवार एक साथ खाना खा रहा था. ये खुशी का पल मैं कभी नही भूलूंगा.

चाचा ने कहा कि वो कल दादाजी के पास जाकर उनको ये खुश खबरी सुना देंगे.

खाना खाने के बाद सब बाते करने लगे. कोमल घर वापस चली गयी . मैं भी खाना खाने के बाद अपने कमरे मे जाकर पढ़ाई करने लगा

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