मैं और मेरा परिवार – Family Sex Story | Update 67

मैं और मेरा परिवार – Family Sex Story
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हम बाते कर रहे थे.

अवी-चाची सुरू करे

म चाची- मैं तो कब तय्यार बैठा हू.

चाची के इतना कहते ही मैं ने साड़ी का पल्लू हटा दिया.पल्लू अलग होने से चाची के दूध ब्लाउस के अंदर से मेरे सामने आ गये. मैं ने देर ना करते हुए चाची के दूध को ब्लाउस के उपर से दबाने लगा.

चाची के दूध को ब्लाउस के उपर से दबाने मे इतना मज़ा आ रहा था तो बिना ब्लाउस के कितना मज़ा आएगा. मैं वो मज़ा जल्दी से लेना चाहता था.

मैं ने चाची का ब्लाउस निकाल दिया. चाची के गोरे,गोल,दूध मेरे सामने आ गये.

मैं ने दोनो हाथ दोनो दूध पर रख कर दबाने लगा.दूध दबाने से चाची सिषकारिया लेने लगी .

मूज़े अब रुका नही जा रहा था. मैं ने दूध दबाते हुए धीरे धीरे चाची के सारे कपड़े निकाल दिए.

चाची मेरे सामने नंगी खड़ी थी.मैं चाची के बदन को देखने लगा. सीमा चाची का बदन छोटी चाची जितना फिट तो नही था पर पूजा बुआ से कही ज़्यादा दमदार था.

म चाची-क्या देख रहा है

अवी-आपकी सुंदरता देख रहा हू

म चाची-ऐसे ही देखते रहोगे तो मैं चली जाउन्गि.

मैं ने चाची को बेड पर लिटा दिया. चाची के लेटते ही मैं अपने कपड़े निकाल कर चाची के दूध पर टूट पड़ा. चाची के निपल को मूह मे डाल कर जितना हो सके उतना दूध को चूस ने लगा. दूसरे दूध को दबाने लगा.

कभी एक दूध को तो कभी दूसरे दूध को दबाने लगा. छोटी चाची की तरह सीमा चाची के दूध भी सख़्त थे. लगता है चाचा सिर्फ़ लंड को चूत मे डाल चुदाई करते थे. वो चुदाई से पहले कुछ नही करते थे.

फिर मैं ने हाथो से दूध को दबाना चालू रखा और मूह को नीचे ले जाने लगा .अब मैं चाची की नाभि के पास था .सीमा चाची की नाभि छोटी चाची से बड़ी और गहरी थी. मैं ने नाभि पे किस करना चालू किया. किस करते करते नाभि मे जीभ डाल कर चाची का मज़ा दुगना कर रहा था.

सभी टेस्ट हो चुके थे अब आख़िरी एग्ज़ॅम की बारी थी. मैं ने चाची की टाँगो को फैला दिया. चाची की चूत मस्त लग रही थी.
छोटी चाची को पता था कि मुझे चूत पर बाल पसंद नही. लगता है छोटी चाची ने सीमा चाची को पूरी तरह से तय्यार करके भेजा है.

सीमा चाची की चूत ज़्यादा खुली हुई नही थी. क्यू कि चाचा ने सीमा चाची के साथ शादी करने के बाद 3 साल के बाद छोटी चाची के साथ शादी कर ली थी.

मैं चाची की गुलाबी चूत को सूंघने लगा.चूत से एक मादक सुंगंध आ रही थी. मेरी गरम साँसे चाची की चूत को और गरम कर रही थी.

मैं ने चाची की चूत पे किस करना चालू किया. जैसे ही मैं ने जीभ से चूत को चाट कर साफ किया वैसे ही चाची ने पानी छोड़ दिया. मुझे तो चाची की चूत को जीभ से चोदना था .लेकिन मैने वो सारा पानी पी लिया. पानी साफ करने के बाद भी मैं चाची की चूत को चाटना बंद नही किया. थोड़ी देर चाटने के बाद चाची को बर्दास्त नही हुआ .चाची ने कहा अब लंड को अंदर डाल दो.

अगर मैने फिर पानी निकल ने का इंतज़ार किया तो चाची को बर्दास्त नही होगा और चाची ज़ोर से सिसकारियाँ ले सकती जो हमारे लिए ठीक नही था.

मैं ने चूत को चाटना बंद कर दिया.

मैं ने चाची से कहा कि चीखना मत नही तो बड़ी चाची को पता चल जाएगा. चाची ने हाँ मे गर्दन हिला दी.

लेकिन छोटी चाची ने कहा था कि कोई रिस्क मत लेना.

मैं ने लंड को चूत पर रखा. लेकिन लंड को अंदर नही डाला. पहले मैं चाची के मूह को बंद करना चाहता था इसलिए मैं चाची के होंठो को चूस ने लगा. जब मुझे लगा कि चाची की चीख मेरे मूह मे दब जाएगी तभी मैं ने झटका मारा कि शायद 3 इंच तक लंड अंदर चला गया. जैसा मैं ने सोचा था वैसा ही हुआ चाची की चीख मेरे मूह मे दब गयी.

मैं जल्दी से दूसरा झटका मारा कि लंड 6 इंच तक अंदर चला गया. चाची को दर्द होने लगा .चाची का दर्द मेरे होंटो पे दिख रहा था. चाची के दर्द को कम करने के लिए मैं चाची को किस करता गया साथ ही दूध भी दबाने लगा.

लेकिन चाची शांत होने का नाम ही नही ले रही थी. फिर गुस्से मे आख़िरी झटका मारा कि लंड चूत की गहराइयो मे खो गया. चाची को दर्द हो रहा था. इस बार मैं रुकना चाहता था. मुझे पता था कि पूरा लंड चला गया है.और चाची को कितना दर्द हो रहा है.मैं अब चाची को शांत होने तक वैसे ही किस करता रहा और दूध को दबाने लगा.

फिर 15 मिनिट के बाद चाची शांत हुई. जब लगा कि चाची धक्के लेने के काबिल हो गयी तभी मैं ने धक्के मारना सुरू किया. पहले धीरे धीरे धक्के मार रहा था. चाची का दर्द धीरे धीरे कम हो रहा था.

चाची ने जल्दी ही पानी छोड़ दिया .चूत चाटने से और धक्के मारने से पानी निकल गया.

पानी निकल ने से चाची को थोड़ा आराम मिल गया. अब मेरे हर धक्के से साथ चाची मेरा साथ देने लगी.

मैं धक्के पे धक्के लगाते रहा .चाची और मैं और साथ मे बेड हिल रहा था. हमे ऐसा लग रहा था कि हम मुंबई की लोकल मे हो . कमरे मे पॅच पॅच की आवाज़ गूँज रही थी. मैं ने गति बढ़ा दी. मेरी राजधानी एक्सप्रेस चलती जा रही थी. मैं चाची के रसगुल्ले जैसे दूध को खाने लगा.चाची का बदन चेन्नई की गरमी की तरह तप रहा था.

हमारी चुदाई 30 मिनिट तक चलती रही. ये मेराथन चाची और मैं जीत चुके थे.मैं ने अपना वीर्य चाची की चूत मे डाल दिया. चाची ने अपना टॅंक 4 बार खाली किया. मैं चाची के उपर गिर गया. कमरे मे चाची और मेरे हाँफने की आवाज़ आ रही थी.

थोड़ी देर बाद हम नॉर्मल हो गये

म चाची- तुम तो पक्के खिलाड़ी निकले.

अवी- आख़िर भतीजा हू किसका

म चाची- भतीजा नही बेटा है तू मेरा.वैसे मानना पड़ेगा तुम मे दम है.

अवी-क्या एक और बार देखना है

म चाची-दिखा सकते हो

अवी-देखने वाले पर है कि वो क्या चाहता है

म चाची-मैं तो चाहती हू कि एक और बार हो जाए

अवी-चलो फिर आ जाओ मैदान मे

म चाची-मैं तो हमेशा तय्यार रहती हू

ये सुनते ही मैं ने चाची को गले लगा लिया

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