नेक्स्ट डे
आज मैं जल्दी स्कूल से वापस आ गया. घर पर आज खाने मे मीठा बनाया था . खाना खाने के बाद मैं पूजा बुआ के घर चला गया. 2 दिन से मैं ने चुदाई नही की थी.
बुआ घर जाते वक्त मैं खुश था. पर घर मे जाते ही मुझे झटका लगा. आज राज स्कूल नही गया था.. बुआ मेरे चेहरे की उदासी देख कर खुद उदास हो गयी. मैं बुआ के घर से कोमल के पास चला गया.
मेरा मन आज पढ़ाई मे नही लग रहा था. मैं आज जल्दी घर वापस आ गया.
रात को खाना खाने के बाद कमरे मे आ गया. सोचा आज चुदाई करने को तो नही मिली उसकी जगह लंड हिला लेता हू.
तभी मुझे मेडम की किताब क्या ख़याल आया. सोचा चलो किताब देखते हुए लंड हिलाता हू.
मैं ने बेड के नीचे से किताब निकाल ली. किताब मे नंगी पिक्चर देख ने लगा. और लंड को हिलाने लगा. आज लंड को हिलाने मे मज़ा आ रहा था.
जैसे जैसे पन्ने पलट रहे थे वैसे वैसे लंड को हिलाने की गति बढ़ रही थी.
थोड़ी देर बाद सारे पन्ने ख़तम हो गये .मेरा वीर्य निकल गया. मैं ने वीर्य साफ किया. और किताब को बेड के नीचे रख दिया.
मेडम ने तो मुझे चुदाई की आदत लगा दी. पहले मैं सिर्फ़ मोना की चुदाई देखता था. पर अब मैं चुदाई करने भी लग गया
पहले एक भी लड़की मुझसे बात नही करती थी. और अब मोना , माला, और रति मुझसे बाते करने के लिए मर भी सकती है.
मोना और रति तो मेरी दीवानी हो गयी है. मैं जब चाहू तब उन दोनो की चुदाई कर सकता हू….
लेकिन माला के साथ आराम से करना चाहिए था. शायद माला को अच्छा नही लगा. उस दिन के बाद माला से बात भी नही हो पाई.
मिलने के बाद माला से माफी माँग लूँगा. शायद माफ़ करने के बाद माला भी मुझसे चुद जाएगी.
पूजा बुआ ने तो मेरे लिए राकेश को छोड़ दिया. बुआ भी तो दमदार माल है. बुआ को खुश रखने से मेरा काम भी हो जाएगा. मुझे भी चुदाई करने को मिलेगी.
साथ ही बुआ ने प्रॉमिस किया है कि राकेश की बहेन को भी मना लेंगी. फिर एक नयी चूत मिलेगी.
मेडम आपने तो मुझे जन्नत दिखा दी. मुझे पता नही था कि मैं जहाँ रह रहा हू वही जन्नत है.
मैं मेडम के बारे मे सोच रहा था कि अचानक मुझे कुछ याद आ गया .
मैं जल्दी से उठ गया. मैं ने मेडम की किताब को फिर से निकाल लिया. किताब के पन्ने पलट ने लगा. दो तीन बार किताब को देख ने के बाद मैं परेशान हो गया.
मेरा चेहरा पीला पड़ने लगा. चेहरे से पसीना छूटने लगे.
मैं बौखला गया. मुझे तो कुछ समझ मे ही नही आ रहा था कि मैं क्या करू. मैं अपने सर को पकड़ कर बैठ गया. काश मैं ने मेडम की बात मान ली होती . तो मुझे ये दिन नही देखने को मिलता.
मैं सोच रहा था कि तभी किसी ने गेट खट खटाया
मैं दुआ माँग रहा था कि चाचा को वो चिट्ठी ना मिली हो. चाची से तो मैं माफी माँग लूँगा.
मैं ने डरते डरते गेट खोल दिया. जो ना होना था वही हो गया. सामने चाचा नही थे पर जिसका मुझे चाचा के बाद सब से जाड़ा डर लगता है वो छोटी चाची खड़ी थी.
छोटी चाची के हाथो मे मेडम की चिट्ठी थी. चाची अंदर आ कर बेड पर बैठ गयी. मेरी ओर देखने लगी. मुझे तो ‘काटो तो खून’ नही जैसा लग रहा था. मैं सर को नीचे कर के खड़ा था.
छोटी चाची-गुस्से मे ये सब क्या
अवी-मैं चुप चाप खड़ा था
छोटी चाची-मैं तुम्हे कुछ पूछ रही हू
अवी-मैं रोने लगा
छोटी चाची-अब रो क्यू रहे हो . चुप हो जाओ.
अवी-मैं ने रोना बंद किया.
छोटी चाची-बैठो यहाँ
अवी-मैं बैठ गया
छोटी चाची-ये सब क्या है अवी.
अवी-वो ग़लती से
छोटी चाची-क्या ग़लती से. ये जो तुमने किया वो कोई ग़लती से नही करता .
अवी-वो मैं…
छोटी चाची-पूरा एक हफ़्ता ग़लती करते रहे .ये कैसी ग़लती थी तुम्हारी
अवी-वो पहले ग़लती से हो गया
छोटी चाची-और फिर जानबुझ कर ग़लती करते गये
अवी- ऐसा नही है
छोटी चाची-मुझे पूरी बात बताओ कि ये सब कैसे हुआ.नही तो तुम्हारे चाचा को बता दूँगी
अवी-वो मैं ने मेडम को एक सवाल पूछा उसके बाद सब सुरू हुआ.
छोटी चाची-कैसा सवाल
अवी- मुझे लगा कि मुझे कोई बीमारी है उसी के बारे मे पूछा था.
छोटी चाची-कैसी बीमारी
अवी-मुझे लगा कि मेरी नुन्नि मे कुछ प्राब्लम है
छोटी चाची-क्या नुन्नि बोल रहे हो अब बड़े हो गये हो . तुम तो बड़े बड़े काम कर रहे हो ,साफ साफ बोलो नही तो
अवी-वो मुझे लगा कि मेरा
छोटी चाची-बोल ना लंड
अवी-हां वही. मुझे लगा कि मेरा लंड
सी चाची-क्या लगा तुम्हे
अवी-मुझे लगा कि मेरा लंड बाकी सब से बड़ा है
सी चाची-तुम्हे ऐसा क्यू लगा
अवी-वो मैं ने अपने फ्रेंड्स के लंड देखे वो छोटे थे
सी चाची-तो तुम ये बात हमे भी बता सकते थे
अवी-वो मैं डर गया था कि आपसे कैसे पुछु
सी चाची-क्यू बाकी बाते तो पूछ लेते हो ,कही तुमने जानबूझ कर मेडम से पूछा तो नही
अवी-नही. वो बातो बातो मे पूछ लिया
सी चाची-उसके बाद तो बता सकते थे.
अवी-वो मेडम ने मना किया था
सी चाची-मतलब अब तुम मेडम की बात मानोगे हमारी नही
अवी-मेडम ने कहा था कि किसिको पता चल गया तो मेडम की बदनामी हो जाएगी.
सी चाची-और अगर मेडम ने तुम्हे फ़ैसाया होता तो.वो तुम्हारा ग़लत इस्तेमाल कर लेती तो
अवी-मैं क्या करता मुझे तो कुछ समझ मे नही आ रहा था
सी चाची-अब तुम बच्चे तो हो नही कि तुम्हे समझ मे नही आया. अगर तुम्हे कुछ हो जाता तो हमारा क्या होता ये सोचा है कभी तुमने
अवी-मैं रोने लगा
सी चाची-ये रोना बंद करो क्या बच्चो की तरह रोने लग जाते हो
अवी-मैं ने रोना बंद किया
सी चाची-अब मुझे सब बाते बताओ कि कैसे हुआ,क्यू हुआ,किसकी वजह से हुआ. शुरू से शुरू करो
अवी-वो मेडम की किताब……
………………………मैं ने सारी बात चाची को बता दी
सी चाची-तो ऐसा हुआ
अवी-अब इसमे मेरी क्या ग़लती है
सी चाची-कुछ भी हो .चाकू खरबूजे पे गिरे या खरबूजा चाकू पे ग़लती तो चाकू की होती है.
अवी-मैं ने अपना सर नीचे झुका लिया.

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