सुबह उठ कर देखा बुआ की नाइटी पैरो तक धकि हुई है.
अच्छा हुआ मैं ने कोई जल्द बाज़ी नही की.नही तो लेने के देने पड़ जाते
एक एक कर के सब उठ गये . बुआ थोड़ी मायूस दिख रही थी. मैं ने जलदी से नाश्ता कर के बिना बुआ को बताए घर चला गया.
घर आकर ,मैं खाना बनाने मे लग गया. तभी किसी ने गेट खट खटाया .मैं ने सोच अब कौन आ गया है. कही बुआ तो नही आ गयी.मैं बुआ को बिना बताए आ गया शायद इसी लिए आई होगी.
मैने वैसे ही रसोई घर से निकल कर गेट खोल दिया
मैं ने सामने देखा तो मैं एक दम शॉक्ड हो गया. सामने माला खड़ी थी. उसे देख कर मुझे चक्कर आ गया .
मैं ने खुद को संबल लिया. और माला को अंदर बुलाया.
अवी-तुम यहाँ कैसे? तुम्हे तो स्कूल मे होना चाहिए
माला-मैं लंच ब्रेक मे वापस आ गयी
अवी-पर यहाँ कैसे
माला- मैं तो पूछने आई थी कि तुम दो दिन से स्कूल क्यू नही आए. और आज भी नही आए
अवी-वो घर पर कोई नही है. सब गाओं गये है. और वैसे भी स्कूल कुछ पढ़ा नही रहे है.तो मैं ने सोचा घर मे ही पढ़ लू
माला-तो ये बात है.
माला-ये तुम्हारे हाथो पर क्या लगा है
अवी-वो मैं खाना बना रहा था.
माला-क्या तुम्हे खाना बनाना भी आता है.
अवी-हाँ, उसमे नयी बात क्या है.
माला-ऐसे ही …
अवी-तुम बैठो मैं अभी काम ख़तम कर के आता हू
माला-मुझे देखना है तुम्हे खाना बनाते हुए
अवी-(क्या ये पागल है.) उसमे क्या देखना है
माला-मैं ने कभी लड़को को खाना बनाते हुए नही देखा
अवी-चलो फिर .
रसोई घर मे
माला-ये क्या है
अवी-ये रोटी है
माला-मुझे तो किसी की तरह से रोटी नही दिख रही है
अवी-मुझे गोल रोटी बनानी नही आती .
माला-मुझे लगा कि ऐसा ही कुछ होगा इसी लिए मैं यहाँ देखने आई
अवी-अब जैसा भी है यही मेरा खाना है
माला- लाओ मैं बनाकर देती हू.
अवी-माला रोटी बनाने मे लग गयी. तब तक मैं ने एग बुरजी बना ली
माला-येलो हो गया
अवी-तुम बैठो मे दो मिनिट मे नाहकर आता हू
माला-2 क्यू 10 मिनिट लो
मैं नहाने चला गया. मैं बाहर आया तब तक माला ने एक प्लेट मे खाना लगा दिया.
मैं ने खाना सुरू किया . माला ने रोटी अच्छी बनाई थी . एक दम नरम थी. मैं ने माला की तारीफ की.
फिर माला के साथ बाते करना सुरू किया.
मैं सोच रहा था कि माला को क्या हो गया. जब से स्टोर हाउस से उसे बचाया तब से मुझसे से हर दिन बाते करने के लिए मेरी क्लास तक आती है.
मुझसे मिलने के लिए उस दिन पेपर देने की बात की.
दो दिन से स्कूल नही गया तो मुझे देखने घर तक आ गयी. मेरे लिए खाना बनाया.
क्या पता इसके दिमाग़ मे क्या चल रहा है.
तभी मेरी नज़र उसके होंटो पर पड़ी. उसके गुलाबी होन्ट मुझे उसके ओर खिच रहे थे.
रात को बुआ की वजह से मेरे अंदर चुदाई की आग लग गयी थी. वो माला के गुलाबी होन्ट देख कर और बढ़ गयी .
मुझे अब कंट्रोल नही हुआ. मैं ने माला के सर को पकड़ कर उसके होंटो पर मेरे होंठ रख दिए.
मेरे इस अचानक किए गये हमले से माला डर गयी .मुझ से दूर होने की कोशिस करने लगी. पर मेरी पकड़ की वजह से वो कामयाब नही हुई. फिर माला भी मेरे किस का रेस्पॉन्स देने लगी. 10 मिनिट तक हम किस करते रहे. फिर साँस लेने के लिए अलग हो गये. थोड़ी देर हाँफने के बाद हम नॉर्मल हो गये. नॉर्मल होते ही माला बॅग उठाकर भागने लगी. वो घर से बाहर चली गयी. मैं उसे देखता रह गया.
मुझे लगा कही मैं ने जल्दबाज़ी तो नही की. कही उस ने घर पर बता दिया तो. नही वो घर पे नही बताएँगी .वो भी मेरे किस का रेस्पॉन्स दे रही थी. फिर वो भाग क्यू गयी.
कल पूछ लूँगा अगर उसे बुरा लगा तो माफी माँग लूँगा. फिर मैं सो गया.

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