मैं और मेरा परिवार – Family Sex Story | Update 15

मैं और मेरा परिवार – Family Sex Story
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जब हम मार्केट गये ,तब सभी लोग चाची को घूर घूर कर देखने लगे. जो भी चाची के सामने से जाता वो पलट कर ज़रूर देखता.
मुझे ये देख कर बुरा लग रहा था. पर मैं कर भी क्या सकता था.क्यू कि चाची थी ही इतनी सुंदर की हर कोई चाची को ही देखता.

हम मार्केट की एक दुकान मे चले गये. दुकान एक महिला चला रही थी. उस का नाम मंगला है

सी चाची-कैसी हो मंगला काकी

मंगला-ठीक हू मीना .तू बता तू कैसी है

सी चाची-मैं भी ठीक हू. कुछ समान लेने आई थी .

मंगला-अपने भतीजे को भी साथ मे ले आई

सी चाची-ऐसे ही लाकर आई

मंगला-ठीक है. दे अपने समान की लिस्ट .मैं निकाल देती हू.

सी चाची-ये ले. और बता क्या चल रहा है गाओं मे.

मंगला- (मेरी और इशारा कर के) कुछ खास नही.

सी चाची-(चाची समझ गयी कि मेरी वजह से मंगला काकी कुछ बोल नही रही है) अरे अवी तुम अपने दोस्त के घर जाओ. कब तक खड़े रहोगे . जब मेरा काम हो जाएगा तब मैं तुम्हे बुला लूँगी.

अवी- जी चाची. (मेरे दोस्त का घर पास ही था .पर मुझे कुछ शक हुआ इसी लिए मैं आगे जाकर , छुप कर देखने लगा. चाची और मंगला काकी दुकान से घर के अंदर चली गयी.मैं भी मंगला काकी के घर की खिड़की के पास जाने लगा पर खिड़की बंद थी. मैं वही खड़ा रहा और सोचने लगा कि चाची मंगला काकी के साथ घर के अंदर क्यू गयी. मंगला काकी तो एक विधवा है. उसका पति 2 साल पहले मर गया . मंगला काकी अपनी बेटी रति के साथ रहती है. करीब आधे घंटे के बाद दोनो वापस आ गयी. मंगला ने घर को ताला लगा दिया. मतलब जैसा मैं सोच रहा था वैसा कुछ नही था. अब मैं भी दुकान मे चला गया. चाची मुझे देख कर बोली

सी चाची-तुम आ गये

अवी- हाँ वो मेरा दोस्त बाहर चला गया तो मैं दुकान वापस आया.

मंगला-मीना तेरा भतीजा तो बड़ा हो गया. किसी पहलवान की तरह दिख रहा है

सी चाची-नज़र मत लगा. मेरे बेटे को

मंगला-छुपा के रख अपने पल्लू मे नही तो मैं उड़ा ले जाउन्गि.

सी चाची-हाथ लगाकर कर दिखा. तेरे हाथ काट दूँगी.

मंगला- तब तो कुछ और लगाना पड़ेगा.
दो नो हँसने लगी.

सी चाची-चल मंगला मैं चलती हू फिर मिलूंगी. और मेरी मदद करने के लिए शुक्रिया.

मंगला-अगर काम हुआ तो तेरा भतीजा मेरा.

सी चाची-क्या

मंगला-एक दिन के लिए मेरा भतीजा बन जाएगा

सी चाची-ठीक है अब मैं चलती हू.

मंगला-हां जा और जल्दी खूसखबरी सुना

अवी-चाची वो मंगला क्या कह रही थी

सी चाची-तू उसके बातो पे ध्यान मत दिया कर .

अवी-जी चाची

घर आकर मैं ने खाना खाया और सो गया.

सी चाची-दीदी एक खुश खबरी है

म चाची-क्या आदमी मिल गया

सी चाची-नही आदमी तो नही मिला पर एक काम ज़रूर पूरा हुआ

ब चाची- मुझे तो तेरी कोई बात समझ नही आती

म चाची- तू साफ साफ बता ना क्या हुआ

सी चाची-हमारी जो समस्या थी कि अब अगर हम मा बन गयी तो लोगो को शक होगा

ब चाची-हां तूने ने बताया था

सी चाची- उस समस्या का हल मैं ने खोज लिया

ब चाची-क्या

म चाची-क्या.. पर कैसे

सी चाची-सुमन दीदी आप मंगला को तो जानती होगी

ब चाची-हाँ अच्छे से जानती हू

म चाची-क्या उसके पास हल है हमारी समस्या का

सी चाची-सीमा दीदी, मंगला के पास हमारी समस्या का हल है भी और नही भी .

ब चाची-मतलब

सी चाची-दीदी आपको तो पता होगा मंगला को शादी के 3 साल बाद बेटी हुई

ब चाची-हाँ मुझे पता है. तो उससे हमारा का फ़ायदा

सी चाची-दीदी पहले पूरी बात तो सुनो

ब चाची-हाँ बता क्या बात है.

सी चाची-मंगला ने बताया कि उसको वो बेटी एक महाराज के आशीर्वाद से मिली

ब चाची-मतलब

सी चाची-मंगला ने बताया कि शादी के 3 साल तक उसे कोई बच्चा नही था. तब उसे किसी ने एक महाराज के बारे मे बताया . मंगला को उस महाराज के आशीर्वाद से बेटी हुई.

ब चाची-क्या तू सच बता रही है

सी चाची-हाँ मैं सच बता रही हू

म चाची-तो हम भी उस महाराज से मिलेंगे और मा बन जाएगे. फिर हमे किसी आदमी की ज़रूरत नही पड़ेगी

सी चाची- दीदी आप चुप रहो. हमे आदमी और महाराज दोनो की ज़रूरत है. महाराज की वजह से कोई हम पर शक नही करेगा और अवी के चाचा तो हमे मा नही बना सकते. तो हमे एक आदमी तो चाहिए.

ब चाची- महाराज से कब मिलना है

म चाची-दीदी मैं तो कहती हू कल ही चलते है.

सी चाची-सीमा दीदी आप भी ना.. पहले आदमी ढूँढना पड़ेगा फिर हम महाराज से मिलने जाएगे

ब चाची-जैसे तुझे ठीक समझे तू वैसा कर .

म चाची-मैं कुछ बोलू

ब चाची-हाँ बोलना

म चाची-आदमी कोई दूसरे गाओं का देखेंगे.

सी चाची- नही ,आदमी तो हमे इसी गाओं का देखना पड़ेगा. उस से हमारा ही फ़ायदा होगा

ब चाची-जो करना है वो तू कर. अब जा रूम मे नही पता है ना

सी चाची-ठीक है कल बात करेंगे.

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