मेरे गाँव की नदी – Update 70 | Incest Sex Story

मेरे गाँव की नदी – Incest Sex Story
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इतना कहकर कल्लू ने लौड़ा चूत से निकाला और गुड़िया के गांड पर थूक लगा दिया और ‘ठप’ से पूरा लंड एक साथ गाण्ड में घुसा दिया।
गुड़िया- ऐइ.. मर गई रे.. आह्ह.. भाई आराम से डालो ना.. आह्ह.. आज ही तो गाण्ड की ओपनिंग हुई है.. आह्ह..
कल्लू- क्या करूँ जान.. तुम्हारी टाइट गाण्ड को जल्दी से खोलना चाहता हूँ मैं ताकि फिर तुम्हें तकलीफ़ ना हो।
कल्लू स्पीड से गुड़िया की गाण्ड मारने लगा।
करीब 20 मिनट बाद गुड़िया दोबारा गर्म हो गई.. उसकी चूत फिर से रिसने लगी और कल्लू का लौड़ा भी अब आग उगलने को बेताब था.. तो उसने लौड़ा गाण्ड से निकाल कर चूत में घुसा दिया।अब तो कल्लू कभी अपना लंड अपनी बहन की चूत में घुसाता तो कभी गाण्ड में घुसा के पेलने लगता।गुड़िया भी किसी रंडी की तरह गरम हो गई थी ।

वह भी अपनी गांड और चूत दोनों मस्ती में चुदवा रही थी कुतिया बनके।कल्लू ने तेज तेज धक्के मार मार के गुड़िया के गांड और चूत के छेद को पूरा फैला दिया था। जल्दी ही उसका लावा फूट गया.. उसके साथ साथ गुड़िया भी झड़ गई।

गुड़िया- आह्ह.. उफ़फ्फ़.. मज़ा आ गया भाई.. आपके रस से चूत को सुकून मिलता है.. आह्ह.. आज तो मज़ा आ गया।
कल्लू- उफ्फ.. मज़ा तो मुझे आ रहा है तेरी चूत और गाण्ड इतनी टाइट है कि क्या बताऊ हमेशा चोदने का दिल करता है।।
गुड़िया- हाँ भाई.. जितना चोदना हो.. चोद लेना।

कल्लू- हाँ सही कहा.. चल अब तेरी एक इच्छा और पूरी कर देता हूँ.. बड़े ज़ोर का सूसू आई है.. तेरी गाण्ड में गर्म सूसू करके तुझे मज़ा देता हूँ.. तू भी क्या याद करेगी अपने भाई को.. चल घोड़ी बन जा जल्दी से..
गुड़िया घोड़ी बन गई.. कल्लू का लौड़ा पूरा तो कड़क नहीं था.. मगर उसने दोनों हाथों से गुड़िया की गाण्ड को फैला कर लौड़े का सुपारा गाण्ड में फँसा दिया और ज़ोर लगा कर सूसू करने लगा।
गुड़िया- आह्ह.. भाई.. कितना गर्म है.. मज़ा आ गया आह्ह..।

फिर दोनों एक दूसरे को नहलाते है।फिर दोनों शाम को घर आ जाते है।

अब कल्लू बहुत खुश था।उसकी बर्षो की इच्छा पूरी हो गई थी।उसके गाँव की नदी के कारण ही उसे उसकी माँ बहन और चाची की मस्त चूत और गांड मिली थी।

 

 

समाप्त

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