कल्लू और स्पीड से पेलने लगा.. गुड़िया से ऐसे तगड़े झटके बर्दास्त नहीं हुए वो झड़ने के करीब आ गई।
गुड़िया- आह्ह.. भाई तेज.. मेरी चूत आह्ह.. गई.. गई.. आह्ह.. आइ आइ..
गुड़िया कमर हिलाकर झड़ने लगी उसकी साँसें तेज हो गईं.. मगर कल्लू का अभी बाकी था.. वो ‘घपा-घाप’ लौड़ा पेल रहा था।
गुड़िया- आ आह्ह.. भाई आह्ह.. अब निकाल लो.. आह्ह.. मेरी चूत में आह्ह.. जलन हो रही है.. आह्ह.. उफ्फ.. उफ़फ्फ़..
कल्लू ने झटके से लौड़ा बाहर निकाल लिया.. तो गुड़िया तड़प सी गई..- आह्ह.. आज तो बड़े जोश में हो भइया.. लगता है आज मेरी खैर नहीं..
कल्लू- तेरा तो पता नहीं.. मगर आज तेरी गाण्ड की खैर नहीं है.. बहुत तड़पाती है मुझे.. आज उसको फाड़ के रख दूँगा मैं..
गुड़िया- भाई जोश में होश ना खो देना.. आज फाड़ दोगे.. तो दोबारा नहीं करना क्या आपको?
कल्लू ने गुड़िया के मुँह पर लौड़ा लगा दिया और हाथ से उसके बाल पकड़ कर लौड़ा उसके गालों पर घुमाने लगा।
गुड़िया- उफ्फ.. भाई क्या कर रहे हो.. बाल क्यों पकड़े हो मेरे.. दु:खता है ना..
कल्लू- अरे अभी कहाँ दु:खा है.. जब तेरी गाण्ड मारूँगा.. तब होगा असली दर्द तो.. मेरी जान ले चूस..
गुड़िया- भाई आपके इरादे ठीक नहीं लग रहे.. मुझे तो डर लग रहा है आपसे.. पता नहीं आज मेरी गाण्ड का क्या हाल करोगे..
कल्लू- डर मत मेरी जान.. तेरी गाण्ड इतनी प्यारी है.. इसको तो बड़े प्यार से खोलूँगा.. चल अब देर मत कर बन जा मेरी घोड़ी.. ताकि मेरे लौड़े को भी सुकून आ जाए..
गुड़िया- प्लीज भइया.. प्लीज़ दर्द मत करना.. आराम से डालना और प्लीज़ ऐसे सूखा मत डालो.. कोई आयिल लगा लो.. ताकि दर्द कम हो.. वो सामने देखो वहाँ से ले लो..
कल्लू खड़ा हुआ और आयिल की बोतल ले आया.. तब तक गुड़िया भी दोनों पैर फैला कर ज़बरदस्त कुतिया बन गई थी.. उसको देख के कल्लू खुश हो गया।

