गुड़िया- आह..भइया अब चुदाई शुरू कर दो.. मुझे दर्द नहीं हो रहा है.. आह.. करो न.. आह.. चोद दो मुझे.. आह.. आज मेरी निगोड़ी चूत की सारी गर्मी निकाल दो आह..
कल्लू जोर जोर से लौड़े को अन्दर-बाहर करने लगा। गुड़िया भी गाण्ड उठा कर उसका साथ देने लगी। चुदाई जोरों से शुरू हो गई..दोनों का तापमान बढ़ने लगा।
खच..चच . फच..फच.. आह.. उहह.. इससस्स.. आह.. उहह.. उहह..’ की आवाजें झोपडी में गूंजने लगीं।
गुड़िया- आह पेलो भइया. चोद डालो अपनी छोटी बहन को अपनी गुड़िया को।. आह.. आईईइ।
कल्लू- ले गुड़िया.. आह.. आज तेरे भाई का आह.. पॉवर देख.. आह.. तेरी चूत का आह भोसड़ा बना दूँगा मैं.. आह.. आज के बाद तू जब भी उहह.. चूत को देखेगी.. आह.. मेरी याद आएगी तुझे..दिन भर आज खेतो में दौड़ा दौड़ा के पेलूँगा तुझे।
दस मिनट तक कल्लू पूरी ताकत से गुड़िया को चोदता रहा। अब कल्लू तो पक्का चोदू बन चूका था।अब कहाँ वो जल्दी झड़ने वाला था। अब तो उसका टाइम और अनुभव बढ़ गया था। मगर गुड़िया की चूत लौड़े की चोट ज़्यादा देर सह ना पाई और उसके रस की धारा बहने को व्याकुल हो गई।
गुड़िया- आई आई.. आह.. भाई और जोर से पेलो.मैं झड़ने वाली हूँ। आह.. गई.. आह.. भाई.. ज़ोर से पेलो.. आहह.. उहह आह..।
कल्लू ने और तेज़ी से लौड़े को अन्दर-बाहर करना शुरू कर दिया। गुड़िया का बाँध टूट गया.. वो झड़ने लगी। कुछ देर बाद वो शान्त पड़ गई.. मगर कल्लू का अभी बाकी था.. वो धीरे-धीरे कमर को हिला रहा था।
गुड़िया अब शान्त लेट गई थी.. उसका सारा जोश ठंडा हो गया था। कल्लू ने अचानक लौड़ा बाहर निकाला और गुड़िया के पेट पर बैठ गया। उसके मम्मों के बीच लौड़े को रख कर कमर हिलाने लगा।
गुड़िया समझ गई कि कल्लू उसके मम्मों को चोदना चाहता है। उसने दोनों हाथों से अपने मम्मों को कस कर दबा लिए जिससे लौड़ा मम्मों के बीच अब टाइट होकर अन्दर-बाहर हो रहा था।
कुछ देर तक ये चलता रहा.. उसके बाद कल्लू ने आसान बदल दिया। वो घुटनों के बल झोपडी में खड़ा हो गया.. जिसे देख कर गुड़िया मुस्कुराई।
गुड़िया- क्या हुआ भइया.. मज़ा आ रहा था.. खड़े क्यों हो गए?
कल्लू- मेरी जान लंड को थोड़ा चूस कर चिकना कर दे.. उसके बाद तुझे घोड़ी बना कर चोदूँगा.. तेरी चूत की गर्मी तो निकल गई.. अभी मेरा रस निकलना बाकी है।
गुड़िया हँसती हुई अपने भइया के मोटे लौड़े को चूसने लगी.. अपने मुँह में पूरा लौड़ा लेकर अच्छी तरह उसको थूक से तर कर दिया।
कल्लू- आह्ह.. आह्ह.. बस गुड़िया.. अब बन जा घोड़ी.. आज तेरी सवारी करूँगा.. आह्ह.. अब बर्दास्त नहीं होता आह्ह.. आह्ह।
गुड़िया घुटनों के बल अच्छी तरह पैर फैला कर घोड़ी बन गई.. वैसे तो ये उसका पहली बार था.. मगर जिस तरह वो घोड़ी बनी थी.. कल्लू। को बहुत अच्छा लगा कि उसकी बहन एकदम मस्त घोड़ी बनी है।
कल्लू- वाह.. मेरी गुड़िया क्या जबरदस्त घोड़ी बनी है तू.. अब ठुकाई का मज़ा आएगा.. तेरी चूत कैसे फूली हुई है.. उफ़फ्फ़ साली ऐसी रसीली चूत देख कर लौड़े की भूख ज़्यादा बढ़ जाती है।
कल्लू ने लौड़े को चूत पर टिकाया और पूरा एक साथ अन्दर धकेल दिया।
गुड़िया- आईईइ.. भइया आराम से.. आह्ह.. एक बार में पूरा घुसा दिया.. आह्ह.. आज तो आराम से करो.. जितनी बार चाहो चोद लेना..
कल्लू- अरे मेरी प्यारी गुड़िया. तेरी चूत देख कर बहक गया था.. अब आराम से करूँगा।

