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रात को गुड़िया सहेली के बर्थडे में थोडा लेट से आती है।वह दिनभर के भागदौड़ में थक गई थी।इसलिए अपनी माँ के पास सो जाती है।कल्लू भी दिनभर अपनी माँ की चुदाई करके थका हुवा था।वह भी जल्दी ही सो जाता है।

सुबह बाबा बताते है की वह गुड़िया की माँ के साथ शहर जा रहे है।कुछ बैंक का काम था।वह कल्लू से बोलते है की गुड़िया के साथ खेतों में चले जाना।हमलोग शाम तक आएंगे।
कल्लू गुड़िया की तरफ देखकर मुस्कुराता है की आज दिनभर खेतों में मज़ा आएगा।गुड़िया भी अपनी चूत सहला कर इशारा करती है।

जब बाबा और माँ शहर चले जाते है तो कल्लू गुड़िया को बाँहों में भर लेता है और उसके रसीलें होठों को चूसने चाटने लगता है।फिर गुड़िया के कोमल हाथ को पकड़कर अपने लंड पर रख देता है जिसे गुड़िया सहलाने लगती है।और अपने भइया के मुह में अपनी जीभ डाल देती है।
कल्लू:गुड़िया चल जल्दी से खेतों में आज तुझे खेतों में पूरी नंगी करके चोदने का मन कर रहा है।कितना मज़ा आएगा जब तू खेतो में पूरी नंगी होगी और मैं तुझे अपने लंड पर चढ़ा लूंगा।
गुड़िया :चलो भइया।मैं क्या पहन लूँ।

कल्लू:अपनी टॉप और स्कर्ट पहन ले बिना ब्रा पेंटी के।और थोडा मेरा लौड़ा चूस दे अभी।मैं तेरी मस्त गांड देखते हुए खेतो तक चलूँगा।
गुड़िया अपने भइया का लंड धोती से निकालती है और जीभ से चाटने लगती है।कल्लू का लंड फ़ुफ़कारने लगता है।
कल्लू:अब चल मेरी जान।नहीं तो यही पेलना शुरू कर दूंगा।
दोनों खेतो की और चल देते है।रास्ते भर गुड़िया स्कर्ट हटा कर अपनी मोटी मोटी गाँड दिखाकर कल्लू को पागल बना देती है।कल्लू जब उसकी गांड में ऊँगली करना चाहता है तो भाग जाती है।
कल्लू मन ही मन :आज तो खेतो में नंगी करके कुतिया बना के तेरी गांड नहीं मारी तो मेरा नाम कल्लू नहीं।साली मेरे सामने गाँड मटकाती है।
फिर दोनों खेत में बनी झोपडी में जाते है।फिर गुड़िया खटिया के निचे बिस्तर लगा देती है।और दोनों बाते करने लगते है।

गुड़िया- ओके भइया. अब सिर्फ बातें ही करोगे या मेरी जवानी का मज़ा भी लोगे।
कल्लू- अरे तेरी जवानी तो ऐसी है.. कि लंड अपने आप इसे सलामी देने लगता है। पहली बार रात में तो सब जल्दबाज़ी में हुआ तो ठीक से मैं तुम्हारे इन रसीले होंठों का मज़ा नहीं ले पाया। इन कच्चे अनारों का जूस नहीं पी पाया.. अब सुकून से इनको चूस कर मज़ा लूँगा, तेरी महकती चूत को चाट कर उसकी सूजन कम करूँगा।
कल्लू की बातों से गुड़िया उत्तेज़ित होने लगी थी। वो कल्लू की जाँघों पर सर रख कर लेट गई और उसके लौड़े को सहलाने लगी।
कल्लू- आह गुड़िया तुम्हारे हाथ भी बहुत मुलायम हैं.. लंड पर लगते ही करंट पैदा हो जाता है।
गुड़िया कुछ बोली नहीं और लौड़े पर जीभ फेरने लगी.. वो बहुत ज़्यादा मस्ती में आ गई थी। उसकी चूत लौड़े के लिए तैयार हो गई थी।
कल्लू- आह..गुड़िया उफ़.. तेरे ये रसीले होंठ आह.. मेरे लौड़े को पागल बना रहे हैं.. तुम मुझे पागल बना रही हो आह..
गुड़िया- भइया आप देखते जाओ.. इतने सालों से मैं शरीफ बनके जी रही थी.. मगर मुझे अब पता चला जो मज़ा चुदाई में है.. वो पढाई में नहीं.. उफ़.. आपका ये गर्म लौड़ा मुझे चूसने में बहुत मज़ा आ रहा है। आपकी बहन अब पूरी आपकी है.. आ जाओ नोंच डालो मेरे जिस्म को.. कर दो मुझे अपने इस लौड़े से ठंडी.. आह.. अब मेरा बदन जलने लगा है।

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