निर्मला अपनी चीखें छूपाने के लिए पेंटी अपने मुह में ठूँस लेती है। मगर गुं गुं हूं की आवाज़ें फिर भी उसके मुह से निकल रही थी
कल्लू;तब तक नहीं रुकता जब तक पूरा का पूरा लंड गाण्ड में नहीं चला जाता। जब कल्लू लण्ड को खिचता है तो थोड़ा सा खून भी उसके लंड से लग जाता है।
जो निर्मला के गाण्ड से निकल रहा था।
कल्लू ;तुझे दर्द हो रहा था तो मुझे रुकने के लिए बोली क्यूँ नही माँ।
निर्मला;मुड कर कल्लू के आँखों में देखने लगती है।
बहुत तड़पाया हैं मैंने तुझे ।जो तड़प का दर्द तूने सहा है मेरी वजह से उस दर्द के सामने ये दर्द तो कुछ भी नहीं है। रुक मत खोल दे आज अपने माँ के हर सुराख़ को।
और कल्लू अपने माँ की आज्ञा का पालन करते हुए तेल से सना हुवा लंड गप की आवाज़ के साथ अपनी माँ निर्मला की गांड में उतार देता है।
निर्मला ;आह बेटे आह। और ज़ोर से।जालिम और ज़ुल्म कर अपने माँ पर ।तेरा हर ज़ुल्म सहना चाहती हूँ मै आज से हर दिन हर रात हर सुबह हर घडी ही चोद मुझे आह।
कल्लू;गप गप अपनी माँ की गाण्ड मारने लगता है
हलांकी दोनों को दर्द भी हो रहा था मगर वो मोहब्बत ही क्या जिस में दर्द न हो। सच्ची मोहब्बत में दर्द भी होता है और उस दर्द का मजा भी खूब होता है।
कल्लू अब अपनी पूरी ताकत से निर्मला की गांड मारने लगता है।वह गांड में लंड पेलने के साथ ही कभी कभी निर्मला के गांड पर थप्पड़ भी मार रहा था जिससे निर्मला के गोरे गोरे चूतड़ लाल हो गए थे।1 घंटे तक जबरदस्त धक्को के साथ चुदाई के बाद कल्लू अपना पूरा माल अपनी माँ की गांड में ही भर देता है।इतनी देर में निर्मला 2 बार झड़ चुकी थी।
दोनों कुछ देर शांत हो जाते है।फिर कल्लू अपनी माँ की गांड को साफ करता है।और अपनी माँ की चूत और चूचों से खेलने लगता है।जिससे कुछ ही देर बाद उसका लंड खड़ा होने लगता है जिसे वह निर्मला को चूसने का इशारा करता है।जिसे निर्मला अपने मुँह में ले लेती है।
पाँच मिनट चूसने पर ही कल्लू का लंड फ़ुफ़कारने लगता है।
अब कल्लू अपनी माँ की चूत पर झुक जाता है।
कल्लू अपनी मा की चूत की फांको को दोनो हाथो से फैलाकर उसकी चूत के दाने से रिस्ते पानी को अपनी जीभ से दबा-दबा कर जैसे-जैसे चूस्ता है निर्मला उह आ ओ बेटे करने लगती है,कल्लू उसकी एक टांग को उठा कर अपने कंधे पर रख लेता है और फिर अपनी मा की पूरी चूत को सूंघते हुए अपनी जीभ चूत के छेद मे भर-भर कर उसका रस चूसने लगता है।
निर्मला अपने हाथो से अपनी चूत को और फैला देती है और कल्लू बड़े आराम से अपनी मा की चूत को चूस्ते हुए अपनी मा की गुदाज गान्ड को दबाता हुआ उसके छेद मे उंगली डाल-डाल कर सहलाता रहता है
कल्लू अपनी मा की चूत चूस-चूस कर उसे लाल कर देता है और निर्मला की टाँगे काँपने लगती है वह सीधे ज़मीन पर लेट जाती है और कल्लू को अपने उपर खीच लेती है।
कल्लू अब ज़रा भी देर नही करता है और अपनी मा की मोटी जाँघो को फैला कर जब अपनी मा की फूली हुई गुदाज चूत देखता है तो पागल हो जाता है और अपनी माँ की चूत की फांको को खूब फैला-फैला कर चाटना शुरू कर देता है, निर्मला अपनी मोटी गान्ड उचका-उचका कर अपने बेटे का मुँह अपनी चूत पर दबाने लगती है।
कल्लू अपने मुँह मे अपनी मा की चूत पूरी भर कर खूब कस-कस कर चूसने लगता है और निर्मला अपनी चूत उसके मुँह पर रगड़ते हुए पानी छोड देती है, कल्लू सारा पानी चाटने के बाद अपनी मा की चूत को उपर अच्छे से उभार कर अपना मोटा लंड अपनी मा की चूत के छेद मे लगा कर एक कस कर धक्का मारता है और उसका लंड उसकी मा की चूत मे पूरा एक ही बार मे समा जाता है।

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