मेरे गाँव की नदी – Update 33 | Incest Sex Story

मेरे गाँव की नदी – Incest Sex Story
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फिर से कहानी कल्लू के शब्दों में-

गीतिका मेरे बगल में लेट गई और मैंने जब करवट ली तो गुड़िया की मोटी गाण्ड मेरे लंड से सट गई मेरा लंड तो गुड़िया की गुदाज जवानी और मोटे मोटे दूध देख कर ही खड़ा हो गया था तभी माँ अपने घाघरे के ऊपर से अपनी चुत पोछते हुए बाथरूम से निकली और हम दोनों ने आंखे बन्द कर ली माँ थोड़ी देर बाद एक चादर ले कर आई और हम दोनों के ऊपर डाल कर अंदर चलि गई।
मैने धीरे से कहा गुडिया।
गूडिया : क्या भइया, गुड़िया ने मेरी ओर मुह कर लिया और मुझे देखने लगी।
कालू : गुड़िया कल फिर चलेगी मेरे साथ नदी में नहाने।
गुडिया : हाँ चलूँगी लेकिन मै आपकी गोद में चढ़ कर पानी में उतरूँगी मुझे बड़ा डर लगता है।
कालू : तू फिकर न कर मै अपनी प्यारी बहना को अपनी गोद में उठा कर नहलाउंगा, इतना कह कर मैंने गुड़िया की मोटी गाण्ड पर हाथ रख दिया।
उसकी स्कर्ट पहले से ही ऊपर चढ़ी हुई थी और मेरा हाथ उसकी नंगी गाण्ड पर चला गया, मेरा लंड यह जान कर पूरी तरह अकड गया की गुडिया ने पेंटी नहीं पहनी हुई थी, मेरी उंगलियो से उसकी गाण्ड की दरार बस एक इंच की दूरी पर थी लेकिन मै हाथ आगे नहीं बढा पा रहा था।
गुडिया : भैया आप मुझसे बहुत प्यार करते हो ना।
कालू : यह भी कोई पुछने की बाद है, गुड़िया ने इतना सुना और अपने मुह से मेरे होठो को चुम लिया और मेरा हाथ अपने आप मेरी बहन गुडिया की मोटी गाण्ड की गहरी दरार में चला गया, मेरे हाथ गुड़िया की गुदा को जैसे ही सहलाने लगे गुड़िया कस कर मुझसे चिपक गई।

 

अब मै बेतहाशा गुड़िया के रसीले होठो को चुसने लगा और उसकी मोटी गाण्ड की गहरी दरार में हाथ फेरने लगा।
गुडिया : भैया एक बात कहूँ।
कालू : क्या।
गुडिया : भैया आप बहुत अच्छा चाटते हो, इतना कह कर गुड़िया मुस्कुराने लगी, मैंने गुड़िया की छाती पर धीरे से हाथ रखा तभी गुड़िया ने मेरे हाथ के ऊपर हाथ रख कर अपने दूध को दबाने का इशारा किया।
कालू : क्या कह रही थी तु।
गुडिया : मुस्कुराते हुये, क्या।

कल्लु : क्या चाटने की बात कह रही थी।
गुडिया : शर्मा कर अपने मुह को मेरे सिने में छुपाते हुए कहने लगी कुछ नही।
कालू : मैंने धीरे से गुड़िया की गुदा सहलाते हुए उसकी चुत की फांको को उंगलियो से सहलाया और फिर कहा बता न गुड़िया मै क्या बहुत अच्छा चाटता हूँ।
गुडिया : धीरे से मेरे कान के पास मुह लगा कर कहने लगी, भैया आप चाटते थोड़े ही हो, आप तो चुसते हो और पीते हो।
कालू : गुड़िया के मोटे मोटे दूध को दबाते हुये, बता न क्या पीता हूँ।

गुडिया : अपनी बहन की चुत और क्या।
कालू : भला कोई भाई अपनी बहन की चुत पीता है क्या इतना कह कर मैंने अपनी जीभ गुड़िया के मुह में डाल दिया और वह मेरी जीभ चूस कर कहने लगी।

भैया आज कल तो सब सबसे पहले अपनी बहन की ही चुत पीना पसंद करते है।
कालू : तुझे कैसे पता है यह सब।
गुडिया : मैंने क़िताबों में पढ़ा है।
कालू : क्या लिखा था उसमे।
गुडिया : मुझे शर्म आती है।
कालू : अच्छा मै तेरी चुत चाटूंगा फिर तो बतायेगि।
गुड़िया : मुस्कुराते हुए ठीक है लेकिन कोई देख लेगा तो।
कालू : एक काम करते है में तेरे पैरो की तरफ सर कर लेता हु और चादर ढक कर लेट जाते है फिर मैंने अपना सर गुड़िया के पैरों की तरफ कर लिया, गुड़िया ने अपनी मोटी भरी हुई जांघो को फैला दिया और मै उसकी रसीली चुत की मादक गंध सूँघते ही पागल हो गया और अपनी बहन की रसीली चुत को अपनी जीभ से चाटने लाग, लेकिन तभी मुझे जोर का झटका लगा जब गुड़िया ने मेरे काले लंड को धोती के ऊपर से अपने हाथ में भर कर दबोच लिया, मै उस एह्सास से पागल होने लगा और गुड़िया की मस्त चुत को अपने हांथो से फैला फैला कर चाटने लगा। इतने में गुड़िया ने मेरे लंड को धोती से बाहर निकाला और मेरे लँड को चुसने लगी ।मैं तो चकित हो गया की गुड़िया किसी एक्सपर्ट की तरह मेरे मस्त लंड को चूस रही थी,गीतिका ने 10 मिनट तक मेरे लंड को अच्छी तरह से चाटा और चूसा मेरे लंड पूरा रॉड बन गया था।मैंने भी गुड़िया की चूत को फैला फैलाकर चाटा।

कुछ देर बाद गीतिका ने कहा भैया इधर आओ न, मै उठ कर उसकी तरफ चला गया और उसे देखा तो उसने मेरे हाथ पकड़ कर अपने मोटे मोटे दूध पर रख दिए और मै अपनी बहन के कसे हुए ठोस दूध को कस कस कर दबाने लगा, रात के १२ बज चुके थे गांव में सन्नाटा था और गीतिका अपने दूध दबवाते हुए मेरे लंड को खूब दबा दबा कर देख रही थी।

मै गुड़िया के रसीले होठो को चूस रहा था।

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