मेरे गाँव की नदी – Update 11 | Incest Sex Story

मेरे गाँव की नदी – Incest Sex Story
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निर्मला तु और कल्लु वो सामने की घास बची है उसे मिल कर काट लेना और उधर गट्ठर बना कर रख देना।

बाबा के जाने के बाद वह बिरजु आ गया और माँ के पैर छुता हुआ कहने लगा पाय लागूं बड़ी माँ।
निर्माला : क्यों रे बिरजु आज कल तो तू इधर का रास्ता ही भूल गया, कहा है तेरी माँ।
बीरजु : बड़ी माँ वहाँ खेत में है, संतोष चाची का खेत नदी के उस पार था और चूँकि नदी में पानी न के बराबर था इसलिए माँ ने गुड़िया से कहा चल गुडिया
तूझे चाची के खेत दिखा कर लाती हु और फिर माँ ने मेरी ओर देखते हुये कहा कल्लु मै अभी एक घंटे में आती हु तब तक तू वहाँ की घास काटना शुरू कर दे फिर मै भी आकर कटवाती हु और माँ गुड़िया के साथ जाने लगी।,
बीरजु बराबर गुड़िया के बोबो को देख रहा था और जब गुड़िया जाने लगी तो वह उसके चूतडो को घुरने लगा, मैंने बिरजु को देखा और जब मैंने गुड़िया के चूतडो
को देखा तो वह बहुत मटक रहे थे, लेकिन तभी मेरी नजर माँ के चूतडो पर पडी तो मुझे मजा आ गया माँ के चूतड़ गुड़िया से काफी बड़े और हैवी नजर आ रहे थे, जिन्हे देखते ही लंड अकड गया था।

कल्लु : क्यों रे आज कल दिन भर अपने खेतो में ही घुसा रहता है गांव में भी कम नजर आता है।
बीरजु : तुझे क्या करना है दादा मै घर में रहु या बाहर।
कालू : अच्छा बिरजु मैंने सुना है तू चुदाई की कहानी की किताब पढता है।
बीरजु : सकपकाते हुये, तुम ।।।।तुमसे किसने कह दिया, मै ऐसे काम नहीं करता हूँ।
कालू : झूठ न बोल मुझे सुख लाल ने सब बता दिया है जब तुम दोनों शहर गए थे और वह तुमने किताब ख़रीदी थी
बीरजु : अरे दादा तुम उसकी बात कहा मान गए वह तो पक्का मादरचोद है।
कालू : अच्छा सुख लाल तो तेरा दोस्त है ना।
बीरजु : अरे दोस्त तो है दादा लेकिन है पक्का मादरचोद।
कालू : वह भला क्यो।
बीरजु : अरे दादा एक दिन मै उसके घर गया तो उसकी माँ ऑंगन में नंगी होकर नहा रही थी और सुख लाल छूप कर अपनी माँ को पूरी नंगी देख रहा था और अपना लंड मुठिया रहा था।
कालू : इस हिसाब से तो तू भी पक्का मादरचोद है।
बीरजु : मुझे देख कर सकपकाते हुये, मै क्यों मादरचोद होने लगा।
कालू : अच्छा कल तो नदी के अंदर झाड़ियो के पास चाची के साथ क्या कर रहा था।

मेरी बात सुन कर बिरजु का गला सूखने लगा और वह हकलाने लगा और कहने लगा वो तो ।।।। वो तो दादा माँ के पांव में काँटा लगा था मै उसे ही निकाल रहा था।
कालू : झूठ न बोल तू समझता है मै कुछ जानता नही, मैंने सब देखा था की तो काँटा निकालने के बहाने क्या देख रहा था।
बीरजु : अपने माथे का पसीना पोछते हुये, नहीं तुम्हे धोखा हुआ है दादा मै कुछ नहीं देख रहा था मै तो बस माँ के पैर में लगे काँटे को निकाल रहा था।

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