मेरी सेक्सी बहनें – Update 31 | Erotic Love Story

मेरी सेक्सी बहनें - Love Hatred Seduction
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विजय को कुछ दिन हवालात में गुज़ारने पड़े.. लेकिन अंशु के पति ने उसकी बैल करवाई.. डॅड मीडीया और गवरमेंट के प्रेशर में थे जो उन्होने खुद ही बनाया था…. इसलिए उन्होने विजय की बैल नही करवाई, और मीडीया में प्रेस रिलीस भेज दिया

“दिस ईज़ टू इनफॉर्म दा एंटाइयर मीडीया आंड ऑल दा एंप्लायीस ऑफ दा कंपनी, ड्यू टू सम अनफॉर्चुनेट इवेंट दट हॅज़ टेकन प्लेस रीसेंट्ली, आइ अफीशियली टर्मिनेट दा एंप्लाय्मेंट ऑफ मिस्टर विजय वीरानी ऐज जॉइंट चेर्मन फ्रॉम दिस कंपनी.. हाउएवर ड्यू टू हिज़ पर्सनल स्टेक इन दा होल्डिंग्स ऑफ दा कंपनी, ही कॅन स्टिल वर्क बट ओन्ली ऐज प्रोडक्षन हेड ऑफ दा कंपनी… वन्स दा केस अगेन्स्ट हिम ईज़ प्रूव्ड ऑर इफ़ ही ईज़ नोट गिल्टी, सूटेबल आक्षन विल बी टेकन इन फर्दर कोर्स ऑफ टाइम…”

बॅक टू प्रेज़ेंट

“भाई… भाई… व्हाट हॅपंड….” ललिता ने मुझे कंधे से झटकते हुए पूछा

“हुह… क्या कहा तुमने…” मैं अपने ख़यालों से बाहर आके पूछा

“कुछ नहीं… आप ही खो गये थे संजय के नाम से” ललिता ने अपना चेहरा बनके बोला

“आंड वैसे भी भाई, अगर मैं मान लूँ आपकी बात, तो संजय को फॅक्टरी के फाइनान्षियल्स के बारे में कैसे पता… ऐज ऑफ नाउ आइ आम अस्यूमिंग कि पूजा की शादी आपसे सिर्फ़ फॅक्टरी में स्टेक की वजह से हो रही है.. अंकल ने अपनी पर्सनल वेल्त पूजा और आपके नाम की है वो तो पूजा को कल पता चला… सो क्वेस्चन रिमेन्स, हाउ जय नोज अबाउट फाइनान्षियल्स ऑफ दा कंपनी हाँ” ललिता मेरे सामने चेर लेके बैठ गयी

“तेरे डॅड… उन्होने ही बताया होगा” मैने जवाब दिया ललिता को

“ओह कम ऑन भाई… डॅड कुछ पढ़े लिखे नहीं है, आप जानते हो, उनको फाइनान्षियल्स तो क्या उनको फाइनान्स का फ भी नहीं पता… और अगर उन्हे फाइनान्षियल्स पता होते तो वो अंकल के पर्सनल असेट्स भी जानते होते… उन्होने प्लाननिग सिर्फ़ ये समझ के की है कि पूजा को फॅक्टरी का ओनर बनाएँगे और अंकल के नाम जो प्रॉपर्टी है उनकी वॅल्यू 35 करोड़… अभी तो उनको कंपनी के होल्डिंग स्ट्रक्चर भी नहीं पता हैं विच अलोन ईज़ वॅल्यूड अट 20 करोड़ अट दा फेस वॅल्यू.. अभी तो हमारी कंपनी लिस्टेड भी नहीं है, जब वो होगी दिस वॅल्यू कॅन गो 10 टाइम्स हाइयर ऐज वेल… सो दट विल कम टू 200 करोड़ ओन्ली शेर्स वॅल्यू… मेरे डॅड को इतना नालेज होता तो ये पेसोनल वेल्त आज उनकी होती…. आंड बिसाइड्स, डॅड को अपनी होल्डिंग्स की वॅल्यू नहीं पता तो अंकल को कैसे मालूम होगी.. थ्ट्स इट” ललिता ने सॉफ सॉफ अपनी बात कही

“अगर आप कॅल्क्युलेट करोगे, अंकल का नेट वर्थ 265 करोड़ से 465 करोड़ होगा, इफ़ यू आड दा कंपनी होल्डिंग्स वॅल्यू.. कन्सिडरिंग के कंपनी लिस्ट होने वाली है इन कमिंग यियर्ज़ , से 2 ओर 3 यियर्ज़.. अगर उससे ज़्यादा होगा तो प्रॉफिट बढ़ेगा तो कंपनी की वॅल्यू भी अकॉर्डिंग्ली बढ़ेगी..” ललिता ने फाइनली अपनी बात ख़तम कि और मेरे लिए और खुद के लिए एक सिगर्रेट जला ली

“ललिता, इतना ध्यान से स्टेट्मेंट्स को तुमने और मैने पढ़ा है.. बट यू नो, हमारे अलावा एक और बंदा है जो हमारे स्टेट्मेंट्स देखता है… रोज़, सुबह शाम… ” मैने ललिता को क्लू देते हुए कहा

“भाई, मैं समझ गयी आपका क्लू… वी नीड टू डील विद हिम इन लीगल वे ऑलराइट.. हां उससे बात निकलवानी है तो कल हम चलते हैं उसके पास.. फिलहाल सो जाते हैं, रात के 3 बज गये हैं..” कहके ललिता फिर मेरे बेड पे सो गयी..

“ये क्या है, रोज़ रोज़ इधर क्यूँ..” मैने मस्ती मे ललिता से पूछा

“क्यू , नहीं सो सकती, सिर्फ़ बीवी ही सोती है क्या.. भाई बहेन नहीं सो सकते… बड़े आए” ललिता कहके हँसने लगी

कुछ सेकेंड्स तक मैं खामोश रहा… मेरे दिमाग़ में एक सवाल था, जो मैं ललिता से उस वक़्त पूछना चाहता था, पर समझ नहीं आ रहा था कैसे पूछूँ…

“क्या हुआ.. कुछ बाकी है पूछना भाई.” ललिता बेड से उठके मेरे पास बैठ गयी

“ललिता…. आइ आम सॉरी तुझे संजय की याद दिला दी, बट इन सब चीज़ों में मैं भूल गया था कि एक वक़्त ऐसा भी आया था जब मैने तुम्हारे साथ भी होटेल में….” इससे आगे मैं बोल नहीं पाया

“भाई… आप प्लीज़ ऐसा मत सोचो… संजय ने ज़बरदस्ती की थी, और हम मर्ज़ी से थे.. हां हमारे हालत ऐसे थे कि हम मजूर थे उस वक़्त, लेकिन संजय की कोई मजबूरी नहीं थी.. इसलिए आप प्लीज़ अपनी तुलना उसके साथ ना करें… यू आर माइ बेबी यार, कम ऑन नाउ, गिव मी हग ” कहके ललिता ने अपनी बाहें खोली और मैं उसके गले लग गया

“अब सो जाइए, सुबह को काम है याद है ना… बस एक आखरी काम , फिर परदा उठाने का टाइम है” ललिता ने मेरे कान में कहा

ललिता और मैं यूही बातें करते करते सो गये.. रात को लेट सोए थे, तभी सुबह हम दोनो की आँख नहीं खुली.. दोपहर के 2 बजे करीब हमे मोम और शन्नो दोनो उठाने आए

“बेटे उठो, तुम दोनो यहाँ क्यूँ सोए हो” मम्मी ने ललिता को उठाते हुए कहा

‘, उठो भी, अब चलो तैयार हो जाओ, मेहमान आए हुए हैं घर पे.. 2 बज गये हैं दोपहर के” शन्नो ने मुझे उठाते हुए कहा

“व्हाट !!!! 2 बज गये… आपने हमे पहले क्यूँ नहीं उठाया मोम…” ललिता और मैं दोनो एक साथ बोल पड़े उठ के…

“तुम यहाँ क्यूँ सोई हो ललिता” शन्नो ने गुस्से में ललिता से पूछा

“मम्मी, मैं अपने कमरे में ही थी, पर रात को डर लग रहा था, इसलिए सुबह 4 बजे भाई के कमरे में आ गयी.. और देरी हो गयी” ललिता ने झूठ बोल दिया

ललिता और मैं जल्दी तैयार होने लगे.. तैयार होके हमने लंच किया और जल्दी से गाड़ी में बैठ के पास ही बनी बस्ती में चले गये…

“बेटा, शाम को जल्दी आना..” जाते जाते मैने मोम की चीख सुनी

जैसे ही हम बस्ती में पहुँचे, कुछ दूर जाके हमे एक आदमी दिखा

“गफ़ूर भाई…” ललिता ने उस आदमी से पूछा

“मैं हूँ बोलो…” गफ़ूर ने हमे देखते हुए अपनी कड़क आवाज़ में कहा

मैने जेब से 10,000 की गॅडी निकली और उसे काम समझा दिया..

“हहहा… आपका काम 2 घंटे में हो जाएगा… कहाँ मिलना है शाम को” गफ़ूर ने हमे पूछा

“यहीं, हम 2 घंटे में फिर आएँगे, तुम उसे ले आओ.. और अपने घर में खातिरदारी करो” मैने जाते हुए गफ़ूर को कहा

दोपहर के करीब 3.30 बज रहे थे.. भूख बहुत लगी, ललिता और मैं नज़दीकी एमसीडी में चले गये.. जाके हमने खाना ऑर्डर किया और बातें करने लगे

“आइ थिंक दिस ईज़ इट.. इसके बाद हमारा कोई काम पेंडिंग नहीं रहता भाई..” ललिता ने अपना बर्गर खाते हुए कहा

“हां.. बाकी तेरी सब फ्रेंड्स को इन्वाइट दे दिया तूने…” मैने अपने मोबाइल में देखते हुए पूछा

“हां भाई.. अब आप खाओ कुछ पहले” ललिता ने मेरे हाथ से मोबाइल लेके अपने बॅग में डाल दिया

“अरे मैं चेक कर रहा हूँ सब फ्रेंड्स को इन्वाइट दिया कि नही… मेरी कंपनी में भी सब को इन्वाइट चेक कर रहा हूँ” मैने अपना मॅक खाते हुए बोला

“चलो…. आज हुई 17.. कल रात को पत्ते खुलेंगे भाई. वैसे ज़य भी कल आएगा ना.. बीन लोंग टाइम उसको देखे हुए…कितने बजे फ्लाइट है उसकी” ललिता ने एक और बर्गर ऑर्डर कर दिया अपने लिए

“उसका मसेज नहीं आया अब तक, फोन दे तो पूछूँ” कहके मैं फिर अपने मोबाइल के लिए हाथ बढ़ाया और ज़य को कॉल किया

“हां छोटू.. कितने बजे की फ्लाइट है भाई तेरी कल की” मैने ज़य से पूछा

“भाई, दोपहर 12 बजे आ जाना आप. और मैं कितने बजे आ रहा हूँ बस आप ही जानते हो ओके, ” ज़य ने जवाब दिया

“हां छोटू जानता हूँ, लास्ट टाइम पायल लेने आई थी तुझे अच्छा नहीं लगा… चिंता मत कर, इस बार मेरे साथ एक स्वीट सर्प्राइज़ है तेरे लिए” चल बाइ 

“क्या भाई, मेरी तो बात करवाते कम से कम… चलो, कल मैं भी चलूंगी साथ आपके” ललिता फिर अपना बर्गर खाने में लग गयी

“हां रे, यूआर दा सर्प्राइज़ फॉर हिम…” मैने इतना ही कहा के एक अननोन नंबर से कॉल आया

“हेलो… हू ईज़ दिस…” मैने फोन पे पूछा

“गफ़ूर भाई है अपुन… आपका पार्सल आएला है, मेरे घर आ जाओ” कहके उसने फोन कट किया

ललिता और मैं बिल पे करके गफ़ूर की बस्ती में चल दिए.. शाम होने आई थी, इसलिए ट्रॅफिक बढ़ने लगा था… जैसे जैसे हम गफ़ूर के घर के नज़दीक पहुँचते, हमारे दिल की धड़कन तेज़ होती जाती.. अगर हमारा अंदाज़ा सही है तो कोई प्राब्लम नहीं है, लेकिंग अगर हमारा अंदाज़ा ग़लत हुआ तो डॅड से मार पड़ेगी और लीगल केस भी हो सकता था ललिता और मुझ पे…… ललिता और मैं तेज़ी से चलते चलते गफ़ूर के घर के बाहर पहुँचे..

“फ्यू !!!! होल्ड माइ हॅंड… आइ डोंट वान्ट टू स्किप माइ हार्टबीट नाउ…” कहके ललिता ने मेरा हाथ पकड़ा और ज़ोर ज़ोर से साँसे लेने लगी…

“चलो, ” कहके ललिता ने दरवाज़ा खाटकाया और दरवाज़ा खुलते ही हम अंदर आ गये

हमारे अंदर जाते ही रूम में अंधेरा था, वो अब उजाले में बदल चुका था.. सामने कुर्सी पे एक बंदा बैठा हुआ था, उसके आस पास गफ़ूर के आदमी, उसके हाथ पर बँधे हुए थे, मूह में कपड़ा था तो वो बोल नहीं पा रहा था, मूह पे काला कपड़ा ढका हुआ था…

“इसका मूह दिखाओ” मैने गफ़ूर से कहा

गफ़ूर ने मूह पर से कपड़ा हटाया… धीरे धीरे वो आदमी अपनी आँखें खोलने लगा… जैसे ही उसे सॉफ दिखाई दिया, उसकी आँखें बड़ी हो गयी मुझे देख के… मैं उसके सामने वाली कुर्सी पे बैठ गया

“हेलो मिस्टर चौकसे… हाउ आर यू” मैने उस आदमी से हंस के पूछा

“मिस्टर वीरानी.. व्हाट ईज़ दिस…” कहके वो आदमी दाँत पीसने लगा

“मिस्टर चौकसे, हमे आपसे कुछ जानना है.. प्लीज़ कोओपरेट नहीं तो” ये कहके मैने एक नज़र गफ़ूर को देखा, और उसने तुरंत अपने आदमी से इशारा किया.. उसका आदमी हाथ में एलेक्ट्रिक वाइर्स लेके खड़ा था…

“शॉकिंग ना.. ” मैने एक बार फिर चौकसे की आँखों में देख के कहा

“व्हाट डू यू वान्ट” उसने सिर्फ़ इतना ही कहा

“ललिता…. ही ईज़ ऑल युवर्ज़…” कहके मैं वहाँ से उठ गया और ललिता को कुर्सी पे बिठाया

“मिस्टर चौकसे.. मुझे हर एक सवाल का जवाब सीधा चाहिए.. अगर एक सवाल सही एक ग़लत हुआ, तो आपको इतने शॉक लगेंगे कि आप सोच भी नहीं सकते…” गॉट इट…

ये कहके ललिता और मैं चौकसे से सवाल पूछने लगे… उसने कितने शॉक खाए वो ललिता और मैं भी काउंट करना भूल गये थे… फाइनली 3 घंटे के बाद ललिता और मैने उससे सच निकलवाया, और उसको रेकॉर्ड कर लिया

“ये लो भाई.. आपकी सीडी.. कुछ और काम हो तो बुला लीजिएगा” गफ़ूर ने हमे कहा

“ये लो..” ललिता ने 5000 और देते हुए कहा

“ये किसलिए मेडम” गफ़ूर ने पैसे लेते हुए कहा

“इसका हुलिया ठीक करो, इसे छोड़ आओ जहाँ से लाए थे.. बाकी के जितने बचें तुम्हारे लड़को की बख़्शीस… पर याद रहे अगर ये बात बाहर गयी, तो मैं कमिशनर की बेटी हूँ.. सोच लो अंजाम अपना, ” कहके ललिता वहाँ से चली गयी , उसकी आँखों पे डार्क ग्लासेज लगा के.

“ये सही में कमिशनर की छोकरी है” गफ़ूर ने मुझसे पूछा

“मैं उसका भाई हूँ.. ध्यान रहे” कहके मैं भी वहाँ से निकल गया

ललिता और मैं गाड़ी में आ गये… घर जाके सबसे पहले हमने रूम को लॉक किया और एन्षूर कर लिया चौकसे की सीडी सही है, कोई एरर नहीं है… हमने उसकी कॉपी बना ली और ओरिजिनल को लॉकर मे छुपा लिया.. मेरे रूम का लॉकर कोड सिर्फ़ मेरे पास था सो नो वरीस…

शाम के 8 बजे ललिता और मैं नीचे उतरे , सब गेस्ट्स से अच्छे से मिले… काफ़ी नाच गाना चला, मेरे सभी दोस्त आए हुए थे.. मेरे ऑफीस के फ्रेंड्स… आज रात ड्रिंक्स पार्टी थी जिसको डॅड होस्ट करने वाले थे… रात के 10 बजे करीब पार्टी स्टार्ट हुई जो करीब सुबह के 3 बजे तक चली.. जिसको होश था वो अपने घर गया, जिसे होश नहीं था उसे डॅड और मैने गाड़ी में उसके घर भिजवा दिया…

“चलो सोन.. गॉट टू स्लीप नाउ.. सी यू टुमॉरो.. और ज़य कितने बजे आ रहा है” डॅड ने अपना मूह धोते हुए पूछा

“दोपहर 12 बजे दद..” मैने नींद में कहा

“चलो, सो जाओ, कल मिलते हैं ओके” कहके डॅड अपने कमरे में निकल गये…. आज ललिता मेरे साथ नहीं थी, इसलिए मैं बेड पे जैसे आया वैसे सो गया.. सुबह 10 बजे ललिता मुझे उठाने आई

“भाई चलो, वी नीड टू गो एरपोर्ट” ललिता ने मुझे उठाते हुए कहा

“हां हाँ, चलो, अभी आता हूँ मैं , तू जा” कहके मैं फ्रेश होने गया और ललिता निकल गई नीचे

मैं फ्रेश हुआ और नीसे जाके चाइ पीने बैठ गया.. चाइ पीके ललिता और मैं एरपोर्ट ज़य को लेने के लिए निकले… एरपोर्ट पहुँचे तो ज़य हमारा वेट ही कर रहा था..

“हाई भाई…” ज़य ने गले लगते हुए कहा

“हेलो डार्लिंग..” ललिता ने उसे देखते हुए कहा

“अरे रे.. मेरी डार्लिंग भी लाए आप… अरे यार, मिस्ड यू सो मच..’ ज़य ने गले लग के कहा

“उम्म्म.. लास्ट टाइम तू आया और मिला भी नहीं, बॅड बॉय” ललिता ने उससे अलग होके कहा

“अरे अभी तो 15 दिन का साथ है डियर तेरे साथ.. फिकर नोट, ऑस्ट्रेलिया में खूब मस्ती करेंगे” ज़य ने ललिता को ताली मारते हुए कहा

“ऑस्ट्रेलिया ? मैं कब जा रही हूँ..” ललिता ने मुझे देखते हुए कहा

“भाई, आपने बताया नही… वैसे भाई ने भी तेरा पासपोर्ट ट्रॅवेल एजेंट को दिया है… क्या सर्प्राइज़ है वाह भाई… चलो अब घर ले चलो” कहके ज़य गाड़ी में बैठ गया

“कब लिया पासपोर्ट आपने…” ललिता ने मुझे देखते हुए कहा

“जब तू अपनी ड्रेस चेंज कर रही थी उस रात को.. मैं तेरे रूम से पासपोर्ट लेके आया.. याद है, पानी पीने गया था… तब” मैने हसके ललिता से कहा

“दट ईज़ नीडलेस ओके.. मैं नहीं जाउन्गि कहीं” कहके ललिता गाड़ी में बैठी और हम घर की तरफ चल दिए

पूरे रास्ते में ललिता और ज़य की चतर पाटर चलती रही.. घर पहुँचे तो सब जे को देख के बहुत खुश थे.. लेकिन जे की आँखों में अब तक कई सवाल थे… थोड़ी देर बाद ज़य अपने कमरे में मेरे और ललिता के साथ गया और सब पूछने लगा..

“ह्म्म्मं… टुडे ईज़ दा ड-डे राइट…” ज़य ने कहा

“हां छोटू, कल सब ख़तम… अगर जैसा हमने सोचा है वैसे हुआ तो तेरे लिए एक बहुत ही बढ़िया सर्प्राइज़ भी है” मैने ललिता को देख के कहा

“हां ज़य… अब तुम आराम करो, और भाई आप मुझे ले चलो अंशु के घर….” ललिता ने अपना बॅग लेके कहा

“वहाँ क्यूँ भाई, आज ही तो आया हूँ, आज जा रही है” ज़य ने कहा ललिता को

“अरे, नाउ दट आइ आम इन देयर टीम, मुझे आज रात को जाना पड़ेगा ना उनके साथ.. उनके बॉस के पास… शायद हमने सोचा है वोई हो तो” ललिता ने बाहर निकलते हुए कहा

“तुमने किसका नाम सोचा है वो तो बताओ…” ज़य ने ललिता और मुझसे बाहर आके पूछा

“संजय” ललिता और मैने साथ में कहा

“व्हेअर डिड ही कम फ्रॉम भाई… साइको है वो बंदा वी नो इट राइट…. आंड आज आप अकेले वहाँ जाएँगे, मैं भी चलूँगा” ज़य ने ज़िद्द में आके कहा

“पागल मत बन छोटू.. तू आज आया है और आज ही कैसे आएगा बाहर.. घर पे बैठ मॉम डॅड के साथ, ऑस्ट्रेलिया और वेड्डिंग के लिए थोड़ी शॉपिंग कर आ तब तक… आंड रात को डिन्नर साथ में करते हैं ” कहके मैं और ललिता बाहर निकल गये

मोम डॅड रूम में थे, तभी ललिता और मैं चुपके गाड़ी में बैठे, और अंशु के घर की तरफ निकल गये.. ललिता और मैं पूरी तरह तैयार थे… हम कुछ नहीं बोल रहे थे, दिल में अजीब सी कशमकश थी… अगर प्लान के हिसाब से नहीं हुआ तो, तो क्या करेंगे… हमने फेल्यूर के बारे में कभी नहीं सोचा था.. 

“क्यूँ भाई.. ये भी सोचना था ना हमे” ललिता ने मुझे कहा

“क्या सोचना था..” मैने पूछा

“फेल्यूर के बारे में… हमने तो सोचा ही नहीं के कामयाब नहीं हुए तो” ललिता ने जैसे मेरे मन की बात पढ़ ली

“नहीं ललिता.. डोंट वरी, आंड अगर हुए भी तो आइ एन्षूर यू विल बी सेफ…” मैं सीरीयस टोन में बोला

“आइ आम नोट कन्सर्न्ड अबाउट मी.. आइ आम कन्सर्न्ड अबाउट अस भाई.. अंकल आंटी आप…” ललिता ने चिंता में आके कहा

“नो फियर.. आइ आम हियर.. स्वीट हार्ट, हम पहुँच गये आपकी जगह पे” मैने अंशु के घर की तरफ इशारा करते हुए कहा

अंशु का घर किसी महल जैसा लग रहा था.. शामियाना, ढोल, नगाड़े सब एक से एक प्रबंध किए थे.. ललिता जल्दी से उतरी और अंदर भाग गयी… जैसे ही वो अंदर भागी पायल और माया बुआ पकड़ के उसे नचाने लगे और अंशु और पूजा भी ठुमके मारने लगे.. मुझे देख के अंशु ने अंदर आने का इशारा किया, पर मैं जवाब दिए बिना वहाँ से निकल आया और घर चला गया.. घर जाते जाते दिमाग़ एक दम ब्लॅंक हो चुका था.. किसी चीज़ में दिल नहीं लग रहा था… दिमाग़ में बस एक ही बात थी… क्यूँ.. आख़िर क्यूँ ज़य ऐसा कर रहा है…. फिर एक सेकेंड मे दिमाग़ को झटक दिया, ये सोच के अगर जो सोचा है वो नहीं हुआ तो कोई नुकसान नहीं है.. पूजा से निपटना पड़ेगा और क्या…. आख़िर डॉली का कातिल कौन है.. ये सोच के एरिसटॉटल का ख़याल आया.. मैने तुरंत उसे कॉल किया..

“हां भाई… कब निकलेगा वहाँ से” मैने एरिसटॉटल से पूछा

“, मैने सब एविडेन्स ले लिए हैं… कल आके बताता हूँ… मेरी फ्लाइट मुंबई में सुबह को 10 बजे लॅंड होगी, प्लीज़ गाड़ी भेजना 12 बजे तक तुम्हारे घर के लिए… जिस आदमी की ये गाड़ी है उसपे ऑलरेडी बहुत से केसस चल रहे हैं” एरिसटॉटल जल्दी जल्दी में बोलने लगा

“कौन है ये आदमी… नाम तो बता उसका…” मैने पूछा

“अरे उसका नाम है..” एरिसटॉटल ने उतना ही कहा के.. “ट्रूट ट्रूट” के आवाज़ से मेरे मोबाइल की बॅटरी बंद हुई

“फक इट मॅन…” मैने खुद से कहा और कार में फोन चार्ज पे रखा… जैसे ही फोन फिर स्टार्ट हुआ, मैने एरिसटॉटल को वापस कॉल किया… इस बार उसने फोन ही नहीं उठाया…. मैने रहने दिया ये सोच के आज रात को तो इस बात का खुलासा हो ही जाएगा… देखते देखते मैं घर पहुँचा, जहाँ सब केटरर्स से लेके, डेकरेटर्स सब आए थे.. मोम सब रिश्तेदारों से बिज़ी थी.. सब को एक ही जान से मिलना था.. “राज से..”

“भाई मेरी गान्ड ऑलरेडी फटी हुई है, अब और मत मारो प्लीज़…” मैं खुद से बोलके चुपके उपर रूम में चला गया

“नॉक.. नॉक…” मेरा डोर नॉक हुआ

“डॅड… बोलिए, मैने डॅड को अंदर आने के लिए जगह दी

“, व्हाट्स रॉंग..” डॅड ने अपने स्पेक्स उतार कर पूछा

“नतिंग डॅड.. व्हाई” मैने हंस के जवाब दिया

“यू नोट एग्ज़ाइटेड.. व्हाई” बेटे, एनितिंग बॉदरिंग यू.. बोलो मुझे, मैं सॉल्व कर दूँगा” डॅड ने चुटकी बजाते कहा

(डॅड ये प्राब्लम चुटकी जितनी ईज़ी नहीं है.. आइ आम, ऑलमोस्ट देअर) 

“नो डॅड.. जस्ट दा गूस बंप्स…. पहली शादी है ना इसलिए ” मैने डॅड को आँख मारते हुए कहा

“हाहाहा… गुड वन … नाउ टेल मी, तुम्हारी बारात कौनसी कार में निकालें” डॅड ने फोटोस दिखाते हुआ कहा

“डॅड, ये सब गाड़ियाँ हैं कहाँ आख़िर… आपके पर्सनल बॅलेन्स शीट में भी इनका ज़िक्र था” मैने पूछा

“अरे कहाँ होंगी, हर बंगलो, हर फार्म हाउस में 3 गाड़ियाँ रखी हुई हैं.. तुम उंगली रखो, कल सुबह वो यहाँ आ जाएगी” डॅड ने मुझे फिर फोटोस दिखाई

“ऑडी. BMW, वोल्वो….” डॅड यू ओन आ वोल्वो.. आपने कभी बताया नहीं” मैने शॉक में आके पूछा

“इट्स जस्ट आ वोल्वो बॉय.. ये देखो” उन्होने अगला पिक दिखा के कहा

“ओह माइ गॉड…. यू ओन आ लिमो…” मैने चिल्ला के पूछा बच्चे की तरह

“नो नो.. आइ आम गोयिंग टू बाइ दिस.. इसको छोड़ के जिसमे कहो उसमे बारात जाएगी तुम्हारी” डॅड ने अपना फोन अंदर रख के कहा

“डॅड, एनितिंग विल डू… व्हाट मॅटर्स ईज़ युवर लव… थ्ट्स इट” मैं डॅड के गले लगते हुए बोला

“थ्ट्स माइ सन… आइ विल अस्क BMW 7 सीरीस ओके…” कहके डॅड ने मुझे हग किया… मुझे उनको छोड़ने का दिल ही नहीं हो रही थी.. करीन 10 सेकेंड्स बाद

“… बेटा….” कहके उन्होने मुझे खुद से अलग किया

“व्हाई आर यू क्राइयिंग सन…. तुम्हारी आँखें क्यूँ लाल हो गयी.. पानी लो जल्दी” कहके डॅड ने पानी की बॉटल दी

“नतिंग डॅड… यू दा ग्रेटेस्ट डॅड” कहके मैं फिर उनसे लिपट गया और रोने लगा..

“नहीं बेटे, बी ब्रेव ओके.. आंड तुम क्यूँ रो रहे हो…. चलो, नाउ काम डाउन ओके.. यू आर दा ग्रेटेस्ट सन ऑलराइट” कहके डॅड ने मुझे फिर अलग किया

“और मेरा क्या.. मैं नहीं हूँ क्या अच्छा बेटा..” ज़य अपनी शॉपिंग बॅग्स लेके मेरे रूम में आया था

“हाहहः.. थिंक ऑफ दा डेविल आंड ही ईज़ हियर… इधर आओ” डॅड ने ज़य से कहा और हम दोनो को गले लगा लिया..

“तुम दोनो मेरे सन हो.. चलो अब तुम भाई को चुप कराओ, मैं नीचे जाता हूँ.. ” कहके डॅड निकल गये और ज़य और मैं मेरे रूम में बैठ गये…

गुज़रते वक़्त के साथ घर पे काफ़ी मेहमान आए.. डॅड के दोस्त, टॉप नॉच पॉलिटिशियन्स, मोम की फ्रेंड्स.. मेरे दोस्त, मेरे ऑफीस की फुलझड़ियाँ.. ज़य की कुछ आइटम्स… आइटम्स उन्हे वो बुलाता था. सब ने काफ़ी डॅन्स किया संगीत में, जी भर के मस्ती की… पर मेरा दिल अभी भी रात के बारे में ही सोच रहा था.. रात को सब फंक्षन्स निपटने के बाद, मैं अपने रूम में गया

“हाई, वी आर ऑन टाइम, राइट ?” मैने ललिता को एसएमएस किया

“यस भाई.. सी यू अट 2 ओके… आइ मीन यू सी अस अट 2 ” ललिता ने जवाब दिया

“ओके…. प्लीज़ सेंड आ कार फॉर तिवारी, यादव आंड प्रसाद.. आस्क देम टू कम डाइरेक्ट्ली अट वेड्डिंग वेन्यू”

“बिंगो.. आइ हॅव ऑलरेडी डन दट स्वीट हार्ट.. ” 

“ओके… ” कहके मैने अपना फोन रखा और जीन्स टीशर्ट पहन लिया

“हेलो.. होटेल ह***त” मैने रिसेप्षन पे फोन लगाया

“यस सर..हाउ मे वी हेल्प यू”

” वीरानी हियर, वी हॅव रूम बुकिंग्स इन युवर होटेल आंड वेड्डिंग फॉर टुमॉरो”

“ओह यस सर.. टेल मी प्लीज़”

“कॅन यू प्लीज़ अरेंज वीडियो प्रोजेक्टर इन दा हॉल व्हेअर वेड्डिंग ईज़ टू टेक प्लेस”

“सॉरी सर, बट दट विल कॉस्ट यू.. थ्ट्स नोट इंक्लूडेड इन युवर पॅकेज”

“चार्ज मी एनितिंग ऑलराइट… बट मेक शुवर ऑल दा सीडी’स आंड वीसीडी’ज दट वी वान्ट टू प्ले इन इट , फॉर्मॅट शुड बी सपोर्टेड. ओर एल्स फर्गेट पे, आइ विल श्योर यू गाइस..” मैने कड़क आवाज़ में कहा

“शुवर सर.. रेस्ट अश्यूवर्ड…. वी विल डू तट”

मैं रिसेप्षनिस्ट से बात करके अपने कमरे वापस आया और नीचे देखने लगा.. कुछ लोग अभी भी मस्ती में झूम रहे थे, ज़य अभी अपनी तितलियों से घिरा हुआ था.. मुझे उपर देख उसने आँख मारी.. मैने भी थम्ब्स अप करके उसको हौसला बढ़ाया…

मैं अपने रूम में आके इधर से उधर , उधर से इधर चक्कर काटने लगा… वक़्त धीरे धीरे गुज़र रहा था.. नींद तो मानो कोसो दूर थी मेरी आँखों से.. मैने वक़्त देखा तो अभी 12 ही बजे थे… नीचे लिविंग रूम से मोम डॅड ज़य विजय शन्नो, इन सब की आवाज़ें आ रही थी.. मैं भी नीचे जाके उनके साथ बैठ गया और बातें करने लगा..देखते देखते रात के 1.30 बज गया और सब लोग अभी तक बैठे हुए था… इतने में शन्नो और विजय ने कहा

“भाई साब, अंशु का फोन आया था कुछ देर पहले, आपकी इजाज़त हो तो हम उनके घर से जल्दी होके आते हैं” विजय ने पापा से पूछा

“अरे इजाज़त कैसी भाई, जाओ, और हमारा नमस्कार कहना उनसे” पापा ने कहा

“चलो…” कहके शन्नो और विजय जल्दी से भाग गये और गाड़ी लेके निकले..

मैं समझ गया और ज़य को इशारे से कहा कि मोम डॅड को भी अंदर ले जाए अब… ज़य मोम डॅड को अपनी कॉलेज के किस्से के बहाने अंदर ले गया और उनके साथ बातें करने लगा… मैने चुपके से गाड़ी निकली और अपनी मंज़िल की ओर निकल गया.. मेरे कुछ ही आगे शन्नो और विजय की गाड़ी थी, मैने थोड़ी स्लो कर दी अपनी गाड़ी ताकि उन्हे शक ना हो… जैसे ही वो काफ़ी आगे निकले, मैने तेज़ी से अपनी गाड़ी बढ़ाई… मैं पहुँच गया जहाँ मुझे जाना था.. पहुँचते ही

“हेलो ब्रदर.. हियर ईज़ युवर आक्सेस कार्ड” शक़स ने मुझे कार्ड पकड़ाया..

बिना कुछ बोले मैं सीडीयों से अपने फ्लोर पे गया और रूम में कार्ड पंच किया..

“बीएप्पप्प्प…” आवाज़ के साथ मेरा रूम खुला और सामने जो सेट अप मुझे चाहिए था, वो ठीक वैसे ही था…

मैं जाके सब चेक करने लगा, और तसल्ली कर ली.. अपनी नज़रें मैने स्क्रीन पे लगा ली… जैसे जैसे शख्स आते गये, वैसे वैसे राज़ खुलते गये.. बॉस भी था…. मेरा अंदाज़ा सही था बॉस कौन है.. मैने जो जो उसके बारे में सोचा, वो सब सही निकला…. फाइनली… मेरे सामने था डॉली का कातिल… प्लान तो बॉस का था, पर एक्सेक्यूट करने वाले को देख के मेरे होश उड़ गये.. ये क्यूँ करेगा ऐसा.. करीब 2.30 बजे से लेके 5 बजे तक मैं वहीं बैठ के सब नज़ारे देखता रहा.. कन्फेशन, सेक्स, पॅशन… क्या नहीं था…

“डिज़्गस्टिंग” कहके मैं वो रूम से चुपके से निकला, क्यूँ कि जो मुझे चाहिए था, वो मुझे मिल चुका था.. मैं जैसे ही रिसेप्षन पे पहुँचा

“ऑल ओके…” सामने शक़्स ने पूछा

“यस सर.. ऑल वेल.. सीडी कब तक दोगे” मैने पैसे देते हुए कहा

“अरे, नो मनी नाउ… सीडी कल सुबह 10 बजे तुम्हारे घर पहुँचा देगा मेरा आदमी” 

“सी यू टुमॉरो.. उर इन्वाइटेड अट होटेल ह***त, 12.30 PM , ओके” कहके मैं अपने घर की तरफ निकल गया

“बेब… प्लीज़ वेक मी अप अट 8 हाँ.. नोट लेट” मैं ललिता को एसएमएस करके सोने ही जा रहा था के तभी मैने एक और एसएमएस किया एरिसटॉटल को

“भाई.. प्लीज़ बी देअर ऑन टाइम, माइ कार एमएच ** 9**9 विल कम टू पिक यू अप… ही विल मेक श्योर यू रीच मी अट राइट प्लेस”

ये दो एसएमएस करके मैं अपने रूम में सो गया… नींद आनी नहीं थी, पर फिर भी आँखे बंद करके लेट गया था… हर घंटे में मोबाइल देख के टाइम चेक कर लेता.. 7.45 बजे नींद खुली तो फिर सोया ही नहीं…

“अवेक डियर.. प्लीज़ कम नाउ, सेंडिंग दा ड्राइवर.. नीड टू डिसकस सम्तिंग विद यू” मैं ललिता को एसएमएस करके अपने लप्पी पे बैठ गया और पेन ड्राइव में एक वीडियो क्लिप स्टोर कर ली और उसे अपने वॉलेट में रख दिया…. सुबह 8 बजे से ही ढोल नगाड़े वाले आए हुए थे और आके सब को तंग कर रहे थे… मैने दरवाज़ा खिड़की सब बंद कर लिया… ललिता का जवाब आया

“अट होम यार… आइ केम अट 6 ओन्ली… कमिंग इन युवर रूम” जैसे ही मैने ललिता का एसएमएस पढ़ा, दरवाज़े पे नॉक हुई, मैने दौड़ के दरवाज़ा खोला तो सामने ललिता खड़ी थी… मैने दरवाज़ा बंद किया और उसे गले लगा लिया..

“क्या हुआ भाई… क्या हुआ बताइए” ललिता मेरे बालों में हाथ फेरने लगी…

“ललिता.. थॅंक यू वेरी मच.. तेरी वजह से ये सब मुमकिन हुआ है, नहीं तो आज हम इस घर की आखरी खुशी मना रहे होते” मैं उसे फिर गले लग गया

“व्हाट भाई.. ये मेरा घर नही है क्या… आंड व्हाट दा हेक, अंकल आपसे ज़्यादा मुझे प्यार करते हैं समझे, तो मैने जो भी किया वो अपने लिए था, आपके लिए नहीं..” ललिता ने मुझे बेड पे बिठाते हुए कहा

“आंड हां, एक बात कहूँ…. आप इतनी लड़कियों से घिरे रहे पूरे किस्से में, डॉली से लेके अंशु तक, हर एज की… इतना उनके साथ आपने रंगरलियाँ मनाई, मेरे साथ आपने बिल्कुल कुछ नहीं किया. यूआर ट्रू जेंटलमेन बॉस… बट मैं बात ये है, के आपको संजय का ख़याल कैसे आया.. आइ मीन वो तो हमारे दिमाग़ में कभी आया ही नहीं था…” ललिता ने आँखें मिला के पूछा

“वो इसलिए डियर, जिस दिन हम इंडोनेषिया से आए थे डॉली की डेथ के कारण, मुझे तब भी संजय नहीं दिखा था, पर याद है, कुछ महीने पहले हमारे एक रिलेटिव की शादी थी… संजय वहाँ आया था.. जो बंदा एक शादी में आ सकता है, पर बहेन की डेथ पे नहीं, तो उसपे शक तो जाएगा.. बस नज़र चाहिए, मुझे उस दिन भी कुछ फिशी लगा था, बट दिमाग़ से निकल गया था.. क्यूँ कि, मैं पूजा से घिरा हुआ था ना स्वीट हार्ट” मैने ललिता को आँख मार कर कहा

“चलो भाई, पेन ड्राइव ली आपने… और रात वाली डीवीडी कब आएगी” ललिता ने पूछा

“ये ले पेन ड्राइव, और मैं डीवीडी अभी 10 बजे आएगी, तब तक तू तैयार हो जा.. मैं भी नहा लेता हूँ.. और हां प्लीज़ कार में मेरे साथ बैठना, कुछ बातें करनी हैं” मैं ललिता को बोलके बाथरूम में घुस गया… आज मुझे फ्रेश होने की कोई जल्दी नहीं थी.. आराम से मैं नहा रहा था, आराम से अपनी मॉर्निंग आक्टिविटीस ख़तम की… 8.30 बजे से लेकर 9.45 तक मैं बाथरूम में था… जब लगा कि चलो अब ख़तम कर लेते हैं, टवल लपेट के मैं बाहर आ गया…. जैसे ही मैं बाहर आया, मेरे मोबाइल में एसएमएस आया

“भाई, बंदा तुम्हारे घर के नीचे है डीवीडी ले लो”

मैं तुरंत ललिता के रूम में गया, वो अभी भी नहा रही थी.. मैं टवल में ही नीचे चला गया और नीचे जाके देखा तो एक बंदा टोपी पहने हुए खड़ा था घर के सामने.. मैने इशारे से उसे बुलाया

“डीवीडी ?”

“हां, पर आप कौन..”

“मुझे ही देनी है भाई” कहके मैने उस बंदे से डीवीडी ले ली

“ये लो 500 रुपये.. जलसे करो” कहके मैं वहाँ से उपर भाग आया..

जैसे ही मैं दरवाज़े पे पहुँचा, पीछे से आवाज़ आई

“भाई ,इतनी जल्दी क्या है.. कपड़े पहन के आते नीचे” पीछे ज़य ने आवाज़ दी..

“छोटू, एक काम कर, जब तक मैं रेडी होता हूँ, तू लप्पी ऑन कर और ये डीवीडी स्टोर कर..

“ओके भाई.. चलो” कहके ज़य और मैं मेरे रूम में आ गये

मैं कपड़े पहनने लगा और ज़य लॅपटॉप पे बैठ गया. जब तक मैने अपना पर्फ्यूम लगाया, . पहनी, तब तक छोटू ने लप्पी में डिस्क डाल के उसे कॉपी करने लगा..

“10 मिनट्स भाई.. कौनसी डीवीडी है ये… ओह माइ गॉड.. ये वोई है क्या.. भाई, लेट मी सी इट” ज़य ने कहा

“टाइम नहीं है भाई, जब तक ये कॉपी हो तू ललिता के पास जा और उससे मेरी पेन ड्राइव लेके आ” कहके मैने उसे धक्का देके ललिता के पास भेजा और अपने कपड़े पहन के लॅपटॉप पे नज़रें गढ़ाने लगा….. जैसे जैसे डिस्क कॉपी होती जाती, मेरी बेचेनी बढ़ने लगती… 60 सेकेंड्स…. 50 सेकेंड्स…. 30 सेकेंड्स….. 10 सेकेंड्स…. 5 सेकेंड्स…..” जैसे ही ये मसेज बंद हुआ,

“छोटू, जल्दी आ यार,. किधर है” मैं अपने रूम से ही चिल्लाने लगा

“आ गये, वाइ शाउटिंग सो मच… ये लो पेन ड्राइव..” ललिता और ज़य मेरे रूम में एक साथ आ गये

“जल्दी दो.. लेट मी कॉपी दिस” कहके मैने पेन ड्राइव लप्पी में डाली और उस फाइल को लॅपटॉप से पेन ड्राइव में कॉपी कर डाला

“छोटू, एक काम कर, तू और ललिता होटेल में जाओ, मैने वहाँ बोला हुआ है कि प्रोजेक्टर तैयार रखें… वहाँ जाके चेक करो इसमे जो 2 फाइल्स हैं वो प्ले हो रही है.. आइ डोंट वान्ट टू टेक एनी चान्स ऑलराइट…” मैने जल्दी में ज़य और ललिता से कहा

“कॉपी दट ब्रदर…” कहके ज़य और ललिता जल्दी से भाग के होटेल में निकल गये

मैं तैयार होके नीचे आया, मोम डॅड रेडी थे, और बस बारात निकलने का वेट कर रहे थे..

“आओ भाई.. दा मॅन ऑफ दा डे… ये लो सेहरा तो पहन लो..” डॅड ने सेहरा आगे करते हुए कहा

“डॅड, कार में मेरे साथ ललिता बैठेगी.. नो वन एल्स हाँ” मैने सेहरे को हाथ में लिया और उसे देखने लगा

“अरे ऐसे नही, इसे मैं बांधता हूँ दो, और ठीक है ललिता ही जाएगी तुम्हारे साथ, पर अभी वो और ज़य कहाँ गये” डॅड ने सेहरा बाँधते पूछा

“डॅड, वो मैने पूजा के लिए फर्स्ट नाइट गिफ्ट लिया है, बस वोई कलेक्ट करने गये हैं…” मैने बात बनाते हुए कहा

“गुड वन सन… यू नो दा वे टू फीमेल’स हार्ट हाँ.. व्हाट ईज़ इट ?” डॅड ने गिफ्ट के बारे में पूछा

“नतिंग मच डॅड.. जस्ट दा प्लॅटिनम लव बॅंड्स” मैने होशयारी करके महेंगी गिफ्ट बताई

“ओह… आंड दट ईज़ नतिंग.. दट इस नतिंग… सोन, थ्ट्स दा बेस्ट एनी मॅन कॅन गिफ्ट टू हिज़ लव… आइ आम इंप्रेस्ड” डॅड मेरी पीठ ठोकते हुए बोले

“क्या हुआ भाई, सुबह सुबह बाप बेटे.. आप इसे कुछ गंदी बात मत सीखाना समझे. ” मोम ने डॅड से मस्ती में कहा

“अरे, मैं इसे नहीं, ये मुझे सीखने वालो में से है.. मैं आज तक जो गिफ्ट तुम्हे नहीं दे पाया वो इसने अपनी बीवी के लिए खरीद भी ली” डॅड ने मोम से शरारत करके कहा

“हटिए, आपने आज तक मुझे कहाँ कुछ दिया है.. और राज अच्छे से जानता है किसका दिल कैसे जीतना है” मोम और डॅड मेरे साथ बातें करने लग गये..

बाते करते करते वक़्त आता गया बारात का, और सब बाराती भी इकट्ठे हो गये… शन्नो, विजय, माया बुआ, पायल.. सब आ चुके थे, और सब अपनी अपनी बातों में लगे हुए थे.. ज़य यहाँ नहीं आने वाला था क्यूँ कि उसका प्रवेश इस घर में बॅन था, सो वो डाइरेक्ट वहीं आएगा. ऐसा मुझे ललिता ने बताया था…. भीड़ बढ़ती गयी, मस्ती बढ़ती गयी, वक़्त गुज़रता गया… पर ललिता और ज़य अभी तक नहीं आए थे… जब तक वो लोग आते, मैने एक कोने में जाके एरिसटॉटल को फोन किया

“भाई किधर है, ना एसएमएस करता है, ना फोन उठाता है” मैने धीमी आवाज़ में पूछा

“, बस गाड़ी में बैठा हूँ, अभी 1.30 या 2 घंटे में आ जाउन्गा..” एरिसटॉटल ने जवाब दिया

“अच्छा, मेरे घर नहीं आना… ड्राइवर को पता है मैने उसे अड्रेस दिया है, वहीं आना डाइरेक्ट ओके.. होटेल ह***त में आना है.. गॉट इट..” कहके मैने फोन रख दिया और जाके सब के साथ खड़ा हुआ…5 मिनट में ललिता और ज़य भी आ गये

“चलें सन… ललिता ईज़ ऑल्सो हियर अब तो..” डॅड ने ललिता को अपने पास बुलाते हुए कहा

“जी अंकल, बोलिए” ललिता ने पापा के पास आके कहा

“बेटा, राज वांट्स तुम उसके साथ कार में जाओ.. तो चलो, फील दा ड्राइव आंड गिव सम करेज टू युवर ब्रदर ओके” डॅड ने ललिता का माथा चूमते हुए कहा… “आंड माइ डॉल ईज़ लूकिग वेरी प्रेटी.. गॉड ब्लेस्स यू”

हम जैसे ही गाड़ी में जाने लगे, तब पायल ने कहा

“मामा.. मैं भी गाड़ी में बैठूँगी..”

“सब गाड़ी में बैठेंगे तो नाचेगा कौन” मैने मस्ती करके पायल को मना कर दिया

“बिल्कुल सही, और पायल व्हाट ईज़ दिस, अपने मामा को भी थोड़ा डॅन्स दिखाओ, अगर अच्छा डॅन्स करोगी, तो आइ विल मेक आ फिल्म विद यू.. चलो अब जल्दी करो” कहके पापा पायल को खींच के अपने साथ आगे ले गये और मैं और ललिता गाड़ी में बढ़ने लगे..

“थॅंक गॉड.. वो नहीं आई, बताइए व्हाट ईज़ इट” ललिता ने गाड़ी में बैठ के कहा…

गाड़ी में साउंड प्रूफ ग्लासस थे, इसलिए बाहर का ज़्यादा आवाज़ अंदर नहीं आ रहा था

“ललिता, एरिसटॉटल से बात कर ली मैने… कॉल प्रसाद, यादव और तिवारी.. तीनो से कन्फर्मेशन ले ले, कितने बजे पहुँचेंगे… अगर उन्हे कोई दिक्कत है तो गाड़ी भिजवा देते हैं…” मैने अपना सेहरा निकाला और ज़ोर ज़ोर से साँस लेने लगा….

“चिल भाई.. अभी करती हूँ मैं. रिलॅक्स ओके,ये लो पानी.. और हां पेन ड्राइव ये रही.. सब चेक किया, सब ठीक है” कहके ललिता ने पानी की बॉटल दी और अपने फोन से बारी बारी सब को फोन घुमाने लगी

सब से बात ख़तम करके

“डन है भाई.. प्रसाद और तिवारी तो पहुँच गये हैं उधर, यादव ईज़ ऑन दा वे… आंड डोंट वरी, उनके पास सेक्यूरिटी भी तो है..” ललिता ने अपने बाल खोलते हुए कहा

“यआः राइट.. आंड जय , ही विल बी देअर विद अंशु ?” मैने कन्फर्म किया

“विल बी देअर् नहीं, ही ईज़ देअर.. ज़य और मैं निकल रहे थे तभी अंशु के साइड वाले वहाँ पहुँच ही रहे थे.. हम चुपके वहाँ से आ गये” ललिता ने पानी पीते हुए कहा

“ओके… वेट आ सेकेंड” कहके मैने फिर एरिसटॉटल को फोने लगाया

“भाई, तेरी गाड़ी में ही हूँ.. पहुँच रहे हैं कुछ देर में” एरिसटॉटल ने सीधा ये जवाब दिया

“अबे सुन अब, अपने साथ हो सके तो 4- 5 कॉन्स्टेबल और सब इनस्पेक्टर्स लाना.. कुछ ज़्यादा लोगों की बारात निकलेगी वहाँ से… समझा” मैने एरिसटॉटल को फोन पे हुकुम देके फोन काट दिया

“बड़ा आया, साला ना हेलो बोलता है, ना ही बोलता है” मैने एरिसटॉटल को गाली देते हुए कहा

“साला वो नहीं, आप बनॉगे उसके.. प्यार से बोलो” ललिता ने अपनी दबी हुई हँसी के साथ कहा

“हहहहा.. ओके गॉट इट.. ” मैं फाइनली रिलॅक्स हुआ और ललिता से बातें करने लगा

होटेल में पहुँचने का रास्ता आधे घंटे का, बारात की वजह से हमको डेढ़ घंटा लग गया

जैसे ही हम नज़दीक आने लगे होटेल के

“ललिता, कॉल यादव, व्हेअर ईज़ ही” मैने अपना सेहरा बाँधते हुए पूछा

“भाई, वेट” कहके ललिता ने यादव को कॉल लगाया और उसके साथ बात की

“भाई, ही हॅज़ रीच्ड.. इनफॅक्ट तीनो को हमने जो रूम दिया है वहाँ बैठे हैं…” 

“अच्छा, वेट.. एक और फोन कर लूँ मैं” कहके ललिता ने एक और फोन लगा लिया

“हेलो.. हाई, कैसे हैं आप… ललिता हियर, राज की बहेन.. जी, हाउ वाज़ युवर ट्रिप…. एप राज ने बताया, अच्छा आइ जस्ट कॉल्ड टू चेक यूआर सेफ.. ग्रेट.. अच्छा एक और बात, आप जब अपने साथ कॉन्स्टेबल्स और सब इनस्पेक्टर्स लाएँगे, तो सबको हर एक एग्ज़िट पॉइंट पे खड़ा कर दीजिएगा प्लीज़…. यस, .. हां हां वो तो आइ नो यू आर स्मार्ट एनफ, बट आइ एम जस्ट बीयिंग सेफ… यस… बाई, सी यू सून” कहके ललिता ने फोन कट किया

“थोड़ा कंट्रोल कर, अभी शादी नहीं हुई है तेरी….” मैने ललिता को देख के कहा

“जी भाई…. ” कहके ललिता ने अपनी खुशी तो दबाई, पर उसकी आँखों में खुशी सॉफ झलक रही थी

“व्हाट दा हेक… कॉल गफ़ूर और चौकसे को यहाँ लेके आए बोल उसको.. उसको तो भूल ही गये” मैने चिल्ला के कहा

“चिल्लेक्ष भाई.. उसको मैने सबसे पहले फोन किया था. वो उसे लेके यहाँ आ रहा है, और उसको रूम नंबर दे दिया है मैने” ललिता ने अपने बाल बाँध लिए क्यूँ की हम बस होटेल से 1 मिनट की दूरी पे थे…

जैसे ही हम होटेल के बाहर पहुँचे…

“आइए आइए दामाद जी… आइए, आपका इंतेज़ार था..” कहके अंशु ने गाड़ी का दरवाज़ा खोला और मुझे बाहर आने को कहा

जैसे ही मैं बाहर आया अंशु और उसके आस पास की औरतें सब हसी मज़ाक करने लगी…. 10 मिनट के स्वागत के बाद, हम लोग अंदर जाने लगा जहाँ शादी का मंडप बँधा हुआ था.. हम शादी के मंडप के पास पहुँचे और उसके ठीक सामने ही प्रोजेक्टर लगा हुआ था….

“अरे ये प्रोजेक्टर यहाँ क्यूँ है, ज़य चेक करो तो” डॅड ने ज़य से कहा

“डॅड डॅड.. वेट, मैने लगवाया है.. आंड यू विल नो दा पर्पस सून” मैने ज़य को रोकते हुए कहा

कुछ रस्मो के बाद पूजा को मंडप में लाया गया.. पर मेरी आँखें जिसे ढूँढ रही थी वो मुझे अब तक नहीं दिखा था….

“व्हेअर दा फक आर यू मॅन..” कहके मैं इधर उधर नज़रें घूमने लगा..

“आअहहा….. देअर यू आर” मैने खुद से कहा… संजय एक कोने में शन्नो के साथ खड़ा था..

जैसे ही पूजा और मैं खड़े हुए साथ में, कुछ फोटो सेशन्स चालू हो गये…

इतने में एरिसटॉटल अंदर आया, उसके साथ कुछ कॉन्स्टेबल्स थे और सब इनस्पेक्टर्स भी थे… उसे देख सब लोग घुसफूस करने लगे.. मैने अपना सेहरा उतारा.. 

“वेट आ मिनट इनस्पेक्टर.. ईज़ देअर् एनी प्राब्लम” डॅड उसके पास जाते हुए बोले

“डॅड डॅड… आइ नो हिम ही ईज़ आ फ्रेंड.. और यहाँ काम से आए हैं.. एरिसटॉटल , दोस्त एन्षूर कर ले यू हॅव एनफ कवर ओके…” मैने उसे रास्ता देते हुए कहा

“सन.. व्हाट्स गोयिंग ऑन..” दाद ने मुझसे पूछा हैरानी में

“सर.. आइ विल टेल यू… ” एरिसटॉटल ने कहा

एरिसटॉटल :- सर, अभी डेढ़ महीने पहले आपके घर में, डॉली नाम की लड़की की डेथ हुई थी… उस इन्वेस्टिगेशन के लिए मैं आपके घर भी आया था

डॅड :- ओह यस इनस्पेक्टर, आइ आम अवेर, बट दिस ईज़ नोट दा राइट टाइम, कॅन वी प्लीज़ डिसकस दिस लेटर

एरिसटॉटल :- सर… प्लीज़ लेट मी फिनिश… डॉली का मर्डर हुआ था… कोल्ड ब्लडेड मर्डर…

डॅड :- व्हाट आर यू सेयिंग…. आर यू श्योर…

एरिसटॉटल :- सर, आब्सोल्यूट्ली… आंड वन मोर थिंग…. डॉली का कातिल अभी इस वक़्त यहीं मोजूद है

“व्हाट.. इधर… इनस्पेक्टर, प्लीज़ बी शुवर एनफ टू मेक एनी अलिगेशन्स ऑन एनीबॉडी.. इधर सब टॉप नॉच लोग हैं, अगर..” डॅड ने इतना ही कहा के बीच में उनके एमएलए फ्रेंड आए

“वीरानी जी.. ये हमारी पोलीस टीम का सबसे होनहार बंदा है.. आप चिंता ना करें, आइ विल टेक केर ऑफ दट… इनस्पेक्टर, यू प्लीज़ कंटिन्यू” एमएलए ने कहा

“थॅंक यू सर.. हां तो मैं ये कह रहा था कि डॉली की डेड बॉडी के पास हमे एक वाच मिली.. इट वाज़ आ स्विस वाच मेड फ्रॉम 18 केरट डिमओंड्स.. मैं उसी सिलसिले में अभी ज़ुरी से ही लौटा हूँ.. स्विट्ज़र्लॅंड से मुझे ये एक बिल मिला है जिसमे सॉफ सॉफ उस आदमी का नाम लिखा है जिस आदमी की ये वाच है…” एरिसटॉटल ने पापा को बिल की कॉपी दिखाते हुए कहा

“गो अहेड इनस्पेक्टर… फिनिश युवर वर्क, हूस दट बस्टर्ड..” पापा ने गुस्से में आके कहा

इससे पहले एरिसटॉटल कुछ बोलता, मैने डॅड से कहा

“डॅड, जस्ट आ सेकेंड… उससे पहले एरिसटॉटल अपने सब साथियों को अंदर बुलाओ… तब तक शन्नो आंटी, विजय अंकल, माया बुआ, अंशु जी, पूजा, सर, आप भी (अंशु का पति), पायल और…. संजय भैया…. आप सब प्लीज़ यहाँ आएँगे, मैं आप सब के लिए तोफे लाया हूँ…

“, व्हाट ईज़ दिस नाउ.. ये सब क्या है…” डॅड ने गुस्से में कहा

“डॅड, प्लीज़ लेट मी डू इट.. ” कहके मैं आगे बढ़ा और सबको आगे आने पे फोर्स किया… 

” जी.. ये सब क्या है, हमारा मज़ाक बना रहे हैं आप…” पूजा के बाप ने आगे आते हुए कहा… अंशु और शन्नो के चेहरे पे पसीना टपक रहा था.. उधर से पूजा भी धीरे धीरे आगे आ रही थी… पायल के चेहरे पे कोई भाव नहीं थे.. माया बुआ हैरान होके वहाँ खड़ी तो हुई, पर कुछ बोल नहीं पा रही थी… सबसे आख़िर में संजय आया.. उसका चेहरा देख के डॅड की तो आँखों में खून दौड़ने लगा.. संजय कुछ बोला नहीं और चुप चाप आके खड़ा हुआ….

“सन दे ऑल आर हियर… क्या करना चाहते हो तुम अब” डॅड ने मुझे कहा

“डॅड रिलॅक्स ओके… ज़य, मोम को रूम नंबर 2**8 में ले जाओ, आपके नाम पे बुक्ड है वो… ललिता, कॉल देम प्लीज़” मैने ललिता को देखते हुए कहा

” बेटे, क्या है ये, मेरा तो दिल बैठा जा रहा है… ” मोम ने मेरे पास आके कहा

“मोम, देअर् ईज़ नतिंग टू वरी अबाउट… ज़य, प्लीज़ जल्दी जाओ..” मैने चिल्लाके कहा

“भाई, देअर दे आर…” ललिता ने दरवाज़े पे इशारा करके कहा

तिवारी, यादव और प्रसाद… इन तीनो को देख के मैने पूजा अंशु और उसके बाप के एक्सप्रेशन्स देखे…. तीनो की गान्ड फट के हाथ में आ गयी थी….

“ये यहाँ क्या कर रहे हैं.” अंशु ने आगे आते कहा

“अंशु जी, प्लीज़ वहीं खड़े रहें, नहीं तो मुझे ज़बरदस्ती करनी पड़ेगी” मैने अंशु को ठंडे दिमाग़ से कहा

“, मेरे सब बंदे यहाँ हैं, बोलो” एरिसटॉटल ने मुझे इनस्पेक्टर्स और सब इनस्पेक्टर्स दिखाते हुए कहा

“भाई… इन सब के आस पास लगा दो इन्हे, इनमे से कोई भी यहाँ से भागना नहीं चाहिए ओके..” मैने एरिसटॉटल के कान में कहा

उसने मेरी बात समझी, और एक हल्के इशारे से अपने आदमियों को उन सब को घेरने के लिए कहा.. धीरे धीरे उसके आदमी उन्हे घेरने लगे.. हां थोड़ी दूरी पर थे, ताकि कोई हरक़त ना कर सके… जैसे जैसे एरिसटॉटल के आदमी आगे बढ़ रहे थे , बाकी आए हुए सब मेहमान पीछे हटने लगे और एक कोने में जा खड़े हुए.. अब सीन ये था कि इन लोगों के चारो और 15 फीट डिस्टेन्स में सब इनस्पेक्टर्स और कॉन्स्टेबल्स बंदूक ताने खड़े थे…. मैं , एरिसटॉटल , डॅड और ललिता उनके सामने..

“इनस्पेक्टर.. नाउ यू कॅन गो अहेड” मैने एरिसटॉटल से कहा

“थॅंक्स .. हां मिस्टर वीरानी… तो डॉली के कातिल का नाम तो वैसे काफ़ी पुराना है, पर उसके ख़ास दोस्त उसे डीजे के नाम से जानते हैं… और उसपे डॉली के खून के अलावा फेक पासपोर्ट्स और मनी लॉंडरिंग के भी काफ़ी केसस हैं… ही लव्स ट्रॅवेलिंग यू सी… एक्सपेन्सिव वॉचस, महेंगी दारू, एग्ज़ोटिक लाइफ स्टाइल.. ये सब उसे बहुत पसंद है… इन्हे पाने के लिए वो किसी भी हद तक जा सकता है.. मनी लॉंडरिंग तो छोड़ो, अब इन्होने खून भी कर लिया..” एरिसटॉटल आगे बढ़ते हुए बोलने लगा और उसके कदम जा रुके विजय और अंशु के पति के सामने…

“है ना… मिस्टर दिलीप जोशी.. उर्फ डीजे” एरिसटॉटल ने कॉन्फिडेन्स में आके कहा

“व्हाट… इनस्पेक्टर आप होश में हैं… मैं आपकी वर्दी उतरवा सकता हूँ अंडरस्टॅंड.. आप मुझे जानते नहीं” अंशु के पति ने गुस्से में आके कहा

“मेरे पास सबूत है , ये बिल उस स्टोर का जहाँ से आपने ये वाच खरीदी… अगर आप चाहें तो स्विट्ज़र्लॅंड से गवाहों को भी लाया जा सकता है…” एरिसटॉटल ने इतना कहा, कि मैने उसे बीच में टोक दिया

“नहीं.. स्विट्ज़र्लॅंड जाने की नो नीड… ये तो अपना गुनाह कबूल कर चुके हैं..” मैने आगे बढ़ते हुए कहा

“वॉट नॉनसेन्स… ये कक्ककयाआअ बाकव्वासस्स हैं” पूजा के बाप की आवाज़ लड़खड़ा रही थी

“रिलॅक्स मिस्टर जोशी… रिलॅक्स… लॅडीस आंड गेंटल्मन… आइ वुड प्लीज़ रिक्वेस्ट यू ऑल टू वेकट दा रूम आसाप… बिकॉज़ आप सब लोग इतना दूर आए हमारी खुशी में शरीक होने, आपके खाने का बंदोबस्त रेस्तरॉ में है.. प्लीज़ बी और गेस्ट्स….” मैने चिल्लाके सब को रूम खाली करने को कहा

डॅड आगे आके कुछ बोलते उससे पहले मैने डॅड से कहा.. “डॅड रिलॅक्स.. आइ नो व्हाट आम आइ डूयिंग”

10 मिनट्स में रूम एक दम खाली हो चुका था.. रूम में अब मैं ललिता और डॅड थे.. सामने इनस्पेक्टर्स, एरिसटॉटल और बाकी के लोग..

“ललिता.. प्लीज़ स्टार्ट, बट उससे पहले गफ़ूर को बुला ले..” मैने ललिता से कहा

“राइट ब्रदर.” कहके ललिता प्रोजेक्टर के पास बढ़ने लगी, और गफ़ूर को भी फोन कर लिया.. जब तक ललिता प्रोजेक्टर कनेक्ट करती तब तक गफ़ूर चौकसे को भी ला चुका था

“चौकसे.. व्हाट आर यू डूयिंग हियर.. और ये सब क्या है” डॅड ने चौकसे को देख के कहा

“डॅड.. यू विल लव हिज़ वर्क….” मैने चौकसे को एरिसटॉटल के पास धक्का देते हुए कहा और उसने उसे भी बाकी सब के साथ खड़ा कर दिया

“भाई.. स्टार्टिंग ओके… 3….2…. 1……. ” कहके ललिता भी प्रोजेक्टर से हमारे पास आई और अपनी आँखें स्क्रीन पे गाढ ली

डीवीडी पे था, वो है नीचे

“हाहहहहा… हहहहहाहा…. यस आइ हॅव वॉन मिस्टर वीरानी… आइ हॅव वॉन…. तुम बर्बाद हो गये हो वीरानी हाहहहहहहा….. आज मैने अपना बदला ले लिया है वीरानी… तुम बहुत जल्द अब रोड पे आ जाओगे और मैं तुम्हारा वो हश्र करूँगा कि तुम कभी सोच भी नहीं पाओगे कि ऐसा क्यूँ हुआ.. हहहहहहहहा.. यूआर फिनिश्ड वीरानी…..” संजय विक्की के होटेल रूम में था, और दीवार पे मेरे डॅड की फोटो लगा के उनसे बातें कर रहा था…

“वेलकम ऑल… वेलकम टू वर्ल्ड ऑफ संजय… वेलकम ऑल माइ डॉल्स आंड डॉग्स….” संजय ने सबको बुलाते हुए कहा… 

धीरे धीरे करके सब लोग फ्रेम में आए… शन्नो, विजय, माया, पायल, ललिता, दिलीप (अंशु का पति) और सबसे अंत में.. पूजा.. जहाँ सब लोग संजय के सामने बैठे थे, वहीं पूजा सीधे जाके संजय की गोद में बैठ गयी..

“हेलो माइ जान.. मीसड यू सो मच..” पूजा ने संजय के होंठों को चाँटे चूमते हुए कहा

“मिस्ड यू टू मी प्रिन्सेस… लव यू अलॉट जान” कहके संजय और पूजा एक लंबे चुंबन में डूब गये

“आहह… चलो, क्या अपडेट है बताओ…” संजय ने बाकी के लोगों से पूछते हुए कहा..

“हे हे हे.. वेट आ सेकेंड.. ये यहाँ क्या कर रही है.. ” संजय ने ललिता की तरफ इशारा करके कहा

“ये भी हमारे साथ है संजय…” शन्नो ने बस इतना कहा

संजय रूम में बनी छोटी सी सीडीयो से उतरा, और ललिता के पास आया

“हमारे साथ है.. ये हमारे साथ है.. ये हमारे साथ कभी नहीं हो सकती समझी तुम” संजय ने चिल्ला कर शन्नो को कहा

“है ये कहा ना तुम्हे एक बार.. और भूलो मत , हम तुम्हारे घर वाले हैं ओके… काम की बात करें अब या कुछ और भी बात से ध्यान भटकाना है हमारा” शन्नो ने गुस्से में आके संजय को जवाब दिया

“ये कैसे साबित करेगी कि ये हमारे साथ है.. और तुम, अपनी ज़बान बंद रखो समझी..” ज़य ने शन्नो को धक्का देते हुए कहा जो सीधा विजय के पास जा गिरी

“तुम जो कहो मैं वो कर सकती हूँ, मैं तुम्हारे साथ ही हूँ कब्से.. पर तुम्हारे ये लोग मुझे पहचान नहीं पाए… ” ललिता ने विश्वास के साथ जवाब दिया

“क्या पहचान नहीं पाए ये लोग जो तुमने पहचान लिया है..” संजय ने ललिता से पूछा

“अंकल की नेट वर्थ कितनी है तुम पूछो इनसे, इनके पास जवाब नहीं होगा” ललिता ने कॉन्फिडेन्स के साथ कहा.. वो जानती थी कि संजय ये जवाब जानता है, पर क्यूँ कि उसने किसी को नहीं बताया था, इसलिए उसे खामोश रहना पड़ा… वो इस फिराक़ में था कि सब को 5 करोड़ का पप्लू पकड़ा देगा, और एंड में मेरे डॅड को मार देगा.. और डॅड के जाते ही, उनकी सारी प्रॉपर्टी मेरे नाम होने वाली थी, विच मीन्स, ऑटोमॅटिकली पूजा उसे भी अपने नाम करवा लेती… ललिता के इस सवाल से सब चोंक गये, संजय ने कुछ नहीं कहा… काफ़ी देर तक खामोशी के बाद विजय उठा. 

“मैं जानता हूँ ललिता… भाई साब की प्रॉपर्टी की वॅल्यू 35 करोड़ है, हम सब उसमे हिस्सेदार हैं.. इसमे क्या बड़ी बात है” विजय ने कॉनफ़ीरड़ेंट्ली जवाब दिया

“हुहम… डॅड, दया आती है कभी कभी आप पे मुझे… अंकल की नेट वर्थ है.. 265 करोड़, एक्सक्लूडिंग हिज़ होल्डिंग्स इन हिज़ प्राइवेट कंपनी… और अगर वो लिस्ट कर देंगे कंपनी को, तो एड 180 करोड़ मोर टू इट.. उनकी नेट वर्थ होगी 445 करोड़…” ललिता ने संजय की आँखों में देखते हुए कहा

ललिता की बात सुनके संजय चोन्का नहीं, पर उसे सब के सामने दिखावा करना था.. वो ललिता को देखता रहा, धीरे धीरे विजय की तरफ बढ़ा

“चटाक….. ” एक तमच्चा मारा अपने बाप को जिससे वो जाके ज़मीन पे गिरा

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