ऐसा सीन देख के मेरी हालत तो खराब हो चुकी थी, पर मैं ललिता को आँखों में नहीं देख सकता था… मैने टेढ़ी नज़र से देखा ललिता को, उसकी हालत भी खराब लग रही थी… उसका चेहरा पूरा पसीने से भीग चुका था, और उसने अपने हाथ अपने शॉर्ट्स की पॉकेट में डाल रखे थे….. इससे ज़्यादा नोट नहीं कर पाया मैं और फिर वापस अंदर देखने लगा..
“भाई… आइ कन्नोट स्टॅंड अनीमोर प्लीज़.. मैं जाउ” ललिता ने इनोसेंट्ली कहा
“क्यूँ.. रुक अभी, मैन चीज़ तो सुननी है, आंड मैं कंट्रोल करके खड़ा हूँ ना, तू भी कंट्रोल कर..” मैने हल्की सी हँसी के साथ ललिता का मज़ा लेते हुए कहा.. हम फिर अंदर देखने लगे..
“अरे मेरी रंडियों… अभी हमारा लंड कौन खड़ा करेगा, हमारा तो माल ही निकल गया…” विजय अपना मुरझाया हुआ लंड हाथ में लेके बोलने लगा सामने बैठी औरतों से
“हम करेंगे जी.. और कौन करेगा… अभी रुकिये…” ये कहके शन्नो अंशु और पूजा तीनो बेड पे अपनी दोनो घुटनो के बल खड़े हो गये और एक दूसरे को चूमने लगे.. तीनो जान एक दूसरे के होंठों को चूमने लगे, कोई किसी के चुचे मसलता , तो कोई किसी के निपल्स के साथ खेलता.. लेकिन तीनो ने अपनी अपनी उंगलियाँ भी एक दूसरे की चूत में डाल रखी थी और एक दूसरे को चोदे जा रहे थे… जहाँ तीनो की गति तेज़ होती जा रही थी वहीं वो एक दूसरे को आँखों में आँखें डाले देखते जा रहे थे
“उउउम्म्म्म आहहाहहा.. मेरी रंडी मा, मदरजात मासी अहहाहाः…. तुम्हारी मा के भोस्डे में गधे का लंड डालूं बेन्चोद अहहहहा… अभी देखो… ” ये कहके पूजा ने शन्नो और अंशु को बेड पे धक्का देके सुला दिया और उनकी चूत में दोनो हाथों की तीन तीन उंगलियाँ घुस्सा दी और उन्हे तेज़ी से चोदने लगी
“अहहहहहा उहन्न अहहहहा…. अब बोलो भैन की लोड़ियों अहहहहहा…. और बोलो भडवि माँ आआहाहा… मेरी रांड़ मासी उहहुहह अहहहहहा…..एयहहा आयआःहाहा आहाहहा.. और चोद बेटी अहहहहहा अहहहः यआःा फक मी डॉटर अहहहहहा…. फक मी स्लट अहहहहहहा फास्टर फास्टर आहाहा यआःाहहहा…. कम ऑन अहहहहहा और चोद ना साली दम नहीं है क्या अहहहहहा.. हाँ मेरी रांड़ मौसी ये ले अहहहहहहा…” अंशु शन्नो और पूजा पागल से बन गये थे और अब अंशु ने 4 उंगलियाँ उन दोनो की चूत में डाल दी थी…. चूत का भोसड़ा बन चुका था देखा जाए तो… पूजा सामने बैठे विजय और अपने बाप को देखे जा रही थी, बदले में वो भी अब खड़े हो चुके थे अपने तने हुए लंड के साथ… आगे आके बेड पे वो लोग भी सेट हो गये, और अपने मर्दों का इशारा समझ के पूजा ने अपने हाथ दोनो की चूत से बाहर निकाला और उन दोनो का पानी अपने मर्दों के मूह में दे दिया… पूजा का हाथ निकलने से अंशु और शन्नो को थोड़ी राहत मिली, पर ज़्यादा देर तक नहीं.. विजय और पूजा के बाप ने अपने गधे जैसे लंड को उनकी चूत पे सेट किया और धददड़ चोदने लगे…. अंशु विजय से चुदवा रही थी और शन्नो पूजा के बाप से.. पूजा अब दोनो मर्दों का साथ दे रही थी… कभी किसी के होंठ चूमती, तो कभी किसी के निपल्स मूह में लेती…
इधर दोनो मर्द अपना अपना लंड किसी मशीन की तरह चला रहे थे, वहीं पूजा अब अपनी चूत फेला के अपनी माँ के उपर बैठ गयी और उससे अपनी चूत चटवाने लगी…और अपने एक हाथ की उंगली शन्नो के मूह में डाल दी…
“अहहहहहः चाट ले मेरी चूत मेरी माँ अहहहाहा…. अहाहहाः मासी, मेरी उंगली को लंड समझ ले ना अहहहाहा… अहहहहा और चोदो इन दोनो को साले भडुओ अहहहा……” कहके पूजा रंडीपन्ति पे उतर आई थी
“अहहाहा… और चोद अपनी जीभ से अहहहः.. मेरी मा रंडी साली अहहौमम्म्मम…… और चोद ना मेरे बाप अहहहा.. साले दम नहीं है क्या छक्के साले अहहहा…. अपना मूसल पेल दे इस रांड़ के अंदर अहहहा.. अपनी साली को चोद भडवे अहहहहा….. और मेरे मौसा साले, तू क्या अपनी बेटी ललिता को चोद रहा है क्या साले अहहहहा… रहम मत कर इन आआहा उफफफफफ्फ़ ओमम्म्मममम इन रंडियों पे अहाहाहा…. और चोदो भैनचोद अहहहहः… इनकी माँ चोद डालो, इनकी बेटी चोदो अहहहा…… ज़िंदगी में अब से बस चुदाई ही करनी है अहहहहा… पूरी ज़िंदगी आश कुत्तों आहहहा.. हाआँ मेरी माँ अहहहहा और ज़ोर से चोद ना अपनी बेटी को औआ अह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह ओउफ़फ्फ़…. मैं जा रही हूँ माआहाः अहहहा…..” कहके पूजा झड़ने लगी और जैसे ही वो झड़ी, अंशु के उपर से उठके अपनी चूत शन्नो के मूह पे रख दी और अपना पानी उसे पिला दिया..
“अहहहहः मेरी मासी आहहा.. कैसा लगा अपनी रांड़ भांजी का पानी अहाहहा.. बोल ना भडवि उम्म्म्म हाहाहा…..”
“आहाहहाः ओह्ह्ह्ह उफफफफ्फ़ येअह अह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह आौर ज़ोर से चोदो ना आहाहहहा…. हां मेरी रांड़ बिटिया, अहहहहः मेरी रांड़ भांजी उहह फफफफ्फ़…. मस्त था, अहहहहाहाहहा… और ज़ोर से चोदो ना मुझे अहहहहा….. ” शन्नो पूजा और पूजा के बाप से बोलने लगी
“फ़च्छ फ़चह…अहहहहा ओह… उम्म्म्म अहहहहहहा हाआँ मेरी रंडियों अहहहहा…. और लो अंदर अहहहहा… मेरी बेटी पूजा अहहहहा.. मेरी रंडी साली, मेरी रंडी बीवी अहहाहा.. कितने नसीब वाले हैं हम अहाहा.. फ़च फ़च फ़च फ़च…..” विजय और पूजा का बाप अपने धक्के मारते हुए बोलने लगे…
पूजा उठके अपने बाप और विजय के लंड के पास खड़ी हुई और नीचे बैठ के उनके टट्टों पे जीभ फिराने लगी….
“उम्म्म्म आहाहहा… मॅनचरियन बॉल्स आहाहहा हहहहहा… मेरे मर्द हो तुम आहाहा.. और चोदो इन हरामी जनियो को आहहहा…. उम्म्म्म आइ लव युवर बॉल्स अहहाहा….” कहके पूजा अपने बाप और विजय के टट्टों पे हाथ फिराती, जीभ फिराती और उन्हे मसल्ने लगती.. ये हमला शायद वो दोनो बर्दाश्त नहीं कर पाए और दोनो एक साथ झड़ने लगे….. विजय के लंड को पूजा ने अपने मूह में ले लिया और पूजा के बाप ने अपना पूरा माल अंशु और शन्नो के मूह पे छोड़ दिया
“आहहाहा… ओह आहहहहा….. ओह माइ गोड्ड़ अहहाहा…… हुह अहहा हा अहहहाः हा अहहहा… आज तो मज़ा आ गया… ” विजय अपनी उखड़ी हुई साँसे संभालते बोलने लगा….
“हां मेरे चोदु मौसा आहाहः… क्या चुदाई करते हो उम्म्म्म… गधे जैसा लंड ही अच्छा है आप में…. काश इतना अच्छा दिमाग़ भी होता आपको अहाहहा…” पूजा विजय की गोद में बैठ कर बोली
“तेरे मतलब क्या है रंडी साली उः हा अहहा..” विजय पूजा के निपल्स को मसालते हुए बोला
“मतलब ये साले भडवे मौसा, कंपनी का रेवेन्यू तो पता नहीं है, 5 करोड़ रुपये का करेगा क्या तू” पूजा हंस के विजय का मज़ाक उड़ाती हुई बोली
“तेरे जैसी रंडिया खरीडुँगा भडवि साली…..अहहहहहा…” ये कहके विजय पूजा की चूत में फिर उंगली डालने लगा.. अब की बार पूजा ने उसे रोक दिया, और खुद उठके गान्ड मटकाती हुई अपना मोबाइल ले आई
“चलो अब बॉस से बात करते हैं…. स्पीकर पे करूँ, हम सब बात करते हैं… क्या बोलते हो” पूजा ने हंस के ऑफर दिया सब को…
“हां हां चलो… लगाओ फोन, आज तो वो खुश होंगे…” शन्नो ने अपनी गान्ड उछाल कर कहा
“रूको..” कहके पूजा ने फोन उठाया और नंबर डाइयल किया
कुछ सेकेंड्स के बाद, एक आदमी ने सामने फोन उठाया
“हेलो माइ बेबीडॉल… क्या कर रही हो” सामने आदमी ने कहा..
“बस आपके नाम से ही चुद रही थी.. आज तो मज़ा आ गया..” पूजा ने मस्ती में आके कहा
“चुदाई किस खुशी में भैनचोदो…. बाकी सब कहाँ हैं, सब को ले लाइन पे साली मदरजात” सामने वाले आदमी ने गुस्से में आके कहा
“अरे हेलो… बॉस , आज मैं पूजा और राज की शादी की डेट फाइनल करने गई थी… बाकी 2 दिन.. फिर राज और पूजा की शादी की तारीख निकल जाएगी, और मेरी कोशिश येई रहेगी कि शादी 10 दिन में फाइनल हो जाए.. 10 दिन में किसी को ज़्यादा कुछ करने का टाइम नहीं मिलेगा” अंशु ने अपनी बात जैसे किसी कंपनी सीईओ को बोली हो इतनी स्पेसिफिक..
“ओह… तो ये अभी बता रही हो मुझे… याद रहे मुझे हर पल तुमसे खबर मिलते रहनी चाहिए.. समझे तुम लोग” आदमी ने अपनी आवाज़ धीमी की, पर वो अब भी कड़क थी..
“ओके माइ हनी… डोंट वरी बेबी… मैं हूँ ना आपकी डॉल यहाँ, इन सब को सही से रखा है… बस अब आप बताओ, कब आओगे आप मुझसे मिलने… ” पूजा ने फाइनली मुद्दे की बात की
“बहुत जल्द.. तुम लोग मुझे शादी की तारीख बताओ, मैं तुम्हारे पास आने की डेट भिजवा दूँगा.. और याद रहे, आज इस नंबर पे कॉल किया है, आगे से इस्पे कॉल किया तो तुम्हारा हश्र ठीक नहीं होगा, समझी..” ये कहके उस आदमी ने फोन कट कर दिया
“चलो.. अब थोड़ी दारू पिलाओ मुझे, और हाँ मौसा, आपको सही में दिमाग़ नहीं है… हहेहहे” ये कहके पूजा एक बार फिर अपनी गान्ड मटकाने लगी और किचन में जाके बियर्स ले आई और सब फिर से पीने बैठ गये..
ललिता और मैं वहाँ से निकल गये, और कुछ सेकेंड्स में भाग के अपनी गाड़ी में आके बैठ गये.. इतनी चुदाई देख के मेरा लंड तो अब भी खड़ा था, पर थोड़ा प्रेकुं की वजह से अभी सॉफ्ट होने लगा था… ललिता के चेहरे पे अभी भी भाव सेम ही थे..
“ललिता, अभी दो मिनट में घर पहुँचते हैं, फिर तू बाथरूम जाना , ओके” मैने सीरीयस होके कहा
“शट अप भाई.. मैं कुछ और सोच रही हूँ” ललिता ने टेन्स्ड होके कहा
” ललिता, एक बात तो सॉफ है, इसमे मुझे माया बुआ कहीं नहीं दिख रही… पूजा की कहानी झूठी थी, पर एक दूसरी बात ये भी है, कि पूजा और ये आदमी बहुत करीब हैं.. तुमने देखा, सब लोग उससे डर के बातें कर रहे थे, पर पूजा नहीं… और तुम्हारे मोम दाद तो कुछ बोले नहीं, सिर्फ़ पूजा और अंशु…. ऐसा क्यूँ.. और बार बार पूजा तुम्हारे पापा को बेवकूफ़ बोल रही है, क्या बात हो सकती है, ” मैने उस ट्रॅक पे आ गया जिस पे ललिता थी अभी…
“हां भाई, ये तो मुझे भी लग रहा है.. माया इसमे कहीं नहीं है, पर मेरी चिंता ये नहीं है…” ललिता ने एक बार फिर अपने स्वर में चिंता जताई
“तो क्या है फिर,” मैने आश्चर्य में आके पूछा
“पूजा ने जिस नंबर पे फोन लगाया, उसकी कॉलर ट्यून… उसकी कॉलर ट्यून मैने सुनी हुई है कहीं.. आपने उसकी कॉलर ट्यून सुनी.. कोई फिल्मी सॉंग नहीं था, ना ही तो कोई मूवी का सॉंग… उसका कॉलर ट्यून एक डायलॉग था… इतना यूनीक मैने कहीं सुना हुआ है, और वो कोई फिल्म का नहीं है, वो किसी ने अपनी आवाज़ में रेकॉर्ड किया हुआ है…” ललिता ने जवाब दिया
कुछ देर तक मैं उसकी बात सुनता रहा, पर मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था कि वो क्या कहना चाहती है..
“ललिता, तूने सामने वाले आदमी से कभी बात की है.. एनी आइडिया ? ” मैने फिर उससे पूछा
“नहीं भाई… आज तक इतनी कड़क आवाज़ वाले किसी शक्स से मैने बात नहीं की, पर ये कॉलर ट्यून… मैं पक्का कहीं सुनी है… पहले ., देखी हुई थी.. अब ये कॉलर ट्यून कहीं सुनी हुई है… इससे सॉफ ज़ाहिर होता है, जो कोई भी है, मैं उसे अच्छी तरह जानती हूँ… कोई फेमिलियर शक्स ही है भाई.. ” ललिता ने जासूसी अंदाज़ में आके कहा
“ओके.. स्वीट हार्ट, प्लीज़ रिलॅक्स नाउ… इतना प्रेशर मत डाल दिमाग़ पे… रात काफ़ी हो चुकी है, और गर्मी ऑलरेडी बढ़ गयी है अंदर.. घर चल के बात करते हैं” मैने गाड़ी स्टार्ट करते हुए कहा
“अंदर कहाँ भाई… स्पेसिफिक बोलो” ललिता ने शरारत में आके कहा
“वहीं स्वीट हार्ट, जहाँ तुझे भी गर्मी है अभी” मैने आँख मारते हुए कहा
‘यू डॉग…. चलो अब आगे” ललिता ने फाइनल ऑर्डर दिया
रात के करीब 2 बज रहे थे, सड़क खाली थी, हम आधे टाइम में ही घर पहुँच गये.. घर पहुँच के जहाँ मैं अपने रूम में जल्दी से भागा, वहीं ललिता धीरे धीरे चल के अंदर आ रही थी.. मुझे ऐसे देख ललिता ने मुझे स्टेर्स पे रोका और कहा
“हेलो भाई… 5 मिन्स में आइ एम कमिंग.. स्कॉच है ना आपके पास… आइ नीड इट, मैं आइस क्यूब्स ले आती हूँ ओके… डोंट स्लीप …”
सुबह मेरी आँख ज़रा देर से खुली… रात को गुस्से में, प्यार में और खुशी में… इतनी शराब पी ली थी, ऐसा तो होना ही था…. वक़्त देखा तो सुबह के 9 बज रहे थे… इतने दिनो की सुबह एक छोटे से फ्लॅशबॅक में आ गयी.. पहले पायल, और फिर पूजा, कैसे मुझे सुबह उठाने आती थी… रोज़ सुबह किसी ना किसी की प्यारी स्माइल देखने को मिलती थी, रोज़ सुबह किसी का प्यारा चेहरा दिखता था… आज की सुबह ऐसा कुछ नहीं था, मैं उठके फ्रेश होने चला गया और साथ ही साथ ऑफीस के मेल्स भी चेक करने लगा… काफ़ी सारे मेल्स पेंडिंग थे रिप्लाइ करने के लिए.. साथ ही मेरे मॅनेजर के भी कुछ मेल्स थे मेरी बढ़ती हुई आब्सेन्स को लेके… मैने सोचा मैल का जवाब दे दूं, पर बेहतर होगा कि ऑफीस जाके सब कुछ सेट्ल कर दूं.. ऑफीस जल्दी जाने के चक्कर में मैने अपनी सब मॉर्निंग आक्टिविटीस ख़तम की और सीधा नीचे जाने लगा… सीढ़ियों पे पहुँचते ही सुबह सुबह का एक छोटा सा झटका लगा…. लिविंग रूम में सामने के सोफा पे अंशु बैठी हुई थी, रोज़ की तरह अपने डिज़ाइनर सूट में, जिसमे से उसके चुचे उभर उभर के बाहर आ रहे थे.. कसी हुई कमर, खुले हुए भूरे बाल… हाए, काश इसको अपनी बाहों में ही लपेट के रखूं पूरा दिन…. ऐसा हो नही सकता पर, ये सोचते सोचते में भी उसके सामने जाके बैठ गया..
“हाई आंटी.. गुड मॉर्निंग.” मैं अंशु के सामने बैठ गया
“अभी भी आंटी बोलोगे क्या दामाद जी.. अभी तो आप हमारे ही होने वाले हैं, अभी तो ये दूरियाँ कम कीजिए” कहके अंशु ने अपनी चुन्नी को एक दम उपर कर दिया जिससे उसकी चुचों की गहराई सॉफ दिखने लगी…. मैने ये नोटीस किया, और अंशु ने तभी
(हाए मेरी बिल्लो रानी… जितना अंग प्रदर्शन करना है कर ले, कुछ दिनो बाद तो तू और तेरी बेटी कपड़े पहनने के लिए तरस जाओगी) मैं अंशु को घूरते हुए सोचने लगा…
“क्या देख रहे हो जमाई जी…. सब आपका ही है , जब चाहे आ जाइए हमारे घर आम खाने… याद रखेंगे आप भी” कहके अंशु अपना झुकाव मेरे आगे बढ़ाने लगी… जैसे ही डॅड और मोम आते हुए दिखे, वो सीधी होके बैठी और अपनी चुन्नी भी नीचे कर ली…
“अरे बहेन जी… कैसी हैं आप, और शन्नो और ललिता तो ठीक हैं ना.. ” पापा ने अंशु से पूछा
“जी बिल्कुल, सब ठीक है, अब जो हो गया उसे भूलना तो पड़ेगा ना.. बढ़ते रहना ही ज़िंदगी का दूसरा नाम है” अंशु ने पापा को जवाब देते कहा और मम्मी को भी देखने लगी..
“जी, बिल्कुल, और बताइए सब ख़ैरियत… पूजा बिटिया कैसी है, और आपके पति इंडिया आ गये?” इस बार मम्मी पापा के साथ बैठ गयी और अंशु के साथ बातें करने लगी
“जी बहेन जी, वो कल रात ही आए, और पूजा एक दम मज़े में है, आप लोगों को बहुत याद करती है… ख़ास कर आपको” अंशु ने मम्मी को मस्का मारते हुए कहा
(भैन की लोडि, पीछे मेरे मा बाप को गालियाँ देते हो, और यहाँ ये… साला सही में इंडिया में आक्टर लोगों की कोई कमी नहीं है) मैं चुप चाप वहाँ बैठे बैठे सोच रहा था…
” जी, उसका दिल बहुत लग गया था यहाँ पे… बस अब तो उस दिन का इंतेज़ार है जब वो हमारे घर बहू बन के आएगी” पापा ने अंशु को चाइ ऑफर करते हुए कहा
“इसीलिए मैं यहाँ आई हूँ भाई साहाब… आप से बहेन जी ने बात तो की होगी, हम चाहते हैं पूजा और राज की शादी जल्द से जल्द फिक्स हो…” अंशु ने अपनी बात रखी पापा के आगे
“जी, बात तो की है.. पर मैं इतना जल्दी नहीं कर सकता राज की शादी… बिसाइड्स, ये फ़ैसला राज लेगा, उसकी शादी कब करनी है… और रही पूजा बेटी की बात, आप फ़िक्र ना करें, पूजा हमारे घर की इज़्ज़त है अब.. समाज के कहने पे हम जल्दी में कुछ नहीं करना चाहते.. बच्चो की रज़ामंदी भी देखनी है हमे… क्यूँ , तुम क्या कहना चाहते हो इस बारे में.. ” पापा ने मेरे फ़ैसले के नाम पे अंशु को टालना चाहा…
“डॅड… आप एक सेकेंड प्लीज़ आइए, मैं आपसे कुछ कहना चाहता हूँ…”
“श्योर बेटा.. अंशु जी, एक सेकेंड एक्सक्यूस उस….” कहके पापा और मैं नीचे बने एक रूम में घुस गये..
“डॅड…. आप इनको कह दीजिए, कि हमारी शादी 5 दिन में होनी चाहिए…” मैने पापा को अपना फ़ैसला सुनाया…
“व्हाट !!!!! हॅव यू गॉन इनसेन…. 5 दिन.. कॅन यू इमॅजिन, वो क्या तैयारियाँ करेंगे…” पापा ने शॉक ख़ाके कहा
“डॅड….. अगर आपने फ़ैसला मुझपे छोड़ा है, तो प्लीज़ वो करेंगे… आइ एम श्योर, वो मना नहीं करेंगे…” मैने अपनी बात पे ज़ोर डाला
“… दिस ईज़ नोट डन…. कम आउट नाउ…” कहके पापा बाहर चले गये, और उनके पीछे मैं बाहर आ गया….
“ऊह,… अंशु जी…. माफ़ कीजिएगा… ऊह…. राज जो है वो पूजा से 5 दिन में शादी करना चाहता है… ” पापा ने लड़खड़ा के कहा
“जी… 5 दिन में इतनी तैयारिया कैसे होंगी हमारी… आख़िर हमारी भी इकलोति बेटी है पूजा… हमारे काफ़ी अरमान है” अंशु ने झटका ख़ाके कहा
“मम्मी जी… आप चिंता ना करें, शादी में कुछ कार्ड्स ही छपवाने हैं.. बिसाइड्स, अगर आपको तैयारियों में कोई भी दिक्कत आए, तो हम हैं ना…. आफ्टर ऑल वे आर आ फॅमिली नाउ….” मैने एक डेव्लिश स्माइल के साथ कहा..
“जी… इतना जल्दी, मैं श्योर नहीं हूँ…. मैं क्या करूँ… आप मुझे सोचने का टाइम दें प्लीज़….” अंशु सहम गयी थी
“मम्मी.. प्लीज़ सॉरी, बट इसमे सोचना क्या…. और मैं आज अपना रेसिग्नेशन रखने जा रहा हूँ ऑफीस में… कल से मैं सीधा फॅक्टरी का काम ओवर्टेक करूँगा.. आप समझ सकती हैं, कि अगर शादी हमने टाल दी, तो मैं अच्छी तरह ना तो फॅक्टरी को टाइम दे पाउन्गा, ना तो पूजा को… जल्दी से शादी करके पूजा और मैं इकट्ठे फॅक्टरी के काम काज में जुट जाएँगे… इससे हम एक साथ भी रहेंगे , और खुद को अच्छे से जान भी लेंगे… ” मेरे दिमाग़ की हरामपँति दिखाने का टाइम था अब….
“फिर भी बेटा… काफ़ी चीज़ें सोचनी हैं, काफ़ी लोगों को इन्वाइट करना है…” अंशु लगातार रेज़िस्टेन्स दिखा रही थी…
“मम्मी.. प्लीज़, अगर 5 दिन में नहीं तो एक साल तक भी नहीं… फिर आप आराम से अपनी तैयारियाँ कीजिएगा…” मैने फाइनली उसकी गान्ड के नीचे छुरा रखा.. वो ना ही बैठ सकती थी नीचे, ना ही काफ़ी देर तक खड़ी रह सकती थी…
ये कहके, मैं वहाँ से मम्मी पापा से अलविदा लेके चला गया सीधे ऑफीस… नाश्ता तो कर नहीं पाया, रास्ते में एक केफे में रुक के कॉफी और सॅंडविच खाने लगा…. उस वक़्त ललिता का फोन आया..
“गुड वन ब्रदर.. क्या मारी है अच्छे से तुमने..” ललिता ने तारीफ़ करते हुए कहा
“वर यू लिसनिंग..” मैने पूछा
“एप.. राइट ऐबव यू..” ललिता का जवाब
“सो… क्या बोली आख़िर” मैने फिर पूछा
” क्या बोलती बेचारी…. हां बोलके गयी है.. बट डॅड ईज़ सूपर अंग्री ऑन यू भाई..” ललिता ने वॉर्निंग देके कहा..
“डोंट वरी.. मैं उन्हे पटा लूँगा… अच्छा सुन, ग्ट्ग नाउ.. रिज़ाइनिंग टुडे..” मैने ललिता को इनफॉर्म किया
“ओके भाई.. सी यू सून हियर..” ललिता ने फोन कट करते कहा
ललिता से बात ख़तम करके, मुझे बहुत खुशी हुई, अंशु ने हामी भरी 5 दिन में शादी के लिए.. ये खेल अब बहुत ही जल्द ख़तम होने वाला है… ये सोच के मैं ऑफीस निकल गया और अपने मॅनेजर से रेजिग्नेशन की बात करी
“.. कोई रीज़न है, इनक्रिमेंट चाहिए या हाइयर डेसिग्नेशन” मेरे मॅनेजर ने कहा
“नो सर.. बट कहीं पहुँचने के लिए कहीं से निकलना तो पड़ेगा…” मैने मेरे मॅनेजर से कहा
” युवर प्रमोशन ईज़ ड्यू… यू कॅन गो प्लेसस, इफ़ यू वान्ट आइ कॅन सेट यू अप इन लंडन हेडक्वार्टेर…” मॅनेजर ने मुझे ललचाना चाहा
“सॉरी सर… आइ आम गोयिंग प्लीज़… लंडन आप किसी और को भेजिए प्लीज़, सम वन हू ईज़ मच मोर बेटर देन मी.. आइ आम शुवर योउ कॅन फाइंड वन, टफ थौघ” मैने मॅनेजर को आँख मारके कहा
“हहहहा.. गुड वन बॉय… ओके, रेसिग्नेशन आक्सेप्टेड. प्लीज़ मैल मी अक्रॉस.. आंड यू हॅव टू सर्व युवर नोटीस पीरियड ओके..” मॅनेजर ने आखरी बात कही
“नोप… नोट पासिबल… आइ लीव वेफ टुडे… आइ डोंट वान्ट टू स्पायिल टर्म्ज़ वित यू आंड कंपनी.. सो अभी मैं एसएल आंड पैड लीव रख देता हूँ… उससे 15 दिन निकल जाएँगे.. आंड आइ आम शुवर यू कॅन मॅनेज इन 15 डेज़ ऑल्सो… आइ ट्रस्ट यू वेरी मच सर..” मैने फिर मज़ाक में मेरे बॉस को कहा
“ओके … फाइनल कॉल एचआर लेगा, आइ विल कीप माइ पॉइंट.. ऑल दा बेस्ट…” मैने मॅनेजर से अलविदा लेके कहा और 15 दिन में वापस आ जाउन्गा फॉर फाइनल सेटल्मेंट.. ये कहके मैं ऑफीस से निकल के घर चला गया
ऑफीस से निकल के मैं सबसे पहले वाइन शॉप में गया… वहाँ से मैने डॅड की फेव शॅंपेन “चार्ल्स हिडसीयेक ब्रूट रिज़र्व” खरीदी.. डॅड गुस्सा थे, इसलिए उन्हे मनाना तो पड़ेगा… इनफॅक्ट इस शॅंपेन के साथ हम अच्छी तरह घर पे सेलेब्रेट कर सकते हैं.. मेरे दिमाग़ में एक छोटा सा हॅपी आइडिया आया.. घड़ी देखी तो शाम के 7 बज चुके थे…. मैने ललिता को फोन किया
” बेबी, व्हेअर आर यू ?” मैने ललिता से पूछा
‘अट होम भाई… गेटिंग बोर्ड यार” ललिता ने जवाब दिया
“लिसन.. डू वन थिंग…” और मैने उसे सब काम बता दिए करने को
“भाई.. कैसा सेलेब्रेशन है..” ललिता ने सवाल पूछा
“बेटा, डू ऐज आइ से ओके…” मैने फोन कट करने से पहले कहा..
मैं आराम से घर जाने लगा.. थोड़ी स्पीड कम कर दी मैने गाड़ी की, ताकि जब तक मैं पहुँचू तब तक ललिता मोम डॅड को कहीं बाहर ले जाए… जैसे ही मुझे ललिता का कन्फर्मेशन आया, मैं तुरंत नज़दीकी मल्टी क्विज़ीन रेस्तरॉ में गया, और मोम डॅड की फेव डिशस पार्सल करवाई और तुरंत घर पहुँचा… घर पहुँच के सबसे पहले मैने शॅंपेन को आइस फ्रीज़ में रख दिया और डाइनिंग टेबल को अच्छे से सज़ा दिया… पूरा खाना मैने टेबल पे लगा दिया, बॅकग्राउंड में हल्का सा म्यूज़िक लगा दिया… लाइट्स डिम कर दिए और शॅंपेन के ग्लासस रख दिए…. एसी को एक 18 पे करके, रूम फ्रेशनेर छिड़का…. सब एक दम बढ़िया लग रहा था.. मैने ललिता को एसएमएस किया
“कम नाउ…”
ललिता मोम डॅड को 15 मिनट में वापस लाई… जैसे ही मोम अंदर आई
“अरे बेटे.. ये देखो ललिता बच्पना कर रही है…” मोम ने ललिता के कान पकड़के कहा
“.. आइ वान्ट टू टॉक टू यू नाउ…” पीछे से डॅड की आवाज़ आई.. वो बहुत गुस्से में थे
“डॅड… मोम… उससे पहले प्लीज़ कम विद मी..” कहके मैं उन्हे डाइनिंग हॉल में ले गया
“सर्प्राइज़ सर्प्राइज़….” मैने मोम डॅड को टेबल दिखा के कहा
टेबल पे डॅड की फ़ेवरेट शॅंपेन.. मोम का फ़ेवरेट खाना…. भला कोई कैसे नहीं मानेगा…. मोम डॅड के चेहरे पे बहुत बड़ी मुस्कान सी आ गयी
“वाह बेटा.. ये सब क्या है…” मोम ने टेबल देख के कहा
“मोम… कितना टाइम हुआ हमने अच्छे से बैठ के शॅंपेन पी हो, आपका फेव खाना खाया हो.. आज करते हैं ना” मैने चेअर आगे करके मोम को बिठाया
“आंड डॅड.. हियर इट ईज़.. युवर फ़ेवरेट वन..” मैने डॅड को शॅंपेन देते हुए कहा
“हाहाहा… माइ बॉय.. ही शुवर नोज हाउ टू कन्विन्स हाँ… बॉय कीप इट अप… वैसे मेरे पास भी तुम्हारे लिए एक सर्प्राइज़ है…” डॅड ने मुझे गले लगा के कहा
“वो क्या डॅड…” मैने डॅड से पूछा, जो अब अपने रूम में जाने लगे
उन्हे जाता देख, ललिता और मैं कन्फ्यूज़ थे, वहीं मोम के चेहरे से लग रहा था वो सब जानती हैं
“मोम.. व्हाट ईज़ इट…” मैने उनके पास जाके बैठा
“वेट… लेट हिम कम …” मोम ने शॅंपेन ग्लासस में निकालते हुए कहा
” बॉय.. कम हियर.. आंड साइन दीज़ पेपर्स….” डॅड ने पेपर्स दिखा के कहा
“डॅड, कैसे पेपर्स हैं ये…” मैने पेपर्स लेते हुए कहा
“बेटे साइन दिस ओके… आइ विल लेट यू नो…” डॅड ने अपनी फ़ेवरेट पेन देते हुए कहा
मैने बिना कुछ पूछे उन पेपर्स पे साइन कर दी…
“सी.. यू ब्रोक दा फर्स्ट रूल… पेपर्स पढ़े क्यूँ नहीं” डॅड ने पेपर्स वापस लेते हुए कहा
मैं कन्फ्यूज़ था, आख़िर डॅड करना क्या चाहते हैं.. शायद उन्होने भी ये भाँप लिया
“हाहहहहहा.. रिलॅक्स बॉय.. आइ आम कमिंग टू यू… अब से तुम सिर्फ़ मेरे बिज़्नेस के ही नहीं… मेरी पर्सनल वेल्त के भी मालिक हो…” डॅड ने एक बिजली सी गिरा दी मुझपे
“डॅड… यूआर किडिंग राइट…” मैं सीरीयस हो गया
“नहीं बेटा.. आइ आम सीरीयस.. अकॉरडिंग टू दिस, तुम्हारे नाम पे मैने सब असेट्स ट्रान्स्फर कर दिए हैं.. ज़य के नाम पे मैने 10 करोड़ रखे हैं फिक्स्ड डेपॉज़िट… उसकी पढ़ाई के बाद उसको बिज़्नेस करना है जिसके लिए आइ हॅव स्पोकन टू वेंचर कॅपिटलिस्ट ऐज वेल… तो ज़य सेट हो गया.. रहे तुम, तुमने अपनी जॉब , अपनी इनडिपेंडेन्स छोड़ी है मेरे कहने पे… हमारे कहने पे तुमने लाइफ पार्ट्नर चूज़ किया है वो भी हमारी मर्ज़ी का… तुमने अपनी ज़िंदगी का भविष्य हमारे हिसाब से डिसाइड किया है बेटा.. तो हम क्या इतना नहीं कर सकते…” डॅड ने शॅंपेन का ग्लास पकड़ते हुए मुझे कहा
“बट डॅड… दिस..” मैने इतना ही कह पाया के डॅड ने मुझे रोक दिया
“नो दिस आंड दट सन… आंड वन मोर न्यूज़… गॉड फर्बिड कभी तुम्हे कुछ हुआ, तो तुम्हारी सारी वेल्त पूजा के नाम पे ट्रान्स्फर हो जाएगी.. आंड बिकॉज़ सारा हिस्सा एक बंदे के नाम पे ना रहे, इसलिए आफ्टर यू ज़य आंड पूजा विल बी 50 % पार्ट्नर्स..” डॅड ने एक और बड़ा झटका दिया मुझे
मैं एक दम स्टन हो चुका था… क्रिकेट की भाषा में बोलूं तो क्लीन बोल्ड.. स्टंप्ड… जो भी समझो….
“और डॅड… मेरे होते हुए पूजा का हिस्सा..” मैने जिग्यासा से पूछा
“व्हाट सन… ओफ़कौर्स 50 %” डॅड ने जवाब दिया
“डॅड. कॅन आइ सी दा लिस्ट ऑफ युवर असेट्स प्लीज़ ” मैने पेपर्स लेते हुए कहा
डॅड के असेट्स की लिस्ट और वॅल्यूयेशन कुछ यूँ थी
स्टॉक्स आंड इनवेस्टमेंट्स :- 45 करोड़
लाइफ इन्षुरेन्स (ड्यू) :- 10 करोड़
लाइफ इन्षुरेन्स (ड्यू इन 3 यियर्ज़ ) 15 करोड़
फार्म हाउस (लोनवाला) :- 18 करोड़
फार्म हाउस (महाबालेश्वर) 16 करोड़
कार्स :- 9 करोड़
बंगलोस (अँबी वॅली) 50 करोड़
बंगलो (पुणे) 6 करोड़
वॉचस 1 करोड़
बंगलो (मुंबा बांद्रा) 50 करोड़
जेवेल्लेरी (मदर) 25 करोड़
क्लब मेंबरशिप्स 3 करोड़
पेंटिंग्स 10 करोड़
कॅश आंड बॅंक बॅलेन्स 10 करोड़
लाइयबिलिटीस :- 3 करोड़
“नेट वर्त 265 करोड़….” मेरे मूह से ज़ोर से निकला
“यू आर रिच मॅन नाउ सन…. एंजाय….” डॅड ने अपना दूसरा शॅंपेन का ग्लास ख़तम कर दिया था
“आंड गिव मी दीज़ पेपर्स बॅक…. मुझे मेरी बहू से भी तो सिगनेचर्स लेने हैं..” डॅड ने पेपर्स लेते हुए कहा
मैं निराश होके वहीं बैठ गया और शॅंपेन पीने लगा…. डॅड ने तुरंत ही ज़य को फोन किया और उसे उसके बिज़्नेस के सेट अप के लिए बताया.. वो बहुत खुश था, उसकी आड़ कंपनी के लिए उसको फाइनान्स मिल गया और उसके पास 10 करोड़ कॅश भी थे.. वो फाइनान्स का पार्ट सुनके बहुत खुश हुआ पर डॅड ने उसे पैसे दिए वो सुनके वो भी डॅड से बहुत गुस्सा हुआ…. मेरी शॅंपेन का नशा इतना, मैं सोचने लगा था….
“डॅड… अँबी वॅली तो आपने ललिता और डॉली के लिए लिया था ना… तो आप उन्हे दे दीजिए ना प्लीज़…” मैने ललिता को देखते कहा
“बेटे, अभी उसकी ओनरशिप मेरे पास है, विच ईज़ ट्रॅन्स्फर्ड टू यू नाउ… तुम बोलो तो पेपर्स मैं अभी बनवा लूँ ललिता के लिए भी, शी ईज़ माइ डॉटर.. बट उसके लिए मैने कुछ और सोच रखा है, विच ईज़ अगेन आ सर्प्राइज़…” डॅड ने फिर ललिता को देख के जवाब दिया
आज सर्प्राइज़ नहीं, शॉक लग रहे थे मुझे… मैं चुप चाप खाना खाने बैठ गया और शॅंपेन पीने लगा…. कुछ ही देर में हम सब खाना ख़ाके बातें करने बैठे, और बातों बातों में ये पता चला कि मोम डॅड कल पूजा के घर कुछ शगुन ले जाने वाले हैं और उसके साइन भी कल ही ले लेंगे… (और गान्ड मर्वाओ, करो 5 दिन में शादी भैनचोद…. मैं खुद को गालियाँ देने लगा).. कुछ देर में मोम डॅड से अलविदा लेके मैं अपने रूम में चला गया.. ललिता वहीं बैठी मोम डॅड से बातें कर रही थी.. रूम में जाके मैं फ्रेश हुआ और कपड़े चेंज करके बाल्कनी में खड़ा हो गया…. बाल्कनी में खड़े रहके अपने लिए सिगरेट सुलगाई और कश मारने लगा…
“यूँ सिगर्रेट से टेन्षन कम नहीं होगी स्वीट हार्ट…” पीछे से ललिता की आवाज़ आई….
“थॅंक गॉड इट्स यू… दरवाज़ा बंद करो , मोम डॅड ना देख ले सिगर्रेट” मैने ललिता को हिदायत देते कहा
दरवाज़ा बंद करके ललिता मेरे पास आई और मेरे हाथ से मेरी सिगर्रेट लेके कश मारने लगी
“तो क्या करूँ… इससे तो बहुत बड़ा लफडा होगा यार..” मैने ललिता से कहा
“डोंट वरी… ट्रस्ट रखो खुद पे… हम तो ऑलरेडी अपनी चाल चल चुके हैं… हमे बस उस शख्स का इंतजार है जो इनका बॉस है.. उसके आते ही हमे हमारा प्लान ख़तम करना है… येई तो चाहते थे ना आप भाई..” ललिता ने मुझे कहा
“हां आइ नो… बट फिर भी, अगर उनको शक़ हो गया कि हमने उनके साथ क्या किया है, तो वो लोग अलर्ट तो होंगे ही, साथ में हमे ख़तरा भी है.. और मुझे डॉली के कातिल के बारे में भी जानना है ओके… इसलिए वी आर वेटिंग, नहीं तो हम अब तक अपनी चाल चल चुके होते और ये खेल यहीं रुक गया होता…” मैने वापस ललिता से सिगर्रेट ली और अपने मूह में लगा ली
“कम ऑन इन भाई… अंदर आओ,” कहके ललिता अंदर चली गयी
अंदर जाते ही ललिता ने मेरे और अपने लिए एक दारू का पेग बनाया हुआ था…
“ये विस्की कहाँ से आई…” मैने हाथ में ग्लास लेके कहा
“आप ने मुझे तो भेज दिया अंकल आंटी को घुमाने.. जब तक वो माल में घूमते, मैं चुपके से जाके वाइन शॉप में घुसी और गाड़ी में ड्राइवर्स सीट के नीचे छुपा दी… अब पियो, आपकी चाय्स ही है.. जॅक डॅनियल्ज़, नो सोडा, नो वॉटर… सिंपल ऑन दा रॉक्स…” ललिता ने टोस्ट करने के लिए अपना ग्लास आगे बढ़ाते कहा
“नहीं यार… फिर कल की तरह कोई भूल ना हो जाए…” मैने ग्लास वापस टेबल पे रखते हुए कहा
फ्लॅशबॅक येस्टरडे नाइट
“भाई, चलो दारू पीते हैं..” ललिता ने मेरे रूम में घुस के कहा….
अंशु के घर की चुदाई देख के मेरा लंड ऑलरेडी तना हुआ था, उपर से ललिता के सामने कंफर्टबल भी नहीं लग रहा था, पर उसे मना नहीं करना था…
“ओके डियर…. बना ले पेग” मैने बाथरूम में घुसते हुए कहा
जैसे ही मैने बाथरूम से आया, सामने ललिता बैठी थी और उसने भी नाइटी पहनी थी… उसकी नाइटी एक दम सोबर थी वाइट कलर की, पर मेरे खड़े लंड की वजह से वो मुझे सेक्सी लग रही थी…. मैं जाके उसके पास बैठ गया
“व्हाट…. जाके सामने बैठो ना…” ललिता ने कहा
“क्यूँ… यें बैठने में क्या पंगा है… और ये मेरा रूम है… साथ में बैठते हैं…” मैने ग्लास लेते हुए कहा..
“चियर्स स्वीटी… चियर्स ….. मैने ललिता के ग्लास को ज़बरदस्ती टकरा के कहा
ललिता वहीं बैठी रही…. उसके चहरे पे कोई भाव नहीं थे… हम दोनो खामोशी से अपने अपने ग्लास से दारू पी रहे थे.. अंशु के घर का सीन मेरे सामने से हट ही नहीं रहा था, और शायद ललिता के दिमाग़ से भी…. तभी तो उसकी नाइटी थोड़ी गीली लग रही थी मुझे उसकी चूत के वहाँ से…. मैं ललिता का चेहरा देख के अपनी दारू पिए जा रहा था.. देखते देखते मैने 5 ग्लास अंदर गटक लिए
“भाई धीरे…. अभी तो मैने 2 लिए हैं… इतना क्या जल्दी है आपको हाँ” ललिता ने मुझसे पूछा
“ललिता… आइ लाइक यू आ लॉट….” ये कहके मैने ललिता के चेहरे को पीछे से पकड़ा और उसके होंठ अपने होंठों से मिला लिए.. जब तक उसे कुछ समझ आता, तब तक मैं जन्गलियो की तरह उसके होंठ चूसने लगा था… कुछ देर की ना नुकुर के बाद उसने भी मेरा साथ दिया और हम वाइल्ड किस्सिंग में इन्वॉल्व हो गये…. किस्सिंग करते करते मैं उसके चुचे दबाने लगा…
“आहह सीईईई…उम्म्म्मम भाई उम्म्म्म…..” ललिता सिसकियाँ लेती हुई बोली
उसके चुचों से नीचे जाके मैं उसकी चूत पे हाथ फेरने लगा… पहले तो उसने मना नहीं किया, पर फिर अचानक ही उसने मुझे खुद से अलग किया और रूम से तेज़ी से भाग के निकल गयी.. उसके जाते ही मुझे खुद पे बहुत गुस्सा आया…. मैं वहीं बैठे बैठे सोचने लगा, अभी इसको बुरा लगा तो, ललिता बहुत कुछ कर सकती है मुझे… मैं डर सा गया, मैने उसे सॉरी के एसएमएस भी किए पर उसका कोई जवाब नहीं…. थक हार के मैं अकेला विस्की पीने लगा और आखरी पेग ख़तम किया तभी ललिता का एसएमएस आया
“थ्ट्स ओके भाई… वी नीडेड टू रिलीस दा हीट… आज देखने के बाद ईवन आइ वाज़ वेरी हॉट… प्लीज़ रिलीस युवरसेल्फ़ नाउ.. सी यू टुमॉरो”
ललिता का ये एसएमएस पढ़ के मेरी जान में जान आई और मैं हंस के सो गया
बॅक टू प्रेज़ेंट
“ओह कम ऑन भाई… दट वाज़ जस्ट आ पासिंग मोमेंट.. डोंट बी आ स्पायिलर नाउ… बी आ स्पोर्ट ओके..” ललिता ने फिर मेरे हाथ में दारू पकड़ा दी
हम टोस्ट कर ही रहे थे कि तभी मेरे मोबाइल पे एसएमएस आया… मैने जैसे ही मोबाइल लिया, तभी उसके मोबाइल पे भी एसमएस आया..
“को इन्सिडेन्स ना…” मैने ललिता से कहा और हम चेक करने लगे एसएमएस
एसएमएस पढ़के हमने एक दूसरे को देखा, और ग्लास से ग्लास टकरा के कहा
“चियर्स टू दिस वन… वी आर वेरी क्लोज़”
ललिता और मैं अब खुशी से दारू पीने लगे थे.. बात ही ऐसी थी… कुछ देर पहले जो प्रॉपर्टी के पेपर्स देख के मायूसी हुई थी, उसका दुख अब कम होने लगा था… ललिता मुझसे ज़्यादा खुश थी, उसको यकीन होने लगा था कि हम अब डॉली के कातिल तक जल्द पहुँचने वाले हैं..
“फाइनली… तो आपका दोस्त काम का निकला भाई…” ललिता ने खुशी ख़ुसी ग्लास छलकाते हुए कहा
“तुझे कोई डाउट है उसपे…. ही ईज़ आ बॉन्ड यार…” मैने ललिता का जवाब दिया
“इनफॅक्ट, वाइ डोंट वी स्पीक टू हिम… वेट लेट मी कॉल हिम…. ” मैने ग्लास रखके अपने फोन से नंबर डाइयल किया.. कुछ सेकेंड्स त्रिंग बजने के बाद सामने से जवाब आया
“हाई … कैसे हो” एरिसटॉटल ने कहा
“क्या रे मेरे जेम्ज़ बॉन्ड… बहुत जल्द मिल गया तुझे ज़ूरिच का वीसा… क्या बात है मेरे शेर…” मैने खुशी में कहा
“हां… इसमे हमने इंटररपोल को इन्वॉल्व किया है… जब किसी केस में इंटररपोल इन्वॉल्व्ड हो, तो समझ लो या तो उसका नतीजा जल्द आता है, या तो बिल्कुल नहीं आता…” एरिसटॉटल ने सीरियस्ली बात की
“कूल है भाई… अब कब जाएगा तू, वी होप तुझे ज़ूरिच में सब मिल जाए जो हमे चाहिए… आंड तूने वाच तो ली है ना ऐज आ प्रूफ..” मैने एरिसटॉटल से श्योर होना चाहता था
“हां … वाच ली है , तुम फ़िक्र मत करो… और मैं आज रात की लेट फ्लाइट है.. मुंबई से जाउन्गा सो अभी 10 मिनट में कॅब पकड़ के निकलूंगा…” एरिसटॉटल एक दम कूल साउंड कर रहा था
“कॅब क्यूँ.. एक काम करता हूँ, मैं अभी 5 मिनट में तेरे वहाँ गाड़ी भिजवाता हूँ.. उसमे जा” मैने अपनी हेल्प एक्सटेंड की
“अरे नहीं यार.. कॅब ईज़ ओके..” एरिसटॉटल आना कानी करने लगा
“सुन, आइ वान्ट यू टू बी सेफ.. आंड मैं ये चीज़ मेरे लिए कर रहा हूँ ओके… अब ज़्यादा नाटक मत कर.. स्कोडा लॉरा आ जाएगी तेरे पास 15 मिनट में… गाड़ी नंबर है एमएच13 XX 9**9.. और ड्राइवर का नाम , नंबर एसएमएस कर देता हूँ.. ओके” मैने अपनी बात मनवा ली उससे..
“ओके भाई… तेरे आगे मैं झुक गया.. आंड मैं रेडी होने जाउन्गा, 15 मिनट में भेज देना पक्का… चल बाय ” कहके एरिसटॉटल ने फोन कट कर दिया
मैने एरिसटॉटल से बात करके, तुरंत हमारी फॅक्टरी के ड्राइवर को उसके घर जाने के आदेश दिए… हमारी फॅक्टरी से एरिसटॉटल का घर 5 मिनट की दूरी पे था..
“क्या कह रहा था भाई… कब जाएगा” ललिता ने सबसे पहला सवाल पूछा
“आए हाए.. तुझे बड़ी जल्दी है हाँ… क्या हुआ उसका नाम सुनके लड़की तुझे..” मैने ललिता को चिढ़ा के कहा
“भाई.. कम ऑन, ही ईज़ नोट ईवन माइ टाइप्स ओके..” ललिता ने ग्लास खाली करते हुए कहा
“आंड.. वॉट ईज़ युवर टाइप स्वीट हार्ट…” मैने सीधा जानना चाहा
कुछ सेकेंड्स ललिता खामोश रही.. रूम में सिर्फ़ मेरे दारू के छलकते आइस क्यूब्स की आवाज़ थी…
“फ्रॅंक्ली स्पीकिंग भाई.. टाइप्स अभी तक सोचा नहीं है… इसको ज़्यादा जानूँगी तो हो सकता है आइ मे फॉल फॉर हिम…. मे बी नोट.. यू नेवेर नो ” ललिता ने आँख मार के जवाब दिया
“बात चला लूँ बोल तो… ही विल नोट रिजेक्ट यू ;-) ” मैने भी आँख मारके जवाब दिया
“हुह… वो मुझे रिजेक्ट ही नहीं कर सकता.. उसे मेरे जैसी लड़की कहाँ मिलेगी…” ललिता ने एक एक पेग और बना दिया, इस बार उसमे 3 के बदले 4 आइस क्यूब्स थे..
“यो बेब्स.. आज तक उसको भी किसी लड़की ने रिजेक्ट नहीं किया…” मैं एरिसटॉटल की साइड लेने लगा
“चेंज दा टॉपिक नाउ प्लीज़…” ललिता हॅड दा फाइनल से इन दिस… और हमने टॉपिक चेंज करके इधर उधर की कुछ बातें की, और सोचने लगे कि उनका बॉस भी आ जाए तो उसको मुजरिम कैसे साबित करेंगे..
उधर अंशु के घर पे….
“दीदी.. उस हरामी ने तो हमे बिल्कुल टाइम नही दिया…. हम सोच रहे थे कि हम 10 दिन का बोल देंगे तो वो चोंक जाएँगे, बट उस राज ने सामने से 5 दिन माँगे… इसका कारण क्या हो सकता है दीदी” अंशु ने एक साँस में अपनी इस बात के साथ उसका वोड्का का पेग भी गले के नीचे उतार डाला
“अंशु.. इसमे चिंता की क्या बात है, तेरी बेटी की चूत की गुलामी कर रहा है अभी से… इसमे चिंता कैसी, ये तो खुशी की बात है ना… तूने बात आगे पहुँचाई जहाँ इसे पहुँचना चाहिए…” शन्नो ने अपनी सिगर्रेट सुलगाते हुए कहा
“नहीं दीदी.. उसी के लिए हिम्मत चाहिए, उस के लिए ही दो तीन वोड्का के पेग मार के फिर फोन करूँगी…” अंशु ने एक और वोड्का का नीट पेग अपने गले के नीचे उतार दिया… एक के बाद एक 5 पेग अंशु के गले के नीचे उतरे, तभी आके उसे हिम्मत आई और वो फोन मिलाने लगी.. कुछ सेकेंड्स बाद..
“हेलो.. ऊह, शादी की डेट फाइनल हो गयी है…” अंशु ने हिचकिचा कर कहा
“जी…. 5 दिन में शादी करनी है…” अंशु घबराने लगी…
सामने से कुछ जवाब आया जिसे सुनके उसकी घबराहट दूर हो गयी, और वो मुस्कुराने लगी…
“जी बिल्कुल… बस येई चिंता है कि 5 दिन में सब कैसे मॅनेज होगा..” अंशु ने फाइनली रिलॅक्स होके कहा
“ओके… मैं देख लूँगी..” कहके अंशु ने फोन कट करके कहा…
“क्या हुआ…” शन्नो ने फोन कट होने के बाद अंशु से पूछा
“बॉस खुश हुए… पर….” अंशु ने इतना ही कहा, कि शन्नो ने उसे टोक दिया…
“बॉस मत बोल उसे मेरे सामने… ” शन्नो ने उसे आँख दिखाते हुए कहा
“हां दीदी.. वैसे उन्होने कहा…” अंशु को फिर शन्नो ने टोक दिया
“बस कर अंशु… बॉस, उन्होने…. ये सब मत बोल, कलेजा फट रहा है मेरे.. आख़िर है तो वो मे….” शन्नो ने इतना ही कहा के अंशु ने फिर उसे कहा
“दीदी…. इसके आगे एक लफ्ज़ नहीं… कंट्रोल कीजिए अपने गुस्से पे” कहके अंशु ने उसे एक वोड्का का ग्लास पकड़ा दिया जिसे शन्नो ने जले हुए मन से अपने गले के नीचे उतार दिया
रात को ललिता और मैं दारू पीक मेरे कमरे में हो सो गये थे.. बट मैने एन्षूर किया कि मैं उसके करीब ना रहूं… मैं काउच पे सो गया और वो बेड पे… सुबह जब मैं उठा, तो ललिता ऑलरेडी मेरे सामने खड़ी थी…. कितने दिनो बाद सुबह सुबह मेरे उठते ही किसी लड़की का चेहरा सामने था..
“गुड मॉर्निंग भाई…. स्लेप्ट वेल..” ललिता ने स्माइल के साथ पूछा… ललिता अभी भी उस वाइट नाइटी में थी..
“यस डियर… सॉरी तुझे यहीं सोना पड़ गया रात को, आगे से तेरे साथ नो दारू…” मैने आँखे मलते हुए कहा
“भाई इसमे दारू का क्या दोष… खैर छोड़ो…” ये कहके ललिता मेरे पास आई, और मेरे गाल पे एक सॉफ्ट सा किस दिया…
“ये क्यूँ भला..” मैने हसके ललिता से पूछा
“फॉर बीयिंग आ ट्रू जेन्टलमेन भाई… ” ये कहके ललिता मेरे रूम से निकल गयी..
मैं कुछ देर यूही लेट के, फिर फ्रेश होने चला गया… ऑफीस जाना नहीं था, तो क्या करता… ये सोचते सोचते मैं तैयार हो गया, और नीचे आया.. नीचे आते ही मेरी नज़र घर पे पड़ी, तो मैं सोचने लगा.. ये किसका घर है भाई….
“मोम….. मूओंम्म्मम…. व्हेअर आर यू…… मूंम्म्म…. ” मैं चिल्लाने लगा लिविंग रूम से…..
“ओफफो… क्या हुआ है , वाइ शाउटिंग सो मच…” मोम अपने कमरे से निकल के आई
“ये सब क्या है, ये फूल, लाइटिंग्स, शामियाना.. व्हाट ईज़ दिस….” मैने घर के आस पास हो रही तैयारियों को देख के पूछा
“तेरी शादी में अभी 4 दिन ही बाकी है… तो तैयारियाँ तो करनी हैं ना.. और जल्दी नाश्ता कर ले, मुझे और ललिता को शॉपिंग पे ले चल..” मोम मुझे इन्स्ट्रक्षन्स देते हुए बोली
“मोम, ड्राइवर को ले जाओ ना… प्लीज़” मैने बिनती की मोम से….
“बेटा, ड्राइवर को तुम्हारे पापा पूजा के घर ले गये हैं…. उन्हे वहाँ से फिर कुछ काम से बाहर जाना है, आते आते उन्हे शाम होगी.” मोम ने सुबह सुबह ही बाद न्यूज़ का बॉम्ब फोड़ दिया
“ओके मोम…. चलिए, नाश्ता करते हैं… मैं तब तक ललिता को बुला के आता हूँ..” कहके मैं ललिता के रूम में भागा
जैसे ही मैं ललिता के रूम में जाने लगा, सामने से ललिता आती दिखाई दी, मैं उसे देखता ही रह गया… बहुत क्यूट लग रही थी.. वाइट ड्रेस में, एक दम स्वीट… मैं उसे किसी और नज़र से देख नहीं सकता था, क्यूँ कि ललिता से वादा किया था, और बिसाइड्स, मैने सोचा था.. ललिता और एरिसटॉटल की जोड़ी सेट करने का…
“क्या घूर रहे हो भाई…” ललिता ने चुटकी बजाते हुए कहा
“सम्वन’स लुकिंग प्रेटी..” मैने ललिता की तरफ कदम बढ़ा के कहा
“ओह… सम्वन’स लुकिंग हॅंडसम ऑल्सो..” ललिता ने आँख मारते हुए कहा….
तभी मेरा मोबाइल बजा.. निकाल के देखा तो पूजा का एसएमएस था
“मिस्सिंग यू सो मच … 4 दिन कैसे निकलेंगे…. आप ने कितने दिन से बात भी नहीं की… आज मिलते हैं ना प्लीज़.. चुपके चुपके, व्हाट से… वेटिंग, लव पूजा क्षोक्षो :-) “
“ललिता… प्लीज़ रिप्लाइ दे ना इसका..” मैने ललिता को मोबाइल देते हुए कहा
ललिता ने झट से एसएमएस किया
“नोट पासिबल टुडे.. गोयिंग टू शॉप वित मोम आंड ललिता… प्लीज़ बाकी 4 दिन निकालो, उसके बाद तो तुम बेड से उठ भी नहीं पओगि… और रात को ललिता को तुम्हारे घर ड्रॉप करने आउन्गा, तब चुपके मिलेंगे फॉर 15 मिनट.. बाय :-) “

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