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मैं ललचाई नज़रों से लीला दी की तरफ देख रहा था।  मेरी नज़रों को मौसी भी पढ़ने की कोशिश कर रही थी। लीला दी जहाँ सलवार सूट में कमाल लग रही थी वहीँ मौसी भी साडी में एकदम माल लार रही थी।  उन्हें देख कर कोई कह नहीं सकता था कि लीला दी उनकी लड़की है और ये नानी बन चुकी है।  मैं मौसी के बगल में बैठा था और वो मुझसे दुलार किये जा रही थी।  वो कभी मेरे बालों से हाथ फेर रही थी कभी मुझे बाँहों में भर ले रही थी।  उनके लिए मैं अभी भी बच्चा जैसा ही था।  पर उन्हें क्या पता था कि मैं तो कब का जवान हो चूका था और मौका मिले तो उनकी चूत कि भी बंद बजा देता।  उनकी इस हरकत से मेरा लंड खड़ा होने लगा था।  पर मैं कोई जल्दीबाजी नहीं कर सकता था।  मुझे ये तो पता था कि उनको और लीला दी को बुलाने कि पीछे माँ कि क्या मंशा थी पर मुझे ये नहीं पता था कि ये दोनों कितना जानती है।  मुझे ये भी पता था कि पूरी कि पूरी फॅमिली एक नंबर की चुड़क्कड़ फॅमिली है।  पर इन्हे पता भी था की मुझे फॅमिली के राज का कुछ कुछ आइडिआ है।  कुछ देर में माँ नाश्ता लेकर आई और दीदी के गोद से बच्चा लेकर उसे खिलाने लगी।  थोड़ी देर में दीदी का बच्चा रोने लगा।  उसे भी भूख लग आई थी।  दीदी ने बेबी को लिया और अंदर कमरे में चली गई ।  मौसी उठ कर दीदी का नाश्ता लेकर अंदर जाने लगी तो माँ ने कहा – बैठो न दीदी।  कितने दिनों बाद मिली हो।  जा रे राज तू दीदी का चाय नाश्ता दे आ।

मैं उठ कर एक ट्रे में नाश्ता लेकर अंदर पहुंचा तो अंदर का नजारा देख कर मन खुश हो गया।

दीदी बिस्तर पर करवट करके लेटी थी।  उन्होंने कुरता ऊपर कर रखा था।  उनका बेबी उनके बगल में लेता था।  वो नीचे वाले मुम्मे को पी रहा था।  ऊपर वाला उसके चेहरे पर लटका था।  उन्होंने टाइट लेग्गिंग पहन राखी थी और इस तरह लेटने से उनकी जंघा का पूरा शेप दिख रहा था।  बल्कि पैंटी की लाइन भी दिख रह थी। 

मुझे देखते ही उन्होंने पास रखा दुपट्टा ओढ़ लिया और अपने आप को ढक लिया।  मैंने सॉरी बोलते हुए कहा – दीदी आप नाश्ता कर लो ।

दीदी अब उठ कर बैठ उन्होंने अपने कपडे सही कर लिए थे और बच्चे को पास में लेता दिया।  मैं वापस जाने लगा तो बोली – बैठो , तुम मुझसे भाग क्यों रहे हो ?

मैंने कहा – ऐसा नहीं है मैं कोई बच्चा नहीं हूँ न ही आप कोई भूत जो मैं भागु।

मेरी बात सुन दीदी हंसने लगी। मैं वहीँ बेड पर बैठ गया और बेबी के साथ खेलने लगा।  दीदी ने मेरी पढाई , कॉलेज और दोस्तों के बारे में बात करनी शुरू की।  मैंने भी उनसे उनके हस्बैंड, और घर वालो के बारे में पुछा।  थोड़ी देर बात करने के बाद मैं उठ कर बाहर आ गया।  दीदी वहीँ लेट गई।

इधर मैंने देखा माँ और मौसी बात चीत में मशगूल हैं।  मैं अकेला सा फील करने लगा।  मैंने श्वेता को फ़ोन लगा लिया। 

श्वेता ने फ़ोन उठाते बोली – क्यों मेरे चोदू भाई कैसे हो ?

मैंने उससे कहा – तू बदमाश हो गई है।  कहाँ है कोई सुनेगा तो क्या कहेगा ?

श्वेता – अरे बुद्धू अकेली हूँ तभी ऐसे बात कर रही हूँ मेरी रूम मेट बाहर गई है।  मैं अकेली हूँ

मैं-  कहे तो आ जाऊं, अकेला पैन दूर कर दूंगा

श्वेता – अकेलापन दूर करेगा या अपना काम करेगा।

मै –  कौन सा काम ?

श्वेता – वही 

मैं – वही क्या ?

श्वेता –  चोदने का ?

मैं – तू देती ही नहीं है।

श्वेता – तुझे मिलेगी भी नहीं

मै – यार तू मत दे पर कोई अपने जैसी पटाने में मदद कर दे।  कोई नहीं तो रूम मेट से ही दोस्ती करा दे।

श्वेता – वो बेकार है।  एक साथ डबल डेट कर रही है।  हर वीकेंड उसका बॉयफ्रेंड बदलता रहता है। तेरे लिए कोई और ढूंढती हूँ

मैं – जल्दी कर।

श्वेता – हम्म

हमने थोड़ी देर और बात की और फिर मैं भी लेट गया।  मैं सोचने लगा की श्वेता कितना बदल गई है।  पर वाकई वो बदल गई है या फिर पहले से ऐसी थी और सब उसके अंदर दबा हुआ था।  पिछली बार अंदर का गुबार और राज निकलने के बाद शायद वो अपने वास्तविक रूप में आ गई है।  मुझमे उम्मीद सी जाग गई की शायद अब श्वेता की कुँवारी चूत ही मिल जाए।  वही मेरी पहली कुँवारी चूत हो। यही सोचते सोचते मुझे झपकी सी आ गई।  तभी माँ ने मुझे उठाया और कहा कि – राज एक टैक्सी बुला दे।

मैंने कहा – क्या हुआ ?

माँ – अरे तेरी मौसी और लीला को जाना पड़ेगा।  तेरे नाना कि तबियत थोड़ी ठीक नहीं है।  वो बुला रहे हैं।

मैं – तब तो हमें भी चलना चाहिए।

माँ – हम भी एक दो दिन में चलेंगे।  फिलहाल इन दोनों को जाना है।

उन लोगो ने ज्यादा सामान निकाला भी नहीं था।  थोड़ी ही देर में टैक्सी आई और लीला दी और मौसी चली गई।

मैं नाना को लेकर थोड़ा चिंतित था।  मैंने कहा – नाना कि तबियत ज्यादा तो ख़राब नहीं है ? चलो हम भी देख आते हैं।

माँ ने डांट कर कहा – रहने दे।  सही हैं वो।  मुझे पता है नौटंकी कर रहे हैं।  जैसे ही पता चला कि लीला आई हुई है भाग कर गाँव से आ गए। 

बुढऊ को थोड़ा भी सब्र नहीं है।

मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था।  मैंने कहा – उनकी तबियत खराब है और तुम उल्टा उनके ऊपर गुस्सा हो रही हो।

माँ बोली – तू नीरा बुद्धू ही है।  तभी तुझसे कोई न पट रही है।  अरे पागल तुझे क्या लगता है दूधका दीवाना इस खानदान में तू ही है ?

अब मुझे समझ में आया।  दरअसल  माँ ने चालाकी से लीला दी और मौसी को अपने घर बुला लिया था।  वो चाहती थी कि लीला दी का दूध मुझे ही मिले पर नाना उनके बाप थे उन्हें जैसे ही पता चला कि वो आई हैं और हमारे घर हैं उन्होंने बीमारी का बहाना करके उनको वापस बुला लिया।  सीधे सीधे बुलाते तो कोई नहीं मानता। मैं भी नाना कि दिमाग का लोहा मान गया।

मैंने कहा – लीला दी को पता था कि यहाँ उन्हें मुझे दूध पिलाना पड़ेगा

माँ- अरे तेरे बारे में अभी सब ज्यादा नहीं जानते है। तेरे पापा कि जाने कि बाद इन लोगो ने काफी मदद कि थी।  तू उस समय बच्चा ही था ।

बहनो की शादी की बाद वैसे ही तू मेरे इतना करीब आ गया कि उनसे तो बस हाल चाल ही होती थी।  आज मौका मिला था तेरी मौसी से बात करने का बुढऊ की चक्कर में वो भी गया।

मैं – लीला दी को नाना का पता है ?

माँ – पता है ? खूब खेली खाई है उनके  साथ। उनकी तबियत का सुन देखा नहीं कैसे बेचैन थी।  अगर तेरे नाना गाओं नहीं गए होते तो ये वहीँ रहती कुछ दिन फिर यहाँ आती।  अब तो घर में गाय आकर भी नहीं दुहा पाई। 

माँ अब हंसने लगी थी।  मैंने माँ को गले से लगा लिया और चूमते हुए कहा – मेरी गाय है न यहाँ। जिसने  बचपन से दूध पिलाया है। मुझे कोई और नहीं चाहिए।

माँ ने मुझे अपने मुम्मो की बीच सीने से लगा लिया और कहा – मेरा मुन्ना।  तू मुझे इतना प्यार करता है।

मैंने कहा – हाँ

माँ ने अपना ब्लाउज खोल दिया और अपने मुम्मे मेरे मुँह में डाल दिया।  देख तेरी बातो से निप्पल कितना टाइट हो गया है।  चल पी ले।

मैंने उनके मुम्मे चूसने शुरू कर दिए।

थोड़ी देर बाद मैंने माँ से कहा – माँ ये नाना और परिवार में चुदाई का खेल कैसे शुरू हुआ बताओ न ?

माँ – लम्बी कहानी है। सब सुनाने लागू तो उपन्यास बन जायेगा।

मैंने कहा – कुछ तो बताओ।

माँ – ताकि तू गरम होकर मुझे चोद दे।

मैं – वो तो तुम कहानी न भी सुनाओ तो भी चोद दूंगा।  तुम इतनी मस्त चुदक्कड़ माल हो कि तुम्हे चोदने की लिए कुछ सुनना देखना थोड़े ही पड़ता है।

माँ – वह रे चोदू

आज दोस्सरी बार मुझे ये शब्द सुनने को मिला था।  मैं मस्त होकर दूध पीने लगा और माँ कहानी सुनाने लगी।

माँ कि जुबानी उनके जौवन कि कहानी  [फ्लैशबैक ]

तेरे नाना गाँव में एक बड़े जंमींदार हैं।  वो दो भाई थे।  मेरी माँ और चाची सगी बहने थी। तेरे छोटे नाना ने बड़े भाई की वक़्त ही छोटी नानी को सेट कर लिया था।  उस जमाने में एक ही घर में दो बहाने ब्याह दी जाएँ ये सामान्य था।  कई घरों में तो एक साथ दोनों बराते निकल जाया करती थी।  पर तेरे नाना और उनके भाई में थोड़ा अंतर था तो उनके शादी वाली उम्र होने की बाद ही कुछ सालो बाद ही उनकी शादी हुई।

तुम सब सोचते होंगे कि शहरों की लौंडे लौंडिया मॉडर्न होती हैं।  जल्दी सेक्स करने लग जाते हैं।  ये बॉयफ्रेंड , गर्लफ्रेंड यही होते है।  गाओं वाले सीधे होते हैं।  ये सब कोरी बकवास है।  गाओं में औरतें भले ही बड़ो से घूँघट करती हों पर घूँघट कि आड़ में ना जाने क्या क्या हो जाता है।

हमारे गाँव में सब दादा, परदादा और उनके भी पुरखो की समय से सब एक ही परिवार की थे।  देखा जाये तो एक खून पर तुझे क्या पता कि जैसे जैसे सब अलग अलग होते ग।  परिवार पट्टीदार बढ़ते चले गए , रिश्तों की मायने भी बदल गए।  किस घर कि लड़की किस घर की लौंडे की साथ खेत में चुदाई करवा रही है पता भी नहीं चलता था।  किसी घर में एक भाई अपने ही भौजाई को अकेले में पेल रहा होता था तो कहीं रिश्ते कि बुआ अपने ही भतीजे से चुद रही होती थी।  कोई रिश्ते में दादा अपनी हो पोती को गोद में बिठा उसके मुम्मे दबा रहा होता है और कहीं गन्ने की खेत में भाई बहन लगे हुए हैं।  सबको सब पता होता है।  कहीं कोई खुले में आया तो पिट गया।  कोई लड़की पेट से हुई तो जल्दी से उसका ब्याह कर दिया गया। जमींदार खेत में काम करने वाले मजदूरों को तो जूते टेल रखते हैं पर उन्ही कि लुगाइयों और बेटियों को खलिहानो में मौका देख चोद रहे होते हैं। जितनी रंगरेलियां वहां लोग मनाते हैं तुम शहर वाले सोच भी नहीं सकते।

खैर माँ कि शादी की बाद उनकी छोटी बहन कभी कभार हमारे यहाँ चली आती थी।  गाओं में जीजा साली का मजाक और देवर भाभी का मजाक तो चलता ही रहता है।  गाँव वाले अक्सर मजाक में कह देते कि मेरे बाबू दो दो लड़की ब्याह ले आये हैं। कभी कभार मेरी माँ से मजाक में कह देती कि – देखना तुझसे पहले तेरी बहनिया ही माँ न बन जाये।

ऐसी ही छेड़छाड़ घर में भी चलती।  मेरी चाची चाचा से तो लगी ही रहती और मेरे बापू से से भी चिपकी रहती।  इधर चाचा भी माँ से मजाक करते रहते थे। गाओं कि औरते कपडे की मामले में भी कैज़ुअल हो होती थी।  घर में सामने ही हैंड पाइप से नाहा लेना।  पेटीकोट सीने से लगाए घूमना।  परदा काम ही होता था।  कई बार तो उसी भेष में खाना तक बन जाता था।  माँ चाचा को बहुत मानती थी।  कई बार वो उन्हें खुद भी नहला देती थी।  घर में सिर्फ दो भाई थे कोई बड़ा नहीं था।  तो कई बार माँ चाचा से अपनी पीठ मालवा लेटी थी।  पिता जी को भी कोई आपत्ति नहीं थी।  सब जानते थे कि माँ कि छोटी बहन चाचा से ही ब्याही जाएगी तो दोनों भाई में एक मौन समझौता हो रखा था कि एक दुसरे कि बीवियों से मजे लेने पर कोई रोकेगा नहीं।  पर किसे पता था कि दो भाइयों का ये समझौता पीढ़ी दर पीढ़ी किसी और रूप में फ़ैल जायेगा।

हुआ वही जो होना था । एक दिन माँ अकेली थी और बापू कुछ दिन के लिए किसी काम से शहर गए थे। माँ सबह सुबह उठकर बाहर नहा रही थी।  चाचा सुबह सुबह उठ कर बैठे ही थे।

माँ ने आवाज लगाई – लल्ला जरा पीठ मल दो। 

चाचा उठ कर आये और माँ कि पीठ मलने लगे।  ये काम उन्होंने पहले भी किया था और भाई के सामने भी किया था।  पर आज उनके मूड में कुछ और ही था।

उन्होंने कहा – भौजी आगे भी रगड़ दे क्या ?

माँ भी मस्ती में थ।  बोली – लगता है छोटी कि याद आ रही है।  बहुत दिन हो गए रगड़े हुए।

चाचा हँसते हुए – भौजी  कहाँ उसके और कहाँ आपके।  उसको बोलना मत पर आप पर भइआ ने बहुत वर्जिश करि है

माँ – वर्जिश तो तुमने और तुम्हारे भाई ने उस पर भी कि है।

चाचा – क्या बोलती हो? भइआ भी ?

माँ – तुझे क्या लगता है तेरी नन्ही परी जब उनके गोद में बैठती है तो भइआ खाली बातों से दुलार करते हैं ?

चाचा – ये तो बेईमानी है।

माँ – चिंता मत कर।  चिड़िया तुम्ही मारोगे।  भइआ तुम्हारे बाद ही प्रसाद लेंगे।

चाचा को थोड़ी तसल्ली हुई।  माँ आगे बोली – तुम्हारे भइआ तुम्हे हमारे साथ ऐसे ही खुली छूट थोड़े ही दे रखी है।

चाचा ने अब हाथ आगे बढ़ा कर माँ के मुम्मे पकड़ लिए। माँ ने सिर्फ एक साडी पहनी थी।  पहनी क्या थी बस लपेटी हुई थी। पेटीकोट धूल कर पहले ही डाल दिया था।  बस साडी कमर में जैसे तैसे लपेटी हुई थी और पल्लू से सीने को ढका हुआ था।  माँ घुटनो के बल बैठी थी ,  चाचा के मुम्मे पकड़ते ही माँ थोड़ा लड़खड़ाई।  बोली – तुमसे मैं न संभल रह बीवी आ जाएगी तो क्या संभाल पाओगे। 

चाचा – तुमने अभी देखा ही कहा है मैं तो एक साथ कई कई को संभाल लू

माँ – रहने दो , अभी वक़्त है।  कमली [ रिश्ते कि बुआ ] बोल रही थी कि उसके चूत में लंड डालते ही झड़ गए थे तुम।

चाचा थोड़ा झेंप गए।  बोले – अरे वो तो पहली बार था न।  उसके बाद न पुछा उनसे कि कितनी बार उनकी चूत सुजाइ है मैंने।

अब माँ पीढ़े पर आराम से पेअर फैला कर बैठ गई थी।  चाचा भी पीछे से दुसरे पीढ़े पर बैठ गए और उनके मुम्मे दबाने लगे।

माँ – आह , लल्ला आराम से दबाओ।  वहां मैल थोड़े ही है।  तुम्हारे भइआ रोज रगड़ कर पीते हैं।

चाचा – हमें भी पीला दो। 

माँ चाचा कि तरफ घूम गई और चाचा का चेहरा पकड़ मुम्मो पर रख दिया। 

कहा – हम तो सोच रहे थे भौजाई के आने पर तुम घर का दूध पियोगे पर तुम तो न जाने कौन कौन सी गाइयों के पीछे पड़े थे। आह आह।  तुम्हारे भाई तो छोड़ते ही नहीं है।  देखो कल ही उन्होंने दाँत लगा दिया था।  सससससस तुम तो कम से कम आराम से पियो।  चुटकी का क्या होगा। 

चाचा का लंड खड़ा हो चूका था।  माँ ने उनकी लुंगी खोल दी और उनके लंड को हाथ से पकड़ लिया।  कहा – हथियार बड़ा कर लिया है तुमने।

चाचा – भइआ का कैसा है ?

माँ – अपने भइआ का मत पूछो।  पुरे गाओं जवार में उनसे कोई नहीं होगा।  पहली बार जो उनके नीचे आती है एक हफ्ते तक उठ नहीं पाती। 

मैं तो दस दिन तक दुबारा उन्हें छूने नहीं दिया।

चाचा थोड़े उदास हुए तो माँ बोली – अरे उनका नार्मल से भी बड़ा है।  तुम ठीक हो।  छोटी को परेशानी नहीं होगी।

चाचा – पर भइआ के पास जाएगी तो बड़ा दर्द होगा। चाचा स्वीकार कर चुके थे कि भाई उनकी बीवी चोदेगा ही। 

माँ – चिंता मत करो मैं रहूंगी।  और वैसे भी तुम जब तक उसे मन भर चोद नहीं लोगे।  उसके बुर को खोल नहीं डोज, भइआ हाथ नहीं लगाएंगे।

अब माँ ने बड़ी सहजता से कहा – मेरी चूत भी पनिया गई है अब जल्दी से चोद लो।

चाचा ने वही माँ को लिटाया और अपना लंड उनकी चूत में डाल कर चोदना शुरू कर दिया।

माँ – आह आह , लल्ला  छोटा है पर मोटा है।  कमली ककी तो तुमने सच में फाड़ दी होगी।  अपनी तारीफ सुनकर चाचा मस्त हो गए उन्होंने अपनी स्पीड बढ़ा दी।

माँ – बड़े चोदू हो तुम दोनों भाई।  आह आह।  चोद लो अपनी भाभी। बीवी भी चुदेगी उससे। 

चाचा – तुम्हारी ही तो बहन है।

माँ – तभी तो मौज है तुम दोनों भाईओं की।  जीजा साली को पेलेगा और देवर भाभी को।  गाओं में सब होता है पर ढक कर चुप कर होता है।  पर इस घर में तो लगता है खुल कर चुदाई का खेल होगा।  आह आह जरा तेज करो।

चाचा – मजा आएगा भाभी।  जब चारों एक साथ चुदाई करेंगे। थोड़ी ही देर में दोनों झाड़ गए।

चाचा तो खुश थे जैसे किला फतह कर लिया हो।

माँ ने कहा – चोद लिया तो अब नहाना भी कर लें।  घर का काम बचा ह।  तुमको बाहर भी जाना होगा वरना बाहर सब सोचेंगे कि बड़े भाई के जाते ही छोटा भौजी कि चूत में ही घूस गया है।

——————————————————————–वर्तमान समय ———————

माँ की कहानी सुनकर मेरा लंड हाहाकार मचा रहा था।  मैंने पैजामा उतार दिया था। मैंने सोचा था कि माँ सुनाते सुनाते लंड को मुठियाएंगी पर वो करना तो दूर माँ ने मुझे खुद भी ऐसा करने से मना कर दिया।

मैंने कहा – आगे।

माँ – आगे तेरा लंड।  और भी काम हैं घर में।  और हाँ मुट्ठी मत मारियो।  ज्यादा पानी से कमजोरी आ जाएगी आज ही सुबह तुमने मेरी इतनी ली है।  उससे पहले सरला ने तेरा जूस निकाला है।  थोड़ा आराम दे।

मैं – माँ एक तो तुम  इस हालत में उस पर से इतनी गरम कहानी क्या करु।

माँ- सीख बिना पानी निकाले भी कैसे खड़ा रखा है।

फिर माँ किचन में मेरे लिए ड्राई फ्रूट वगैरह डाल कर शेक बनाने लगीं।

मैंने पुछा – माँ ये बात किस किस को पता है ?

माँ – तुझे , सरला,  श्वेता को छोड़ कर लगभग सबको पता है।  तुम तीनो को इस लिए नहीं पता क्योंकि छोटे पर ही पापा गुजर गए।  और फिर उसके बाद हम सबसे थोड़ा कट से गए।

मैं – सुधा दी जानती हैं ? क्या उन्होंने भी लीला दी कि तरह नाना की साथ  —-   मैंने  वाक्य अधूरा छोड़ दिया।

माँ – उसे पता है।  जवानी जब चढ़ी तो थोड़ी बहुत मस्ती कि उसने नाना की साथ पर बाद में वहां जाना छोड़ दिया।

मुझे जोरकि शुशु आई थी। मैंने कहा माँ आता हूँ बाथरूम से।

माँ – साला एक नंबर का मादरचोद है।  भाग यहाँ से। देख सिर्फ मूतना मुठ नहीं मारना।

माँ छत पर सूख रहे कपडे लाने चली गई और मैं बाथरूम में मूतने।

लौट कर मैंने शेक पी।  माँ को देखा तो माँ नहीं थी तो छत पर देखने गया।

माँ छत पर कपडे समेट चुकी थी और वही रैलिंग से खड़े खड़े बाहर देख रही थी।

मैं उसके पीछे गया और चिपट कर बोला – कहा खो गई तुम? पुरानी चुदाई कि यादें तजा हो गई क्या ?

माँ – मत पूछ वो भी क्या दिन थे।

मैंने अपना लंड उनके पिछवाड़े से बिलकुल चिपका दिया और हिलने लगा।

माँ ने कहा – खबरदार जो लंड से पानी निकाला।

मैंने तुरंत हाथ बढ़ा कर उनके मुम्मे पकड़ लिए और बोला।  मुम्मे पकड़ता हूँ अब नहीं करूँगा।

मेरी इस मस्ती पर माँ हंस पड़ी।

मैंने कहा माँ आगे बताओ न ।

माँ फिर आगे बताने लगीं।

मैंने कहा माँ आगे बताओ न ।

माँ फिर आगे बताने लगीं।

————————————————माँ की जुबानी उनके जौवन कि कहानी [फ्लैशबैक २]  ————————

उस दिन मेरे चाचा ने माँ को कई बार चोदा।  जब बापू लौट कर आये तो समझ गए कि दोनों की बीच सब हो चूका है।  रात को माँ ने उन्हें सब बता भी दिया। 

बापू ने पुछा – फिर शादी करा दे उसकी ?

माँ – हां दोनों बालिग़ तो कब का हो गए है।  मेरे माँ बाबूजी भी प्रेशर डाल रहे हैं।  उसका यहाँ आना जाना भी ह।  उन्हें डर है कि शादी से पहले प्रेग्नेंट हो गई तो फ़ालतू बदनामी होगी। 

बापू – फिर ठीक है कर लो बात माँ बाबूजी से।

कुछ ही दिनों में चाचा और चाची का रिश्ता तय हो गया।  शादी का जल्दी का मुहूर्त निकाल दिया गया। तैयारियां होने लगीं।  शादी तीन महीने बाद थी।

अब माँ चाचा को हफ्ते में कई बार हल्दी लगाती थी।  उनको बढ़िया और पौस्टिक खिलाती थी।  उनकी मालिश भी करती थी। 

अक्सर दोनों साथ नाहा लेते।  बापू घर में नहीं होते तो चुदाई भी कर लेते।

एक दिन ऐसे ही माँ चाचा का खुले धुप में मालिश कर रही थी। माँ को मस्ती चढ़ी थी। 

बोली – क्यों लल्ला ताकत बचा कर रखे हो न।  ऐसा न हो छोटी आये तो देखते ही खलास हो जाना।

चाचा ने माँ को अपनी तरफ खींच लिया और कहा – कहो तो अभी अपनी ताकत दिखा दू

माँ सिर्फ पेटीकोट ब्लाउज में थी।  ब्रा तो पहनी नहीं थी। पेटीकोट की निचे भी कुछ पहना नहीं था। मालिश करते करते पेटीकोट तो सिमट कर कमर तक आ ही चुकी थी।  ब्लाउज के हुक भी खुल ही गए थे।  चाचा ने फिर माँ के मुम्मे पकड़ लिए। 

माँ – आह मुम्मे दबाकर ताकत दिखा रहे हो।

चाचा – भाभी उन पर क्या ताकत दिखाऊंगा।  ये तो मक्खन कि तरह सॉफ्ट हैं।

माँ –  मक्खन तो खाया जाता है

चाचा ने फिर मुँह लगा दिया। 

माँ – तुम दोनों भाइयों ने कितनी गाय भैंसे पाल राखी है पर लटके मेरे थन से ही रहते हो।

चाचा – भाभी , बच्चा कर लो फिर मजा आएगा।  रोज दोनों भाई दुहके पिएंगे।

माँ – अब तो दूसरी गाय भी आ जाएगी।

चाचा – कितना मजा आएगा।  दूध कि धार बहेगी फिर तो।

माँ – धार तो कहीं और भी निकल रही है लल्ला।  उसका क्या ?

चाचा – रोक दू।

माँ – रोक मत, जो अंदर जाम है जरा अपना डंडा डाल कर साफ़ कर दे ताकि धार पूरी निकले।

चाचा – डंडा तो तैयार है।  तुम्हे पता है जाम कहा है कर लो साफ़। 

माँ अब तक अपनी चूत से चाचा के लंड की ऊपर से मालिश कर रही थी  , थोड़ा सा उठी और लंड को चूत में डाल लिया।

चाचा – भौजी , अंदर गया है दूर तक न ?

माँ – हाँ लल्ला , अब जरा हिला कर गन्दगी साफ़ करने दो।

माँ ने अपना कमर हिलाना शुरू कर दिया।

इधर ये दोनों चुदाई में इतने मशगूल थे कि पता ही नहीं चला कि कब बापू आकर माँ की पीछे खड़े हो गए थे। 

बापू ने माँ की कंधे पर हाथ रख दिया।  माँ उनको देख कर चौंकी नहीं।  उन्हें पता था किसी न किसी दिन ये होना ही था।  और दोनों ने ये तय कर रखा था तब होगा क्या।

माँ – आह , देख रहे हो जी , लल्ला कितना बढ़िया चोद रहे है।

बापू – पता है।  पुरे गाओं की कोई ही चूत हो जो इससे बची हो। 

माँ – आखिर भाई किसका है ? तुमने कौन सी छोड़ रखी है।  खड़े क्यों हो आ जाओ। 

बापू – बहुत खुजली हो राखी है तुम्हारी गांड में मिटानी पड़ेगी। लल्ला निचे से संभाल कर रख।  आज तेरी भाभी को बता ही देते हैं भाईओं में कितना दम है?

माँ – बहनचोद आओ तो पेलो । घुसा दो अपना लंड मेरे पिछवाड़े में।

बापू माँ कि गांड कई बार ले चुके थे।  उनकी गांड पूरी तरह से खुली हुई थी। उन्होंने पास रखी मालिश कि कटोरी से तेल निकाला और कुछ अपने लंड पर लगाया और कुछ माँ की पेटीकोट हटा गांड पर उड़ेल दिया।  उसके बाद माँ चाचा की ऊपर पूरा लेट गई। चाचा का लंड माँ कि चूत में था।  बापू ने अपना लंड उनकी गांड घुसा दिया। 

चूँकि माँ पहली बार दोनों छेदो में लंड ले रही थी तो उनकी चीख निकल पड़ी।

माँ – भोसड़ीवालों , आराम से पेलना।  देखना मेरी छूट या गांड फाड़ की दोनों का लंड आपस में ही न मिल जाए।  चलो छोड़ो।  फाड़ दो आज मुझे।  आह आह

शुरू में दोनों भाई को कुछ तो दिक्कत हुई पर तकुछ ही पल में आपस में ताल मिला लिया।  अब बापू ऊपर से ठोकते और चाचा निचे से।  बीच में माँ चीत्कारें लगा रही थी –  मार डाला र।  क्या चोदू भाई मिले हैं।  एक का लौड़ा लम्बा है तो एक का मोटा।  हाय रे कोई बचा लो। अरे मेरी अम्मा देख तेरी बेटी का क्या हाल कर दिया है।  ऐसे चोदुओं की पास ब्याह दिया रे।  अब तो दूसरी भी आएगी।  सोचा है क्या होगा हमारा।

बापू – चिल्ला मत वरना तेरी माँ भी चोद दूंगा। 

माँ – वो तो ख़ुशी ख़ुशी नंगी दौड़ी आ जाएगी।  आह आह जरा तेज चलाओ न।

चाचा का पानी निकल चूका था पर माँ और बापू अभी तो मस्ती में थे।  चाचा स्थिर हो गए थे।

माँ चाचा से बोली – क्या रे , कहा था ।  तू मुझे संभाल नहीं पायेगा।  आह जी अपने भाई को सीखा दो।  वार्ना मेरी बहन को भी तुम्हे ही संभालना पड़ेगा।

बापू ने माँ कि गांड पर थप्पड़ मारते हुए कहा – मेरे आने से पहले से उस पर छड़ी हुई है रे रंडी।  कितना निचोड़ेगी उसे।  तब से उसके ऊपर झूला झूल रही है तू।  भाई चिंता मत कर एक ही माँ का दूध पीया है।  तुझमे भी दम है।

सही में माँ तो चाचा को तब चोद रही थी।

अब बापू ने माँ को निचे लिटा दिया और उसके दोनों पैरों को अपने कंधे पर रख कर अपना लंड उसकी चूत में घुसा दिया।

बापू – साली मेरे भाई को बोलती है।  अब देख तेरी चूत का भोसड़ा करता हूँ।

माँ – तो कर न।  मैं कौन सिकम हूँ।  देखती हूँ तेरे में कितना दम  है।  माँ का दूध पीया है न ? चोद जोर से मुझे।  फाड़ दे मेरी चूत।  खुश कर दे जैसे रोज करता है। अब तो तेरी साली भी आ रही है। बता सुहागरात खुद मनाएगा या भी को करने देगा।

बापू ने माँ की गलों पर ताबड़तोड़ थप्पड़ मारे और कहा – साली तू बहुत बोलती है।  रंडी है तू।  तेरी बहन कि चूत का भी कबाड़ा करूँगा पर पहले मेरे भाई उसकी फाड़ेगा।  जैसे मैंने तेरा पहले फाड़ा। वो उसकी चूत भी फाड़ेगा और गांड भी।  जिस दिन बचाओ बचाओ करके मेरे पास आएगी उस दिन उसकी लूंगा।  दोनों भाई उस दिन उसकी और लेंगे।  चिंता मत कर। 

माँ और बापू एकदम वाइल्ड सेक्स में लगे हुए थे।  चाचा को भी पता नहीं था कि वो दोनों इतने खतरनाक तरीके से चुदाई करते हैं।

थोड़ी ही में दोनों झड़ गए।  दोनों पसीने पसीने हो रखे थे। अभी खेल ख़त्म नहीं हुआ था। 

दोनों की सांस थोड़ी संभली तो दोनों ने एक दुसरे को चाटना शुरू कर दिया।  लगभग बीस पच्चीस मिनट तक दोनों एक दुसरे के पसीने को चाटते रहे।  उसके बाद बापू बोले- असली नशा ये है। दोनों ने फिर थोडी देर एक दुसरे की जीभ के चुसाई क। 

माँ ने फिर चाचू को किस कर लिया और बोला – तुम भी चखो। ऐसा नशा नहीं मिलेगा।

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अब मुझे समझ आया कि खानदान में पसीने से नशे ली लत कैसे आई है। इतनी गरम थ्रीसम सुन कर मेरे सारे शरीर में कम्पन होने लगा और मैंने उनकी मुम्मे जोर से पकड़ लिया।  तभी मेरे लंड ने अपने आप से पिचकारी छोड दी जो माँ की पेटीकोट से लग पड़ा।

माँ ने कहा – इतने से झाड़ गया ? तेरा लंड खानदान भर में सबसे मोटा और लम्बा है।  मेरे बापू का लम्बा था तो चाचा का मोटा।  तूने दोनों का गुण पाया है। बस जरा कण्ट्रोल करना सीख।  लम्बी रेस का घोडा बनने की लिए कण्ट्रोल जरूरी है।  जब तक औरत दो तीन बार पानी न छोड दे तब तक मर्द का पानी नहीं निकलना चाहिए।

मैं – तुम जैसा कहोगी वैसा करूँगा।  मुझे ताजा दूध पिलाओ।  खूब खिलाओ।  अब मैं मुठ भी कम ही मरूंगा।

माँ हंसने लगी – बहनचोद, घर में माल आया था चला गया।  तुझे मौका भी दिया।  मैंने सोचा था कि नास्ता कराते कराते तू दूध भी पी लेगा पर बापू की साइड का भी गुण है न तुझमे।  अपने बाप कि तरह सीधा है।

मैं थोड़ा झेंप गया।  मैंने फिर पुछा – माँ एक सवाल पूछू

माँ – पूछ ले लाल। 

मैं – मेरे में बड़े और छोटे नाना दोनों का गुण कैसे आया होगा ?

माँ हँसते हुए बोली – ज्यादा मत सोच।  बहुत आसान है इसका सवाल।  चल निचे रात हो गई है।  और अब खाना खाकर सीधे सोयेंगे।  समझा। मैंने बाल्टी उठा ली और माँ का हाथ पकड़ निचे आ गया।

नीचे उतरकर माँ ने खाना निकाला। मैंने कहा – माँ आज तुम ही खिलाओ न।

माँ – तू भी मुझे कितना परेशान करता है।

मैं – कितने दिन हो गए तुम्हारे हाथ से खाना खाये हुए। जब तुम खिलाती हो तो खाने का स्वाद बढ़ जाता है।

माँ – पगला कहीं का। आजा

हम दोनों डाइनिंग टेबल पर एकदम अगल बगल बैठ गए। माँ मुझे प्यार से निवाला बना बना कर खिला रही थी । मैं बीच बीच में उनकी ऊँगली काट भी ले रहा था। जिसपर माँ झूठ ही झिड़क कर कहती – ऐसे करेगा तो नहीं खिलाऊंगी।

मैंने माँ से दोबारा पुछा – माँ मुझमे बड़े नाना और छोटे नाना का गुण कैसे आया? तुम कहती हो मैं पापा की तरह सीधा भी हूँ

माँ – चुप कर ज्यादा दिमाग मत लगा

मै जिद्द पर अड़ा रहा।

माँ – वो मुझसे आया है। और माँ के गर्भ में जिस रात मैं ठहरी थी उस रात बापू और चाचा दोनों ने माँ की कई बार ली थी।

मैं – ओह्ह।। छोटी नानी क्या कर रही थी तब ? वो कहाँ थी ?

माँ – उस रात वो दोनों मेरे लिए एक साथ इतने उतावले थे की पूछो मत। तब मेरी चाची या मौसी जो भी कह ले वो तेरी बड़ी मौसी का ख्याल रख रही थी।

तभी माँ के मुँह से कुछ सब्जी के टुकड़े कौर से निकल कर निचे उसमे मुम्मे पर गई गए। मैंने झट उसकी तरफ झुका और मुम्मे पर जीभ रगड़ता हुआ उस टुकड़े को खा लिया।

माँ – उम्मम्मम , तू नहीं मानेगा।

मैं – अरे अनाज कैसे खराब होने देता। तुमने इतने मेहनत से खाना बनाया है।

माँ – मुझे सब पता है। तू बातें बनाना सीख गया है।

मैं – छोडो ये फालतू की बात , आगे की कहानी सुनाओ न। उस रात के बाद तो तुम नाना और छोटे नाना तो कई बार सामूहिक चुदाई किये होंगे।

माँ – हाँ उसके बाद तो दोनों भाईओं में शर्म ख़त्म हो गई थी। जिसका जब जी चाहता मुझे चोद कर निकल जाता।

मैं – माँ तुम्हारी मौसी को बुरा नहीं लगता था कि उनके होने वाले पति शादी से पहले तुम्हे चोद चुके थे।

माँ जवाब देने से पहले मेरे होठो को किस कर ली।

मैंने कहा – अब तुमने क्या किया ?

माँ – अरे एक चावल का टुकड़ा था। मैं क्यों उसे बर्बाद करती।

हम दोनों हंस पड़े।

मैं आगे सुनाओ न। छोटी नानी को कोई दिक्कत नहीं थी।

माँ ने कहा चल खाना ख़त्म कर ले। सोते समय बिस्तर पर बताउंगी। पर अपने लौड़े को कण्ट्रोल में रखना। अबकी पानी निकाला तो मेर चूत क्या किसी कि भी चूत नहीं मिलेगी।

मैं – फिर रहने दो। तुम इतनी मस्त कहानी सुनाओगी और लंड ख़ुशी के आंसू बहा दे तो मेरा क्या दोष।

माँ – समझा कर बेटे। इतना उतावलापन भी ठीक नहीं है। मैं कहीं भागी नहीं जा रही। सब बताउंगी तुझे।

उस रात फिर मैंने अपने कमरे में जाकर अकेले सोना ही बेहतर समझा।

अगले दिन सुधा दी का फ़ोन माँ के पास आया। उन्होंने साड़ी बात माँ को बता दी। माँ ये सुन कर तो खुश थी कि सुधा दी आखिर कार मुझसे चुद कर माँ बनने को तैयार हैं। पर वो यही सोच रही थी कि वो यहाँ आई और जाकर वापस कुछ हुआ तो आस पास वालो को शक हो जायेगा।

माँ ने कहा – कुछ सोच कर प्लान करेंगी।

अगले कुछ दिन मेरे कॉलेज में कुछ काम आ गया। और मैं व्यस्त हो गया। माँ के साथ भी समय नहीं बिता पा रहा था।

उधर मौसी और लीला दी नाना के घर जब पहुंची तो काफी गुस्सा हुई। बोलीं – बाबूजी आपसे थोड़ा भी सब्र नहीं होता है। कितने सालों बाद तो मैं लीला को लेकर सरोज के घर गई थी और आपने एक दिन भी नहीं रुकने दिया। सरोज और राज क्या सोच रहे होंगे।

नाना – अरे क्या सोचेंगे ? सरोज को सब पता है। घर के पहले दूध पर मेरा हक़ है। तुमने, सरोज और मीना ने नहीं दिए क्या ? और जब लीला को बच्चा होने वाला था तो तुम दोनों ने ही तो प्रॉमिस किया था।

लीला – माँ जाने दो न। मौसी के यहाँ मैं फिर चली जाउंगी।

कह कर लीला दो नाना के गोद में बैठ गई और अपना कुरता ऊपर कर दिया। नाना ने झट से ब्रा हटा कर उनके मुम्मे पीने शुरू कर दिया।

मौसी – उफ़ ये बुढऊ। देखो देखो फिर बच्चा बन गया।

तभी मामी बोल पड़ी – जिज्जी , बुढऊ तो सिर्फ देखने में है। इनके लौड़े में कितना दम है सब जानते हैं। मुझे तो परेशान कर रखा है।

मौसी – तो तू ही क्यों नहीं बच्चा कर लेती। घर में दूध होगा तो इधर उधर मुँह तो नहीं मारेंगे।

मामी – ये छोड़े तो करु। दोनों एक साथ लगे रहते है। बच्चा हो तो पता ही नहीं चले किसका है। ये भी चाहते हैं कि इन्ही का हो। बाबूजी को कितनी बार बोला कि एक आध महीने के लिए हमें अकेला छोड़ दें। पर मानते ही नहीं है। ।

मौसी – यही तो रोना है। । एक हमारे मरदो ने कुछ होता नहीं और यहाँ इनसे सब्र होता नहीं।

कमरे में तब तक लीला दी की सिसकियाँ सुनाई दे रही थी।

लीला दी – नाना , आराम से पियो न। काटो मत। अस्स्स्ससस्स। अरे ये क्या , अपने सामान को फिर खड़ा कर लिया।

नाना – इतनी गदराई लड़की गोद में बैठे और लंड महाराज खुश न हो।

लीला दी – वो तो खुशी से उछल रहा है।

मौसी – हाँ , रंडी तुझे तो उछलता हुआ लौड़ा अंदर चाहिए न। चूत कुलबुला रही होगी।

लीला दी – तुम्हारी चूत में भी खुजली हो रही है क्या ? आते होंगे मामा , चुद लेना उनसे।

मौसी – रांड कही की।

मामी – जाने दो जिज्जी। क्यों गुस्सा होती हो। बहुत दिन बाद तो बबुनी यहाँ आई हैं।

मौसी चुप हो गई। तब तक लीला दी ने अपनी सलवार खोल दी थी और नाना के लंड को अपने चूत में ले लिया।

लीला दी – क्या सांड जैसा लंड है तुम्हारा नाना। इतना बड़ा तो सिर्फ फिल्मो में देखा था। बस चोद दो इस बछिया को।

लीला दी ने अभी मेरा लंड देखा नहीं था। न ही मौसी और मामी ने। पर जल्द ही देखने वाले थे।

नाना – बछिया कहाँ रह गई है अब तू। दुधारू गाय हो गई है। देख कितना मीठा दूध है।

लीला दी – अब दूध छोड कर निचे की मलाई मथने पर ध्यान दो। चलाओ अपनी मथनी और निकाल दो मलाई से घी।

नाना – आह। क्या चूत है। बच्चा पैदा करने के बाद भी उतनी टाइट है।

लीला दी – कहा नाना , मेरे पति तो कहते हैं फ़ैल गई है। वो तो तुम्हारा लंड मुसल से भी बड़ा है , मुझे मजा दे रहा है।

नाना – चिंता मत कर चूत एलास्टिक की तरह है। फिर से वापस अपने साइज में आ जाएगी।

मौसी बोल पड़ी – उसके लिए तुमको इसे बक्शना पड़ेगा। चूत में लंड डाल कर गोद में बिठा कर प्यार करोगे तो और फ़ैल जाएगी।

लीला दी – मत सुनो उनकी नाना। आह आह बस चोद दो मुझे बहुत दिनों की प्यासी हूँ। आह आह। बस आने वाला है मेरा रुकना मत। उन्होंने ऊपर से अपने धक्के तेज किये और नाना ने निचे से। कुछ ही धक्को ने लीला दी की चूत तो धराशाही हो गई। पर नाना सच में सांढ़ जैसे थे। उनके लंड ने तो बस अभी अंगड़ाई ली थी। अभी तो नींद से जाएगा था।

उन्होंने लीला दी का हाथ पकड़ा और कहा – अभी मेरा कहाँ हुआ है। चल बैडरूम में।

लीला दी – कहा  था न सांढ़ हो आप।

दोनों बैडरूम में चल पड़े। आज लीला दी की चूत सच में उखली ही बननी थी।

मौसी ने हँसते हुए कहा – भूखे शेर को जगा दिया है। अब इसकी चाल बिगड़ेगी।

मामी भी ये सुन कर हंस पड़ी।

रात को मामा काम के बाद से जब घर पहुंचे तो मौसी और लीला दी को देखते ही चौंक गए। बोले – तुम तो सरोज दी के यहाँ जाने वाली थी क्या हुआ ?

लीला दी शर्मा गई। मौसी कुछ बोलती तभी मामी ने नाना की तरफ इशारा किया।

मामा – अरे आप कब आये ? अच्छाआआ तो ये माजरा है। कहकर हंसने लगे।

नाना – चुपकर अपना काम कर। ज्यादा दिमाग लगाने की जरूरत नहीं है। लीला बिटिया आई थी तो मन नहीं माना चला आया और इनको वापस बुला लिया।

मामा – मन नहीं माना या लंड नहीं माना। क्यों री लीला तेरा मन भी नाना बिना नहीं लगता ?

लीला दी – अरे मामा ऐसी बात नहीं है। इन्होने कहा तबियत गड़बड़ है तो भाग कर चले आये।

मामा – दूध पिलाकर तबियत चंगी कर दी होगी।

लीला – आपके लिए भी बचा कर रखा है।

मामा – पहले इनसे फुर्सत पा ले।

रात खाना खा कर सब मामा के बैडरूम में एक साथ बैठे थे तभी नाना खांसने लगे।

मौसी – जा पीला दे टॉनिक टाइम हो गया है।

तभी मामा मौसी के गोद में सर रख सो गए। बोले – कुछ दिन इनको अपने घर ले जाओ न। इनका मन लगा रहेगा। हम दोनों को भी मौका मिलेगा। कब से ये शालू कह रही है बच्चा कर लेते हैं।

शालू मामी – हाँ जिज्जी। मेरी चूत को भी थोड़ी राहत मिले वरना न जाने कौन सी चक्की का आता खाये है इनका लंड बैठता ही नहीं है।

मौसी – तुझे तो शादी से पहले सब पता था। फिर लव मैरेज क्यों किया ?

शालू मामी शर्माते हुए -सब पता था तभी तो किया की घर में इतने प्यार करने वाले मिलेंगे। माजी ने भी तो मन मोह लिया था। जब अम्मा थी तो संभाल लेती थी । पर उनके जाते हु खुल्ला सांढ़ हो रखे है।

इधर मामा ने भी अपना काम शुरू कर दिया था। गोद में जब लेते थे तो मौसी के मुम्मे उनके चेहरे के पास लटक रहे थे। रात को सोते समय मौसी माँ की तरह ही सिर्फ ब्लॉउस और साये में रहती थी। मामा ने मौसी के ब्लॉउस को उठा कर उनके मुम्मे निकल लिए थे और मुँह लगा दिया था।

मौसी – सिर्फ वही एक थोड़े ही हैं खानदान में। देखो अपने मरद को। बन गया बछड़ा। इसे भी दूध चाहिए।

तभी लीला दी दौड़ती हुई आई और उनके पीछे नाना भी आये।

लीला दी – बचाओ अम्मा।

मौसी – बड़े शौक से गई थी क्या हुआ ?

लीला दी – ये मेरे गांड के पीछे पड़ गए हैं।

नाना – अरे बच्चा देने के बाद से इतना चौड़ा कर लिया है। मैंने कहा थोड़ा मालिश कर देता हूँ।

लीला दी – देखो नाना , बचपन से आप पीछे पड़े हो। मै न देने वाली। बहुत दुखेगा। मैंने माँ को देखा है।

नाना – तेरी नानी को तो मजे आते थे। और तेरी माँ सुशीला को भी तो मजे आते हैं।

लीला दी – तो उन्ही की ले लो। लीला अपनी मामी के पीछे छुप गई।

सुशीला मौसी – बाउजी ये क्या लगा रखा है। आज ही तो आई है बच्ची और आप आज ही इसके गांड के पीछे पड़ गए। क्या चाहते हो हम लौट जाएँ ?

नाना का मुँह एकदम से लटक गया। पर लंड एकदम टाइट था। सामने गदराई हुई लीला दीदी थी और मामा ने भी माँ की चूचियां खोल पी रहे थे। उनसे रहा नहीं गया। वो मौसी के पास गए और अपना लंड लेकर खड़े हो गए। कहा – चल चूस दे इसे।

मौसी – अरे ये क्या बात हुई आप तो ऐसे कह रहे हैं लंड न हुआ लॉलीपॉप हो गया है।

मामा को समझ आ गया था कि नाना नहीं मानेंगे ,वो खिसक कर मामी के पास चले गए और लीला को प्यार करने लगे।

लीला – क्या ?

मामा – अपने नाना को पीला दिया। शाम तो कह रही थी मेरे लिए भी बचा कर रखा है। दे न।

मामी – हाँ पिलाओ। मुझे भी पीना है।

लीला दी पलंग के सिरहाने पर टेक लगा कर बैठ गई और मामा और मामी उनके दोनों मुम्मो पर भीड़ गए। मौसी के पास कोई चारा नहीं था। वो पलंग के किनारे झुक कर बैठ गई और नाना के लंड को मुँह में ले लिया। नाना पलंग के किनारे खड़े थे।

मौसी अपना ब्लाउज पहले ही उतार चुकी थी।

नाना – आह आह , क्या मस्त चूसती हो तुम सुशीला। तुम्हारे मुँह में जाकर मेरे लंड को ठंढक मिल जाती है। आह

नाना ने मौसी के सर को उनके बालो से पकड़ लिया था और तेजी से आगे पीछे हिलाने लगे थे। मौसी थोड़ी देर तो बर्दास्त कि फिर रुक गई और लंड बाहर निकल कर नाना को चेतावनी देते हुए कहा – अम्मा कि तरह वहसि नहीं हूँ मैं। आराम से करो वार्ना गांड भी नहीं मिलेगी।

नाना – माफ़ कर दे बेटी। तू जब मुँह में लेती है तो तेरी अम्मा कि याद आ जाती है। जरा पेटीकोट भी उतार दे गांड कि शकल भी दिखे।

मौसी – इतनी बार तो मारा है अब भी शक्ल देखनी है।

नाना – तेरी गांड हर बार नै सी लगती है। कितनी विशाल और चिकनी है।

मौसी ने पेटीकोट उतार दिया और फिर झुक कर उनका लंड चूसने लगी। नाना ने आगे होकर मौसी की पीठ और गांड की दरारों पर हाथ फेरना शुरू कर दिया। मौसी के मुँह से अब गुं गुं की आवाज आ रही थी।

थोड़ी ही बाद नाना – अब दे दे।

मौसी अब उलट कर बिस्तर के सहारे खड़ी हो गई। नाना का लंड पहले ही मौसी के थूक से चिकना हो रखा था। उन्होंने अपना लंड उनके गांड पर टिकाया और एक ही झटके में मौसी की गांड के अंदर कर दिया।

मौसी जोर से चीखी – बाऊऊऊजीईईई फाड़ डालोगे क्या। आरी अम्मा कैसे संभालती थी इनको। हाय रे एक ही बार में जालिम ने पूरा का पूरा अंदर ले लिया।

नाना – बससससससससस। हो गया अभी मजा आने लगेगा।

वो धीरे धीरे लंड को अंदर बाहर करने लगे। थोड़ी ही देर में मौसी को मजा आने लगा।

मौसी की चुदाई देख मामा गरम हो गए थे। उन्होंने पहले लीला की तरफ देखा की वो उन्हें छोड़ने दे पर नाना कई बार ले चुके थे तो वो इंकार कर गई। वैसे भी उनके बच्चे के दूध का टाइम हो रखा था। वो उठ कर जाने लगी। मामी भी गरम थी। मामा ने तब मामी को घोड़ी बनाया और चोदने लगे।

मामी – हाँ चोद लो मुझे। देखो बहन भी चुद रही है तुम्हारी। मेरी चूत भी प्यासी है । चोदो जोर से चोद लो। देखो तुम्हारे बाप का लंड नतिनी को चोद के भी शांत नहीं हुआ है। तुम भी चोदो। अपने बाप की औलाद हो तो मुझे माँ बना दो।

मामा – साली छिनाल चुद मुझसे रही है लंड बाप का देख रही है। देख तेरी चूत का कबाड़ा कैसे करता हूँ।

मामी और मौसी दोनों आहें भरी जा रही थी। कमरे में चीत्कारे गूँज रही थी। तूफ़ान मचा हुआ था।

थोड़ी देर की घमासान चुदाई के बाद नाना के लंड ने पानी छोड़ दिया। मामा भी आने वाले थे। मौसी की चूत पर प्यासी थी। वो बिस्तर पर चढ़ गई और अपनी चूत मामी के चेहरे की तरफ कर दी। मामी के लिए इशारा ही काफी था। उन्होंने मौसी की चूत पर जीभ फेरनी शुरू कर दी। मामा मामी को चोद रहे थे। मामी मौसी की चूत चाट रही थी। नाना वही बैठ मौसी के सर सहला रहे थे। मन में उनके यही चल रहा था कि क्या चुड़क्कड़ औलादें पैदा की हैं उन्होंने।

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