Reading Mode

उस रात से मैंने श्वेता के बारे में सोचना छोड़ दिया और श्वेता का रवैया भी मेरे प्रति कुछ बदल गया था।  उसके अंदर जो गुबार भरा था उसके निकल जाने से उसे काफी अच्छा महसूस हो रहा था।  वो हम सबके करीब आ गई थी।  संडे शाम जब हम उसे छोड़ने गए तो दीदी ने कहा चल दीप्ति मैम से मिलकर आते हैं।

मैंने सरला दी से पुछा – इतनी स्ट्रिक्ट लेडी से आपकी कैसे पटने लगी।

सरला दी – यार , हर स्ट्रिक्ट व्यक्ति की कोई न कोई कमजोरी होती है।  उन्हें कुछ न कुछ अच्छा भी लगता है।  बाई चांस मेरे और दीप्ति मैम की कुछ चॉइसइस एक जैसी थी।  फिर सब उनसे डरते थे, मैं उल्टा उनसे उतनी ही बात करती थी।  उन्हें भी कोई न कोई चाहिए था अपनी बात कहने के लिए।  धीरे धीरे मैं उनकी पेट बन गई।

श्वेता को छोड़ने के बाद हम दोनों मैम के घर पहुंचे।  उनका घर  क्या था एक बांग्ला था।  उसमे एक आउट हाउस था जिसमे उनके ड्राइवर का परिवार भी रहता था।  ड्राइवर के यहाँ उसकी बीवी और एक लड़का था।  लड़के के पढाई का खर्चा मैम ही उठती थी।  उसकी बीवी उनके यहाँ खाना और बाकी घर का काम भी करती थी।  वो दरअसल उनके पति के गाओं का ही था और उनके यहाँ काफी समय से काम कर रहा था।  शायद उनके ससुर के समय से।  एक्चुअली मैम के हस्बैंड एक बड़ी फर्म में काम करते हैं।  उनका ट्रेवल बहुत रहता है।  उनकी सास का देहांत भी शादी के कुछ साल बाद ही हो गया था।  उस वजह से उनके ससुर उनके साथ ही रहते हैं।

जब हम पहुंचे तो मैम ने हमारा स्वागत किया। उनके ससुर हमसे मिलने के लिए बाहर आये।  हमारे साथ चाय पी और फिर अपने कमरे में चले गए। मुझे उनकी पर्सनालिटी थोड़ी अजीब सी लगी।

खैर मैम हमें अपने कमरे में ले गई। कमरा बहुत बड़ा था।  जिसमे एक बड़ा सा बेड था और साइड में सोफा और एक टेबल था।  उसके सटे ही ड्रेसिंग रूम और अटैच्ड बाथरूम था। कमरे में पहुँचने पर दीदी और मैम में इशारे इशारे में कुछ बातें  हुई।  दीदी ने शायद उन्हें मेरे सामने फ्रैंक रहने के लिए कहा होगा।  क्योंकि मैम ने एक सिगरेट की डिब्बी निकाली और मुझे ऑफर किया।  मैं सिगरेट नहीं पीता था। झटका तो मुझे तब लगा जब दीदी ने एक सिगरेट निकाल ली और फिर दोनों एक ही लाइटर से जला कर पीने लगे।

मेरा चेहरे देख दोनों हंसने लगी।  मैं अभी कुछ समझ पाता तभी उन्होंने कमरे में रखे एक छोटे से फ्रिज में से बियर की तीन बोतलें निकाली।  एक दीदी को दी।  मुझे देते हुए कहा – ये भी लेते हो या नहीं।

मुझे बड़ी बेइजती महसूस हुई।  मैं कभी कभी ही बियर पीता था। अब ईगो की बात थी तो ले लिया। पर अभी मेरे लिए सरप्राइज मिलना बाकी था।  मैंने देखा दीदी और मैम ने एक एक सिप लेने के बाद एक दुसरे को अचानक से किस कर लिया।  मैं अवाक था।

फिर दीदी ने मैम से कहा मैम नशा नहीं चढ़ रहा। इतना कहकर दीदी ने मैम के गले और कंधे को किस करने के बाद हौले से चाट लिया।

अब समां ये था की दोनों सिगरेट के काश के साथ साथ बियर तो पी ही रही थी , साथ ही साथ एक दुसरे को चाट भी रही थी।  मैं अभी कुछ समझ पाता तभी कमरे में उनकी मेड आई। उसके हाथ में कुछ नमकीन था।  वो आई तो पुरे पसीने पसीने थी।  उसने कमर में सिर्फ एक साडी लपेटी हुई थी।  आँचल ऐसे बाँध रखा था जिससे ब्लाउज और ब्रा के बिना भी उसके मुम्मे छुपे हुए थे।  पर बड़े होने की वजह से जब जब वो चलती वो दोनों हिलने लगते थे। उसने निचे पेटीकोट भी नहीं पहना था पर साडी ने कमर और घुटने तक शरीर को धक् रखा था।  लग रहा था जैसे वो किचन से काम करके आ रही थी।

सरला दी ने मेड से कहा – ताई कैसी हो ?

मेड – मैं अच्छी हूँ।  तुम बड़े दिनों बाद आई।  शादी के बाद लग रहा है पति ने पुरे मजे लिए है।  शरीर गदरा गया है।

दीदी – हाँ, नई नई शादी है।  मौका देख कर चालू हो जाते हैं। पर तुम्हारा मजा अलग है।

मेड ने मेरी तरफ देख कर बोला – ये तुम्हारा भाई है ?

दी – हाँ

मेड-  जैसा बताया था वैसा ही है।

तभी दीप्ति मैम बोली – ताई नशा नहीं आ रहा।  चूल्हा बंद करके आ जाओ।

मेड दो मिनट में वापस आ गई। आते ही सबसे पहले वो मेरे पास आई।  बड़े अजीब तरीके से मुझे देखा और मुझे अपने शरीर को छूने और देखने लगी। मुझे थोड़ा अजीब लगा।  अभी मैं सोच ही रहा था की उसने एक ड्रावर खोला और एक सॉफ्ट सा दुपट्टा निकला और मुझे उसी कुर्सी पर धीरे धीरे बाँध दिया। अब वो दीदी और मैम के बगल में बैठ गई।  उसके बाद दीदी और मैम की हरकत देख कर तो मेरे होश उड़ गए।  उन दोनों ने काउच पर अपने पेड दोनों तरफ कर लिया और बीच में बैठी ताई को पहले गालों पर किस किया फिर उसके चेहरे पर लगे पसीने को चाटना शुरू कर दिया।  पूरा चेहरा चाटने के बाद दोनों ने बियर के सिप लिया।

दीदी – ताई अब नशा धीरे धीरे चढ़ेगा। मैम मैंने ताई के ठर्रे को बहुत मिस किया।  एकदम मेरी माँ वाला स्वाद है।

अब मुझे समझ आया।  दीदी और मैडम दोनों को एक जैसे नशे की आदत थी। मुझे लग गया की दीदी ने जो फ्रूट चाट मुझे खिलाई थी उसकी आदत उन्हें यहीं से लगी होगी। सरला दीदी को जितना मैंने समझा था उससे कई कदम आगे थी।  मेरे दिमाग में ये भी घूम रहा था की ये मेड दीप्ति मैम के ड्राइवर की पत्नी है।  क्या दीदी और मैडम ने ड्राइवर से भी मजे लिए होंगे ? और मैम के ससुर का क्या ? वो तो अभी भी घर में हैं।  क्या उनके रहते ये सब होता रहा होगा ?

इतना तो तय था की सेक्स को लेकर मेरे परिवार में अलग सोच थी।  मेरे पुरे परिवार वाले एक नंबर के चोदू और चुदास थे।  उनको घंटा फर्क नहीं पड़ता था की सेक्स लड़की के साथ हो रहा है या लड़के के साथ।  एकांत हो या ग्रुप सबमे मजे आते हैं उन्हें।  नार्मल हो या किंकी सब चाहिए।  सेक्स होना चाहिए।  चूत को लंड मिले तो ठीक नहीं तो चूत ही सही।  पर मुझे तो चूत ही चाहिए होती है। बड़े मुम्मे वाली के चूत हो तो और भी बढ़िया। पर मैडम का परिवार मुझे समझ नहीं आया।

अब दीदी और मैडम ने ताई के मुम्मे के आस पास लिपटी साडी निकाल कर उसके साइड्स और बाँहों में लगे पसीने को चाटने लगे।  साथ ही वो उसके मुम्मे भी दबा रहे थे।

ताई – क्या रे सरला तेरी प्रैक्टिस छूट गई है।  दबवाते दबवाते दबाना भूल गई है।  जोर से दबा न। उहह्ह्ह्हह्ह्ह्ह।  दीदी ने थोड़ा जोर से भींच दिया।  आआह।  हाँ ऐसे ही।

उन दोनों का बियर भी चालू था।

मैं बोल पड़ा – अरे आप लोगों का रंडीपना चालू है।  कुछ मेरे बारे में भी तो सोचो। बियर की एक सिप भी नहीं ले पाया मैं।

मेरी बात सुनकर मैम उठी।  मेरे पास आई और मेरे गाल पर एक जोर का थप्पड़ मार कर बोली – माआदरचाउद , रंडी किसको बोला।  मेरा चेहरा लाल हो गया था।  उनके इस रूप को देखते ही मेरा लंड जो उफान पर था एकदम से ठंडा हो गया।

अभी मैं इस सदमे से उबार ही रहा था की देखा की एक जवान और चिकनी लौंडिया स्कर्ट और मर्दो वाले बनियान में कमरे में आती है और उसके पीछे पीछे मैम के ससुर भाग कर आते हैं। वो आकर ताई के पीछे चुप जाती है।  मैम के ससुर ताई से – देख बुधिया , लक्खी नहीं मान रहा।

तब मुझे समझ आया की वो लड़की नहीं है बल्कि ताई का लड़का है।  ताई ने कहा – लक्खी क्यों परेशान कर रहा है? साले इतना नखड़ा तो नई दुल्हन भी नहीं करती।

अब वो सरला दी से बोला – दीदी आप ही बोलो न साब को।  कुत्ता बनाकर रखा है मुझे।

अब दीप्ति मैम – बाबा आप गोद में लेकर प्यार से किया करो।

दीदी के ससुर मेरी तरफ ललचाई नजर से देख रहे थे।  मैंने गुस्से में कहा – गांडू मेरे नजदीक भी आया तो तेरी बहु की छूट का भोसड़ा बना दूंगा। उसकी चूत तो फटेगी ही तेरी गांड भी फाड़ दूंगा।

वो बोला – यही तो चाह रहा हूँ।  साले लक्खी का तो खड़ा ही नहीं हो रहा।

मैं – भाग यहाँ से हाथ भी नहीं लगाना।

मेरी बात सुनकर मैडम ने उन् दोनों से कहा – सुना नहीं जाओ यहाँ से हमारे मूड की माँ बहन मत करो वार्ना मैं तुम दोनों की गांड मार लुंगी।

मैं अभी खतरे से निकल चूका था। अब दीदी और मैडम ताई के पुरे बदन को चाटने में मगन थीं।  बीच बीच में वो एक दुसरे को भी किस करती थी और चाट रही थी।  थोड़ी देर में तीनो उठ कर बिस्तर पर गई ।  देखा तो तीनो ने त्रिकोण बना लिया था।  एक दुसरे की चूत चाटने में लगी थी।

इतनी चटाई में सबसे पहले ताई झड़ गई। पर दीदी और मैडम अब सिक्सटी नाइन पिसिशन में थी।

ताई मेरे पास आई।  उन्होंने मुझे बंधे रहने दिया और मेरा पेंट और अंडरवियर उतार दिया।

मेरे लंड को देखते ही बोली – क्या जोबन है रे तेरा।  इतना बड़ा हथियार तो मैंने देखा ही नहीं है। उन्होंने मेरे लंड को प्यार से चूम लिया। अब मेरा लंड पुरे साइज में आ चूका था।  वो एक हाथ से उसे धीरे धीरे सहला रही थी , दुसरे से मेरे गोटियों को सहला रही थी।

सहलाते सहलाते उन्होंने गप की आवाज के साथ ही मेरे लंड को मुँह में लिया और उसे लॉलीपॉप की तरह चाटने लगी। दीदी और मैडम झड़ चुकीं थी।  दोनों उठ कर बाँहों में  बाहें डाले बाथरूम की तरफ बढ़ गई।  अंदर सीटियों के साथ खिलखिलाने की आवाज आ रही थी।

तीनो को देख कर लग रहा था की कोई भी बंदा इनके चंगुल में फंसे तो उसकी तो मार ली जाता होगी।  ताई चूसने में इतनी एक्सपर्ट थी की मेरा आने वाला ही था। तभी दोनों लौट कर आई।  दीदी ने झूमते हुए मुझे किस कर लिया।  उनके मुँह से नमकीन सा स्वाद आ रहा था।  मैं समझ गया की क्या है।  सच में अजब सा नशा था।  उन्होंने मेरे कान में बोला – मस्त चूसती है न ? देख मैम के लौड़े का साइज।

उन्होंने अपनी दो उँगलियों के बीच मैम के क्लीट को बड़े आराम से पकड़ रखा था।  उनका क्लीट एवरेज से बड़ा था।  एक छोटे से लंड की तरह निकला हुआ था।  मैंने अभी तक उधर ध्यान ही नहीं दिया था।  उसका साइज देखते ही मेरे लंड को लगा की कोई साथी मिल गया और ख़ुशी ख़ुशी उसने अपना माल निकाल दिया।  ताई ने मेरा पूरा माल गटक लिया।

मैडम ने फिर मेरे लंड को देखा और दीदी से कहा – इसको तो मैं आराम से लुंगी।

ताई अंदर चली गई।  दीदी और मैडम ने फिर कपडे पहन लिए।  मैं बियर पीना चाहता था पर दोनों ने मन कर दिया की मुझे गाडी चलानी है तो नशा सही नहीं है।

मुझे तो ख़ास मजा नहीं मिला पर दीदी ने भी जल्दी में ही सब किया था।  पर माहौल देख कर मुझे समझ आ गया था की दीदी को किंकी सेक्स पसंद है।  और ये उनके लिए पहली बार नहीं रहा होगा।

पर कुछ सवाल अब भी मेरे जेहन में थे, इनका उत्तर मुझे दीदी से ही मिलना था।

एक दिन ऐसे ही मैं मम्मी के मुम्मे पी रहा था और दीदी बगल में बैठी थी।  मैंने कहा – माँ काश इनसे दूध आता। 

माँ – अरे अब मुझ बुढिया को क्या ही दूध आएगा।  पर दूध का तू इतना दीवाना है तो कुछ न कुछ जुगाड़ करना पड़ेगा।  सरला तू बच्चा कर ले , देख तेरा भाई कितना बेचैन है।

दीदी – आप लोग मेरे पीछे क्यों पड़े हो।  सुधा दी को समझाओ।

मैं – पर उनके यहाँ तो जीजा में ही प्रॉब्लम है।  बेचारी क्या करे।

दीदी – बहनचोद , तू ही पेल के माँ बना दे।  उनके ससुराल वाले इज्जत को लेकर इतने चिंतित हैं की आई वी ऍफ़ भी नहीं चाहते।  समाज में ये रुतबा बना रहे की बच्चा उनके लड़के का है और नार्मल हुआ है।  साले इसके लिए तो दीदी को कह रखा है किसी नजदीकी से चुद भी लें तो कोई ऐतराज नहीं।  बस बाहर खबर नहीं लगनी चाहिए।

मैं सुनकर हैरान था।  मैंने कहा – दीदी फिर मान क्यों नहीं जा रही है।

सरला दी – श्वेता की अम्मा हैं वो। 

मैं हंस पड़ा।   मुझे मालूम पड़ा की जीजा जी की कमी को उनके ससुराल वाले समाज से छुपाना चाहते हैं।  दीदी ने पहले तो काफी बवाल काटा था।  घर छोड़ने तक की नौबत थी।  उनके ससुराल वालों ने बहुत हाथ पाँव जोड़े और माफ़ी माँगा।  उन्होंने दीदी को महारानी की तरह रखा हुआ है।  सास, ससुर से लेकर जीजा जी तक दीदी से डरते है।  दीदी को पर सोनिया बहुत पसंद थी।  सोनिया भी दीदी को बहुत मानती थी। दीदी को जीजा और ससुराल वालों ने खुली  छूट दे रखी थी की वो किसी भी नोन से सेक्स करके बच्चा कर सकती हैं।  पर वो नोन अपना ख़ास होना चाहिए जिससे बात घर की घर में रहे।  पर दीदी को ये सब पसंद नहीं था। 

मैंने सरला दी से पुछा की दीदी फिर खुद को संतुष्ट कैसे करती हैं ?

इस पर वो हंस कर बोली – सारा घर उनका गुलाम है।  चूत को लंड नहीं तो ऊँगली या जीभ भी खुश कर देती है। 

तब मुझे मालूम पड़ा की दीदी और सोनिया एक ही कमरे में सोते हैं। सोते समय दीदी की सास रोज उनके पैरों की मालिश तो करती ही हैं साथ ही उनके पैरों के बीच में जीभ से सेवा भी करती हैं। दीदी सोनिया को बेटी की तरह मानती हैं और उसे उनके मुम्मे चूसे बिना नींद नहीं आती है। रात में जब उनकी चूत को उनकी सास चाट कर पूरी तरह से गरम कर देती हैं तो जीजा कभी कभी आ कर अपना लंड डाल कर चोद लेते हैं।  पर दम न होने से मिंटो में ही झड़ जाते हैं। जिस दिन दीदी को ज्यादा गर्मी चढ़ती है उस दिन वो अपने ससुर की व्हीलचेयर पर उनके साथ ही बैठी रहती है।  एक्सीडेंट से उनके घुटने के निचे का हिस्सा तो काम नहीं करता है पर लंड अब भी तैयार रहता है।  ये अलग बात है की उनके पानी में भी दम नहीं है।  शुरू में उनसे ही बच्चा करवाने की कोशिश हुई थी पर वो भी बेकार ही निकले। पर वो दीदी को गोद में बिठा कर घंटो अपना लंड उनके चूत में घुसाए रहते हैं। कभी कभी दीदी वियाग्रा खिला कर मजे लेती है।  दीदी सोनिया को छोड़ बाकी सबकी बहुत बेइज्जत करती हैं।  उनका बेइज्जत करने का तरीका भी अजब है।

एक दिन की बात है टीवी पर कोई पिक्चर आ रही थी।  उसमे कोई सीन आया तो दीदी का चुदने का मन हो आया। उन्होंने उठ कर अपने कपडे उतार दिए और सास को चूत चाटने को बोला।  थोड़ी देर बाद जब चूत पनिया गई वो उठ कर अपने ससुर के पास गई और उनके लुंगी को उतार दिया।  फिर वो उनके व्हीलचेयर के हैंडल के अंदर से अपने पेअर घुसा कर उनके गोद में बैठ गई।  अपने मुम्मे ससुर के मुँह में डाल  कर बोली – पी लो।  सालो तुम्हारा औलाद तो भडुआ निकला वार्ना अब तक तो इसे पीने वाला आ चूका होता और इसमें दूध भी होता।

उसके बाद उन्होंने ससुर के लंड को चूत में डाला और उनके ऊपर कूदने लगीं। 

सास चुकी एक राउंड चाट चुकी थी तो दीदी भी झड़ गई।  उनकी सास जो ये सब देख रही थी उन्हें मूतने की तलब आई। वो जाने लगीं तो दीदी ने कहा – इधर आओ।  सास डरते डरते आई।

दीदी अब भी ससुर की गोद में बैठी थी।  बोली – कहा जा रही हो ?

सास – मूतने जा रही थी।

दीदी – यही मूत।  फिर जीजा को बुलाई बोली बैठ। जीजा अपनी माँ के सामने बैठ गए।  दीदी ने कहा – इसके ऊपर मूत।  तेरा बेटा मूतने लायक ही है। चल शुरू हो जा रंडी।

जीजा से बोली – देख वो मुतेगी, तुझे उसे मोटने से रोकना है।  चलइसके ढक्कन पर मुँह लगा

अब स्थिति ये थी की जीजा ने अपनी माँ की चूत पर मुँह लगा दिया  और उनकी मूत रोकने लगे।  कभी रोकते कभी आने देते। उनकी माँ अपने ही बेटे को मूत भी पीला रही थी और चूत भी चटवा रही थी।

दीदी को ये देखकर खुद भी पिसाब आ गया और उन्होंने वहीँ अपने ससुर के ऊपर ही बैठे बैठे मूत दिया।

इधर दीदी की सास मूतने के साथ साथ चूत चटाई से एक बार झड़ भी गई।

इन सबके बीच सोनिया छुप कर अपने कमरे से ये सब देख रही थी और अपने छोटे से छेद में एक ऊँगली करे जा रही थी।  सोनिया और उसकी माँ एक साथ झड़ने के साथ ही जमीन पर गिर गए।  दीदी को माँ बेटे की ये बेइजती एकदम से सकूं देने वाली थी।

एक हफ्ते बाद मेरी और दीदी की मौज ख़त्म हो गई। दीदी के वापस जाने का समय आ गया।  जीजा जी की छुट्टी नहीं थी तो उनके देवर सर्वेश लेने आये थे।  दीदी के विदाई वाले दिन श्वेता भी आई थी।  सर्वेश सबके लिए गिफ्ट्स वगैरह लेकर आये थे। श्वेता के लिए भी गिफ्ट था।

जब श्वेता सर्वेश को ब्रेकफास्ट करवा रही थी तो वो बड़े गौर से उसे देख रहे थे।  उन्हें शायद श्वेता पसंद आ गई थी। श्वेता को भी सर्वेश पसंद आया था। दोनों के बीच की आँख मिचोली किसी से छिपी नहीं रही।  दीदी ने उन दोनों को बीच में एक आध बार छेड़ा भी।  खैर दीदी चली गई।

उनके जाने के बाद मैं, श्वेता और माँ बैठे थे।  माँ और श्वेता थोड़े उदास थे।  मैंने माहौल को हल्का करने के लिए बोला –  माँ श्वेता के लिए अब तुम्हे और चाची को परेशान  होने  की जरूरत नहीं है।  श्वेता ने अपने लिए लड़का पसंद कर लिया है।

श्वेता – तेरी बकवास बंद नहीं होगी क्या ?

मैं – लो कर लो बात।  सबसे नजरे छुपा के तो ऐसे देख रही थी जैसे मुँह दिखाई हो रही हो। 

श्वेता ने पिल्लो मेरी तरफ फेंका और माँ की गोद में शर्मा कर छूप गई।

माँ – क्यों मेरी बच्ची को छेड़ता है।  तुझसे कोई लड़की तो पटती नहीं और इसने पसंद कर लिया तो जलन हो रही है।  मेरी श्वेता जिसे पसंद करेगी मैं उसी को इसे सौपूंगी

माँ ने बातों में मेरी दुखती राग पर हाथ रख दिया।  मैंने चुदाई कितनी भी कर ली हो पर गर्लफ्रेंड नहीं पटा पाया था।  जो मिला था सहज ही मिला था।

मुझे उदास देख माँ ने मुझे भी अपने बाँहों में भर लिया और बोली – दुखी मत हो मेरा बच्चा तेरे लिए भी तो कोई न कोई होगा ही।

मैं खुश हो गया था।  मैंने कहा – तुम हो न।

माँ- धत्त

श्वेता तभी बोली – चल मैं तुझे गर्लफ्रेंड पटाने में मदद करुँगी।

ये सुनकर मैं खुश हो गया और उसे किस कर लिया।  ये स्नेह भरा किस था।  श्वेता ने बुरा नहीं माना।  पर माँ की बाहों में आते ही मेरा लंड न जाने क्यों अपने बहकने लगा। मैंने माँ को उनके लबों पर किस कर लिया और उनके मुम्मे दबाने लगा।  श्वेता समझ गई की मैं गरम हो चूका हूँ।  वो उठ कर जाने लगी तो माँ ने उसे रोक लिया और मुझे मना कर दिया।  मैं मन मसोस कर रह गया।

श्वेता ने कहा – ठीक है माँ मैं सोने जा रही हू।  वैसे भी मुझे सुबह सुबह उठ कर हॉस्टल जाना है। वो मुझे माँ को प्यार करने से रोकना नहीं चाहती थी।

माँ ने कहा – हमारा तो रोज का है।  तेरे जाते ही कल मेरे ऊपर चढ़ जायेगा तेरा चोदू भाई।  आज तो तेरे सं समय बिताउंगी। माँ ना जाने क्यों श्वेता के सामने खुल कर बात कर रही थी।  मैं समझ गया था।  मैं उठ कर अपने कमरे में जाने लगा।

जाते जाते मेरे कान में श्वेता की धीमी सी आवाज आई – चोदू भाई।  फिर माँ और वो खिलखिला कर हंसने लगीं।

अगली सुबह मैं जब हॉस्टल छोड़ने गया तो मैंने उसे याद दिलाया की उसने कहा था की मुझे कोई गर्लफ्रेंड बनाने में मदद करेगी।  उसने कहा ठीक है।  पर उस दिन दीप्ति मैं के यहाँ क्या हुआ था।  उस दिन का सीन याद कर मेरे पेट में अजीब सा होने लगा।

मैंने कहा – कुछ नहीं हुआ था। 

फिर मैं जब उसे छोड़ कर घर आया तो देखा माँ कमरे में लेटी है।  मुझे लगा चुदने को तैयार होंगी पर मेरे साथ तो केएलपिडी हो गई।  माँ का पीरियड आ गया था।

अब मेरे पास कोई चारा नहीं था।  मुझे पांच दिन अकेले बिताने थे।  माँ ने भी समझाया की पढाई भी करनी है और इतने ज्यादा सेक्स भी ठीक नहीं है।  थोड़ी ताकत बचा कर रखनी चाहिए। एक दिन मैं और माँ बैठे थे तभी बड़ी मौसी का फ़ोन आया।  फ़ोन सुनकर माँ बहुत खुश हुई।  मैंने पुछा क्या बात है? इतनी खश क्यों हो ?

माँ बोली – तेरे दूध का इंतजाम हो गया है।

मैंने कहा -कैसे ?

माँ – तेरी लीला दीदी को बच्चा होने हुआ है और वो कल मौसी के साथ यहाँ आ रही है।  लीला मेरी बड़ी मौसी की बड़ी लड़की थी।

मैं तो खुश हो गया।  मैंने माँ को किस कर लिया।  मैं आगे बढ़ने को सोच रहा था की माँ ने कहा – एक दिन और।

मैंने कहा – कल तो वो आ जायेंगे।

माँ – आने वाले जायेंगे भी तो।  पर मैं हमेशा तेरु हूँ।

मैं – सच माँ।  मैं तुम्हे कभी अकेला नहीं छोडूंगा।  तुम जितना मुझे समझती हो उतना कौन जानता है ?

रात भर मैं सपने देखता रहा।  लगता कभी माँ मेरी सवारी कर रही है।  कभी सपना आता की मैं माँ की गोद में बच्चा बना दूध पी रहा हूँ।  कभी लगता की सुधा दीदी की गोद में बच्चा है मैं और वो बच्चा दोनों उनका दूध पी रहे हैं।  रात गुजर गई।  कमाल की बात ये थी की मैं स्खलित नहीं हुआ था पर मेरा लंड एकदम टाइट था।  सुबह के  वक़्त मुझे लगा की कोई मेरे लंड को किस कर रहा है।  देखा तो माँ नहाकर मेरे पैरो के पास बैठी थी।  उसने महीना ख़त्म हुआ था तो बाल धो रखे थे।  शरीर पर कपडे के नाम पर मुम्मो पर से एक पेटीकोट बाँध रखा था।  उसका निचला सिरा बमुश्किल उनके जांघो तक पहुँच पा रहा था।

माँ बोली – क्या रे लीला का नाम सुनकर खड़ा कर रखा है तुमने ?

मैं – माँ , उनको तो देखे सालों हो गएँ है।  रात भर सपने में तो तुम ही आई हो।  ये तो बस तुम्हे याद करके खड़ा रहता है।

माँ ने मेरे लंड के टोपे को किस किया और कहा – चल उठ जा। 

मैं – माँ आओ न।  अब खड़ा है तो इसे शांत भी करो।

माँ – चल हट मुझे बहुत काम है।  घर में मेहमान आने वाले हैं।

मैं – वो भी तो घर वाले हैं। आओ न प्लीज।  अच्छा इसे मुँह में लेकर ही शांत कर दो।

माँ – उठी और खड़ी हो गई।  बोली जब चूत है तो मुँह क्यों लगाऊं। 

वो बड़े ही मादक अंदाज में बिस्तर पर खड़ी हो गई।  एकदम किसी पोर्न स्टार की तरह पहले तो अपने कमर को आगे पीछे हिला कर कुछ अदाएं दिखाई।  उसके बाद धीरे से मेरे लंड पर बैठ गई।  उन्होंने लंड को अंदर नहीं लिया बल्कि अपनी चूत की दोनों फांको के बीच फंसा कर कमर आगे पीछे करने लगी। 

बोली – तेरा लंड खड़े खड़े थक गया होगा उसकी थोड़ी मालिश कर दू

मैं – हां माँ , अपनी मम्मी का इंतजार कर रहा था।

माँ- तू झूठ बोलता है।  उसे तो इतनी साड़ी चूते मिल गई।  अब माँ कहा याद रहती हैं।  माँ के पीछे पड़ा था पर देख चाची भी चोद ली, बहन की भी मार ली।  पटा नहीं वो कौन सी टीचर है उसकी उसके यहाँ भी मौज कर आया।  और आज देख दो और चूते आ जाएँगी खिदमत में। तेरा लंड तो ऐश काट रहा है।

मैं – माँ , मैं जितनी भी चूत मार लून पर अंत में तेरे पास ही सकूं आता है।  जब तक मेरे पप्पू का मिलान तेरी मुनिया से नहीं आता उसे अच्छी नींद नहीं आती।

माँ – झूठ मत बोल।  तेरा लंड आवारा हो गया है।  पर मुझे पता है आवारा बच्चे को कैसे काबू में लाते हैं।

माँ कहकर उठी।  मुझे लगा फिर खड़े लंड पर धोखा हो गया।  पर माँ अब पलट कर बैठ गई।  उनकी पीठ अब मेरी तरफ हो गई।  पर उन्होंने अब भी मेरे लंड को चूत में नहीं लिया।  पर उन्होंने बड़ी अदा से अपने पेटीकोट का नाडा खोल कर उसे कमर पर गिरा दिया।

मैंने उठने को कोशिश की तो हाथ पीछे करके उन्होंने मुझे धकेल दिया।  थोड़ी देर वैसे ही मालिश करने के बाद उन्होंने अपने दोनों पेअर किनारे किया और बिस्तर की किनारे खड़ी हो गई । ऐसा करते ही उनका पेटीकोट जमीन पर गिर गया और वो पूरी तरह से नंगी हो गई। माँ मुझे बुरी तरह से तड़पा रही थी।  उनके बड़े बड़े गांड एकदम चमक रहे थे।  बालों से गिरते पानी की वजह से पीठ थोड़ी गीली हो रखी थी। मैं तुरंत उठकर बिस्तर पर से ही उनको पीछे से पकड़ लिया और गिरते पानी को चाटने लगा।

माँ- आह , मेरे लाल तू कितना पागल है रे।  बचपन से ही जब मेरे पीछे पीछे भागता था तो मुझे लगता था की कितना दीवाना है मेरा

मैं जैसे ही हाथ बढ़ा कर उनके मुम्मे पकड़ने को हुआ तो वो झुक गई।  अब समझिये की मेरे सामने उनकी गांड एकदम खुली हुई अवस्था में है।  बड़े बड़े हाहाकारी चिकने गाँड़। उनके गाँड़ का छेड़ भी दिख रहा था।  उसे देख कर लग रहा था की वो अब भी कुंवारा है।  झुकने से पीछे से उनकी चूत की फांके लटकी सी दिख रही थी। ये साफ़ लग रहा था की माँ की चूत एकदम पनिया गई है।  क्योंकि उनके चूत के पास जांघो पर एक दो बूँद सी गिरे हुए थे।  मैंने लपक कर उनके गाँड़ को चूम लिया। 

उनके गाँड़ के छेड़ पर जीभ फिराते ही माँ बोली – रहने दे गन्दी जगह है।

मैं – माँ तेरा हर अंग सोना है।  कुछ भी गन्दा नहीं है।  वैसे तेरी गाँड़ कुँवारी लग रही है।  कब देगी मुझे।

माँ – हां, कुँवारी ही है।  तेरे बाप के आलावा नाना ने कोशिश की थी।  मैंने तभी कहा था की कभी कोशिश की तो उनका लंड काट दूंगी।

मैं – माँ अगर मैं कोशिश करू तो ?

माँ – देखूंगी।  पर इतना बड़ा लंड पाल पास कर, दूध पीला कर बनाया है।  उसे काटूंगी तो नहीं ही।

मैं – माँ जिस दिन तू खुद से अपनी गाँड़ देगी उसी दिन मरूंगा।  पर तब तक उसे प्यार जरूर करूँगा।

माँ  – प्यार तो तू मेरे हर अंग को कर सकता है।  कर ले जितना प्यार करना है।

पर इस बार मैंने उनके चूत से टपकते पानी को चाट लिया।

मैं – माँ तेरा नमकीन पानी कितना स्वादिष्ट है।  तेरे चूत के रास का तो दीवाना हो गया हूँ मैं।

माँ अब मेरे गोद में उल्टा ही बैठ गई।  अब मेरे हाथ उनके मुम्मे पर थ।  मैं उन्हें दबा रहा था।  खींच रहा था। मैंने माँ के कान के लबों को चूम कर कहा – माँ तेरे हर अंग में रस है।  तेरे फुटबाल जैसे सॉफ्ट सॉफ्ट मुम्मे दबाते ही साड़ी टेंशन दूर हो जाती है।

माँ- तू कितना झूठा है रे।  देख तेरा लंड तो टेंशन में है।

मैं – अरे उसकी रानी के बगल में है न।  नर्वस है।

माँ – रानी भी तो नर्वस है।  माँ ने मेरा एक हाथ पकड़ा और आपकी चूत के पास ले गई।  बोली – देख कितनी नर्वस है।  उनकी चूत फिर से पनिया गई थी।  माँ ने मेरे हाथ के अंगूठे को अपने भग्नासाय से लगाया कहा – थोड़ा इसे प्यार कर मेरी मुनिया की टेंशन रिलीज़ होगी।

माँ का क्लीट भी औसत से बड़ा था और उत्तेजना में एकदम छोटे से लंड की तरह निकल आया था।  एकदम दीप्ति मैम की चूत की याद आ गई ।  माँ को दीदी के आने के बाद से मैंने  कई बार चोदा था।  पर थ्रीसम के चक्कर मेंइनकी चूत पैट कभी ध्यान ही नहीं दिया था।  अब मुझे समझ आया की माँ मुझे कितना मिस कर रही थी।  पहले दीदी की वजह स।  दीदी के जाते ही महीना आ गया।  पर अब महीना ख़त्म होते ही लीला दी और मौसी।  पर माँ कितनी खुश थी।  उन्हें कोई भी तकलीफ नहीं थी।  उन्हें बस इस बात की ख़ुशी थी की मुझे दुधारू गाय मिल जाएगी और दो एक्स्ट्रा चूत।  माँ ने मेरे लंड को पाल पोस कर बड़ा किया था तो उसके लिए चूतों का इंतजाम भी कर रही थी।  उन्हें इस बात की कोई तकलीफ नहीं थी की उस दौरान माँ पर काम ध्यान रहेगा।  पर अब मैंने डिसाइड कर लिया।  कुछ भी हो जाए।  कितनी भी  चूतें  सामने हो माँ को खुश जरूर करूँगा।

अब मैंने माँ के भग्नासाय को अंगूठे से रगड़ते हुए अपनी बीच वाली ऊँगली माँ की चूत में डाल दी। 

माँ – आह माआआ।  स्स्स्सस्स्स्स मेरी चूत तो धन्य हो गई। 

अब मैं ऊँगली अंदर बाहर करता रहा और अंगूठे से उनके क्लीट को रगड़ता रहा।  माँ अब तड़प रही थी।  उनकी सिसकियाँ तेज हो रही थी।

उनके हाथ खुद बा खुद अपने मुम्मे पर पहुँच गए।  मेरा एक हाथ जो उनके मुम्मे पर था उन्होंने उसे जोर से दबा दिया।  उन्होंने अपना चेहरा पीछे करके अपने होठ मेरे होठो से लगा दिया।  अब हमारे जीभ एक दूसरे के मुँह में घुसने की कोशिश कर रहे थे।   मैंने अब अपना दूसरा हाथ भी निचे किया और एक तरफ तो बाएं हाथ के अंगूठे और उसके बाद वाली ऊँगली के बीच में उनके क्लीट को पकड़ कर मसलने लगा।  दूसरी तरह दुसरे हाथ की बीच वाली ऊँगली चूत में डालकर बाकी उँगलियों में उनके चूत की बाहरी चमड़ी को रगड़ने लगा। 

मान ने अपने दोनों हाथो से अपने निप्पल उमेठने शुरू कर दिए।

मैं – माँ कितना आग है रे तुझमे।  अंदर लग रहा है भट्टी है।  आटे की लोई डाल दें तो रोटी पक कर निकलेगी।

माँ – रोटी की क्या जरूरत जब गरम गरम पावरोटी तैयार हो जाएगी।  अभी थोड़ा आटा मथ दे।  देख अंदर से मोयन निकलेगा।  उस मोयन वाले आटे की रोटी खिलाऊंगी तुझे।  खायेगा न मेरे लाल।

मैं – बहुत भूखा हूँ मैं माँ।  क्यों नहीं खाऊंगा।

माँ – तो जरा जल्दी कर न।  तैयार कर दे रोटी।  निकाल दे घी। आह, आह देख मक्खन तैयार ही है बस तू  मथ दे।  निकाल दे घी।

माँ ने पलट कर अपने जीभ को मेरे मुँह में डाल दिया।  मेरे उँगलियों की स्पीड बढ़ गई थी।  माँ कांपने लगी थी।  उनके दोनों पेअर थरथराने लगे। 

माँ- आह आह आह आह मेरे लाल।  तेरी मथनी जोरदार है।  घी बस तैयार है।  आह आह।  थोड़ा तेज कर न।  देख मस्त घी आएगा। 

कुछ ही क्षण में माँ के पुरे शरीर में कम्पन हुआ।  पेअर थरथराने लगे और मेरे हाथो पर उनकी चूत ने ढेर सारा पानी छोड दिया।  उनकी चूत के रास से सरोबार दोनों हाथो को जब ऊपर लेकर आया तो माँ ने अपनी जीभी निकाल कर मेरे दोनों हाथ चाटने शुरू कर दिए।  उन्होंने मुझे किस किया और चूत का रास अपने मुँह से मेरे मुँह में ट्रांसफर कर दिया।  हम दोनों बारी बारी से मेरे हाथ को पूरा चाटते और फिर डीप किस में लग जाते।

कुछ ही क्षण में माँ के पुरे शरीर में कम्पन हुआ। पेअर थरथराने लगे और मेरे हाथो पर उनकी चूत ने ढेर सारा पानी छोड दिया। उनकी चूत के रास से सरोबार दोनों हाथो को जब ऊपर लेकर आया तो माँ ने अपनी जीभी निकाल कर मेरे दोनों हाथ चाटने शुरू कर दिए। उन्होंने मुझे किस किया और चूत का रास अपने मुँह से मेरे मुँह में ट्रांसफर कर दिया। हम दोनों बारी बारी से मेरे हाथ को पूरा चाटते और फिर डीप किस में लग जाते।

अब माँ उठने लगीं तो मैंने धीरे से उनके कान में कहा – अपने मुन्ने का कुछ नहीं करोगी।

माँ- क्यों नहीं करुँगी।  कह कर माँ मेरे सामने नीचे जमीन पर बैठ गई और मेरे लंड को अपने  मुँह में डाल लिया।  मैंने उनके सर को पकड़ा और ऊपर निचे लड़ने लगा। मेरा लंड बेकाबू हो चूका था और मुझे उसे शांत करना था।  माँ के मुँह से गू गू और सडप सडप की आवाज आ रही थी। मैं उत्तेजना में इतना पागल हो चूका था की बेरहमी से उनके सर को लंड के ऊपर निचे कर रहा था।  मेरा लंड  उनके गले तक पहुँच रहा था। थोड़ी ही देर में मेरे लंड ने अपना पूरा लोड माँ के मुँह में उड़ेल दिया।  पानी निकलते ही मुझे होश आया।  निचे देखा तो माँ खो खो करके खांस रही थी।  उनका चेहरा लाल हो रखा था और उनके मुँह से मेरा वीर्य निकल कर उनकी ठुड्ढी , और सीने पर गिर रहा था। मुझे अपनी गलती का एहसास हुआ मैं तुरंत निचे बैठ गया और माँ से माफ़ी मांगने लगा – माँ , माफ़ कर दो।  मैं पागल हो गया था।

माँ – मादरचोद ,मैं भाग थोड़े ही रही थी।  मजे थोड़ा रुक कर आराम से लेता।  ऐसे कोई जानवर बनता है क्या ?

मैंने माँ का पेटीकोट उठाया और उनके चेहरे और सीने को साफ़ करने लगा। हम दोनों जमीन पर बैठे थे। मैं बार बार सॉरी बोल रहा था और उनके बदन को साफ़ भी कर रहा था।  माँ ने मुझे कहा – सॉरी क्यों बोल रहा है।  मुझे मजा तो बहुत आया। तेरे पापा को भी ऐसा ही गंदे तरीके से सेक्स करना पसंद था। कह कर उन्होंने मुझे चूम लिया।  उनके चूमते ही मेरा लंड वापस अंगड़ाई लेने लगा।

माँ उसे देख बोली – देख तेरा लौड़ा फिर खड़ा हो गया।

मैं – उसे अपने घर का रास्ता कहाँ मिला है ? तब से तुम उसे भटका रही हो।

माँ – चल पहले कुछ खा ले।

मैं – माँ एक बार अंदर डालने दो न।

माँ कड़ी हो गई और बोली – मैंने रोका कहा है।  डाल ले

मैं एकदम से खुश हो गया और उनको पीछे से पकड़ लिया और अपने लंड को उनके चूत में डाल दिया। मैंने कहा – माँ निकालने का मन नहीं है।

माँ – तो कौन कह रहा है निकाल।  कह कर वो आगे बढ़ी और किचन में जाने लगी।  मै भी उनसे चिपके चिपके उनकी चूत में लंड डाले डाले साथ साथ चलता रहा।  मैंने हाथो से उनके पेट को पकड़ रखा था। ऐसे ही चिपके चिपके हम दोनों किचन में पहुँच गए।

माँ ने चाय बनाना शुरू किया। मैं लंड उनकी चूत में डाले हुए था और उनके मुम्मे अपने हाथ से दबा रहा था।

माँ – लाल अब तूने इंजन से डब्बा तो जोड़ दिया है।  जरा इंजन स्टार्ट तो कर।

मैं – माँ इंजन झटके लेगा।

माँ – कोई नहीं ये ट्रैन जुटने झटके दे उतना ही मजा आता है

मैंने एक जोरदार झटके अपने लंड उनके चूत में पेल दिया। 

माँ – आह आह इंजन में जोर बहुत है।

मैं – मेरी माँ सवारी कर रही है तो इंजन बढ़िया होना चाहिए।  अब मैं धीरे धीरे माँ को चोद रहा था।  माँ ने धीमी आंच पर चाय पकाना शुरू किया और मैंने धीमे धीमे उनकी चूत में अपना लंड अंदर बाहर। मैं माँ के निप्पल को कभी उमेठा करता कभी उनके पुरे मुम्मे इतनी जोर से खींचा करता जैसे उखाड़ लूंगा।  माँ बस आहें भरी जा रही थी और सिसकारियां ली जा रही थी।

माँ ने कहा – सुन अपने लौड़े से कह इस बार थोड़ा सब्र रखेगा।  तेरे  रॉड की गरमी मुझे देर तक चाहिए। 

मै – तू जब तक कहेगी डाले रहूँगा।  मैं बीच बीच धक्के लगाना बंद कर देता। चाय बानी और माँ ने छान लिया।  अब माँ के दोनों हाथो में कप था।  वो थोड़ा आगे झुके झुके चल रही थी ताकि मेरा लंड बहार ना आ जाये।

सोफे पर पहुँच कर मैं बैठ गया।  अब माँ मेरी तरफ मुँह करके मेरे लंड पर दोबारा बैठ गई। हम दोनों के हाथ में चाय थी , चाय की चुस्की के साथ माँ अपने कमर को लंड घुसाए आगे पीछे कर रही थी। 

माँ – क्या कर रहा है मेरे लाल

मै – चाय पर चुदाई।  मै अपनी माँ चोद रहा हूँ

माँ – आह आह आह।  मस्त चोदता है रे तू।

मैं – मैं कहा चोद रहा हूँ तुम चोद रही हो।  वास्तव ने माँ ने पूरा करोल लिया हुआ था अब।

माँ – मेरे मुन्ने खरबूजा चाक़ू पर गिरे या चाकू खरबूजे पर  कटता तो खरबूजा ही है। आह आह

जैसे जैसे चाय ख़तम हो रही थी माँ की स्पीड भी बढ़ रही थी।  मैंने चाय का प्याला तो कब का किनारे रख दिया तह ।  मैं अपने दोनों हाथो से माँ के बड़े बड़े चूतड़ों को हर धक्के से अपनी तरफ खींच रहा था। उनको दबा रहा था और सहला रहा था।

माँ – बोल , क्या इरादे हैं

मैं – माँ मैं तो तेरा गुलाम हूँ तू जो चाहे कर।  ऐसे ही अपने चूत में डाले रह या पानी निकाल दे।

माँ – देख दिन कैसे बदले रे।  तू मेरे मुम्मे के पीछे भागते भागते काम मेरे चूत के अंदर घुस गया पता ही नहीं चला।

मै – तुमने भी इतनी आसानी से कहाँ चोदने दिया।  बेकार में ही पहले चाची चुदवा दी ।  फिर बहन।  कितना तरसाया है तूने

माँ ने अब पूरी स्पीड बढ़ा दी।  सससस सससस आह आह चोदू साले , माँ इतनी आसानी से चोदने को नहीं मिलती।  इतना बड़ा मुसल जैसा लंड  अंदर लेने के लिए कितनी हिम्मत होनी चाहिए। आह चोद अब मिली है तो। 

मैंने भी अब निचे से धक्के लगाने शुरू कर दिए।

माँ- हां लगा जोर।  पेल दे।  माअअअअअअअ।  काश तू जिन्दा होत।  दामाद को तो झूठे रसम का हवाला देकर अपना बनाया था।  तेरा नाती तो ऐसे ही तैयार है।  आह आह क्या मस्त चोदता है।  सब इसके लंड की दीवानी है।  पेल मेरे राजा पेल मुझे। मुझे खुश रखेगा तो चूतों का अम्बार लगा दूंगी।  आह आह अपनी कुँवारी गांड बचा कर रखा है वो भी दे दूंगी।  बस खुश कर दे मुझे

माँ का शरीर जोरदार तरीके से कांपने लगा।  कुछ ही क्षण में हम दोनों माँ बेटे एक साथ झाड़ गए।  माँ मेरी बाहों में समां गई।

माँ का शरीर जोरदार तरीके से कांपने लगा। कुछ ही क्षण में हम दोनों माँ बेटे एक साथ झाड़ गए। माँ मेरी बाहों में समां गई।

पांच मिनट वैसे ही रहने के बाद माँ बोली – अब लगता है फिर से नहाना पड़ेगा। तूने मुझे पसीने से भर दिया है।

मैं – सरला दी होती तो चाट जाती।

माँ हंसने लगी। मेरा लंड इतनी जबरदस्त चुदाई के बाद सिकुड़ कर उनकी चूत के दरवाजे तक आ गया। माँ में न जाने क्या जादू था। उन्होंने अपनी चूत को सिकोड़ कर मेरे लंड को फिर से अंदर कर लिया। उनकी चूत एक पंप की तरह मेरे लंड को खींच रही थी।

मैं माँ के होठो को चूमते हुए बोलै – वह माँ , तू तो जादूगरनी है। ऐसे तो ये फिर से खड़ा हो जायेगा।

माँ – आज उसे अंदर से निकालने का मन ही नहीं कर रहा।

मै – माँ मौसी और लीला दी को आने से मना कर दो न।

माँ – तुझे ही तो ताजा दूध चाहिए था।

मैं – मुझे तुम चाहिए।

माँ – मैं तो यहीं हूँ। पर लीला के दूध के कई दीवाने हैं। मिल रहा है तो ले ले। एक आध हफ्ते में चली जाएगी।

पता नहीं क्यों मेरा मन माँ को छोडने का नहीं था।

माँ आखिर उठ ही गई। बोली चल तू भी नहा ले। मुझे भी नहाना पड़ेगा । फिर मैं भी साफ़ सफाई भी करनी होगी।

मैं भी मायूस होकर कमरे में चला गया। माँ भी दोबारा नहा धोकर एक अच्छी सी साडी पहन ली। उन्होंने इस बीच खाने पीने का सामान बना लिया और मै घर सही करने लगा।

दोपहर को दरवाजे की घंटी बजी। माँ ने कहा देख लगता है वो लोग आ गए। मैंने दरवाजा खोला तो देखा सामने एक बहुत ही सुंदर सी जवान महिला गोद में बच्चा लिए सलवार सूट में खड़ी थी। वो लीला दी थी। बचपन में देखा था। अभी तो पहचान में ही नहीं आ रही थी। साथ में बड़ी मौसी थी। माँ की हूबहू नक़ल। शक्ल और शरीर सब मैच कर रहा था।

मौसी – बस दरवाजे से खड़े खड़े निहारता रहेगा या अंदर आने देगा। लीला दी भी हंस पड़ी।

मैं होश में आया और दरवाजे से हट गया। दोनों अंदर आ गई। मैं उनके सामान को अंदर करने लगा। माँ ने गले लग कर उनका स्वागत किया। लीला दी को चूम कर बोली – कितनी सुन्दर हो गई है। बच्चा होने के बाद और निखर गई है।

मौसी थोड़ी बेबाक थी। बोली – कहती तो हूँ सुधा और सरला को की बच्चा कर ल। अलग ही फीलिंग है पर जाने क्या हो गया है आजकल की लड़कियों को। उन्हें सुधा दी के घर की स्टोरी पता नहीं थी।

लीला दी मुझे देख कर बोली – कितना बड़ा हो गया है। बॉडी शोडी भी बना लिया है।

मैं – आप भी तो बदल गई हैं।

इधर हम लीला दी और मौसी की आवभगत में लगे थे , उधर सुधा दी अपने कमरे में उदास बैठी थी। उन्हें अपनी परिस्थिति पर रोना आ रहा था। उनका भी बहुत मन करता था बच्चा खिलाने, उसकी किलकारियां सुनने का ।

उनको उदास देख उनकी सास उनके पास आई और बोली – क्या सोच रही है मेरी बच्ची। तुझे जब दुखी देखती हूँ तो मेरा दिल भर आता है। कुछ कर नहीं सकती जब अपना ही खून ही खोटा है।

सुधा दी के आँखों से टप टप करके आंसू गिरने लगे। उनकी सास ने बाल सहलाते हुए कहा – तुझे किसी से सम्बन्ध नहीं बनाना है मत बना। चल आई वी ऍफ़ ही करा ले। काम से काम घर में किलकारियां तो गुजरेंगी। अपनी इजात बचाने के चक्कर में तुझे बहुत तकलीफ दी है मैंने। पर अब नहीं देखा जाता।

सुधा दी उनके ह्रदय परिवर्तन से एकदम से रो पड़ी। उनके गले लग कर बोली – मांजी मैं क्या करु । समझ नहीं आता।

कमरे में तभी जीजा आये। उन्होंने कहा – मुझसे भी तुम्हारा दुःख नहीं देखा जाता। चलो कल ही डॉक्टर से मिलकर आते हैं।

सुधा दी सोच में पड़ गई। उन्होंने कहा मुझे सोचने का समय दो।

अगले दिन सुबह नास्ता करते वक़्त दीदी ने कहा – मैं सोच यही हूँ कुछ दिन के लिए मायके चला जाऊँ।

उनकी सास ने कहा – हां चली जाओ। वहां कोई अच्छा डॉक्टर मिले तो वहीँ से सब करवा लो।

सोनिया वहीँ बैठी थी। वो बोल पड़ी – डॉक्टर का तो पता नहीं वहां राज है। सुना है मुस्टंडा घर की औरतों के पीछे पड़ा है।

दीदी ने उसकी पीठ पर एक धौल जमा दिया। बोली – कुछ भी बोलती है। ले चलती हूँ तुझे ही माँ बनवा देती हूँ

सोनिया शर्मा गई।

जीजा ने कहा – ठीक ही है। चली जाओ। अगर राज तैयार हो तो मुझे कोई आपत्ति नहीं है। घर की बात घर में ही रहेगी।

दीदी सोनिया से बोली – चलेगी मेरी सौत ? बुआ बनेगी मामी बनेगी या मौसी ?

सोनिया भाग कर कमरे में चली गई।

उनकी सास बोली – राज हमें भी पसंद है। सोनिया के लिए अच्छा रहेगा।

दीदी – अच्छा तो है। मैं भी यही चाहती हूँ पर वो आजकल खुल्ला सांढ़ हो रखा है। सुना है आजकल बड़ी मौसी और लीला आई हुई हैं। अब आप ऐसे परिवार में , ऐसे लड़के के साथ सोनिया की शादी करेंगी ? क्या सोनिया उसे अपने पति की तरह पसंद करेगी ? और शादी के बाद वो रुक जाये संभव नहीं। वो राज को दूसरों के साथ शेयर न करे शायद। और इन सबसे बड़ी बात क्या राज को सोनिया पसंद आएगी।

सास और जीजा सोच में पड़ गए। खैर ये तय हुआ की सुधा अपनी माँ से इस बारे में बात करेगी और फिर देखेगी की क्या करना है

Please complete the required fields.