चाची के जाने के बाद से घर फिर से खाली खाली हो गया था। मेरा कॉलेज भी शुरू हो गया था। कॉलेज से आने पर सबसे पहले मैं माँ के दूध पीता था। माँ मुझे जीभर के अपने मुम्मो से खेलने देती थी। फिर ही मैं खाना खाता था। खाना बनाने और खाने के दौरान माँ के तन पर सिर्फ पेटीकोट रहता था। मैं भी या तो नंग धडंग रहता या फिर सिर्फ एक गमछे में। एक दिन माँ ऐसे ही दोपहर खाना बना रही थी की सरला दीदी का व्हाट्सप्प वीडियो कॉल आ गया। माँ ने भी ध्यान नहीं दिया और उठा लिया। माँ को इस तरह से नंगे देख सुधा दीदी एकदम से सकते में आ गई। डांटते हुए बोला – माँ माना हम सब घर में फ्री रहते थे पर तुम तो हमारे शादी के बाद से एकदम ही नंगई पर उतर गई हो। राज कहाँ है ?
माँ को तब समझ आया की गलती तो हो गई है। उन्होंने झूठ बोल दिया – राज घर में नहीं है और गरमी ज्यादा थी। उस पर से पसीने से उनका ब्लॉउस पूरा भींग गया था इस लिए मैंने ब्लाउज उतार दिया है।
माँ की बात सुनकर मैं भागकर अपने कमरे में छूप गया। माँ दीदी से बात करते करते अपने कमरे में गईं और दूसरा ब्लॉउस निकाल कर पहन लिया।
दीदी – माँ तुम साडी नहीं पहनती घर में ?
माँ – तुम्हे तो पता है मुझे कितनी गर्मी लगती है। पहले भी कहाँ पहनती थी।
दीदी – हाँ पहले की बात ही कुछ थी। मैं रहती तो पसीना भी पोछ देती।
माँ – तू भी न। चटोरी है। वहां कैसे काम चलता है तेरा।
दीदी – माँ यहाँ की तो मत पूछो। सास ससुर तो बहुत कड़क हैं। बस शलभ है जो इतना प्यार करते हैं।
माँ – वो सर्वेश कैसा है ?
दीदी – अरे वो तो सबके दुलारे हैं। बहुत केयरिंग हैं। बस ये माता जी और पिताजी का ही खौफ है। पर वो दोनों भी सर्वेश को बहुत प्यार करते हैं।
माँ – बहुत दिन हुए तुझे गए हुए। आजा न यहाँ। तेरी चाची आई थी। थोड़ा मन लग गया था। श्वेता भी यही पढ़ने लगी है। हॉस्टल में रहती है तो घर सूना सूना लगता है।
दीदी – ठीक है इन लोगो से बात करती हूँ। एक महीने के लिए आने दे तो।
माँ – बढ़िया रहेगा। वैसे तुम लोगो की फॅमिली बढ़ाने की क्या प्लानिंग है।
दीदी – मेरी सास तो प्रेशर बना रही है पर इन्ही का मन नहीं है। कहते हैं बच्चा हुआ तो फिर मैं इनको भूल जाउंगी।
माँ – ठीक ही कह रहे हैं, कर ले कुछ दिन और मस्ती।
दीदी – चलो माँ रखती हूँ। रात बताती हूँ अगर आने का कुछ हुआ तो।
फ़ोन कट गया और माँ बाहर आई और मुझे खाना परोस दिया। बातों बातों में उन्होंने सरला दी के आने का भी बोला। मैं पहले तो बड़ा खुश हुआ फिर ये सोच कर दुखी हो गया की माँ के साथ मस्ती नहीं हो पायेगी।
माँ ने भी हिदायत दी की सरला के सामने सही ढंग से रहना। कोई उलटी सीधी हरकत नहीं।
मैंने सोचा की अगर सरला दीदी को भी पटा लूँ तो फिर मजा ही आ जाये। वैसे भी हम दोनों एक दुसरे से खुले हुए थे। दीदी ने ढके हुए ही सही पर अपनी चूत की गरमी मुझे दिखा ही दी थी।
मैंने माँ से कहा – अगर दीदी को भी खेल में शामिल कर लू तो।
माँ – देख बातो में तू जिसको चाहे चोद ले पर मत भूल असल में चूत मिलना आसान नहीं होता। श्वेता को देखा कैसे बिदक गई। क्या सोचती होगी हमारे बारे मे।
मैं – उसकी बाद में देखूंगा , पहले सरला दी को देखते हैं।
रात दीदी का फ़ोन आया और उन्होंने बताया की उनके ससुराल वाले भेजने को तैयार हो गए है। मैं दो दिन बाद सुबह सुबह उनके ससुराल पहुंचा। माँ ने काफी सारा खाने पीने का सामान दिया था। गाओं से लाया कुछ अनाज भी मैं लेकर आया था। सबके लिए कपडे वगैरह भी थे।
जीजा जी का घर काफी बड़ा था। घर क्या हवेली थी जो चरों और से ऊँची चारदीवारी से घिरी हुई थी। तीन मंजिला मकान था। ग्राउंड फ्लोर पर किचन, डाइनिंग प्लस ड्राइंग हाल और मेहमान के लिए कमरा था। दुसरे मंजिल पर एक कमरे में दीदी के सास ससुर रहते थे और एक कमरा उनके देवर सर्वेश का था। तीसरे कमरे में उन लोगों ने सोफे, टीवी और म्यूजिक सिस्टम भी लगा रखा था। कोने में एक मिनी बार था । लगता था शाम गुजारने की जगह रही होगी। तीसरी मंजिल पर दीदी और जीजा जी का कमरा था। दूसरा कमरा खाली था और एक बड़ी सी बालकनी थी। छत खुला खुला सा था जिस पर एक झूला रखा था। उन्होंने छत पर ही खूब सारे गमले रख रखे थे और काफी खुली जगह थी। इनका घर आस पास के घरों से ऊँचा था पर फिर भी छत की बाउंड्री काफी ऊँची बनवा राखी थी।
मेरी काफी आवभगत हुई। मेरा सामान दीदी के फ्लोर पर ही खाली कमरे में रखवा दिया गया था। उनकी सास ने नास्ता करवाया और बोला की – रात भर के सफर से थके होंगे। जाकर फ्रेश हो लो और आराम कर लो। बाकी बातें खाने के बाद करेंगे। जीजा जी भी ऑफिस चले गए और सर्वेश अपने कॉलेज। मैं ऊपर कमरे में गया तो दीदी ने मुझे सब समझा दिया और कहा तू नहा ले मैं तब तक किचन का काम करवा कर आती हूँ।
घर में काम करने को नौकर थे पर दीदी को उनके साथ ही लगा रहना पड़ता था। उनकी सास हर बात पर मीन मेख निकालती थी। राजस्थान में होने की वजह से परदा ज्यादा था। दीदी को साडी पहने रहना पड़ता था और उस पर से अपने सास ससुर के सामने घूँघट। मुझे आश्चर्य हुआ की घर में फ्री रहने वाली यहाँ कैसे रह रही है। पर थोड़ी ही देर में मुझे समझ में आ गया। जब मैंने नाहा धोकर दीदी के फ्लोर का मुआयना किया तो समझ आया कि छत पर जाने कि सीढ़ी बाहर बाहर से ही है और हर फ्लोर में एंट्री के लिए दरवाजा बना हुआ है । दीदी के फ्लोर पर भी सीढ़ी के पास एक दरवाजा था। अगर वो बंद हो जाये तो वो फ्लोर एकदम प्राइवेट फ्लोर हो जाता। मैं वाकई थका हुआ था। लेटते ही नींद आ गई। कुछ देर बाद दीदी कमरे में आई और बोली – चल खाना खा ले।
निचे हम सब ने खाना खाया। खाना खाते समय ही उनकी सास और ससुर ने माँ और सुधा दीदी का हाल पुछा। मेरी पढाई का पुछा और आगे क्या करना है ये सब बात की। खाना ख़त्म हो गया पर उनकी बात ख़त्म नहीं हुई। वो मेरा पूरा इंटरव्यू ले रही थी। उनके ससुर खाना खाकर अपने कमरे में ऊपर चले गए। उनके जाते ही दीदी ने भी खाना खा लिया। फिर हमें उनकी सास ने आराम करने को कहा और खुद भी ऊपर चली गईं। मैं और दीदी भी ऊपर उनके फ्लोर पर आ गए। दीदी ने दरवाजा बंद किया और फिर अपना पल्लू सर से हटा कर कंधे पर कर लिया। कहा – जान में जान आई। बुढ़िया पका तो नहीं रही थी।
मै – अरे नहीं दीदी। वैसे भी बुढ़िया कहाँ है वो। माँ की उम्र की ही तो हैं।
दीदी – और माँ तुझे जवानो से भी जवान लगती हैं। हैं न।
मैं – माँ तो कभी बुढ़िया नहीं होंगी
दीदी – हम्म
दीदी ने मुझे अपने कमरे में ही बुला लिया। कमरे में घुसते ही दीदी ने अपनी साडी उतार दी और सिर्फ ब्लाउज पेटीकोट में आ गईं। वो पुरे पसीने पसीने हो रखी थी। शादी के बाद उनके मुम्मे बड़े हो गए थे। लगता था जीजा जी काफी मेहनत करते रहे होंगे उन पर। उनकी गांड भी उभरी हुई लग रही थी। पेटीकोट के अंदर से ही समझ आ रहा था की जंघे भी भरे भरे होंगे। कुल मिला कर सरला दी और भी गदरा गई थी।
मुझे घूरते देख बोली – ऐसे क्या देख रहा है। पहले भी तो मुझे ऐसे दख चूका है तू।
मैं – तुम्हे तो मैं उस हालत में देख चूका हूँ जिसमे शायद जीजा ही देखते होंगे। पर शरीर पहले से बदल गया है।
दीदी ने मुझे झापड़ दिखाते हुए बोला – तू बदमाश हो गया है। तुझे वो बात याद है ?
मैंने कहा – कैसे भूल सकता हूँ पहली बार किसी लड़की को उस हालत में देखा था।
दीदी शर्मा गईं। बोलीं – और मेरे शरीर का क्या कह रहा है ? मैं मोटी हो गई हूँ क्या ?
मैंने कहा – अरे नहीं। तुम एकदम भी मोटी नहीं हो बल्कि अब शरीर भरने से और भी अच्छी लग रही हो।
दीदी – हम्म तेरे जीजा की कारिस्तानी है। कहते हैं गदरा गई हो
मै – जीजा जी का ही कमाल है। सब बड़ा कर दिया है। वैसे तुम्हे अब भी वो करना पड़ता है? क्या कहते हैं मास्टरबेट। अब तो जीजा ही नहीं छोड़ते होंगे।
दीदी – बहुत बदमाश हो गया है तू। मेरी छोड़ तू अपनी बता। कोई गर्लफ्रेंड बनाई या तू मास्टरबेट करके ही काम चलता है।
मैं- कहाँ गर्लफ्रेंड दीदी। एक आध बार कोशिश की रिजेक्ट हो गया। फिर अब तो लड़कियों से दूर ही रहता हूँ
दीदी ने मेरे दोनों गाल पकडे और कहा – बेचारा मेरा भाई। कोई बात नहीं इस बार तेरा कोई जुगाड़ करती हूँ
दीदी फिर मेरे बगल में लेट गईं। मैं नहाकर सो गया था तो मुझे नींद नहीं आ रही थी। हम दोनों बातें करने लगे। बात करते करते दीदी सो गईं। मैं उनके सुन्दर गदराये बदन को निहारने लगा। उनके मुम्मे ब्लाउज से आधे निकले हुए था। उनकी साँसों के साथ जब वो ऊपर नीचे होते तो बहुत सुन्दर लगते। उनके होठ उभरे और भरे हुए थे। मन किया चूस लूँ। उनके दोनों पैर मांसल थे। गोरी तो वो थी ही।
वो सीधी सोयीं थी और मैं उनके तरफ करवट लेकर उन्हें बस निहार रहा था। मन किया मोबाइल से कुछ फोटो ले लूँ फिर सोचा घर पर बहुत मौके आएंगे। तभी दीदी ने मेरी तरफ करवट लिया और मेरे ऊपर अपना हाथ और एक पैर रख दिया। अब वो मेरे बिलकुल करीब थी। इतने करीब की मेरा लंड अपने रूप में आने लगा। उनके मुम्मे करवट की वजह से ब्लाउज से और बाहर आ गए। मेरा चेहरा बिलकुल उनके मुम्मे के पास था। अगर मैं जीभ निकलता तो उन्हें चाट सकता था। उनके शरीर से पसीने की आती खुशबु मुझे पागल कर रही थी। मैं अपने काबू से बाहर होता जा रहा था। पर मैं उनके ससुराल में होने की वजह से कुछ कर नहीं सकता था। इस हालात में मैं भी पसीने पसीने हो रखा था ।
मैं वैसे ही निस्चल पड़ा रहा। उन्हें डिस्टर्ब नहीं करना चाहता था। तभी दीदी के उठने का टाइम हुआ और उन्होंने धीरे से अपनी आँखें खोली। उन्होंने अपना पैर मेरे ऊपर से नहीं हटाया । और तो और अपने हाथ से मेरे गाल को सहलाते हुए बोली – तुम सोये नहीं थे क्या ?
मैं – इतनी सुन्दर लड़की जब मेरे बगल में हो तो नींद किसे आएगी।
दीदी मुश्कुरा कर बोली – इतनी लच्छेदार बातें करता है , कोई लड़की क्यों नहीं पटती तुझसे ?
मैं – ये बातें तो तुम सबके सामने कर लेता हूँ। बाकी लड़कियों के सामने तो मेरी फट जाती है
दीदी – ऐसा तो नहीं तुम्हे अपनी माँ बहन ही पसंद हो
मै – आप सब तो पसंद हो ही। पर दूसरी कहाँ से लाऊँ
दीदी – चल अबकी तुझे लड़की पटाना सिखाऊंगी।
शाम को जीजू और सर्वेश भी आ गए। मैंने गौर किया की दोनों अपने पिताजी के सामने तो बहुत संभल कर व्यवहार करते हैं पर उनके हटते ही फ्री होकर रहते हैं। जीजू ने दिन में ही हमारा रिजर्वेशन अगले दिन के लिए करवा दिया था। चूँकि दीदी काफी समय बाद जा रही थी और हमारे साथ सामान भी था तो हमारे आराम के लिए उन्होंने एसी फर्स्ट क्लास में टिकट करवाया था। ट्रैन अगले दिन शाम की थी। दीदी के ससुराल वालों ने बहुत सारा सामान दिया था। जीजा और सर्वेश हमें स्टेशन तक छोड़ने आये थे। हमारे कम्पार्टमेंट में दो और लोग थे। दोनों थोड़े बुजुर्ग आदमी थे। ट्रैन खुलने के बाद टिकट कलेक्टर आया। टिकट चेक किया और मुझे बाहर बुलाया। उसने कहा – देखो मेरे पास एक दो सीटों वाला कूपा खाली है। तुम दोनों पति पत्नी को प्राइवेसी भी मिल जाएगी। वो हमें नया जोड़ा समझ रहा था। समझे भी क्यों नहीं। दीदी ने बहुत ही खूबसूरत सी लाला रंग की साडी पहन रखी थी और अंचल सर पर रख रखा था। उसने कहा – इसके थोड़े एक्स्ट्रा चार्ज लगेंगे। मेरे दिमाग में ना जाने क्या आया मैं उसे पैसे दे दिए और अपना कूपा बदलवा लिया।
उसने हमारे सामान को शिफ्ट करने में भी मदद की। दीदी तो दो सीट वाला प्राइवेट कूपा देख खुश हो गई। थोड़ी देर में पैंट्री वाला चाय भी दे गया। दीदी ने उसे खाने के लिए मना कर दिया था क्योंकि घर से काफी कुछ लेकर आई थी। हमारी ट्रैन हमारे स्टेशन पर अगले सुबह दस बजे पहुँचती। हमारे पास लगभग पूरी रात थी।
उसके जाते ही दीदी ने डोर को लॉक कर दिया।
उन्होंने मुझसे कहा – बत्ती बुझा दे।
मैंने कहा – क्यों ?
उन्होंने कहा – जितना कहूँ उतना सुन। साथ में परदे भी ठीक से लगा दे।
मैंने बत्ती बुझा दिया। थोड़ी ही देर में मेरी आँखे अँधेरे में एडजस्ट हो गई। मुझसे समझ आ गया था की दीद कपडे बदल रही हैं। पर उन्होंने दुसरे कपडे बैग से निकाले नहीं थे। मुझे लगा की वो फिर से दोपहर वाले रूप में आएंगी। पर थोड़ी देर बाद उन्होंने लाइट जलवा दी। लाइट के जलते ही जब मैंने उन्हें देखा तो मेरे होश उड़ गए।
दीदी ने अपनी साडी ही नहीं पेटीकोट भी उतार दिया था। ऊपर सिर्फ ब्लाउज में थी। निचे उन्होंने एक चुस्त टाइट स्किन फिटिंग वाली पेंट पहन राखी थी जो उनके जांघो तक थी। एक तरह से जिम का पेंट या स्विम सूट जैसा बड़ा पेंट।
मेरा मुँह उनको देख कर खुला का खुला ही रह गया।
मुझे ऐसे देख उन्होंने कहा – क्या हो गया ? कभी लड़की नहीं देखि क्या ? अरे यार इस साडी और घूँघट से तंग आ गई हूँ। अब कुछ दिन तो फ्री रह लूँ।
मैंने कहा – लड़की देखि है पर ऐसी माल लड़की नहीं देखि।
दीदी – अब देख ले।
उन्होंने अपनी साडी और पेटीकोट तह करके बैग में रख दिया और बैग से एक पतला सा कॉटन का वेस्ट निकाला और एक टी-शर्ट और पेंट।
वेस्ट एकदम पतला था। शादी से पहले सुधा दी और सरला दी खूब पहनती थी। हम तीनो की कोई देखे तो कहे की तीनो ने बनियान पहन राखी है। इनकी वेस्ट पतली और जाली दार थी। कंधे पर बस एक डोरी थी।
दीदी ने फिर कहा – की जरा आंक बंद कर
मैंने आँख बंद तो की पर पूरी नहीं , झिल्ली बना कर देखता रहा।
दीदी ने मेरी तरफ पीठ कर लिया और अपना ब्लॉउस भी उतार दिया फॉर उन्होंने पीछे मुड़ कर वेस्ट डाल लिया।
उनके कहने पर मैंने आँखे खोल ली। दीदी ने कहा सुबह फुल ट्रॉउज़र और टी-शर्ट डाल लुंगी। रात ले लिए यही काफी है। मेरे लिए सच में ये काफी था। दीदी का गदराया बदन इन कपड़ो में पूरा नुमायां हो रहा था। छोटे से टाइट पेंट में उनका पिछवाड़े का पूरा उभरा उभरा सा बाहर आया था। आगे पेंट इतना टाइट था की उनकी चूत का पूरा शेप दिख रहा थ। क्या कहते है वो कैमल टो। ऊपर उन्होंने ब्रा टो पहना था पर डिज़ाइनर ब्रा उनके वेस्ट में दिख ही नहीं रहा था। वेस्ट डीप नैक था तो उनके मुम्मे के बीच की गहरी क्लीवेज दिख रही थी। मुझे फिर से ऐसे देख दीदी ने कहा – ताड़ लिया। कर ली नपाई। अब जगह दे। रुक उससे पहले चादर तो बिछा ले।
फिर उन्होंने मुझे साइड किया और पहले सीट पर चादर बिछाई और एक चादर ओढ़ने के लिए रख लिया। झुक कर जैसे ही वो चादर बिछाती उनके मुम्मे लगते बकी निकल कर बाहर आ जायेंगे।
हम दोनों सीट पर फिर बैठ गए। थोड़ी देर तक हमने बातें की फिर दीदी बोली – सुन मुझे नींद आ रही है थोड़ा खिसक। अब मैं खिड़की की तरफ आ गया और दीदी ने एक तकिया मेरे पैरों के पास रखा और मेरी तरफ सिर कर के सो गई। वैसे तो उन्होंने चादर ले रखा था पर चादर सिर्फ कमर तक था। लेटने से उनके मुम्मे फिर से बाहर आने को बेचैन हो गए। उनकी क्लीवेज देख मेरा लैंड खड़ा होने लगा।
तभी दीदी ने कहा – तुझे गरमी नहीं लग रही। शर्ट उतार दे। आराम से बैठ। रात अपनी है।
मैंने भी शर्ट उतार दिया और सिर्फ बनियान में आ गया।। देखा देखि मैंने पेंट भी उतार दिया और सिर्फ बरमूडा पर आ गया। ट्रैन में नॉर्मली मैं ऐसा करता था। सोने से पहले बाथरूम में जाकर फुलपैंट उतार बरमुडे में ही सोता था। तो मेरे लिए कोई नै बात नहीं थी।
दीदी फिर सो गई और हाथ ऊपर करके मेरा हाथ अपने अपने हाथो में कर लिय। उसे चूम कर बोली – मेरा प्यारा भाई। सुन, नींद आये तो बता देना मैं खिशक जाउंगी। यहीं सो जाना। ऊपर तो सारा सामान रखा है।
थोड़ी देर तक तो मैं अपने आपको एडजस्ट करने में लगा रहा। माँ को तो अक्सर टॉपलेस देखा था पर यहाँ दीदी ने जो कपडे पहन रखे थे वो किसी भी मर्द का लंड खड़ा करने के लिए पर्याप्त थे। ऐसी स्थिति में देख कर तो कई मुठ मारना भी शुरू कर देते। पर मैं लाचार था। मेरा लंड नहीं। वो तो सर उठाने को तैयार था। वो भी बरमूडा फाड़ बहन को देखने के लिए उतारू था। पर मैं उसे समझा रहा था। जल्दीबाजी नहीं।
कुछ देर बाद दीदी अभी सोइ ही थी की कोच का एसी बंद हो गया। शायद कोई खराबी आ गई थी। मै धीरे से उठ कर गया और अटैंडैंट से पता किया तो पता चला की एसी में कुछ गड़बड़ी हो गई है और तकनीशियन ठीक करने की कोशिश कर रहा है। एक आध घंटे में ठीक हो जाना चाहिए था।
मैं अंदर आया तो दीदी जग गई थी मैंने उन्हें एसी के खारब होने की बात बताई। वो थोड़ा दुखी तो हो गई पर बोली – क्या ही कर सकते हैं। वो फिर से लेट गई। पर अबकी वो मेरे गोद पर सर रख ली। मुझे गर्मी होने लगी और मैं पसीने पसीने हो गया। दीदी का स्लिप भी भींग गया था। मैंने अपना बनियान भी उतार दिया। दीदी ने मेरे पेट की तरफ अपना मुँह कर लिया था और मेरी कमर को बाँहों से पकड़ लिया था। एक तो एसी न चलने की वजह से गरमी और इस पर से एक गदराया माल मेरे ऊपर इस हालत में थी उसकी गरमी। मेरी धड़कन और लंड दोनों काबू से बाहर रहे थे। मुझसे कोई गलती न हो जाए ये सोच कर मैंने अपनी आँखे बंद कर ली थी। तभी मुझे लगा की जैसे दीदी ने मेरे पेट पर जीभ फेरा हो। मैंने आँखे खोल दी और निचे देखा तो पाया की दीदी मुस्कुरा रही थी और मेरे पेट पर टपकते पसीने को चाट रही थी। मैं भौचक था। दीदी – अरे यार बहुत दिनों बाद नमकीन पानी मिला है। तेरे पसीने में तो एकदम स्वाद है। कहकर वो फिर से पसीना चाटने लगी। अब वो थोड़ा उठकर मेरे सीने को भी चाटने लगीं। मुझे याद आया की माँ को भी पसीने का स्वाद पसंद है। शायद मुझे भी पसंद था।
तभी मैं माँ को चाटता तो अजीब सा नशा चढ़ जाता था। अब दीदी उठ कर बैठ गई थी। उन्होंने मुझे सीट पर मेरा पैर फैला कर बिठा दिया था और खुद अपनी दोनों टांगो को मेरे दोनों तरफ करके मेरे गोद में बैठ कर मेरे चेहरे, गले कंधो और बगलो को बारी बारी से चूमने चाटने लगी। मुझे समझ नहीं आ रहा था की क्या करूँ। एक बार जब वो मेरे चेहरे के पास आई तो मैंने उन्हें होठो पर किस कर लिया। दीदी ने भी मेरे होठ दबोच लिए और एकदम से काटने लगी। एकदम जंगली सी हो गई थीं। मेरा सारा पसीना चाटने के बाद दीदी ने कहा तुझे भी चाहिए।
मुझे तो कब से चाहिए था। मैंने एकदम छोटे बच्चे जैसा चेहरा बना कर हां में सर हिलाया।
हमने अपनी जगह बदल ली थी। अब दीदी टाँगे फैलाये बैठी थी और मैं उनके ऊपर था। मैंने पहले उनके चेहरे को चूमा और चाटा। फिर गर्दन और कंधे चाटने लगा। फिर दीदी ने अपनी बाहें ऊपर कर ली मैं उनके बगलों में घुस गया। दीदी पूरी चिकनी हो रखी थी। कहीं भी बालों का नामों निशाँ तक नहीं था। अब बगले चाटने के चक्कर में मेरा हाथ दीदी के मुम्मे पर लग रहा था। पर मैं उन्हें पकड़ने से अवॉड कर रहा था। दीदी ने फिर मेरा हाथ लिया और मुम्मे पर रख दिया।
कहा – आराम से पी। चाट जा मेरे शराब को भाई। इसमें जो नशा है कहीं नहीं। आह आह।
मैं अब उनके क्लीवेज को चाटने लगा। मैंने दोनों हाथो को उनके दोनों मुम्मो पर रखा और उन्हें दबाते हुए उनकी गहराइयाँ अपने जीभ से नापने लगा। निचे मेरा लंड बाहर आकर उनकी चूत से दोस्ती करने में लगा था। पर मैं डरा हुआ था। हर एक स्टेप धीरे धीरे लेना चाहता था।
मैं थोड़ा निचे सरका और दीदी के स्लिप को ऊपर करके उनके पेट पर जीभ फेरने लगा। उनकी बड़ी बड़ी नाभि के चारो और मैं जीभ फिर कर चूमा चाटी कर रहा था। मैं उनकी चूत की तरफ बढ़ना चाह रहा था जो पहले से पनिया चुकी थी।
तभी दीदी ने मुझे रोक दिया और कहा – बड़ा चटोरा है रे तू। क्या नशा दिया है तुमने। शादी से पहले तो मैं ऐसा नशा खूब करती थी। पर तेरे जीजा को यही एक चीज पसंद नहीं है।
मैं – तब किसको चाटती थी तुम दी ?
दीदी – भाई तुझे पता नहीं माँ को मेरे पसीने से नशा होता था और मुझे उनके। गर्मियां तो मस्त बितती थी।
मैं – और सुधा दी ?
सरला दी – उन्हें पसीना चाटना पसंद नहीं था पर मुझसे खुद की सफाई करवा लेती थी। बड़ी हरामी थी। कुछ और ही नशा था उनको
मै – क्या ?
सरला दी – सब आज ही जान जायेगा क्या ? देख तेरा छोटू खड़ा हो गया है।
मैं – अंदर और बाहर की इतनी गर्मी में परेशान नहीं होगा तो क्या होगा। काश उसका रास भी कोई पी जाता।
सरला दी सीट से उठी और बोली – चल तू भी क्या याद रखेगा। कहकर वो नीचे उंकड़ू बैठ गई और मेरे बरमुडे से लंड निकाल कर अपने मुँह में भर लिया। दीदी ने उसे पहले लॉलीपॉप की तरह ऊपर से नीचे तक चाटा और उसके टोपे की किस करके बोली – काफी बड़ा कर लिया है तूने हथियार। ताज्जुब है कोई लौंडिया पटी नहीं कैसे ?
मैं – देखे तो पटे न दी।
दीदी – हम्म फिर वो सडप सडप करके मेरे लंड को अपने मुँह में अंदर बाहर करने लगी। मैं पहले से ही इतना उत्तेजित था की कुछ ही देर में मेरे लंड साहब शहीद होकर अपना पानी उनके मुँह में उड़ेल दिए। दीदी ने भी उसे पूरा निगल लिया और कहा – बड़ा स्वाद है रे तेरे पानी में।
मैंने रिलैक्स होते ही आँखे बंद कर लिया था। तभी आह आह आह सससस ससस की आवाज आने लगी। मैंने देखा दीदी ने अपना हाथ शार्ट पेंट में घुसाया हुआ था और चूत में ऊँगली कर रही थी। उनकी नशीली आँखे मुझे देख रही थी। बड़बड़ा रही थी – सससस आह आह मेरी मुनिया बस कर कितना रोयेगी। चिंता मत कर शांत तो कर रही हूँ न। आह आह चुद जा , चोद चोद। ले मेरी ऊँगली। खा जा
मुझसे रहा नहीं गया – मैंने कहा दीदी मैं थोड़ी सेवा कर दूँ। मुझे भी तुम्हारा पानी पीना है।
दीदी – ससससस ससससस राजआज। आह आह। सब पहले ही दिन करेगा क्या मेरे भाई। समय आने दे। तेरी दीदी सेवा का मौका देगी। आह आह आह साली चूत बहुत परेशान कर रही है। आआह आआह। झड़ी रे। कोई पार लगा दो। माआआ अअअअअ उफ्फ्फफ्फ्फ़
फ़क फ़क फ़क फ़क मी। फिर दीदी का पूरा शरीर कांपने लग। कुछ देर के कम्पन के बाद वो शांत हो गई। मैं बूत बना उस कामुक सीन को देख रहा था। झड़ने के बाद दीदी ने अपनी ऊँगली निकाली और मेरी तरफ करके बोली – लेले अपनी दीदी का स्वाद।
मैं मूढ़ उनके बगल में बैठ उनकी ऊँगली में लगे रास को चाटने लगा। उनकी ऊँगली एक नमकीन आइसक्रीम जैसी लग रही थी। पहले पसीना , फिर दीदी की चूत का पानी। मुझे तो लगा की मैं अभी अभी बियर पी कर बैठा हूँ। हल्का हल्का शुरुर छाया हुआ था।

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