कुछ देर बाद मैं और मुनमुन कमरे से बाहर निकले तो देखा श्वेता ट्यूबवेल में नाहा रही थी। उसने सिर्फ ब्रा और पैंटी पहनी हुई थी उसे देख मैं भी नंगा होकर पानी में कूद गया। मुनमुन ने सिर्फ पेटीकोट लपेटा हुई था। उसने हमें नहाते देखा तो उसने भी अपना पेटीकोट उतार दिया और नंगे ही अंदर आ गई। मैंने ट्यूबवेल के पानी में उसकी एक बार और चुदाई की। उसे चोदते समय मुझे गोवा की याद आ गई। कैसे वहां स्विमिंग पूल में सब लगे हुए थी।
कुछ देर बाद मस्ती करके हम सब घर की ओर चल पड़े। अभी खाना खा ही रहे थी कि माँ को फ़ोन आ गया। उन्होंने एक बुरी खबर सुनाई। सरला दी का मिसकैरेज हो गया था। सरला दी का हाल तो काफी बुरा था। अर्ली मिसकैरेज बहुत बड़ी बात नहीं थी पर मानसिक रूप से सरला दी टूट गई थी। डॉक्टर ने उन्हें कुछ दिन आराम करने को कहा था। उनकी सास और जीजा जी उनका पूरा ख्याल रख रहे थी। माँ और सुधा दी काफी स्ट्रेस में थीं। उन्होंने मुझे तुरंत बुलाया लिया। चाची ने तो तयारी पहले से कर रखी थी। चाची ने दुलारी और रजनी को बुला कर सब समझा दिया। उन्हें बता दिया की चाचा को समय पर खाना मिलते रहे और घर के सारे काम होते रहें।
कुछ देर बाद हम तीनो मेरी गाडी से शहर के लिए निकल पड़े। टेंशन की वजह से मैंने गाडी ज्यादा नहीं रोकी। समय कैसे बीता पता भी नहीं चला। हम आधी रात के बाद घर पहुंचे। वहां हम तीनो को देख सुधा दी और माँ ने राहत की सांस ली। ख़ास कर सुधा दी ने।
अगले दिन मैंने श्वेता को उसके कॉलेज छोड़ दिया।
चाची के आने से सुधा दी को ही नहीं माँ को बह आराम हो गया था। एक हफ्ते के अंदर मैंने उन्हें डॉक्टर को दिखाया। सब ठीक था। डॉक्टर ने काफी प्रीकॉशन बोला था। कुछ सप्लीमेंट्स और दवाइयां थी वो समय पर लेनी थी। उसका ख्याल हम तीनो मिलकर रख रहे थे। मैं और सुधा दी एक साथ ही सोते थे। कभी कभी वो माँ के साथ सो जाया करती थी।
मैं भी कॉलेज में बीजी हो गया। आखिरी साल था। मैंने ये सोच रखा था कि ग्रेजुएशन के बाद कुछ बिज़नेस करूँगा साथ ही डिस्टेंस लर्निंग से एमबीए भी कर लूंगा। मैंने कुछ बिज़नेस आईडिया सोच रखा था। पैसे की दिक्कत नहीं थी। मैंने कुछ एक फ्रेंचाईज का भी पता किया था और साथ ही होलसेल बिजनेस का पता कर रहा था। दीदी की तबियत और इन सबके बीच मैं इतना उलझा हुआ था कि सेक्स दिमाग में आ ही नहीं रहा था। मैं सुबह निकलता तो शाम तक बिजय रहता। फिर घर में अपने लैपटॉप में बिजनेस से रिलेटेड रिसर्च में लग जाता।
कुछ एक महीने बाद जब सरला दी की तबियत सुधरी तो माँ ने उन्हें बुलाया। सरला दी के परिवार वाले राजी हो गए। वो वहां दुखी रहती थी। उन्होंने सोचा शायद जगह बदल जाएगी तो उनका मन ठीक हो जायेगा। सरला दी जीजा जी के साथ आई। मैं स्टेशन लेने गया था। जब दोनों ट्रेन से उतरे तो सरला दी को देख कर मैं पहचान ही नहीं पाया। चेहरा उतरा हुआ था। दीदी का गोरा चेहरा एकदम से सांवला सा हो रखा था। दीदी गदराई बदन वाली दीदी मोटी हो गई थी। मुझे देखते ही वो मुझसे लिपट कर रोने लगीं। उनको रोता देख मेरे आंसू निकल आये।
जीजा जी ने माहौल हल्का करते हुए कहा – इतना जोर से गले तो तुम मुझसे भी नहीं लगती। किस्मत है तुम्हारी भाई।
मैं हंस पड़ा। मैंने भी मजाक में कहा – सूमो से गले लगने में मजा नहीं आता है। जान निकल जाती है।
दीदी ने मुझसे अलग होते हुए कहा – क्या कहा ? सूमो ?
मैं – और क्या ? पहलवान हो गई हो।
दीदी ने मुझे मुक्के मारते हुए कहा – चल घर बताती हूँ। वहीँ तेरा गाला दबा दूंगी।
जीजा – उसके लिए घर तो चलना पड़ेगा।
हम तीनो घर के लिए चल पड़े। मैंने दीदी से कहा – वहां अब मत भेंटने लग जाना।
दीदी – मेरी मर्जी।
खैर दीदी के घर पहुँचने पर थोड़ा रोना धोना तो हुआ। पर उन्होंने अपने आपको संभाल लिया था। जीजा जी भी थे तो सब उनकी खातिरदारी में लग गए। जीजा जी चाची की तरफ बार बार देख रहे थे। शादी के बाद पहली मुलाकात थी। शादी ब्याह में वैसे ही कौन ठीक से मिल पाता है।
जीजा जी को ताड़ते देख सरला दी बोल पड़ी – चाची तुम्हारे आशिकों की संख्या बढ़ती जा रही है।
चाची शर्मा कर बोली – चुप कर , कुछ भी बोलती है। दामाद जी के जवान सालिया हैं। हम बुढ़िया पर नजर क्यों डालेंगे।
शलभ जीजा भी कहाँ मानने वाले थे। उन्होंने कहा – अरे सालिया इतनी सुन्दर हैं क्योंकि आप सब सुन्दर हैं। और आप बूढी कहाँ हैं ?
सरला दी – हाँ हाँ , जिसकी माँ अब भी जवान हो उसे सब जवान ही दीखते हैं।
शलभ जीजा जी न गाला खखारा और कहा – हम्म्म हम्म श्वेता कहा है ?
सुधा दी – अरे अभी कुछ दिन की छुट्टी लेकर गाओं गई थी। कॉलेज में बीजी है।
सरला दी – अफ़सोस आपकी मुलाकात नहीं हो पायेगी। कहिये तो मामी को बुला लू। वैसे कोई फायदा नहीं है वो भी प्रेग्नेंट हैं। प्रेग्नेंसी की बात करके वो फिर दुखी हो गई।
हम सबने फिर तुरंत टॉपिक चेंज कर लिया। जीजा के साथ हंसी मजाक चलता रहा। उन्हें रात को ही लौटना था। मैंने उन्हें स्टेशन पर ड्राप कर दिया।
जब लौट कर आया तो देखा तो सब खाने पर मेरा इंतजार कर रहे थे। जैसे ही खाना निकलना शुरू हुआ मैंने माँ से कहा – अरे सरला दी को कम कर देना, पहलवान हो गई है।
सरला दी मेरी तरफ चम्मच फेंक कर बोली – तेरी तो मैं जान ले लुंगी।
मैं – हाँ तुम अब किसी के भी जान ले सकती हो।
माँ ने मुझे डांटते हुए कहा – खबरदार जो मेरी बेटी को मोटा या पहलवान बोला तो। स्वस्थ रहना चाहिए।
इसी चुहलबाजी के साथ ही हमने खाना ख़त्म किया। खाने के कुछ देर बाद मैंने सरला दी से कहा – चलो सूमो टहल कर आते हैं।
दीदी चिढ़ गई। उन्होंने गुस्से से कहा – कितना बद्तमीज हो गया है। भूल गया है की तू मुझसे छोटा है। अभी कुछ दिनों पहले तक नाम तक नहीं लेता थ।। दीदी दीदी करता था अब मुझे चिढ़ा रहा है।
मैंने कहा – अच्छा , लगता है भूल गई कि सिर्फ छोटा भाई ही नहीं हूँ तुम्हारा जीजा भी हूँ मैं।
ये सुन सुधा दी शर्मा गई। सरला दी का गुस्सा भी ख़त्म हो गया। हँसते हुए बोली – ऐसे तो तू मेरा बाप भी हो गया है और चाचा भी।
मैंने कहा – लगता है तुम भूल गई। इन सबसे पहले मैं तुम्हारा खसम भी हूँ। वो जीजा के चक्कर में पड़ वार्ना ~~
मैं चुप हो गया। सुधा दी को लगा कि सरला दी फिर से नाराज हो जाएँगी। उन्होंने कहा – जाओ टहल आओ।
सरला दी ने कहा – तुम भी चलो। सुधा दी ने मना कर दिया। कुछ देर बाद मैं और सरला दी निकल पड़े। कालोनी में ही बड़ा सा पार्क था। हम वहीँ टहलने लगे।
मैंने दीदी से कहा – सॉरी यार। प्लीज मेरी बात का बुरा नहीं मनना।
दीदी ने मेरा हाट अपने हाथो में ले लिया। बोली – नहीं अपने खसम की बात का बुरा क्यों मानूंगी। तेरी वजह से आज थोड़ा मूड हल्का हुआ।
मैं – दीदी वहां सब ख्याल तो रखते थे न ?
सरला दी – दीदी क्यों बोला? नाम ले।
मैं हँसते हुए – अच्छा सरला कहूंगा। अब ठीक। जवाब तो दो।
सरला दी – हाँ , सब ख्याल रखते हैं। सब बड़े अच्छे हैं।
मैं – हम्म एक बात पूछूं ?
सरला दी – हाँ पूछ।
मैं – वो तुम जीजा और उनकी माँ के बारे में क्या कह रही थी ? और जीजा को हमारे बारे में सब पता कैसे चला ? और उसके बाद भी उन्हें कोई दिक्कत नहीं।
सरला – तू फिर कहानी सुनेगा? पार्क में सुनकर चोदने लग जायेगा। घर चल कर सुनाऊँगी। अभी टहल लेते हैं।
मैं – फिर भी ?
सरला दी – बस ये जान ले उनकी फॅमिली भी हमारी तरह ही है। बस दोनों की सगी बहन नहीं है। पर माँ है और एक बुआ हैं और उनका परिवार है ।
मैं – बुआ ? उनसे तो मैं मिला नहीं।
सरला दी – तू आया कितने दिन के लिया था। जब तू आया था तो उनकी तबियत ठीक नहीं थी। वरना वो लगभग रोज आती हैं। आराम से उनकी कहानी बताउंगी।
मैं – ठीक है।
सरला दी – और सुना श्वेता के साथ कैसी चल रही है ? चाची बता रही थी काफी हद तक आगे बढ़ चुके हो ?
मैं – कहाँ काफी। बस किस इस किया है ।
सरला दी – टेंशन नहीं लेने का। तेरे लंड से कितने दिन तक बचेगी ।
मैं – देखते हैं।
हम दोनों ऐसे ही बातें करते करते टहलते रहे और फिर घर आ गए।
लौट कर आये तो देखा किचन में माँ और चाची बचा हुआ काम निपटा रहे थे। माँ ने एक नाइटी डाल राखी थी और चची ने साडी। माँ ने निचे कुछ नहीं पहना हुआ था तो उनके चलने से पूरा पिछवाड़ा हल रहा था। दीदी ने दोनों को देखते ही कहा – देख तेरी गदराई मस्त गायें।
मैंने कहा – मस्त तो तुम भी हो गई हो। देह तो तुम्हारा भी भरा गया है।
दीदी – अरे मैं तो फूल गई हूँ।
मैं – अब ठीक हो जाओगी।
दीदी मुश्कुरा कर किचन की तरफ बढ़ गई। उन्होंने माँ के पास जाकर उनके चूतड़ पर एक चांटा मारते हुए कहा – क्या रांड क्या कर रही है।
माँ चौंक गई , बोली – ये क्या बदतमीजी है।
चाची मुँह दबा कर हंसने लगी।
दीदी ने उन्हें पीछे से पकड़ लिया और उनकी चूची दबाते हुए बोलीं – अब तुम्हारे जैसी मस्त माल को और क्या कहें। लंड होता तो तुम्हारी गांड मार लेती।
चाची ने दीदी को बेलन देते हुए कहा – ये है न , फ्रिज में गाजर , खीरा और मूली भी है। हीहीहीहीहीही।
दीदी ने अब चाची के गांड पर एक चांटा मारा और कहा – तुम्हे बड़ी खुजली हो रही है चाची। लगता है गाँव में राज ने खातिर नहीं की।
चाची भी कहाँ चुप रहने वाले थ। उन्होंने कहा – गाँव में तो लल्ला को फुर्सत कहा थी। नई चूत मिली हुई थी।
दीदी ने ब्लाउज के ऊपर से ही उनके निप्पल उमेठ दिया और कहा – तो तुम्हारी गर्मी गई नहीं। बोलती हूँ राज को प्यास बुझा दे ।
चाची – मुझे तो लग रहा है प्यासा कोई और है। हम तो बस बहाना हैं।
तब तक माँ अपना काम ख़त्म करके मेरे पास सोफे पर आ चुकी थी। सुधा दी भी सरला दी के बातों से मजे ले रही थी। मैंने माँ के गोद में सर रखा हुआ था।
माँ – कितना अच्छा लग रहा है न सरला को मस्ती करते देख कर। बड़ी परेशान हो गई थी मैं उसकी हालत देख कर।
मैं – सब ठीक हो जायेगा।
माँ मेरे बालों में हाथ फेरने लगी थी। सरला दी और चाची की जल्दी से बाकी काम ख़त्म किया और मेरे लिए और सुधा दी के लिए दूध का ग्लास लेकर आईं।
चाची ने कहा – लो लल्ला दूध पी लो।
मैंने चाची को पकड़ कर अपने बगल में बिठा लिया और कहा – दूध आप पिलाओ तो पी लूँ।
चाची – अब सात आठ महीने रुक जाओ , ताजा ताजा दूध पीना अपनी बहन का।
मैं – अभी का क्या ?
चाची लगता था सच में प्यासी थी। उन्होंने झट से अपना ब्लाउज खोलना शुरू कर दिया। कहा – लो पी लो।
माँ वहां से उठ कर दुसरे सोफे पर बैठ गई। मैं अब चाची के गोद में था। उन्होंने अपने साडी का पल्लू हटा दिया और ब्लॉउस खोल कर अपना मुम्मे मुझसे सौंप दिए। सरला दी भी गरम हो रखी थी। वो भी चाची के पास आ गई। चाची किचन में काम करने की वजह से पसीने पसीने हो रखी थी। सरला दी ने अपनी जीभ निकाल लिया और उनके गाल चाटने लगीं। पसीना देखते ही उनके मुँह से लार टपकने लगता था। चाची ने ब्लाउज के हुक खोले थे। दीदी ने उसे पूरा ही उतार दिया और उनके बदन को कुतिया की तरह चाटने लगीं।
चाची – इस्सस जिज्जी तुमने क्या औलाद पैदा किये हैं। एकदम हवसी।
माँ – तू काम है क्या ? कपडे उतार झट से नंगी हो गई और हमें कह रही है।
चाची – आह, इनके लिए मैं रंडी भी बन जाऊं। इतना मजा देते हैं।
हम तीनो को देख सुधा दी भी अपने आपको रोक नहीं पाईं, खास करके सरला दी को देख कर। वो सोफे से उठकर माँ के पैरों के पास जमीन पर पालथी मार कर बैठ गईं। उन्होंने माँ के नाइटी उनके घुटनो पर चढ़ा दिया और उसमे घुस गईं।
माँ – तू भी ?
सुधा दी – बहुत साल हो गए माँ तेरा रस पिए।
माँ ने प्यार से दीदी के सर पर हाथ फेरते हुए कहा – पी ले। सब तेरा ही है।
सुधा दी माँ की चूत पर अपनी जीभी फिराने लगीं। सरला दी चाची के शरीर के ऊपरी हिस्से को चाटने के बाद माँ के पार पहुँच गई और उनके चेहरे को किस करने के बाद उनके चेहरे पर जीभ लगा चाटने लगीं। चाची ने अपना हाथ बढ़ा मेरे लंड को पकड़ लिया और उससे खेलने लगी।
मैं चाची में मुम्मे और पेट से खेलने लगा। पेट पर लगे पसीने को पीकर मुझे भी मजा आ रहा था। थोड़ी देर बाद सरला दी मेरे पास आई और मेरे लंड को अपने मुँह में डाल कर चूसने लगी।
अब तक माँ पूरी तरह से उत्तेजित हो रखी थी। उनकी सिसकारियां बढ़ती जा रही थी।
माँ – आह , इस्सस सुधा , जरा मेरे छोटी सी मुनिया को भी चूस , आह हां , खा जा उसे। उफ़ उफ्फ्फ
माँ अपने दोनों हाथों से दीदी के मह को अपने चूत पर सटा लिया था और कमर इस तरह से हिला रही थी जैसे वो उनके मुँह को चोद रही हों।
सुधा दीदी माँ की चूत को और सरला दी मेरे लंड को चूसे जा रही थी।
माँ – आह आह , एक ऊँगली डाल न। हां ऐसे ही। आह आह। तू मेरी रानी बिटिया है।
उधर चाची अब चुदने को तैयार थी।
चाची – लल्ला , कितना दूध पियोगे? आह , बस अब बर्दास्त नहीं हो रहा है।
मुझे भी बस चूत चाहिए थी। मैंने उठ गया। मैंने चाची को सोफे से उतार सेंटर टेबल से टिका कर कुतिया बना दिया और पीछे से अपना लंड डाल दिया।
मैं – अब सही है न चाची , लौड़ा ही चाहिए था न।
चची – हाँ लल्ला , बस जोर से पेल दो। मेरी चूत की खुजली मिटा दो। गाँव से आई थी की रोज चुदुँगी पर मौका ही नहीं मिल रहा था।
माँ – मुझसे पता था तू इसी लिए आई है। लंडखोर है एक नंबर की।
चाची – दीदी तुम्हारी तो मौज है। जब चाहो तब मिले जाता है। मेरा सोचो मैं कितनी प्यासी हूँ। मुझे कोई शर्म नहीं कहने में लल्ला से छोड़ने में मुझे बहुत मजा आता है। रोज चोदे तो कोई दिक्कत नहीं है।
माँ – फाड़ दे इसकी चूत राज , बहुत चुदास हो रखी है।
मैंने चाची के बाल पकड़ लिया और ऐसे पेलने लगा जैसे घोड़े की सवारी कर रहा हूँ। चाची तो मजे में थी। सरला दी सोफे पर बैठ अपनी ही चूत में ऊँगली किये जा रही थी।
कुछ देर की जबरदस्त चुदाई के बाद चाची तो धराशाही हो गईं। वो बोली – बस लल्ला मेरा तो हो गया।
मैंने चाची को छोड़ दिया और सरला दी को वहीँ सोफे पर लेता दिया। सरला दी – मुझे लगा मुझे भूल गया।
मैं – सबसे पहले तुम्हारी ही चूत ली थी मैंने। तुम्हे कैसे भूल सकता हूँ। कहो तो तुम्हे माँ बना दूँ।
सरला – आह आह पहले मेरी प्यास बुझा। अब फ्री रहूंगी। तेरी रहूंगी। बस चुदाई। माँ बाद में। पहले पेल मुझे। जोर से पेल बहनचोद।
दीदी की चूत भी गीली हो राखी थी। उनको चोदने पर फच फच की आवाज आ रही थी। कुछ देर की जबरदस्त चुदाई के बाद हम दोनों एक साथ ही झाड़ गए। मैं उनके ऊपर ही लेट गया।
चाची ने कहा – चुदाई के चक्कर में दूध ठंढा हो गया। मैं गरम करके लाती हूँ।
उस रात सरला दी और सुधा दी एक साथ सोईं। मैं, माँ और चाची के साथ था। रात मैंने माँ को भी चोदा। मेरे मजे थे अब। घर में चुतों का अम्बार था। मैं जब चाहे जिसे भी चोद सकता था। बस एक चूत थी जो अभी हाथ में नहीं आई थी वो थी श्वेता की। पर मुझे पता था की जल्दी ही वो भी मुझसे चुदने को तैयार हो जाएगी , उसकी भूमिका इस बार गाँव की यात्रा में बन चुकी थी।
अब मेरी मौज हो गई थी। घर में तीन तीन गदराई माल थी चोदने को। सरला दीदी और अपने लिए मैंने छत वाले कमरे में ही जिम सेट कर लिया था। हम दोनों सुबह और शाम करीब एक एक घंटे जिम करते थे। वाक पर कभी कभी सुधा दीदी भी चली आती थी। सरला दीदी के शरीर का एक्स्ट्रा फैट काम होने लगा था।
श्वेता गाँव से लौटने के बाद घर नहीं आ पाई थी। कॉलेज में काफी बिजी थी। पर फ़ोन पर काफी बातें होती थी । करीब पंद्रह दिन बाद कुछ छुट्टी थी तो उसने कहा घर आएगी। सरला दी ने कहा वो भी उसे लेने चलेंगी । उसी बहाने वो दीप्ति मैम से भी मिल लेगी। फिर मैंने उन्हें बताया की उनकी लड़की तारा भी यहीं आई हुई है। दीदी ये सुन काफी खुश हो गईं। रास्ते में हम बात करते रहे।
मैंने उनसे पुछा – वो तारा से मिली हैं ?
दीदी ने कहा मैम के घर के लगभग हर सदस्य को जानती हैं।
मैं – तारा आपके और दीप्ति मैम के बारे में जानती है ?
दीदी – शायद हाँ।
मैं – उसे ये सब जानकार अजीब नहीं लगा ?
दीदी – हर घर के राज होते हैं। तारा समझदार है। उसके भोलेपन पर मत जाना।
मैं – हम्म
दीदी – रुक, कहीं तू उसे पटाने को तो नहीं सोच रहा ?
मैं – छोटी है, अलग है। काफी सुन्दर है। मुझसे जब सामान्य लड़कियां नहीं पटती तो वो क्या पटेगी।
दीदी – श्वेता तो पट गई न। वो हमारी श्वेता से सुन्दर थोड़े ही है।
मैं – तुम सच कह रही हो। श्वेता से सुन्दर तो नहीं है। पर श्वेता पूरी तरह से नहीं पटी है। बल्कि तारा को पटाने का चैलेंज उसी ने दिया है।
दीदी – क्या मतलब?
मैंने फिर दीदी को गाँव का पूरा किस्सा सुनाया। ये भी बताया की श्वेता ने पहले तीन कुँवारी चूत का चैलेंज दिया है , तब वो अपना देने को सोचेगी। उसमे से एक तारा भी है।
दीदी ने कहा – तीन कौन से ऑप्शन हैं ?
मैं – एक काजरी थी। पर मौका चूक गया। दोबारा गाँव जाने पर बची रहेगी या नहीं , पता नहीं। उसका गौना होने वाला था।
दीदी – बाकी दो ?
मैं – सुधा दी की ननद सोनिया , पर वो तो नाराज हो गई। उसके मिलने के भी चांस कम ही है। ले दे के तारा बची है। जल्दीबाजी में कोई कदम उठा कर इसे मिस नहीं करना चाहता। पता चला इसके चक्कर में दीप्ति मैम से आपका रिश्ता न खराब हो जाये।
दीदी – क्या पता दीप्ति मैम ही सौंप दे ?
मैं – तारा के साथ परमानेंट अफेयर नहीं हो सकता। मैं सिर्फ श्वेता के साथ ही जिंदगी बिताना चाहता हूँ।
दीदी – पर वो तेरी बहन है। उसके हिसाब से तो पापा का खून भी है।
मैं – सुधा दी को बच्चा दिया। दिन रात तुम सबको चोद ले रहा हूँ। उसके बाद तो ये तो मत बोलो। वैसे भी इस बार चाची ने कुछ ऐसा कहा जिससे मुझे शक है की श्वेता के अंदर पापा का खून है। कुछ तो ऐसा है जो पापा और चाची ने सबसे छुपाया है। हो सकता पापा को भी न पता हो।
दीदी – क्या कह रहा है ?
मैं – हाँ , मैंने चची से पुछा तो वो टाल गईं। हो सकता है सही समय पर बताएं।
दीदी – हम्म्म।
ऐसे ही बातें करते करते हम कॉलेज पहुँच गए। दीदी मेरे साथ दीप्ति मैम के चेंबर में गईं। दीप्ति मैम उनको देख बहुत खुश हुई।
दीप्ति मैम – अरे वाह तुम कब आई? कैसी हो ?
दीदी – दो तीन हफ्ते हुए।
दीदी ने मेरा हाथ पकड़ते हुए कहा – ठीक नहीं थी पर अब ठीक हूँ।
फिर दीदी ने अपने प्रेगनेंसी और मिसकरेज वाली बात बताई। ये भी बताया की मैं कैसे उनको हेल्प कर रहा हूँ। वापस शेप और कॉन्फिडेंस गेन करने में।
दीदी ने उनसे पुछा – सुना तारा भी यहाँ आ गई है ?
मैम ने गहरी सांस ली और कहा – हाँ पापा जी का देहांत हो गया। मैं अकेली पड़ गई थ। उसे फिर मैंने यहीं बुलाकर अपने साथ कर लिया। वाइए भी पापा के कारण ही उसे यहाँ से हटाया था। अब वो ही नहीं रहे तो इसके आने में कोई दिक्कत नहीं थी।
दीदी – और वो आपकी फॅमिली हेल्प और उसका परिवार ?
मैम – पापा के देहांत के बाद मैंने उन सबको वापस गाँव भेज दिया। उनके वजह से माहौल ख़राब ही था। ।
दीदी – अब तो आप एकदम अकेली हो गई होंगी ?
मैम – हाँ। पर तारा है तो मन लगा रहता है। तुम अगर यहाँ हो तो आ जाया करो। श्वेता और राज को भी ले आओ।
दीदी – मैम , मैं आउंगी तो खुद को रोक नहीं पाऊँगी।
मैम – मं तुम्हे रोकना भी नहीं चाहती। बहुत अकेली पड़ गई हूँ।
दीदी – तारा ?
मैम – उसे सब पता है। राज और श्वेता को भी लेते आना। ये तीनो अपनी बातें कर लेंगे और हम अपना काम। वैसे भी राज तारा से मिलना तो चाहता होगा।
मैं – मममममम, मैम ऐसा कुछ नहीं है।
मैम हँसते हुए – तभी उस दिन बिना पालक झपकाए उसे ताड़े जा रहे थे।
मैं – वो दरअसल~~~
मैम – मुझे पता है बहुत सुन्दर है मेरी बेटी। तुम भी कम नहीं हो। और तुम्हारे उसके तो बात ही अलग है।
दीदी – मैम आप खुद ही ~~~
मैम – आज के बच्चे हमसे बहुत आगे हैं। किसी अनजान के बजाये जानने वाला ठीक है। बाकी सहमति से जो भी हो , मुझे कोई दिक्कत नहीं हैै। एट लीस्ट ही शुड ट्राई।
दीदी – इसको ट्राई तो आपको भी करना चाहिए।
मैम – मे बी।
दीदी और मैं खुश हो गए। कहाँ मेरे दिमाग में हलचल मची हुई थी की कैसे कदम आगे बढ़ाऊंगा , यहाँ तो लड़की की अम्मा खुद ही न्योता दे रही थी। ना सिर्फ बेटी के लिए बल्कि अपने लिए भी। मेरे लिए एक चूत तो हाजिर हो रही थी। दुसरे के लिए मुझे मेहनत करनी होगी। पर मुझे पता था इतने एक्सपीरियंस वाले लोग पीछे हों तो ये बहुत आसान है।
कुछ देर और इधर उधर की बातें हुई। तब तक श्वेता का क्लास भी ओवर हो गया। वो और तारा मैम के चेंबर में आये। दीदी को देख कर तारा बहुत खुश हुई। वो उनके गले लग गई। दीदी ने उसके बारे में कुछ बातें की। वो दीदी का हाथ छोड़ ही नहीं रही थी।
आखिर में हम जब चलने लगे तो मैम ने कहा – तुम सब घर जरूर आना।
तारा दीदी के गले लगती हुई उनके कान में कुछ बोली। दीदी ने उसके गाल पर हलके से चपत लगाते हुए कहा – तू बदमाश हो गई है।
तारा – आपसे कम।
फिर हम सब अपने घर की तरफ चल पड़े।
मैंने रास्ते में दीदी से पुछा – तारा क्या कह रही थी।
दीदी कुछ बोलती उससे पहले श्वेता बोल पड़ी – कह रही होगी , अपने भाई का बड़ा लैंड दिलवा दो। चुदासी हूँ मैं।
मैं – मुझे कुछ जलने की बू आ रही है।
श्वेता – मैं क्यों जलूं। मैं तो चाहती हूँ उसकी चूत फाड़ दे तू। बहुत छम्मक छल्लो बानी रहती है।
अब मुझे समझ आया श्वेता क्यों उसके पीछे पड़ी थी। वो मेरे लिए प्यार कम, तारा के प्रति जलन ज्यादा थी। मैं मन ही मन मुश्कुरा रही थी।
सरला दी ने श्वेता के लैंग्वेज सुन कर कहा – गाँव जाकर बदल गई है तू।
श्वेता ने मेरी तरफ देखा फिर नजरे झुका कर कहा – सॉरी , वो जोश जोश में ज्यादा बोल गई।
दीदी – नहीं बढ़िया है। घर में टेंशन नहीं रहेगी। तेरा लेक्चर नहीं सुनना पड़ेगा। हम फ्रीली बात भी कर पाएंगे और
श्वेता – चुदाई भी।
हम सब हंस पड़े।

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