श्वेता भी बाहर निकल कर ट्यूबवेल के पास पहुंची। वो हौदे के किनारे पेअर लटका कर बैठ गई। मैं भी उसके पास आया। उसने कहा – गेट लगा दो।
मैं गेट बंद करने चला गया। उसने चाचा को फ़ोन करके बोला – बाउजी कोई इधर आएगा तो नहीं।
चाचा – नहीं। तुम नहा लो।
वो अंदर जाने लगी तो मैंने कहा – अरे सूट में अंदर जाओगी तो क्या मजा आएगा। चेंज कर लो। चाची ने फ्रॉक भेजा है।
वो उठ कर अंदर चली गई। मैंने वहीँ अपना पेंट शर्ट और बनियान उतार दिया और बैठ गया। श्वेता अंदर से एक छोटे से फ्रॉक में आई। फ्रॉक शायद उसके स्कूल टाइम की थी पर फिर आई थी। उसने अंदर ब्रा नहीं पहना था। ये उसके उभरे हुए निप्पल से जाहिर था। फ्रॉक घुटने से ऊपर तक थी। और फ्रॉक में पीछे एक लम्बी चेन थी जो एकदम कमर तक थी।
मैंने उसे देखते ही कहा – एकदम स्कूल गर्ल लग रही हो।
श्वेता शर्माते हुए बोली – थोड़ी टाइट है। पर नहाने के लिए ठीक है।
वो भी मेरे बगल में आकर बैठ गई। हम दोनों पेअर चला रहे थे और हाथो से पानी फेंक रहे थे। मैअंडरवियर में बड़ी मुश्किल से अपने लंड को खड़ा होने से रोक पा रहा था।
श्वेता – उसे फ्री रहने दो। क्यों दबा रहे हो।
मैं – छोड़ दिया तो अजगर की तरह निकल जायेगा फिर कोई छेद ढूंढेगा घुसने के लिए।
श्वेता – थी न एक पहाड़ोंवाली उसके पास भी छेद था। घुसा लेते। मौका तो दिया था। समय लगा उसे कन्विंस करने में पर तुम्हारे अजगर के कारनामे सुनकर तैयार थी।
मैं – लगता है कुछ ज्यादा ही सुना दिया था तुमने। डर गई थी।
श्वेता – तुम जैसे चोदू से डर कर जाएगी कहा।
मै – वो तो ठीक है। पर अभी क्या करु।
श्वेता हँसते हुए बोली – वो क्या कहते हैं अपना हाथ जगत ~~।
कहकर वो ट्यूबवेल के हौदे में कूद पड़ी और मेरे तरफ पानी फेंकने लगी। मैं भी कूद पड़ा। अब हम दोनों कमर से ऊपर तक के बड़े से टैंक में एक दुसरे के ऊपर पानी डाल रहे थे। बीच में मैंने एक डुबकी भी लगाई। मेरा देखा देखि श्वेता ने भी डुबकी लगाई। जैसे ही हम दोनों ऊपर की तरफ आये, मेरी निगाहें श्वेता के सीने पर अटक गई। उसका फ्रॉक पूरा भीग चूका था और बिना ब्रा के उसके गीले गीले मुम्मे दिख रहे थे। उसका निप्पल भींगने की वजह से बाहर की और निकल आया था। उसे देख मेरा लंड एक बार और जोर मारने लगा।
मुझे अपने तरफ घूरते हुए श्वेता बोली – तुम लड़कों की यही दिक्कत है या तो बूब्स घुरोगे या बम।
मैं – अब जो घूरने के चीज है वो तो घूरेंगे ही। उस पर से जब ये सामान तुम्हारी जैसी खूबसूरत लड़की की हो।
मैं धीरे धीरे पानी में ही उसकी तरफ बढ़ने लगा। श्वेता की धड़कन तेज हो गई। उसने मुझे रोकने की कोशिश भी नहीं की। उसे मेरे अगले कदन का इंतजार था। उसके बिलकुल पास पहुँच कर मैंने अचानक से डुबकी ले ली। डुबकी थोड़ी झटके से ली थी तो उसका फ्रॉक पानीके बहाव से ऊपर तक उठ गया। मुझे पानी के अंदर से उसके गोर जांघों के बीच में सफ़ेद गीली पैंटी के अंदर छुपी चूत का शेप दिखाई दिया। फ्रॉक के हटते ही उसे मेरी हरकत का पता चल गया। उसने कहा – बड़े गंदे हो तूम।
मैं – लो मैं तबसे चड्ढी में घूम रहा हूँ और तुम्हारी चड्ढी देख ली तो बुरा मान गई।
उसे समझ आ गया की मैंने क्या देखा है। उसने मेर और पानी डालना फिर से शुरू कर दिया। अबकी मैं तेजी से उसके बिलकुल करीब पहुँच गया और उसे बाहों में भर के उसके होठो पर होठ रख दिए । एक पल को वो चौंकी पर फिर उसने भी बदले में मुझे किस करन शुरू कर दिया। हम दोनों कुछ देर तक एक दुसरे के होठों में खोये रहे। जब अलग हुए तो मैं झटके लेने लगा। वो अचानक से डर गई।
बोली – क्या हुआ ?
मैंने हँसते हुए कहा – सुपर चार्ज हो गया हूँ। पानी में करंट आने लगा।
वो भी हंस पड़ी। मेरा लैंड बेकाबू हो चूका था और मैं बार बार उसे एडजस्ट करने की कोशिश कर रहा था। ये देख उसने दोबारा कहा – कर लो न खुद से ?
मैंने कहा – क्या कर लू ?
श्वेता – मास्टरबेट कर लो
मैंने कहा – ये क्या होता है ? मुझे अंग्रेजी नहीं आती। देशी में समझाओ।
श्वेता – मुठ मार लो।
लगता था उसे मेरे लंड को खुले में देखने की तमन्ना थी। उस रात उसने मुझे नंगा देखा तो था पर झटके में।
मैंने कहा – इतनी चिंता है तो तुम्ही कर दो।
श्वेता – ना बाबा मुझसे ये उम्मीद न रखो।
मैं – फिर तुम ऊँगली करो मैं मुठ मरूंगा। दोनों खुद को खुश कर लेते है।
श्वेता – मेरे अंदर आग नहीं लगी है।
मैं – वो तो तुम्हारी बहती चूत से ही पता चल रहा है।
श्वेता – तुम्हे कैसे मालूम मेरी चूत बाह रही है।
मैंने मजाक में कहा – पानी पीला सा दिखने लगा है।
उसने नीचे देखा , फिर समझ गई मैंने मजाक किया है। उसने फिर मुझे जीभ चिढ़ा दिया।
अब सच में मुझसे बर्दास्त नहीं हो रहा था। मुझे लंड को शांत करना ही था। मैंने पानी में ही अपना अंडरवियर उतार दिया और उसे किनारे फेंक दिया। अब मैं पूरी तरह से नंगा था। मैंने उसे कहा – थोड़ा पास आओ न। कुछ ऐसा बोलो मजा आ जाये।
श्वेता को भी ना जाने क्या सुझा। उसने अपनी पैंटी उतार दी और मेरे मुँह पर फेंक कर कहा – अब शायद मदद मिले।
मैंने उसकी पैंटी को अपने नाक से लगाया। उसकी खुशबु लेने के बाद मैंने उसे अपने लंड पर लपेट लिया। श्वेता की चूत न सही पैंटी ही।
मैंने मुठ मारना शुरू कर दिया। अब श्वेता ने डुबकी लगा ली। मेर आँखे बंद थी। मैं कल्पना में खोया हुआ था। तभी श्वेता पानी के अंदर से ही तैरते हुए मेरे एकदम करीब आई और निकल कर मेरे कान में हौले से बोली – किसकी ले रहे हो ? मुनमुन की या माँ की ?
मैंने आँखे खोल दी। श्वेता अब थोड़ी दूर थी। उसने अपने फ्रॉक का चेन खोल लिआ था और अपना एक मुम्मे को बाहर करके उसे अपने ही हाथो से दबा रही थी। उसका दूसरा हाथ नीचे चूत में अंदर बाहर हो रहा था।
श्वेता – उफ़फ तुमने मुझे भी खराब कर दिया। देखो कितनी बेशरम हो गई हूँ मैं।
मैं मुठ मारना भूल उसे देख रहा था। उसने मुझे देखा और कहा – रुक क्यों गए। समझ लो मैं चुद रही हूँ। मेरा चोदू भाई जो अब तक अपने दोनों सगी बहनो को चोद चूका है तीसरी को भी चोद रहा है। आह। कितना बड़ा लंड है तुम्हारा। मैं नहीं ले पाऊँगी उसे अंदर।
मैं – मेरी प्यारी बहन , जब सुधा दी की कुंवारी चूत ने ले लिया तो तुम भी ले लोगी। बस तैयार तो हो जाओ।
श्वेता – कल मुनमुन को चोद लेना। तुम्हारे लंड के कारनामे सुन कर उसके चूत में हलचल हो रही है। आज रात वो सो नहीं पायेगी। वैसे सोयी तो मैं भी नहीं हूँ।
मैं – एक बार चुद जाओ , थक कर ऐसी नींद आएगी की पूछो मत।
श्वेता – आह आह। तुम्हारा हुआ की नहीं। मेरी चूत तो बाह रही है।
मैं – बस होने वाला है। एक बार अपने मुम्मे चूम लेने दो।
श्वेता – तुम बुद्धू हो।
मैं समझ गया की उसने अपने मुम्मे निकाले ही क्यों हैं। मैं वैसे ही मुठ मारते मारते उसके पास पहुँच गया। उसने अपना हाथ हटा लिया था और मेरा सर पकड़ अपने मुम्मे पर लगा दिया। उसके निप्पल जैसे ही मेरे मुँह में आये उत्तेजना की एक बाढ़ सी आई और हम दोनों एक साथ एक दुसरे का नाम लेते हुए जोरदार तरीके से स्खलित हो गए। स्खलन के बाद श्वेता मुझसे लिपट गई। वो भूल गई की मैं नंगा हूँ। मैंने उसके नरम उम्मे के एहसास के साथ साथ उसकी नंगे जांघो और चूत को भी कुछ हद तक फील कर पा रहा था। मेरा हाथ उसके नंगे पीठ को सहला रहा था। हम दोनों उसी अवस्था में एक दुसरे से लिपटे रहे। कोई भी दुसरे को छोड़ना नहीं चाह रहा था। मैं सोच रहा था की समय रुक जाये। वो ऐसे ही मेरे बाहों में लिपटी रहे। ये पानी हम दोनों केअंदर के आग को ऐसे ही जलाये रखे।
मैं सोच रहा था की समय रुक जाये। वो ऐसे ही मेरे बाहों में लिपटी रहे। ये पानी हम दोनों केअंदर के आग को ऐसे ही जलाये रखे।
पर समय कहाँ रुकता है। हम एक दुसरे में खोये हुए थे की गेट पर चाची की आवाज आई – दरवाजा खोलो। तुम दोनों को भूख नहीं लगी है क्या ?
चाची की आवाज सुन श्वेता थोड़ा नर्वस हुई। मैंने कहा – उन्हें सब पता है। घबरा क्यों रही हो। ये कपडे भी उन्होंने ही दिए हैं।
श्वेता ने मुझसे कहा – कुछ भी हो।
उसकी चेन बंद नहीं हो रही थी मैंने उसके चेन बंद किया और खुद बाहर आकर अंडरवियर पहन कर गेट खोलने चला गया। चची ने मुझे गीला देखा तो कहा – अभी तक नहाये नहीं।
श्वेता अब भी पानी में ही थी। चाची ने हँसते हुए कहा – मेरे दोनों जवान बच्चो ने तो पानी में आग लगा दिया होगा। नहाना हो गया हो तो बाहर निकलो और कपडे बदल खाना खा लो।
मैंने चाची से कहा – आप भी आओ न।
चाची – नहीं लल्ला। हम घर से नाहा करआये हैं। कपडे भी नहीं ले आये हैं।
श्वेता पानी से निकल कर कमरे में जाने लगी । उसकी पैंटी वहीँ किनारे पड़ी थी। चाची ने कहा – पैंटी तो लेती जा।
श्वेता – अपने लल्ला को दे दो। मैं वो अब थोड़े ही पहनूंगी। उसमे उसने मुठ मारा है।
चाची ने उसकी और देखा और फिर पैंटी में लगे बचे खुचे मेरे माल को। फिर मेरी तरफ देख कर बोली – मुझे तो लगा अब तक चोद लिए होंगे इसको।
मैं – अगर चोदा होता तो ये यहीं गिरी पड़ी होती। ऐसे गांड लहरा कर ठुमक नहीं रही होती ।
श्वेता अंदर से बोली – गांड है तो ठुमक रही हूँ। तुम अपनी चाची को ही चोद लो।
मैं – वो तो जब चहुँ चोदूँगा , तुम्हारी चूत में खुजली काहे हो रही है।
श्वेता – इतना बड़ा लंड तो खुजली करेगा ही।
चाची – तो षंड करवा लेती खुजली। कब तक ऊँगली करेगी।
श्वेता – मेरी चूत , मेरी खुजली और मेरी ऊँगली। तुम्हारे गांड में क्यों दर्द हो रहा है।
चाची – एक डैम रंडियों वाली भाषा बोल रही हो।
श्वेता चेंज करके बाहर आ गई और बोली – मुझे रंडी ही तो बनाना चाह रही थी न।
ये सुन मैं और चाची एकदम शॉकेड रह गए। चाची के आँख में आंसू आ गए और मुझे भी गुस्सा आ गया। गुस्से में कपडे बदलते हुए मैंने कहा – ये क्या बकवास है ?
श्वेता को लग गया उससे गलती हो गई है। उसने कहा – सॉरी। मैं तो मस्ती में बोल रही थी।
चाची के आँख में आंसू थे। उन्होंने कहा – तुझसे कोई जबरदस्ती नहीं है। घर में जिसने भी राज के साथ सम्बन्ध बनाया ख़ुशी ख़ुशी बनाया। तुम्हे उसके साथ सेक्स करने को न मैंने कभी जोर लगाया न उसने कोई जबरदस्ती की। आज भी मौका था पर मुठ ही मारा उसने। तुम इतनी घटिया बात कैसे बोल सकता हो। क्या हम तुम्हे रंडी बनाना चाहते हैं ?
श्वेता ने चाची को किस किया और बोली – मुझे माफ़ कर दो माँ। मैं तो बस मूड में थी। तुम मुझे रंडी थोड़े ही बनाना चाहोगी। बस राज को बहनचोद बनाओगी।
मेरी तरफ देख वो बोली – क्यों बहनचोद ?
मैं समझ गया आज वो एकदम मस्ती भरी मूड में थी। मैंने चाची से कहा – हाँ पर ये बहन तो देने को तैयार ही नहीं है। अब चाची ही छोड़नी पड़ेगी।
चाची ने हम दोनों को देखा फिर बोली – चलो पहले खाना खाओ। ताकत होगी तब चोद पाओगे।
हम दोनों के लिए उन्होंने खाना निकला जिसे हम दोनों खाने लगे। तब तक चाची ने हमारे कपडे धोये। कुछ देर हमने फिर वहां और बिताया और घर की तरफ चल पड़े।
घर पहुँच कर मैं अपने कमरे में सोने चला गया। कल रात चाची की जबरदस्त चुदाई और फिर आज श्वेता के साथ देर तक नहाने की वजह से थकान ज्यादा हो गई थी। फिर नहाते समय मुठ भी मारा था।
शाम को मेरी नींद रजनी की ावाह से खुली। वो एक गिलास में दूध लिए खड़ी थी।
मुश्कुराते हुए बोली – काकी ने दिया है। बड़ी मेहनत कर रहे हो।
मैंने कहा – तूने मेरी मेहनत देखि कहाँ है अभी।
रजनी मुँह पर हाथ धरे हँसते हुए बोली – आपसे करवानी भी नहीं है। पिछली बार काकी आई थी तभी पता पड़ गया था आप बहुत मेहनती हो। और आपके मेहनत के बाद जिस पर मेहनत होती है उसकी हालत खराब हो जाती है।
मैं – मजा तो फिर भी आता ही है।
रजनी – हाँ काकी तो कई दिनों तक नशे में थी।
मैं – आ जा तुझे भी नशा करा दूँ।
रजनी – पहले बाहर आओ। थक गए हो अम्मा आई है। अभी श्वेता दीदी की मालिश कर रही है। काकी ने कहा है फिर तुम्हारी भी कर देंगी।
मैं – दुलारी तै आई हैं। उनके मालिश की बड़ी तारीफ सुनी है। अब तो करवाना ही पड़ेगा।
रजनी – आ जाओ।
मैं मन ही मन सोच रहा था यहाँ कच भी छुपा नहीं है। और तो और सब मस्तीखोर हैं। काश ये कुँवारी कली भी मिल जाती। मैंने फटाफट दूध ख़तम किया और बाहर आ गया। बाहर आते ही मेरी आँखें चौड़ी हो गई। श्वेता तखत पर नंगी ही पेट के बल लेटी थी और दुलारी ताई उसके बगल में बैठ कमर और पीठ पर मालिश कर रही थी। दुलारी ताई की उम्र माँ से कुछ ही साल ज्यादा होगी। रंग सांवला था पर चेहरा गोल मटोल। भरा हुआ बदन , बड़े बड़े मुम्मे और घड़े जैसे पिछवाड़े। उन्होंने ने सिर्फ एक साडी डाल रखी थी। टिपिकल गाओं की औरतें साड़ी ही इस तरह बांधती हैं जिससे उनके मम्मी सेट रहते हैं और उन्हें ब्लाउज की जरूरत नहीं होती है। पर मालिश करते समय हिलने की वजह से मुम्मे लगभग पुरे दिख रहे थ।
मुझे देखते ही वो बोली – आओ लल्ला आओ। एकदम बड़के भैया जैसी शकल है। लगत है जैसे भइआ जवान होकर आ गए हैं।
मुझे देखते ही श्वेता चौंक गई। वो पूरी तरह से नंगी थी। उसने चिल्ला कर कहा – जाओ यहाँ से। थोड़ी भी शर्म है या नहीं।
मैं अभी सोच ही रहा था की इसकी शर्म दोपहर में कहा चली गई थी। फिर मैं वापस जा ही रहा था की चाची बोल पड़ी – ट्यूबवेल में तो खूब कूद रही थी।
श्वेता – अम्मा आप भी सबके सामने ?
दुलारी – अरे बिटिया हमको सब पता है। तुम्हारा भी और तुम्हारी अम्मा का भी। पर कहती हो तो चद्दर डाल देते हैं।
रजनी – और हमें भी सब पता है।
श्वेता – पता है तो जा चुद जा।
रजनी – अरे बाप रे वो तो न होगा , बहुत बड़ा है इनका।
अब शर्माने की बारी मेरी थी। मैं चुप चाप वहीँ रखे कुर्सी पर बैठ गया। अब दुलारी ताई ने श्वेता को पीठ के बल लिटा दिया और पैरों की मालिश करने लगी। श्वेता ने शर्म से अपने चेहरे पर दुपट्टा डाल लिया।
मुझे हंसी आ गई। मैंने कहा – शुतुरमुर्ग , मेरी आँखें खुली है।
श्वेता – गरररररर बेशरम।
सब हंस पड़े। रजनी और चाची चौके में खाने की तैयारी में लग गए। ताई ने पहले तो श्वेता के पैरों की मालिश की फिर हाथ जांघों की तरफ बढ़ाया। चादर श्वेता के जांघो तक आ गया था। श्वेता ने एक आध बार निचे करके ढकने की कोशिश की पर मालिश की वजह से चादर हैट ही जाती थी। श्वेता ने भी बाद में कोशिश करना छोड़ दिया। मेरी हालत खराब हो रही थी। एक तरफ तो श्वेता की चिकनी और सुडौल जाँघे और दूसरी तरफ ताई की की हिलते खुले हुए मुम्मे। मुम्मे तो श्वेता की भी हिल रहे थे। मेरी नजरें ताई की मुम्मो पर ही टीके थे। मेरा लंड लुंगी से बाहर निकलने को बेताब था। लुंगी टेंट बन चुकी थी। मेरी हालत देख ताई ने कहा – दूध से अभी पेट नहीं भरा तुम्हारा।
श्वेता बोली – दूध का दीवाना है ये। इनके दूध के चक्कर में पता नहीं क्या क्या हो रहा है।
ताई – जरा रुक जाओ , बिटिया की मालिश करके तुम्हारी भी सेवा करुँगी।
ताई ने अब अपने हाथ श्वेता के चूत पर फेरना शुरू कर दिया।
श्वेता – इस्सस , ताई रहने दो न।
ताई – थकान निकल जाएगी बिटिया।
श्वेता – आह , हलके से , थोड़ा ऊपर।
ताई – आँखे बंद कर लो, सब जगह जाउंगी।
ताई की उंगलिया जादू करने लगीं , श्वेता की सिसकारियां बढ़ गई । ये देख मेरा हाथ अपने लंड के पास पहुँच गया। ताई ने ये देख कहा – हाथ हटा लो बबुआ तुम्हारी भी पूरी मालिश करुँगी। मैंने हाथ हटा लिया। ताई के हाथों का कमाल था की श्वेता कुछ देर में स्खलित हो गई। उसका पूरा शरीर कंपन करने लगा। कुछ देर कंपन के बाद श्वेता ठंढी पड़ गई। कुछ देर बाद वो उठी उसने चादर पुरे शरीर पर लपेटा और बिना मेरे तरफ देखे बाथरूम की तरफ चली गई।
उसके जाते ही ताई बोलीं – आओ लल्ला तुम्हारी थकान भी दूर कर दें।
मैं जैसे ही उठा लंड की वजह से लुंगी में बने टेंट को देख ताई ने कहा – सच में बड़ा है लल्ला। रजनी की तो फट ही जाएगी।
मैंने कहा – प्यार से दूंगा ताई। फाड़ूंगा नहीं। वैसे किसी न किसी दिन कोई तो फाड़ेगा ही। पहले से अभ्यास रहेगा तो दर्द नहीं होगा।
ताई – इसे देख कर तो मेरी भी फट रही है।
मैं तखत पर बैठ गया। मैंने बनियान उतार दिया। चाची ने कहा नीचे पीढ़े पर बैठ जाओ , पहले सर की चम्पी करा लो। मैं वहीँ नीचे बैठ गया। ताई तखत पर पैर लटका कर बैठ गई। उन्होंने मेरा सैर अपनी तरफ किया और मेरे सर पर तेल उड़ेल दिया। फिर वो धीरे धीरे मेरे सर की मालिश करने लगी। सर के साथ साथ मेरे कंधो की भी मालिश हो रही थी। ताई ने साडी समेट कर जांघो तक कर लिया था। मेरा सर उनके नंगे नरम नरम जांघो पर टिकता तो मन करता उन्ही पर सर रख कर सो जाऊं।
कुछ देर बाद उन्होंने कहा ऊपर आ जाओ पैरों और पीठ की कर दूँ। मैं ऊपर पीठ ले बल लेट गया। मेरा लंड एकदम सीधा खड़ा था। होता भी क्यों नहीं ,चाची की साडी उनके मुम्मे की बीच से होते कमर पर टिकी थी। उनके दोनों मुम्मे एकदम मस्त लटक रहे थे। मेरे मुँह से लार टपक रही थी और लंड से प्री कम।
मुझे देख चची ने कहा – हाथ में नहीं आएंगे।
मैंने कहा – कहो तो इनके भी नाप कर बताऊँ।
चाची खिखियाते हुए बोली – इनके तो हाथ से नाप कर ही देख लो।
ताई बोली – पहले तो मैं पैरों की मालिश करके इसके नाप लुंगी। उनकी नजर मेरे लंड पर थी।
चाची – हाँ हाँ क्यों नहीं। मेरे लल्ला का भी सामान तुम्हारे हाथ में नहीं आएगा।
ताई – लग तो रहा है।
ताई ने मेरे पैरों की मालिश शुरू की। सच में उनके हाथ में जादू सा था। पहले तो थोड़ा दर्द हुआ पर धीरे धीरे मसल रिलैक्स्ड हुई तो अच्छा लगने लगा। ताई अब मेरे पैरों की बीच में थोड़ा ऊपर आई और मेरी लुंगी खोल दिया। मेरा लंड अब हवा में सीधा खड़ा था। चौके से छुप कर देख रही रजनी की मुँह से निकल पड़ा – हाय दिया इतना बड़ा। फाड़ ही देगा।
ताई ने संयम दिखाते हुए पहले मेरे जांघो की मालिश की फिर अंत में हाथ में ले ही लिया।
ताई – तू सच कह रही थी। इसकी जैसा तो पुरे गाँव में नहीं है। इसके बाप का भी इतना बड़ा नहीं था। कहा से मिला ?
चाची – नानीहाल पर गया है।
ताई – सुना था मैंने। आज देख भी लिया। रे रजनी न ले पायेगी तो। ये तो मेरी भी फाड़ देगा। ताई ने हौले हौले से मेरे लंड पर हाथ ऊपर नीचे करना शुरू किया।
कुछ देर बाद मैंने कहा – ताई इसकी मालिश थोड़े और प्यार से करो न।
ताई – इतने प्यार से तो कर रही हूँ।
मैंने उनके मुम्मो की तरफ इशारा किया। ताई समझ गई मैं क्या चाहता हूँ। उन्होंने पालथी से मार ली साडी कंधे से उतार कर मुम्मो को फ्री कर दिया। वो फिर मेरे पैरों की बीच में आ गई और खुद झुक गई। अब मेरा लंड उनके मुम्मो की बीच में था। उन्होंने अपने दोनों हाथो से अपने मुम्मे इस कदर पकड़ लिया की मेरा लंड उनके बीच फंस गया। मेरा लंड अब दो बड़े बड़े गद्देदार मुम्मो की बीच में था। ताई ने अपने मुम्मे मेरे लंड की ऊपर नीचे करना शुरू कर दिया। बीच बीच में मैंने भी कमर से धक्के लगाने शुरू कर दिया। मैं अब उनके मुम्मे चोद रहा था।
श्वेता भी बाथरूम से तौलिये लपेटे बाहर आ गई थी और ये सब देख रही थी। उसके मुँह से भी सिसकारी निकल गई। लगता था उसकी चूत ने दोबारा पानी छोड़ना शुरू कर दिया था। वो अंदर अपने कमरे की ओर जाने लगी तो चाची ने उसे पकड़ कर अपने गोद में बिठा लिया। उसका तौलिया खुल गया। जब तक वो संभालती चाची ने उसकी चूत पर अपना हाथ रख दिया।
कुछ देर वैसे ही ताई ने अपने मुम्मे चोदने दिया और फिर कहा – चल इसकी मालिश तो अभी और करुँगी। अब थोड़ा पीठ की कर दूँ।
चाची ने लम्बी साँसे लेते हुए कहा – जिज्जी , लल्ला को पीठ की मालिश किसी और तरीके से कराने में ज्यादा मजा आता है।
दुलारी – मन तो हमारा भी वैसे ही करने का है पर कहीं लल्ला दब न जाएँ हमरे बोझ से ।
मैंने चाची की तरफ घूम कर कहा – अरे सैंडविच वाली कर दो चाची। आ जाओ तुम भी।
चाची – धत्त।
दुलारी – आ ना।
चाची – रहा नहीं जा रहा अब तो आना ही पड़ेगा।
चाची ने श्वेता को गोद से उठाया और खुद मेरे पास आने लगी।
श्वेता – बड़ी चुदक्कड हो तूम सब। लंड देखा नहीं चल पड़ी। मुझे बीच में छोड़ दिया।
चाची – रजनी और तुम तो डरते हो। एक दुसरे की मदद कर दो। मुझसे न रहा जाता।
चाची ने साडी और ब्लॉउस उतार दिया और सिर्फ पेटीकोट में मेरे तरफ आ गई। मैंने लपक कर उनके मुम्मे पकड़ लिया। इधर दुलारी ताई ने पीछे से मुझे जकड लिया। अब मैं उन दोनों की बीच में सैंडविच बना हुआ था। दोनों अपने शरीर को मेरे शरीर से रगड़ रही थी।
अब मुझसे नहीं रहा जा रहा था। मैंने कहा मेरे लौड़े की मालिश कौन करेगा ?
ताई बोली – आज मेरी जिम्मेदारी है मैं ही करुँगी।
मैंने अब ताई की तरफ मुँह कर लिया। उनकी तरफ होते ही उनके बड़े बड़े मुम्मे मेरे सामने थे। सिर्फ मुम्मे ही बड़े नहीं थे। उसके ऊपर बड़ा सा घेरे वाला गोल ओरोला और उस पर से अंगूर से भी बड़े निप्पल। मैंने सबसे पहले एक मुम्मे को मुँह में ले लिया। ताई ने एक जोर सी सिसकी ली। चाची ने पीछे से मुझे जकड लिया था और अपने मुम्मे मेरी पीठ पर रगड़ रही थी।
ताई – इन्हे फिर पी लियो लल्ला अभी तो निचे की मालिश करने दो।
चची मजबूर काठी की थी। उन्होंने मुझे गोद में बिठा लिया। मेरा लंड अब उनके चूत की सामने था। ताई आस भरी नजरों से मेरी तरफ देख रही थी। मैंने उन्हें कंधे से पकड़ लिया और अपने कमर को एक झटका दिय। मेरा लंड अंदर तक जैसे ही गया ताओ बोल पड़ी – मार डाला रे।
चाची – देखा जिज्जी।, मैं न कहती थी।
मैंने जैसे ही अपना कमर बाहर ही तरफ किया चाची ने पीछे से फिर से मुझे धक्का दिया। मेरा लंड फिर उनके अंदर।
ताई – फाड़ देगा ये तो। कितने लौड़े लिए हैं मैंने पर ऐसा नहीं लिया।
अब हम तीनो एक दुसरे को धक्के लगा रहे थे। चुद ताई रही थी पर मजा सबको आ रहा था। श्वेता और रजनी को भी।
क्योंकि रजनी श्वेता की सामने जमीन पर बैठ गई थी और उसकी चूत चाट रही थी।
श्वेता – कहाँ से सीखा है रे तूने। मैं तो तुझे सीधा समझती थी।
ताई तो ये सब देख रही थी बोली – आह आह बिटिया , मरद से दूर ऐसे ही थोड़े न रह रही है। कुछ मालिश करने की कला तो उसे भी सिखाया है।
चाची बोली – तुझे क्या लगता है , तेरे बापू से कुछ होता तो नहीं है। ये दोनों माँ बेटी मेरे घर की साथ साथ मुझे भी संभालती हैं।
मेरे लंड ने ताई की हालत खराब कर दी थी। उनकी चूत पानी छोड़ चुकी थी। पर मैं इतनी बार पानी निकाल चूका था की मुझे आने में वक़्त था।
ताई – लल्ला मालिश हो गई।
मैं – मेर तो नहीं हुई पर लगता है तुम्हारी हो गई।
ताई – हाँ। मेरी चूत तो मालिश करा करा कर थक गई।
चाची – क्या जिज्जी अब लल्ला को मुझे संभालना पड़ेगा।
चाची रुक गईं। अब मैंने उनकी तरफ मुँह कर लिया। मैं जैसे ही घुमा श्वेता और रजनी की स्थिति देख पगला सा गया। मैंने चाची को वहीँ लिटा दिया और एक ही बार में अपना लंड उनकी चूत में डाल दिया। श्वेता की तरफ देखते हुए मैं चाची को जोर जोर से पेलने लगा। मैं पेल चाची को रहा था पर महसूस हो रहा था जैसे श्वेता को पेल रहा हूँ। श्वेता की आँखें आनंद की अतिरेक में बंद थी। उसका तौलिया निचे गिरा हुआ था। उसके मुम्मे उसकी गहरी साँसों से ऊपर नीचे हो रहे थे। उसने रजनी की चेहरे को अपने पैरों से दबाया हुआ था और दोनों हाथो से कुर्सी की हत्थे को जोर से पकड़ रखा था। ताई और चाची मेरे तेज होते धक्के से मेरी हालत समझ गई।
ताई ने मुझसे कहा – चोद दे अपनी बहनिया समझ चोद दे। देख दोनों माँ बेटी मस्त चूत चुदा रही है।
चाची – आह लल्ला आराम से। श्वेता की ऐसे मारोगे तो झेल नहीं पायेगी। आह आह
मैं चाची की मुम्मे दबाता हुआ उन्हें चोद रहा था पर मेरी नजरें एकतक श्वेता की शरीर और मस्ती की वजह से चेहरे पर मौजूद आनंद भरे भाव देख रहा था। मैं बस यही सोच रहा था जैसे अब श्वेता को ही चोद दूँ।
श्वेता थोड़ी ही देर में कुर्सी की हत्थे छोड़ रजनी की सर को पकड़ ली और उसके अपने चूत को उसके चेहरे पर रगड़ने लगी।
श्वेता – आह आह। बस चोद मुझे , चाट। अंदर और अंदर। आह भाई , राज ले लो मेरी।
मेरा नाम लेते हुए वो झड़ने लगी। उसको कांपते हुए झड़ते हुए देख मैं भी श्वेता श्वेता करने लगा। श्वेता ने आँखे खोल दी जैसे ही उसकी नजरे ऊपर उठी , मुझे उसको देखते हुए पाया। इस बार वो शरमाई नहीं। बल्कि बोली – पेल दो। चोद की रख दो माँ को। फाड़ दो उसकी चूत।
ऐसा सुनते ही मेरे लंड ने अपना पूरा माल चाची की चूत में उड़ेल दिया। मैं चाची की ऊपर ही लेट गया। चाची ने मुझे अपने बाहों में भर लिया। ताई हमारे बगल में आ चुकी थी और मेरे सर को सहला रही थी।
रजनी ने अपना सैर श्वेता की जांघो पर रख लिया था। वो एक तरफ ऐसे सर करके बैठी थी की श्वेता की चूत मुझे दिख रही थी। मैं और श्वेता एक दुसरे को देखे जा रहे था। मैं चाची की ऊपर से उतर गया और ताई की गोद में सर रख कर लेट गया। मैंने श्वेता की तरफ इशारा किया।
उसने अपनी चूत पर अपना हाथ फेरा फिर अपनी एक ऊँगली अपनी चूत में थोड़ा अंदर किया। वो उठ कर मेरे पास आई और अपने वही हाथ मेरे तरफ़बढ़ा दिया। मैंने जीभ से उसके हथेली को चाटा और ऊँगली चूसने लगा। दो पल चटवा कर श्वेता बोली – चोदू, चोद लिया सबको।
फिर कमरे की तरफ जाने लगी। मैंने जोर से कहा – अभी तुम दोनों तो बची हो।
मैं फिर चाची की मुम्मे पीने लगा।
ताई – कितना पियोगे लल्ला ?
मैं – अभी तुम्हारे दूध पिए ही कहा हैं।
रात की घमाशान चुदाई के बाद मुझे इतनी सुकून भरी नींद आई की सुबह कब हुई पता ही नहीं चला। मेरी नींद श्वेता की आवाज से खुली। वो चाय का कप लेकर मेरे पास खड़ी थी और मुझे आवाज दे रही थी – चोदू राजा उठो। कब तक सोओगे।
मैंने आँखे खोली तो मुश्कुराते हुए सामने खड़ी थी। उसने चाय का प्याला पास टेबल पर रखा और कहा – चाय पी लो और तैयार हो जाओ। गाय का दूध निकलना है न आज या ताई के दूध से ही मन भर गया।
मैंने कहा – मुझे तो सामने जो बछिया खड़ी है उसका दूध पीना है। उसके लिए इस पहले गाभीन करना होगा।
श्वेता – सपने से जागो और उठो।
कह कर वो जाने लगी। मैंने उसका हाथ पकड़ लिया और कहा – सुनो कल जो रस पिलाया था दो न।
उसने कहा – छोडो मुझे। दूध और रस सब पिलाने के लिए मुनमुन मिलेगी न।
मैं – तुम दे दो तो मुनमुन के पास नहीं जाऊंगा।
श्वेता – सुबह से दो चक्कर लगा चुकी वो। उसे पूरी सफाई करने को कहा है। अंदर बाहर सब साफ़ करके बैठी है।
मैं – मेरा इतना ख्याल ?
श्वेता शर्माते हुए बोली – तुम्ही तो कहते थे मैं मदद नहीं करती। अब कर रही हूँ तो सवाल पूछ रहे हो ?
मैं – तुम्हारी इसी अदा पर तो मरता हूँ। प्लीज दे दो न।
श्वेता ने आज भी फ्रॉक पहना हुआ था। वो मेरी तरफ पीठ करके घूम गई। उसने अपना फ्रॉक उठाया पैंटी के अंदर हाथ दाल दिया। उसकी चूत मेरे पास आते ही बहने लगती थी। कुछ पल के बाद घूम कर उसने अपनी उंगली मेरे चेहरे की तरफ बढ़ाया। मैंने उसकी उँगलियाँ मुँह में लेकर चाट ली। जब तक चाटता रहा तब तकहम दोनों एक दुसरे को देखते रहे। श्वेता की आँखों से धर्म का पर्दा अब ख़त्म होने लगा था।
श्वेता – स्वाद ले लिया हो तो जाने दो।
मैं – इस स्वाद से तो मन ही नहीं भरता।
श्वेता – फिर बाद में भी ले लेना। अभी उठो।
मैं – डायरेक्ट मिलेगा क्या ?
श्वेता – क्या पता ?
श्वेता चली गई। मैंने चाय का प्याला लिया और बाहर आ गया। श्वेता चाची की काम में मदद करने लगी। मैंने वहीँ बरामदे में बैठा सोचने लगा कि अगर श्वेता जैसी लड़की मिल जाये तो जिंदगी कितनी अच्छी हो जाये। इतनी समझदार और प्यार करने वाली। उसने मुझे उसकी तरफ देखते हुए देखा तो आँखों से इशारा किया – क्या है ?
मैंने उसकी तरफ एक फ्लाइंग किस दे दिया। चाची ने मेरे किस को देख लिया और एकदम बच्चे के तरह हाथ आगे बढ़ा ऐसे इशारा किया जैसे मेरे किस को लपक कर ले लिया हो। उन्होंने कहा – ये वाला तो मेरा था। फिर उन्होंने एक किस मेरी तरफ फेंक दिया।
उनकी ये हरकत देख हम सब हंस दिए।
श्वेता ने कहा -इससे पेट नहीं भरेगा। अपने आशिक से कहो जल्दी तैयार होकर नाश्ता वाश्ता कर ले।
चाची – जाओ लल्ला वरना मेरी ये सौत जीने नहीं देगी। जल्दी नाश्ता करो। तुम्हारे लिए इसने पकवान बनाये हैं।
मैं फटाफट से नहाने धोने के लिए चला गया।
लौट कर आया तो श्वेता मेरे लिए नाश्ता निकाल चुकी थी। उसने मेरे लिए स्टफ्ड पराठें, दो तरह की सब्जियां और खीर और ड्राई फ्रूट्स वगैरह डाल कर मिल्क शेक बनाया था।
इतना सब देख कर मैंने कहा – ये नाश्ता है या खाना ? चाची आपने इतना कुछ मेरे लिए बनाया।
श्वेता ने मुँह फुला लिया और कहा – सब मैंने बनाया है। माँ ने सिर्फ मदद की है।
चाची – लल्ला आज सुबह से ही ले लगी पड़ी है। जिद्द में थी सब मैं ही बनाऊँगी। रजनी को भी भगा दिया।
मैंने कहा – फिर तो इनाम बनता है।
श्वेता खुश हो गई , बोली – क्या इनाम मिलेगा।
मैंने अपने लैंड की तरफ इशारा करते हुए कहा – मलाई कुल्फी।
श्वेता – छियईईई
मैं – छी ? चाची से पूछो कितना मजा आता है।
चाची – जाने दो इसको। मैं खा लुंगी तुम्हारी कुल्फी।
श्वेता – नाश्ता करो , कुल्फी कुलफा बाद में देना।
मैंने खाना शुरू किया। सच में श्वेता ने मन से सब बनाया था। खाना बहुत ही स्वादिष्ट थ। मेरे चेहरे का एक्सप्रेशन देख वो बहुत खुश थी। मैंने साड़ी चीजें ख़त्म कर दी। खाने के बाद मैंने उसके गालो को किस करके कहा – इतने प्यार से बनाकर खिलाओगी तो तुम्हारे साथ यहीं बस जाऊंगा।
मेरी बात सुन कर रोती हुई ना जाने क्यों वो अपने कमरे में भाग गई। चाची के आँखों में भी आंसू थे। मैं उनकी तरफ देखने लगा। मुझे समझ नहीं आ रहा था की मैंने क्या गलत कह दिया।
चाची बोली – लल्ला मेरी बेटी का दिल कभी मत तोडना। बहुत प्यार करने लगी है तुम्हे।
मैं – मैं भी उसे बहुत प्यार करता हूँ। पर अफ़सोस वो मेरी नहीं हो पायेगी।
चाची ने कहा – वो तेरी ही है।
चाची फिर अंदर श्वेता के पास चली गईं।
मैं वहीँ बैठ सोचने लगा कि अपनी बहन से इतना प्यार कैसे करने लगा। वही श्वेता जी मुझसे इतना चिढ़ती थी मुझे दिल दे बैठी है। मैं मन ही मन डिसाइड कर रहा था , जो भी हो श्वेता की दिल कभी नहीं तोडूंगा न ही किसी और को तोड़ने दूंगा।
कुछ देर बाद मैं और श्वेता खेतों की तरफ घूमने निकल गए। चाचा ने हमें अपने सारे खेत और बगीचे दिखा। ये सब देख मुझे ये एहसास हुआ की पापा और चाचा ने गाँव में भी अच्छी खासी संपत्ति इकठ्ठा कर ली थी। चाचा ने बातों बातों में मुझसे कहा – ये सब तेरा ही है।
मैंने कहा – मेरा अकेले का थोड़े ही है। सबका है। बहनो का भी उतना ही हक़ है। चाहे वो श्वेता हो या फिर सुधा या सरला दी। और हम सब तो आपके बच्चे ही हैं।
चाचा ये सुन कर खुश हो गए। कुछ देर यूँ ही घूमने फिरने के बाद हम फिर से खेतों के बीच बने फार्म हाउस में पहुँच गए।
मैं – तुम्हारी सहेली आई नहीं ?
श्वेता – बड़ी जल्दी है तुम्हे ? मेरे साथ समय बिताना भी भरी पड़ रहा है ?
मैं – सुबह बोला था न। तुम राजी हो जाओ तो दुनिया छोड़ दू।
श्वेता – और वहां घर पर जो सुधा दीदी के कोख में पल रहा है उसका क्या ?
मेरे पास जवाब नहीं था। सुधा को सबका ख्याल था। मैंने कुछ सोच कर कहा – अब तुम्हे ये बुरा नहीं लगता कि मैंने घर में और बाहर कईओ के साथ सम्बन्ध बना लिए ?
श्वेता – पता नहीं। मैं तो खुद ही समझ नहीं पा रही हूँ कि हम बहन के बीच का ये कैसा सम्बन्ध हो गया है।
मैंने कहा – चाची पता नहीं क्यों बोल रही थी की तुम मेरी हो।
श्वेता – उनका क्या ? वो खुद ही तुम्हारी हो चुकी है।
मैं – नहीं उनका कुछ और ही मतलब था। पूछूंगा कभी। पर तुम्हे क्या हो गया है , तुम तो मेरे लिए चुतों का इंतजाम किये जा रही हो।
श्वेता – अब इतना बड़ा लंड रखा हुआ है तो उससे कुछ चुतों का भला हो जाए तो ही अच्छा है। वैसे भी तुमने कहा था की मैं तुम्हारी मदद कारु
मैं – पर कुँवारी तो तुम्हारी है सिर्फ।
श्वेता – डोंट वरि। रजनी की सील पैक है। और दीप्ति मैम की बिटिया भी दिलवाऊंगी।
मैं – मुझे उन सबमे कोई इंटरेस्ट नहीं अगर तुम अपनी सील तुड़वा लो।
श्वेता – मुझसे पहले कम से कम तीन कुँवारी सील टूटेगी।
मैं – तीन ?
श्वेता – हाँ , ये रजनी, दीप्ति मैम की लड़की तारा और सोनिया।
मैं – तुम पागल हो गई हो क्या ?
श्वेता – तुम्हे जो समझना है समझो।
हम दोनों अभी बातें ही कर रहे थे कि मुनमुन गेट खोल कर अंदर दाखिल हुई। मुनमुन ने एक साडी पहन रखी थी। वो काफी सज धज कर आई थी।
श्वेता ने उसे देखते ही कहा – ऐसे सज धज के आई है मेरी लाडो जैसे सुहागरात हो।
मुनमुन – हीहीहीहीही सुहागरात ही तो है।
वो आकर हमारे बगल में बैठ गई। हम सब पेड़ की छाँव में सीमेंटेड बेंच पर बैठे थे। एक तरफ मैं, फिर श्वेता और मुनमुन उसके बगल में आकर बैठ गई। श्वेता ने एक लम्बा स्कर्ट और टी-शर्ट डाल रखा था।
श्वेता मुनमुन के कान में धीरे से – साफ़ किया है न ?
मुनमुन – कितनी बार तो पूछ चुकी है। एकदम साफ़ है। वैसे भी मेरे पति के अलावा किसी और ने नहीं चोदा है , इतना मत डर।
श्वेता – कितनी बड़ी झूटी है, रजनी बता रही थी की तेरा भाई ले चूका है।
मुनमुन – तुझे पता तो है गाँव में तो सब बढ़ा चढ़ा कर बोलते हैं। भाई ने तो सिर्फ दूध पिया है।
श्वेता – और सिर्फ दूध पीकर छोड़ दिया।
मुनमुन – हाँ , जिद्द तो कर रहा था पेलने की पर उसका मुठ मार देती हूँ। कभी कभी दूध के बीच में फंसा निकाल देती हू। पर चोदने नहीं दिया है।
ये सब सुनकर मेरा लंड खड़ा हो गया। हर घर में बहन चुद रही है। साले भाई जैसे ही बहन दूध देने वाली होती है , पीछे पड़ जाते हैं। यहाँ मुझे दूध के चक्कर में अपनी ही बहन को प्रेग्नेंट करना पड़ गया। मैं अभी सोच ही रहा था की श्वेता उठी और कही मैं झूला झूलने जा रही हूँ।
श्वेता सामने पेड़ पर लगे झूले पर चढ़ गई।
मैंने मुनमुन से कहा – तुम्हे झूला नहीं झूलना है।
मुनमुन – उसी के लिए तो आई हूँ। झूला न।
मैं – पहले दूध पीला।
मुनमुन – आजा मेरे बच्चे , पी ले। सुबह से तेरे लिया ही बचा कर रखा है। अपने बच्चों तक को नहीं दिया।
मैं उसके गोद में सर रख कर लेट गया। उसने मेरा सर अपने आँचल के अंदर लिया और ब्लॉउस ऊपर करके एक मुम्मा निकाल अपना निप्पल मेरे मुँह में डाल दिया। मैंने जैसे ही जीभ लगाया , एक धार मेरे मुँह में गई। मैंने बचपन में माँ का दूध पिया था। उसकी याद कम ही रह गई थी। लीला दी का भी दूध पी नहीं पाया था। मुझे मजा आने लगा था। मैं बड़े चाव इ उसका दूध पी रहा था। मैंने उसके दुसरे मुम्मे को अपने हाथ से दबाना चाहा पर मुनमुन को तकलीफ लगी। उसने बिना ब्लॉउस और ब्रा खोले ही स्तनपान करना शुरू कर दिया था।
उसने कहा – रुक , ब्लॉउस खोल देती हूँ , फिर खेलना।
जब तक वो अपनेब्लाउज को खोल रही थी तबतक मैं उसके पेट से खेलने लगा। उसकी नाभि भी बड़ी थी। मैं उसे कभी जीभ से चाटता तो कभी पेट पर आवाज निकालता।
मुनमुन- श्वेता , तेरा भाई तो औरत के हर अंग से खेलना जानता है।
श्वेता – अभी तूने इसे देखा कहाँ है।
मुनमुन के दोनों मुम्मे आजाद थे। मैंने अब एक से खेलना शुरू किया और एक को पीना।
मुनमुन – अरे भाई दूध बर्बाद होगा ऐसे तो। ऐ श्वेता , तुझे भी पीना है तो आजा।
श्वेता ने कुछ देर देखा , फिर मुझसे बोली – राज इतनी दुधारू गाय का दूध बर्बाद क्यों कर रहा है। ठीक से दूह।
श्वेता झूले से उतर कर कमरे में चली गई। उसने कमरे से एक बर्तन उठा लिया था। वो फिर ट्यूबवेल से बर्तन धोकर हमारे पास आई और बोली – चल इसे दूहते हैं।
श्वेता ने फिर मुनमुन को वहीँ बेंच पर हाथ रखवा कर चौपाया सा बना दिया। पहले तो मैं बेंच पर लेट गया उसके मुम्मे मेरे मुँह पर लटक रहे थे। श्वेता ने निचे हाथ लगा कर उसके एक मुम्मे को दूहना शुरू किया। उसके दूध कि धार मेरे मुँह में आने लगी। श्वेता ने मुझे हाथ लगाने से मन कर दिया था। उसने दोनों मुम्मे दुहने के बाद कहा – बड़ा दूध है रे मुनमुन।
मुनमुन – आह आह। कहा था न कल रात से बचा कर रखा है।
अब श्वेता ने मुझसे कहा – तू भी दुहेगा।
मैं निचे से निकल मुनमुन के सामने बैठ गया। श्वेता ने बर्तन मुम्मो के निचे बेंच पर रख दिया। अब मैंने अपने दोनों हाथो से मुनमुन को दूहना शुरू कर दिया।
मुनमुन – आराम से दबाओ। प्यार से। आह। निकाल लो मेरा दूध। मैं तुम्हारी पालतू गाय हूँ। निकाल लो। आह , दूहो।
मैं – मुझे पता नहीं था दुहने में इतना मजा आता है। मस्त दुधारू गाय है रे तू मुनमुन।
मुनमुन – इस्सस बहनचोद लौंडो को बड़ा मजा आता है पीने में भी और दुहने में भी। मेरा भाई भी रोज निकाल कर पीता है। आह आह।
श्वेता ने तब तक मुनमुन के कपडे उतार दिए थे। वो सिर्फ एक पेटीकोट में रह गई थी। श्वेता ने उसके गांड पर एक जोरदार थप्पड़ मारा और कहा – तेरा पिछवाड़ा भी मस्त है रे। तेरा मरद गांड भी मारता है क्या ?
मुनमुन- आह आह , नहीं। उसने कोशिश तो की थे पर दिया नहीं मैंने।
मुनमुन अब छुडास हो चुकी थी। मुनमुन ही क्या मेरा लंड भी काफी देर से पैजामे में बंधा बंधा कसमसा रहा था।
मुनमुन बोली – तेरा लंड भी निकाल न।
मुझे तो इसी वक़्त का इंतजार था। मैं बेंच के दोनों तरफ पैर करके बैठा था। मैंने तुरंत ही अपने सारे कपडे उतार दिया। मेरा लंड अपने पुरे अकार में बाहर लहरा रहा था।
मुनुमन – हाय दैया, इतना बड़ा।? कैसे लुंगी मैं ?
मैं बोला – पहले मुँह में ले, चूत तो अपने आप ले लेगी। मैंने उसका मुँह पकड़ कर अपने लंड को उसमे मुँह में ठूस दिया। सिचुएशन ये थी की
मुनमुन ने बेंच के एक कोने पर गांड उठाये हुए थी और झुक कर मेरे लंड को चूस रही थी। श्वेता ने तब तक उसके पेटीकोट को भी उतार दिया था। श्वेता ने उसके चूत में पीछे कड़ी होकर ऊँगली करने लगी।
मुनमुन ने लंड छोड़ दिया और पीछे देखते हुए कहा – साली कितनी बदल गई है तू। पहले मेरी चूत की तरफ देखती भी नहीं थी। आज ऊँगली कर रही है।
श्वेता – चुप रंडी , राज का लंड चूस। ज्यादा बोलेगी तो बांस की बल्ली दाल दूंगी।
मैंने कहा – बांस को गिला ही तो कर रही है ये।
श्वेता हंसने लगी। उसने उसके चूत और क्लीट को सहला सहला कर एकदम पनिया दिया था। कुछ देर बाद मुनमुन ने कहा – अब मुझसे बर्दास्त नहीं होता चोद दे मुझे।
मैं उठा और उठ कर श्वेता की जगह चला गया। मैने पीछे से मुनमुन की चूत में अपना लंड डालना शुरू किया। अभी थोड़ा ही लंड गया होगा मुनमुन चिलाने लगी – साले सच में बांस है क्या ? फटजाएगी मेरी चूत।
श्वेता अब मेरी जगह मुनमुन के सामने बैठी थी। उसने अपनी पैंटी निकाल कर मेरी तरफ उछाल दिया और मुनमुन के मुँह को अपने चूत पर लगा दिया। वो बोली – हल्ला मत काट मेरी चूत चाट। भाई अब पेल देखती हूँ कैसे चिल्लाती है।
मैंने भी हचक कर एक हे बार में पूरा लंड अंदर कर दिया।
मुनमुन चीख पड़ी – बहनचोद, अपनी माँ की चूत समझ रखा है जो पूरा अंदर घुस गया। फाड़ देगा क्या ?
श्वेता – चुप छिनाल , चूत चाट और मुझे भी मजे दे।
मैं श्वेता की चोट देखना चाह रहा था। श्वेता मेरे इरादे भांप गई। बोली – पैंटी दिया न। अभी उसी से संतोष करो। सामने जो चूत है उसे पेलो।
मैंने कहा – जैसा तुम कहो मेरी जान। मैंने उसकी पैंटी को मुँह में दांतो तले दबा लिया और मुनमुन को छोडने लगा।
अब मुनमुन को मजा आ रहा था। उसने श्वेता की चूत चाटने के साथ साथ बोलना शुरू किया – आह आह। सडप सडप। चोद दो। फाड़ दो मेरी चूत। लंड तो तेरा ही है। सडप सडप। बाकी तो सब नुन्नी है तुम्हारे सामने। आह आह। क्या मस्त चूत है तेरी बहन की। पहले कई बार माँगा साली से। पर भाव नहीं देती थी। अब देखो मस्त चटवा रही है। सडप सडप।
श्वेता – आह इस्सस , चुप साली रंडी। चाट , अंदर तक डाल चूस। आह आह। भाई। चोदोइसे तेज धक्के लगाओ , तभी ये साली रंडी मेरा चाटेगी।
मुनमुन – आह आह। हाँ मेरो फाड़ दो। अपनी बहन की भी फाड़ना उसके बाद । मस्त चुदास हो राखी है। आह आह।
फिर वो श्वेता की चूत चाटने में लग गई। श्वेता की चोट पहले से गरम थी। वो जल्दी ही आ गई। वो वहीँ निढाल हो गई। मुनमुन भी दो तीन बार आ चुकी थी। मेरा लंड भी भी कड़क था। मैंने अब मुनमुन का हाथ पकड़ा और कमरे में लेजाकर वहां बिछे बिस्तर पर पटक दिए। अब वो चित लेती थी और मैं उसे चोद रहा था। कुछ ही देर में श्वेता भी वहां आई। वो श्वेता के बगल में बिस्तर पर बैठ गई। उसने अपना हाथ फ्रॉक के अंदर से चूत में डाला और अपना जूस हाथो और उंगलियों में निकाल कर मेरी तरफ बढ़ा दिया।
मैंने उसके हाथ को चाटने लगा। श्वेता ने मादक अंदाज में कहा – कैसा है ये स्वाद ?
मैं – मस्त। ये पिलाती रहो तो भूख प्यास सब मिट जाये।
मुनमुन – बहनचोद , मेरा पानी कई बार निकल चूका है। तू अपनी बहन ही चोद ले।
मैं – बहन तो चोदुंगा ही रंडी पहले तेरा तो फाड़ दू।
मुनमुन – साले फट तो चुकी है।
मैंने फिर कुछ और धक्के लगाए। श्वेता को लगा की मुनमुन की हालत सच में खराब हो जाएगी। वो बिस्तर पर थोड़ा पीछे गई। उसने अपना फ्रॉक कमर से ऊपर करके अपने चूत के दर्शन कर दिए। एकदम चिकनी और कुँवारी चूत। श्वेता बोली – कैसे जायेगा ये इतना बड़ा मेरी चूत में ? तुम सच में मेरी भी तो नहीं फाड़ोगे न। मेरी मुनिया देख तेरा लौड़ा कैसे चोदता है। संभल के रह वार्ना तेरी भी फाड़ेगा।
उसकी उत्तेजक बातें सुन मेरे लंड ने पानी छोड़ना शुरू कर दिया। मैं वहीँ मुनमुन के ऊपर ही लेट गया। मेरा लंड अब भी उसके चूत में था और माल निकलने के बाद भी टाइट था। मुनमुन ने अपने थन मेरे मुँह में डाल दिया। मैं धीरे धीरे उसे चूसने लगा। श्वेता कमरे से बाहर चली गई थी।
आज मैंने तजा दूध ही नहीं पिया था बल्कि मस्त दुधारू गाय जैसी लौंडिया भी पेली थी। बहुत मजा आया था।

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