मेरी माँ बहने और उनका परिवार – Update 2

मेरी माँ बहने और उनका परिवार - Family Sex Story
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कुछ दिनों बाद की बात है एक चाचा और चाची गाओं से हमारे लिए अनाज लेकर आये। उनकी लड़की  यहीं गर्ल्स कॉलेज के हॉस्टल में रहकर ग्रेजुएशन कर रही थी।  उसके कॉलेज में सभी लड़कियां बोर्डिंग में रहकर ही पढ़ती थी।  बाहर रहने की परमिशन नहीं थी।  पर पेरेंट्स आकर मिल सकते थे।  चाचा चाची  ने सोचा था की यहाँ आकर श्वेता  से भी मिल लेंगे। दोनों घर आकर श्वेता  के हॉस्टल गए और उससे मिल भी आये।  मैं भी उनके साथ गया था।  हम सबसे मिल कर श्वेता बहुत खुश थी।  मैं उसके कॉलेज में जाकर अचम्भे में था।  चारों तरफ लड़कियां ही लड़कियां।  वैसे तो मेरा कॉलेज को-एड था और मेरे यहाँ भी लड़कियां थी पर यहाँ तो सिर्फ लड़कियां ही लड़कियां।  हर तरह की लड़कियां।  छोटी, लम्बी , दुबली मोट।  किसी का सीना सपाट तो किसी के वो बड़े बड़े मुम्मे।  हमें हॉस्टल जाने की परमिशन नहीं थी।  कॉलेज कैंपस में गेट के पास ही ऑफिस में मिलने दिया गया।

मुझे देख कर श्वेता  काफी खुश हो गई। कहा – भैया कितने बड़े हो गए हैं ।

मैंने कहा – तू भी तो बड़ी हो गई है  ।

वो चाचा और चाची से बातें कर रही थी और मैं बाहर दिख रही परियों को ताड़ रहा था।  चाचा थोड़ी देर बाद बाहर चले गए ।  मैं और चाची बैठे श्वेता  से बातें कर रहे थे।

श्वेता ने मुझे ताड़ते देख कर कहा – बस कर रे।  भइआ आपके कॉलेज में भी लड़कियां होंगी।  मन नहीं भरता जो यहाँ देख भूखे नंगे की तरह देख रहे है।

मै खोया हुआ था।  न जाने क्या हुआ मैंने जवाब दिया – अरे वहां लड़कियां हैं यहाँ तो माल है।  हर तरह का माल।  और सच कहूँ इन्हे देख कर नंगे हो जाने का मन करता है।

मेरा जवाब देखा कर दोनों हक्के बक्के रह गए।  श्वेता ने जोर की चपत मेरे सर पर लगाई और बोला – माँ भैया कितने बिगड़ गए है।  चाची को बोलना कितनी घटिया बात करते हैं ।  इनकी तो पिटाई होनी चाहिए।

तब मुझे अहसास हुआ की मैं क्या बोल गया।  पर तीर तो कमान से निकल पड़ा था।

चाची बोलीं – जाने दे , जवान हो रहा है।  लड़का है लड़कों से गलती हो जाती है।

श्वेता  – माँ, अगर मैं ऐसा कुछ बोल दूँ या कुछ गलत हरकत कर जाऊं तो तू तब भी मुझे माफ़ कर देगी।

चाची – भाई बालिग़ हो गई हो।  मर्जी से जो करो।  बस जो करो उसके लिए जिमेदार तुम ही होगी।  बस प्रेग्नेंट मत हो जाना।

श्वेता और मैं चाची की बात सुन कर दांग थे।  गाओं में रहने वाली इतनी खुले दिमाग की हो सकती है ये उम्मीद नहीं थी।

श्वेता – माँ आप निश्चिन्त रहो।  मैं ऐसा कुछ भी नहीं करुँगी।  और जो भी करुँगी अपने होश में करुँगी आपको बता कर करुँगी।  मेरी अच्छी माँ आपसे कुछ भी नहीं छुपाउंगी।  पर इन भाई साहब पर भरोसा नहीं।  ताऊ जी इतने अच्छे थे कहाँ से नालायक पैदा किया है।

मुझे सुन कर गुस्सा आ गया।  मैंने कहा – बताऊँ कहाँ से पैदा किया है ?

चाची – बस करो लड़ना झगड़ना।  वैसे भी तुझसे बड़ा है ये।

श्वेता –  थोड़े ही तो बड़े हैं।  और सिर्फ उम्र में बड़े हैं।  कॉलेज में सेम ईयर में हैं।

मैं – न न तू तो मुझसे सीनियर है।

तभी चाचा आ गए।  बोले – लड़ना , झगड़ना हो गया हो तो चलें।

निकलने से पहले दोनों हॉस्टल के वार्डन से मिले और मेरा परिचय करवा दिया।  उन्होंने  इस बात की परमिशन ले ली की कभी कभी श्वेता हमारे घर आ सकती है और मुझे अंदर आने की परमिशन भी कभी कभी मिल जाए ताकि घर का खाना पहुंचा सके।

अगले दिन चाचा गाओं चले गए।  माँ ने चाची को रोक लिया था।  कहा – हम दोनों सुधा और सरला के बाद से अकेले रह गए हैं।  रह जाएँगी तो थोड़ा मन लग जायेगा।  चाचा मान गए।  उनके खेत में काम करने वाला एक परिवार वहीँ उनके घर में काम के लिए ही रहता था।  तो खाने की दिक्कत नहीं थी।  चाची ने कहा थोड़ी शॉपिंग भी कर लेंगी और श्वेता से एक आध बार और मिल लेंगी।  माँ ने कहा उसे किसी दिन घर भी ले आएंगे।

चाची ने दुसरे ही दिन ताड़ लिया की माँ के अंदर बदलाव है।  मुझसे नजदीकियां बढ़ने की वजह से वो खुश रहने लगी हैं।  चेहरे में निखार भी आ गया है। मैं तो खैर सबका दुलारा था।  सबके सामने माँ से लिपटता चिपटता था फिर भी अब मेरी हरकतों में थोड़ी वासना जुड़ चुकी थी।  चाची ने गौर कर लिया था की मैं माँ को किस नज़रों से देखता हूँ।

एक दिन रात में खाना बताते समय चाची ने माँ से पूछ ही लिया – दीदी बड़ा निखर गई हो।  लगता है प्यार हो गया है किसी से।

माँ –  क्या रे छोटी , मुझ बुढ़िया से प्यार ? प्यार तो राज के पापा करते थे।  उनके जाने के बाद तो अकेली रह गईं हूँ

चाची – अकेली कहा राज है न। अब तो वो भी बड़ा हो गया है

माँ – हाँ वही तो एक सहारा है।  वो है तो मन लगा रहता है।

चाची – लगता है बहुत प्यार करता है तुमसे

माँ ने चाची की तरफ देखा  उनके सवाल को समाजः तो गईं पर बोली – क्या मतलब है तेरा? बेटा है प्यार तो करेगा ही।

चाची – हाँ काश मेरा भी एक बेटा होता ऐसे ही प्यार करता।

माँ समझ गई चाची को शक है।  पर चाची से कोई ख़ास परदा नहीं था।  दोनों शुरू से सखी जैसी ही थी।

माँ बोली – कर ले एक बेटा।  अभी तेरी उम्र ही क्या है।  गाओं में वो फुलिया है न अब तक तो बच्चे पैदा कर रही है। पिछले साल ही तो उसकी बहु और उसने एक साथ बच्चा पैदा किया है।  बहु को लड़की हुई और फ़ुलिआ ने तो लड़का जन दिया।

चाची  – फुलिया की बात तो मत ही करो। पता नहीं किसका किसका पैदा कर रही है।  उसके पति तो दिन भर नशे में रहते हैं।  वो तो भला हो लड़के मेहनती हैं और घर में अनाज और पैसो की कमी नहीं रखते वार्ना इतने बच्चे कैसे सम्भले।  सब अपने भाई को बच्चे जैसे ही पालते हैं।

माँ – कहीं उनके ही तो नहीं।

चाची – हाँ जिज्जी , फुलिया के दोनों लौंडे माँ के आजु बाजू ही तो रहते हैं।  महारानी की तरह रहती है।।  सुनते तो हैं बहुएं दासी की तरह हैं।  दोनों बेटे जब मन करता है उनके पास रहते हैं  नहीं तो माँ के पास।

माँ और चाची हंसने लगी।  माँ बोली – तो क्या विचार है।  अगले साल श्वेता के लिए भाई ला रही हो।

चाची – जिज्जी , ऐसे साधु से पला पड़ा है पूछो मत।  मेरे पास तो कभी कभी आते हैं।  मेरा मन भी करता है तो कहते हैं उम्र का लिहाज करो।  अब बताओ भला क्या ही उम्र हुई है मेरी।

माँ – ओह्ह , कहीं कोई चक्कर तो नहीं

चाची – क्या पता।  पर लगता नहीं है। अरे जो मन में आये वो करे पर मुझे खुश रखे , पर ससुरे से कुछ होता नहीं है।

माँ हँसते हुए बोली – ससुर होते तो तेरा काम हो जाता।  अरे इतने लोग खेतों में काम पर लगा रखा है।  किसी से अपने खेत की जुताई करवा ले।  चलवा ले किसी का हल अपने ऊपर भी। फिर माँ हंस दी।

चाची – जिज्जीीीी।  आप भी न।  कितनी बदनामी होगी।  इतनी इज्जत गाओं में है अब मजदुर ही बचे हैं इन सब के लिए। आपका बढ़िया है।  बेटा ख्याल रख रहा है मेरा मजाक उड़ा रही हो।

माँ – राज तेरा भी तो बेटा है।  रखवा ले ख्याल।  मैंने तो जना है।  कोख से पैदा किया है कुछ सीमाएं हैं।  तेरा क्या पटा ले उसे।

चाची – तो मैं जो सोच रही थी सही है ?

माँ – तुझसे क्या छुपाना।  लड़का जवान है।  इधर उधर मुँह मारेगा ही।  मैंने तो कहा की कोई पटा ले पर बेचारा अकेला ही है।  बस कभी कभी बदन दबवा लेती हूँ।  लड़का उससे ही खुश हो जाता है।  वैसे भी बेटे से बदन दबवाने में कैसी शर्म। सुधा और सरला के बाद वही तो रहता है हमेशा मेरे साथ।  माँ ने थोड़ा हिंट भी दे दिया और काफी कुछ छुपा भी लिया।

चाची – हाँ , आज श्वेता के कॉलेज में भी मुँह फाड़ लड़कियां देख रहा था।  लग रहा था कोई न्योता दे दे तो चढ़ ही जाये।

माँ – इस उम्र में लड़की न मिले तो घायल शेर ही होते हैं।  चढ़ा ले अपने ऊपर।  मेरे बेटे की गर्मी भी निकल जाएगी।  क्या पता बहार फिर काम मुँह मारे।

चाची – तुम्ही काहे नहीं दे देती।

माँ – मेरा अपना है वो तू भी कैसी बात करती है।

चाची – अगर मेरा होता तो चढ़ा लेती ?

माँ थोड़ी देर चुप रही फिर बोली – तुझे क्या पता कैसे अकेले रात काटती हूँ। भरी जवानी में अकेली हो गई।  अंदर की आग बस जलती है और खुद ही बुझ जाती है।

चाची खामोश हो गईं। माँ के मन में ना जाने क्या था रात खाना खाने के बाद टीवी देखते समय बोली – सर दर्द कर रहा है।

मैं आदतन बोल पड़ा – मालिश कर दूँ

चाची बोलीं – मैं कर देती हूँ।  जब मैं चली जाउंगी  तो सर दबाना या मालीश करना या उनके ऊपर चढ़ जान।  पर अभी मुझे करने दे।

मैं शर्मा गया और तेल लेकर दे दिया।

अब माँ  सोफे के पास निचे बैठी थी और चाची उनके सोफे पर बैठ कर उनके सर पर तेल रख कर चम्पी करने लगीं।  थोड़ी देर सर दबाने के बाद चाची ने माँ के कंधे और गर्दन की मालिश शुरू कर दी।  माँ की साडी का पल्लू उन्होंने हटा दिया था।  खुद भी चुकी झुक रही थी तो उनका पल्लू बार बार गिर जा रहा था।  पल्लू की गिरते ही उनके बड़े बड़े मुम्मे साइड से लटक जाते।  मेरे लिए नज़ारा बढ़िया था।  दो दो भरी भरी बदन वाली सामने थी।  माँ के मुम्मे मैंने चूस चूस कर और दबा दबा कर बड़े कर दिए थे। चाची के भी ठीक साइज के थे पर उतने बड़े नहीं थे।  मुझे देख कर चाची अपने पल्लू ठीक भी कर लेती थी पर बार बार माँ के चेहरे पर गिर रहे थे।

माँ बोली – अरे हटा दे न पल्लू कौन सा ऐसा माल  छुपाना है जो बार पल्लू  ले रही हो।

चाची – माल तो आपका है।  लगता है बढ़िया सेवा होती है।  आपको तो सेवादार से छुपाना ही नहीं है। बड़े करने में उसी का हाथ है।

माँ – तेरे भी तो बड़े हैं।  और बड़े करवाने हैं तो करा ले सेवा।

चाची – मेरे कहाँ आपके जितने बड़े।

तभी माँ मेरे से बोल पड़ी – राज ये बता चाची के मुम्मे बड़े नहीं हैं क्या ? मेरे ज्यादा बड़े हैं या उनके ?

चाची भी माँ के खेल में शामिल हो गईं।  उन्होंने अपना पल्लू पूरा हटा लिया और पुछा – देख बता किसके ज्यादा बड़े हैं।  मुझे तो जिज्जी के ज्यादा बड़े लगते हैं।  तूने काफी साल तक उनका दूध पिया है।

माँ – हां बता।

मुझे अब मजा आने लगा था मै पहले तो माँ से डर रहा था पर लगा की उनके मन में कुछ है  तभी ये ड्रामा हो रहा है।

मैंने शर्माते हुए कहा – दोनों के मुम्मे सुन्दर हैं और बड़े हैं।

चाची – पर जिज्जी के बड़े है न।

मैंने जान बुझ कर कहा – ऐसे कैसे पता चलेगा।

माँ – तो कैसे पता चलेगा।  इंची टेप लेकर आ।  नाप ही ले।

मैं भाग कर बेडरूम से इंच टेप लेकर आया।  देखा तो दोनों साडी उतार कर सिर्फ ब्लॉउस और पेटीकोट में थीं।

मैंने सबसे पहले इंच टेप लिया और माँ के सीने का बूब्स के निचे का साइज लिया।  उनका साइज ४४ निकल आया।  फिर मैंने उनके ब्लाउज के ऊपर से ही बूब्स  के ऊपर से साइज लिया सीने से लगभग ६ इंच ज्यादा था इ साइज़।

फिर मैं चाची के पास पहुंचा उनका साइज लेते समय मेरे हाथ कांप रहे थे।  मैं थोड़ा घबराया सा था।  माँ और बहनो के अलावा किसी के इतने नज़दीक नहीं आया था मैं।

चाची – अरे घबरा क्यों रहा है।  सही से ले वर्ण साइज गड़बड़ आएगी।

मैंने उनके सीने का नाप लिया साइज ४२ था।  अब बारी मुम्मो के ऊपर से लेने की थी।

माँ ने कहा – ठीक से लेना।  मेरी जैसे ली वैसे ही।  डर मत।

मैंने टेप उनके मुम्मो के ऊपर से लगाया और साइज लिया सीने से ५ इंच ज्यादा थे।  डी साइज।

चाची फिर से बोली – अरे आराम से ले।  ठीक से ले।

मैंने भी देर तक नाप लिया और उस चक्कर में उनके मुम्मे खूब छुए।  माँ चाची को देख कर मुश्कुरा रही थी।  चाची की धड़कने थोड़ी बढ़ गईं थी।  उनके शरीर को शादी के बाद पहली बार चाचा के अलावा कोई छू रहा था।  वो भी एक जवान मर्द।

खैर नपाई पूरी हुई।  मैंने नाप बताया तो चाची उदास होकर बोली –  देख लिया मैं न कहती थी आपके बड़े हैं।

मैंने कहा – चाची आपके दुद्दू भी सुन्दर हैं।

चाची – हाँ माँ के तो तूने चूस चूस के और बड़े कर दिए हैं। 

न जाने फिर माँ के मन में क्या आया वो बोली – सही कर रहा है।  इसके सुन्दर और गोल भी है।  चल जरा गोलाई नाप।

चाची  बोली – जाने दो न फैसला हो तो गया है।

माँ- ना अब नाप ही रहा है तो ठीक से नपे।  कह कर माँ चाची के ब्लाउज का हुक खोलने लगी।  कुछ क्षण तो चाची ने ना नुकुर की फिर उन्होंने माँ को अपने हुक खोलने दिया और खुद माँ के ब्लॉउस का हुक खोल दिया। दोनों ने एक दुसरे के ब्लाउज को उतार दिया।

अब दो टॉपलेस अप्सराएं मेरी तरफ मुँह करके खड़ी थी और अपने मुम्मे दबवाने के लिए तैयार थीं।  दबवाना ही तो था नाप जोख तो एक बहाना था। ना जाने दोनों क्या सोच कर रखीं थी।

मैं दोनों को देख रहा था।  माँ के बड़े बड़े बूब्स के सामने चाची के बूब्स थोड़े छोटे थे।  पर माँ सही कह रही थी।  चाची अब भी पुरे शेप में थी।  गाओं का काम काजू शरीर था।  भरे भरे गोल चुचे थोड़े से भी नहीं लटके थे।  वैसे तो वो भी माँ की तरह ब्रा नहीं पहनती थी।  पर उनके चुचे अब भी पुरे तने हुए थे।  निप्पल माँ से छोटे थे पर गहरे काले थे।  उनके ओरोला की गोलाई माँ के लगभग बराबर ही थी।

पर माँ तो कमाल थी या यूँ कहें माल थी।  मुम्मे मस्त बड़े बड़े।  बिना ब्रा के ऐसे हिलते थे जैसे भूकंप ला दें।  कम से कम मेरे दिल में तो ला ही देती थी।  वैसे तो वो मेरे सामने टॉपलेस होने में संकोच नहीं करती थी पर आज गजब ही ढा रही थी।  उनके निप्पल एक इंच से भी ज्यादा।  जैसे गाय का थन ।  मैंने ही चूस चूस कर निकाले थे।  जैसे कोई सितार भी बजा सकता हो।  एक कपडे का क्लिप आराम से लटक सकता था।

मेरा सबसे पसंदीदा काम माँ को चौपाया बना कर बछड़े जैसे उनके  दूध पीना था।  उसके बाद मैं ग्वाला बन कर उन्हें दूहता था।  इस लिए उनके मुम्मे थोड़े लटक भी गए थे और निप्पल भी लम्बे बड़े हो गए थे। एक बार जब सरला दी की शादी नहीं हुई थी तभी की बात है मैं माँ के कमरे में सोया था और रात में उन्होंने मुझे दुध पिलाया था। माँ सुबह जब उठी तो उन्होंने ब्लाउज का ऊपर का हुक गलती से खुला छोड़ दिया था।  सरला दीदी जब उठ कर  किचन में गई और माँ की हालत देख कर बोली – अरे मेरी माँ कितना लटक गए हैं तेरे मुम्मे।  ब्रा पहना करो शेप में रहेंगे।  लटक गए हैं जैसे पेड़ से पका हुआ कटहल लटका है।

माँ – अरे मुझ बुढ़िया के अब नहीं लटकेंगे तो कब लटकेंगे।  क्या शेप में रहना।  तुम सही ढंग से रहो सही साइज की ब्रा पहनो अभी शादी होनी है तुम्हारी।  तुम भी तो अक्सर बिना ब्रा के घूमती हो।

सरला दी – पर मेरे लटके तो नहीं है।

माँ – शादी हो जाने दे फिर तेरा मियां दबा दबा कर बड़ा कर देगा।  बाद में बच्चे पैदा होने के बाद बाप और बच्चा दोनों खींच खींच कर लटका देंगे।

सरला दी – जैसे तुम्हारा बच्चा खींच खींच कर बड़ा कर रहा है।

माँ – चुप।  कुछ भी मन में आये तो बोलती है।

खैर वर्तमान पर आते हैं।  मेरे हाथ में इंची टेप और सामने दो जोड़ी मुम्मे।  देख कर मेरा लौड़ा पैजामे से बाहर आने को तैयार था।  मुझे समझ नहीं आ रहा था की लंड एडजस्ट करूँ या फिर नपाई करूँ।

मैंने कहा – चाची आपके दुद्दू भी सुन्दर हैं।

चाची – हाँ माँ के तो तूने चूस चूस के और बड़े कर दिए हैं। 

न जाने फिर माँ के मन में क्या आया वो बोली – सही कर रहा है।  इसके सुन्दर और गोल भी है।  चल जरा गोलाई नाप।

चाची  बोली – जाने दो न फैसला हो तो गया है।

माँ- ना अब नाप ही रहा है तो ठीक से नपे।  कह कर माँ चाची के ब्लाउज का हुक खोलने लगी।  कुछ क्षण तो चाची ने ना नुकुर की फिर उन्होंने माँ को अपने हुक खोलने दिया और खुद माँ के ब्लॉउस का हुक खोल दिया। दोनों ने एक दुसरे के ब्लाउज को उतार दिया।

अब दो टॉपलेस अप्सराएं मेरी तरफ मुँह करके खड़ी थी और अपने मुम्मे दबवाने के लिए तैयार थीं।  दबवाना ही तो था नाप जोख तो एक बहाना था। ना जाने दोनों क्या सोच कर रखीं थी।

मैं दोनों को देख रहा था।  माँ के बड़े बड़े बूब्स के सामने चाची के बूब्स थोड़े छोटे थे।  पर माँ सही कह रही थी।  चाची अब भी पुरे शेप में थी।  गाओं का काम काजू शरीर था।  भरे भरे गोल चुचे थोड़े से भी नहीं लटके थे।  वैसे तो वो भी माँ की तरह ब्रा नहीं पहनती थी।  पर उनके चुचे अब भी पुरे तने हुए थे।  निप्पल माँ से छोटे थे पर गहरे काले थे।  उनके ओरोला की गोलाई माँ के लगभग बराबर ही थी।

पर माँ तो कमाल थी या यूँ कहें माल थी।  मुम्मे मस्त बड़े बड़े।  बिना ब्रा के ऐसे हिलते थे जैसे भूकंप ला दें।  कम से कम मेरे दिल में तो ला ही देती थी।  वैसे तो वो मेरे सामने टॉपलेस होने में संकोच नहीं करती थी पर आज गजब ही ढा रही थी।  उनके निप्पल एक इंच से भी ज्यादा।  जैसे गाय का थन ।  मैंने ही चूस चूस कर निकाले थे।  जैसे कोई सितार भी बजा सकता हो।  एक कपडे का क्लिप आराम से लटक सकता था।

मेरा सबसे पसंदीदा काम माँ को चौपाया बना कर बछड़े जैसे उनके  दूध पीना था।  उसके बाद मैं ग्वाला बन कर उन्हें दूहता था।  इस लिए उनके मुम्मे थोड़े लटक भी गए थे और निप्पल भी लम्बे बड़े हो गए थे। एक बार जब सरला दी की शादी नहीं हुई थी तभी की बात है मैं माँ के कमरे में सोया था और रात में उन्होंने मुझे दुध पिलाया था। माँ सुबह जब उठी तो उन्होंने ब्लाउज का ऊपर का हुक गलती से खुला छोड़ दिया था।  सरला दीदी जब उठ कर  किचन में गई और माँ की हालत देख कर बोली – अरे मेरी माँ कितना लटक गए हैं तेरे मुम्मे।  ब्रा पहना करो शेप में रहेंगे।  लटक गए हैं जैसे पेड़ से पका हुआ कटहल लटका है।

माँ – अरे मुझ बुढ़िया के अब नहीं लटकेंगे तो कब लटकेंगे।  क्या शेप में रहना।  तुम सही ढंग से रहो सही साइज की ब्रा पहनो अभी शादी होनी है तुम्हारी।  तुम भी तो अक्सर बिना ब्रा के घूमती हो।

सरला दी – पर मेरे लटके तो नहीं है।

माँ – शादी हो जाने दे फिर तेरा मियां दबा दबा कर बड़ा कर देगा।  बाद में बच्चे पैदा होने के बाद बाप और बच्चा दोनों खींच खींच कर लटका देंगे।

सरला दी – जैसे तुम्हारा बच्चा खींच खींच कर बड़ा कर रहा है।

माँ – चुप।  कुछ भी मन में आये तो बोलती है।

खैर वर्तमान पर आते हैं।  मेरे हाथ में इंची टेप और सामने दो जोड़ी मुम्मे।  देख कर मेरा लौड़ा पैजामे से बाहर आने को तैयार था।  मुझे समझ नहीं आ रहा था की लंड एडजस्ट करूँ या फिर नपाई करूँ।

चाची तभी माँ के मुम्मे और निप्पल देख कर बोलीं  – क्या दुधारू गाय जैसे मुम्मे हैं तूम्हारे । लगता है जैसे कोई रोज दुहता हो तुम्हे।  जाने दो नपवाना क्या।  इसमें भी तुम्ही जीतोगी।

माँ – अब खोल दिया है तो नपवा भी ले।  मन करे तो दुहवा भी ले।  चल राज नाप ले।

मैंने माँ के मुम्मो का नाप लिया।  पहले एक का फिर दुसरे का।  माँ भी अपने स्तन पकड़ कर बड़े मन से नपवा रही थी। 

फिर मैंने चाची की तरफ रुख किया।  चाची ने भी अपने हाथो से पहले एक स्तन सामने किया और मैंने उसका नाप लिया फिर दुसरे का।  इस चक्कर में मैंने उनके मुम्मे खूब दबाये।  उनके चूचक एकदम खड़े हो गए थे।

माँ ने कहा – नाप ही रहा है तो चूचक भी नाप।  मैंने तब चाची के निप्पल पकडे और उन्हें खींचा।  वो पहले से टाइट थे खड़े थे पर मैंने जान बूझकर उनको और ताना।  इस पर चाची की सिसकारी निकल गई।  उनके दोनों चुचकों को मैंने खूब निचोड़ा।  फिर माँ के चुचकों को खींचा , निचोड़ा और नापा। नपाई में तो चाची हार गई थी पर उनके हार जीत की खेल में मेरा बुरा हाल था।  मैंने बड़ी मुश्किल से खुद को काबू किया था।  मन कर रहा था निचोड़ दू उनको।  पी जाऊं उनके मुम्मे।

तभी माँ ने कहा – छोटी , दुहवाना भी है क्या ? देख सामने लार टपकाये खड़ा है।  जब तक है यहाँ पीला दे इसे दबवा ले इससे।  तेरे भी बड़े हो जायेंगे।

चाची ने खुद पर संयम रखते हुए कहा – क्या बोलती हो जिज्जी।  जाने दो।  चलो तुम्हारी पीठ की मालिश कर दू।  दर्द भाग जायेगा।

माँ – तू भी अपनी करवा ले।  राज बहुत बढ़िया मालिश करता है।

चाची बोली – देखूंगी।

माँ – अरे साथ में करवाते हैं न।  तू मेरी पीठ पर मालिश कर दे।  वो तेरी कर देगा।

मैं एकदम से तैयार हो गया बोला – हाँ हाँ चाची तुम भी तो थकी होगी।  गाओं में इतना काम होता होगा।  यहाँ हो जब तक मस्ती करो

फिर माँ वापस बैठ गईं।  उन्होंने अपना सर सेण्टर टेबल पर रख दिया और चाची उनके पीछे बैठ गईं और उनके पीठ को दबाने लगी।

फिर मैं चाची के पीछे सोफे पर।  हम एक दुसरे के पीछे रेलगाड़ी की तरह थे।  चाची माँ के पीठ पर हाथ मसल रही थी और मैंने अपने हाथ में तेल लेकर चाची को लगाना शुरू किया।  अब मैं चाची की पीछे से रगड़ता , चाची माँ को।  एक लय में पीठ की मालिश हो रही थी। 

माँ सिसकियाँ लेते हुए – छोटी अच्छा लग रहा है न ? राज अच्छे से दबा तो रहा है न।

चाची – हाँ जिज्जी , आह।  बढ़िया दबाता है राज।  अब समझ आ रहा है की आप इतना खुश क्यों रहती हैं।

माँ – अभी तो बस पीठ दबवा कर कह रही है।  बोल दूँ उसे तेरे सीने का भी बोझ हल्का करने को।   आह आह अह्ह्ह्ह मेरे जैसे बना देगा।

चाची – अब तो सब सामने है जिज्जी।  सब उसके हवाले है।  कर ले जैसा करना चाहे।

मै तुरंत सोफे से उतर कर चाची के पास निचे बैठ गया और अपने हाथो जो उनके मुम्मे पर ले गया।  जैसे ही मेरे हाथ उनके मुम्मो पर लगे चाची ने जोर की सिसकारी ली – जीजीईईईई , आह आह आह।  रआआआआज।  दबा दे मेरे लाल।

मुझे तो बस इजाजत मिलनी थी मैं अब पीछे से चाची के मुम्मे दबा रहा था। चाची ने माँ के मुम्मे दबाने शुरू कर दिए। मैंने हिम्मत करके चाची के कान के लबों को चूम लिया।  चाची – स्स्स्सस्स्स्स  रआआआआज , जान लेगा क्या।  क्या करता है।

मैं कहाँ रुकने वाला था मैंने ताबड़तोड़ चाची के गर्दन और पीठ पर दाए बाए चूमने लगा।  मेरे हाथ उनके मुम्मो पर कमाल कर रहे थे और मेरे होठ उनके पीछे। अब मुझसे उंकड़ू नहीं बैठा जा रहा थ।  मैंने अपने दोनों पैर फैला दिए और माँ और चाची दोनों को दोनों तरफ से घेर लिए।  अब मेरा लंड पैजामे के ऊपर से ही चाची की गांड पर लग रहा था।  उन्होंने पेटीकोट के नीचे पैंटी नहीं पहनी थी।  मैंने वैसे भी घर में  पैजामे की नीचे अंडरवियर नहीं पहनता था।  अब मेरा लंड भी हमलावार होकर चाची के पीछे पद गया था।

चाची – स्स्स्सस्स्स्स , आह आह आह , जिज्जी राज तो बड़ा हो गया है।

माँ- हाँ काफी बड़ा हो गया है।  राजेश से बड़ा या छोटा। 

वो दोनों मेरे लंड की बात कर रही थी।

चाची – इनका तो कुछ भी नहीं है इसके सामने मेरा लाल बहुत  बड़ा है।

माँ अब पलट गई और चाची के सामने मुँह करके बैठ गई।  चाची हम दोनों के बीच में सैंडविच बन गई। माँ ने आगे से चाची को दबाया और मुझसे कहा – दबा रे राज पीछे से अपनी चाची को।  दूर कर दे इसका दर्द।

मैं – माँ इनका दर्द ऐसे नहीं जायेगा।  इनको गोद में बिठा कर झूला झूला दूंगा तो हलकी हो जाएँगी

माँ – क्यों री छोटी , झुलेगी मेरे लाल का झूला।  बेचारा अब तक किसी को अपने ऊपर सवारी नहीं करवाया है।  कर ले।  देख कितना अकड़ गया है।

चाची – दीदी तुम ही क्यों नहीं झूल जाती।  पहला हक़ तो तुम्हारा है। क्यों रे राज लेगा माँ की।  करवाएगा उनको जन्नत की सैर।

मुझे इन दोनों के खेल पर अब गुस्सा आने लगा था। मैं उनके निप्पल जोर से खींचते हुए बोल पड़ा – रंडीबाजी बंद करो तुम दोनों।  मेरे लंड का हाल देखो।  उसे अब चूत चाहिए किसी का भी मिले।  माँ की तो ले ही लूंगा अभी तुम्ही दे दो। छिनरईबंद करो और आ जाओ मेरे लंड पर।

कह कर मैंने अपने दोनों हाथ पीछे से चाची के जांघो पर लगाया और उन्हें उठा लिया।  उठाते ही वो सीधे मेरे लंड पर गिरी।

चाची – अबे मादरचोद गांड फाड़ डाला तूने तो चूत में डालना था न। 

माँ ने मेरे लंड को सीधा किया और चाची की चूत को उस पर सेट कर दिया।  चाची अब उस पर बैठने लगी।

बोली – कितना लम्बा है रे।  पूरा कैसे लुंगी।

कह कर आधे से ही ऊपर नीचे करने लगी। स्थिति ये थी की मैं सोफे का सहारा लेकर टाँगे फैलाये बैठा था।  चाची की पीठ मेरी तरफ था और मेरा लंड उनके चूत में गपागप जा रहा था।

माँ चाची के बलाग में बैठ कर उनके क्लीट को मसले जा रही थी।  बीच बीच में वो मेरे बॉल्स भी सहला रही थी।  चाची पुरे मस्ती में थी।

बड़बड़ा रही थी – मादरचोद , ले ली न मेरी।  माँ की नहीं ले पाया तो चाची की ले ली।  चाचीचोद बन गया है तू।  मेरी चूत की आग बुझे दे मेरे लाल।  आह आह आह रआआआआज क्या मस्त चोदता है रे तू।  जिज्जीि मेरी बहना कैसा लंडा पैदा किया है।  घोड़े जैसा है।  किसी भी चूत को दीवाना बना देगा ये तो। 

माँ – अब पता चला तेरे को।  राज पेल दे  जोर से पेल।  आग बुझा दे इस रंडी की।  बना ले अपना गुलाम

चाची – इस लौड़े का तो कोई भी गुलाम हो जायेगा। 

अब चाची को मैंने ऊपर उठा कर सेण्टर टेबल पर टिका दिया।  चाची के मुम्मे अब एकदम गाय के थान की तरह लटक रहे थे।  मेरा लंड अब भी उनकी चूत में था।  मैंने थोड़ा झुक कर उनके मुम्मे पकड़ लिए और अपने लंड को उनकी चूत में पिस्टन की तरह चलाने लगा।

मेरे हर धक्के से उनके मुम्मे आगे पीछे हो रहे थे। अब मैंने उनके मुम्मे छोड़ दिए और तेजी से धक्के लगाने लगा।  माँ अब उनकी चूचिया पकड़ गाय के जैसे दूह रही थी।  चाची के दोनों अंगो पर भरपूर हमला हो रहा था। मैं अब अपने चरम पर था।

चाची – पेल दे राजा पेल दे मुझे।  तूने तो गुलाम बना लिया आज मुझे।  तू इतना बड़ा चोदू होगा मुझे पता नहीं था।  तू कैसे  इतने दिनों तक तीन तीन चूतो के साथ रह रहा था ल कैसे तेरी दोनों बहने तुझसे बिना चुदे रह गईं। देख इतना बड़ा लंड मिस कर दिया उन्होने।  हाय बस कर रे।  अब अपनी माँ की ले ले।  मेरी चूत तो फट जाएगी।  रहम कर गुलाम पर।  मैं तेरे लिए चुतों का जुगाड़ कर दूंगी।  जिसको कहेगा उसे तेरे झूले पर झूला दूंगी।  बस कर अब आ जा।  मैं तो कई बार झाड़ चुकी हूँ लाल।

उनकी इतनी  उत्तेजक बातें सुन कर मेरा आने ही वाला था।

मैं बोला – बस मेरी रंडी कुछ देर और।  बस मेरा लौंडा तेरी सुखी खेत में पानी डाल देगा।  तूने वादा जो किया है उसे याद रखना। 

चाची – याद रखूंगी।  जिसे कहेगा उसे तेरे निचे ला दूंगी।  श्वेता भी अभी कुँवारी है।  बड़ी सटी सावित्री बनती है।  उसकी दिला दूंगी।  मादरचोद तो बन ही गया लगभग बहन भी चोद लेना  बहनचोद।

श्वेता का नाम सुनते ही मेरे लंड ने पुरे जोशो खरोश के साथ अपना पानी चाची की चूत में उड़ेल दिया।  चाची सेण्टर टेबल पर निढाल हो गई।  मैं पीछे सोफे प।  माँ मेरे बगल में आकर मेरे बालों को सहलाने लगी और बोली अब भी गर्लफ्रेंड चोदने के लिए चाहिए।

मैं उनके कंधे पर सर रख कर लेट कर बोला – अब तुम चाहिए माँ।

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