———————————————–दीदी की जुबानी उनके जवानी की कहानी [फ्लैशबैक 5] ——————————
जब मैं बड़ी हो रही थी तो घर में हो रहे अनाचार को भी धीरे धीरे समझने की कोशिश कर रही थी। मैंने छुट्टियों में माँ और बड़ी मौसी को नाना के साथ सेक्स करते कई बार देखा था। माँ हमसे पहले से ही खुल चूँकि थी। वो पहले ही मुझे मेरे अंदर हो रहे शारीरिक बदलाव के बारे में और उसे कैसे हैंडल करना है ये सब बता चूँकि थी , तो उनसे बात करना कठिन नहीं था। पर मेरे लिए सबसे आश्चर्य की बात थी की पापा को ये सब पता है क्या ?
एक बार हम सब नानी के यहाँ गए हुए थे। तू काफी छोटा था। सरला भी छोटी ही थी। पापा भी हमें छोड़ने आये थे। हम तीनो बच्चे एक कमरे में थे। माँ पापा एक कमरे में। उन सबकी हरकतों पर शक तो मुझे पहले से ही था। तुम दोनों के सो जाने के बाद , मैंने उन सब पर नजर रखने की सोची । कुछ देर बाद मैंने माँ को नाना के कमरे में जाते देखा।
मैं जब वहां पहुंची तो देखा माँ अंदर जा चूँकि थी और कमरे का दरवाजा बंद था। मैंने किसी तरह पास की खिड़की से अंदर झाँकने का जुगाड़ कर लिया। खिड़की के पास ही कुछ अनाज की बोरियां थी। मैं उन पर ही बैठ कर चुप चाप अंदर होने वाली हरकत देख रही थी।
अंदर देखा तो मेरे होश उड़ गए।
नाना बिस्तर के किनारे पर पैर लटकाये बैठे और माँ उनके सामने खड़ी थी। नाना उनकी साडी उतार रहे थे।
माँ – बाउजी थोड़ा सब्र रखा कीजिये। उतार रही हूँ मैं।
नाना – मुझसे बर्दास्त नहीं होता। तुझे देखता हूँ तो पागल हो जाता हूँ। बस जल्दी से पीला दे मुझे।
माँ – आपके चक्कर में हम दोनों बहनो को बच्चे पैदा करना पड़ रहा है। आपको बस सामने दुधारू गाय चाहिए होती है।
नाना – क्या करु, तेरी माँ ने ऐसी आदत डाली है की बस दूध पिए बिना नींद नहीं आती।
माँ – बोल तो ऐसे रहे हो बस दूध पीकर छोड़ दोगे।
नाना – अरे मेरी बिटिया बाप को खुश करेगी तो इनाम तो मिलेगा न।
माँ – हाँ इनाम में बेटी को चोद देते हो।
नाना – तुम सबको मजा तो आता है न। तुम मुझे खुश करती हो और मैं तुम्हे।
माँ – आपसे कौन न खुश हो। लो अब पियो।
माँ ने अपना ब्लाउज भी खोल दिया था। वो सिर्फ पेटीकोट में खड़ी थी और नाना ने उनके मुम्मे पीना शुरू कर दिया। माँ के मुम्मे दुध से भरे हुए थे। तेरे हिस्से का बचा हुआ दूध नाना पी रहे थे। नाना ने माँ के एक बड़े लटकते मुम्मे को पीना शुरू किया और दुसरे को दबा कर निचोड़ना ।
माँ – बाउजी दुसरे को निचोड़ो मत। पूरी गीली हो जाउंगी। दूध भी बर्बाद होता है।
नाना – हम्म हम्म। उन्होंने दुसरे को छोड़ा नहीं पर निचोड़ना बंद कर दिया।
कुछ देर बाद माँ – अब दूसरा वाला खली करो।
नाना ने माँ के मुम्मे बदल दिए। इधर नाना ने अपने हाथ से मुम्मे छोड़ दिए और माँ के पेटीकोट की डोरी खोलने लगे। माँ ने अब खुद उन्हें दूध पिलाना शुरू कर दिया। वो अपने हाथो से अपने मुममे नाना के मुँह में ऐसे डाले हुए थी जैसे तुम्हे दूध पीला रही हो।
कुछ देर बाद नाना ने माँ के पेटीकोट को खोलने में सफलता हांसिल कर ली। अब वो दोनों हाथो से माँ के चूतड़ों को मसले जा रहे थे।
माँ – आह आह बाउजी। आप मर्द लोग भी न या तो औरतो के मुम्मे से खेलते हो या फिर उनकी गांड से।
नाना ने हँसते हुए कहा – हम मर्द औरतों के उभारो से ही खेलना पसंद करते हैं। तेरा पिछवाड़ा बचपन से इतना सुडौल है की क्या कहूँ।
माँ – तब से नजर गड़ाए थे इन पर।
नाना – ना रे जब से तू जवान हुई तब से। क्या हिलते हैं जब तू चलती है।
माँ – यही बात आप दीदी को भी कह रहे थे।
नाना – अरे तुम सब बहने अपनी माँ पर गई हो। तुम सबमे उसकी झलक दिखती है मुझे।
माँ – हम्म्म तभी तुम माँ को छोड़ हम पर भीड़ गए।
नाना – ऐसा नहीं है। उसे भी तो जवान लौड़ा चाहिए होता है। अभी तेरे मरद से मस्त चुद रही होगी।
उनकी बात सुन कर मेरी सांस रुक सी गई। मैं सोचने लगी की ये सब पापा की सहमति से हो रहा है। वो भी इन सब में शामिल है। फिर क्या ही काहू ? किससे कहूँ। मैं सोच ही रही थी की अचानक नाना के कमरे का दरवाजा खुला। देखा तो पापा नानी को गोद में उठाये चले आ रहे है।
नानी – क्यों जी अभी तक दूध ही पी रहे हो। यहाँ मैं दामाद जी के साथ एक राउंड खेल भी आई।
नाना – अब सरोज इतना दूध देती है। ख़त्म ही नहीं होता। अब जा ही रहा था इसे इनाम देने।
नानी को पापा ने बिस्तर के पास गोद से उतार दिया और माँ के पीछे जाकर खड़े हो गए। उन्होंने अपना लैंड माँ की गांड में चपका लिया और उनके मुम्मे दबाने लगे।
नाना और नानी दोनों ने माँ के एक एक मुम्मे अपने मुँह में डाल लिया और पीने लगे।
ये सब देख मेरी चूत भी पनिया चुकी थी। मैंने अपने फ्रॉक उठा कर पैंटी के अंदर से ही चूत को सहलाना शुरू कर दिया
कुछ पल बाद माँ की आवाज आई – अम्मा , संभव इनको , मुझसे न होगा।
नानी ने कहा – क्या हुआ ?
माँ – फिर से पिछवाड़े में घुसा रहे है।
नानी – लेले। कब तक बचाएगी अपनी गांड ,
माँ – मुझसे ना होगा। आप ही खेल अपना खेल।
माँ अब बिस्तर पर जाकर लेट गईं। नानी ने नाना को बिस्तर पर लिटा दिया। नाना के पैर अब भी लटके हुए थे। नानी उठकर नाना के दोनों तरफ पैर करके बैठ गई। उन्होंने नाना के लंड को अपनी चूत में पूरा का पूरा ले लिया। आश्चर्य की बात थी की नानी को इतना बड़ा लंड लेने में थोड़ा सा भी दर्द नहीं हुआ। नानी फिर नाना के ऊपर लेट गई। मैंने फिर देखा की पापा नाना के पैरों के बीच गए। नाना और नानी बिस्तर के किनारे इस तरह से लेते थे की पापा का लंड नानी की गांड के बराबर में था। मैंने देखा पापा ने मुँह से थूक निकाला और नानी की गांड पर लगा दिया। फिर उन्होंने अपना लंड धीरे धीरे नानी की गांड में डाल दिया।
दोनों लंड लेते ही नानी ने जैसे कमांड दिया – भोसड़ीवाले चोदो अब।
नाना और पापा दोनों एक ही लय में नानी की चूत और गांड चोदने लगे।
नानी बौरा सी गईं। मस्ती में वो इतने गन्दी गन्दी बातें करती थी को पूछो मत।
नानी – चोद सालो चोद। तुम दो दो मर्द मुझे खुश नहीं कर सकते तो मर्द होने के नाम पर धब्बा हो। आह आह
पापा – तेरी चूत तो कमाल है ही सबसे मजा तो गांड देती है। तेरी बेटी तो देती नहीं। गांड के चक्कर में गाँव का चक्कर लगता है।
नानी – मैं आती तो रहती हूँ। खुश नहीं है क्या ?
पापा – नहीं खुश तो हूँ , पर आपके गांड की बात ही अलग है।
नानी – चिंता न करो जमाई जी कल सुशीला और लीला दोनों आ रही है।
पापा – हाँ सुशीला जिज्जी की भी मस्त गांड है। पर लीला तो छोटी है।
नानी – आह आह , वो साली सबसे बड़ी चुड़कक्कड है। नाना से सील तुड़वा चुकी है। आप हाथ आजमा लो।
पापा – नहीं , लड़कियां नहीं।
नानी – ठीक है मादरचोद , माँ की तो मार ठीक से।
पापा फिर से छोड़ने में लग गए। मौसी और लीला दी की बात सुनकर उनका लंड टाइट हो गया था। कुछ ही देर में वो धराशाही हो गए। पर नाना में गजब का स्टेमिना था। पापा के हटते ही नानी भी नाना के लंड के ऊपर से हट गई। माँ को आवाज देते हुए बोली – ले सरोज संभाल बाउजी को।
नाना ने फिर पास ही लेती माँ की टाँगे ऊपर की और उनकी चूत में अपना लंड पेल दिया।
माँ – बाउजी, फाड़ दोगे क्या? माँ का भोसड़ा नहीं है। बेटी की चूत है।
नानी हंसने लगी। बोली – तीन तीन बच्चे पैदा करके भी बाप का लंड ना झेल सकती।
माँ – इसआआह। बाप का लंड नहीं है ये गधे का लंड है। कौन ले पायेगा पूरा इसे। बाउजी धीरे
नाना – हां मेरी बच्ची प्यार से ही लूंगा।
नानी – तू नहीं ले पा रही है और उधर लीला तेरे बाउजी के लंड से क्या मजे से खेलती है।
माँ – वो अपने माँ पर गई है। दोनों माँ बेटी एक नंबर की छिनाल हैं
अब पापा हंस रहे थे। बोले – तुम क्यों नहीं अपनी माँ पर गई। बानी होती तो गांड के लिए तरसना नहीं पड़ता।
माँ – चुप रहो। आह बाउजी जल्दी करिये। मेरा हो गया है।
माँ झाड़ चुकी थी।
नानी – पेल के पानी निकालो जल्दी। कल सुशीला और लीला की लेना।
नाना ने फिर कुछ और धक्के लगाए और फिर माँ की चूत में ही स्खलित हो गए।
——————————————————————-वर्तमान समय ———————————————–
मैं – दीदी नानी भी बड़ी हरामी चीज थी।
दीदी – मत पूछ। घर में अगर दो मर्द होते थे तो दोनों का लंड उनको अपने दोनों छेद में चाहिए होता था।
मैं – कभी तीन हुए तो।
दीदी – तीसरा मुँह में।
हम दोनों हंसने लगे।
मैं – दीदी जैसे माँ और नाना एक साथ सेक्स करते थे तुम और पापा ~~
दीदी सीरियस हो गईं। बोली – नहीं पापा ने हमें कभी नहीं छुआ। उन्होंने घर की किसी लड़की को नहीं छुआ। न मुझे, न सरला को न ही लीला दी को। श्वेता की तो सुन ही चूका है।
मैं – पर पापा नानी और मौसी के साथ कैसे ?
दीदी – वो तुम माँ से ही पूछना। पर पापा के घर में अनाचार नहीं था। ये हम सबमे नाना के तरफ से ही आया है। जितना मैं जानती हूँ , नाना और नानी ने ही सबको खेल में शामिल किया है।
पापा को नानी के साथ मजा जरूर आता था। शायद वो ुम्हे चोदते समय अपनी माँ की कल्पना कर लेते हों।
मैं – तुमने कभी बाबा और दादी के बारे में सुना है ?
दीदी – बस इतना जानती हूँ वो पापा के छुटपन में ही गुजर गए थे।
दीदी थोड़ा इमोशनल हो गई।
मैंने कहा – दीदी, असली बात सुनाओ न। लीला दी, तुम और नाना।
दीदी – ठीक है सुन।

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