मेरी माँ बहने और उनका परिवार – Update 14

मेरी माँ बहने और उनका परिवार - Family Sex Story
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मैं इतनी गहरी नींद में था की कितनी देर सोया ये मुझे पता ही नहीं चला।  मुझे कोई कंधे से हिला रहा था ।   मुझे लगा दीदी होंगी तो मैंने हाथ बढ़ा कर जगाने वाले को अपने ऊपर खींच लिया।  बोलै – आओ न दीदी एक बार और।

तभी उसने बोलै – अरे राज बेटा क्या करते हो ?

मैंने झट से आँखे खोल दी , मेरे ऊपर दीदी की सास पड़ी थी।  उनका आँचल गिरा हुआ था और उनमे बड़े बड़े मुम्मे ब्लाउज से बाहर आने को बेताब थे। 

मैंने तुरंत उनको छोड़ दिया और बोला – सॉरी , मुझे लगा दीदी आई है।

दीदी की सास – हाहाहाहा , दीदी की तो आज दिन में ही इतनी पुंगी बजाई है , मन नहीं भरा।

मैं – उस काम से भी मन भरता है भला।

दीदी की सास – पर इतना भी ठीक नहीं है।  थोड़ा अपने सेहत का ख्याल रखो।

मैं – अब सेहत का ख्याल रखने लगा तो आपको दादी कैसे बना पाउँगा।

सास उदास होते हुए – सही कह रहे हो।  हम सब इस घर में बच्चे के लिए तरस गए है।  सबका मन करता है गोद में बच्चा हो जिससे मन बहले।  अब ये घर काट खाने को दौड़ता है।

मैं – कहिए तो आप तीनो के गोद में बच्चा दे दू

सास – धत्त , क्या बोलते हो।  मैं तो बुढ़िया हो गई हूँ।  मुझे तो बस एक पोता दे दो।

मैं – आप तो अब भी जवान है।  आपको देख कर किसी का भी मन डोल जाए।  आपने आपको बुढ़िया मत कहिये।  आप तो अभी दर्जन भर पैदा कर सकती हैं।

दीदी की सास शर्मा गई।  तभी कमरे में दीदी आई।  अपने सास की हालत देख बोली – चुद गई क्या अम्मा ?

सास- चुप कर , कुछ भी बोलती है।  बस अब तुम दोनों जल्दी से इस घर में बच्चा ले आओ।

दीदी – आप ही क्यों नहीं माँ बन जाती हैं।  एक लड़का कर लीजिये राज से।  उसी की तरह शानदार , जानदार।

सास – तुम बकवास कम करो। राज के लिए मैं ड्राई फ्रूट डाला हुआ शेक लाइ हूँ।  पीला दो।  इसकी सेहत का भी ख्याल रखना पड़ेगा।

कहकर वो कमरे से चली गई। 

दीदी – क्या भाई ,लेगा क्या इसकी।

मैं – आप भी न।  मैं तो बस मस्ती कर रहा था।  मुझे तो बस आपको प्यार करना है। 

मैंने दीदी को अपने सीने से लगा लिया।  मैंने बेडके सिरहाने से तक लगा रखा था।  दीदी मेरे सीने पर सर राखी हुई थी।  मैं उनके बाल सहला रहा था।

दीदी – तू मुझे हमेशा प्यार करेगा न।

मैं – पत्नी तो बना लिया है।  कहो तो मंदिर में चल कर फेरे ले लू।  उम्र भर साथ रहेंगे। 

दीदी – मैंने तन और मन से पति तो मान ही लिया है।  कभी कभी बस डर लगता है कहीं तेरा प्यार मेरे लिए कम न हो जाये।

मैं – दीदी , मैं  तुम्हे कभी नहीं छोडूंगा।  मैं अब कभी शादी नहीं करूँगा।  मेरा प्यार बस तुम्हारे लिए है।

दीदी ने मुझे चूम लिया।  बोली – नहीं रे , मुझे भी तो भाभी चाहिए।  इकलौता भाई है तू।  मैं तो बस यही चाहती हूँ की तेरा प्यार मेरे लिए भी बना रहे।

मैं – मैं वादा करता हूँ, मेरा प्यार अपनी माँ और बहनो के लिए कभी भी  नहीं होगा।  अगर हमारे रिश्ते को समझने वाली कोई मिलेगी तो शादी करूँगा वरना नहीं।

दीदी – मिल ही जाएगी।  एक तो यही दीवानी बनी है।

मैं – सोनिया अच्छी लड़की है।  उसे मैं जीवन साथी बना पाउँगा ये नहीं कह सकता।  पर चुदने का सुख चाहेगी तो जरूर दूंगा।

दीदी ने मेरे गाल पर प्यार से थप्पड़ मारा।  बोली – बाहों में मुझे भर रखा है  चोदने के लिए सोनिया चाहिए।

मै – तुम कहो तो तुम्हे फिर से छोड़ दू।

दीदी – बस ये सब बाद में।  अभी जल्दी से शेक पी और बाहर आजा। सब सोचेंगे की भाई बहन कितने बेताब है, रूम से बाहर ही नहीं निकल रहे।

मैं हँसते हुए  – हमारे बारे में तो दोपहर में ही पता चल गया होगा।

दीदी – फक्क , जल्दी पी और बाहर आजा।  और हाँ कपडे डाल लेना।  तेरा तम्बू खड़ा है।

दीदी बाहर चली गई।  मैं भी उठा और बाथरूम में हाथ मुँह धोकर कपडे बदल लिए और बाहर आ गया।

बाहर आया  तो देखा सोनिया कुछ मुझसे नाराज नाराज थी।  घर के सारे काम में वो दीदी का साथ दे रही थी।  उनके साथ मिलकर हम सबको खाना भी खिळया।  पर सुबह वाली बात नहीं थी।  मुझे थोड़ा अजीब लगा।  दीदी ने भी ये परिवर्तन गौर कर लिया।  खाने के बाद जीजा जी ने मुझे साथ में बाहर चलने को कहा। वो मुझसे कुछ बात करना चाह रहे थे। मैं उनके साथ बाहर चला आया।  दीदी और सोनिया दीदी के सामान की पैकिंग में लग गए।  उनकी सास ने काफी कुछ खाने पीने को बनाया था।  वो सब पैक करने लगी।

जीजाजी मुझे पास के पान की दूकान तक ले गए।  मैंने भी एक मीठा पान लिया।  फिर हम वहीँ पास में बने एक खली बेंच पर बैठ गए।

जीजा जी – देखो राज , मैं सुधा के लिए बहुत खुश हूँ।  मै  जो उसे खुशिया  नहीं दे पाया , तुम दे रहे हो। मैं कैसे तुम्हे शुक्रिया कहूँ , समझ नहीं पा रहा हूँ।

मैं – जीजा जी आप मुझे क्यों शर्मिंदा कर रहे है।   ये तो मेरा फ़र्ज़ है।

जीजा जी – देखो मैं चाहता हूँ की तुम सुधा को हमेशा खुश रखो।  बच्चा होने के बाद तुम उससे दूर नहीं हो जाना।  मैंने उसके आँखों में तुम्हारे लिए बहुत प्यार देखा है , तुम उसे कभी दुखी मत करना।

मैं – जीजा जी आप फिक्र न करे ।  वैसे भी उन्होंने मुझे राखी बाँधी है।  बहन है , उहे मैं कभी दुखी नहीं देख सकता।

जीजा जी – अब तुम्हे भाई के अलावा पति की तरह भी प्यार करना है।  मी तरफ से कोई रोक नहीं है।  तुम जब चाहो उसे प्यार कर सकते हो।  चाहे यहाँ आकर या फिर उसे वहां बुलाकर।

मैं – मुझे लगा था की आप बुरा मान जाएंगे पर आप दीदी के लिए इतना बलिदान करेंगे ये नहीं पता था।

जीजा जी – बलिदान तो अब तक वो दे रही थी।  मैं उसे बहुत प्यार करता हूँ।  शारीरिक रूप से सक्षम नहीं हूँ बस। 

मैं – कोई बात नहीं जीजा जी।  दीदी भी आपको प्यार करती हैं। बस उनका प्यार करने का तरीका अलग है।

जीजा जी हँसते हुए – हाँ , थोड़ा वाइल्ड सेक्स करती है। हमें हुमिलिएट करने भी उसको सटिस्फैक्शन मिलता है।

मैं – मुझे उनके उस रूप का पता नहीं था।  पर उनके बिहेवियर के लिए मैं माफ़ी मांगता हूँ।

जीजा जी – नहीं नहीं।  उसने अच्छा ही किया है।  उसी बहाने घर में सब खुल गए है।  मुझे भी माँ का प्यार मिलने लगा है।  बस मैं ही उनको खुश नहीं कर पाता।  मैं तो चाहूंगा की अगर माँ रेडी हो तो तुम उन्हें भी चोद लेना।  वो भी प्यासी है।

मैं – एक बात पूछू ?

जीजा जी – हाँ शर्माओ मत पूछो।

मैं – सोनिया ?

जीजा जी – अरे नहीं।  उसके बारे में कुछ गलत मत सोचो।  मेरे और पिता जी के सामने तो कभी वो न्यूड नहीं हुई है।  बस तुम्हारी बहन की दुलारी है।  उसी ने तो सुधा को यहाँ रोक रखा है।  शादी के कुछ दिन बाद से ही दोनों एक साथ ही रहती है।  आपस में ना जाने कैसे कैसे मजे लेती हैं।  पर हमारे सामने नहीं।  अगर गलती से मैं या पिता जी सामने पद जाते है तो हम खुद ही हट जाते है। तुम्हारे आने से उसका प्यात बंट  गया है।  शायद आज इसी वजह से दुखी है।  पर मुझे पता है वो भी सुधा की खुशियां चाहते है।  समझ जाएगी।

मुझे भी सोनिया के बारे में सोच कर बुरा लगा।  मैं ना जाने दीदी को उसके बारे में क्या क्या कह दिया था।  मैंने उसे भी एक भोगने  वाली चीज  ही समझ लिया था। मुझे खुद पर बहुत गुस्सा आ रहा था।

मैं सोच में डूबा  था की जीजा जी ने कहा – चलो  घर चलते  है।

रास्ते में उन्होंने एक और बात बोली – एक और बात , जब सुधा को चोदना तो कोशिश करना खूब अंदर तक अपना लंडडालो ताकि वीर्य अंदर तक जाए।  मुझे लड़का चाहिए।

मैं – इससे क्या फर्क पड़ता है लड़का हो या लड़की

जीजा जी – सही कह रहे हो।  पर पहला लड़का ही हो ताकि बड़ा होते ही वो अपनी माँ और दादी का ख्याल रख सके।  बिलकुल तुम्हारी तरह।

मैं मुश्कुरा पड़ा।  जीजा अपने बेटे को मादरचोद बनाना चाह रहे थे।  पर वो उनका तो बेटा होता नहीं।  अमारे खानदान के तो वैसे ही मदचोद होते हैं।

घर आये तो दीदी हमारा इंतज़ार कर रही थी।  मेरी नजरे सोनिया को ढूंढ रही थी।  मैं उससे माफ़ी माँगना चाहता था।  सुबह पता नहीं मौका मिलता या नहीं।  पर वो अपने कमरे में जा चुकी थी।  मैं दीदी के कमरे में सोने चला गया।  दीदी जीजा से बात करने चली गई।

मुझे जल्द ही नींद आ गई।  मेरे लिए सोना जरूरी भी था।  सुबह सुबह फिर लम्बी दूरी तक गाडी चलानी थी।

अगली सुबह मैं और दीदी अपने घर के लिए निकलने को तैयार थे।  उनकी सास ने खूब सारा सामान गाडी में रखवा दिया था।  पर सुबह से सोनिया ने न ही मुझसे कोई बात की थी न ही मुझसे नज़रें मिलाई थी।  निकलते वक़्त वि काफी इमोशनल थी।  वो दीदी से लिपट कर रोने लगी।  दीदी भी उदास थी पर अपनी उदासी को छुपाते हुए हँसते हुए बोली – अरे पगली मैं कोई हमेशा के लिए थोड़े ही जा रही हूँ।  कुछ महीनो की बात है।  वैसे भी कितना दूर है मेरा मायका चली आना। 

वो कुछ नहीं बोली। 

दीदी  की सास ने मुझसे कहा – देखो राज बेटा, सुधा का ख्याल रखना।  तुम अपना भी ख्याल रखना।  अच्छा और पौस्टिक खाना।  जब तक सुधा प्रेग्नेंट न हो जाये कोशिश करना।

लग ऐसे रहा था दीदी अपने मायके न जाकर ससुराल जा रही हो ।  खैर अभी की स्थिती देखें तो बात वही थी।  कहने को शादी इस घर में हुई थी पर असली पति मैं ही था।

मैंने कहा – जी , आप लोग चिंता न करे ।  वैसे भी वो अपने घर ही जा रही है।  माँ भी है वहां।

सास- ठीक है।  जल्दी ही खुशखबरी सुनाना।

हम दोनों वहां से चल पड़े।  मैं गाडी चला रहा था और दीदी मेरे बगल में बैठी थी।  उन्होंने एक सुन्दर सा गुलाबी कलर का सूट पहना हुआ था।

उन्होंने थोड़ा सा मेकअप भी किया हुआ था।  खैर हम जल्दी ही निकल पड़े।  कोशिश थी की शाम तक घर पहुँच जाएँ।

उनके शहर से निकलते ही हम दोनों फ्री हो गए।  मैंने रोमांटिक सा प्ले लिस्ट लगा दिया था।  दीदी भी खुश लग रही थी।  कोई भी हमें देखते तो यही समझता की हम पति पत्नी हैं। 

मैं गाडी चालते चालते दीदी को देख रहा था। 

दीदी – गाडी चलाने पर ध्यान दो।  बार बार मुझे क्यों देख रहे हो ?

मैं – देख रहा हूँ मेरी पत्नी कितनी खूबसूरत है।

दीदी शर्मा कर – पत्नी कहाँ , बहन हूँ मैं तो।

मैं – गोवा में तो पत्नी धर्म निभा रही थी।  अब बहन हो गई।

दीदी – वहां सुहागरात मनानी थी न। सुहागरात तो पति पत्नी ही मनाते हैं।

मैं – और अब क्या करोगी ? जब हमारे जिस्म मिलेंगे तो क्या होगा ?

दीदी – इतना फॉर्मल मत।  तुझे पता है , मुझे क्या पसंद है।  सीधे सीधे बोल जब चुदाई होगी तो क्या रिश्ता होगा।

मैं – हाँ , बताओ , अब जब मुझसे चुदोगी तो किस रिश्ते से ?

दीदी – तूने ही तो कहा था बहन चोदने में ज्यादा मजा आता है। तो मस्ती में चोदते समय भाई बन कर ही चोदना।

मैं – अच्छा , तो मुझे मामा बनाओगी या पापा ?

दीदी – बच्चा करने के मूड से जब चुदुँगी तो पापा ही बनेगा।  बाकी वाइल्ड सेक्स तो भाई के साथ ही करुँगी।

मैं उनकी बात से एक्ससाइट हो चूका था।  मैंने कहा – अभी रास्ते में वाइल्ड सेक्स करोगी या ~~~

दीदी – कुछ नहीं करुँगी।  चुप चाप घर चल।  कोई अरमान रास्ते के लिए मत जगा।

मैं – अच्छा चुम्मी तो दे ही सकती हो ?

दीदी ने सीट बेल्ट ढीला किया मेरी तरफ झक कर मेरे गालों पर किस करके कहा – ये तो अभी भी ले ।

मैंने भी पलट कर उनको किस कर लिया। ऐसे ही चुहल बाजी करते करते हम सफर में चल रहे थे।  रास्ते में एक जगह हम लंच करने के लिए रुके थे।  शाम से पहले अपने शहर पहुँच गए। 

घर पहुंचे तो देखा वहां श्वेता भी आई हुई थी।  उसे जब पता चला था कि सुधा दी आई हैं तो उनसे मिलने का लालच रोक नहीं पाई थी।  उसने कॉलेज से दो तीन दिन कि छुट्टी ले रखी थी।  माँ भी सुधा दी को देख कर बहुत खुश थी।  मैंने सामान  गाडी में से निकाला और अंदर किया। 

माँ हम दोनों के लिए नाश्ता लेकर आई।  सुधा दी और श्वेता सोफे पर बैठ बातें करने लगे।

मैंने माँ से पुछा – दीदी का सामान किस कमरे में रखूँ ?

माँ मुश्कुरा पड़ी बोली – दीदी या बीवी ?

मैं ने उन्हें गले लगा लिया बोली – आप जो कहो।

हम दोनों को गले लगते देख दीदी बोली – वाह भाई , मां को देखते ही मुझे भूल गया ?

मैं कुछ जवाब देता उससे पहले ही श्वेता बोल पड़ी – माँ से तो इसका अलग लगाव है।  माँ और माँ जैसी को ज्यादा परेफरेंस देता है।

उसका इशारा चाची कि तरफ था।

मैं – पटाना तो जवान को भी चाहता हूँ , पर जवान लड़किया तो अपने ही घमंड में हैं।  भाव ही नहीं देती।  पर तूने सच कहा  माँ से सबसे ज्यादा प्यार करता हूँ। 

कह कर मैंने माँ के होठो पर किस कर लिया। श्वेता ये देख कर अपने नजरे छुपा लेती है ।

पर मेरी बात सुन कर दीदी बोली – एक जवान वहां तैयार तो थी , पर तूने ही पता नहीं क्या किया नाराज कर दिया उसे।

श्वेता – कौन ?

दीदी – अरे मेरी ननद सोनिया तो दीवानी है इसकी।  उसका बस चलता तो विदाई करा कर साथ में ही आ जाती , पर साहब ने पता नहीं क्या किया।

श्वेता – इसे लड़कियॉं से बात करना कहाँ आता है।  बस देखते ही भूखे नंगे कि तरह सेक्स ही करना चाहता है।  पहले प्यार से अपना बनाओ , लड़किया खुद ही समर्पण कर देंगी।

मैं श्वेता के चेहरे कि तरफ देखने लगा।  मैं समझने कि कोशिश कर रहा था कि क्या मैं अगर श्वेता को प्यार से पटाउन तो मुझसे चुदने को तैयार हो जाएगी ?

श्वेता भी मुझे खामोश देख कर मेरे मनोभाव को पढ़ने कि कोशिश कर रह रही थी।

तभी माँ बोल पड़ी – तुम दोनों फिर लड़ पड़े। कुछ खाओ पीयो पहले और फिर थोड़ा आराम कर लो।  सफर से थके होंगे। 

मैं चाय पीकर अपने कमरे में चला गया और दीदी फिर से माँ और श्वेता से बातें करने लगी।

मैं अपने कमरे में फ्रेश होने के बाद बिस्तर पर लेट गया। थकान की वजह से मुझे नींद लग गई।  नींद खुलते ही जब मैं बाहर आया तो देखा कोई नहीं था।

माँ के कमरे से कुछ आवाज आ रही थी तो मैं वहां पहुंचा तो देखा श्वेता , सुधा दी और माँ बातें कर रही है।  सुधा दी ने चेंज करके एक नाइटी डाल राखी थी।  नाइटी का गाला ढीला था और सामने से उसमे चेन भी था।  वो बिस्तर के सिरहाने से टेक लगाकर पालथी मारे  बैठी थी।  माँ भी उनके बगल में लेती हुई थी।  जबकि श्वेता बिस्तर के पैताने तरफ लेटी हुई थी।  उसने एक टी-शर्ट और  शार्ट डाल रखा था। शार्ट थोड़ा छोटा था जो की उसके जांघो तक ही था। मैं पहली बार उसे इस रूप में देख रहा था।  उसकी गोरी और सुडौल जांघों को देख कर अंदाजा लगाया जा सकता था की पेंट के अंदर छुपा खजाना कितना अजब का होगा।

मुझे देख माँ ने कहा – जाग गया मेरा राजा।  थकान कुछ कम हुई?

मैं – हाँ मुझे पता ही नहीं चला कब नींद आई।  आप लोगों ने जगाया भी नहीं।

मैं जाकर दीदी के गोद में सर रख कर लेट गया।  मेरा पैर अब श्वेता के पैरों के पास था। दीदी नहीं हुई थी।  उनके बदन से खुशबु आ रही थी।  उन्होंने प्यार से मेरे बालों में हाथ फेरते हुए कहा – दो दिन से गाडी चला रहे हो।  थकान तो हुई होगी।  तुझे सोता देख हमने जगाया नहीं। 

मैंने प्यार से उनकी तरफ देखा और उनके चेहरे को झुका कर किस कर दिया।

कहा – आप मेरा कितना ख्याल रखती है।

दीदी ने भी मेरे किस का जवाब दिया।  हमें देख कर श्वेता ने मुँह  बनाते हुए कहा – उउइइइइइ , आपक लोग भी कहीं भी शुरू हो जाते  हो। बड़ी अम्मा कुछ समझे इन्हे।

मैंने बगल में लेटी माँ को चेहरे पर किस किया और श्वेता को जवाब देते हुए कहा – दीदी तो अब बीवी हैं। मैं कहीं भी प्यार करु।  तुझे क्या ?

श्वेता चुप  हो गई ।  मुझे लगा  था की शायद उठ कर चली जाएगी पर वो गई नहीं।

दीदी ने उससे पुछा – तेरा कोई बॉयफ्रेंड नहीं है क्या ?

श्वेता – नही।  मुझे ये सब पसंद नहीं है।

दीदी – क्या पसंद नहीं है ? अरे बॉयफ्रेंड का मतलब सेक्स करना ही थोड़े ही है।

श्वेता – सब लड़के यही चाहते हैं।  देखो न अभी थोड़ी देर में ये भी शुरू हो जायेगा ।

माँ उठ कर बैठ गई और बोली – देख मैंने तो लड़कियों को छूट दे रही है।  तेरी माँ भी बोलकर गई है।  जो भी हो खुद को सटिस्फाय  करना भी जरूरी है।

मैं बोल पड़ा – मै यकीन के साथ कह सकता हूँ ये मास्टरबेट भी नहीं करती होगी।

बातों का रुख अब कहीं और मुड़ गया था।  पर मेरे लिए सकूं की बात ये थी की श्वेता भी बात कर रही थी। लग रहा था की कमरे में एडल्ट्स बात कर रहे थे। 

दीदी बोली – क्या सच में ?

श्वेता शर्माते हुए बोली – मुझे अजीब लगता है।  एक बार तरय किया था दर्द हुआ तो फिर से डर लगता है।

माँ – मैंने तो इन तीनो को समय रहते ही सब सीखा दिया था।  तेरी माँ नहीं समझा पाई।

मैं – मुझे तो तुमने कुछ नहीं सिखाया। 

माँ – तुझे तो मैं मिल गई।

श्वेता – आप ही क्यों घर की हर औरत तो मिल ही गई है।  एक की गोद में सोया है।

मैं – तू तो न मिली।

श्वेता – सोनिया है न , उसे पटा ले।

मुझे जलन की बू आ रही थी।  मैंने सोचा और मजे लेना चाहिए।  मैंने कहा – वो घर की कहा है ?

मैं – मजा तो घर में है।

श्वेता – मुझे न लेना वैसा मजा।

माँ – तुम दोनों फिर शुरू हो गए।  बस करो।  सुन राज मेरी प्यारी बिटिया को मत परेशान किया कर।

माँ पहले ही उठ कर बैठ गई थी , उन्होंने श्वेता को अपने तरफ कर गले लगा लिया।  श्वेता ने मुझे जीभ निकाल कर चिढ़ाना शुरू कर दिया।

दीदी उठने लगीं बोली मैं कुछ बनाती हूँ। श्वेता भी उठ कर जाने लगी।  माँ ने उसे रोक लिया और मुझे कहा – तू  जा मुझे श्वेता से कुछ बात करनी है। मैंने कहा – फिर मैं अपने दोस्तों से मिलकर आता हूँ। मैं फिर बाहर निकल गया।

मेरे निकलते ही श्वेता माँ के गोद में सर रख कर लेट गई और माँ उसके बालों पर उंगलिया फेरने लगी।

माँ श्वेता से – ये बता तू सच में मास्टरबेट नहीं करती है।

श्वेता ने संकोच में कहा – बड़ी माँ , मुझे नहीं आता।  शुरू में एक बार ऊँगली अंदर डालने की कोशिश की थी पर इतना दर्द हुआ की डरती हूँ।

माँ – तुझे जरूरत नहीं लगती ?

श्वेता –  होती तो है।  उस समाया मन कहीं नहीं लगता।  बेचैनी बढ़ जाती है।  तब पैरों के बीच में तकिया लगाकर लेट जाती हूँ।  कुछ देर में गरमी निकल जाती है। 

माँ ने झुक कर उसे गालो पर किस कर लिया – मेरी बच्ची तू कितनी भोली है। खुद को खुश रखना कितना जरूरी है तुझे पता ही नहीं है।

श्वेता ने कहा – आप राज से मत बताना, पर मुझे भी सीखा दो।

माँ झुक कर उसके होठो पर होठ रख दिए और एक किस दिया।  श्वेता को थोड़ा अजीब लगा।  पर उसने भी उनका साथ दिया।  पहला किस कुछ ही सेकण्ड्स में ख़त्म हो गया।  पर श्वेता के दिल की धड़कन तेज हो गई। 

माँ ने एक हाथ उसके गालों पर एक उसके छाती पर रख दिया।  इतने से ही श्वेता की सिसकारी निकल आई। माँ ने दुबारा झुक कर उसके होठ चूम लिया।  इस बार थोड़ी देर तक किस किया।  श्वेता ने भी माँ के होठो को महसूस करने की कोशिश की।  माँ ने साथ ही उसके टी-शर्ट के ऊपर से ही मुम्मे हलके से दबाने शुरू कर दिया। श्वेता के निप्पल तन गए थे।

माँ ने किस तोड़ते हुए उससे कहा – कैसा लग रहा है ?

श्वेता – शरीर में चींटिया से रेंग रही है।  लग रहा है मुझे बुखार हो गया है। 

माँ ने कहा – जानती है , राज को भी एक बार बुखार आया था , मेरा दूध पीकर ठीक हो गया था।  तू भी पीयेगी मेरी बच्ची।

श्वेता – हाँ ,पर मेरे सीने में भी जलन हो रही है।  सीना भारी हो रहा है।

माँ ने अपना ब्लॉउस खोल दिया और अपना एक दूध उसके मुँह में डाल दिया।  श्वेता को शुरू में तो अजीब लगा।  पर एक बच्चे की नेचुरल

इंस्टिक्ट होती है उससे प्रेरित हो उसने दूध पीना शुरू कर दिया।

माँ ने उसके बाल सहलाये और कहा – पी जा मेरी बच्ची।  मैं तेरी असली माँ नहीं हूँ पर बचपन में तूने मेरा दूध पिया हुआ है।  पर जब अभी पीयेगी तो अलग ही मजा आएगा।

माँ ने उसके हाथ को अपने दुसरे मुम्मे पर रख दिया।  माँ ने उसके टी-शर्ट को ऊपर कर दिया और उसके पेट को सहलाने लगी। श्वेता ने खुद ही अपना टी -शर्ट उतार दिया। उसके मीडियम साइज़ मुम्मे एक सफ़ेद से प्लेन ब्रा में कैद थे।

माँ ने अब श्वेता को उठा कर अपने गोद में पीठ करके बिठा लिया। 

अब स्थिति ये थी की माँ पलंग के सिरहाने से तक लगाकर बैठी थी , श्वेता उनके गोद में पीठ करके बैठी थी।  माँ ने उसके ब्रा को खोल दिया था।  उसका नंगा पीठ माँ के पेट से लगा हुआ था।  माँ ने अब उसके मुम्मे प्यार से हलके हलके दबाने  शुरू कर दिए ।

श्वेता की हालत खराब हो गई।  उसे लगा जैसे की कोई नशा कर लियाहो उसने।

वो बोलने लगी – बड़ी माँ मेरा सीना भारी हो रहा है।  अंदर से आग निकल रही है क्या कारु।

माँ – बस अभी ही थोड़े देर में सब अच्छा हो जायेगा।  तू बस अपने आप को मेरे हवाले कर दे।

श्वेता – बड़ी  माँ , मैं तो तुम्हारे कब्जे में ही हूँ।  जो करना हो करो बस अंदर की आग बुझा दो।

माँ ने उसके मुम्मे मींजना शुरू कर दिया।  वो कभी उन्हें दबाती , कभी सहलाती , कभी उसके निप्पल को दो उँगलियों के बीच में फंसा कर रगड़ती।  साथ ही माँ ने उसके गर्दन और गाल पर पीछे से ही चूमना शुरू कर दिया था।  श्वेता पसीने पसीने हो गई थी।

श्वेता – इस्सस , माँ  ये मुझे क्या हो रहा है।  मेरे मेट के नीचे मरोड़ सी हो रही है।  कमर के पास लग रहा है सैकड़ों चींटियां रेंग रही है।  मुझे क्या हो रहा है बड़ी माँ।  कुछ करो।  बचाओ मुझे।

उसका शरीर काँप रहा था।  वो लगभग चीख रही थी।  उसकी आवाज सुनकर सुधा दी कमरे में चली आई। 

उन्हें देख श्वेता बोली – दीदी मेरे साथ क्या हो रहा है।  बचा लो मुझे। अंदर आग सी लगी है। 

सुधा दी ने देखा उसका शार्ट पैंट आगे से गीला हो चूका है। उसके कमर और पैरों में अजीब सा कंपन हो रहा था।  उसका शरीर अजीब तरीके से थरथरा रहा था। उसकी चूत कई बार पानी छोड़ चुकी थी । 

सुधा दी उसके पास आई और उसके शार्ट को पैंटी सहित उतार दी।  श्वेता होश में नहीं थी।

दीदी उसके सामने लेट गई और बहती हुई चूत पर मुँह लगा दिया।  अभी सुधा दी ने अपनी जीभ एक दो बार ही फेरी होगी , की श्वेता की चूत ने एक बार फिर पानी छोड़ दिया। इस बार एकदम धार सी निकली जो उनके मुँह पर आई।  सुधा दीदी का फेवरेट आइटम था वो।  दीदी वहां से हटी नहीं।  वो उसके चूत को चाटते ही रही।  श्वेता ने आँखे बंद कर ली थी। कुछ ही देर में वो फिर से आनंद के सागर में गोते लगाने लगी।  इस बार सुधा दी के जीभ के स्पर्श से। अबकी बार उसने अपने दोनों हाथो से दीदी के सर को पकड़ लिया और खुद से ही उन्हें अपने चूत पर रगड़ने लगी।

बोली – दीदी मजा आ रहा है।  करती रहो जो कर रही हो।  मुझे पता नहीं था चूत चटवाने में भी इतना मजा आता है।  इस्स्स्सस्स , माँ तुमने मुझे पहले क्यों नहीं बताया।  इतना मजा है इसमें।

माँ ने अब उसे लिटा दिया और उसके मुम्मे खुद पीने लगी।  अब सुधा दी उसका चूत चाट रही थी और माँ उसके मुम्मे पी रही थी।

श्वेता – बड़ी माँ , दूध पिलाने में इतना मजा आता है पता नहीं था।  पी जाओ।  चूस कर दूध निकाल दो। दीदी मेरे चूत में फिर बाढ़ आ रही है।  अंदर से तूफ़ान आ रहा है।  संभाल लो मुझे।

श्वेता का शारीर फिर से कांपने लगा।  उसके पूरा शरीर थरथरा रहा था।  उसने एक हाथ से सुधा दी के मुँह को अपनी चूत पर एकदम से चिपका लिया।  दुसरे हाथ से माँ को मुम्मो पर।  श्वेता ने फिर से चरमोत्कर्ष पर थी ।  उसकी चूत ने खूब सारा पानी फिर से निकाल दिया।  कुछ देर तो उसका शरीर कांपता रहा।  फिर एकदम से ठंढा हो गया।  अबकी सुधा दी ने सर ऊपर किया तो माँ ने उन्हें अपने तरफ खींच लिया और उनके मुँह से मुँह लगाकर श्वेता के चूत का पानी चाटने लगी।  दोनों एक दुसरे को काफी देर तक किस करती रही।

उधर श्वेता इतने ओर्गास्म के बाद कुछ ही पल में नींद के आगोश में चली गई।

माँ ने फिर उसे वहीँ पड़ा एक चादर ओढ़ा दिया।  उसके मासूमियत  भरे चेहरे पर आई निश्चिंतता देखकर दोनों मुश्कुरा उठी। कुछ देर बाद दोनों उठ कर कमरे से बाहर आ गई।

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