————————————————माँ की जुबानी उनके परिवार की कहानी [फ्लैशबैक 4] ————————————————दोनों भाइयों के जाते ही अम्मा ने चाची को आवाज दी – छोटी , शर्माना वर्माना हो गया हो तो बाहर आ जा। तेरा मरद और जीजा दोनों गए। शाम तक आएंगे।
चाची बाहर आकर अम्मा के गले लग गई।
अम्मा – तू तो ऐसे शर्मा रही है जैसे आज ही ससुराल आई हो। शादी के पहले तो जीजा के संग बहुत मजे किये था। उस समय तो कहती थी कि मेरी सौत बनकर आएगी। अब क्या हुआ जीजा का सामान देख कर घबरा गई है या अपने मरद पर प्यार आ रहा है।
चाची – जिज्जी , जीजू का तो सच में बहुत बड़ा है , कैसे लुंगी ?
अम्मा – जैसे अपने मरद का लिया था ?
चाची – पर जीजू का तो बहुत लम्बा है। इनसे भी लम्बा। तुमने कैसे दोनों को संभाल लिया।
अम्मा – तू भी संभाल लेगी।
चाची – मुझे बहुत डर लग रहा है। मेरी चूत फट जाएगी।
अम्मा – कुछ न होगा। थोड़ा दर्द होगा , उसमे भी मजा है। अब चल घर का काम करवा। उनके आने से पहले तैयार होना है। आज की रात लम्बी रात होगी।
चाची और अम्मा काम में लग गई। घर के बाकी काम ख़त्म होने के बाद वो उन्होंने अपना कमरा साफ़ किया। चाची ने फिर सोचा थोड़ा आराम कर लिया जाये। उस पर अम्मा ने कहा – आज शाम का खाना जल्दी बना ले।
चाची – क्यों जिज्जी , थोड़ा आराम करने दो न।
अम्मा- आज आज का काम है , तुझे फिर कुछ दिन वैसे ही आराम चाहिए होगा।
चाची – डराओ मत जिज्जी।
अम्मा – ले तुझे ही तो अपने जीजा का सामान लेना है। अगर नहीं लेना है तो जा आराम क। मुझे तो आज दोनों चाहिए।
चाची – ऐसे कैसे। सब साथ में करेंगे।
अम्मा – फिर लग मेरे साथ।
उसके बाद दोनों ने खाने पीने की भी तैयारी भी कर ली। शाम को दोनों भाई खेत से लौटे। काफी दिनों बाद सब इक्कठा थे। चाची ने उन दोनों को पानी वगैरह पिलाया। खाने के टाइम भी दोनों भाई एक साथ बैठे और दोनों बहने उन्हें खिला रही थी।
बाउजी ने कहा – कितना बढ़िया लग रहा है सब एक साथ खा पी रहे हैं।
माँ – अब और भी बढ़िया हो जायेगा सब एक साथ प्यार करेंगे।
चाचा ये सुन हंस दिए। चाची भी मुँह छुपा कर हंसने लगीं।
गाओं में रात को सब जल्दी खा पीकर सोने चले जाते हैं। अम्मा ने चाचा चाची को बोलै सब उनके ही कमरे में सोयेंगे। अम्मा ने चाची को थोड़ा तेल ले आने के लिए बोला । वो पूछीं क्यों तो जवाब मिला तेरे जीजा को मालिश करवाए बिना नींद नहीं आती।
अंदर पहुँचने पर चाची ने देखा बाउजी सिर्फ एक लुंगी में लेते हुए थे। चाचा भी लुंगी में वहीँ बैठे उनसे कुछ बात कर रहे थे।
अम्मा तो वैसे भी घर में सिर्फ पेटीकोट ब्लाउज में रहती थी। चाची ने साडी पहनी हुई थी।
अम्मा ने उनसे कहा – साडी उतार दे।
चाची ने शर्माते हुए साडी उतार दी। अम्मा ने चाची से कहा – वो बाउजी के पैरों की मालिश कर दें।
चाची बाउजी के पैरों के पास बैठ कर धीरे धीरे तेल से उनकी मालिश करने लगी। चाचा ने भी अपनी जगह पकड़ ली । वो अम्मा के पास आकर उनके पैर दबाने लगे।
चाची थोड़ा शर्मा रही थी। अम्मा ने कहा – शर्मा काहे रही है। शादी से पहले तो उनके गोद में बैठ जाती थी , गलबहिया और चूमि भी ले लेती थी। जरा ठीक से ऊपर तक पैर दबा। और हाँ उनके तीसरे पैर की भी मालिश अच्छे से करना। पहले थूक से फिर तेल से।
चाचा खिखिया कर हंसने लगे। बोले – हम कहाँ तक करें ?
अम्मा ने उनसे कहा – तुम भी बहुत दिन बाद मेरी सेवा कर रहे हो ढंग से जोर लगा कर करो। पुरे बदन का दर्द जाना चाहिए।
चाचा ने अम्मा के पैर दबाते दबाते पेटीकोट ऊपर जांघों तक कर दिया। उधर चाची जैसे बाउजी के जांघो तक पहुंची और लुंगी को हटाया , उनकी लुंगी कमर से खुल गई। उनका लैंड फनफना कर बाहर आ गया।
चाची ने उनके लैंड का साइज देख कर हैरान रह गई। अंदर से डर गेन की इतना बड़ा सामान अंदर जायेगा कैसे ? अभी वो सोच ही यही थी की अम्मा ने कहा – अब तीसरा पैर प्रकट हो ही गया है तो उसी की मालिश कर दे।
चाची उसे मुँह में लेने को झुकने लगी तो ॉजी ने कहा – पहले थोड़ा हाथ से कर दे।
उधर चाचा ने अम्मा के चूत पर मुँह लगा चुके थे।
अम्मा – सही ढंग से चाटो , जीभ तेज चलाओ लल्ला।
बाउजी का लंड चाची के हाथो में पूरा नहीं आ रहा था। वो घबरा रही थी। उन्होंने उनके लंड के चमड़ी को ऊपर निचे करना शुरू किया ।
बाउजी ने अपना हाथ बढ़ा कर चाची को अपने बगल में कर लिया और उनके मुम्मे पकड़ लिए। चची एकदम से चिहुंक पड़ी।
अम्मा – कैसे हैं मेरी बहन के मुम्मे।
बाउजी – एकदम मुलायम , जैसे रुई के फाहे।
अम्मा – अभी थोड़े छोटे है। लल्ला के साथ अब आप बह मेहनत करो और फुला दो।
चाची की सासने तेज हो गई थी। बाउजी उनके ब्लाउज के ऊपर से ही उनके मुम्मे दबा रहे थे। कुछ देर बाद उन्होंने चाची के चेहरे को अपनी तरफ झुकाया और उनके होठ चूम लिए। चाची भी उनके किस का जवाब देने लगी। बाउजी ने कुछ सेकण्ड्स के बाद उनके होठो को छोड़ा चाची को लगा जैसे उसे निचोड़ लिया गया हो। चाचा ने कहा अब जरा निचे भी चूस ले छोटी।
चाची ने ९० डिग्री पर खड़े उनके हाहाकारी लंड को देखा और झुक गई। उन्होंने चाचा के लंड को भी चूसा था और उनका पानी पिया था पर बाउजी का लंड ज्यादा ही बड़ा था । पहले उन्होंने उनके सुपाड़ी को किस किया और फिर लंड को मुँह में लिया। लंड अभी आधा ही गया था कि मुँह में लगा गर्दन तक गया हो। उन्होंने धीरे धीर उसे मुँह में अंदर बाहर करना शुरू किया।
उधर चाचा अब माँ के क्लीट को अपने चूस रहे थे। अम्मा पूरी मस्त में आ चुकी थी।
अम्मा – चाट उसे ढंग से चाट , चूस ले मेरे लंड को। आह आह , देख तेरी बीवी कितने बढ़िया से अपने भसुर का लंड खा रही है। तू भी अपनी भाभी का लंड खा जा। माँ का भग्नाशा थोड़ा बड़ा था , एकदम छोटे से लंड कि तरह। चाचा उसे चूसने लगे।
अम्मा एकदम गरम हो गई थी। उन्हें अब अपनी चूत में लंड चाहिए था। उन्हें पता था कि अगर उन्होंने चाचा का लंड लिया तो बाउजी चाची को पेल देंगे और चाची के साथ बुरा हो जायेगा। उन्होंने कहा – अब तो मुझे अंदर लंड चाहिए।
वो चाचा को हटाकर उठी और बाउजी के पास चली आई। उनके पेटीकोट कि डोरी तो चाचा पहले ही खोल चुके था। उन्होंने पेटीकोट उतारा और बाउजी के लंड पर कब्ज़ा जमा लिया। कुछ पल वो चाची के साथ बाउजी के लंड को चाटी फिर बोली – ये मुझे अंदर चाहिए।
उन्होंने अपने दोनों पैर बाउजी के दोनों साइड किया और उनके लंड पर आराम से बैठ गई। उनकी पनियाई हुई चूत में बाउजी का लंड घुप कि आवाज के साथ घुस गया। अम्मा अब उस पर उप्पर निचे उछलने लगी।
बाउजी ने चाची को फिर से अपने तरफ खींच लिया और उनके मुम्मे पर मुँह लगा दिया।
चाची शर्माते हुए बोली – रुकिए ब्लाउज उतार देती हूँ।
कुछ ही पल में उनके मुम्मे आजाद थे , पर कुछ ही देर के लिए , वपस बाउजी के मुँह में चले गए।
इधर अम्मा ने चाचा को कहा – तू भी दबा मेरे मुम्मे , देख क्या रहा है। बदन में ऊपर भी बहुत दर्द है मेरे।
चाचा अम्मा के पीछे आये; अम्मा तब तक ब्लॉउस खुद ही खोल कर उतार कर खोल चुकी थी। चाचा पीछे घुटने के बल खड़े होकर आमा के मुम्मे दबाने लगे। साथ ही वो उनके गर्दन और पीठ को भी चूम लेते।
सीन ये था कि चाची बाउजी के बगल में अधलेटी अवस्था में लेटी हुई उन्हें दूध पीला रही थी , अम्मा बाउजी के लंड पर उछाल रही थी और उनके उछालते हुए मुम्मे चाचा के हाथो में थे।
अम्मा – ठीक से दबाओ जोर नहीं है क्या ? मालिश करो मेरे मुम्मो की। आह , क्या जी आपका लंड तो एकदम मजे दे रहा है। अंदर तक जा रहा है। जरा तुम भी जो लगाओ , और अंदर तक डालो।
अब बाउजी ने चाची के मुम्मे छोड़ दिए और अम्मा को अपने ऊपर कर लिया। अम्मा ने अपना कमर ऊपर किया हुआ था और बाउजी अब निचे से धक्के लगा रहे था। चाचा अब अम्मा के गांड को चाटने में लगे थे। पहले तो उन्होंने अपने जीभ से उनके गांड को गिला किया फिर एक ऊँगली अंदर डाली।
अम्मा – भँड़वे , बहनचोद ऊँगली से क्या होगा ? लंड डाल।
चाचा भी जोश में आ गए – रंडी भौजी एक बार में मोटा लंड पेल दिया तो गांड फट जाएगी। थोड़ा फैला लेने दे।
अम्मा – साले , कमजोर समझ रखा है क्या , डाल अपना लंड।
बाउजी समझ गए की अम्मा को अब दोनों छेड़ में माल चाहिए। उन्होंने पेलना रोक दिया। चाचा ने आव न देखा ताव अपना लंड अम्मा की गांड में सेट किया और एक ही बार में ठेल दिया।
अम्मा- साले , इतनी जोर से क्यों डाला फाड़ दी मेरी गांड
चाचा – तभी तो ऊँगली डाल रहा था पहले।
अम्मा – अब लंड डाला है तो चोद ना , रुक क्यों गया।
अब बाउजी और चाचा ने एकदम ले सेअम्मा के दोनों छेदो को चोदना शुरू कर दिया।
चाची से अब नहीं रहा जा रहा था , उन्होंने अपनी चूत में खुद से ही ऊँगली करनी शुरू कर दी। वो देख अम्मा बोली – ऊँगली कब तक करेगी अभी ये दोनों जब फाड़ेंगे तो समझ आएगा ।
चाची ने सोचा अब शर्म छोड़नी पड़ेगी। उन्होंने कहा – जब तुम्हारी फट रही है , तो मैं भी फड़वा लुंगी। तुम जैसी चुदक्कड़ बहन हो तो सब हो जायेगा।
अम्मा – चिंता न कर संभाल कर प्यार से लेंगे। फिर अम्मा ने उन दोनों को कहा – अबे मेरी तो ढंग से लो , अब मेरा आने वाला है। छोड़ो मुझे तेजी से। अम्मा की चूत कई बार पानी बहा चुकी थी , वो एकबार फिर से आने वाली थी। चाचा और बाउजी का लंड भी बस पानी छोड़ने ही वाला था। तीनो ऐसे गुथमगुथा थे जैसे कोई मलयुद्ध चल रहा हो और एक दुसरे को हराने में लगे हो। आखिर में सब हारे और सब जीते तीनो लगभग एक ही समय पर स्खलित हुए। चाचा के लंड ने पानी तो छोड़ दिया पर अम्मा की गांड में अब भी फंसा हुआ था।
उन्होंने धीरे से अपना लंड निकाल लिया। चाची ने लपक कर उनके लंड को लपक कर अपने मुँह में ले लिए।
अम्मा अब भी बाउजी के ऊपर लेटी थी। उनका लंड अब भी टाइट था और उनकी चूत एक अंदर था।
अम्मा ने उन्हें प्यार से चूम लिया और कहा – लगता है छोटी को चोद कर ही अपने छोटे रूप में आएगा ये। उसकी चूत में प्यार से डालना , फाड़ दिया तो फिर कुछ दिन का उपवास रह जायेगा तुम्हारा।
बाउजी – चिंता न करो , प्यार से लूंगा उसकी।
अम्मा – तुम तो प्यार से लोगे पर उसे मजा चढ़ गया तो खुद बा खुद फड़वा लेगी।
अम्मा उनके ऊपर से उठ गई और बाउजी के बगल में लेट गई। बाउजी उठे और चाची से बोले – छोटी तू मुझे प्यार नहीं देगी क्या ?
चाची ने कहा – बहुत देर से तरस रही हूँ आपके प्यार के लिए।
बाउजी ने चाची को लेता दिया और उनके चूत को चाटने लगे। वो चाची को पूरी तरह से गरम कर देना चाहते थे। उन्होंने उनके चूत पर बाहर से जीभ लगाया , फिर वो अपनी जीभ उनके भग्नाशाय पर ले गए। उनका क्लीट छोटा सा था। बाउजी ने उस पर जीभ ऊपर नीचे करना शुरू कर दिया। साथ ही अपनी एक ऊँगली उनके चूत में डाल कर पेलने लगे। चाची सिसकारियां ले रही थी।
कुछ पल बाद चाची बोली – जीजा मुझे आपका लंड अंदर चाहिए। पेल दो मुझे , बना लो अपना गुलाम।
बाउजी- देख दर्द झेल लेगी न ?
चाची – अब जो होगा देखा आएगा। मुझे पता है आप प्यार से ही लोगे। डाल दो अब तरसाओ मत।
बाउजी उठे और उन्होंने चाची के दोनों टांगो को फैला कर अपने कंधे पर रख लिया और अपना लंड उनके चूत के मुहाने पर रख दिया।
चाची – क्यों तरसा रहे हो अंदर डालो।
बाउजी ने अपना लंड धीरे धीरे उनके चूत में डालना शुरू किया।
अभी थोड़ा ही लंड गया होगा की चाची चीत्कार उठी – हाय रे अम्मा , फाड़ दिया रे। निकालो बाहर मुझे नहीं चाहिए।
बाउजी नेकुछ नहीं किया और वैसे ही स्थिर रहे। फिर उन्होंने अपना लंड बाहर निकाल लिया पर उनके लंड का टोपा अब भी चूत में ही था।
चाची – रहने दो जिज्जी मुझे नहीं चुदना है। गधे जैसे लंड है।
अम्मा ने उन्हें जोश दिया – बड़ी चुदास हो रखी थी थोड़े देर पहले तक , फट गई। निकाल लो जी इससे न हो पायेगा।
बाउजी ने थोड़ा और बाहर किया। चाची को लगा की अब वो निकाल लेंगे। पर बाउजी ने फिर से अपने लंड को धीमी रफ़्तार से थोड़ा अंदर किया।
चाची – मादरचोद , छोड़ मुझे। मेरी चूत फट जाएगी।
बाउजी ने एक दोबार ऐसे ही अंदर बाहर किया। चाची चीखती रही। कुछ देर बाद उनको मजा आने लगा। उन्होंने भी अपना कमर हिलाना शुरू कर दिया।
अब बाउजी ने स्पीड बढ़ा दी।
अम्मा – क्यों अब मजा आ रहा है छोटी
चाची – हाँ , अब पता पद रहा है चुदाई क्या होती है। जीजा से छोड़ने का और ही मजा है।
अम्मा – मजा दोगुना हो जाता है जब जीजा भसुर भी हो। हाहाहाहा
चाची – मैं तो जीजा ही मानूंगी। अब तो बस इसी लंड से चुदना चाहती हूँ। जीजा आज से तुम्हारी साली आधी नहीं पूरी घरवाली हो गई। चोद के अपना बना लो। आह आह चोदो , मैं जितना भी चीखु रुकना नहीं बस चोदते रहना
बाउजी ने अपनी स्पीड बढ़ा दी थी पर अब भी वो पूरा लंड अंदर नहीं डाले थे।
चाची अब आनंद के सागर में गोते लगा रही थी। बाउजी ने अब उनका एक पैर निचे कर दिया और एक पैर ऊपर ही रहने दिया और पेलते रहे।
इतनी गरम चुदाई देख चाचा से भी नहीं रहा गया। वो अम्मा के ऊपर आ गए और उन्हें चोदने में लग गए।
अब घर की दोनों औरतें एक दुसरे के मर्द से चुद रही थी। एक दुसरे के सामने ही। माहौल एकदम गरमा गरम हो चूका था।
अम्मा – देखो जी पेल दो अपने भाई की बीवी , तुम्हारा भाई भी मेरे पर चढ़ा हुआ है। छोड़ना मत निकाल दो उसकी गर्मी। आह लल्ला जोर लगाओ। पेलोअपनी भाभी को।
कमरे में फिर से घमसान हो रहा था। चाची पुरे पसीने पसीने हो रखी थी। उनकी चूत ने कई बार पानी छोड़ दिया था। पर बाउजी अब भी लगे हुए थे।
चाची – बड़ा दम है जीजा तुममे , मेरी चूत तो थक गई। अम्मा बड़ा ताकतवर दामाद है ये , मौका मिले तो ले लेना। बाउजी के लुल्ली से बड़ा है। इस उम्र में भी तुम्हारी फाड़ देगा।
बाउजी – तेरी माँ की भी ले लूंगा रानी , पहले तू तो चुद
चाची – रंडी की तरह तो चुद रही हूँ और कैसे चुडू
बाउजी अभी पूरा लंड कहाँ लिया है रानी , आधे पर ही अम्मा याद आ रही है। पूरा जायेगा तो मोहल्ले की साड़ी औरतें बुला लेगी क्या ?
चाची – तुम्हारे लंड को पाने के लिए तो बुढ़िया तक साली बन कर चुद जाएँगी। मजे दो मुझे। पूरा डाल दो आह आह। मोहल्ले की साड़ी औरतें कड़ी कर दूंगी बस अब मुझे छोड़ दो।
बाउजी ने स्पीड बढ़ा दी। कुछ ही देर में उनके लंड ने भी अपना लावा चाची के अंदर डाल दिया।
चाचा तो पहले ही खलास हो चुके थे।
बाउजी अब चाची के दूसरी तरफ लेट गए। अम्मा भी चाची की तरफ खिसक गई। पसीने में डूबी चाची को देख अम्मा और बाउजी की लार टपकने लगी। दोनों ने अपनी जीभ निकाली और चाची के चेहरे पर लगे पसीने को एक साथ चाटना शुरू कर दिया। चाची के शरीर में फिर से झुरझुरी होने लगी। अम्मा और बाउजी के नशे का सामान सामने था और दोनों उस नशे में डूब गए।
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माँ – उस रात चाची की अगली चुदाई चाचा ने की। वो बाउजी से एक बार और चुदना चाह रही थी।, पर अम्मा ने मन कर दिया।
अम्मा की कई रौंद चुदाई हुई। चारो लगभग भोर होने तक आपस में लगे रहे।
माँ के परिवार की कामुक कहानी सुनकर मेरा लंड उनकी चूत में आपने माल छोड़ने को तैयार था। वैसे भी कहानी सुनते सुनते मैं बीच बीच में कमर हिला लेता था। माँ ने पर आने से रोक रखा था। जैसे ही उनकी कहानी ख़त्म हुई , मुझसे बर्दास्त नहीं हुआ मैंने ताबड़तोड़ धक्के लगाने शुरू कर दिए। पर मैं आने की कगार पर पहले से ही था। कुछ ही राउंड में मैं सर्रेंडर कर गया।
मैंने माँ से सॉरी कहा।
माँ- सॉरी क्यों मेरे लाल , तेरे लंड ने मेरा पहले ही पानी निकाल दिया था।
मैं – माँ फिर क्या हुआ ?
माँ – फिर क्या उसके बाद तो घर में खुले में चुदाई होने लगी। जो जिसे चाहता जब चाहता चोद लेता।
मैं – छोटी नानी ने गांड मरवाई क्या ?
माँ – बचती कैसे ? कुछ ही महीनो में वो भी दो दो लंड की सवारी करने लगी। वो तो अम्मा से भी बड़ी चुदक्कड़ निकली। उसे खड़े खड़े आगे पीछे लंड लेने में बहुत मजा आता था।
मैं – बाहर गाओं में कोई कुछ नहीं बोलता था ? आप लोगो के होने के बाद ?
माँ – बाहर हम सब रिश्ता वैसे ही बनाये रखते। कुछ छह आठ महीनो बाद अम्मा पेट से हो गई और तेरी मौसी का जन्म हुआ तब।
मैं – मौसी के होने के बाद , तब भी आप सब लगे रहे।
माँ – मौसी जब मेरे पेट में थी तो तेरे नाना को छोटी नानी की ही चूत मिलती। पर मेरी गांड तो खुली थी। तेरी बड़ी मौसी के होने के बाद फिर से वही खेल चलने लगा। जब वो चार पांच साल की हुई तब मैं आ गई।
मैं – छोटी नानी ?
माँ – बड़े अफ़सोस की बात ये थी की मौसी कोई बच्चा पैदा नहीं कर पाई। उनको जब भी गर्भ ठहरता , अबो्र्ट हो जाता। बहुत डॉक्टर को दिखाया पर सबने उनके अंदर ही कमी बताई। अब उस समय उतनी सुविधाएँ तो नहीं थी। कुछ साल तो वो दुखी रही पर उन्होंने फिर खुल कर सेक्स के मजे लेना शुरू कर दिआ और हमें ही अपने संतान जैसा मानने लगी थी।
मैं – आप कह रही थी मेरे में दोनों नाना के गुण हैं।
माँ – अरे मुझसे ही गए होंगे। मेरे टाइम दोनों भाई मेरी अम्मा के साथ इतनी चुदाई करते पूछो मत। तेरी बड़ी मौसी के होने के बाद अम्मा में भी सेक्स के लिए आग सी लगी हुई थी। ना जाने क्या हो गया था। लगभग रोज रात में दोनों भाई अपना माल उनके अंदर छोड़ते थे।
मुझे ये भी नहीं पता कि मैं अपने बाप कि हूँ, चाचा कि हूँ या दोनों का अंश हूँ
मैं – आपको ये अजीब नहीं लगता।
माँ – मुझे तो ये सब पता ही नहीं था। जब होश संभाला , घर के अंदर का खेल देखा तो माँ ने ये सब बताया। पर कहते हैं न खून का असर तो होता ही है। मुझे सुनकर अजीब नहीं मजा सा आया। दीदी तब तक पहले से बाउजी और चाचा के साथ मजे लेने लगी थी। खेल में पूरा परिवार ही धीरे धीरे शामिल हो गया।
मैं – आप और मौसी कैसे शामिल हुई बताओ न।
माँ – फिर उतावला होने लगा। बाकी कभी मौसी लोगो या मामा से पूछ लेना। अब सो जा।
मैंने माँ को बाहों के मुम्मे फिर से मुँह में भर लिया और उनके ऊपर ही दूध पीता पीता सो गया।
अगला एक हफ्ता कैसे बीता पता ही नहीं चला। गोवा जाने की वजह से कॉलेज का काफी काम बचा हुआ था। मुझे वो सारा करना था। फिर सुधा दीदी आ रही थी तो माँ ने उनके लिए और मेरे लिए खूब साड़ी पौस्टिक चीजें बनाई , जसिमे मैंने मदद की। माँ चाहती थी कि गर्भ धारण के वक़्त दीदी एकदम स्वस्थ रहे। उन्होंने गोंद और ड्राई फ्रूट इत्यादि ले लड्डू बनाये। मेवे की मिठाई , फल वगैरह से घर भरवा लिया।
दिन आते ही मैं उनको लेने के लिए चला गया। उनका ससुराल पास के ही शहर में था तो मैंने अपनी ही गाडी से खुद ही लाने को सोचा। प्लान था की मैं शनिवार को जाऊंगा , रात वहीँ रुकूंगा और रविवार की सुबह लेकर आ जाऊंगा।
शनिवार को मैं सुबह सुबह ही निकल पड़ा। उनके यहाँ दोपहर को पहुंचा।
मैंने वहा पहुँच कर उनकी सास और ससुर के पैर छुए। दोनों ने खूब आशीर्वाद दिया। जीजा जी भी घर पर ही थे। उन्होंने भी मुझे गले से लगा लिया। मेरा स्वागत सब ऐसे कर रहे थे जैसे मैं उनके घर का दामाद हूँ और उनकी लड़की विदा कराने आया हूँ। मुझे ड्राइंग रूम में बिठाया गया। दीदी की सास ने मेरा और माँ का हाल चाल पूछना शुरू किया।
तभी एक बहुत ही खूबसूरत सी लड़की सलवार सूट में मेरे लिए कुछ मिठाई, पानी और नमकीन लेकर आई। वो दीदी की ननद सोनिया थी। दूध सी गोरी गोलू मोलू , बड़ी बड़ी आँखे , लम्बे लम्बे बाल जो उसके कमर तक लटक रहे थे। उसके गोर फुले गाल जैसे दो टमाटर हो। उसने पिंक कलर का सूट पहन रखा था। उसे देख कर मैं खो सा गया। जैसे ही उसने ट्रे टेबल पर रखा , उसकी आवाज से मैं होश में आया। मैंने सकपका कर चरों तरफ देखा तो दीदी मुश्कुरा रही थी और सोनिया शर्मा गई थी।
खैर चाय नाश्ते के बाद उनकी सास ने कहा – सोनिया राज को सुधा के कमरे में ले जाओ।
मेरा सामान पहले से ही दीदी के कमरे में रखा था। दीदी और सोनिया मेरे साथ ही कमरे में आये। दीदी की सास खाने पीने की व्यवस्था में लग गई। मैं दीदी के कमरे में।
दीदी ने कहा – तुम बैठो मैं माजी की मदद करता हूँ
सोनिया वही खड़ी थी। मैंने कहा – आप खड़ी क्यों है बैठिये न।
सोनिया – आप मुझे आप मत कहिये। मेरे नाम से बुला सकते हैं। हम दोनों एक ही उम्र के होंगे। नहीं , आप मुझसे बड़े ही होंगे।
मैं – मैं बड़ा हूँ पर आप भी छोटी नहीं है।
सोनिया – जी, ऐसा कैसे हो सकता है।
मैं – अरे मेरे कहने का मतलब था , आप बह ीबड़ी हो गई हैं। दीदी के शादी में देखा था तो आप छोटी बच्ची से लगती थी।
सोनिया – आप भी लम्बे चौड़े हो गए हैं।
मैं – मैं लम्बा चौड़ा हो सकता हूँ पर स्मार्ट नहीं हूँ।
सोनिया – नहीं आप काफी स्मार्ट है। भाभी से आपकी बहुत तारीफ सुनी थी।
मैं- कहाँ। आजतक कोई गर्लफ्रेंड नहीं बनी। स्मार्ट होता तो लड़कियां आगे पीछे होती
सोनिया – भाभी तो जब से लौट कर आई हैं आपकी दीवानी हो गई है। अभी आपको देखकर समझ आ रहा है क्यों दीवानी है ? आप कह रहे हैं आपकी कोई गर्लफ्रेंड नहीं है भाभी जैसी स्मार्ट ाकि दीवानी है।
मैं – आपको क्या बताएं वो क्यों मेरी दीवानी है ?
सोनिया – बताइये क्यों?
मैं अब उसे क्या बताता दीदी ने मेरा लौड़ा देखा है इस लिए दीवानी है। मुझे भी ये नहीं पता था की दीदी ने इसे मेरे लंड के बारे में बता दिया है तभी ये भी मेरे पीछे पड़ी है। खैर ऐसी सुन्दर लड़की को पीछे नहीं पड़ना पड़ता । लोग इसके पीछे पड़ते ।
मैं – आते कुछ नहीं। मैं उनका भाई हूँ। एक बहन भाई को नहीं प्यार करेगी तो किसे प्यार करेगी। बहन की नजर में तो भाई प्यारा ही होता है न।
सोनिया ने धीरे से कहा – काश आप जैसा भाई सब बहनो का होता। मेरा तो लुल्ल है।
मैं – जी आपने कुछ कहा क्या ?
सोनिया – नहीं , आप सही कह रहे हैं।
तभी दीदी कमरे में आई। बोली – अरे तुमने अभी तक चेंज नहीं किया। लगता है मेरी लाडो ने बातों में फंसा लिया।
मैं – कहा फंसाया दीदी।
दीदी – कोई नहीं। कहे तो कहीं और फंसा दू
सोनिया शर्मा कर कमरे से चली गई। मैंने दीदी को किस कर लिया। दीदी ने भी मुझे किस किया। उन्होंने कहा – चल खाना खा ले। आज रात मेरे साथ ही सोयेगा। जितनी पपिया झपियाँ करनी हो कर लेना। फिर कल से तो अपने घर में मौज ही मौज है।
मैंने भी उन्हें छोड़ दिया और तैयार होकर बाहर आ गया। दीदी और सोनिया ने हम सबको पहले खाना खिलाया। फिर जीजा जी बाहर चले गए। मैं दीदी के कमरे में लेटने चला गया। थोड़ी देर बाद दीदी कमरे में आई। दीदी ने कमरे का दरवाजा बैंड किया और अपनी साडी उतार दी। वो सिर्फ पेटीकोट और ब्लाउज में ही मेरे बगल में आकर लेट गई। मैंने उन्हें बाहों में भर लिया और उनके चेहरे पर कुम्मियों की झड़ी लगा दी। मुझे ऐसे लग रहा था की मैं अपनी बीवी से कितने दिनों बाद मिला हूँ। दीदी भी मुझसे उतनी ही चिपक रही थी । हम दोनों एक दुसरे में समां जाना चाहते थे। कुछ देर ऐसे ही एक दुसरे के बाँहों में एक दुसरे को रगड़ने के बाद दीदी ने कहा – सब्र कर।
मैं – तुमको देख कर सब्र कहाँ होता है। बस मन करता है ~~
दीदी – क्या मन करता है ?
मैं – कि पटक कर चोद दू
दीदी – पर आज तो सोनिया को देख कर लार टपका रहे थे ।
मैं – नहीं यार , बस मजे ले रहा था।
दीदी – मजे लेने वाली चीज ही है। कहे तो बुला दूँ। खोल दे उसकी भी सील।
मैं – भक , क्या बात करती हो।
दीदी – ऊपर से जितनी भोली है अंदर से उतनी ही चुदास है। साली एक पल में मुझे नहीं छोड़ती। उसे बस मेरी चूत चाहिए होती है।
मैं – पर सुना तो मैंने है की चुतरस की प्यासी तो तुम हो।
दीदी – मुझे भी मजा आता है। पर ये मुझसे भी बड़ी वाली है।
मैं – पर ये हुआ कैसे ?
दीदी – तुझे कहानियों का बड़ा शौक है। माँ बता रही थी मुझे।
मैं – माँ ने तुम्हे सब बता दिया ?
दीदी – शुरू में तो तुम दोनों के चुदाई के किस्से मुझे नहीं पता थे। माँ मुझसे डरती थी। पर बाद में हमारे गोवा ट्रिप के बाद सब बता दिया।
मैं – सरला दी बता रही थी की माँ ने सबसे पहले तुम्हे ही ट्रेनिंग दी थी।
दीदी – हाँ , सबसे पहले जवान हुई तो सीधी सी बात है मुझे ही बताएंगी।
मैं – फिर तुम तीनो ने आपस में भी ?
दीदी – बाहर जाकर किसी से भी चुद कर बदनामी करवाने से ये अच्छा था।
मैं – और नाना के साथ ?
दीदी – उनके साथ कुछ नहीं। जवान हुई तो उन्होंने मजे लेने शुरू किये थे। पर मैं नहीं चाहती थी। मैंने अपने चूत को अपने पति के लिए बचा कर रखा था। पर क्या पता था की मेरा पति भी एकदम नल्ला निकलेगा।
मैं – मैं हूँ न।
दीदी ने मुझे किस कर लिया। कहा – अब तू ही मेरा पति है , और तू ही मेरे बच्चों का बाप भी बनेगा। मेरे शरीर पर अब किसी का हक़ नहीं।
मैं – सोनिया का भी नहीं ?
दीदी – अरे मेरा मतलब है किसी भी और मर्द का नहीं।
मैं – ओह्ह। पर घर की परंपरा का क्या होगा ?
दीदी – परंपरा गई माँ चुदाने।
मैं हंस पड़ा। मैंने दीदी के ब्लाउज खोल लिया और उसके मुम्मे पीने लगा।
दीदी – इसससस , आराम से पी ले। कुछ महीनो में इनमे दूध आएगा तो वो भी पिलाऊंगी। तब तक तू इन्हे निचोड़ निचोड़ कर बड़ा कर दे। मसल डाल इनको।
मैं दीदी के मुम्मे को मजे से पीने लगा। निचे मेरा लंड शिकायत करने लगा कि उसे चूत चाहिए। वो लगातार दीदी के सिमट चुके पेटीकोट के ऊपर से ही उनके चूत पर दस्तक दे रहा था। दीदी को समझ आ गया।
दीदी ने मुझे लिटा दिया और मेरे ऊपर चढ़ गई। उन्होंने अपने पेटीकोट को सर के ऊपर से ही उतार दिया। वो अब पूरी तरह से नंगी होकर अपने चूत को मेरे लंड पर सेट कर ली। उन्होंने धीरे धीरे मेरे लंड को अपने चूत में लेना शुरू किया। पर मेरा लंड बेकाबू हो चूका था। मैंने नीचे से एक जोरदार झटका ऊपर की तरफ डाला और उनके चूत में पूरा अंदर कर दिया।
दीदी की चीख निकल गई – बहनचूऊऊद , भोसड़ीवाले आराम से ले रही थी तो चैन नहीं है। तेरी बहन की चूत अब भी संकरी है। टाइम लगेगा पूरा अंदर लेने में।
मैं – सॉरी दीदी
उनकी चीख सुनकर बाहर उनकी सास दौड़े चली आई। बोली – सुधा तू ठीक तो है।
दीदी – चुप रंडी। भाग यहाँ से। एक तेरा बेटा है उसका ३ इंच का खड़ा नहीं होता यहाँ मैं एक गधे जितने बड़े लंड को अंदर डालूंगी तो चीख नहीं निकलेगी।
सास- आराम से । राज बेटा अपनी बहन का ध्यान रखो
दीदी – ध्यान रख रहा है। तेरा भी ध्यान रखवाना है क्या ? खोल दूँ दरवाजा , चुदेगी क्या ? बुला ले आ अपनी बिटिया को भी। एक साथ तीनो को प्रेग्नेंट कर देगा। आह आह। साले तू क्यों रुक गया , चोद न बहनचोद।
दीदी का ये रौद्र रूप मैंने पहली बार देखा था। गोवा में जीजा को लताड़ते देखा था पर अपने ही ससुराल में ऐसे गरियाते नहीं देखा था। कहाँ सरला दी का सासुराल और कहा सुधा दी का ससुराल। खैर दीदी की बातें सुन कर मुझे भी जोश आ गया। मुझे उनका स्टाइल समझ आ गया था।
मैंने निचे से धक्का लगाते हुए कहा – साली रंडी बहन, तू इतनी चुदक्क्कड़ है पता नहीं तह । चोद कर तेरी चूत का भोसड़ा बना दूंगा तब मेरा लंड ले पायेगी न।
दीदी – आह आह।, गांड में दम है तो चोद न। ले ले अपनी बहन की चूत। फाड़ दे। ससुराल वाले तो कुछ न कर सके तू ही पेल ले। साल ससुर और पति दोनों के दोनों निकम्मे हैं। चोद के मुझे माँ बना दे। देख सास भी अभी मालदार है। उसकी कोख भी भर दे। आया है ये तो भी कर ले।
मैं – बुलाओ उसकी भी चूत फाड़ देता हूँ। मुझे तो लगता है दोनों बच्चे भी किसी और के हैं।
दीदी – कोई भरोसा नहीं रंडी का।
हम दोनों मजे में इसी तरह बातें करते करते चुदाई किये जा रहे था।
बाहर उनकी सास अब भी कान लगाए खड़ी थी। वो बार बार मुझे कह रही थी – मेरी बहु का ख्याल रखो। देखो अभी वो नाजुक है।
फिर कभी कहती – यहाँ रहने दो। घर में आराम से चोद लेना। वहां उसकी जो=इतनी लेनी हो ले लेना। यहाँ मत चीख निकलवाओ।
उनकी बातों से लग रहा था की वो वहीँ दरवाजे पर खड़ी अपनी चूत में ऊँगली कर रही है।
हम दोनों की जबरदस्त पेले कुछ देर तक चली। हम दोनों चुदाई में मदहोश थे। जब मेरे लंड ने और उनकी चूत ने एक साथ सर्रेंडर किया तप समझ आया हम कर क्या रहे थे।
साँसे जब ठीक हुई तो मैंने दीदी से कहा – यार , क्या सोचेंगे तुम्हारे ससुराल वाले।
दीदी – सालों से सोच पाने की उम्मीद में नहीं थे। अभी सोचा है तो मुझे तेरे हवाले करके सही ही सोचा है। तू घबरा मत।
मैं – पर सोनिया क्या सोचेगी ?
दीदी – उसकी बड़ी चिंता है। मेरी सौतन बनाने का है क्या ? मुझे बड़ी अच्छी लगता है। मैंने उसे तेरे लिए सोच रखा है। कहे तो शादी करा कर ले चलूँ ?
मैं – क्या दीदी तुम भी। अभी शादी वादी कौन सोचता है।
दीदी – तो बिना शादी पेल दे। लौंडिया एकदम तैयार है।
मैं – तुम तो ले नहीं पा रही, उसकी तैयारी धरी की दरी रह जाएगी। मेरा हथ्यार गया तो उसका ऑपरेशन करवाना पड़ेगा।
दीदी – औरत की चूत को तूने समझा क्या है। तुझ जैसे वहीँ से निकलते है। थोड़ा दर्द होगा पर ले लेगी।
मैं – चुप करो। अभी अपना सोचो।
दीदी – अपना सोचने के लिए तो अब वक़्त ही वक़्त है। अब मेरा और तुम्हारा ही तो वक़्त है।
हम दोनों ऐसे ही बातें करते रहे। कुछ देर बाद मुझे नींद आ गई। मैं लम्बा गाडी चलाकर आया था उसके ऊपर से यहाँ दीदी की सवारी। थकान से चूर था।
