मेरी माँ बहने और उनका परिवार – Update 11

मेरी माँ बहने और उनका परिवार - Family Sex Story
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अगले दिन सुबह नाश्ते के बाद फिर से मेरे कमरे में सरला दी और मामी ने जमावड़ा लगा लिया।  पर इस बार उनके साथ मामा और शलभ जीजा भी थे ।  बड़े जीजा राजीव का कुछ पता ही नहीं था।  किसी ने उनके बारे में पुछा ही नहीं।  बात कल शाम उस न्यूड बीच की चलने लगी।

मामी ने सरला दी और जीजा को छेड़ते हुए कहा – तुम दोनों से तो बर्दास्त ही नहीं हुआ।  वही सबके सामने ही शुरू हो गए।

सरला दी – अब हमाम में जब सब नंगे हो तो शर्माना कैसा ? आप कौन सा रुक गई।  बालू से साणे निकले थे आप दोनों।

शलभ जीजा – पर हमारे राज साहब कहाँ छुप गए थे अपनी प्रेमिका को लेकर।

मैं – सब्र का फल मीठा होता है।  हमें तो आगे चलकर एक टेंट मिल गया था।  वहीँ बैठे थे।

मामा – बैठे थे या फिर   हाहाहाहा

मैं – जो करने गए थे वही किया।  अच्छे से किया। हाहाहाहाहा।  आप बताओ खुश हो न

सुधा दी – मामी , आपको अब तो नाना  से फुर्सत मिली।  उम्मीद है मजा आ रहा होगा ?

मामी – हाँ , थोड़ा आराम है।  वरना वहां तो पता ही नहीं चलता था शादी किससे हुई है ?

शलभ जीजा – वैसे आपको देख कर किसी का भी मन डोल जाये।  नाना का कोई कसूर नहीं है।

मामी – देख सरला , तेरा मियां यहाँ भी बहक रहा है।  तेरे होते मुझ पर नजर डाले हुए है।

सरला दी – मुझे कोई दिक्कत नहीं है।  आप मामा से पूछ लो।

मामी – उनका भी जी कर गया अपनी प्यारी भांजी के संग खेलने को तो ?

अबकी जवाब शलभ जीजा ने दिया – मुझे कोई परेशानी नहीं है।  आखिर सरला से उनका रिश्ता मुझसे पहले से है।

मुझे समझ नहीं आ रहा था कि ये क्या रंडी बाजी चल रही है। सब एक तरफ तो अपने पति से बच्चा पैदा करने आई है दूसरी तरफ दूसरों से चुदने को तैयार है। अभी मैं सोच ही रहा था कि मामी बोल पड़ी – मुझे भी कोई दिक्कत नहीं है पर फ्रंट डोर से सिर्फ  मामा कि एंट्री अलाउड है।

दीदी – मेरा बैकडोर जाम है।  अभी तो पति के लिए भी नहीं खुला है।  फ्रंट डोर पर इस छुट्टी में सिर्फ शलभ का है।  सो बस मामा खिलौने को छू भर सकते है।

मामा – मैं अपनी भांजियों को उनकी मर्जी के बिना कुछ भी नहीं करूँगा। 

सुधा दी – तुम चारो को जो करना है करो।  मुझे इन सब से दूर रखो।

मामी – हम्म पर राज का क्या ?

सुधा दी – राज अपनी मर्जी का मालिक है।  वो जो चाहे सो करे।

मैं इन सब बातों से तंग आ गया था।  मैंने कहा बकचोदी हो गई हो तो आज कहीं घूमने चले ? नहीं तो अपने कमरे में जाओ , थोड़ा समय बताओ एक दुसरे के लिए।

मामी ने मेरे गाल पर पप्पी दी और कहा – देखो जरा इस दीवाने को।  सुधा के साथ खाट कबड्डी खेलनी है तो सीधे कह न।

सुधा दी बोली – चलो न कहीं घूमने चलते है।

सब बाहर घूमने के लिए तैयार हो गए।  सभी तैयार होने के लिए अपने अपने कमरे में चले गए। 

एक घंटे बाद सब तैयार होकर निकले।  मर्दो ने हाफ पेंट और टी-शर्ट डाल लिया था।  सरला दी ने एक छोट पेंट और उस पर एक लम्बा सा जालीदार शर्ट डाला था।  शर्ट इतना लम्बा था कि पेंट उसके नीचे छुप गया था।  दीदी ने एक कॉटन कैप्री और गुलाबी शर्ट डाली हुई थी। सबसे कातिल तो बड़ी मामी लग रही थी।  एकदम हेरोइन कि तरह ढीली ढाली ट्रांसपेरेंट बीच ड्रेस डाली हुई थी जो मुश्किल से उनके जांघो तक आ रही थी।  कंधे पर ये ड्रेस एक डोरी से टिकी हुई थी।  उनकी पैंटी और ब्रा क्लेअरली दिख रहे थे।  उनको देखते ही सभी के होश उड़ गए।

सरला दी ने कहा – यार मामी आप तो लग रहा है आज कईओं को घायल करोगी।  देख लेना कहीं कोई उठा कर न ले जाये।

मामी – यहाँ तीन तीन मुस्टंडे हैं कोई कैसे ले जायेगा।

मैं – अगर इन्ही तीन मुस्टंडो में उठा लिया तो।

मामी – उठा ले।  इनकी परवाह नहीं है।

सुधा दी – मामा देख लो। 

मामी – तुम दिखाओ तो वो भी देख लेंगे। 

उनकी इस बात से सब हंस पड़े। 

हमने पहले होटल के बीच पर ही थोड़ा सा टाइम बिताया।  लहरों के साथ साथ किनारे एक दुसरे के हाथों में हाथ हम तीनो एकदम नवविवाहित जोड़े जैसे लग रहे था।  कुछ देर समय बिताने के बाद हम सबने वहीँ से एक एक बाइक ली और आस पास घूमने निकल पड़े। हमने वहां आस पास के कुछ चर्च देखे और कुछ मार्केट्स घूमे।

कुछ घंटे यूँ ही बिताने के बाद हम बागा बीच पहुंचे।  वहां सरला दी और शलभ जीजा ने पैरासेलिंग के मजे लिए।  सुधा दी डर रही थी तो मैं उनके साथ ही बैठा था ।  दीदी ने कई बार कहा कि मेरी चिंता न करो तुम जाओ।   मामा मामी भी उनके साथ ही बैठे थे।  आखिर में मैंने जेट स्की एन्जॉय करने का सोचा।  जेट स्की करने से एकदम थ्रिल सा हो गया।  लौट कर आया तो सरला दी और शलभ जीजा भी आ गए थे।

फिर ये हुआ कि क्या किया जाये।  मैंने कहा सब चलते हैं बनाना राइड लेते हैं।  सरला दी और शलभ जीजा तो झट से तैयार हो गए।  मामा मामी और सुधा दी थोड़ा डर रहे थे।  पर सबके कहने पर मान गए।  सबसे पहले उस पर शलभ जीजा बैठे।  उसके बाद सरला दी।  मामी ने कहा मैं इतना आगे नहीं बैठूंगी।  तो मामा को दीदी के पीछे बैठना पड़ा। खैर उनके तो मजे ही हो गए।

पता नहीं सुधा दी के मन में क्या था , उन्होंने कहा – मामी आप मेरे पीछे बैठ जाना। 

मामा के पीछे सुधा दी।  सुधा दी के पीछे मामी और लास्ट में मैं। 

मामी ने मुझसे कहा – लल्ला मुझे संभल के रखा।  गिरने मत देना।

मैं – आप कहो तो जिंदगी भर संभल लू।  इस राइड का क्या ?

मैंने उनसे चिपक गया।  सबने अपने आगे वाले के कमर पर हाथ लपटे कर अच्छे से पकड़ा हुआ था।

मेरा लंड मामी के पिछवाड़े से चिपकते ही अपनी हरकत करने लगा। 

मैं बोलै – मामी अभी भी डर लग रहा हो तो मेरे खूंटे पर चढ़ जाओ।  टोका कर रखूँगा।

मामी – तेरा खूंटा तो जोरदार है ही। पर अभी चढूँगी तो मजा नहीं आएगा।

खैर राइड स्टार्ट हुई।  सबने एक दुसरे को जोर से पकड़ा हुआ था।  मामा के पुरे मजे थे।  आगे पीछे दोनों गदराई भांजीया थी।  उन्होंने मौका देख कर कई बार सरला दी के चुचे पकड़ लिए थे।  सरला दी भी पूरा मजा ले रही थी।  मैंने भी मामी को कमर से पकड़ रखा था। 

सच कहूँ तो मन कर रहा था कि राइड ख़त्म ही न हो।  खैर  कुछ मिंटो में राइड ख़त्म हुई।

मामा और मेरा लंड अपनी जगह से हिला हुआ थ।  हम दोनों अपने लंड को एडजस्ट कर रहे थे।

तीनो महिलाओं कि चूचिया एकदम टाइट हो चुकी थी। सबके कपडे भींग चुके थे। 

खेल तो शलभ जीजा के साथ हुआ था।  उन्हें हम सबको देख कर अपने पर पछतावा हो रहा था।  वो हम सबको देख कर कुछ सोच रहे थे।  तभी मामी हँसते हुए बोली – शलभ बाबू , चिंता न करो।  सरला के साथ मामा ने बस बच्चों वाला प्यार ही किया है।

सब हंस पड़े।  मामा और शलभ जीजा झेंप पड़े।

मामी पुरे मूड में थी – पर आपके मामा कि ऐश हुई है।  आगे पीछे दोनों तरफ से प्यार मिला।

सरला दी कहा छुप रहने वाली थी।  उन्होंने कहा – मामा का तो पता नहीं पर आपने तो राज को बैकडोर से एंट्री नहीं दे दी न।

अब मामी कि झेंपने कि बारी थी। 

सुधा दी बोली – सबके कपडे भींग गए हैं चलो होटल चलते हैं।  मस्ती और एडवेंचर भी  खूब हो लिया।

सरला दी कहा – हाँ शर्ट तो भींग ही गया है।  पहनो न पहनो बराबर है।  उन्होंने अपना शर्ट उतार दिया।  वो निचे एक पेंट और ब्रा में थी। उनको देखते ही जीजा ने किस कर लिया।

दीदी का ये ड्रेस ओड नहीं लग रहा था।  जहाँ टू पीस में लड़कियां घूम रही हों , वहां तो ये कुछ भी नहीं था।

खैर हम सब वापस लौट आये।

होटल पहुंचे तो वहां शाम की पूल पार्टी हो रही थी।  बाइक खड़ा करके शलभ जीजा और सरला दी सीधे वहीँ हुस गए।  दीदी ने अपना पेंट भी उतार दिया और सिर्फ ब्रा पैंटी में आ गई।  उन दोनों को देख मामा और मामी भी मचल पड़े।  मामा ने अपना शर्ट उतारा और वो भी अंदर चले गए।  मामी ने भी अपनी मिनी उतार दी।  वो अब सिर्फ पैंटी और ब्रा में थी।

मैंने दीदी से कहा तो वो बोलीं उनका मन नहीं है।  मैंने सबके कपडे वहीँ एक तरफ से उठाया और एक खली बेंच पर मैं और दीदी बैठ गए।

पार्टी के माहौल की क्या ही कहें।  क्या पूल में क्या पूल के बाहर, पूरी मस्ती चल रही थी।  चरों तरफ रंगीन लाइट, डीजे  म्यूजिक , स्नैक्स और ड्रिंक्स भी सर्व हो रहे थे।  मोस्टली कपल थे।  पुरे मस्ती में थे।  एक दुसरे को किस करना , चिपक कर डांस करना सब हो रहा था।  क्या जवान क्या अधेड़ सब कपल आपस में लगे हुए थे।

जो पूल में नहीं थे वो बाहर एक दुसरे से प्यार कर रहे थे।  पूल में मैंने देखा जीजा ने दीदी के बूब्स दबाने शुरू कर दिए थे।  दीदी भी मस्ती में थी।  वही हाल मामा और मामी का था।  तभी दीदी ने गौर किया की एक आदमी मामी के गांड को बार बार टच कर रहा है।  मामी की गांड थी  ही ऐसी।  लगता था जैसे दो बड़े बड़े चिकने फ़लफ़्फ़ी बॉल्स सटा कर रख दिए गए हो।  दीदी ने मुझे उस और दिखाया और कहा – तू जा।  उस बन्दे के इरादे ठीक नहीं है।  ऐसा ही करता रहा तो लड़ाई हो जाएगी। 

मैंने कहा – मैं उसे ठीक कर देता हूँ।  साले का हाथ तोड़ दूंगा। 

दीदी – बेवकूफ है क्या ? तू चला जा।  बन्दे को भगा तू उनका पिछवाड़ा बचा। 

मैं दीदी के आईडिया पर हंस पड़ा।  बोला – मेरे जाने से उनका पिछवाड़ा बचेगा या फटेगा।

दीदी मुश्कुरा कर बोली – उन्हें अपनों से कोई प्रॉब्लम नहीं है। दे दे उन्हें बैक डोर से मजा।

मैंने अपने कप उतार दिए और सिर्फ हाफ पेंट में पूल पर उतर गया।  मैं  कमर से थोड़े ऊपर पानी से चलते हुए मामी के पास पहुंचा।  मामी ने मुझे देखते ही अपने बाँहों में पकड़ लिया।

उस बन्दे को समझ आ गया मैं उनके साथ हूँ।  पर एक के साथ दो मर्द देख कर उससे रहा नहीं गया।  उसने कहा – साली रंडी का एक से काम नहीं हो रहा था।  मैं क्या कम था  जो किसी और को बुला लिया। 

मैंने पूल के अंदर से ही बन्दे की गोटिया और  लंड जोर से पकड़ा और कहा  – साले अभी दबा कर तोड़ दूंगा।  किसी काम का नहीं रहेगा। 

मामा और शलभ जीजा ने भी उसे घेर लिया। उस बन्दे का सारा नशा उतर गया और वो धीरे से सरक लिया। 

शलभ जीजा वापस दीदी के पास चले गए।  दीदी और जीजा ने भी कुछ ड्रिंक्स लिए थे।  फुल मस्ती में वो आपस में लग पड़े।

पूल का माहौल गरम था।  पानी के अंदर कइयों ने चुदाई का खेल शुरू कर दिया था।

मैं वहीँ मामा मामी पूल में डांस कर रहा था।  मामी ने तभी मुझे होठो पर किस कर लिया और बोली – थैंक यू मेरे हीरो।

मैं मामी के नशीले होठो को पाकर अपने होश खो बैठा।  तभी मामा बोले – ये क्या बच्चों वाला इनाम है ?

मामी ने फिर मुझे गले लगा लिया  और मेरे कान में धीरे से कहा – देखो लल्ला बड़ा इनाम तो फिर कभी पर आज मेरे गांड की खुजली मिटा दो।

कहकर मामी ने मामा को गले लगा लिया।  मैं मामी की बातों से गरम तो हो ही चूका था।  मैंने मामी के पीछे जाकर चिपक गया।  अब मामी मेरे और मामा के बीच में सैंडविच बानी हुई थी।  म्यूजिक के ताल पर हम तीनो की कमर ऐसे हिल रहे थे जैसे मामी आगे और पीछे दोनों साइड से चुद रही हो।  हम ऐसे नाचते हुए पूल के एक किनारे चले आये मैं पूल के किनारे साइड पर था  मामी की पीठ मेरे सीने से , और मामा आगे से।  मामा ने अपना लंड पेंट की ज़िप से निकल लिया था और मामी पैंटी सरका कर उनकी चूत में डाल दिया।  मैंने अपना पेंट निचे किया और लंड बाहर कर लिया।  अब मेरा लंड मामी के पिछवाड़े में फंसा हुआ था।  मामा के हर धक्के से मेरा लंड मामी के गांड में ऐसे अंदर जाता जैसे मैं उनकी गांड मार रहा हूँ।  मैंने सुधा दीदी को इशारा किया अपने तरफ आने का।  सुधा दी भी मेरे पास आ गई।  वो मेरे दोनों तरफ पूल में पैर लटका कर बैठ गई।  अब मैं उनके जांघो के बीच में थे।  दीदी ने झुक कर मुझे किस कर लिया। दीदी ने मेरे सर को अपने मुम्मो के बीच में रख लिया।  उधर मामा मामी को जबरदस्त तरीके से पेले जा रहे थे। 

मामी ने मुझे पीछे मुड़कर देखा और कहा – तुम तो  मेरी खुजली बढ़ा रहे हो। खूंटा सिर्फ रगड़ने के लिए है क्या ?

मामी के ताव को देख मैंने उनकी पैंटी पीछे से सरकाया और अपना लंड उनके गांड के छेद पर रख दिया।  मामा के अगले धक्के से मेरा लंड अपने आप ही अंदर हो गया  मुझे तो जन्नत मिल गई थी।  मुझे कुछ करने की जरूरत नहीं पड़ रही थी।  मामा और मामी के हर धक्के से मेरे लंड को अपने आप मजा मिल रहा था।

इतनी एक्ससाइटमेंट भरा माहौल था।  चूँकि मामा मामी को पहले से चोद रहे थे उनका लंड थोड़े देर में जवाब दे गया।  मामी भी झाड़ गई थी।  पर मेरा नहीं हुआ था।  मामा का लंड उनकी चूत से बाहर आ गया था।  पर वो उनके आगे ही खड़े रहे।  मैं अब मामी की गांड मार रहा था ।

मामी – आह राज, कितना खतरनाक हथियार छुपाये घूम रहे थे।  गांड फाड़ दीया तुमने तो

मैं – दर्द हो तो मामी रहने दू।

मामी – ना लल्ला , इसी दर्द का मजा तो लेना था।  मार लो मेरी गांड।  बस चूत अभी नहीं मिलेगी।  आह आह। सुधा तू किस्मत वाली है।  इतने बड़े हथियार से चुद रही है।  तेरा बच्चा भी इसके जैसा ही हो। 

दीदी – ले लो मामी आप भी अंदर। 

मामी- अभी तो मेरे लाल को गांड से ही संतोष करना पड़ेगा।  पर बाद में जो मांगेगा वो दूंगी।  पेल जोर से पेल।

मेरा लंड भी जवाब देने वाला था।  मैंने मामी के मुम्मे जोर से दबाये और अपने धक्के तेज का दिए।  कुछ ही देर में मेरे लंड ने भी पानी छोड़ दिया।  मैं थक कर दीदी के सीने पर सर रख दिया।  मामी को मामा ने संभाल लिया। कुछ पल बाद मेरी नजर खुली तो देखा बगल में सरला दी और जीजा मुस्कुरा रहे थे।  जीजा ने कहा – आखिर किला फ़तेह कर ही लिया तुमने। 

मैं – मौका तो आपके पास भी था। 

जीजा – अभी मैं अपनी वाली से ही खुश हूँ।  मामी कौन सा भाग रही है।

कुछ देर बाद हम सब अपने अपने कमरे की तरफ चल दिए।   मैंने मामी के कान में कहा – रात हमारे कमरे में ही औ न।

मामी ने कहा – सुधा को दिक्कत न हो कोई।

सुधा दी ने बात सुन ली थी – उन्होंने कहा – मेरा मर्द जिसमे खुश रहे , मैं उसी में खुश हूँ।

मामी – देखते है फिर तो।

हम दोनों अपने कमरे में पहुंचे और जैसे ही अंदर घुसे वहां देखा तो राजीव जीजा जी बेड पर बैठे थे। हमें देखते ही वो खड़े हो गए। 

मैंने कहा – जीजा जी आप यहाँ कैसे ? कहाँ थे अभी तक ?

जीजा – एक चाभी मेरे पास भी है।  मुझे बस सुधा की याद आ रही थी तो मैं चला आया।  उस रात बगल के कमरे में सुधा की बहुत आवाज आ रही थी तो मैं थोड़ा परेशान हो गया था।

सुधा दी – आपको चिंता करने की जरूरत नहीं है।  मैं ठीक हूँ

जीजा – हां पता है तुम लोगों की मस्ती देख कर लग ही रहा है तुम सब खुश  हो

सुधा दी इस बात से चिढ गई।  बोली – तुम खुश रख पाते तो ये नौबत नहीं आती।

जीजा उदास होते हुए – हाँ मुझे पता है। 

सुधा दी – तुम्हे ख़ाक पता है ? एक तुम्हारा खड़ा नहीं होता।  खड़ा होता है को कुछ ही पल में वापस बैठ जाता है।  और एक राज का है , लम्बा, मोटा , जोशीला।  अभी अभी मामी की गांड मार कर आ रहा है।  तुमसे तो चूत की आग भी नहीं बुझाई जाती।

जीजा एकदम शांत थे।  मुझे आश्चर्य हो रहा था की वो दीदी जो कुछ समय पहले सेक्स करने को तैयार नहीं थी।  इतना शर्म कर रही थी और यहाँ अभी एकदम बेशर्मो की तरह लंड, चूत और गांड किये जा रही है। खैर वो अपने पति से ऐसे बात कर सकती थी।  तभी मुझे याद आया कि  जीजा को ह्युमिलिएट करने में दीदी को बहुत मजा मिलता है।  शायद उन्हें उसमे अलग ही किक मिलता हो।  मुझे फिर भी जीजाजी के लिए बुरा लग रहा था।

मैंने कहा – जाने दो दीदी।  जीजा जी सब ठीक है, आप जाओ आराम करो।

दीदी – ये भड़वा कहीं नहीं जायेगा। इससे कुछ नहीं उखड़ेगा।  अगर मैं नंगी भी हो जॉन तो साले का लंड खड़ा नहीं होगा।

दीदी ने ये कहकर अपना टॉप और कैप्री उतार दिया।  दोनों खैर पहले से गीले थे।  उन्हें उतरना ही था।  दीदी ने फिर अपना एक पैर बेड पर बैठे जीजा के जीजा के जांघो पर रख दिया।  कहा – देख नज़दीक से देख तेरा खड़ा हुआ ?

जीजा जी का तो पता नहीं पर मेरा लंड जरूर खड़ा हो गया था।  पर मैं अपनी जगह पर ही खड़ा था।  दीदी ने गुर्राते हुए मुझे बुलाया – राआज

मैं चुपचाप उनके बगल में खड़ा हो गया।  दीदी ने पेंट में बने मेरे तम्बू को दिखते हुए जीजा को बोला – देखा ये है मर्द , दूर से ही मेरा पिछवाड़ा देख कर ही अपना लंड खड़ा कर लिया। 

दीदी ने फिर अपनी पैटी भी  उतार दी और अपनी चूत जीजा के चेहरे के एकदम नजदीक ले गई और बोली – अब तेरा खड़ा होगा ?

जीजा का लंड तो सन्नाटा मार गया था।  पर उनकी नजरे दीदी कि चूत पर थी।

दीदी ने उनको देख कर कहा – चल चाट , देख क्या रहा है। 

जीजाजी  एकदम पालतू कुत्ते कि तरह अपनी जीभ निकाल कर दीदी कि चूत चाटने लगे। मुझसे रहा नहीं गया।  मैंने भी अपना शर्ट और पेंट उतार दिया और दीदी के पीछे खड़ा हो गया।  मैंने  अपना लंड दीदी के गांड में फंसा लिया।  दीदी ने अपना कमर आगे पीछे करना शुरू किया।

दीदी ने आहें भरी और जीजा से कहा – आह ठीक से चाट , तेरे जीभ में भी दम नहीं है क्या।  अंदर डाल।  लंड से नहीं तो जीभ से चोद जैसे तेरी माँ करती है। 

दीदी के कमर आगे पीछे करने के चक्कर में मेरा लंड पीछे से आगे चला गया और जीजा के जीभ से जा लगा।  मुझे बड़ा ही अजीब लगा।  मैंने तुरंत अपने को  कमर पीछे कर लिया।  मैंने दीदी के ब्रा को उतार दिया और दीदी के मुम्मे दबाने लगा।  दीदी ने अपनी गर्दन पीछे मोदी और मेरे गर्दन के चारो और अपने बाहें डाल कर मुझे किस करने लगी।  इससे उनकी चूत जीजा के चेहरे में घुस गई। 

अब चूची मर्दन और चूत चुदाई से दीदी एकदम गरम हो चुकी थी।  उन्होंने मुझे आगे किया और जीजा के बगल में बेड पर ही लिटा दिया।

उन्होंने मेरा लैंड पकड़ा और जीजा को दिखते हुए कहा – देख भड़वे ये होता है लंड।  ऐसे लंड से औरत खुश होती है। 

जीजा जी का चेहरा देखने लायक था।  अब दीदी बिस्तर पर चढ़ गईं और मेरे दोनों तरफ पैर करके मेरे लंड को अपनी चूत में घुसाने लगी।

मेरा लंड कुछ ही पल में उनकी चूत में समा गया। 

दीदी – आह , फट जाएगी मेरी चूत रे।

अब दीदी मेरे लंड के ऊपर उछलने लगी।  उनके उछलने से उनके मुम्मे भी एक लय में उछाल रहे थे। दीदी की चूत ने तो पहले ही पानी छोड़ रखा था। उनके साथ साथ मैं भी निचे से धक्के लगा रहा था।  कुछ ही पल में दीदी पुरे मजे में आ गई।

उन्होंने मस्ती में जीजा जी को फिर से ताने देना शुरू किया – देखो , इसे कहते हैं चुदाई।  अंदर तक मजा देता है मेरा भाई।  तुम तो मेरी सील तक नहीं तोड़ पाए।  पूछ रहे थे न मैं क्यों चीख रही थी उस रात।  पहली बार मेरी सील टूटी थी। 

भाई तेजी से चोदो , दिखा दो अपने जीजा को की मर्द कैसे चोदते हैं। आह आह आह।

दीदी मस्ती में अपने मुम्मे भी दबाने लगी।  जीजा आँखे फाड़े हम दोनों को देख रहे थे।

दीदी – आह , ससससस अब मेरी चूत तो गई।  मेरा होने वाला है।  भाई सम्भालो मुझे।  हाय माआआआ

कुछ ही देर में दीदी की चूत ने दोबारा पानी छोड़ दिया।  दीदी मेरे ऊपर निढाल होकर लेट गई।  पर मेरा लंड अभी तो बस चार्ज हुआ था।  मैंने दीदी को लेटा दिया।  मैंने उनके दोनों टाँगे अपने कंधे पर रख लिया और उन्हें ताबड़तोड़ चोदने लगा। 

मैंने कहा – दीदी चिंता न करो।  जीजा की कोई  गलती नहीं है। जब उनके बाप में दम नहीं तो उनमे कहा होगा।  मैं तुम्हारा ध्यान रखूँगा।  इतना मस्त माल जीजा ने बर्बाद कर दिया , पर कोई नहीं अब मैं हूँ न।

दीदी ने गुर्राकर पास बैठे जीजा को बोलै – इधर आ मादरचोद , देख चुदाई। 

जीजा बेचारे पास में आ गए।  मेरी कैपेसिटी देख उन्हें बहुत आश्चर्य हुआ। दीदी ने उनके हाथ को पकड़ लिया।

दीदी – देखो , कैसे औरत को सुख दिया जाता है।  तेरे सामने इस लौंडे ने मेरा तीन बार पानी निकल दिया।  भाई फाड़ दो मेरी चूत।  बहुत तड़पी  है बेचारी।  ख़ुशी के आंसू बहाए जा रही है।  आह आह।

मैंने झुक दीदी के मुम्मे मुँह में डाल लिया।  दीदी अब बेचैन हो गई।

दीदी –  माआआ , क्या खिलाया है अपने लड़के को मर्द नहीं घोडा है ये तो।  चोदे ही जा रहा है।  राजीव , तेरी माँ को भी इससे चुदवाउंगी , वो भी प्यासी लगती है।  तेरी बहन तो वैसे भी चुदेगी।  साले तेरे पुरे खानदान को चुदवाउंग।  मुझे बहुत प्यासा रखा है।  सबको सजा मिलेगी। 

भाई तुझे इसके घर की हर औरत दिलवाऊंगी।

अब मेरा भी होने वाला था।  मैंने कुछ ही देर में दीदी के चूत में ढेर सारा पानी छोड़ दिया। 

दीदी – बना दे मुझे माँ भाई।  छोड़ दे अपना पूरा पानी मेरे अंदर।  भर दे मेरी बच्चेदानी।

दीदी ने अपनी चूत इस तरह से सिकोड़ ली जैसे मेरे लंड को चूस रही हो।  मैं उनके ऊपर ही लेट गया। मेरा लंड अब भी उनकी चूत में था।  पता नहीं दीदी कैसे अपने चूत से उसे चूस रही थी उसका कड़ापन जा ही नहीं रहा था। 

इस पुरे घमासान में जीजा जी एक दर्शक की तरह बैठे थे। हमारी चुदाई ख़त्म होने के बाद वो उठे और दो गिलास में पानी लेकर आये। 

हम दोनों फिर बैठ गए।  दीदी ने पानी लिया और कहा – तुम्हारे इसी प्यार की वजह से मैं तुम्हे छोड़ नहीं रही राजी।   बस चुदाई के अलावा तुम मेरा पूरा ख्याल रख लेते हो।

जीजाजी कुछ देर हमारे साथ बैठे और जाने लगे।  जाते जाते उन्होंने मुझे गले लगाया और बोला – थैंक यू राज।

मैं उनको क्या ही बोलता।  मैं और दीदी वहीँ थक कर लेते रहे और वो अपने कमरे में चले गए।

उसके बाद तो मैं और दीदी एक दुसरे की बाँहों में ऐसे सोये जैसे की कोई नवविवाहित जोड़ा सोया हुआ हो।  रात मामा मामी भी कमरे में नहीं आये।  अगले सुबह नाश्ते के समय होटल के रेस्टॉरेंट में प्लानिंग होने लगी कि कहाँ घूमने जाये।  सुधा दी थोड़ा आराम करना चाह रही थी , उन्होंने मना कर दिया।  मैं भी रुक गया।  मामी भी रुकना चाह रही थी।  शायद उन्हें मुझसे नजदीकियां चाहिए थी , पर मामा घूमने जाना चाहते थे।  मैंने उन सभी को बोला कि आप जाये मैं दीदी के साथ रह लूंगा।  वो चारों फिर नाश्ते के बाद निकल गए। 

मैं और सुधा दी वापस कमरे में आ गए।  मैंने सुधा दी को एक पेन किलर दिया।  वो दवा खाकर सो गई।  मैंने भी रात खूब चुदाई कि थी तो थका हुआ था।  मुझे भी नींद आ गई।  हम दोनों कि नींद डोर बेल कि रिंग से खुली।  मैंने उठ कर देखा तो शाम के ४ बज गए थे।  दरवाजे पर मामी और सरला दी खड़ी थी।

मामी – सुधा की तबियत ज्यादा तो ख़राब नहीं है ?

मैं – अरे नहीं , थोड़ी हरारत है।

मामी – हीहीहीहीही तुमने लगता है उनसे रात फिर से मेहनत करवाई है।

मैं – हाहाहा,आप आई नहीं तो क्या करता ?

मामी – अरे मामा ने आने ही नहीं दिया।

सरला दी – सही है न , जिस काम के लिए आये है वो जरूरी है।

तब तक सुधा दी भी फ्रेश होकर आ गई।  अब वो ठीक महसूस कर रही थी।

मैंने पुछा – जीजा जी और मामा कहाँ है ?

सरला दी – नयन सुख ले रहे हैं।  हमें छोड़ वापस बीच पर टहलने निकल गए।

मामी – भाई उनका माल हमें पैदा करना है।  अब हमारे आलावा वो किसी और को भी माल बाँट आये क्या करना है।

सुधा दी – व्रत तो आपने ही लिया है। यही कमरे में एक लंड है , मन हो तो ले लो।

मामी – अब व्रत लिया है तो मानना पड़ेगा।  और ये तो घर का माल है जब मन करेगा तब ले लेंगे , क्यों सरला।

सरला दी – सोचना तो आपको है।  मैं तो ये माल दोनों मुँह से ले चुकी हूँ

मामी – तुम दोनों बहनो का सही है।  पर लल्ला का सामान बड़ा है।  मेरी तो कल जान निकाल दी थी। 

सुधा दी – पर आपको देख कर ऐसा लग तो नहीं रहा था ।  बड़े मजे में अपनी गांड मरवा रही थी आप तो।

मामी – अब उखली में मुसल चला ही गया था तो डरना किस बात का। 

मैं – ये बताओ मामी , मजा आया कि नहीं ? कहो तो फिर मजा दू बैकडोर से।

मामी – नहीं , अब तो बस सामने से चाहिए।

मैं – फिर तो इंतजार करना पड़ेगा

मामी – क्यों तुम्हारा मन नहीं है ?

मैं – आप जैसी माल कि कोई क्यों नहीं लेना चाहेगा।  पर मैं मामा को धोखा भी नहीं दे सकता।  जो हो वो सहमति से हो , तभी खुल कर खेलने में मजा आता है।

मामी ने मेरे गाल को खींच कर प्यार से कहा – यही तो मेरे लल्ला को बाकियों से अलग करती है।

सरला दी – तभी तो मुझे इससे इतना प्यार है।

सुधा दी ने भी मुझे गले से लगा कर कहा – मुझे भी।

कुछ ही देर में जीजा जी और मामा भी आ गए।  कुछ देर बात करने के बाद शलभ जीजा ने सरला दी को कमरे में चलने का इशारा किया।  शायद बीच पर घूमती अध् नंगी  लड़कियां देख गरम हो गए थे और उनका मन चुदाई का था।  दोनों चले गए।

मामा वहीँ रुके थे।  शायद वो मामी को मेरे साथ मिलकर लेने के मूड में थे। 

तभी सुधा दी ने कहा – आप दोनों भी जाओ भाई।  जिस काम के लिए आये हो वो करो।  प्यार का माहौळ है अपने कमरे में प्यार करो।

मामा – मुझे तो लगा था ~~~~

मैंने कहा – मामा पूरी उम्र पड़ी है।  पारिवारिक समारोह भी होगा सबके साथ होग।  पर अभी मामी को माँ बनाओ आप।  मजे बाद में करेंगे।  वैसे भी जितनी जल्दी आप ये काम करोगे उतनी जल्दी मुझे दुधारू गाय मिलेगी। मामा हँसते हुए – हाँ सही कह रहे हो भाई , तुम्हारे दूध का भी तो इंतजाम करना है।

सुधा दी – आप छोड़ दोगे क्या अपना हिस्सा

मामा – नहीं , पर सब पहले राज को देने का वादा हुआ है।  अपने प्यारे भांजे से किया हुआ वादा कैसे तोड़ सकता हूँ।

मैं – थैंक यू मामा। 

मामा मामी भी अपने कमरे में चले गए। 

सबके जाते ही मैंने सुधा दी से कहा – आप कब गाय बनोगी ?

सुधा दी ने मुझे अपने बाँहों में भर लिया – सच बोलूं तो अभी मन नहीं है।  तेरे साथ और रातें बिताने का मन है।

मैं – तो फिर दवा ले आऊं?

दीदी – नहीं रे, हो गए ऑटो ठीक , नहीं हुआ तो और भी ठीक।  

मैंने कहा – ये भी ठीक है। हम दोनों फिर एक दुसरे से प्यार करने में लग गए।

अगले दो दिन हम सबने खूब मस्ती की। गोवा और आस पास कि जगह घूमे।  पर प्यार तय जोड़े में ही हुआ , पति पत्नी के बीच ही हुआ।  उस जोड़े में मैं एक तरह से नकली तो नहीं कहूंगा पर असली पति भी नहीं था। पर मुझमे और सुधा दी में सबसे ज्यादा प्यार था।  दीदी के चेहरा निखार गया था।  वो ज्यादा खुश थी और उनके चेहरे पर ग्लो भी आ गया था।

घुमते समय वो मेरी बाहें छोड़ती नहीं थी। अक्सर मेरे को चेहरे को देखती जैसे एक प्रेमिका अपने प्रेमी को देखती है।  मैं कहता – ऐसे देखोगी तो नजर लग जाएगी। दीदी बोलती  – नजर लगे तुम्हारे दुश्मन को।

जब भी कमरे में होते हम भरपूर सेक्स करते , पर हमारे सेक्स में वासना से ज्यादा आपस का प्यार होता। गोवा से लौटने का कब समय हो आया हमें पता ही नहीं चला।

जो जैसे आये थे वैसे ही उन्हें लौटना था।  सुधा दीदी को  राजीव जीजा के साथ ससुराल लौटना था।  तय हुआ था कि वो वहां कुछ दिन रहेंगी ताकि समाज को लगे कि जीजा और दीदी घूम कर आये है। कुछ एक हफ्ते में मुझे सुधा दी को अपने घर लाने का प्लान था। अगर गर्भ ठहर गया तो तो वो हमारे साथ बच्चा होने तक रहेंगी।  नहीं ठहरा तो हम दोनों को और कोशिश करनी थी।  बीच बीच में जीजा हमारे यहाँ आते रहते जिससे किसी को शक नहीं होता।

पर सुधा दी अब मेरे बगैर नहीं रहना चाहती थी।  उनका मन ससुराल जाने का नहीं था।  वो एक हफ्ते भी मुझसे अलग नहीं रहना चाहती थी।  वापस अलग जाने के नाम पर वो फुट फुट कर रोने लगी।  उनको रोता देख मुझे भी रोना आ गया।  सरला दी और मामी उन्हें समझा भी रहे थे और हंस भी रहे थे। उनके इस प्यार और बचपने से सब हैरान थे।  हैरानी वाली बात भी थी।  घर में सबसे बड़ी जो थी।  लगभग मामा मामी के

उम्र के बराबर कि थी।  पर उनका ये रूप देख कर मैं अंदर से बहुत  दुखी था। मुझे ये महसूस हो रहा था कि दीदी प्यार कि कितनी भूखी हैं।

उनको कभी प्यार मिला ही नहीं।  अब मिला है तो वो उस प्यार से दूऱ जाना नहीं चाह रही थी।

खैर जो तय था वो होना ही था।  मैं, मामा और मामी वापस ट्रैन से अपने शहर लौट पड़े।  सरला दी और शलभ जीजा अपने यहाँ।  सुधि दी को राजीव जीजा एक हफ्ते के लिए अपने घर ले गए।  बाकियों का तो पता नहीं पर ट्रैन से वापसी का सफर सोते सोते ही बीता।  मस्ती तो हुई थी पर हम सब थके हुए था।

स्टेशन पर ये तय हुआ कि हम सब मेरे घर ही चलेंगे।  वहां से एक टाइम का खाना खाकर मामा मामी अपने घर चले जायेंगे।  पर मामी को नाना कि चिंता थी।  उन्होंने कहा कि नहीं वो अपने घर ही जाएँगी नाना अकेले होंगे।  इतने दिनों से मेड के हाथ का खाना खा रहे होंगे।

सो दोनों अपने घर चले गए और मैं अपने घर। 

जैसे ही मैं घर पहुंचा तो देखा कि नाना यहाँ थे।  मैंने उनका और माँ का पेअर छुआ।  माँ मुझसे ऐसे मिली जैसे मैं उनसे बरसों बाद मिला हूँ।

नाना ने भी मुझे खूब सारा आशीर्वाद दिया। 

उन्होंने मुझसे पुछा – मस्तो खूब किये न ? उम्मीद है घर में तीन तीन बच्चों कि किलकारियां गूजेंगी।

मैं – हाँ कोशिश तो सबने की है।  देखते हैं कौन कौन सफल होता है।

नाना – सुधा को क्यों नहीं लेकर आया ?

मैं – एक हफ्ते बाद ले आऊंगा।

नाना थोड़े निराश से हुए।  मैंने फिर उनसे पुछा – आप कब आये ?

नाना कुछ जवाब देते उससे पहले ही माँ बोली – अरे तू सफर से थका मंदा आया है।  आराम कर।  शाम को सब आराम से बात होगी।  मैं अपने कमरे में फिर फ्रेश होने चला गया।  नहाकर मैंने सोचा थोड़ा लेट लिया जाए।  सच में मैं इतना थका हुआ था की मुझे नींद आ गई।

मेरी नींद शाम को खुली तो घर में मैंने थोड़ी चहल पहल देखि। देखा तो मामा मामी दोनों आये हुए थे। 

मैंने मामा से कहा – आप तभी यहीं आ गए होते तो नाना से मुलाकात हो गई होती।

मामा – हमें क्या पता था बाबू जी की ठरक शांत नहीं होगी। 

माँ – कुछ भी बोलता है।  वहां अकेले थे तो मैं लेटी आई।

मामी हँसते हुए बोली – ये अकेले थे और आप लेती आई या आपको अकेलापन लग रहा था  इस लिए इन्हे यहाँ लेकर आ गई।

खैर चाय नाश्ते के बाद मामा मामी और नाना चले गए।

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