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वसु थोड़ा ड्रामा करते हुए अपने गले को ठीक करते हुए कहती है की उसे कोई ऐतराज़ नहीं है अगर दिव्या की शादी दीपू से की जाए तो…….

अब आगे. .. 

11th Update: 

माँ: क्या कह रही हो बेटा? वो तो अभी पढाई कर रहा है. इतनी छोटी उम्र है. तो सोच समझ के ही कह रही है ना?

माँ: और तू क्या चाहती है की मेरा पोता ही मेरा दामाद बने? तुम दोनों का पति बने?

वसु: हाँ माँ.. जब से मैंने इसकी कुंडली हमारे बाबा में दिखाई थी तब से मेरी नज़र में सिर्फ वो ही है. छोटी हमारे घर में बहुत दिनों से रह रही है और उसने भी दीपू को अच्छे से देखा है. ऐसा नहीं है की वो कोई बाहर का लड़का है जिसके बारे में हमें पता नहीं है.

अभी उसकी पढाई हो गयी है और वो अपने दोस्त के साथ बिज़नेस भी करने वाला है.

मैंने इस बारे में बहुत सोचा है और इस बारे में अकेले में निशा से भी बात की है. वो भी कहती है की वो मौसी को अपनी भाभी बनाना चाहती है और ऐसा कहते हुए वसु हस देती है. सब निशा की तरफ देखते है तो निशा भी हाँ में सर हिला देती है.

पिताजी: वो तो ठीक है लेकिन क्या दीपू मान जाएगा?

वसु: आप उसकी चिंता मत करो. उसको मनाना मेरा काम है.

वसु; तो क्या मैं ये समझू की आप सब राज़ी है की छोटी की शादी दीपू से कराई जाए?

माँ और पिताजी: थोड़ा सोचने का समय दे बेटा. बात उतना आसान नहीं है जितना तू कह रही है.

इतने में उसके पिताजी को बहुत ज़ोर से खासी होती है और छाती में दर्द होता है. मीना तुरंत दौड़ कर किचन से उनके लिए पानी लाती है. उन्हें पानी पीला कर आराम करने को कहते है और फिर उन्हें सुला देते है.

वसु कहती है की वो रात को उन्हें पास ही सोयेगी तो ये बात सब मान जाते है और फिर वसु को छोड़ कर सब अपने कमरे में चले जाते है सोने के लिए.

मीना मनोज से बात करती है की बड़ी दीदी सही कर रही है क्या?

मनोज: जब सब कुछ इतना हो गया है और छोटी दीदी को भी कोई आपत्ति नहीं है तो शायद हमें मान लेना चाहिए. इसके अल्वा मुझे और कोई रास्ता भी नज़र नहीं आता.

आखिर में मीना भी मान जाती है क्यूंकि मनोज की बात भी उसे सही लगती है.

अगले दिन सुबह सब उनके कमरे में जाते है तो उनके पिताजी सो रहे होते है. वसु कहती है की उनकी तबियत अभी थोड़ी ठीक है लेकिन उन्हें आराम करने की ज़रुरत है.

फिर मनोज ऑफिस जाने से पहले वसु को कमरे से बाहर बुलाता है. वसु उसके साथ बाहर आती है तो पूछती है की क्या बात करनी है.

मनोज: रात को मैं और मीना ने इस बारे में बात किया है और मुझे आपकी बात सही लगती है. और वैसे भी अभी पिताजी की हालत भी ठीक नहीं है. तो उनके रहते हुए ही छोटी दीदी की शादी हो जाए तो अच्छा है.

वसु: सही कह रहे हो मनोज. मैं भी यही चाहती हूँ. देख रहा हैं ना तू की उनकी हालत भी अभी ठीक नहीं है. मनोज हाँ से सर हिला देता है और फिर अपने ऑफिस चला जाता है.

फिर सब लोग अपने काम में लग जाते है और उनके माता पिता को आराम करने को कहते है. शाम को फिर जब मनोज भी ऑफिस से आ जाता है तो सब फिर उनके पिताजी के कमरे में इकठ्ठा होते है.

वसु फिर बात दिव्या की बात करती है तो कोई कुछ नहीं कहता. सब लोगों को और कोई रास्ता नहीं दिखता तो हाँ कह देते है. उनके माता पिता भी आखिर मान जाते है और वो भी हाँ कर देते है. तो वसु भी कहती है की वो दीपू से बात कर के उसे वहां बुला लेगी.

फिर सब लोग बात मान लेते है और फिर ऐसे ही कुछ और बातें कर के अपने कमरे में सोने चले जाते है. आज वसु के पिताजी की तबियत थोड़ी ठीक रहती है तो उसके माता पिता को सुला कर वो भी अपने कमरे में सोने चली जाती है.

उस दिन सुबह दीपू दिनेश के घर जाता है तो दोनों बात करते है की उन्हें उनके माँ के पास जा कर उनके काम को समझना है और जल्दी ही उनके बिज़नेस को और आगे बढ़ाना है.

तो दोनों ऋतू के ऑफिस चले जाते है जो वहां काम कर रही होती है. जब दोनों उसके पास जाते है तो उन दोनों को देख कर एकदम खुश हो जाती है और उनसे मिलने के लिए वो भी अपने केबिन से आती है.. उस वक़्त ऋतू एकदम सुन्दर और अच्छी साडी पहने रहती है लेकिन उस अच्छे कपड़ों में भी एकदम सेक्सी लग रही थी. जब वो चल कर उनके पास आती है तो उसकी मस्त बड़ी चूचियां ब्लाउज में एकदम तने हुए दीखते है और हिलते भी है जिसकी नज़र दीपू पे पड़ जाती है लेकिन वो एकदम सामान्य रहता है और ख़ुशी से ऋतू से मिलता है. फिर वो अपने ऑफिस में काम करने वाले सबको बुलाती है और कहती है की अब से ये दोनों ही यहाँ के मालिक है और उन सब को उनकी बात माननी पड़ेगी क्यूंकि वो लोग अब उसके बिज़नेस की देखभाल करेंगे. सब लोग मान जाते है और अपने काम में लग जाते है.

तीनो ऋतू के रूम में आते है और फिर चाय पीते हुए ऋतू से उसके काम के बारे में जानते है.. की वो क्या करती है कंपनी का एकाउंट्स कौन देखता है सामान कहाँ से आते है इत्यादि.

दोनों काम को अच्छे से समझने की कोशिश करते है. ये उन दोनों के लिए पहली बार था तो थोड़ा समझ आता है और थोड़ा नहीं. इन सब के बीच ऋतू दीपू को निहारे जा रही थी. दीपू भी एक बार उसको देखता है लेकिन फिर अनदेखा कर देता है की शायद वो गलत सोच रहा है. फिर २- ३ घंटे वहां रह कर दोनों निकल जाते है.

दोनों फिर मस्ती करते हुए निकल कर एक होटल जा कर चाय पीते हुए आगे और क्या करना है, कैसे काम को बढ़ाना है ..ऐसे बात करते है और फिर दोनों अपने घर निकल जाते है.

रात को ऋतू घर आती है और फिर दोनों ऋतू और दिनेश खाना खाते वक़्त उसके काम के बारे में दिनेश को बताती है. फिर दोनों ऐसे ही और बातें कर के खाना ख़तम कर के दोनों अपने कमरे में सोने चले जाते है. ऋतू को नींद नहीं आती है तो वो दीपू के बारे में सोचती है की वो कितना हैंडसम है अच्छा लम्बा लड़का एकदम नीली आँखें, घुँघरालु बाल और एकदम हट्टा कट्टा बदन… और उसके बारे में सोचते हुए अनजाने में ही उसका हाथ Nighty के अंदर घुसा कर अपनी चूत मसलते रहती है. थोड़ी देर बाद जब उसे अहसास होता है तो वो सोचती है की वो ऐसे क्यों सोच रही है.. लड़का तो उसके लड़के का दोस्त है और उसकी माँ भी उसकी अच्छी दोस्त है. उसे ऐसा नहीं सोचना चाहिए.. लेकिन फिर उसका मन भटकता है और सोचती है की लड़का जवान है जो हर लड़की उसके ऊपर मर मिटेगी.. ऐसे ही दुविधा में रहते हुए उसे नींद आ जाती है. (उसे क्या पता था की आगे जाकर उसकी ज़िन्दगी एकदम बदल जायेगी.)

वहीँ दीपू के घर रात को वसु दीपू को फ़ोन करती है.

वसु: दीपू मैं माँ पिताजी से बात कर ली है. वो तेरी शादी छोटी से करने को राज़ी हो गए है. अब तो तू खुश है ना?

दीपू: हाँ और ना भी.

वसु: मतलब?

दीपू: मतलब ये की जब मैं आपसे भी शादी करूंगा तो तभी बहुत खुश कहूंगा.

वसु: पिताजी उसके लिए भी मान लिए है. अब तो खुश है ना?

दीपू: हाँ और हस देता है.

दीपू: मुझे बताना कब आना है.. मैं आ जाऊँगा.

वसु: ठीक है. ये लो..तुम्हारी होने वाली बीवी तुमसे बात करने के लिए मरी जा रही है और ऐसा कहते हुए वो दिव्या को देख कर आँख मारती है और फ़ोन उसे दे देती है.

दिव्या फ़ोन पे: कहिये..

दीपू: ये कहिये क्या लगा रखा है मौसी?

दिव्या: अब तो मुझे मौसी मत बुलाया करो.

दीपू: नहीं शादी होने तक तो मैं आपको मौसी ही कहूंगा और उसके बाद जो मेरे मन में आये वो कहूंगा.

दिव्या: मतलब?

दीपू: यही की जानू जान.. ऐसे.. या फिर अगर मेरा मूड रहा तो मौसी भी..

दिव्या हस देती है और कहती है जैसा आपका मन करे मेरे शहज़ादे.

दिव्या फिर फ़ोन निशा को देती है तो निशा पहले दीपू को चिढ़ाती है और उसे बधाई देती है और पूछती है की वो तो अब खुश है ना.

दीपू: और नाना नानी कैसे है? उनकी तबियत कैसी है?

निशा: दोनों अभी ठीक है. कल उनकी हालत थोड़ी बिगड़ गयी थी लेकिन आज ठीक है.

दीपू: चलो अब सो जाओ. बहुत रात हो गयी है. अच्छा एक बार मौसी को फ़ोन देना तो निशा दिव्या को फ़ोन देती है.

दिव्या: हाँ क्या हुआ?

दीपू: मस्ती और शरारत से: हुआ कुछ नहीं. बस यही कहना चाहता था की अब आप रोज अपने होने वाले सुहागरात की याद में अपने रात बिताना.

दिव्या शर्मा जाती है ये बात सुनकर और कहती है की तुम बहुत शरारती हो रहे हो.

दीपू: क्यों, मैंने कुछ गलत कहा क्या? शादी के बाद तो सुहागरात होगी ना. क्यों तुम्हे नहीं चाहिए क्या?

दिव्या: शर्माते हुए, नहीं मैंने ऐसा कब कहा? मुझे भी उसका बहुत इंतज़ार है.

दीपू: तो उसे याद करते हुए सो जाओ और कल्पना करते रहो की उस रात हम क्या करेंगे. और वो दिव्या को फ़ोन में किस करता है और और कहता है की उसे भी एक चुम्मा दो तो दिव्या मना करती है. दीपू कहाँ मानने वाला था.. उसे मस्ती सूझती है तो वो दिव्या को फ़ोन को स्पीकर on करने को कहता है. दिव्या को समझ नहीं आता तो वो फ़ोन का स्पीकर on कर देती है.

स्पीकर के on होते ही दीपू उसकी माँ से कहता है..

दीपू: माँ हो क्या?

वसु: हाँ हूँ. .. बोल. ..

दीपू: देखो ना तुम्हारी सौतन मेरी बात नहीं मान रही है. वसु दिव्या की तरफ देख कर इशारे से पूछती है की दीपू क्या कह रहा है तो दिव्या शर्मा जाती है और अपनी आँखें नीचे कर लेती है.

वसु: क्यों क्या हुआ?

दीपू: तुम ही पूछ लो उससे तो वसु दिव्या से पूछती है तो दिव्या ना करती है. वसु फिर से दीपू से पूछती है तो दीपू कहता है की मैं यहाँ अकेला हूँ और उसे फ़ोन में एक चुम्मा मांग रहा हूँ तो वो मना कर रही है. वसु ये बात सुनके ज़ोर से हस्ती है और कहती है की तू बहुत शरारत करने लगा है तो दीपू कहता है की ये शरारत सुहागरात में बहुत महंगे पड़ेगा और वो भी हस देता है.

वसु दिव्या से कहती है की तू क्यों उसे परेशान कर रही है? बेचारा अकेला है तो वो जो मांग रहा है उसे देदे. दिव्या शर्माते हुए वसु से फ़ोन लेकर उसको एक अच्छा चुम्मा देती है और कहती है की अब खुश? दीपू को फिर मस्ती सूझती है और कहता है की नहीं.. तो अब इस बार वसु पूछती है की अब क्या हुआ? तो दीपू कहता है की वसु भी उसे ऐसे ही फ़ोन पे चुम्मा दे तो इस बार दिव्या वसु को देख कर फ़ोन उसको देती है तो वसु भी फिर दीपू को फ़ोन पे एक अच्छे से चुम्मा देती है.

दीपू: निशा सो गयी है क्या?

वसु निशा को देखती है तो वो सो जाती है तो दीपू को हाँ में जवाब देती है.

वसु: क्यों?

दीपू फिर वसु से कहता है की फ़ोन दिव्या को दे. दिव्या फ़ोन ले कर क्या कहना है अब?

तो दीपू भी फ़ोन पे एक किस देता है और कहता है की ये किस आपके( दिव्या) के होंठों पे. ये बात सुन कर दिव्या एकदम शर्मा जाती है. दीपू फिर से दो बार और किस करता है और कहता है ये आपकी चूचियों पे. फिर एक और किस करता है और कहता है ये किस ख़ास है. दिव्या पूछती है की क्या ख़ास है तो दीपू कहता है की ये स्पेशल किस आपकी टांगो के बीच ..दिव्या जब ये बात सुनती है तो कहती है ऐसी बात क्यों कर रहे हो … मुझे कुछ हो रहा है.. तो दीपू उनको याद दिलाता है की जब वो लोग कमरे में होंगे तो उनके बीच शर्म नहीं होने चाहिए. मुझे पता है आप लोग शरमाओगे तो ये समझ लो की अभी ये आपके लिए प्रैक्टिस है और फ़ोन पे ही हस देता है.

दिव्या भी शर्मा जाती है और दीपू और कुछ कहने से पहले दिव्या बात को पलट देती है और कहती है की रात बहुत हो गयी है और फिर फ़ोन कट कर देती है. ये सब बातें सुन कर वसु और दिव्या दोनों बहुत उत्तेजित हो जाते है और उनकी चूत भी गीली हो जाती है.

थोड़ी देर बाद दीपू फिर फ़ोन करता है और पूछता है की उसे वहां कब आना है तो वसु कहती है की वो कल उसे फ़ोन कर के बता देगी की कब आना है. और फिर सब अपने यादों में सो जाते है.

दीपू ये सोचते हुए की आगे वो क्या करेगा उनके साथ और ये दोनों की दीपू उनके साथ सुहागरात में क्या करेगा…

अगले सुबह: सब उठ कर अपना काम करते है और वसु सब से कहती है की उसने दीपू से बात कर ली है और वो मान गया है. थोड़ा झूट बोलते हुए कहती है की उसे दीपू को मनाने में बहुत समय लगा लेकिन वो मान गया है.

वसु: अब हमें ज्योतिषी की फ़ोन कर के बुलाना चाहिए और पूछना है की अच्छी तारिक कब है शादी के लिए.

वसु फिर ज्योतिषी की फ़ोन कर के घर में बुलाती है. ज्योतिषी घर आते है तो वसु उनसे उनकी शादी की बात करती है और उनसे पूछती है की किस दिन का महूरत अच्छा है शादी के लिए. ज्योतिषी फिर से दोनों की कुंडली देखते है और कहते है की ४ दिन के बाद का महूरत अच्छा है. वसु फिर से ज्योतिषी के बारे में उसकी और दीपू की बात करती है तो ज्योतिषी फिर से दोनों की कुंडली देख कर कहता है की उन दोनों की शादी एक दिन बात अच्छी होगी.. याने पांचवे दिन.

वसु फिर उनसे निशा के बारे में पूछती है तो ज्योतिषी कहते है की उसकी शादी भी जल्दी ही हो जायेगी.

सब लोग उनकी बात मान लेते है और कुछ खान पान के बाद वो निकल जाते है.

नानी: बेटी तारिक बहुत नज़दीक है हमें तैयारी करने के लिए समय भी तो चाहिए.

वसु: मैं नहीं चाहती की हम किसी बाहर वाले को बुलाये.. सिर्फ अपने घर वाले ही होंगे और कोई नहीं.

नानी: मतलब?

वसु: पिताजी की तबियत भी ठीक नहीं है तो मैं चाहती हूँ की हमारी शादी घर में ही हो. मैं पुजारी से बात कर लूंगी. बस उसके चाचा, चाची, बुआ, रानी का पति और माजी (मीना की माँ) को बुलाएंगे..और किसी को नहीं.

नानी: देखो बेटा जैसा तुम्हे सही लगे.

वसु हाँ में सर हिला देती है और फिर डीपू को फ़ोन कर के २ दिन बाद आने को कहती है… और उससे कहती है की वो किसी को कुछ नहीं बताये ख़ास कर के दिनेश को और चुप चाप वहां आ जाए…

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