मेरा चालबाज़ बेटा – Update 5 | Incest Story

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chapter 5

 कृपया ध्यान दे जो लोग रोज update मागते है तो उन को मे यही केहना चाहुंगा आप को पता नही है किया मेरी एक और स्टोरी चल यही है ( तु लौट के आजा मेरे लाल) नाम से तो मुझे उसपे भी update देना होता है आज इसपे दिया तो कल उसपे दुगा दूसरी दोनो पे मे update रात 9 बजे देता हु कभी देरी हुई तो 10 बजे तक दे ही देता हु

चलिये सुरु करते है

सुबह उठ कर सभी अपने काम मे लगे हुवे थे लेकिन दिलीप चोरी छुपे अपनी मा को देख रहा था सारिका मुस्कुरा रही थी चेहरे के हसी भी थी कियुंकी सारिका रात जो सुसु वाला सीन याद कर रही थी

दिलीप मन मे मुस्कुराते हुवे – 4 महीने बेकार नही गये मुझे लगा था मा गुस्सा करेगी नाराज होगी लेकिन मा तो रात वाला सीन याद कर हस रही है यानी की अब आगे और बढ़ा जा सकता यस मेरा सुसु वाला आईडिया इतना काम करेगा सोचा नही था

खाना खाने के बाद दिलीप काम पे जाने वाला था

सारिका दिलीप के गालो पे किस करते हुवे – मेरा बेटा कितना मेहनत कर रहा है अच्छे से काम करना अपने आप को चोट मत लकवा देना

दिलीप सारिका को देख हस्ते हुवे – रोज यही बात केहती है मे कोई बच्चा ठोरी ना हू बरा हो गया हु मा

सारिका हस्ते हुवे – हा पता है लो लेकिन मा के लिये बेटा उसका बच्चा ही होता है

दिलीप सारिका के गाल पे किस करते हुवे – समझ गया बाबा अब मे जा रहा हु

दिलीप काम पे निकल जाता है दिलीप के जाते ही सारिका राजू को फोन करती है

दिलीप फोन देखते हुवे मुस्कुरा के – किया बात है मा रहा नही जा रहा मुझे भी यही चाहिये था

दिलीप फोन उठा कर बाते करने लगता है दिन मे दिलीप काम पे होता था तो 3 बार कुछ मिनट ही बाते होती थी

     रात 10 बजे

सारिका राजू बाते कर रहे होते है अपने कमरे मे बिस्तर पे लेते

सारिका हस्ते हुवे – कियु आज जोर की नही लगी है किया

दिलीप हस्ते हुवे – लगी है लेकिन मे अब फोन लेकर नही जाउंगा

सारिका हस्ते हुवे – अरे कियु लेकर नही जाओगे

दिलीप – कियुंकी आप कल से मुझे कितना छेर रही है ये गलत है भाई जोर से किसी को भी लग सकती है

सारिका हस्ते हुवे – हा बाबा तुम ने सही कहा

दिलीप – ठीक है आप लाइन पे रहिये मे सुसु कर के आता हु

सारिका हस्ते हुवे – अरे फोन लेकर जाओ ना

दिलीप मुस्कुराते हुवे मन मे – आ रही है लाइन पे यही मोक्का है मा को आगे ले जाने का

दिलीप जल्दी से बाहर आता है और अपना लंड निकल फोन को पास कर के जोर दार धार पथर् पे मारते हुवे सुसु करने लगता है

सारिका पूरी तरह से हैरान सर्म से लाल हो जाती है सारिका ने मजाक मे दिलीप को कहा था लेकिन दिलीप मौके को जाने कैसे देता

सारिका दिलीप के सुसु की आवाज साफ सुने जा रही थी और सर्म से लाल होते हुवे मन मे – अरे ये पागल सच मे फोन लेकर चला गया मेने तो मजाक मे कहा था

दिलीप पिसाब करने के बाद बिस्तर पे लेट – हेल्लो

सारिका – बेसर्म मेने मजाक मे कहा था तुम सच मे चले गये फोन लेकर

दिलीप हस्ते हुवे – तो किया हो गया अगर मेरे सुसु करने कि आवाज आपको सुनाई दे रही थी तो फोन दूर कर देती नही सुनती आप

सारिका की बोलती बंद किया बोले समझ नही आ रहा था दिलीप समझ रहा था इस लिये बात को जल्दी से घुमा देता है

दिलीप – वैसे ऑन्टी सब्ज़ी बाकी समान बाहर लेने कोन जाता है आप या दिलीप भाई

सारिका – अरे दिलीप ही जाता है मे नही जाती

दिलीप हस्ते हुवे – मेरा भी सेम हैं मा मुझे ही भेजती है मा को बाहर निकलना पसंद नही

सारिका हस्ते हुवे – मेरा भी सेम मुझे भी बाहर निकलना पसंद नही

दिलीप हस्ते हुवे – तब तो आपकी मेरी मा की सोच एक जैसी है

सारिका हस्ते हुवे – सही कहा

     1 बजे तक बाते होती है

दिलीप – ठीक है ऑन्टी अब मुझे गुड नाइट किस्सी दो मुझे अच्छी नींद आयेगी

सारिका हैरानी से – अरे आज किया हो गया तुम्हे जो किस मांग रहे हो ना

दिलीप – मा मुझे रोज रात को गुड नाइट किस देती है सुबह गुड मोरिनिंग किस भी देती है आप दे दोगी तो और मेरी रात गुड हो जाइये नही देना तो कोई बात नही

सारिका हस्ते हुवे – तुम भी ना अच्छा ठीक है ये लो उमा हो गया

दिलीप हस्ते हुवे – हा मेरे गाल मे आ गया आपका किस लाल लीबिस्टिक भी लग गई मेरे गाल पे

सारिका दिलीप कि बात सुन जोर जोर से हसने लगती है

सारिका हस्ते हुवे – तुम भी ना बहोत मजाकिया हो कसम से

दिलीप हस्ते हुवे – पता नही आप केहते है तो मान देता हो अच्छा मेरी तरफ से भी उमा पहुँच गया मेरा किस आपके गाल पे

सारिका फिर जोर जोर से हसने लगती है

सारिका हस्ते हुवे – बस भी करो आ गया तुम्हारा किस गुड नाइट

दिलीप – गुड नाइट

फोन कट

सारिका बिस्तर पे लेती हस्ते हुवे – पागल है बिल्कुल कैसी कैसी बाते करता है लेकिन उसकी बाते बहोत फनी होती है

दिलीप बिस्तर मे लेता बहोत खुश था कहे तू खुशी से पागल हो गया था

दिलीप खुश होते हुवे – यस मे अब मजिल के बहोत करीब जा रहा हुवे सोचा नही था यहा तक मे आ पाऊगा मा को मुझे और खोलना पड़ेगा धीरे धीरे

         6 दिन बाद

इस 6 दिन मे हर रात दिलीप सारिका के बिना कहे फोन लेकर पिसाब करने चला जाता था और सारिका को पिसाब की आवाज सुनाता था सारिका कुछ बोल नही पाती थी लेकिन पिसाब कि आवाजे सर्म से लाल होते हुवे सुनती रेहती थी और दिलीप गुड नाइट किस को भी सामिल कर दिया था कियुंकी दिलीप धीरे धीरे सब कर रहा था

दिलीप पेहले अपनी मा को हर एक चीज की आदत लगा रहा था धीरे धीरे सारिका को खोल रहा था एक संस्कारी औरत को अपने जाल मे फसा कर नीचे अपने नीचे लाना आसान थोरि था दिलीप ये अच्छे से जनता था

    7 दिन रात 11 बजे

दिलीप सारिका लगे हुवे थे

दिलीप – ऑन्टी आज तो मे नदी मे नहाने गया था मजा आ गया खोले मे नहाने का मजा ही अलग होता है

सारिका हस्ते हुवे – हा पता है मे भी पेहले दिलीप जब छोटा था जाती थी कपड़े धोने को नहा लिया करती थी

दिलीप – सच्ची मजा आता है ना नदी मे खुले जगह मे

सारिका – हा बहोत मजा आता ही लेकिन अब मेने जाना छोर दिया

दिलीप – अच्छा मेरी मा भी जाती थी मुझे लेके पेहले लेकिन अब नही जाती है

सारिका – समझ सकती हु उनको मे

दिलीप – अच्छा ऑन्टी आपने पास कितने गाय है

सारिका – एक ही है और दो बकरी है

दिलीप – अच्छा गाय दूध देती है

सारिका – हा एक प्यारे से बच्चे को जन्म दिया है

दिलीप – कितने दिन हो गये

सारिका – 7 महीने हो गये है

दिलीप – दूध बहोत देती होगी

सारिका – हा बहोत दूध देती है

दिलीप – मुझे तो दूध पीना बहोत पसंद है

सारिका हस्ते हुवे – मेरे बेटे को भी दूध बहोत पसंद है

दिलीप हस्ते हुवे – किया कमाल की बात है ना ऑन्टी मेरी मा आपकी सोच एक जैसी है और मेरी दिलीप भाई की एक जैसी

सारिका जोर जोर से हस्ते हुवे – ये बात तो सही कही तुम ने

 दोनो ऐसे हि बाते करते रेहते है दिलीप इधर उधर् कि बाते भी करता रेहता था ताकि सारिका के माइंड को भूमाया जा सके बाते करते करते

2 बज जाते है

रात 2 बजे

दिलीप – ऑन्टी दो बज गये है सोना चाहिये

सारिका टाइम देखते हुवे – सही है बेटा

दिलीप – आप से बाते करते हुवे टाइम का पता भी नही चलता है

सारिका – हा ये बात तो तुम से सही कही

दिलीप – ठीक है ऑन्टी मेरा गुड नाइट किस

सारिका हस्ते हुवे – तुम भी ना ये लो उमा

दिलीप हस्ते हुवे खुशी से – किया बात है ऑन्टी आज तो आप ने होठो पे किस दे दिया मजा आ गया बहोत मिठा था ये किस

सारिका पूरी तरह से हैरान हस्ते हुवे – अरे पागल मेने गालो पे किस दिया है ना की होठो पे झूठे कही के

दिलीप हस्ते हुवे – नही ऑन्टी सच मे आपका किस मेरे होठो पे आके लगा मुझे फिल भी हुवा आपके प्यारे रसीले होठ

सारिका सर्म से लाल होते हुवे – कितने झूठे हो तुम

दिलीप – आपने मुझे होठो पे किस दिया है तो मे भी आपको होठो पे ही किस दुगा उमा गुड नाइट बाय

दिलीप जल्दी से फोन कट कर देता है

सारिका कुछ केहना चाहती थी लेकिन देखती है फोन कट हो चुका है

सारिका गुस्से से – कितना झूठा है मेने तो गालो पे किस दिया था पागल कोई ना कोई ऐसी बाते कर मुझे हसा ही देता ही ( सारिका अपने होठो पे हाथ रख ) उसने मुझे होठो पे किस दिया ये लरका भी ना बहोत बिगरता जा रहा है

सारिका को तभी कुछ याद आता है

सारिका – अरे आज तो राजू सुसु करने गया ही नही

हा दिलीप ने आज सुसु वाली कोई बात ही नही की ये भी दिलीप का एक प्लान था जैसे किसी को आप रोज सराब पिलाओ बाद मे आप उसे सराब दो ही ना तो उसकी हालत कैसी होगी वो खुद आपके पास आयेगा सराब के लिये दिलीप ने यही किया पेहले सारिका का सुसु की आवाज सुनने की आदत लगाई और फिर खुद पीछे हट गया कियुंकी दिलीप चाहता था सारिका खुद आगे आकर सुसु से लेकर कोई बात करे अगर दिलीप खुद आगे जाता रहा तो सारिका को कही ना कही सक या बुरा या गुस्सा हो सकती थी लेकिन सारिका खुद आगे आके बात करे ये दिलीप के लिये हरि झण्डी थी आगे बिना डरे बढ़ने की

वही दिलीप बिस्तर पे लेता अपने दिल पे हाथ रखे जोर जोर से सासे लिये जा रहा था

दिलीप – मे तो डर हि गया था कही मा गलत समझ गुस्सा ना करे लेकिन होठो पे किस वाला प्लान भी काम कर गया मा ने गुस्सा नही किया मेरी तो डर के बारे फट रही थी

     सुबह हो जाती है

सारिका खेतो मे हल्का होने निकल परती और राजू को फोन लगा देती है

राजू फोन उठा के – गुड मोर्निंग ऑन्टी

सारिका – गुड मोर्निंग बेटा

दिलीप नाराज वाली आवाज मे – आपने मुझे गुड मोर्निंग किस नही दी

सारिका हस्ते हुवे – तुम भी ना उम्मा अब खुश

दिलीप खुश होते हुवे – बहोत खुश लेकिन किस तो गालो पे आया है

सारिका खेतो के बीच डनेर पे लग रही थी राजू की बात सुन सारिका पेट पकर जोर जोर से हंसने लगती है

दिलीप बिस्तर पे लेता मा को हस्ते हुवे खुशी से – यस यस मा ने गुस्सा नही किया इसका मतलब किसी मिलेगी

सारिका ठोरी देर बाद अपने आप को सांत कर

सारिका हस्ते हुवे – राजू बेटा तुम ना बिल्कुल पागल हो तुम्हारी बाते मुझे हंसने पे मजबूर कर देती है

दिलीप – मुझे नही पता ये सब मुझे किस्सी चाहिये होठो पे

सारिका जोर जोर से हस्ते हुवे – किया करू मे तेरा अच्छा बाबा ये लो उम्मा अब खुश

दिलीप – हा बहोत खुश आपका किस मेरे होठो पे आ गया है मिठा मिठा

सारिका हस्ते हुवे – बस भी करो अच्छा सुनो बाद मे बाते करेगे ठीक है

दिलीप- ठीक है

सारिका फिर हल्का होने बैठ जाती है और अभी जो हुवा उसे सोच हस्ते जा रही थी ( पागल ये पुरा)

     दिन मे जैसे चलता था बाते होती थी वैसे होती रही

       रात 11 बजे

सारिका राजू के बीच 10 बजे से बाते चल रही थी

सारिका – अच्छा आज फिर गये थे नदी मे नहाने

दिलीप – हा गया था जब दिल करता है चला जाता हु

सारिका – अच्छी बात है लेकिन गहराई मे मत जाना समझ गये

दिलीप – समझ गया ऑन्टी लेकिन मुझे तैरना आता है

सारिका – अच्छा ऐसा है मेरे बेटे को भी तैरना आता है

दिलीप हस्ते हुवे – सेम सेम हो गया

सारिका हस्ते हुवे – सही कहा

सारिका मन मे – किया मे सुसु की बात करू छि मे किया सोच रही हु लेकिन मे अपने आप को रोक नही पा रही हु

सारिका – सुनो ना तुम अब सुसु करने नही जाते किया ( सारिका ये केह बहोत शर्मा जाती है)

दिलीप बिस्तर पे लेता खुशी से नाचते हुवे – काम कर गया प्लान

दिलीप नॉर्मल तरीके से – जाता हु लेकिन फोन दूर रखता हु इस लिये आपको आवाज सुनाई नही देती

सारिका सर्म से लाल होते हुवे मन मे – किया वो रोज जाता है सुसु करने और सुसु करते हुवे बाते करता है लेकिन मुझे आवाज कियु नही सुनाता

सारिका – लेकिन आवाज मुझे कियु नही सुनाते ( सारिका को बहोत सर्म आ रही थी सारिका खुद नही समझ पा रही थी वो किया करे जा रही है

दिलीप – मुझे लगा सायद आपको अच्छा नही लगता होगा कही आप गुस्सा ना हो जाओ इस लिये

सारिका जल्दी से – अरे मे कियु गुस्सा होगी ( सारिका फिर सर्म से लाल हो जाती है)

दिलीप नॉर्मल आवाज मे कियुंकी दिलीप सारिका को ये एहसास नही होने देना चाहता था की वो बहोत खुश है

दिलीप – ठीक है ऑन्टी मुझे जोर से लगी है फोन कान मे लगा के रखना

दिलीप बाहर आके पिसाब करने लगता है और सारिका पिसाब की आवाज सुनने लगती है

सारिका मन मे – पता नही कियु अब मुझे अच्छा फिल हो रहा है

दिलीप पिसाब करने के बाद बिस्तर पे लेत कर

दिलीप – सुन किया ऑन्टी

सारिका – शर्मा के हा

रात 1 बज गये थे

दिलीप – ऑन्टी अब सोना चाहिये

सारिका – सही कहा ये लो गुड नाइट किस उम्मा

दिलीप खुश होते हुवे – किया बात है ऑन्टी आज अपने बिन मांगे होठो पे किस दे दिया थैंक्स

सारिका सरमाते हुवे – थैंक्स मत कहो और मुझे भी मेरा किस दो

दिलीप हस्ते हुवे – ये लीजिये उम्मा मिल गया

सारिका – हस्ते हुवे हा मिल गया

दिलीप – ठीक है ऑन्टी गुड नाइट

सारिका – गुड नाइट

दिलीप फोन कट कर फिर खुशी से नाचने लगता है

दिलीप – जैसा मेने सोचा सब वैसा जा रहा है

   सुबह हो जाती है

सारिका हल्का होने जा रही थी दिलीप से बाते करते हुवे

दिलीप – ऑन्टी जोर से लगी है

सारिका हस्ते हुवे – कर लॉ लेकिन आवाज मुझे सुनाई देनी चाहिये

दिलीप हस्ते हुवे – समझ गया

दिलीप पिसाब करने लगता है और सारिका एक जगह खरी होकर आराम से सुनने लगती है

दिलीप – हो गया सुना ना आप ने

सारिका हस्ते हुवे – हा अच्छे से

          5 दिन बाद

सारिका को दो चीजो की आदत दिलीप लगा चुका था पिसाब की आवाज सुनने का किस लेने देने का ये अब सारिका के लिये नॉर्मल बात हो गई थी दिलीप यही चाहता था

      रात 10 बजे

दिलीप बिस्तर पे लेता – अब इससे आगे बढ़ने का समय आ गया है

दिलीप फोन लगा देता है सारिका दोनो मे फिर बाते होने लगती है

सारिका -तुम्हे ही याद कर रही थी

दिलीप- मे आपको याद कर रहा था खाना पीना हो गया

सारिका करवट बदल – हो गया तुम ने खा लिया

दिलीप – ऑन्टी ये बताइये किया आप को नदी मे नहाने जाने का दिल नही करता

सारिका हस्ते हुवे – सच कहु तो करता है

दिलीप – तो जाती कियु नही

सारिका – जाउंगी कभी

    ऐसे ही बाते होती रेहती है और 1 बज जाते है

दिलीप बाहर मूतने आ गया था दिलीप फिर मूतने लगता है सारिका आवाज सुने जा रही थी

दिलीप फिर बिस्तर पे आके लेत जाता है

सारिका हस्ते हुवे – जोर से लगी थी ना

दिलीप हस्ते हुवे – हा बाते करते हुवे लग जाती है इसी बीच अब ऑन्टी सोने का टाइम हो गया है

सारिका – सही कहा ये लो गुड नाइट किस उम्मा

दिलीप – ऑन्टी आज हम अगल तरह से गुड नाइट बोलेंगे किस करेगे

सारिका हैरानी कंफ्यूज से – वो कैसे

दिलीप – आप गलत मत समझना गुस्सा भी मत करना आप को अच्छा लगेगा तो करेगे नही तो नही करेगे

सारिका सोचते हुवे – ठीक है बताओ

दिलीप – पेहले आप आखे बंद कर लीजिये

सारिका आखे बंद कर के – कर ली मेने

दिलीप – अब आप मेरे बारे मे सोचिये

सारिका राजू के बारे मे सोचते हुवे – हा सोच रही हु

दिलीप – ठीक है अब मे आपके गुलाबी होठो पे अपना होठो रखने वाला हु आप फिल करना ठीक है

सारिका की सासे तेज हो जाती है

सारिका – ठीक है

दिलीप – मेने अपना होठ आपके होठो पे रख दिया है फिल कीजिये मेरा होठ आपके होठो से सता है

सारिका आखे बंद कर फिल करने लगती हो तो सारिका हो फिल होता है जैसे राजू सच मे उसके होठो के होठ रखे हुवा है ये फिल कर सारिका के अंदर हलचल होने लगती है सासे और तेज हो जाती है

दिलीप – फिल हो रहा है मेरा होठ आपने होठो पे

सारिका तेज सासे लेते हुवे – हा फिल कर पा रही हु

दिलीप – अब मे आपके होठो को जिब को अपने मुह मे लेके चुसुगा आप भी वैसा ही सोचना फिल करना तो सुरु करे

सारिका और तेज सासे लेने लगती है सारिका के बरे गोल उजले चुसिया उपर नीचे होने लगते है

सारिका – ठीक है सुरु करो

दिलीप – ठीक है मे सुरु करता हु

सारिका आखे बंद कर फिल करने लगती है की राजू उसके होठो को अपने मुह मे लेके चूस रहा है तो सारिका भी वैसा ही करने लगती है फिर सुरु होता है दोनो के बीच एमेजिनसंन वाला किस 2 मिनट बाद

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दिलीप – ऑन्टी कैसा लगा

सारिका होस मे आती है सारिका के अंदर कुछ हो रहा था जिसे सारिका समझ नही पा रही थी ये गलत है या सही

दिलीप – ऑन्टी माफ करना आप को अच्छा नही लगा तो हम नही करेगे लेकिन गुस्सा मत होना

सारिका के मन मे आता तो ये गलत हो रहा है लेकिन दिल को अच्छा लग रहा था फिल खुश था इस लिये सारिका राजू से कुछ बोल नही पाती नही करना है

सारिका – अरे नही मुझे अच्छा लगा

दिलीप – कसम से केह रही है

सारिका हस्ते हुवे – कसम से बाबा

दिलीप जो बिस्तर पे लेता था खरा होकर खुशी से नाचने लगता है फिर बिस्तर पे आराम से लेत

दिलीप – मुझे लगा आपको अच्छा नही लगा

सारिका हस्ते हुवे – मुझे अजीब लगा सुरु मे लेकिन बाद मे अच्छा लगा

दिलीप – तो बताइये कैसा लगा गुड नाइट किस करने का नया तरीका मेरा मे हु ना कमाल का

सारिका हस्ते हुवे – हा बाबा मान गई तुम बहोत कमाल के हो

दिलीप ने ऐसी बात सारिका को हसाने के लिये माइड को अच्छा करने के लिये बोला था और ये काम कर गया सारिका ने खुद हरि झंडी फिर दे देगी

दिलीप – अच्छा ऑन्टी सोते है

सारिका – ठीक है बेटा

फोन कट

दिलीप बिस्तर पे लेता मन मे – अब मुझे मा को इस किस की इतनी आदत लगानी है की मा खुद कहे राजू बेटा चलो किस करते है

सारिका भी अभी जो किस वाला सीन हुवा उसे सोचे जा रही

         6 दिन बाद रात 11 बजे

सारिका दिलीप की बाते चल रही थी 9 बजे से

सारिका – अच्छा तो आज ये सब हुवा

दिलीप – हा यही सब हुवा था

सारिका – सुनो ना चलो किस करते है वैसा वाला किस ( ये बोलने के लिये सारिका ने बहोत हिम्मत जुटाई थी)

सारिका मन मे – मे क्या कर रही हु मुझे समझ मे नही आ रहा लेकिन मुझे सब अच्छा लग रहा है मे अपने आप को रोक नही पाती

सारिका सर्म से लाल हुवे परी थी

दिलीप को यही तो चाहिये था की सारिका खुद कहे किस करने के लिये दिलीप खुशी से पागल हुवे जा रहा था

दिलीप नॉर्मल मे – जैसा आप कहे ऑन्टी तो आखे बंद कर लीजिये

सारिका – मेने पेहले ही कर ली है

दिलीप मुस्कुरा देता है

दिलीप – ठीक है सुरु करते है फिर दोनो के बीच किस होता है 2 मिनट बाद

दिलीप – मजा आया ऑन्टी

सारिका शर्मा के – हा

दिलीप – सच कहु ऑन्टी तो मुझे तो बहोत मजा आता है जब मे आखे बंद कर आपको किस कर रहा हु ये सोचता हु तो ऐसा लगता है सच मे ये हो रहा है मे आपके रसीले होठो को मुह मे लेके आपके जिब को मुह मे लेके आपके लार को जब चूस के पीठा हु तो किया बताऊं सेहद जैसा मिठा लगता है

राजू की बात सुन सारिका की सासे फिर तेज होने लगती है सारिका के चुचे उपर नीचे होने लगते है

दिलीप – ऑन्टी आप बताइये ना आपको कैसा लगा लगता है   

सारिका सर्म से लाल होते हुवे – सच कहु तो मुझे भी ऐसा ही फिल होता है जैसे तुम मेरे जिब को होठो को मुह मे लेके चूस कर पी रहे हो और मे भी वैसे ही तुम्हारे होठो को जिब को मुह मे लेके चूस कर पी रही हु ये एहसास अजीब है लेकिन मुझे बहोत अच्छा लगता है

दिलीप मन मे – माफ करना मा आपको पता भी नही की आप किया कर रही है कियु कर रही है लेकिन मे यही चाहता था आपको मजा आये और आपका दिमाग ये कभी सोचे ही ना ये गलत है और कभी सोचा भी तो आप उसे मानने से इंकार कर दे आप मेरी मा है इस लिये मुझे अच्छे से पता है किया कैसे करना है इसी लिये तो मे पेहले आपको एक एक चीज का इतना आदत लगवाता हु ही आपको बहोत मजा आये ताकि आप सही गलत सोच ना पाये

दिलीप हस्ते हुवे – देखा मेरे दिमाग का कमाल

सारिका हस्ते हुवे – पागल अपनी तारीफ खुद कर रहे हो

दिलीप हस्ते हुवे – कियु ना करू मे हु ही कमाल का

सारिका हस्ते हुवे – अब बस भी करो

दोनो फिर 2 बजे तक बाते करते है और फिर किस वाला सीन करके सो जाते है

सुबह 9 बजे

दिलीप सारिका बैठ खाना खा रहे होते है लेकिन दिलीप सारिका को देख मुस्कुरा रहा होता है असल मे सारिका बहोत खुश दिखाई दे रही थी

दिलीप – मा कोई समान लाना हो तो बता दो काम से लोटते वक़्त लेकर आ जाउंगा

सारिका दिलीप को देख – अच्छा हुवा बेटा याद दिला दिया सब्ज़ी मे जो आता है हमेसा वही ले लेना और तेल नही है दाल भी ले ली लेना हरि मिर्ची धनिया इतना ही याद रहेगा ना

दिलीप हस्ते हुवे – मा आप भूल रही है हमेसा मे ही तो समान लाता हु

सारिका हस्ते हुवे – सही कहा मे तो सच मे भूल गई थी

दोनो मा बेटे बाते करते हुवे खाना खाते है फिर दिलीप काम मे जाने के लिये रेडी था

सारिका जिसका रोज का था दिलीप के गालो पे किस करते हुवे – ठीक है बेटा जा

दिलीप सारिका के गालो पे किस कर – ठीक है मा अब मे जाता हु

दिलीप के बाहर जाते ही सारिका राजू को फोन लगा देती है दिलीप मुस्कुराते हुवे फोन उठा के बाते करते हुवे जाने लगता है

सारिका – किया कर रहे हो

दिलीप – काम पे जा रहा हु पता तो है ना आप को

सारिका बिस्तर पे लेटते हुवे – पता था इसी लिये फोन किया सुनो ना किस वाला सीन करते है

दिलीप – ठीक है करते है

सारिका बिस्तर पे लेती आखे बंद किये फिल कर दोनो का किस सुरु होता है 2 मिनट बाद

दिलीप – ऑन्टी मजा आ गया आपके होठो का रस पीके

सारिका सर्माते हुवे – मुझे भी बहोत मजा आया

दिलीप – सच कहु तो आपके लार बहोत मिठा लगा

सारिका हस्ते हुवे – तुम भी ना कैसी बाते करते हो

दिलीप – किया आपको नही लगता मिठा

सारिका सर्म से लाल – हा लगता है मिठा

 ऐसे ही बातो से दिलीप सारिका को पागल करते रेहता है औ सारिका बेचारी को पता भी नही वो किया कर रही है दिल के आगे मजबूर जो थी

      रात 12 बजे

सारिका दिलीप 2 घंटे से बाते कर रहे थे अब बारी थी पिसाब की आवाज सुनाने की दिलीप बाहर आके पिसाब की आवाज सारिका को सुनाने लगता है सारिका मजे से आवाज सुने जा रही थी

पिसाब हो जाने के बाद दिलीप बिस्तर पे आके लेत जाता है

दिलीप – सुना ना अच्छे से

सारिका हस्ते हुवे – हा बाबा सुना अच्छे से

दिलीप मन मे – मा अपने पिसाब की आवाज बहोत सुन ली अब बारी है मेरी डर लग रहा है लेकिन करना पड़ेगा किसी ने कहा है डर के आगे मा की चूत है

दिलीप हिम्मत जुटा के

दिलीप हस्ते हुवे – ऑन्टी ये तो गलत है ना

सारिका हैरानी से – किया गलत है

दिलीप – मे सुरु से आप को पिसाब करने की आवाज सुनाते आ रहा हु लेकिन आप ने मुझे एक बार भी पिसाब करते नही सुनाया कम से कम एक बार तो आप पिसाब करने की आवाज सुना ही सकती है ना

दिलीप की बात सुन सारिका पूरी तरह से हैरान हो जाती है सारिका की आखे फैल जाती है सारिका गुस्से से लाल भी हो जाती है सारिका को यकीन नही हो रहा था उसने किया सुना राजू ने किया कहा

सारिका फुल गुस्से से – राजू तुमने किया कहा उसका तुझे अंदाज़ा भी है तुम मुझे ऐसा कैसे केह सकते हो मे तुम्हारी मा की उमर की हु तुम मुझे ये सब कहोगे मेने सोचा नही था छि मुझे लगा तुम अच्छे लरके हो लेकिन तुम मेरे बारे मे ये सोच रहे थे सारिका बहोत गुस्सा करती है राजू पे गुस्से मे बहोत कुछ सुना भी देती है

दिलीप डरते हुवे – ऑन्टी मेरी बात

सारिका – मुझे तुम्हारी कोई बात नही सुननी मे फोन रख रही हु

सारिका फोन कट कर देती है

दिलीप बिस्तर पे बैठा आराम से मन मे – आप जरूर रेडी होगी मा मेने ऐसे ही नही इतनी मेहनत की है प्लान बनाया है मान लो आप ने ये नही किया इतना सब होने के बाद भी तो इसका मतलब ये होगा मे आपको पा नही पाऊगा कभी भी

वही सारिका गुस्से से बिस्तर पे लेती – वो मुझे ऐसा कैसे केह सकता है अरे मे उसकी मा की उमर की हु मुझे ऐसा कुछ करने के लिये कहेगा सोचा नही था

आसा ऐसे ही राजू पे गुस्सा करते रेहती है 30 मिनट बाद जब सारिका पूरी तरह सांत होती है तब

सारिका मन मे – अरे ये मेने किया कर दिया उसने मुझे एक बार करने को कहा तो मे गुस्सा हो गई उसे इतना बुरा भला केह दिया मे उसे ज्ञान देने लगी जबकि मे खुद उसे अपनी पिसाब करने की आवाज सुनाने के लिये केहती थी और उसने कहा तो मे गुस्सा हो गई अगर ऐसा कुछ नही हुवा होता तो वो मुझे ये करने के लिये नही केहता मेने उसकी बात भी नही सुनी ये मेने किया कर दिया उसकी तो उसमे कोई गलती नही थी मुझे नही करना था तो आराम से मना भी कर सकती थी

सारिका खुद को गलत मनाने लग गई थी और ये बात दिलीप को पता था ऐसा कुछ होगा इसी लिये दिलीप ने पेहले सारिका को आदत लगवाई अपने पिसाब की आवाज सुनाने की ताकि जब बाद मे वो कहे सारिका को अपनी पिसाब की आवाज सुनाने के लिये तो सारिका उसपे इलज़ाम ना दाल सके उसे गलत ना समझ सके और ऐसा हुवा भी सारिका चाह का भी राजू को गलत नही तेहरा पाई उल्टा खुद गलत मान बैठी

सारिका राजू को फोन करती है दिलीप ये देख मुस्कुराते हुवे फोन उथाता है और अपना नाटक सुरु कर देता है

दिलीप रोते हुवे – ऑन्टी मुझे माफ कर दो मुझे पता नही था आप बुरा मान जायेगी मे ही बेवकूफ हु मुझे सोचना चाहिये था ऑन्टी प्लेस आप हमारी दोस्ती को मत तोरना प्लेस आप के दोस्त के आलावा मेरा कोई दोस्त नही है ( दिलीप रोते हुवे अपना नाटक जारी रखता है)

राजू को रोता देख उसकी बात सुन सारिका को बहोत बुरा लगता है सारिका खुद को कोसने लगती है की उसने अपने दोस्त को रूला दिया जबकि उसकी गलती नही थी उस दोस्त को जो उसे बेस्ट दोस्त मानता है उसे हासता है सारिका को सब सुरु से राजू कि मस्ती मजाक करना उसकी बाते सब याद आने लगती है

दिलीप अपने झूठे आसु साफ करते हुवे मन मे – सोच मा सोच लो सुरु से सब सोच लो हर एक पल हर एक बाते जो हमने सुरु से आज तक की मेने इतना मेहनत इस लिये ही तो किया है ताकि चाह कर भी आप हर एक पल हर बाते जो अपने की आज तक जो आप भूल ना पाये

सारिका – राजू बेटा चुप हो जाओ रोना बंद करो उसमे तुम्हारी कोई गलती नही है मे ही बेवकूफ थी तो सब चीजो को समझ नही पाई और तुमपे गुस्सा हो गई

दिलीप अपना नाटक जारी करते हुवे

दिलीप रोते हुवे – नही ऑन्टी इसमें आप की लगती नही है मेरी ही है आपको वो करने के लिये नही केहना चाहिये था

सारिका – नही बेटा तुम मुझे माफ कर तो तुम गलत नही थे मुझे गुस्सा नही होना चाहिये था मे आराम से मना भी कर सकती थी तुम रोना बंद करो मेरी कसम

दिलीप अपने झूठे आसु साफ करते हुवे – ठीक है

सारिका – माफ करना बेटा मेने तुम्हे रुला दिया लेकिन उसका इनाम मिलेगा तुझे

दिलीप समझ जाता है और मुस्कुराते हुवे – मिलना भी चाहिये मुझे इतनी मेहनत इसी लिये तो की है

दिलीप – नही ऑन्टी मुझे अब कोई इनाम नही चाहिये

सारिका शर्मा के – अरे मे तुझे अपनी आवाज सुनाउगी

दिलीप – नही ऑन्टी मुझे नही सुनना

सारिका हैरानी से – कियु

दिलीप – मे नही चाहता आप मुझे खुश करने के लिये करे मे आपकी दोस्ती से ही खुश हु

सारिका फिर दिलीप के बातो के जाल मे फस जाती है दिलीप सारिका को अपनी गलती का एहसास करवा रहा था

सारिका – नही बेटा मे अपने पुरे दिल से ( सारिका सर्म से लाल होते हुवे) मे अपने पिसाब की आवाज तुझे सुनाउगी

दिलीप खुश होते हुवे – सच्ची ऑन्टी

दिलीप की खुशी की आवाज सुन सारिका को अच्छा लगता है

सारिका – हा सच्ची अपना फोन कान मे लगाये रखना

दिलीप जी खुशी से – जी ऑन्टी

सारिका को बहोत सर्म आ रही थी लेकिन उसके करना ही था सारिका अपने कमरे से बाहर आती है वही दिलीप अपना लंड बाहर निकाल अपनी मा के पिसाब की आवाज सुन मुठ मारने के लिये तैयार था

           आज के लिये इतना ही 🙏🙏🙏🙏

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