chapter 4
सुबह हो जाती है फिर वही रोज मर्रा के काम करने मे लग जाते है खाना खाते है और दिलीप अपने काम पे और आसा अपने खेत पे
( 20 दिन बाद )
दिलीप इस 20 दिनों मे अपनी मा से राजू बन रोज रात को बात करते रहा लेकिन दिलीप सिर्फ नॉर्मल हि बात करता था कोई एक शब्द भी दिलीप ने ऐसा नही बोला जिसे सुन सारिका को अजीब लगे
दिलीप 20 दिन तक खूब सारिका को राजू बन के बात कर हसाता रहा और दिलीप का के प्लान काम कर चुका था सारिका को अब राजू से बात करने की लत लग गई थी
रात 9 बजे
सारिका बिस्तर पे नाइटी पेहने हुवे लेती हुई थी वही दिलीप भी अपने कमरे मे बिस्तर लेता हुवा सोच रहा था
दिलीप – यहा तक तो सही चला अब मा को राजू से बात करने की लत लग गई है लेकिन अब थोरा आगे एक कदम बढ़ाना होगा अब मा से दिन मे भी बात करनी पड़ेगी तो मा और भी राजू के करीब आ जायेगी
दिलीप फोन निकाल कर सारिका अपनी मा को कॉल कर देता है
सारिका राजू के फोन देख मुस्कुराते हुवे फोन उठा लेती है
सारिका – किया बात है पूरे टाइम मे मेरे दोस्त का फोन आ जाता है
दिलीप – हस्ते हुवे मे भला अपने दोस्त को कैसे इंतज़ार करवा सकता हु और सच कहु तो मुझे भी आपसे आप करने का इंतज़ार रेहता है
सारिका – हस्ते हुवे ऐसा है किया
दिलीप – किया आप को मेरे फोन का इंतज़ार नही रेहता किया
सारिका मन मे – रेहता है अभी भी मे हाथ मे फोन लिये तुम्हारे फोन का ही इंतज़ार कर रही थी
सारिका – हा करती हु कियु नही करुगी हम दोस्त जो है
दिलीप – हा सही कहा ये बताइये आपने खाना खा लिया सब कुछ ठीक चला आज का दिन कैसा गया
सारिका बिस्तर पे लेती कानों मे फोन लगाये
सारिका – दिन कैसा जायेगा जैसे रोज जाता है
दिलीप – समझ सकता हु हम गरीब है तो हमारी लाइफ मे किया हि नया कुछ अच्छा होगा
सारिका – ये बात भी तुम ने सही कही तुम बताओ आज का दिन तुम्हारा कैसा गया
दिलीप – जैसा जायेगा जैसा रोज जाता है काम से घर घर से काम बस आप से बात करता हु तो अच्छा फिल होता और सब दर्द गम भूल जाता हु
सारिका – हस्ते हुवे अच्छा ये बात है मुझे भी अच्छा लगता है तुम से बात कर लेती हु तो अच्छा फिल होता है दिल हल्का हो जाता है
दिलीप – दोस्त इसी लिये तो होते है दोस्तो से बात कर टाइम पास भी हो जाता है
सारिका – हा ये बात तो है तुमने बात करने वक़्त टाइम का पता भी नही चलता
दिलीप – मुझे भी अच्छा सुनो ना
सारिका – बोलो ना
दिलीप – कल मेरी छुट्टी है तो कल दिन भर बाते करेगे आप किया केहती है
सारिका ये सुन उसे अंदर हि अंदर अच्छा लगता है ये जान की अब दिन मे भी बात कर सकती है अपने दोस्त से
सारिका – अच्छा ऐसा है तो अच्छी बात है मुझे भी खुशी होगी
दिलीप – हा तो आप फोन अपना हमेसा अपने आप रखियेगा ठीक है
सारिका – हस्ते हुवे ठीक हो बाबा अपने पास हि रखुंगी
दिलीप – ठीक है दोस्त तो टाइम हो गया है सोते है गुड नाइट
सारिका – गुड नाइट
फोन कट
दिलीप फोन को देख मुस्कुराते हुवे – अब कल दिन मे भी बाते होगी मे आपको इतना राजू का लत लगवा दुगा की आप बेसब्री से राजू के फोन के आने का इंतज़ार करेगी फिर मे फोन करना कम कर दुगा उसके बाद आप खुद बार बार फोन करेगी राजू से बात करने के लिये
वही सारिका बिस्तर पे लेती राजू के बारे मे सोच – कल दिन मे पेहली बार बात करुगी अपने दोस्त से
सारिका मुस्कुराते हुवे सो जाती है
( नोट सारिका के दिल मे मे राजू के लिये कोई फीलिंग नही है सारिका राजू को सिर्फ दोस्त ही मानती है एक अच्छा सच्चा दोस्त)
सुबह हो जाती है
सारिका दिलीप बैठ खाना खा रहे थे
दिलीप – मा पापा से बात हुई पापा कब आने वाले है
सारिका खाना खाते हुवे दिलीप को देख
सारिका – बेटा उन्होंने कहा है कुछ महीने को आ जायेंगे लेकिन कब किस दिन आयेगे ये उन्होंने नही बताया
दिलीप – अच्छा मुझे लगता है कुछ काम खतम करने होगे तभी आयेगे
सारिका – सायद हा सकता है वो खुद ही बाद मे बता देगे जो है सो
दिलीप – हा आपका केहना भी सही है
थोरि बाते करते हुवे खाना पीना हो जाता है
सारिका दिलीप के गालो पे किस करती है जो रोज का था दिलीप फिर काम पे निकल जाता है सारिका को दिखाने के लिये सच तो हमे पता है
दिलीप चलते हुवे उसी पीपल के पेर के नीचे बैठ जाता है
दिलीप फोन निकाल – चलो अभी मा खेतो के लिये निकले गी ( दिलीप फोन लगा देता है)
सारिका बकरी लेकर खेतो की तरफ निकल परी थी तभी सारिका का फोन बजता है सारिका फोन की रिंग सुन उसके चेहरे पे मुस्कान आ जाती है सारिका अपने ब्लाउस के अंदर से अपना फोन निकालती है
हा छोटा फोन था तो सारिका ने अपने ब्लाउस के अंदर अपनी बरी चुचे के बीच रखा हुवा था
सारिका फोन उठाते हुवे – हैलो
दिलीप – गुड मोर्निंग दोस्त
सारिका खेतो के डनेर पे चलते हुवे बाते करने लगती है
सारिका – हस्ते हुवे गुड मोर्निंग दोस्त
दिलीप – आप हस कियु रही है
सारिका – हस्ते हुवे कियुंकी ये गुड मोर्निंग ये सब में पेहली बार कर रही हु
दिलीप – ओ अच्छा मे समझ गया आपके समय मे फोन नही था ना
सारिका – हस्ते हुवे सही कहा
दिलीप – हस्ते हुवे इसी लिये आपको हसी आ गई
सारिका – हा लेकिन अच्छा भी लग रहा है
दिलीप – ये तो अच्छी बात है आप अभी खेतो मे होगी सही कहा ना
सारिका – हस्ते हुवे बिल्कुल सही मेने हि तो बताया था
दिलीप – हस्ते हुवे आप ने सही कहा
सारिका – तुम अभी कहा से बाते कर रहे तो मुझे गारी ही आवाज सुनाई दे रही है
दिलीप – मे अभी घर मे बाहर एक पेर के नीचे बैठ बाते कर रहा हु
सारिका – अच्छा लेकिन कोई तुम्हारे पास है तो नही ना
दिलीप – आप चिंता कियु कर रही है कोई नही है मुझे पता है आप किया सोच रही किसी को पता नही चलेगा
सारिका – मुस्कुराते हुवे तुम सच मे समझदार हो
( असल मे सारिका नही चाहती थी किसी को पता चले भले की सारिका राजू दोस्त है लेकिन किसी को पता चलेगा एक लरका ऑन्टी को दोस्त बनाया है तो गलत सोच सकते है
दिलीप – मुझे खुशी हुई आपसे तारीफ सुन कर
सारिका – हस्ते हुवे चलो अच्छा है तुम खुश हो अच्छा सुनो अब मुझे घास काटनी है बाद मे बात करेगे ठीक है
दिलीप – ठीक है जैसा आप कहे
फोन कट
सारिका फोन अपने ब्लाउस की अंदर रख घास काटने मे लग जाती है
वही अभय पीपल के नीचे बैठा हुवा फोन देख मुस्कुराते हुवे
दिलीप – मुझे अब पुरा दिन बाहर ही रेहना पड़ेगा लेकिन मा को पाने के लिये कुछ भी करुगा
सारिका का घास काटना हो जाता है तो सारिका बकरी घास लेकर घर आ जाती है मुह हाथ धोने के बाद सारिका बिस्तर पे लेट जाती है
दिलीप को अच्छे से पता था उसकी मा खेतो से कब आती है
दिलीप – मा घर पे आ गई होगी अब फोन करता हु
दिलीप फोन लगा देता है और फिर बाते सुरु हो जाती है
5 दिन दिलीप दिन रात सारिका यानी अपनी मा से खुब बाते करता है और सारिका का दिन रात मस्त तरीके से गुजरने लगता है पेहले बोर हो जाती थी लेकिन अब राजू के साथ बात कर मस्त टाइम पास हो रहा था
5 दिन अभय की छुट्टी थी उसके बाद अभय सच मे काम पे जाने लगता है तो अभय काम मे जाते वक़्त बात कर लेता था और काम के बीच मे टाइम निकाल पुरे दिन मे 3 बार 5 या 10 मिनट बात कर लेता था फिर काम से लोटते वक़्त दिलीप कोई मोक्का नही छोरता
( पूरे 50 दिन गुजर जाते है )
आज पूरे 50 दिन हो गये थे सारिका राजू के दोस्त बने बाते करते हुवे और इस 50 दिन मे भी नॉर्मल ही दिलीप ने बाते की लेकिन दिलीप जो चाहता था वैसा होता जा रहा था
(सुबह सूरज निकलने वाला था ) यानी सुबह होने वाली थी वही टाइम होता है गाव की सभी लेडिस् के उठने का ताकि सुबह होने से पेहले बाथरूम जाया जा सके
सारिका उठ कर फोन हाथ मे लेके घर के पीछे हल्का होने जाने लगती है घर से ठोरी दूर जाने के बाद सारिका राजू को फोन करती है
ये पेहली बार था जब सारिका ने खुद राजू को फोन किया था वो भी इतनी सुबह दिलीप सोया हुवा था फोन का रिंग सुन फोन देखता है तो दिलीप के चेहरे पे इस्माइल आ जाती है
दिलीप फोन उठाते हुवे – किया बात है आज मेरी दोस्त ने खुद मुझे फोन किया है
सारिका खेतो से होते हुवे चलते हुवे
सारिका मुस्कुराते हुवे – माफ करना इतनी सुबह फोन करने के लिये मेने तुम्हारी नींद खराब कर दी ना
दिलीप – बिल्कुल नही बल्कि मे बहोत खुश हु मेरी दोस्त ने मुझे खुद फोन किया
सारिका – तुम सच केह रहे हो
दिलीप – आप की कसम आप जब फोन करे रात 12 बजे 3 बजे जब भी फोन करेगी मुझे आप से बात करने मे बहोत खुशी होगी कसम से
सारिका को ये सुन अच्छा लगता है और बहोत खुश भी हो जाती है
दिलीप – आप घर से बाहर है ना
सारिका हैरानी से – तुम्हे कैसे पता
दिलीप – हस्ते हुवे अरे किरो की आवाज सुनाई दे रही है इस लिये
सारिका – अच्छा तो ऐसे पता लगा हा मे खेतो मे आई हु
दिलीप – मुस्कुराते हुवे अभी तो पूरी तरह से सुबह भी नही हुई आप खेतो मे इस वक़्त किया करने गई है
सारिका एकदम से रुक जाती है और सर्म से लाल हो जाती है
सारिका मन मे – मे अब किया जवाब दु मे तो फस गई
दिलीप बिस्तर ले लेता मन मे – अरे ये मेने किया पूछ लिया मुझे बात को घूमना होगा नही तो सुबह मा बाते नही करेगी
दिलीप – मुझे पता है आप नीलगाय को भगाने गई होगी किया है मे भी कई बार सुबह खेतो मे जाता हु लीलगाय को भगाने खेतो को बर्बाद कर देते है
सारिका को ये सुन सास मे सास आती
सारिका – तुम ने सही कहा इसी लिये आई थी
दिलीप – मुझे पता था
सारिका – हस्ते हुवे हा तुम सही हो अच्छा सुनो ठोरी देर बाद बाते करेगे
दिलीप – ठीक है समझ गया
फोन कट
सारिका एक झारी के पास सारी उठा के हल्का होने बैठे जाती है सारिका मन मे – बच गई मुझे तो लगा था उसे पता चल गया होगा मे हल्का होने आई हु नही तो मे उसे कैसे बताती मे किया करने आई थी
हल्का होने के बाद सारिका घर की तरफ जाते हुवे फिर राजू को फोन कर बाते करने लगती है
20 दिन और गुजर जाते है अब पूरे 70 दिन हो चुके थे
इस 20 दिन मे सारिका ही हमेसा खुद जब दिल करता था फोन कर राजू से बात कर लेती थी यहा तक की अब रात 2 बजे तक बाते होने लगी थी अब सारिका को राजू से बात किये बैगर रहा नही जाता था
सारिका अपने बेटे के जाल मे मे फस्ति जा रही थी
दूसरे दिन – रात 1 बजे
दिलीप सारिका के बीच बाते हो रही थी
दिलीप – अच्छा दोस्त एक बज गये है अब हमे सोना चाहिये
सारिका – कियु ठोरी देर और बाते करते है ना
दिलीप मन मे – मा तो अब राजू से बात करने मे बहोत मजा आ रहा है खुद फोन करती है देर रात बात करती है लगता है अब समय आ गया है मैन दाव खेलने का लेकिन कुछ दिन और रुकते हो
दिलीप – ठीक हो मे अपने दोस्त से पूरी रात बात कर सकता हुई
सारिका – हस्ते हुवे मे भी लेकिन तुम चिंता मत करो मुझे मुझे पता है काम पे तुम्हे जाना होता है बस कुछ मिनट बाते करते है
15 मिनट तक और बात होती है और फोन कट कर दोनों सो जाते है
सुबह हो जाती है
दिलीप साफ देख पा रहा था उसकी मा अब खुश खिलखिलाते हुवे रहने लगी है ये देख दिलीप को भी अच्छा लग रहा था और दिलीप का प्लान सही तरह से चल रहा था काम भी कर रहा था
अब बाते ऐसे हि चलती रेहती है सारिका की नींद कभी रात को भी टूट जाती तो सारिका राजू को फोन कर बाते करने लगती दिलीप भी अपना पुरा ध्यान रखता था ताकि मा को कुछ पता ना चले
अब तो सारिका सुबह हल्का होते टाइम खेतो मे हर वक़्त जब दिलीप के पास टाइम होता बाते होते रेहती
पूरे तीन महीने हो जाते है – सारिका राजू के दोस्ती के
दिलीप इस तीन महीने मे भी सारिका यानी अपनी मा से राजू बन बाते करते हुवे कोई गलत शब्द नही होता होता नॉर्मल हाल चाल इधर उधर की बाते करता था कियुंकी दिलीप जनता था उसकी मा इतनी आसानी से उसके जाल मे नही फसेगी उसके लिये सर्ब और समय लगेगा जो दिलीप दे रहा था
शाम 3 बजे
दिलीप सारिका के साथ बिस्तर पे लेता बाते कर रहा था
दिलीप सारिका को दिन देख – मा मे देख रहा हु कुछ महीने से आप बहोत खुश नजर आती है किया पापा आने वाले है किया इस लिये
सारिका दिलीप की बात सुन हैरान और डर भी जाती है अब किया जवाब दे दिलीप को दिलीप सारिका के चेहरे को देख समझ जाता है
दिलीप सारिका के गले गलते हुवे – मा आप ऐसे हि खुश रहा कीजिये हमेसा मुझे अच्छा लगेगा आप खुश देख मुझे खुशी मिलती है
सारिका भी दिलीप को अपने बाहों मे लेकर – मे खुश ही हु बेटा और हमेसा रहूगी
दिलीप – मे भी यही चाहता हु आप खुश रहे
सारिका – दिलीप के गाल पे किस करते हुवे हुवे मेरा प्यारा बचा
दिलीप सारिका के गाल पे किस करते हुवे – मेरी प्यारी मा
सारिका दिलीप फिर हसने लगते है
( 3 महीने 10 दिन बाद – रात 10 बजे)
सारिका – सुनो ना कल दिलीप के पापा आने वाले है तो
दिलीप – समझ गया ऑन्टी आप खुद जब टाइम मिलेगा तो करना
सारिका – मुस्कुराते हुवे सही कहा वैसे हम दोस्त है सिर्फ और रहेगे लेकिन तुम मेरे बेटे के उमर के दो और मे तुम्हारी मा की उमर की तो लोग गलत समझ सकते है
दिलीप – मुझे पता है आप चिंता मत करो जब तक अंकल रहेगे मेनेज कर लेगे
सारिका – हस्ते हुवे सही कहा
फिर दोनों मे 12 बजे तक बाते होती है फिर सो जाते है
दिलीप बिस्तर पे लेता मन मे – पापा आ रहे है तो कुछ दिन महीने मेनेज कर के चलना पड़ेगा
अगले दिन सुबह 11 बजे – दिलीप के पापा सारिका के पति आ जाते है जिसे देख सारिका दिलीप बहोत खुश थे
तीनों बैठे हुवे थे कमरे मे
जगदीश दिलीप से – बेटा कैसा है तु माफ करना बेटा तेरे पापा तुझे अच्छी लाइफ नही दे पा रहे
दिलीप – अरे पापा आप ऐसी बाते मत करो आप ने मेरे लिये बहोत कुछ किया है मे इसी मे खुश हु
जगदीश – वैसे तेरा काम कैसा चल रहा है
दिलीप – ठीक ठाक चल रहा है
जगदीश सारिका को देख – मे एक महीने रेह कर फिर चला जाउंगा कियु की कभी बहोत काम है वाह सायद दो बार फिर आना जाना परे
सारिका ये सुन खुश नही होती सारिका को सारिका बस चाहती थी उसका पति उसके साथ रहे सारिका को पता था अब उसके पति के अंदर वो दम नही है लेकिन सारिका चुदाई के लिये नही बल्कि अपने पति के साथ रेहना टाइम बिताना चाहती थी सारिका चाहती थी उसका पति उसके आखो के सामने रहे लेकिन सारिका भी जानती थी उनके पति उसके और दिलीप के लिये हि सब कर रहे है
दिलीप – ठीक है पापा चिंता मत कीजिये जल्दी हि मे कोई छोटा मोटा खुद का काम सुरु कर दुगा फिर आप को जाने नही दुगा
जगदीश दिलीप के कंधे पे हाथ रख – उस दिन का इंतज़ार रहेगा बेटा
दिलीप जाते हुवे – ठीक है मे जाता हु
दिलीप ये केह कमरे से निकल बाहर घूमने चला जाता है
जगदीश सारिका को देख – कैसी हो मेरी बुलबुल
सारिका मुह बना के – बुलबुल ठीक है
जगदीश सारिका को बाहों मे भर – नाराज मत हो मेरी जान
सारिका – मे नाराज नही हु
दोनो मिया बीवी मस्ती मजाक बाते करते है कई दिनों कि बाते थी सब कर देते है
रात 10 बजे
सारिका अपने पति को देख – सुनिये ना बहोत मन कर रहा है
जगदीश सारिका को देख – यार इस उमर मे भी तुम्हे चुदाई चाहिये
सारिका – गुस्से से आप के साप मे दम नही रहा इसका मतलब ये नही मेरी बिल मे दम नही है
जगदीश – गुस्सा मत करो यार तुम्हे पता है ना सब फिर भी
सारिका सारी उपर कर घोरी बनते हुवे – मुझे पता है आप जितनी देर कर सकते है करिये जगदीश हार मान कर सारिका के चूत मे लंड घुसा देता है सारिका आह उह्ह् इसी के लिये तरप् रही थी कई महीने बाद आपका साप मेरी बिल मे गया है आह उफ करते हुवे

जगदीश चुदाई करते हुवे मन मे – चूत तो आग फेक रही है ऐसा लग रहा है मेरा लंड उसकी चूत की गर्मी से जल जायेगा चूत भी कितनी गीली है सारिका आह उफ हा मजा आ रहा है और तेज करिये ना बस 1 मिनट होता है जगदीश ठंडा पर जाता है
सारिका मन मार कर चुपचाप लेत जाती है
जगदीश – कहा था ना लेकिन तुम मानी नही
सारिका दूसरी तरफ मुह कर के – कोई बात नही सो जाइये
जगदीश सारिका को देखता है और लेत जाता है सारिका के लिये जगदीश को बुरा लग रहा था
सारिका मन मे – मे ये किया कर रही हु मेरी बेटी बच्चे बरे हो गये हो बेटी की सादी भी हो गई है उन्होंने मुझे प्यार दिया सब कुछ देने की खुश रखने पूरी कोसिस करते आये है आज भी मेरे दिलीप के लिये घर छोर अपने गाव छोर सेहर काम करने जाते है जो आसान नही होता मे खुद गर्ज़ हो रही हु मे सिर्फ अपने बारे मे सोच रही हु ऐसा मे कैसे कर सकती हु मुझे ऐसा नही करना चाहिये था उन्हें भी बुरा लगता होगा
सारिका भी अपने आप को समझा भुजा कर आखे बंद कर लेती है
दिलीप छेद से ये सब देख सुन रहा था दिलीप कमरे मे आके बिस्तर पे लेत कर मन मे – साला किस्मत हि खराब है सोचा था चुदाई देखने के लिये मिलेगी लेकिन नही मिली लेकिन ये मेरे लिये अच्छा भी है अगर पापा के अंदर दम होता तो पूरी तरह से मा को पाना नामुम्किम् था
एक एक दिन गुजरने लगते है सारिका सुबह खेतो मे जाके वक़्त घास लेने जाके वक़्त जब भी मोक्का मिलता था राजू से बात कर लिया करती थी
1 महीने बाद
जगदीश वापस चला जाता है फिर सारिका राजू के बीच पेहले जैसे दिन रात बाते होने लगती है
10 दिन बाद – रात 9 बजे
दिलीप बिस्तर पे लेता अब समय आ गया है असली प्लान को अंजाम देने का डर भी बहोत लग रहा है अगर मे फैल हुआ तो मेरी पुरी मेहनत बर्बाद हो जायेगी लेकिन ये तो मुझे करना हि पड़ेगा
तभी सारिका का फोन आ जाता है दिलीप फोन उठाता है
सारिका – किया कर रहे हो
दिलीप – हस्ते हुवे आप को याद कर रहा था
सारिका – हस्ते हुवे अच्छा खाना हो गया
दिलीप – हा हो गया आप ने खाना खा लिया
सारिका – हा अभी ही मा बेटे खाये है खाना
दिलीप – अच्छा है मुझे तो आप से बाते करने का इंतज़ार रेहता है
सारिका – हस्ते हुवे अच्छा मुझे भी
दिलीप – सच्ची या झुठ बोल रही है
सारिका – कसम से अब तो तुमसे बाते कर टाइम का पता भी नही चलता और मेरा हर दिन रात अच्छा जाता है
दिलीप – हस्ते हुवे केहना तो मुझे चाहिये था ये बाते अपनी मीठी आवाज सुन मेरा दिल झूम उठता हो
सारिका – किया तुम्हे मेरी आवाज मीठी प्यारी लगती है
दिलीप – कसम से और मुझे लगता है आप बहोत खूबसूरत भी होगी
सारिका – हस्ते हुवे कियु अगर खूबसूरत नही हुई तो दोस्ती तोर दोगे
दिलीप – आपने सोच भी कैसे लिया मरते दम तक मे ये दोस्ती नही तोरने वाला
सारिका को ये सुन बहोत अच्छा लगता है दिल को सुकून मिलता है
दिलीप – ऑन्टी लाइन पे ही रहियेगा ठीक है
सारिका – हस्ते हुवे कियु किया हुवा
दिलीप – सुसु आई है जा रहा हु करने
सारिका ये सुन सर्म से लाल हो जाती है
दिलीप जल्दी से वा बाहर आता है और अपना लंड निकाल सीधा पथर् पे निसाना लगाता है और फोन को पास रखता है ताकि मूतने की आवाज सारिका को सुनाई दे सके और ऐसा होगा भी है
सारिका को मूतने की आवाज साफ सुनाई दे रही थी सारिका ये सुन और सर्म से लाल होते हुवे मन मे – ये लरका भी उसे पता भी है मुझे सब सुनाई दे रहा है सायद पता होगा आवाज तेज आ रही हो लगता है सच मे जोर से लगी थी छि छि मे ये किया सोच रही हु
दिलीप पिसाब करने के बाद कमरे मे आके लेत जाता है और
दिलीप – हेल्लो आप लाइन पे है
सारिका सर्म को छुपाते हुवे सांत नॉर्मल आवाज मे
सारिका – हा मे लाइन पे हु
दिलीप – माफ करना बहोत जोर से आई थी
सारिका सर्म से – छि तो मुझे कियु बता रहे हो
दिलीप – अरे माफ करना आपको बुरा लगा तो सॉर्री आगे से ध्यान रखुंगा
सारिका – अरे नही कोई बात नही ( सारिका हस्ते हुवे) लेकिन सच मे तुम्हे जोर से लगी थी ( सारिका ये केह जोर जोर से हसने लगती है)
दिलीप सरमाने का नाटक करते हुवे सर्म वाली आवाज मे
दिलीप थोरा जोर से – किया आपको कैसे पता चला
सारिका हस्ते हुवे – फोन लेकर गये थे ना
दिलीप सर्माते हुवे – नही यार देखो मजाक मत उराव मेरा जोर से लगी थी मे तो भूल ही गया और फोन लेकर चला गया लेकिन अगली बार दुबारा ऐसा नही करुगा
सारिका हस्ते हुवे – अब किया फायेदा मेने तू सब
दिलीप- प्लेस ऐसा मत बोलो सर्म आ रही है
सारिका हस्ते हुवे- ठीक है बाबा नही बोलुगी
दिलीप – थैंक्स मेरे दोस्त लेकिन
ऐसे ही मस्ती मजाक करते हुवे बाते 1 बजे तक होती है
दिलीप – दोस्त मे आपको ऑन्टी बोलुगा चलेगा ना
सारिका – तुम जो बुला लो चलेगा
दिलीप -मे ऑन्टी ही बोलुगा तो ऑन्टी अब सोते है 1 बज गये है
सारिका – सही कहा टाइम का पता नही चलता है बाते करते हुवे
दिलीप – सही कहा गुड नाइट ऑन्टी
सारिका – गुड नाइट राजू बेटा
फोन कट
सारिका बिस्तर पे लेती हस्ते हुवे मन मे – पागल जब जोर से लगी थी तो रोकने की किया जरूरत थी जाना था ना अरे यार मुझे भी सुसु लग लग गई

सारिका बाहर आती है एक जगह पे बैठ सुसु कर फिर जाके बिस्तर पे लेत आखे बंद कर लेती है
वही दिलीप खुशी से नाच रहा था कियुंकी उसका प्लान काम कर गया था असल मे दिलीप मूतने वाला सारिका को आवाज सुनाने वाला प्लान दिलीप ने पेहले ही बना लिया था
दिलीप मन मे – 4 महीने से जयादा दिन हो गये हमारी दोस्ती के और मेने इस बीच एक भी शब्द गलत नही बोला नॉर्मल बाते की कियुंकी पेहला मेरा प्लान था मा से दोस्ती करना उसके नजदीक जाना और दोस्ती को बहोत गेहरा करना इतना ही मा खुद राजू से बात किये बगैर रेह ना पाये और ये हो चुका है इसी लिये आज मेने उसके आगे का कदम उठाया है अब मा से थोरा उस टाइप बातो मे लेके जाना होगा लेकिन धीरे धीरे आज मेरा पेहला कदम सही गया मा हसी गुस्सा नही किया तो बस जैसे ही करते रेहना है
( आज के लिये इतना ही ![]()
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