chapter 3
सुबह हो जाती है दिलीप अपना पेहला कदम रख दिया था अब आगे बढ़ने की बारी थी
सुबह होते ही दिलीप नहाने खाने के बाद
सारिका बर्तन को धोने के लिये रख रही थी
दिलीप मा को देख – मा मे काम पे जा रहा हु
सारिका दिलीप को देख – ठीक है बेटा आराम से करना ध्यान रखना अपने उपर जोर मत डालना
दिलीप जाते हुवे – समझ गया मा आप चिंता मत करो
दिलीप निकल पारा मजदूरी करने सारिका बर्तन साफ कर खेतो मे चली जाती है
दिलीप चलते हुवे जा रहा था मन मे सोचे जा रहा था
दिलीप – पेहला कदम तो रख दिया अब मुझे कैसे भी मा को अपना दोस्त बनाना होगा और धीरे धीरे आगे बढ़ना होगा कियुंकी का का करेक्टर जैसा है आसान नही होगा जल्दी बाज़ी की तो खेल खतम
( रात 9 )
दिलीप सारिका खाना खाने के बाद कुछ देर बाते करने के बाद अपने कमरे मे लेते हुवे थे
दिलीप बिस्तर पे लेता अपने फोन को देखे जा रहा था
दिलीप – आज मुझे मा से कैसे भी दोस्ती करनी होगी और उसके लिये मुझे उनके इमोसन् का फायेदा उठाना होगा माफ करना मा ये गलत है लो लेकिन मुझे करना हि होगा
दिलीप हिम्मत जूता कर फिर अपनी मा को फोन लगा देता है
सारिका नाइटी पेहने आखे बंद किये लेती हुई कुछ सोचे जा रही थी
तभी सारिका का फोन बजता है
सारिका नंबर देखते हुवे – अरे ये तो कल वाले लरके का नंबर है जिसका गलती से फोन लग गया था लेकिन फिर कैसे गलती हो गई
सारिका फोन उठा के
सारिका – बेटा मेने कहा था ना रोंग नंबर है फिर कैसे दुबारा गलती हो गई तुमसे हा
दिलीप बिस्तर पे बेटा डरा हुवा भी था दिलीप हिम्मत कर
दिलीप – ऑन्टी मुझे पता है लेकिन इस बार मेने गलती नही की मुझे आप की मीठी आवाज सुननी थी इस लिये फोन किया
सारिका पूरी तरह से हैरान हो जाती है
सारिका – तुम पागल को किया कैसी बाते कर रहे तो तुम हा
दिलीप – माफ करना ऑन्टी आपको अजीब लग रहा होगा लेकिन ये सच है आप की आवाज बहोत मीठी है
सारिका – मान गई मेरी आवाज मीठी है लेकिन तुम ऐसे ही किसी से बात नही कर सकते बेटा ना किसी अंजान से ऐसा केहना चाहिये
दिलीप – जानता हु ये गलत है तो कियु ना हम दोस्त बन जाये मेरा कोई दोस्त नही है
सारिका हैरान और हस्ते हुवे – बेटा मे तुम्हारी मा की उमर की हुई और तुम मुझे दोस्त बनाना चाहते हो
दिलीप – ऑन्टी तो किया हो गया दोस्ती उमर देख कर थोरी की जाती है
सारिका हस्ते हुवे – उमर देख कर ही की जाती है बेटा
दिलीप उदास दुखी आवाज मे – माफ करना ऑन्टी परेसान करने के लिये
सारिका दिलीप की दुखी आवाज सुन सारिका को भी बुरा फिल होता है ( एक बात सारिका का पता नही है जिस से वो बात कर रही है उसका बेटा है)
सारिका – तुम उदास कियु हो रहे हो तुम्हारे दोस्त है ना उन से बाते करो ना
दिलीप दुखी आवाज मे – दोस्त है लेकिन नाम के है
सारिका कंफ्यूज से – तुम्हारे केहना का किया मतलब है
दिलीप – ऑन्टी असल मे बात ये है मेरे कुछ दोस्त है लेकिन सभी मुझे अपना दोस्त मानते नही कही जाते है तो मुझे बुलाते नही एक दूसरे से सभी बहोत बाते करते है लेकिन मुझसे सब बहोत कम बाते करते है उनके साथ होकर भी ऐसा फिल होता है मे अकेला हु और मेरे पिट पीछे मेरा मजाक उराते है
सारिका पूरी कहानी सुन हैरान होती है और लरके के लिये बुरा फिल भी होता है
सारिका – बेटा ये तो बहोत बुरा है ऐसे दोस्त ना रेहना ही ठीक है
दिलीप बिस्तर पे लेता मन मे – सही है मा लाइन पे आ रही है
दिलीप – सही कहा ऑन्टी इस लिये मे अब उनके बाते नही करता
सारिका गेहरि सास छोरते हुवे – तो बेटा कोई नया दोस्त बना लो
दिलीप – कोसिस की ऑन्टी लेकिन नया दोस्त नही बना पाया
सारिका हैरानी से – लेकिन कियु
दिलीप – ऑन्टी आज के समय मे सच्चा दोस्त मिलना मुश्किल है मे गरीब घर से हु मेरे पास पैसे नही होते दोस्तो पे खर्च करने के लिये इस लिये मेरा कोई दोस्त भी नही बनता और जो अच्छे लरके है उसका दोस्त पेहले से है तो बस मे अकेला फिल करता हु
सारिका को और भी लरके के लिये बुरा फिल होने लगता है
सारिका – बेटा बहोत बुरा हुवा कोई बात नही कोसिस करते रेहना कोई ना कोई अच्छा दोस्त मिल जायेगा
दिलीप दुखी आवाज मे – नही ऑन्टी मेने कोसिस कर ली अब मुझसे नही होगा अकेला रेह लुगा लेकिन अगर आप दोस्त बन जाती हो
सारिका – देखो बेटा मे तुम्हारी दोस्त नही बन सकती मे तेरी मा की उमर की हु तुम मेरे बेटे के उमर के
दिलीप दुखी आवाज मे – समझ गया ऑन्टी माफ करना आपका सुक्रिया ऑन्टी मेरी बात सुनने के लिये अपने दिल की बात आप को बता कर बहोत अच्छा लगा
सारिका – कोई बात नही बेटा
दिलीप – गुड नाइट ऑन्टी अब मे आप को परेसान नही करुगा
फोन कट
सारिका फोन को साइड रख छत को देखते हुवे – बेचारा उसके साथ बहोत बुरा हुवा मेरे बेटे के साथ भी ऐसा ही कुछ है वो अकेला है जायदा दोस्त नही है कुछ ही दोस्त है गिने सुने तो मे बच्चे का दर्द समझ सकती हु लेकिन मे उसकी दोस्त नही बन सकती
दिलीप बिस्तर पे लेता फोन को देख – लग गये अब किया होगा मा ने तो मना कर दिया दोस्त बनने से सेट सेट पेहला प्लान ही फेल हो गया अब मुझे कोई दूसरा रास्ता देखना होगा
दिलीप बहोत परेसान हो गया था और दुखी भी अपने प्लान फेल हो गया था
( सुबह )
वही अपना रोज का सुबह काम करने के बाद सारिका दिलीप बैठ खाना खा रहे थे
दिलीप सारिका को देख – मा आप अकेले बहोत बोर हो जाती होगी ना
सारिका दिलीप को देख – किया करू बेटा बोर तो बहोत हो जाती हु टाइम पास ही नही होता तुम नही रेहते हो तू
दिलीप – मा तो अपने दोस्त के पास चली जाती बाते करती
सारिका मन मे – मेरे दोस्त भी कमीने है कैसी गन्दी बाते करती है मुझे नही पसंद नाम के दोस्त है कमीनी है सब
सारिका – नही होता चलेगा अकेली ही ठीक हु
दिलीप – मा अगर कोई दोस्त है दूर है आपसे तो भी चलेगा फोन पे बात कर लिया कीजिये आपका टाइम भी पास हो जायेगा और आपके दोस्त को भी अच्छा लगेगा
दिलीप की बात सारिका को सोचने पे मजबूर कर देती है
दिलीप मा को सोचता देख मन मे – मुझे पता है अकेला पन कैसा होता है आप को एक दोस्त की जरूरत है मा मेने ये आखरी कोसिस की है अगर बात नही बनती तो सच मे मुझे कोई दूसरा रास्ता ढुढ़ना पड़ेगा पता नही फिर कितना टाइम लगेगा
खाना पीना जो जाता है और दिलीप सारिका को बाय बोल काम पे निकल परता है सारिका भी खेतो मे चली जाती है
सारिका खेतो मे घास काटते हुवे मन मे – मुझे भी दोस्त की कमी खलती है और जो दोस्त है नाम के है लेकिन किया मुझे भी दोस्त बना लेना चाहिये लेकिन कैसे किसी बनाउ अपना दोस्त मे तो किसी को जानती भी नही
तभी सारिका को जोरों की पिसाब लगती है सारिका चारों तरफ देखती है कोई नही है तो एक जगह पे सारी उपर कर बैठ जाती है

सारिका की फूली गरम चुत के छेद से जोरदार सिटी मारते हुवे पानी बाहर निकलने लगता है सारिका पिसाब करने के बाद खरी होकर फिर घास काटने मे लग जाती है
( साम 5 बजे )
दिलीप थका हारा घर आता है सारिका दिलीप को देख
सारिका – आ गया बेटा मेने पानी रख दिया है जाके नहा ले
दिलीप सारिका को देख – ठीक है मा
दिलीप जाके पेहले नहाता है फिर रेडी होता है
दिलीप सारिका के पास जाके – मा मे बाहर घूम कर आता हु
सारिका दिलीप को देख – ठीक है बेटा जा जल्दी आ जाना
दिलीप मुस्कुराते हुवे – मा एक किस्सी दो ना
सारिका हस्ते हुवे दिलीप के गालो पे किसी कर देती है
सारिका – मुस्कुराते हुवे अब टिक है
दिलीप मुस्कुराते हुवे – हा अब टिक है
दिलीप बाहर घूमने चला जाता है और सारिका बर्तन साफ करने मे लग जाती है
( रात 9 बजे )
खाना खाने के बाद सारिका बिस्तर पे लेती हुई कुछ सोच रही थी वही दिलीप भी अपने हाथो मे फोन लिये
दिलीप – प्लेस मा फोन करो प्लेस नही तो मेरा किया धरा मेहनत सब पानी मे बेह जायेगा
सारिका बिस्तर पे लेती अपने हाथो मे फोन लिये दिलीप के नये नंबर को देखते हुवे – मुझे भी एक दोस्त की जरूरत है लेकिन इस लरके को भी लेकिन ये तो मेरे बेटे के उमर का है और मे उसकी मा की उमर कि तो किया हम दोस्त बन सकते है खैर एक बार ट्राई करने के किया जाता है
सारिका बहोत सोचने के बाद हिम्मत कर फोन लगा देती है
दिलीप बेचैन अपनी मा के फोन करने का इंतज़ार कर रहा था तभी फोन का रिंग बजता है दिलीप नंबर देख खुशी से पागल होने लगता है दिलीप थोरी देख बाद फोन उठा के
दिलीप – ऑन्टी आपने कैसे फोन किया कही आप मुझसे गुस्सा तो नही है ना अभी तक
सारिका बिस्तर पे लेती – नही नही बेटा जैसा तुम सोच रहे हो वैसा कुछ नही है
सारिका थोरा हीच हीचका रही थी सारिका को समझ नही आ रहा था कैसे अपने बेटे के उमर के लरके से दोस्त बनने के बारे मे कहे
दिलीप बिस्तर पे लेता समझ जाता है मा की हालत खुद आगे बात बढ़ाता है
दिलीप – ऑन्टी मे आप से फिर पूछता हु किया आप मेरी दोस्त बनेगी प्लेस ऑन्टी मान जाइये ना प्लेस
सारिका मन मे – मे भी चाहती हु उसने खुद फिर कहा है तो देरी नही करनी चाहिये
सारिका – बेटा ठीक है मे तुम्हारी दोस्त बनुगी लेकिन हम बाते करेगे किया तुम तो तो एक मर्द के साथ मेर बेटे के उमर के हो
दिलीप – ऑन्टी मे समझ सकता हु रही बात हम किया बाते करेगे तो मे अपने पुरे दिन मे जो करा उसके बारे मे अपने बारे मे कल किया करुगा यही सब बाते करेगे और आप दिन मे किया करती है किया बनाया कैसा दिन गया अच्छा बुरा जो आप बताना चाहे मुझे एक दोस्त मे यही तो बाते करते है
सारिका मन मे – बात तो सही कही कोसिस करती हुई अगर बाद मे दिल नही किया तो मना कर दूगी और बात भी खतम
सारिका – ठीक है बेटा मे तैयार हु आज से हम दोस्त है
दिलीप बिस्तर पे लेता हुवा था सारिका की बात सुन बिस्तर से खरा होकर खुशी सी नाचने लगता है फिर अपने आप को सांत कर बिस्तर पे लेत
दिलीप – ऑन्टी किया आप सच केह रही कही आप मुझसे मजाक तो रही कर रही है ना
सारिका – मुस्कुराते हुवे सच्ची केह रही हु बेटा
दिलीप – खुशी से थैंक्स ऑन्टी आपका बहोत बहोत सुक्रिया मे बता नही सकता मे कितना खुश हु मुझे अब रोज अपने दोस्त की मीठी आवाज सुनने के लिये मिलेगी मे अपने दिल का हाल अपने दोस्त को बता सकता हु सच मे आज बहोत खुश हु मे ऑन्टी
सारिका दिलीप यानी अंजान की बात सुन खुश होता देख सारिका को भी बहोत अच्छा लगता है
दिलीप – ऑन्टी अब हम दोस्त बन गये है तो पेहले जान पहचान हो जाये मेरा नाम राजू हो आप का
सारिका बिस्तर पे करवट लेते हुवे – सारिका नाम है मेरा
दिलीप – सारिका बहोत खूबसूरत नाम है आपका
सारिका – थैंक्स तुम्हारा भी अच्छा नाम है राजू वैसे ये बताओ राजू घर मे कोन कोन है तुम्हारे
दिलीप – ऑन्टी मे मेरी मा पापा सेहर मे है और दो बहने है दोनों की सादी हो गई है तो तभी हम मा बेटे ही है आज अपने बारे मे बताइये ना
सारिका – मेरी एक बेटी बेटा है तुम्हारे अंकल तुम्हारे पापा की तरह सेहर गये है कमाने बेटी ससुराल मे है बस हम मा बेटे ही है घर मे
दिलीप – अच्छा सेम मेरे जैसा ही है बस मेरी मा की दो बेटी है
सारिका हस्ते हुवे – सही कहा
दिलीप – वैसे ऑन्टी आपका बेटा किया करता ही
सारिका – काम पे जाता है पढाई छोर कर
दिलीप – मेरा भी वही है मे भी पढाई छोर मजदूरी करता हु
सारिका – किया बताऊ बेटा गरीबी रुला देती है
दिलीप – मुझे लगता है भाई आपकी घर चलाने मे मदद करना चाहते है आपके लिये कुछ करना चाहते है
सारिका – सही कहा बेटा तूने मेरा बेटा मुझे बहोत प्यार करता है मे भी बहोत प्यार करती हु मेरा लाल है वो
दिलीप – समझ सकता हु हर मा को अपना प्यारा होता है मेरी मा भी मुझे बहोत प्यार करती है
सारिका – करेगी ही हर मा अपने बच्चे से बहोत प्यार करती है
दिलीप – सही कहा आप ने ऑन्टी वैसे आज आपने किया बनाया है
सारिका – दाल भात भुजिया
दिलीप – ये तो मेरी फेवरेट है
सारिका – हस्ते हुवे मेरे बेटे का भी
दिलीप बिस्तर पे लेता अब बस धीरे धीरे मा को आदत लगानी है
दिलीप – ठीक है ऑन्टी आपको नींद आ रही होगी सो जाइये कल बात करेगे आपसे बात कर सच मे बहोत अच्छा लगा यकीन मानिये आज मे आप मेरी बेस्ट फ्रेंड है थैंक्स ऑन्टी फिर से मुझे जैसे को अपना दोस्त बनाने के लिये
सारिका – ऐसा मत कहो बेटा मुझे भी अच्छा लगा तुमसे बात कर के
दिलीप – गुड नाईट मेरी प्यारी दोस्त
सारिका हस्ते हुवे – गुड नाईट मेरे प्यार दोस्त
दिलीप फोन कट कर देता है
दिलीप बिस्तर पे लेता जोर जोर से सासे लिये जा रहा था दिलीप अपने सीने पे हाथ रख – यकीन नही हो रहा मे कामयाब रहा मेने मा को दोस्त बना लिया
दिलीप की खुशी का कोई ठिकाना नही था
दिलीप – लेकिन मंजिल बहोत दूर है यहा तक तो सब सही चल रहा है आगे किया होगा पता नही मुझे अपने कदम फुक कर रखने होगे कियुंकी मेरी मा इतनी आसानी जाल मे नही फसेगी
वही सारिका अपने हाथ मे फोन रखे ( राजू यानी दिलीप) का नंबर देखते हुवे मन मे – पता नही कियु मुझे भी राजू से बात कर अच्छा लगा कब 30 मिनट गुजर गये बता भी नही चला
सारिका फोन रख फिर अपनी आखे बंद कर सो जाती है
सुबह हो जाती है
सुबह दिलीप उठ कर देखता है की उसकी मा के चेहरे के थोरी अलग खुशी दिखाई दे रही है दिलीप मुस्कुराते हुवे खेतो की तरफ निकल जाता है फिर आता है नहाता और रेडी होकर खाना खाने बैठ जाता है
सारिका दिलीप मा बेटे साथ मे बैठ खाना खा रहे है दिलीप चोरी छुपे सारिका को देखे जा रहा था
सारिका दिलीप को देखती है तो दिलीप जल्दी से खाने पे ध्यान देने लगता है
सारिका दिलीप को देख – बेटा काम कैसा चल रहा है
दिलीप – मा बहोत अच्छा चल रहा है
सारिका इमोसनल होते हुवे – तुझे इस उमर मे इस गर्मी मे मजदूरी करता देख बहोत दुख होता है बेटा तुम सायद हमसे नफरत करते होगे कहा गरीब घर मे पैदा हो गया
दिलीप सारिका को देख आसु साफ करते हुवे – आप ने ऐसा सोच भी कैसे लिया मे बहोत खुश हु गरीब घर म पैदा हुवा हुई लेकिन मुझे आप जैसी खूबसूरत प्यार करने वाली मा मिली है तो मुझे अपनी जिंदगी से कोई सिकवा नही है आप है ना मेरे साथ
सारिका – थैंक्स बेटा मे भी बहोत खुश हु तुम जैसा बेटा आके
खाना पीना हो जाता है सारिका आती है और दिलीप के गाल पे किस करते हुवे – जा बेटा और सावधानी से काम करना ठीक है
दिलीप – मुस्कुराते हुवे ठीक है मा
दिलीप फिर अपने काम पर निकल जाता है सारिका खेतो मे
ये रोज का था और एक गाव के गरीब की लाइफ ऐसे ही चलती है
दिलीप अपने काम पे जाते हुवे सोचते हुवे चल रहा था
दिलीप मन मे – मुझे मा के साथ नोर्मलि अच्छी बाते करते रेहना होगा मे कोई भी ऐसे शब्द नही बोल सकता जिसके मा को अजीब लगे कुछ गरबर् लगे भले कितने दिन महीने साल लगे चलेगा लेकिन गलती नही करनी है उसी के साथ कुछ फनी बाते भी करना होगा ताकि मा को मजा आये उनको अच्छा लगे
दिलीप आगे की प्लान बनाता हुवा अपने काम मे निकल परा था
सारिका खेतो मे आके बकरी को एक जगह बांध देती है और गाय के लिये चारा काटने लग जाती है 1 घंटे बाद सारिका थक कर एक जगह बैठा जाती है और आराम करने लगती है
सारिका तो तभी फिर ( राजू यानी दिलीप) के साथ रात को की गई बाते याद आने लगती है तो सारिका की हसी छुट जाती है
सारिका हस्ते हुवे – सोच कर ही बहोत हसी आ रही है इस उमर मे मेने अपने बेटे के उमर का एक दोस्त बनाया है लेकिन राजू से बात कर दिल हल्का हो जाता है लरका भी अच्छा है बाते भी अच्छी करता है
तभी सारिका को अपनी बकरी की आवाज सुनाई देती है सारिका सामने देखती तो सारिका की आखे फैल जाती है सरीर के रोये खरे हो जाते है
असल मे एक बकरा सारिका की बकरी की चुत चाट् रहा था और बकरे का लाल बरा लंड बाहर निकला हुवा था पूरा टाइट
सारिका सामने का सीन जो चल रहा था देख सारिका को कुछ कुछ होने लगता है सारिका की नजर तो बस अपनी बकरी बकरे पे थी दोनों जो कर रहे थे देख रही थी
बकरा बकरी की चुत चाटने के बाद बकरी के उपर आ जाता है और अपना लंड बकरी की चुत पे रख जोर का धक्का मार देता है बकरी दर्द मे मे मे करते हुवे आगे चली जाती है और बकरे का लंड निकल जाता है चुत से
सारिका को ये सीन देख ऐसा लगता है की कोई उसकी चुत लंड रख जोर का धक्का मार दिया हो सारिका की सासे तेज होने लगती है चुत गीली होने लगती है सारिका के दबाये गये अरमान फिर बाहर आ जाते है
सारिका गौर से फिर देखने लगती है बकरा उसकी बकरी के साथ किया कर रहा है बकरा फिर बकरी की चुत चाटने लगता है
सारिका की सासे फिर तेज होने लगती है सारिका अपनी बकरी को बकरे से चुत चटवाता देख मन मे – किया चुत भी चाटी जाती है
सारिका की चुत से पानी आने लगता है सारिका की टांगे अपने आप फैल जाती है सारिका देखती है बकरा फिर उसकी बकरी पे चढ़ गया है ये सीन देख सारिका पूरी टांगे फैला के अपनी चुत मे उंगली करने लगती है और सामने का सीन देख भी रही थी

बकरा बकरी के चुत मे लंड फिर घुसा देता है लेकिन इस बार बकरी आगे नही जाती बस मे मे करने लगती है बकरा धक्का मारने लगता है और सारिका ये सीन देखते हुवे जोस मे अपनी चुत मे उंगली करने लगती है चुत गीली थी तो फच् फच् की आवाजे निकल रही थी सारिका – आह उह्ह् आने वाला है आ गया मे गई और सारिका झर जाती है
सारिका की चुत पानी से भीगी हुई थी हाथ की उंगली भी चुत की पानी से गीली थी सारिका जल्दी से अपनी सारी सही कर हाफते हुवे बैठ जाती है और अपनी बकरी की तरफ देखती है तो बकरा अपना काम कर आराम से जा रहा था
सारिका मन मे – हाय मेरी किस्मत चुत मे उंगली करना नही चाहती कियुंकी फिर लंड लेने का दिल करेगा लेकिन ऐसा सीन देख रोक नही पाई लेकिन चलो मेरी बकरी का काम हो गया कई दिन से मे मे कर रही थी
सारिका घास और बकरी को लेके घर आ जाती है
( रात 9 बजे )
खाना खाने के बाद रोज की तरह कुछ देर बाते फिर अपने अपने कमरे मे
दिलीप बिस्तर पे लेता हुवा था फोन लेके दिलीप को रहा नही जा रहा था कमाल की बात ये थी सारिका भी अपने हाथ मे फोन लिये हुवे लेती हुई थी
दिलीप फोन करता है सारिका ये देख मुस्कुराते हुवे फोन उठा लेती है
दिलीप – मेरी दोस्त कैसी है आप
सारिका – मुस्कुराते हुवे अच्छी हु तुम कैसे हो
दिलीप – मस्त हु कियुंकी आप जैसी दोस्त पाके
सारिका – हस्ते हुवे अच्छा ऐसी बात है किया
दिलीप – हस्ते हुवे सच्ची आप को ही याद कर रहा था
सारिका – मुझे कियु याद कर रहे थे
दिलीप – अरे आप मेरी दोस्त है तो याद करुगा ही ना
सारिका – हस्ते हुवे अच्छा समझ गई खाना खा लिया तुमने
दिलीप – जी खा लिया और खाते ही जल्दी कमरे मे आ गया
सारिका – हस्ते हुवे कियु
दिलीप – आप से बात जो करनी थी
सारिका – अच्छा
दिलीप – अपने खाना खा लिया
सारिका – हा खा लिया
दिलीप – और मेरे दोस्त का बेटा किया कर रहा है
सारिका – हस्ते हुवे कमरे मे फिल्म देख रहा होगा
दिलीप – किया करे टाइम पास करने के लिये फिल्म देखा परता है मुंड भी अच्छा हो जाता है
सारिका – ये तो है वैसे
दिलीप – आपको एक फनी बात बतानी है
सारिका – हस्ते हुवे वो किया है
दिलीप – हस्ते हुवे आज ना में घर आ रहा था तो मेने देखा खेतो मे कुछ बच्चे बकरी को परेसान कर रहे थे तो बकरी को गुस्सा आ गया फिर सभी बच्चो को मारने दोरि पता है उसके बाद किया हुवा ( दिलीप जोर जोर से हसने लगता है)
सारिका दिलीप को यानी राजू की हँसने की आवाज सुन हस्ते हुवे
सारिका – अरे खुद ही हसे जा रहे हो बताओ तू फिर किया हुवा
दिलीप हस्ते हुवे – बताता हु फिर बच्चे भागने लगे लेकिन एक बच्चा अपना ढीला पैट् पकर भाग रहा था भी बेचारा आगे जाके उसका पैंट ही नीचे गिर गया फिर वो बच्चा नंगु पंगु होगा गया ( दिलीप ये केह जोर जोर से हसने लगता है)
( नोट सारिका नही जानती जिस से वो बात कर रही है उसका अपना बेटा दिलीप है सारिका के लिये दिलीप राजू है )
सारिका राजू की सारी बात सुन सारिका को भी हसी आ जाती है सारिका जोर जोर से हसने लगती है सारिका कि हसने की आवाज दिलीप के कानों मे भी जाती है
तभी सारिका जल्दी से अपना मुह बंद कर के मन मे – मे तो भूल ही गई थी मेरा बेटा सुन लेगा तो किया सोचेगा)
लेकिन सारिका मुह बंद कर के भी हसे जा रही थी
दिलीप बिस्तर पे लेता मन मे – काम हो गया मेरी कहानी काम आई बस ऐसे ही बाते करते रेहना है ताकि मा को मेरी या कहे राजू से बात करने की लत लग जाये
सारिका अपने आप को सांत कर – तुम भी ना बेटा हस हस के मेरा पेट दर्द करने लगा
दिलीप – हस्ते हुवे मे किया करू मे खुद वो सीन देख बहोत हसा था और दूसरी मेरी मा ने कहा था जब मे छोटा था तो ऐसे ही ढीला पैंट पेहन कर चलता था तो कभी कभी मे मेरा पैट भी नीचे गिर जाता था और मे भी नंगु पंगु हो जाता था
सारिका को फिर हसी आ जाती है सारिका मुह बंद कर फिर हसने लगती हो दिलीप को सारिका की हसने कि आवाज फोन से सुनाई दे रहा था
सारिका – हस्ते हुवे बस भी करो अब मुझसे और हसा नही जायेगा
दिलीप मन मे – आपकी हसी सुन दिल को सुकून मिला मा मे टो आप को हमेसा हस्ता हुवा देखना चाहता हु
दिलीप – हस्ते हुवे आप हसी तो मुझे अच्छा लगा मेरी दोस्त हमेसा ऐसे ही हस्ती रहे
सारिका एकदम चुप हो जाती है सारिका को राजू की बात दिल को टच कर जाती है सारिका को अच्छा लग रहा था
सारिका – हस्ते हुवे तुम बहोत अच्छे दोस्त हो मेरे नही बेस्ट दोस्त हो तुम्हे पता है मेरा बेटा भी छोटा था तो उसके साथ भी ऐसा होता था
( असल मे सारिका ने एक दिन दिलीप को बताया था वही कहानी दिलीप ने अपनी मा को सुना दी)
दिलीप – थैंक्स आप ने मुझे बेस्ट दोस्त माना लेकिन अब हमे सो जाना चाहिये दोस्त
सारिका टाइम देखती है तो 12 बज गये थे सारिका पूरी हैरान हो जाती है सारिका मन मे – बता भी नही चला 12 तक बज गये
सारिका – तुम ने ठीक कहा दोस्त गुड नाईट
दिलीप – गुड नाईट मेरे प्यारे दोस्त
फोन कट
सारिका फोन रख बिस्तर पे लेती
सारिका – दोस्त होना अच्छा है पुराने पल याद आ गये जब मे जवान थी मेरे दोस्त थे लेकिन इतना मजा उनके साथ बात कर के भी नही आता था जितना राजू के साथ बात कर के आया राजू फनी है अच्छा लरका भी आज तो उसने बहोत हसाया याद नही इतना कम मे खुल कर हसी थी
दिलीप अपने कमरे मे लेता हुवा बहोत खुश हो रहा था सब अच्छा चल रहा था
दिलीप मन मे – बस ऐसे हि चलते रेहना है धीरे धीरे सावधानी से
दिलीप भी सोचते सोचते आखे बंद कर सो जाता है
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