chapter 1
कहानी एक गाव से सुरु होती है चारों तरफ हरे भरे खेत और बीच मे एक खूबसूरत सा गाव गाव वालो की जिंदगी कैसी होती है आप को पता ही होगा खेती गाय बकरी ये ही है जिनकी वजह से घर चलता है
दूसरी अपने घर परिवार को छोर सेहर मे जाके कमाना जोकि बहोत दुख दाय होता लेकिन किया करे घर चलाने के लिये जाना परता जिसके पति सेहर जाके काम करते है उन्होंने कई महीने साल साल पति के बगैर रेहना परता है सब सेहना परता है गाव मे सुकून होता है लेकिन गाव वालो की जिंदगी आसान नही होती
सुबह होने वाली थी थोरा थोरा अंधेरा था गाव मे बाथरूम गिने चुने लोगो के पास ही होता है जो अमीर है नही तो ज्यादा तर गाव की लरकी या औरते सुबह होने से पेहले जब थोरा अंधेरा होता है बाहर हल्का होने जाते है
सारिका भी उठ कर हल्का होने अपने घर के पीछे थोरी दूर खेतो के पार झारियो मे एक जगह देख बैठ जाती है सारिका की गांड बहोत बरी बाहर निकली हुई थी कोई भी एक बार देख ले तो बिना कुछ किये ही उसका पानी निकल जाये
सारिका आराम से बैठ हल्का कर रही थी और उसकी बरी बाहर निकली साफ दूध जैसी गांड कयामत लग रही थी सारिका घर से कोई काम होता है तब ही बाहर निकलती है नही तो घर मे ही रेहती है
लेकिन जब घर से बाहर निकलती है तो लरके हो या बूढ़े सभी कि नजर सारिका के दो चीजों मे ही ज्यादा जाती है पेहला आगे बरे बरे चुचे पे जो सारी के अंदर होने के बाद भी चुचे के उभार बाहर निकले साफ दिखाई देते है कोई भी ये देख बता सकता है बहोत बरे टाइट खरबुज़ है रस से भरे
दूसरी सारिका की बाहर निकली हुई बरी गांड सारिका के चलने पे दोनों गांड आपस से टकराते रहते है जो लरके या बूढ़े देख कर ही उनका पानी निकल जाता है
सारिका की मोटी कमर लेकर चर्मि बिल्कुल भी नही गेहरि धोरी अगर हवा से या गलती से सारी कमर से खिसक जाये तो एक कामुक् से भरा नजारा सामने आता है जिसे देख किसी का भी दिल करेगा पकर के ढोरी चूम चूम कर लाल कर दे
सारिका खूबसूरती बॉडी सब मे कयामत थी जिसका दीवाना उसका अपना बेटा भी था दिलीप
सारिका सोच करने के बाद आके नहाती है और कमरे मे जाके रेडी होने लगती है
वही हमारा हीरो दिलीप आराम से नींद लेने के लगा हुवा था और सपने मे ही मा की चुदाई किये जा रहा था किया करे बेचारा सपने मे हि मा के साथ कुछ भी कर सकता है रियल मे होने से रहा बेचरा दिलीप भी बात अच्छे से जानता है
दिलीप सपने मे सारिका को घोरी बना के पेले जा रहा था आह मा किया गर्म चुत है आपकी और आपके बाहर निकले बरे गांड आह मजा आ रहा है मेरा लंड आपकी चुत की गर्मी सी जला जा रहा है

सारिका आह मा सिसकिया लेते हुवे आह बेटा बहोत मजा आ रहा है और जोर जोर से चोद अपनी मा को मे झरने वाली हु दिलीप जोर जोर से धक्के मारते हुवे मेरा भी होने वाला है मा दिलीप एक जोर का धक्का मार अपना पानी अपनी मा की चुत मे छोर देता है
दिलीप की नींद खुल जाती है और उसे गिला गिला जांघों पे मेहसूस होता है दिलीप अपना सर पकर कर
दिलीप – अरे नही यार फिर से नही ऐसे तो साला मे मर जाउंगा
दिलीप खरा होते हुवे – हद है साला जिस दिन मा की चुत देखी है साला कई बार सपने मे ही मा की चुदाई करने लगता हु फिर किया सपने मे ही निकल जाता है
दिलीप गीली चड्डी निकाल बेड के नीचे रख देता है
दिलीप अपनी मा के बारे मे सोचते हुवे
दिलीप – मेरी मा किया कमाल है खूबसूरत हॉट भरा बदन इस उमर मे भी फिट है जब भी उन्हें देखता हु साला मेरा लंड फटने लगता है पापा की किस्मत भी कमाल है मा के कितने मजे लिये होगे लेकिन उनकी किस्मत खराब भी है मा को छोर सेहर रेहते है खैर उनको भी दोष नही दे सकता हमारे लिये ही तो गये है और मा बेचारी अकेली अपनी मस्त जवानी को बर्बाद किये जा रही इस बेटे पे भी ध्यान दे देती तो मेरा भी भला उनका भी भला हो जाता पर ऐसा नही हो सकता काश एक मोक्का मिल जाये मा को चोदने का तो मजा ही आ जाये
तभी सारिका दरवाजे पे आते हुवे – दिलीप बेटा उठ जा सुबह हो गई है
दिलीप बाहर आके मा को देखता है सारिका हमेसा की तरह बवाल लग रही थी दिलीप सारिका को देखता ही रेह जाता है दिलीप उपर से नीचे तक हर अंग को देख देता है अंदर कैसा होगा सब अंदर मे

सारिका दिलीप से – अरे फिर कहा खो गया हा
दिलीप होस मे आते हुवे सारिका को देख – कही नही मा बस आप की खूबसूरती मे खो गया था
सारिका जोर जोर से हस्ते हुवे – तु भी ना बेटा रोज यही केहता कभी अलग तरीके से भी मेरी तारीफ कर दिया कर
दिलीप – मन मे अलग तरीके से तारीफ कर तो दु लेकिन बेटा मा को खूबसूरत ही बोल सकता है उसके आगे स्टॉप लग जाता है
दिलीप सारिका को देख – मा नही कर सकता
सारिका दिलीप की पास आके – कियु नही कर सकता
दिलीप सारिका की आखो मे देख – का कियुंकी आप मेरी मा हो यही एक बरा रीजन है नही तो आपको किया लगता है मे हमेसा आप को खूबसूरत ही कियु केहता हु
सारिका दिलीप को गौर से देखती है – ठीक है समझ गई अब जा नहा ले
दिलीप जाते हुवे – ठीक है मा मे जा रहा हु
दिलीप घर मे पीछे हल्का होने जा रहा था
दिलीप – चलते हुवे बस आगे उन्होंने कुछ नही कहा बात खतम कर दी
वही सारिका मन मे – आखिर और किस तरह से मेरा बेटा मेरी तारीफ कर सकता है अरे मे ये किया सोच रही हु चल के खाना बना लेती हु
सारिका खाना बनाने मे लग जाती है
दिलीप झारियो मे हल्का होने बैठ जाता है और फिर मा के बारे मे सोचने लगता है कैसे मा को चोदा जाये कोई तरीका कोई रास्ता तो होगा ही दिलीप मा के बारे मे सोच रहा था तो उसका लंड फिर खरा हो जाता है
दिलीप ये देख – ये कमीना अलग मा के मारे मे सोचा नही की खरा हो जाता है इसे कैसे समझाऊ मा की बिल मे ये नही घुस सकता लेकिन साला समझता ही नही है और मुझे परेसान करते रेहता है
दिलीप हल्का होने के बाद घर के अंदर आता है तो देखता है सारिका खाना बना रही थी दिलीप सारिका को उपर से नीचे अच्छे से देखता है फिर नहाने चला जाता है नहाने के बाद रेडी हो जाता है
खाना रेडी था तो सारिका खाना निकाल दिलीप को आवाज देती है
सारिका – बेटा आजा खाना खा ले लगा दिया है मेने
दिलीप कमरे से बाहर निकलते हुवे सारिका को देख
दिलीप – आ गया मा चलो खाना खाते है
दोनों मा बेटे बैठ जाते है
दिलीप खाना खा तो रहा था लेकिन तिरछी नजर से मा के गेहरि ढोरी को देखे जा रहा था
दिलीप ढोरी को देख मन मे – मा की ढोरी कितनी गेहरि है जब भी देखता हु दिल करता है मा को बिस्तर मे लेता के उनकी गेहरि ढोरी मे रसगुले का रस दाल जिब से चाटु कितना मजा आयेगा ना यार सोच कर ही मेरा खरा हो गया पापा कैसे मा को चोदते होगे या पापा मा से फोन पे गंदी बाते करते है किया मा रात को चुत मे उंगली करती होगी मेने इतना ध्यान नही दिया लेकिन अब रात को देखना पड़ेगा
तभी सारिका दिलीप को देखते हुवे – कहा खो गया खाने पे ध्यान से
दिलीप होस मे आते हुवे सारिका को देख – जी मा
सारिका खाना खाते हुवे दिलीप को देख – बेटा तेरे पापा बाहर रेह कर काम करते है जब तु 12 साल का तब से लेकिन किया तुभी पापा की तरह सेहर जायेगा पैसे कमाने अपनी मा को छोर सादी होगी तो बीवी को छोर कर
दिलीप सारिका की आखो मे देख – मे अपनी खूबसूरत मा को छोर जाने की सोच नही सकता कुछ करुगा ताकि यही रेह कर पैसे कमा के आपका अच्छे से ख्याल रख सकु आपको खुश रख सकु
सारिका दिलीप को देख इमोसनल होते हुवे – सच केह रहा है ना
दिलीप – मुस्कुराते हुवे सच्ची लेकिन आपको मुझे किस्सी देनी होगी
सारिका – मुस्कुराते हुवे देती तो हु रोज
दिलीप – हस्ते हुवे हा लेकिन एक बार देती है मुझे 5 बार चाहिये
सारिका – हस्ते हुवे ठीक है 5 बार मिलेगी किस्सी
( गालो पे किस करने की बात हो रही है )
खाना खाने के बाद दिलीप बाहर अपने दोस्तो से मिलने निकल परता है दिलीप चलते जा रहा था साथ मे मा को कैसे चोदा जाये सोचे जा रहा था ये रोज का था दिलीप रोज सोचता रेहता है कैसे किया करे की मा चोदने को मिले लेकिन कोई उपाय रास्ता मिल नही रहा था
दिलीप रास्ते से होते हुवे जा रहा था सामने रोड साइड थोरा अंदर मे एक पीपल के पेर के नीचे बाबा बैठा हुवा था जिसकी हालात खराब थी फटे हुवे कपड़े पेहने हुवे थे दिलीप बाबा को देखता है और पता नही कियु दिलीप जाकर बाबा के पास बैठ जाता है आस पास कोई नही था
दिलीप बाबा से थोरी दूरी पे बैठा हुवा था और बाबा को बार बार देखे जा रहा था बाबा बहोत भूखा था ये साफ दिख रहा था
बाबा दिलीप को देखते हुवे – ऐसे किया देख रहे हो इस गरीब भूखे बाबा को कियु मे गंदा दिखने मे लग रहा हु इस लिये
दिलीप बाबा की बात सुन बाबा को देख – अरे नही बाबा गरीब तो मे भी हु बस आप से थोरी अच्छी हालत है बस
बाबा दिलीप को देख मुस्कुराते हुवे – अच्छा ऐसा है किया अगर हो सके तो इस गरीब को कुछ खिला पिला दो
दिलीप बाबा की बात सुन अपने पॉकेट को चेक करता है तो 20 रुपये पॉकेट मे थे
दिलीप बाबा को देख – बाबा मेरे पास 20 रुपये है बोलिये किया खाना चाहेंगे इस 20 रुपये मे जो आयेगा आप के लिये ला दुगा
बाबा दिलीप को देखते हुवे – समोसे मिल जाता खाने को तो मजा आ जाता
दिलीप – मुस्कुराते हुवे ठीक है लेकिन आ जाता हु आप 10 मिनट इंतज़ार कीजिये
दिलीप भागते हुवे समोसे लेने के लिये चला जाता है
बाबा दिलीप को जाते देख – कितना अच्छा लरका है दिल मे दया भाव भी है लोगो के लिये लेकिन दिल मे किसी के पाने की चाहत भी है जिसे वो पा नही सकता बेचारा ऐसे ही रहा तो उसकी ऐसी हालत होगी की सादी के बाद अपनी बीवी को खुश भी नही रख पायेगा 2 मिनट के अंदर ही ठंडा पर जायेगा देखते है किस्मत ने उसे मुझसे मिलाया है तो कुछ हो जाये भला उसका
दिलीप भागते हुवे जाता है और गर्म समोसा पैक करवा के लाता है और बाबा को दे देता है फिर पास मे बैठ जाता है
बाबा समोसा लेते हुवे दिलीप को देख – बेटा तुम भी लेलो
दिलीप बाबा को देख – नही बाबा आप खाइये मे तो खाता रेहता हु आप को भूख नही है खा लीजिये
बाबा दिलीप को देखते हुवे मुस्कुरा के – ठीक है जैसा तुम कहो
बाबा समोसे खाने लगते है और दिलीप बाबा को देखता रेहता है
दिलीप बाबा को देख – बाबा मे घर जा रहा हु आप आप अपना ध्यान रखना
बाबा दिलीप को देख मुस्कुराते हुवे – ठीक है बेटा जा समोसे के लिये सुक्रिया
दिलीप खरा होते हुवे बाबा को देख – अरे नही बाबा इसकी जरूरत नही है जरूरत मंद लोगो की मदद करनी चाहिए उसी को इंसानियत केहते है अच्छा अब मे चलता हु दिलीप दोस्तो से मिलने निकल जाता है
बाबा दिलीप को जाते देख – दिल मे किसी के पाने की चाहत है लेकिन उसी दिल मे इंसानियत भी है लेकिन बरा दिलचप् बच्चा है
( दोपहर 1 बजे )
दिलीप अपने दोस्तो से मिल कर घर आता तो दिलीप अपनी मा के कमरे मे जाता है अंदर सारिका आराम से सो रही होती है लेकिन दिलीप अंदर नही जाता और अपने कमरे मे आके बिस्तर पे लेत कर फिर सोचना सुरु कर देता है
दिलीप मन मे – मा को सोच सोच कर उन्हें देख देख कर कई बार मुठ मार देता हु तो कई बार सपने मे ही निकल जाता है मुझे साफ फिल हो रहा है मे कमजोर होता जा रहा हु दूसरी मे लंड को कैसे ही छुटा हु लगता है जैसे जल्दी ही पानी निकल जायेगा ऐसे तो अगर मान लिया मुझे पता है ऐसा नही होगा लेकिन मान देते है मानने मे किया जाता है हा तो मान लिया मुझे मा की चुत मारने को मिल भी गई तो मुझे नही लगता मे 1 मिनट भी ठीक पाऊगा ऐसे मे मा के सामने मेरी बेज़ती हो जाइयेगी उपर से फिर मुझे मा की चुत नही मिलेगी कियुंकी मा को जब मजा आयेगा ही नही तो कियु मेरा लंड लेगी खैर ये तो मे सोच रहा हु मेरा दिमाग सोच रहा है लेकिन सच ये है ऐसा नही होगा साला कियु बेटा मा की चुदाई नही कर सकता
दिलीप सोचते सोचते सो जाता है
साम को उठ दिलीप बाहर फिर दोस्तो से मिलने जाता है बाते करता है और घर आ जाता है
दिलीप देखता है उसकी मा बैठ बर्तन साफ कर रही है लेकिन सारिका के सीने से सारी नीचे गिरा हुवा था तो दोनों बरे उजले चुचे आधे झूलते हुवे ब्लाउस मे कैद दिलीप को साफ दिखाई पर जाते है सारिका को पता नही था दिलीप उसके सामने खरा होकर उसकी चुचे का दिलदार कर रहा है मजे ले रहा है सारिका का ध्यान बर्तन साफ करने मे था
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दिलीप अपनी का के बरे टाइट चुचे को देखता है तो उसका लंड फिर से खरा हो जाता है दिलीप नीचे नजर करता है तो दिलीप को अपनी मा की मोटी जांघे दिखाई देती है सारिका का हर अंग दूध जैसा उजला था दिलीप के गले सूखने लगते है सासे तेज होने लगती है लंड फटने जैसा होने लगता है लंड से पानी का एक बूंद निकल परता है
सारिका थी ही कयामत हर जगह से पूरे कपरो मे भी सारिका को देख किसी का पानी निकल जाये और यहा तो सारिका टांगे फैलाये झुकी हुई थी सीन बहोत कामुक् था किसी के लिये भी और एक बेटे के लिये अपनी मा को ऐसे देखना सब से जायदा कामुक् था
तभी सारिका को एहसास होता है कोई है सारिका अपनी नजर उठा के सामने देखती है तो दिलीप तुरंत कमरे मे तरफ निकल परा था दिलीप कभी भी अपनी मा को सक नही होने दिया की उसका बेटा उसे गंदी नजर से देखता है दिलीप हमेसा चौकना रेगता है
सारिका अपने बेटे को देख पेहले अपने सीने पे सारी रख अपने दोनों बरे खरबूज हो धकती है फिर बर्तन साफ करने लगती है
( रात 9 बजे )
खाना खाने के बाद सारिका दिलीप दोनों आगन मे बैठ बाते कर रहे होते है दिलीप सारिका को देख
दिलीप – मा आपको पापा की याद बहोत आती होगी ना
अपने बेटे की बात सुन सारिका दिलीप को देखती है और फिर अपने मन मे – कोन बीवी अपने पति को याद नही करेगी उनको बहोत याद करती हु लेकिन मे समझ सकती हु उनकी मजबूरी है लेकिन उनके बिना मुझे अपने खोवाइस को दबा के जीना पर रहा है अब तो आदत लगा लिया है उनके बिना लेकिन रात को कभी कभी मुझे उनकी बहोत याद आती है और ( मेरी वो भी उनको बहोत याद करती है ) लेकिन अब लगता है मुझे वो सब नही मिल सकता उमर के साथ वो सब नही कर पाते है आते है तो कभी कभी कर लेते है लेकिन ज्यादा देर ठीक नही पाते मेरी किस्मत मे सायद ऐसे ही जीना लिखा है मुझे लगता है अब मुझे भूल ही जाना चाहिये की ( मेरी बिल मे कभी उनका साप् जायेगा ) पिछली बार आये थे तो एक महीने रहे थे उस एक महीने मे उन्होंने 6 बार ही किया वो भी मेरे केहने पे उस मे भी मुझे मेरी बिल को सांती नही मिलती अब तो मुझे शरीर का सुख मिलने से रहा
दिलीप अपनी मा को सोच मे डूबा देख समझ जाता है की उसकी मा पापा को बहोत याद करती है दिलीप को ये भी अच्छे से पता था उसकी मा सरीर के सुख के लिये तरप रही है दिलीप को अपनी मा के लिये बहोत बुरा लगता है
दिलीप मन मे – अपनी मुठी कस के मुझे आपकी चुदाई करनी थी कैसे भी लेकिन अब मुझे आप को पूरी तरह से पाना है और आप को हर खुशी देनी है अब तक मे हार मान कर सचाई को को समझ चल रहा था लेकिन अब ऐसा नही होगा अब मुझसे जो होगा करुगा आपको पाने के लिये हार नही मानुगा रिजल्ट एंड मे जो निकले
दिलीप होस मे आते हुवे सारिका को देख – मा
दिलीप की आवाज सुन सारिका होस मे आती है
सारिका दिलीप को देख – माफ करना बेटा मे.
दिलीप – मुझे पता है मा आप पापा को मिस करती है
सारिका – मुस्कुराते हुवे हा करती हु लेकिन तुम मेरे साथ मेरे आखो के सामने हो तो यही मेरे लिये बहोत है
दिलीप – मुस्कुराते हुवे हा मे आपका लाडला जो हु
सारिका आगे झुक दिलीप के गालो के दोनों साइड 6 बार किस करने के बाद दिलीप को देख
सारिका – सही कहा तुम मेरे प्यारे लाल हो अब चलो सोते है
दिलीप – मुस्कुराते हुवे आज तो अच्छी नींद आयेगी 6 मीठी किस्सी जो मिली है
सारिका – हस्ते हुवे शैतान कही का
दोनों अपने कमरे मे आके लेत जाते है
दिलीप बिस्तर मे लेत अपने मन मे – मेने ठान तो लिया मा को पाना है लेकिन मा को पाना आसान नही और अगर किस्मत ने साथ दिया भी तो सबसे बरी प्रोबल मे अंदर है मे खुद मा को किया किसी को खुश नही कर पाऊगा दूसरी मेरा लंड को मेरे दोस्तो से भी छोटा है
दिलीप का सर दर्द करने लगता है ये सोच कर
दिलीप – टेंसन मे किया करू ऐसे हो मे कभी भी अपनी मा को सरीर का सुख और जो प्यार खुशी देना चाहता हु वो भी नही दे पाऊगा यहा तक की मेरी लाइफ बर्बाद है
दिलीप को ये सोच बहोत टेंसन हो रहा था बेचारा सोचते सोचते सो जाता है
अगले दिन सुबह 10 बजे
दिलीप खाना पीना खाने के बाद फिर निकल परता है दोस्तो के पास दिलीप रास्ते से होते हुवे जा रहा था तभी दिलीप की नजर फिर पीपल के पेर के नीचे जाती है तो देखता है बाबा वही पे बैठे हुवे है
दिलीप मन – मे बाबा अभी भी यही है गये नही किया रात को यही सोये हुवे थे खैर को जो जाके खुद पूछ लेता हु
बाबा की नजर दिलीप पे जाती है दिलीप को अपनी तरफ आता देख बाबा मुस्कुराते हुवे मन मे – किस्मत फिर दुबारा हमे मिलवा रही है बेटा या कहु किस्मत तुझे मेरे पास भेज रहा है या किस्मत मुझे तेरे पास भेजा है जो भी हो देखते है किस्मत तेरी लाइफ चेंज कर पाती है या नही किस्मत मे किसी के जो लिखा होता है जो उसे मिल ही जाता है लेकिन एक सच ये भी है किस्मत के भरोसे जो बैठा रेहता है उसे जो मिलने वाला होता है वो भी नही मिलता इंसान अपनी किस्मत बदल सकता है बस जिसे कुछ पाने की खोवाईस हो उसे पाने की कोसिस नही करेगा तो कैसे उसे कुछ मिलेगा
आज के लिये इतना ही ![]()
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