माँ ने ज़्यादा तर समय अपनी आँखो को बंद रखा था.पर माँ बीच बीच मे अपनी आँखो खोल कर मुझे धक्के मारते हुए देख कर फिर से अपनी आँखो बंद कर लेती.
माँ ने फिर एक बार पानी छोड़ दिया.इस लंबी चुदाई मे मुझे भी लग रहा था कि अब मेरा भी होने वाला है.
अब मुझे अपनी धक्के मारने की गति बढ़ानी थी.पर माँ को दर्द ना हो,इसके लिए दिल मुझे इसकी इजाज़त नही दे रहा था. अगर दिल की जगह दिमाग़ होता तो अब तक मैं ने अपनी गति बढ़ा दी होती और मेरा वीर्य माँ की योनि मे होता.
मैं बड़े प्यार के साथ आख़िरी झटके भी धीरे धीरे मार रहा था.
आख़िरी झटके वो भी धीरे धीरे मारने के लिए मुझे मेरे दिल ने बहुत मदद की.
मेरे धक्के की गति थोड़ी बढ़ गयी थी शायद उस से माँ ने पता लगा लिया होगा कि मेरा होने वाला .
इस लिए वो अपने हिप्स उठाकर मेरा साथ देने लगी.
फिर एक आखरी धक्के के साथ मेरा वीर्य निकल गया.
मैं ने अपना वीर्य माँ की योनि मे डाल दिया.
मेरा वीर्य योनि मे महसूस कर के माँ ने आँखो खोल दी और मैं माँ के उपर गिर गया.
थोड़ी देर मैं माँ के उपर ही रहा.
फिर माँ नॉर्मल हो गयी.
अब माँ को अपने बदन मे दर्द महसूस हो रहा था.
क्यू कि मैं अभी तक माँ के उपर था
मुझे इस बात का अहसास हुआ .मैं माँ के उपर से अलग हो गया.
मैं ने अपने पेनिस को माँ की योनि से बाहर निकाल लिया.
मेरा पेनिस तो माँ की योनि से बाहर आने को तैय्यार नही था.
उसे हमेशा के लिए आखिर एक घर मिल गया था और वो वही रहना चाहता था.
दिल पर पत्थर रख कर पेनिस को बाहर निकाल लिया.
मेरे पेनिस पे खून लगा हुआ था.
माँ के योनि पर भी खून लगा हुआ था.
तब माँ ने कहा “अंदर ही रहने दीजिये कुछ देर अच्छा लग रहा था” और शर्मा गई फिर मैंने फिर मेरा लिंग अंदर डालकर उनके ऊपर पडा रहा उनको किस करता रहा
और साथ मे उनके स्तन के साथ प्यार से खेलता रहा हम एक दूसरे की तरफ देखकर हस रहे थे माँ को अब उतना दर्द नही हो रहा था
उनके बदन के पसीने की गंद से मेरा पेनिस फिर हार्ड होने लगा माँ मेरे पेनिस का कड़ापन महसूस करके हैरत से बोली
“ये क्या फिर से”कहते हुए मेरी तरफ हैरत और अभिमान से देखने लगी उनकी उस नजर से मुझे फिर से ताकत मिली और मैं फिर धीरे धीरे अपना लिंग अंदर बाहर करने लगा अभी कुछ देर पहले मैं अंदर झड़ा था इसलीए मेरे वीर्य से पूरी योनि अछि तरह चिकनाई युक्त हो गई थी माँ ने प्यार भरे गुस्से में मुझे देखा और धीरे से कहा
“ये क्या आप फिर शरू हुये, क्या अब भी दिल नही भरा”
माँ के ऐसे कहते ही मुझे अपने ऊपर बहुत गुस्सा आया कि माँ को कितना दर्द हुआ था और मैं उन्हें आराम देने के बदले फिर सेक्स के बारे में सोचने लगा मैने झटसे अपना लिंग बाहर निकाला और माँ के ऊपर से उतर के अलग हुआ
मुझे यू अपने उपरसे हटते हुए देखकर माँ को हैरत का झटका लगा
उन्होंने मेरा हाथ पकड़ कर कहा
” क्या हुआ आप हट क्यों गये”
मैंने कहा “सॉरी जान मुझसे गलती हुई तुम्हे इतना दर्द था और मैं सिर्फ सेक्स के बारे में सोच रहा था मुझे माफ़ करो मुझसे गलती हुई”
माँ ने हस कर मेरी तरफ देखा और कहा
“आप मुझसे इतना प्यार करते है, मैं आज बहुत खुश हूं अपने आप को बहुत भाग्यशाली समझती हूं जो मुझे आप पति के रूप में मिले, और मुझे इतना दर्द नही हो रहा है, मैं तो मजाक कर रही थी, मेरी भी इच्छा थी आप मुझे प्यार करते रहे, तो मुझे यू छोड़ कर मत जाइये”
मैने माँ की आंखों में अपने लिए बेइंतहा प्यार देखा मेरी आँखों मे खुशी के आंसू आगये मैं माँ लिपटकर उन्हें पागलो की तरह चुमने लगा माँ भी मेरा साथ देने लगी मेरा ढीला पड़ा लिंग फिर हार्ड हो गया माँ की दोनो थाइस मेरी कमर से लिपट गई मैने अपना लिंग माँ की रसभरी योनि में फिर से घुसा दिया माँ के मुह से आनंददायक सिसकारी निकल गई मैं फिरसे माँ की चुदाई करने लगा माँ और मैंने का सेक्सुअल पार्ट्स एकदम चिपक चुका था… पूरा पेनिस माँ की योनि में घूसा बैठा था…
माँ के फेस से अब साफ़ दीख रहा था के उनको भी सेक्स करने में खूब मजा आ रहा है..
रेगुलर धक्को से माँ के हिप्स बिस्तर में धस चुके थे..उनके सेक्सी पायल पहने लेग्स कभी तो मेरे हिप्स पर होते,,, तो कभी हवा में ,,, और कभी मैंने उनको अपने शोल्डर पेर रख कर योनि को चोदता.,,, मेरे धक्कों के साथ साथ माँ के पायल की छन छन साउंड भी स्लो स्लो सुनाई देती….. जिस जगह माँ के हिप्स थे वहां पर से मैट्रेस भी नीचे घुस गया था..
मैं बिना रुके धक्के पर धक्के लगा रहा था. लगा के शायद मेरा पेनिस बहुत जल्दी पाणी छोड़ देगा, क्योंकि ज़िंदगी मे पहली बार किसी योनि का दर्शन किया था वह भी अपनी खुद की माँ की मगर पूरे बीस मिनट हो चुके थे और अब भी रेगुलर मेरा पेनिस माँ की योनि की गहराई नाप रहा था.. मैं फकिंग के साथ साथ कभी माँ के स्तन को चूसता तो कभी लिप्स को सक करता..
मेरे फेस के एक्सप्रेशन चेंज हो रहे थे.. मैं अब झड़ने वाला था.. तभी कोई दस धक्कों के बाद मैं गुर्राने लगा..ओर मैंने माँ को अपने बदनसे इस तरह से चिपका लिया के मानो हवा भी पार न हो पाये. आह आह आए ऍम कमिंग आए ऍम कमिंग… .. अपने पूरे पेनिस का पाणी माँ की योनि में डाल दिया….माँ भी साथ साथ चीख उठि .. आआह में भी झड़ रही हु … आई ऍम कमिंग टू. ओह माँ मर गई. आह झड़ने के बाद मैं माँके ऊपर ही ढेर हो गया.. माँ के स्तन में मेरा सर पड़ा था … मैं बहुत थक चुका था मगर पेनिस अब भी योनि में ही घूसा बैठा था… दस मिनट बाद हमदोनो के बदन अलग हुये.. मैं माँ के साइड में लेट गया…
मेरी नज़र माँ पर गई तो देखा .. वो बेड पर टाँगे खोले पोजीशन में पड़ी थी… ऐसा लग रहा था के जैसे दोनों सेक्सी लेग्स दो ऑवर की रेगुलर चुदाई के बाद बंद होने का नाम ही नहीं लेंगे. माँ का बदन पसीना पसीना हो रहा था.. माँ के पसीने की बूंदे पूरे मिल्की बदन पर चमक रहीं थी. बाल गीले हो कर शोल्डर्स और फेस से चिपक गए थे… मैंने ने खूब जम कर लिप्स को चूसा था, लिप्स का साइज खुल कर डबल हो गया था.. पूरे शरीर पर लव बाईट थे. पूरे बदन का कलर वाइट से पिंक हो गया था. मैंने दोनों टाँगो को और ख़ौल दिया और योनि के दर्शन किये. ओह माय गॉड. माँ के पिंक योनि का कलर बदल कर पूरा रेड हो गया था… बिग पेनिस से चुदने के वजह से योनि के लिप्स खुले के खुले ही रह गए थे.. योनि के अन्दर कई इंच तक साफ़ देखा जा सकता था.. मेरा ख़ूनमिश्रित वीर्य भी माँ के योनि से रिस रिस के बाहर आ रहा था.
माँ बेहाल बेड पर पड़ी थी.. ऐसा लग रहा था मानो किसी ने उनका रेप किया हो… माँ के योनि के नीचे की चादर पूरी गीली और लाल हो चुकी थी ,,माँ चुदाई के दोरान ४-५ बार झड़ गई थी और सारा पाणी चादर पर ही बह गया.. फिर हम दोनो बारी बारी
से बाथरूम में जाकर फ्रेश होकर आगये बेडसे बेडशीट बदल कर दोनों बेसूध गर्म ब्लैंकेट मे बेड पर पड़े थे. फिर मैं ने माँ को अपने बदन से चिपका लिया और नींद की वादियोमे खो गये
मैं हितेश आज हमारी शादी को आठ साल हो गये है मेरी माँ जो आज मेरी पत्नी है शादी के दो साल में उन्होंने एक प्यारी बेटी को जन्म दिया हमने उसका नाम दीया रखा है बहोत प्यारी है बिल्कुल अपनी माँ की कार्बन कॉपी बिल्कुल वही नैन नक्श वही हँसी आज वह नर्सरी में पढ़ती है नाना नानी अहमदाबाद छोड़कर मुम्बई में रहते है पर हर महीने दस दिन हमारे साथ रहते है या हम उनके पास जाते है मेरे नाना ने जो निर्णय लिया था हमारी फैमिली के लिए उसकी वजह से हम सब बहुत खुश है माँ पहले से ज्यादा खूबसूरत हो गई है उम्र मानो रुकसी गई हो हमारी सुहागरात के बाद दूसरे ही दीन मैने अपने ऑफिस में पूरे स्टाफ को अपनी शादी के बारे में बताया और संडे को सबको शादी की दावत पे बुलाया रविवार पूरा स्टाफ हमारे घर पर आया सबने हमे शादी की मुबारकबाद दी इतनी सुंदर पत्नी मिलने पर मेरे दोस्तोने मुझे मुबारकबाद दी सबने मेरी पत्नी की खूब तारीफ की सचमुच मंजू शादी के ड्रेस में क्या खूब लग रही थी, मेरी तो नजर ही हट रही थी, नाना नानी भी आये थे, वह हमें खुश देखकर बहोत खुश हो गए, आखिर बच्चो की खुशी में ही सब की खुशी है, हनिमून के लिए हम माउंटअबु गये पूरे बिस दिन के लिए, माँ बहोत शर्मा रही थी पर हनीमून के लिये ना कह रहि थी, पर मेरे कारण मान गई वह बिस दिन हमारी जिंदगी के सबसे खूबसूरत दिन थे, हम सिर्फ एक दूसरे में ही खो गये थे जैसे सारी दुनिया मे सिर्फ हम दोनों ही है दूसरा कोई नही है पूरा माहौल रूमानी सा हो गया था, हम भूल गए है कि हम कभी माँ और बेटा थे, अब हम सिर्फ दो प्रेमी थे और कुछ नही.मैंने अपनी पूरी जिंदगी सिर्फ मंजू को चाहा है वही मेरी जिंदगी है मेरा प्यार है मेरे सपनों की रानी सब कुछ वह ही है
मंजू
आज हमारी शादी को आठ साल हो गए है पर लगता है कल की बात हो जब माँ ने मुझे हितेश के साथ शादी के लिये पूछा था मेरे कानों पर यकीन ही नही था कि माँ ऐसा भी पूछ सकती है कि माँ अपने ही बेटे के साथ जिसे उसने ही जन्म दिया हो पूरे बिस साल पाल पोसकर बड़ा किया और उस बेटे के साथ ही शादी करे कोई सोच भी नही सकता ऐसा कभी हुआ है ना खभी सुना है मैं पूरी तरह शॉक हो गई थी दो दिन तो मेरी समझ मे ही नही आया कि मैं क्या कर रही हु क्या नही उसपर मैं ने बहुत सोचा पर जब मेरे रुम में रखे हितेश और मेरे फोटो को देखा हस्ता मुस्कुराता हितेश कितना सुंदर और प्यारा लग रहा था बिल्कुल अपने पापा पर गया था वही रंगरूप शरीर की बनावट एक लड़की की नजर से देखा तो कोई भी लड़की जैसा जीवन साथी चाहती है जैसा अपने सपनो का राजकुमार चाहती है हितेश वैसा ही बांका सजीला जवान था जिसके साथ कोई भी अपना पूरा जीवन बिताना चाहेगी उसकी बाहो में सुकून ढूंढेगी आज मुझे हितेश के पिता सतीश की बहुत याद आई मैं उन्हें बहुत प्यार करती थी उनके बिना मैं किसी और के बारे में सोच भी नही सकती इसी लिए मैंने दूसरी शादी भी नही की मेरे लिये उनकी यादें ही बहोत है हमारा साथ सिर्फ चार साल का रहा पर उन्होंने मुझे इतना प्यार दीया की वही प्यार पुरी जिंदगी के लिए काफी था फिर उनकी आखरी निशानी हितेश के रूप में मेरे पास थी मुझे ऐसा लगा जैसे हितेश के रूप में वही मेरे साथ है उसको पालने पोसने मैं मैं अपने आप को पूरी तरह भूल गई कि मेरी भी कुछ इच्छाये थी कुछ अरमान थे जो हर पत्नी के होते है कि उसे अपने पति का प्यार मिले दिनभर तो काम मे मैं बिजी होने पर सब भूल जाती पर रात में जब बेड पर अकेली होती तब उनकी बहुत याद आती और मन बहुत व्यकुल हो जाता खुद को अकेला पाती फिर हितेश का मुस्कुराता चेहरा सामने आता और मैं सब भूल जाती और आज माँ ने यह क्या पूछ लिया घर की खुशी के लिए हम सब की खुशी के लिये मुझे हितेश के साथ शादी करनी होगी पर यह कैसे मुमकिन है क्या हितेश यह मानेगा पर उसके पहले तो मुझे अपने आप से लड़ना था दिमाग कह रहा था कि यह गलत है एक माँ और बेटे के बीच यह नही हो सकता कितना पवित्र रिश्ता है माँ और बेटा और हम यह क्या कर ना चाहते है दिल कहता मुझे भी खुश रहने का हक है तकदीर मुझे दूसरा मौका दे रही है किसी को दूसरा मौका नही मिलता जो इच्छाये आकांक्षाए अधूरी रह गई थी शायद किस्मत को मुझ पर रहम आया था मेरी इतने सालों की तपस्या का फल मुझे मिलने वाला है और मैं उसे ठुकरा रही हु मुझे हितेश जैसा दूसरा जीवनसाथी नही मिलने वाला और मैंने यह भी सोचा कि मेरे मम्मी पापा अब बूढ़े हो गए है और कितने दिन जियेंगे कल जब हितेश की शादी होगी पता नही बहु कैसे मिलेगी मैं जानती हूं हितेश मुझसे बहुत प्यार करता है पर बीवी और माँ के बीच मे पीसकर रह जायेगा बेचारा आखिर दिल और दिमाग की जंग में दिल जीत लिया पर सवाल फिर भी था हितेश मेरे बारे में क्या सोचेगा उसके खुद के अरमान होंगे सपने होंगे
दोस्तो
मैंने इस कहानी में अन्य लेखकों की तरह एक भी अपशब्द नहीं लिखा और यकीन मानिए उस रूपसी से संभोग के दौरान भी नहीं कहा क्योंकि मैं उसे प्रेम करता था, वह मुझसे प्रेम करती थी. मैं उसकी और उसके प्रेम दोनों की पूजा करता था. मेरे लिए उसका प्रेम आज भी पवित्र और निर्मल है इसलिए उसके और उसके प्रेम के लिए अपशब्द या यूं कहें गंदे शब्द उपयोग करना उस देवी के प्रेम की तौहीन होगी.
यदि आपको उन अश्लील शब्दों के बिना इस सच्ची कहानी में मजा ना आया हो तो मैं आपसे क्षमा प्रार्थी हूं क्योंकि मैं आपके झूठे आनन्द के लिए उस देवी के प्रेम को अश्लील शब्दों से गंदा नहीं कर सकता.
वह मुझ पर लुटी थी मैं उस पर लुटा था यही इस कहानी का सार था!
दोस्तो, एक औरत भगवान से ज्यादा भरोसा करके अपने आपको किसी मर्द को सौंपती है. या यूं कहें कि अपना सर्वस्व लुटाने को समर्पण करती है. उस समर्पित लड़की या महिला के लिए या कामक्रीड़ा के दौरान उसको कहे जाने वाले रंडी, कुतिया, छिनाल, रांड जैसे शब्द प्रयोग करके आप उस उस महिला का शरीर तो पा सकते हैं लेकिन आत्मा या पूर्ण समर्पण नहीं. यदि वो आपके भरोसे की कद्र करती है तो आप भी उसके समर्पण की कद्र करें.
मैं तेरी फाड़ दूंगा, चोद दूँगा, चोद चोद कर भोसड़ा बना दूँगा जैसे शब्दों से आप केवल झूठी मर्दानगी का अहसास करते हैं क्योंकि चमड़ी से चमड़ी कभी नहीं कटती या फटती है, मानव लिंग मूत्र व सम्भोग तो अवश्य करता है परंतु चीर फाड़ नहीं.
और ये आप बार बार मनगढ़ंत कहानियों में लिखते हैं कि आपका लिंग अंदर जाते ही वो रोने लगी, चिल्लाने लगी उसके आँसू आ गए तो समझिए या तो वो जबरदस्ती है या झूठ है. औरत केवल जबरदस्ती में रोती है, रजामंदी में तो प्रेम के हिलौरें खाती है.
कुछ लोग लिखते हैं कि वो मेरा लन्ड देखते ही चुदने को तैयार हो गयी… भाइयो, यूँ देख कर कोई औरत तैयार होती हो तो सबसे ज्यादा मौज सड़क पर मूतने वाले की हो जाती.
कुछ लिखते हैं मेरे कमरे में आते ही उसने साड़ी उठा दी या सलवार खोल दी या यूं बोली- चोद ले मेरे राजा!
तो आपकी गलतफहमी दूर कर दूँ कि मजबूरी में वेश्यावृत्ति करने वाली हिंदुस्तानी औरत भी कभी पहल नही करती.
और एक भ्रम जो कुछ लोग फैलाते हैं कि उसकी तो इतनी टाइट थी मेरा अंदर ही नहीं जा रहा था, दोस्तो, यह गलतफहमी निकाल दीजिये, एक बार योनि गीली होने के बाद आसानी से लिंग को अंदर ले लेती है.
एक और देखा देखी सभी गुदा यानि गांड मारने के शौकीन हुए जा रहे हैं और औरत का चित्रण भी ऐसे पेश करते हैं कि वो तो गांड मरवाने को तैयार ही बैठी रहती है.
गुदा मैथुन पूर्णतया अप्राकृतिक है व अपराध की श्रेणी में आता है. और ना ही किसी औरत को गुदा मैथुन से मजा आता है अपितु इससे उसे तकलीफ ज्यादा होती है, और फिर भी यदि आपको यकीन ना आये तो
गुदा यानि गांड तो आपके पास भी है एक बार प्रयोग करके देख लो खुद समझ आ जायेगा.
और यदि केवल गांड मारने से ही सम्भोग होता तो महिला की जरूरत ही क्या थी, ये तो पुरुषों में सम्भव था.
आप यदि अपनी महिला साथी से प्यार करते हैं तो क्यों उसे बाजारु बनाकर पेश करते हैं. औरत इस कुदरत की सबसे अनमोल और सुंदर कलाकृति है, उसे प्यार की जरूरत है. रही बात कुछ लोगों के झूठे मर्दानेपन और सुपरमैन बनने के झूठ की… तो मैं केवल ये कहना चाहूंगा कि यदि औरत अपनी वाली पे आ जाये तो एक औरत एक साथ कई मर्दों को संतुष्ट कर सकती है लेकिन एक मर्द एक औरत को भी सन्तुष्ट नही कर सकता.
मेरा आप सभी से निवेदन है कि अपनी महिला साथी को प्रेम दें इज़्ज़त दें और उसके विश्वास को कभी ना तोड़ें और ना ही उसे बाजारू बनाने की कोशिश करें.
दोस्तो यह कहानी यही ख़तम होती है आपको यह कहानी कैसे लगी जरूर बताना यह कहानी मूल लेखक ने आधे में ही छोड़ दी थी मैन इसे अपने तरीकेसे विस्तारित किया हैउसमे मैं कितना सफल हुआ हूं यह तो आप जैसे कद्रदान ही बता पाएंगे अच्छे हो या बुरे कहानी के बारे में अपने विचार जरूर व्यक्त करें
दोस्तो उन्हें उनके विवाहित जीवन के लिये शुभ कामनाएं दे
आपका अपना
……….सतीश

