मिस्टर & मिसेस पटेल (माँ-बेटा:-एक सच्ची घटना) | Update 39

मिस्टर & मिसेस पटेल (माँ-बेटा-एक सच्ची घटना) Maa aur Bete me Pyaar
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और तभी वह मिरर के थ्रू उनके कंधो के पीछे से मुझे उनकी तरफ आते हुए देखि.
वह मुझे मिरर में देखते हुए एक प्यारी स्माइल के साथ मांग में मेरा नाम का सिन्दूर लगायी.
सिन्दूर लगाते हुए उनके आँखों में एक अद्भुत प्यार और इमोशन नज़र आया.
वह उसमे मेरी मंगल कामनायें और हमारे मैरिड लाइफ की परिपूर्णता के लिए एक निःशब्द वार्ता जैसे की भगवन को बता दी.
मेरा मन इस में एकदम उनके लिए, उनके सारी ख़ुशी के लिए एक निःशब्द प्रतिज्ञा से भर गया.
मैं धीरे से उनके पीछे जाकर खड़ा हो गया.
माँ मिरर के थ्रू मुझे देख रही है और थोड़ा थोड़ा ब्लश कर रही है.
मैं भी प्यार से हासके उनको देख रहा था. हम एक्चुअली बहुत कम बातें कर रहे थे.
एक दूसरे को हम जानते है.
एक दूसरे को बचपन से देखते आरहे है.
सो हमारे बीच कोई नयी चीज़ नहीं है.
इस लिए शायद बात चित कम कर रहे है,
केवल हम हमारे इस नयी रिश्ते को मेहसुस कर रहे है,
इसको ठीक तरीके से पालन करने की तैयारी कर रहे है,
और हमारे बीच छुपे हुये एक दूसरे के लिए एक अद्भुत प्यार को डिस्कवर कर रहे है.
और उसकी ख़ुशी से बंद होकर हम एक दूसरे के नज़्दीक आरहे है.
मैं माँ को देखते देखते पीछे से हाथ निकल के वह केस को आगे ले गया और उनके सामने पकड़के रखा.
माँ मेरे हाथ की तरफ देखि और हाथ में एक केस देख के थोड़ा सरप्रीईसड हो गयी और आँखों में एक सवाल लेकर नज़र उठाकर मिरर के थ्रू मेरी तरफ देखि.
मैं उनके जवाब में बस केवल हास्के धीरे से बोला
“तुम्हारे लिये”
मा समझ गयी की कोई ज्वेलरी होगा.
तो उन्होंने मिठी सी एक स्माइल देकर हाथ बढाकर मेरे हाथ में पकड़ा हुआ वह बॉक्स खोलने गयी.
फिर माँने नज़र उठाकर एकबार प्यार से मेरी तरफ देख के एक हाथ से वह बॉक्स ओपन किया.
उनके अंदर एक डायमंड नेकलेस था.
बहुत भारी और चौड़ी टाइप नहि.
स्लिम पर स्टाईलिस्ट. गोल गोल बॉल जैसे डायमंड स्टूडेड बिड्स का हार टाइप का है उनके नीचे एक लव साइन पेंडंट है जो बहुत सारे डायमंड और अलग अलग जेम्स स्टूडेड था. और जैसे ही माँ उस बॉक्स को ओपन किया वह एकदम सा सरप्रीईसड हो गयी और उनके मुह उस एक्सप्रेशन को प्रकट करते हुए थोड़ा खुल गया.
मैं उनके सामने वह बॉक्स पकड़के उनके पीछे खड़ा हु.
मेरी सांस उनके गर्दन को छु के जा रहा है.
माँ अपने राईट हैंड को लूस मुठ्ठी करके अपने खुली हुई होठो के पास लेकर थंब नेल को होठ को स्पर्श करवाके और मुठ्ठी से चिन को बीच बीच में टच करवाके कुछ पल उस नेकलेस को देखते रहि.
उनके मन में बहुत कुछ चीज़ों का तूफ़ान चल रहा होगा जरुर.
मैं केवल उनको ही देखे जा रहा हु.
कुछ पल बाद माँ आँख उठाके मेरी तरफ एक अस्चर्य और अद्भुत प्यारी नज़र से देखते रहि.
मैं उस आँखों में उनके मन की सारी बात पड़ ली.
फिर भी मुझे ऐसे देख रही थी इस लिए हास्के पुछा
“क्या”
माँ कुछ न बोलकर केवल सर हिलाकर और आँखों में एक बार धीरे से पलक झपक के बोली की कुछ नहि.
लेकिन में जनता हु वह बहुत कुछा बताके गयी उन नज़रों से. मैं फिर बोला
“पसंद नहीं आया”
माँ मुझे देखते रहि. जैसे की वह बोल रहे है “पागल..मुझे केवल पसंद नहि, बहुत पसंद है”,
लेकिन वह मुह से बोली की
“बाहुत”
मै हसकर धीरे से बोल
“पहनोना”
वह बस मुस्कुरा उठि और मेरे आँखों में एकबार देख के फिर नज़र झुका के फुसफुसाकर बोली
“आप पहना डिजिये”
मै मुह पे एक चौड़ी स्माइल लेकर वह बॉक्स से नेकलेस को निकल के माँ के गले में पीछे खड़े होकर पहना दिया.
माँ नज़र उठाकर मिरर में देखि पहले मेरे से नज़र मिला फिर नेकलेस को देखते देखते ब्लश कीया.
और अपने हाथ उठाके पेंडंट को सीधा करके उनकी गोरी और मुलायम छाती के ऊपर , क्लीवेज के लाइन पे प्यार से रखि.
मैं उनको देखते हुए उनके शोल्डर पे मेरा चिन टच करवाके धीरे से बोला
“बहुत सुन्दर दिख रही हो…और…”
बोलके में चुप हो गया. माँ मेरी तरफ देखते हुए हस पड़ी और आँखों में बहुत सारा प्यार लेकर धीरे से बोली
“और क्या”?
मै उनको देखते हुए कांन के पास फुसफुसाकर बोला
“और बहुत सेक्सी”
मा ब्लश कर के नज़र झुका ली और एक प्यारी अदा से बोली
” धत”
मै हॅसने लगा और मेरी गर्दन उनके कन्धा के ऊपर से थोड़ा आगे बढाके मेरा चेहरा उनके चेहरे के पास ले जाकर उनको किस करने गया तो माँ अचानक एक प्यार भरी अदाओ और मिठी सी आवाज़ से बॉली
“उऊंम्मम्…..पसीना है, जाइये जाकर नहाइये पहले”
मै माँ की यह बात सुनकर मन ही मन उछल पडा.
हाँ ..मेरा बदन पसीने से भरा हुआ है.
एक तो नहाया नहीं अभी तक.
फिर इस गर्मी में मार्किट जाकर आया.
उस के लिए पसिना तोह है, लेकिन माँ ने जिस तरह कहा इसमें में और खुश होगया.
मुझे उनके पास आने देणे में कोई हिचकिचाहट नहीं है.
इस लिए
‘पेहले नहा लीजिये’
बोलके इशारा कर दिया की आजआज वह खुद को मेरे पास समर्पण करने के लिए एकदम तैयार है.
मैं माँ को, मेरी मंजु को मेरी बीवी को बस देखता ही रहा.
‘जाइये न, नहा लीजिये’
मेरे होठो पे मुस्कान फैल गई ‘ जो हुकुम सरकार” बोल कर में बाथरूम की तरफ मुड गया.
‘रुकिए!’
माँ की कोमल मधुर आवाज़ ने मेरे कदम रोक दिये. मुझे ऐसा लगा जैसे मेरे कानों में मिश्री घोल दी गई हो.
ये मधुर आवाज, जो कभी मुझे लोरिया सुना के सुलाया करती थि, मुझे अच्छे बुरे का फरक समझाती थि, ये मधुर आवाज़ अब मेरी धरोहर हो गई है.
अब ये मधुर आवाज़ हर पल मेरे पास रहेगि, हर पल मेरे कानों में मिश्री घोलेगी.
कितना सकून मिलता है मुझे इस मधुर आवाज़ को सुन कर.
मैने मुड के देखा तो मेरी माँ मेरे लिए एक नया नाईट सूट निकाल रही थी.
वो धीरे धीरे चलति मेरे पास आई, उसकी पायल की रुनझुन मेरे जिस्म में संगीत की लहरें पैदा कर रही थी.
मेरा सारा धयान उस रुन झुन में चला गया … वो रुन झुन जैसे कह रही थी … ये संगीत आपका इंतज़ार कर रहा है … जल्दी नहा कर आइये.
मा जैसे ही मेरे करीब आई, मेरे साँसों में उसंकी सुगंध फिर से बसने लगी और मेरा पेनिस इतना अकड गया की मेरे कपड़ों में उठा हुआ उभार जरूर माँ की आँखों ने देख लिया होगा.
मा ने मुझे वो नाईट सूट पकडाया, नाईट सूट पकड़ते हुए जब उनके कोमल उँगलियों ने मेरे हाथ को छूआ तो पूरा जिस्म झनझना गया … शायद यही हालत माँ की भी थी.
हाथ में नाईट सूट पकडे में उनकी मोहिनी सूरत का रसपान करने लग गया, शर्म के मारे माँ ने नजरें झुका ली और फिर एक कोमल ध्वनी मेरे कानो में पडी
“जाइये न अब”
मै जैसे सपनो की दुनिया से वापस लोटा और मुस्कराता हुआ बाथरूम में घुस गया तब भी कनखियों से में माँ को ही देख रहा था.
उनके होठो पे एक मुस्कान थी जिसकी चंचलता मुझे अपने और खिंच रही थी.
खुद को सँभालते हुए में बाथ रूम में घूसा पर दरवाजा खुला ही रहने दिया.
मेरी ये शरारत माँ भाँप गई और खुद ही दरवाजा बंद कर दिया … शायद उनके होठो ने कुछ कहा
‘बहुत बेशर्म बन गए हैं आप’
कब में मन में सोचने लगा बेशरमी तो अभी दिखानि है … में फ़टाफ़ट नहाने लगा और आने वाले क्षणो के बारे में सोच कर पुलकित होने लगा … जो अनुभुति मुझे हो रही थी , शायद या यक़ीनन माँ को भी हो रही होगी … जिस तरहा मेरे दिल की धड़कन क़ाबू में नहीं हो रही थी … वही हाल माँ का भी होगा.
वो पल अब दूर नहीं था जब माँ मेरी बाँहों में होगी … मेरी बीवी का रूप ले कर … मेरी माँ मेरी बाँहों में होगी और में मेरी माँ को हर जगह छू सकूँगा … ये अहसास वो था जिससे में शब्दों में शायद ही बयान कर पाउँगा क्या सोच रही होगी वो … शायद यही की आज हम एक ऐसे रास्ते पे निकल पडेंगे जो हमारे प्यार को और भी परवान चढ़ायेंगा.
हीतेश अंदर नहाने चले गए है, खाना तो में तैयार कर चुकी थि, और कोई काम था नहीं और खिड़की में आकर खड़ी हो गई . बाहर निचे लोग इधर से उधर जा रहे थे, किसे क्या पता था की आज एक माँ और उनके बेटे की सुहागरात है.
ये ख्याल आते ही मुझे कुछ होने लगा. कितना अजीब लगा था उस वक़्त जब माँ ने मुझे हीतेश से शादी करने को कहा था. कितना मुश्किल था मेरे लिए हा कहना. पर इतना में जानती थी की हीतेश मुझे बहुत प्यार करता है. मैंने उसकी आँखों में अपने लिए वो भाव कई बार देखे थे, पर उसने कभी ऐसी कोई हरकत नहीं की जिससे मुझे लगे की ये प्यार नहीं वासना है. शायद ये ही सबसे बड़ा कारन था की में शादी के लिए तैयार हो गई
दिल से हीतेश को अपना पति मान लिया है पर फिर भी कहीं दिल के किसी कोने में एक डर सा समाया हुआ है कितनी बड़ी हु में उम्र में उससे, आज नहीं तो कल ये फरक दिखने लगेगा, तब क्या होगा. क्या में उनका पूरा साथ दे पाउँगी. आज की ख़ुशी के साथ साथ आने वाला कल मुझे डरा रहा था.
ये डर कितना बेबूनियाद है में अच्छी तरहा जानती हु, क्यूँकि हमारा रिश्ता प्रेम के धागो से जुड़ा है, पर न जाने कयूं मेरे मन में एक उथल पुथल फिर भी मची रेहती है.
कीतने शरारती हो गए है, कैसी कैसी हरकतें करने लग गए है.
ओह वो चुम्बन अब भी मेरी साँसों में घुला हुआ है. अगर मम्मी का फ़ोन नहीं आता तो न जाने हम कितनी देर तक……. छि… छि….. ये क्या सोचने लग गई में.

अब मुझे खुद को पूरा बदलना है एक माँ की जगह एक पत्नी का रूप लेना है पर क्या वो माँ मर जायेगी क्या में सच में उस माँ का गाला घोट पाउंगी और सिर्फ एक पत्नी बन के रह पाउंगी कुछ समझ नहीं आ रहा … शायद वक़्त के हवाले सब करना पड़ेगा … वक़्त ने हमारी शादी कारवाई है और इस समस्या का हल भी वक़्त ही निकालेगा.
कतना तड़प रहे हैं मुझे छूने के लिए और में — क्या में भी … उफ़ … शायद हाँ— आज कितने बरसों के बाद … कोई मुझे एक औरत समझ के प्यार करेगा — कोई कहाँ … मेरा अपना ही बेटा … जो अब मेरा पति बन चुक्का है.मम्मी भी कैसे कैसे इशारे कर रही थी … की अब में जल्दी माँ बन जाऊ … शायद इस्लिये क्यूँकि मेरे पास वक़्त कम है … उम्र जैसे जैसे बढ़ती है … माँ बन्ने में कठिनाइयँ आने लगती है. … क्या सब कुछ ठीक होगा … है … ये क्या सोच्ने लग गई में.
अभि तो हमें … उफ़ … कैसे कर पाउंगी … जब वो मुझे … न … कितनी शर्म आ रही है … दिल कितना जोरों से धड़क रहा है.
क्यों एक नयी सी उमंग दिल में पैदा हो रही है … आज में फिर से सुहागन बन गई हु … फिर से सुहागण- शायद ही कोई ऐसी औरत होगी … जो अपने ही बेटे की सुहागन बनती होगी … लेकिन इन बातों को सोचने से अब क्या … अब तो में सुहागन बन चुकी हु … ये प्यारे प्यारे रंग जो मेरी जिंदगी से चले गए थे- हीतेश उन्हें फिर मेरी जिंदगी में ले आये. हीतेश मेरा बेटा … मेरा पति- मेरा सब कुच.
क्या में साथ दे पाउंगी सुहाग रात में … कितने सपने सजाये होंगे हीतेश ने … कितने अरमान होंगे हीतेश के- क्या में उन्हें पूरा कर पाउंगी … क्या में … क्या वो मुझे समझ पाएँगे … मेरे दिल की हालत … एक अड़चन कहीं न कहीं अब भी दिमाग में रहती है .
छोड़ो … देखते हैं क्या होगा … मुझे विश्वास है वो मेरे दिल की बात जरूर समझ जायेंगे … मुझे वक़्त देंगे अपने इस नये रूप में पूरी तरहा ढ़लने के लिये. दिल तो मेरा भी बहुत करने लगा है उनके बाँहों में समाने का … पर एक डर भी लगता है.

कल में मम्मी पापा की शरण में थि, आज मुझे मेरा घर मिल गया … मेरा घर … मेरे हीतेश का घर … हमारा घर . अब यही मेरा नया संसार है … जो अनुभुति मुझे इस वक़्त हो रही है वो शायद में कभी शब्दों में बयान नहीं कर पाउँगी.
एक सुखद अहसास हो रहा है अपने इस नए घर में आने का … मम्मी पापा से दूर होने का दुःख भी है पर … आज मुझे ये भी मेहसुस हो रहा है अब में फिर से पूरी हो जाउँगी … वो सुख जो हीतेश के पापा दिया करते थे … वो सुख जिसे में भूल गई थी … वो सुख जो हर नारि की तमन्ना होती है … जो हर नारी को उनके पुरे होने का अहसास करता है … वो सुख अब मुझे मेरा हीतेश देगा कितना खूबसूरत है हितेश बिल्कुल अपने पापा तरह जैसे वह फिर आ गये हो हितेश के रूप में … में फिर से सपनो में उड़ने लगूँगी … फिर से मेरी कामनाओ को पंख मिल जायेंगे … फिर से मेरी जिंदगी में सपनो की बहार आ जायेगी … फिर से मुझे कोई थाम लेगा … मुझे एक नई दिशा देगा … अपना पूरा प्यार देगा … मेरा हीतेश फिर से मुझे पूरा कर देगा.
पता नही क्यों मेरे लब पे ये गीत आ गया … “अब तो है तुमसे हर ख़ुशी अपनी” —- में खो गई … अब मुझे सड़क पे चल्ने वाले लोग नहीं दिख रहे थे … ये गीत मुझे मेरे हीतेश के पास ले जा रहा था … मेरा खुद पे बस ख़तम हो रहा था … में उनका इंतजार कर रही थी कितना देर लगाते है नहाने में.

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