शाम होने जा रही है. हम चार लोग मुंबई में बांद्रा टर्मिनस पे एक प्लेटफार्म बेंच में बैठे हुए है. नानाजी बेंच के एक दम एन्ड में बैठे है, उनके बाद नानीजि, नानीजी की बगल में माँ और में दूसरी एन्ड पे बैठा हु. नानी माँ को अपने पास ही पकड़के बैठि है. हम कुछ टाइम कोई कुछ भी नहीं बोल रहे है. मुंबई सिटी की ब्यस्तता के अंदर हम चारो लोग एक अलग परिस्थिति लेकर बैठे हुए है. सब लोग बहुत ब्यस्त है चारो तरफ. सब अपना अपना सुख, दुख, खुशी, ग़म, आनंद, हसि, रोना लेकर चले जा रहे है अपनी अपनी शान्ति की जगह पर. सब के मन में कुछ न कुछ पैशन, इमोशन का खेल चल रहा है. लेकिन फिर भी कोई किसी दूसरे की उस भावना को छु नहीं पा रहा है. सब अलग अलग आइलैंड जैसे जीते है यहाँ. जीवन संग्राम में यह लोग खुद ही अपना पैशन , इमोशन को ठीक से ब्यक्त करने का तरीका ही शायद भूल गये है. हमारे सामने से कितने सारे लोग चले जा रहे है. पर किसी को भी यह पता नहीं है, शायद पता करने की जरुरत भी नहीं पड़ रहा है की हम अब किस इमोशनल बेन्डिंग के थ्रू गुजर रहे है. हमारे मन में अब क्या चल रहा है. एक माँ उनका एक लौती बेटी को अपने ही पोते के हाथ में उनको सोंप दिया है. अपने ही पोते को आज दामाद बनाकर अपनी बेटी और पोते की खुश हॉल ज़िन्दगी की उम्मीद करके ऊपरवाले से प्रार्थना कर रही है मन ही मन. एक पिता अपने परिवार की सबकी भलाई के लिए आज खुद के पोते के ससुर बन गये. और वह इस नये रिश्ते को जी जान से मान ने भी लगे है. एक माँ अपनी ज़िन्दगी का अब तक का प्यार और ममता देकर जिस को पाला, बड़ा किया, माँ का स्नेह दि, आज खुद को उसकी पत्नी बनके अपना तन मन सोंप दि और उसको अपने पति का अधिकार दे दि. एक बेटा जो बचपन से अपने नाना नानी के साथ रहकर, उनका प्यर, स्नेह, ममता पाकर उनके छत्र छाया में बड़ा हुआ है, आज उन्ही नाना नानी को अपना साँस और ससुर मान लीया मन से जिस औरत के ममता भरे प्यार और देखभाल में बड़ा हुआ, जिसको दुनियामे सबसे ज़ादा प्यार करते आया, जिसको अपने दिल के हर कोने में उनका ही चित्रण करके रखते आया, उस औरत को शास्त्र सम्मत तरीके से अपनि धरम पत्नी, अपनी जीवनसाथी, अपनी प्यारी बीवी बनाकर आज सारे रिश्तों को दोबारा नये तरह से लिख दिया. ऐसी जटिल परिस्थिति के अंदर सब रह रहा है, फिर भी बाहर वालों को कुछ भी भनक नहि. समाज आज यह सब कुछ नहीं जान पाया. इस लिए सब अपनी अपनी रेस्पेक्ट से हम चारो को देख रहे है. और हम हमारे आनेवाले कल के बारे में सोच रहे है. हमे पूरी ज़िन्दगी ऐसे ही रहना पडेगा. हमारा पुराने रिश्ते को भूल कर, सब के सामने इस नये रिश्ते को ही अपनाकर रखना पडेगा. शायद हमे अपनी पुराणी पहचान, पुराणी जगह से हमेशा दूर रहना पड़ेगा हमारे सब के भलाई के लिये. जितना टाइम जाने लगा, नानी की आँख उतनाही गिला होने लगा माँ भी उनके साथ, उनके स्पर्श में रहकर थोड़ा उदास होने लगी. थोड़ी देर बाद अहमदाबाद जाने का ट्रैन लगनेवाली है. नाना नानी अपनी बेटी को पहली बार घर से दूर भेज रहे है. पहली बार अपनी बेटी को उनके पति के साथ ज़िन्दगी बिताने के लिए अपनों से दूर जाने दे रहे है. नाना नानी का मन भारी हो रहा है यह में महसुस कर पा रहा हु. उनके मन में यह भी है की उनका बेटी अब जिसके साथ रहने जा रही है, वह उसको दुनियाका सारा प्यार, सारी खुशी, सारा आनंद देगा. पर अपनी एकलौती बेटी को इतने दिन बाद अपनों से दूर करने का दर्द में मेहसुस कर सकता हु.
मा नानी के पास चिपक के बैठि है. उनके हाथ में नानी का एक हाथ पकड़कर रखी है. माँ बेटी का प्यार साफ़ दिखाइ दे रहा है. माँ को नाना नानी से दूर जानेका दर्द तो है, पर उनके मन में उससे ज़ादा ख़ुशी है. क्यूँ की वह अपने बेटे के साथ , जो अब उनका पति है, उसके साथ नयी ज़िन्दगी बिताने जा रही है. उनको यह भी मालूम है की दुनियामे कुछ भी हो जाए, पर उनका बेटा, उनका पति कभी भी किसी भी हालत में उनका हाथ नहीं छोड़ेगा, और नाहीं उनको कभी कुछ कस्ट होने देगा. वह अपने पति के प्यार को अब धीरे धीरे महसुस कर सकती है. उनकी आँख में गीलापन तो है, फिर भी होठो पे एक ख़ुशी की आभा दिखाइ देती है. और वह देख के नाना नानी भी चैन की सांस ले पा रहे है. माँ के गले में मंगलसूत्र है. मांग में सिन्दूर है. माथे पे एक लाल बिन्दी. हाथ पैर में मेहँदी लगी है. दोनों हाथ में कुछ बँगलस के साथ और भी कुछ सिंपल ज्वेल्लरी में माँ एक नयी दुल्हन ही लग रही है. पहली बार शादी के बाद एक जवान कुंवारी लड़की जैसे दीखती है, माँ वैसे लगने लगी. उनकी स्लिम बॉडी में आज एक अलग सा आभा लगी हुई है. एक मरुण, ग्रीन और येलो कलर के रंग से सुन्दर डिजाइन और मीनाकारी कि हुई एक साड़ी पहनी हुई है. साथ में मैच किआ हुआ ब्लाउस. उनके गोरे रंग और मख़्खन जैसे मुलायम स्किन में वह कपडा उनको बहुत जच रहा है. यह सब चीज़ों से उनकी उम्र अब २० साल के जैसे लग रही है. मैं वहां से उठकर थोड़ा आगे जाकर साइड में खड़े होकर रिलैक्स जैसा करने लगा. नानी माँ से कुछ बातें कर रही है. नाना जी भी वहां नानी और माँ को कुछ बोल रहे है. अब उनके अंदर का दुःख और मायुस भाव धीरे धीरे कम हो रहा है. मैं बस चारो तरफ नज़र फिरा ते फिराते सबसे ज़ादा केवल माँ को ही देख रहा हु. आज इस रूप में माँ को वास्तव में देख के मुझे एह्सास हुआ की कल्पना कभी कभी वास्तव से भी हार मान लेती है. माँ को पिछले दो हप्ते से मेरी पत्नी के रूप में कैसे दिखेगी, वह कल्पना करते आया. वह है तो खूबसूरत. नयी दुल्हन बन्ने के बाद और खूबसूरत हो जायेगी यह सोचकर उनकी एक तस्वीर मन के अंदर कल्पना किया था. पर आज मेरे सामने बैठि उनको देख के मेहसुस किया की इस अपरूप सुंदरता के वास्तवीक छोरको कभी देख नहीं पाऊंगा. और अभी इस पल वह दिदार करके मेरे मन में एक अनिर्बाचनीय ख़ुशी और संतुष्टि का भाव छाने लगा. मैं सच मुच उनको बीवी के रूप में पाकर अब एक सैटिस्फाइड मैन जैसा फील कर रहा हु. उनकी यह सुंदरता , यह खुबसुरति, यह रूप में ज़िन्दगी भर अपना करके पाऊंगा.
पहले से किये हुये प्लान के मुताबिक नाना नानी अभी अहमदाबाद चले जाएंगे. और में माँ को लेकर एमपी चला जाऊंगा. टिकट भी ऐसे ही बुक किया था मैने. इस्स लिए शादी के बाद हम सब लंच करके अपने अपने कॉटेज में पहुच गये थे. हमे शादी का जोड़ा वगेरा खोल के तैयार होना था. माँ नानीजी के रूम में ही चले गई. उनके सारा सामान वहि रखा हुआ था. और में नानाजी के रूम में आगया था मैं आपनी शेरवानी खोल के बाथरूम में जाकर मुह हाथ पैर धोने लगा. सर पे घी चंदन और गुलाल की लगी हुई सारी तिलक को साबून से साफ़ करके फ्रेश होने लगा. फिर आके मेरे सूटकेस से एक जीन्स और पोलो टी शर्ट निकाल के पहन लिया. मैंने सोचा की सूटकेस में रखा एक नया कुरता और पाजामा है तोह वह पहन लू. पर फिर लगा की वह पहन ने में एक दम नया दूल्हा टाइप लगुंगा. और शर्म अने लगी. तब मैंने यह जीन्स पहन के क्यजुअल होने की कोशिश करने लगा. माँ और मेरी शादी हो गई. फिर भी दोनों के अंदर नाना नानी के सामने एक शर्म अभी भी है. मैं मेरे बाकि कपड़े और सामान पैक करने लगा. नानाजी रूम में आये और वह भी अपने कपड़े बदल ने के लिए बाथरूम में चलेगये हम दो लोग तो फ़टाफ़ट तैयार हो गये पर वहां दूसरे कॉटेज में वह दो लोग हमारे जैसे नार्मल बन्ने में टाइम लेगी. नानीजी तो बस अपने साड़ी चेंज कर लेंगी पर माँ दुल्हन का लेहेंगा चोली चेंज करेंगी, फिर अपने चेहरे से सारा मेक अप साफ़ करके मांग में भरी सिन्दूर को ठीक तरीके से लगाएगी उसमे टाइम तो जाएगा ऐसे करके पूरा दो घंटा लग गया और फिर जब हम अपने अपने कॉटेज से अपना सामान लेकर निकले तब में माँ को इसी ड्रेस और इसी रूप में तब पहली बार देखा था. उनके हाथ की मेहंदी, हाथों का बँगलेस देख के सब समझ जायेंगे की उनकी नयी नयी शादी हुई है.उनको इस रूप में देख कर, मेरे अंदर ही अंदर उनके लिए एक तीब्र चाहत होने लगी और में बहुत हॉर्नी फील करने लगा. मेरे शरीर के अंदर एक अनुभुति दौड रहा है. मैं माँ की तरफ जब भी देख रहा हु, तभी उनके जिस्म के हर कोने कोने में मेरे प्यार भरे गरम होठो का स्पर्श देकर उनको प्यार करने के लिए मेरा मन पागल हो रहा था. वह मेरी माँ है. मैं उनको बहुत ज़ादा प्यार करता हु. उनको दिल से चाहता हु. वह अब मेरी बीवी है. मेरी जीवन साथि है. उनके साथ ज़िन्दगी का हर पल जीना चाहता हु. ज़िन्दगी का हर सांस उनके साथ ही लेना चाहता हु. मेरे प्यार से उनकी ज़िन्दगी का अब तक का सारा ग़म, सारा कष्ट, सारी क़ुर्बानि, बहुत सारी चीज़ें न पाने का दुःख –सब सब कुछ भुला देना चाहता हु और ज़िन्दगी भर बहुत सारी ख़ुशी और आनंद के साथ उनको मेरे बाँहों में भरके संभालके रखना चाहता हु.
माँ ने कॉटेज से निकल नेके बाद से अब तक एक भी बार मुझे नहीं देखा है. मैं बहुत बार कोशिश कर रहा हु. पर नज़र नहीं मिला. वह और नानी बस एक साथ एकदूसरे को पकड़के सारे रास्ते टैक्सी में आई. आज सब थोड़ा अपने अपने में मग्न थे. ज़ादा बात नहीं कर रहे थे. नाना नानी अपने बेटि, जो आज तक उनके साथ ही रहती थी उसको अब जाने देना पड़ रहा है. उसी ग़म में सब कम बोल रहे थे. फिर भी बात चित होने लगी. और बीच बीच में कोई मज़ाकिया बातों से सब हस रहे थे. पर फिर भी वह पहले दिन जैसे नहीं रहे. बात कम होने के कारन में बार बार पीछे मुड नहीं पा रहा था और माँ को देख नहीं पा रहा था. फिर भी इतना नज़्दीक रहकर , में उनको मेरे दिल के अंदर और शरीर में मेहसुस कर पा रहा था. मेरी इसी तरह की फीलिंग्स के लिए मेरा पेनिस बार बार सख्त होता रहां. वह अब केवल सुहागरात के इंतज़ार में ही है. फिर भी में अभी भी माँ को देख रहा हु, हर बार उनकी खुबसुरती और सुंदरता देखके में खुद को भाग्यवाण समझ रहा था. ऐसी एक प्यारी लड़की मेरी बीवी बनेगी में सोचा नहीं था. पर आज वैसे ही एक लडकि, जो मेरी माँ है, आज मेरी पत्नी बन गयी है. जो अब मेरे नाम का सिन्दूर लगा के मेरे सामने, उनके मम्मी पापा के साथ बैठि हुई है.
नाना नानी ट्रैन में चड़ने से पहले मुझे और माँ को बार बार गले लगा ते रहे. मैं और माँ एक साथ झुक के पति पत्नी का कपल बन के नाना और नानी का पैर छू के उनके अशीर्वाद लेने लगे. नानाजी मुझे एक बार अलग से गले लगाये और कुछ टाइम पकड़ के रखा. वह जैसे की यह कह रहे है की मेरे घर की लक्ष्मी में तुमको दिया बेटा. अब तुम ही इसका ध्यान रखो फिर नानाजी माँ को गले लगाके चेहरे पे एक मायूसीपन लेकर एक स्माइल दिया. नानी माँ को फिर से गले लगायी और उनके चेहरा दोनों हाथ से थामकर उनकी आँखों में देखि और उनकी गीली आँखों से स्माइल करके माँ को बोली” सदा सुहागन रहो बेटि”. नाना नानी के आँखों में साफ़ साफ़ दिख रहा है जैसे की वह लोग अपने बेटी को विदाई दे रहे है. इस समय में और माँ एकसाथ रहकर केवल उनलोगों को ठीक से , अपना ख़याल ठीक से रखने के लिए कहने लगे.
आज तक माँ थी साथ मे. पर अब वह दोनों बिलकुल अकेले हो जाएंगे. यह सोचके मेरा मन थोड़ा भारी भी हो गया था. पर क्या करे. ज़िन्दगी का असली रंग ही ऐसा है.मै और माँ एक साथ आस पास प्लेटफार्म पे खड़े है. ट्रेन चलने लगी. नाना नानी खिड़की से हमे देख के हाथ हिलाई. और दोनों ही परम ममता और प्यार से हमे एक स्माइल देकर अपनापन जताने लगे. ट्रेन रफ़्तार पकड़ने लगी और माँ की आँख गिला होने लगी. ट्रेन धीरे धीरे प्लेटफार्म छोड़कर दूर जाने लगी. और तभी में मेहसुस किया की मेरे एकदम नजदीक खड़ी माँ उनके दोनों हाथ उठाके मेरा बाजु पकड़ रही है. मैं घूमके उनको देखा. वह तभी भी जाते हुई ट्रैन की तरफ नज़र रख के गीली आँखों से उसी तरफ देखे जा रही है.

