मिस्टर & मिसेस पटेल (माँ-बेटा:-एक सच्ची घटना) | Update 29

मिस्टर & मिसेस पटेल (माँ-बेटा-एक सच्ची घटना) Maa aur Bete me Pyaar
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मैनेजर हमारा बहुत ख्याल रख रहा है. हमें बार बार पुछ रहा है कोई तकलीफ हो रही है की नही कुछ चाहिए की नही पहले स्टार्टर आया, वह दो वेटर सर्व करने लगे, सब को सर्व करके बाकि वहि टेबल पे रख के साइड में चले गये. एक एक चीज रहा है और वह लोग ऐसे ही कर रहे है. थोड़ी देर बाद नानी उनको देख के प्यार से हास के बोली की वह लोग बस यहाँ रख दे, हम खुद सर्व कर लेंगे. फिर नानी हम सब को सर्व करने लगी. माँ भी हाथ लगा रही है. उनके हाथों में मेहँदी के साथ साथ रेड नेल पोलिश नज़र आयी. मुझे पहली बार माँ का इस तरह का रूप देखने को मिला. वह मेरे सामने एक अलग लड़की जैसी लगने लगी. जिसको में बचपन से जानता हु, वह माँ नहि, एक और कोई लडकि, जिसे धीरे धीरे जान रहा हु, जिसका रूप धीर धीरे नज़र आरहा है. वह इतनी खूबसूरत लग रही है की में मन ही मन खुदको लकी महसुस कर रहा हु. ऐसी खूबसूरत और सेक्सी एक लड़की मेरी जीवनसाथी, मेरी बीवी बनने जा रही है.
मैन कोर्स का खाना आगया. माँ सब को सर्व करनेलगी. हम सब एक साथ बहुत दिन हो गये है बाहर खाने नहीं गये थे सो सब लोग इस डिनर को एन्जॉय कर रहे है. और हमारी नई ज़िन्दगी शुरु होने से पहले सब का मन में जो टेंशन या संकोच था, सब यहाँ धीरे धीरे मीट रहा है. नानाजी और नानीजी उनके लाइफ की बिगनिंग की बहुत सारी बाते शेयर कर रहे है. कुछ हसि की बाते भी हो रही है. और फिर शादी के बाद उनलोगों ने क्या प्रॉब्लम फेस किया था, क्या क्या प्रॉब्लम कैसे आते है, और कैसे उसका सोलुशन होता है, वह सब माँ और मेरे साथ शेयर करने लगे. अब मैनेजर भी चले गए और दोनों वेटर भी साइड में जाकर खड़े है. सो हम बिन्दास बात करने लगे. मैं नाना और नानी को मम्मी पापा कह्के बुलाया दो बार. माँ उस टाइम मेरी तरफ एक झलक देखि थी. उनके चेहरे पे ख़ुशी और होटों पे मुस्कान मुझे नज़र आयी थी माँ केवल नानी के साथ कुछ बात धीरे धीरे कर रही थी. इन्ही सब बातों के बीच एक डीश सर्व करने के लिए माँ मेरी प्लेट के पास हाथ लायी तो मैं उनको देखके मुस्कुराके, अपने हाथ से इशारा करके ना कहा. वह बस मुस्कुराके हाथ हटा लि. जब नानी के पास गया तो नानी बात करते करते ध्यान दि और माँ को बोली
?? पहले हीतेश को दो मंजु??
मा यह सुनकर शर्मा के नज़र झुका लि और नानी की प्लेट में परोसते परोसते धीरे से नानी को बोलि
?? वह नहीं लेंगे. मैंने उनको पूछा ??
यह सुनते ही नानी के चेहरे पे एक हसि खील गयी. और वह खुश होकर नाना की तरफ देखि. माँ शर्मा के नज़र झुका के नानी की प्लेट में परोस रही है. नानी समझ गयी कि माँ ने इस नये रिश्ते को कैसे मन से एक्सेप्ट कर लिया है. नानी बस अपने लेफ्ट हैंड को पीछे से ले जाकर माँ की पीठ को पकड़ के माँ को अपनी तरफ खिची और कुछ ना बोलकर एक स्माइल देके बहुत कुछ समझ भी गयी और संमझा भी दिया.

सब की ज़िन्दगी में कुछ पल, कुछ दिन, कुछ मोमेंट्स ऐसे आते है, जहाँ उसकी ज़िन्दगी एक अनजान मोड़ पे आकर एक नयी दिशा में घूम जाती है. और तब वह शायद यह सोच नहीं पाता की इस तरह की नयी राह में कदम रखना कितना जरुरी या रिस्की होता है. पर हम सब इसको हमारे ज़िन्दगी में अनुभव करते है, और नयी सोच और नयी उम्मीद के साथ आगे चल पड़ते है. बाकि लोगों से मेरी ज़िन्दगी एक दम से तो अलग ही है. सब की शादी होती है. सब अपनी जीवनसाथी पाते है. पर में अपनी जीवनसाथी, अपनी बीवी के रूप में जिसको पाने जा रहा हु, वह मेरी माँ ही है. मुझे मालूम है हमारा यह नया रिश्ता औरों से बिलकुल अलग है. हम दोनों और नाना नानी ..सब की सम्मति से और हमारे बीच का प्यार और बंधन के कारन से , हम लोग इस रिश्ते को अपनाना चाहते है. सभी का अच्छा इसमें होगा यह सोच के हम इस कदम को उठाया है. पर समाज और संसार कैसे इस को देखेंगे वह भी मालूम है. इसके लिए हमें सब को बहुत कुछ सैक्रिफाइस भी करना पडेगा. माँ अब एक दूसरे लड़की के जैसी बन गई, जिसको में प्यार करता हु और चाहता भी हु. पर एक बात तो सच है. कोई भी रिश्ते में, खास करके पति पत्नी के रिश्ते में, वह रिश्ते मजबूत, टिकउ और हैल्थी होता है तब, जब उसमे एक दूसरे के लिए प्यार, एक दूसरे के ऊपर बिस्वास, और एक दूसरे को क्षमा करने की ताकत होती है मन मे. मेरे और माँ के मन में माँ-बेटे का प्यार तो था हि, अब एक नया प्यार दोनों के मन में छाया हुआ है, उसमे हम एकदूसरे को बहुत बहुत प्यार करते है. बचपन से दुनिया में हम एकदूसरे को सबसे ज़ादा बिस्वास करते आरहे है. और हमारी ख़ुशी के लिए हम बहुत कुछ सैक्रिफाइस करने की ताकत भी रखते है जो हम बचपन से करते भी आरहे है, और अब तो सब कुछ के लिए तैयार भी है. दुनिया की और कोई लडकि, वह कितनी भी सुन्दर और खूबसूरत क्यों ना हो, वह लड़की मेरे मन में वह जगह नहीं ले सकती है जहाँ मेरी मा…मेरी होनेवाली पत्नी बनके और मेरी माँ बनके मेरे दिल में बैठि हुई है. सुबह से एक हलचल मची हुयी है हमारे बीच.

शादी का मुहूर्त मॉर्निंग में ही है. उसके बाद शुभ टाइम रात को है. सो यह लोग हमारी शादी का टाइम सुबह के मुहूर्त को पकड़के शेड्यूल किया है. हम एकदम सुबह से उठके सब तैयारी में लग गये. कल शाम के रिंग सेरेमनी वाले हॉल में शादी का इन्तेज़ाम किया हुआ है. वहाँ दो रूम है. एक में दूल्हा और उसका परिवर, दूसरे में दुल्हन और उसके परिवार के लिये. हम सब यहाँ आते ही में और माँ पहले रजिस्टर्ड साहब से मिले और उनके दिये हुये पेपर्स पे हमने साइन किया. नाना नानी भी थे. मैं माँ को देखा तो वह बस ख़ुशी से होठो पे मुस्कुराहट लेकर नज़र झुकाके नानी के साथ बैठी थी सुबह के इस समय वह बहुत प्यारी लग रही है. मेरे मन में एक अद्भुत अनुभुति दौड रही है. मैं भी थोड़ी शरम मेहसुस कर रहा हु. मैं उनसे पेन लेकर धीरे धीरे हस्बैंड के जगह पे साइन किया और नानीने मेरी गार्डियन बन के मेरे विटनेस के जगह पे साइन किया. फिर माँ अपनी हाथ निकल के धीरे धीरे वाइफ की जगह पे साइन किये और नानाजी उनके फादर का विटनेस साइन किया. माँ का साइन होते ही रजिस्टर्ड साहब मुझे और माँ को पति पत्नी बनने के लिए विश किया और तब सब लोग क्लैप करके हमें अभिनन्दन करने लगे. और कुछ साइन चाहिए था वह वहां की कुछ लेडीज से साइन करवा लिये. और वह जाते टाइम हमें फिर से विश करके चले गये. मैं और माँ क़ानूनी तौरसे हस्बैंड और वाइफ बन गये. फिर शास्त्र सम्मति से शादी का मुहूर्त जल्दी आनेलगा. तो में और माँ दूल्हा और दुल्हन के रूम में चले गए तैयार होने के लिये. मेरे सज धजने में ज़ादा कुछ रखा नहीं है. केवल शेरवानी पहन ना है और सर पे साफा लेना है. पर दुल्हन के रूम में सब बिजी है. दुलहन को सजाना और शादी का जोड़ा पहनके रेडी करने के लिए कल वाली कुछ लेडीज है. बाहर भी कुछ लोग जमा है. सब रिसोर्ट की तरफ से है और सब अपना अपना डूटीस के लिए है. ऐसी शादी न कभी कहीं हुआ, न यह लोग कहीं देखा. बल्कि यह लोगों को तो पता ही नहीं की एक माँ बेटा आज शादी करके पति पत्नी के रिश्ते में जुड़ने जा रहे है, जहाँ दूल्हा दुल्हन के साथ पूरे परिवार की भी सम्मति है. वह लोग बस अपनी ख़ुशी से मज़े के साथ सब कुछ कर रहे है. नानाजी मेरे रूम में कम और बाहर हॉल में और माँ के रूम में बार बार जाकर देखभाल कर रहे है. मैनेजर साहब वहि बाहर हॉल में बैठे है. पण्डितजी भी अपनि तैयारी सुरु कर दिये. लेकिन उनको भी यह भनक तक नहीं लगा की आज वह एक माँ बेटे की शादी करवाने वाले है. मैं बस एक सुन्दर डिज़ाइन किया हुआ शेरवानी पहनके सोफे में जाकर बैठा. मुझे शादी की एक नयी अनुभुति हर वक़्त घिरके रखी है. मैं जिसको सबसे ज़ादा प्यार करता हु इस दुनिया में, जिसको दिल से पत्नी के रूप में चाहते आरहा हु पिछला ६ साल से, वह खूबसूरत लडकि, मेरी माँ, आज मेरी बीवी बनेगि. मेरी माँ को मेरी दुल्हन के रूप में देखने के लिए मेरा मन बेसब्री से इंतज़ार कर रहा है. बल्कि यह भी सच है की माँ को मेरी बीवी बनाके मेरी बाँहों में लेकर उनको प्यार करने की चाहत में मन अंदर ही अंदर बार बार चंचल होकर काँप उठ रहा है. पिछले ६ साल से उनको कल्पना करके उनके साथ मिलन का जो सपना मन ही मन में देखते आरहा था, अब हमारा नसीब हम को एक करके वह सपना सच कर दे रहा है. मैं अब मेरी ज़िन्दगी उनके साथ उनका पति बनके गुजारना चाहता हु. और वह भी मेरी पत्नी बनके ज़िन्दगी की आखरि सांस तक मेरे साथ जीना चाहती है.
कल रात रेस्टोरेंट में डिनर के टाइम माँ की ख़ुशी ,शरम और एक दबी हुई उत्तेजना वाला चेहरा देख के और नयी दुल्हन बनने का साज और मेहँदी देखके, में बहुत आर्गी फील कर रहा था मुझे माँ को मेरे बाँहों में भरके, मेरे गरम होंटों से उनके पूरे बदन को, हर अंग अंग को प्यार भरे चुम्बन से भर देणे का मन कर रहा था मैं उसी उत्तेजना से डिनर करते करते नाना नानी से छुपके माँ को एक एसएमएस कर दिया. लिखा था
” यु आर लुकिंग वेरी ब्यूटीफुल , हॉट एंड सेक्सी. आई कान’ट स्टे अवे फ्रॉम यु अनिमोर.”
मेरे एसएमएस के बाद माँ को पता नहीं चला. क्यूँ की उनका मोबाइल पर्स के अंदर था मैं बस उनतक मेरी यह अनुभुति पहुचाने के लिए बार बार उनको देख रहा हु, जैसे की में उनको इशारे से बता पाऊँ की वह अपना मोबाइल चेक करले. पर वह देख नहीं रही है. सो मैं एक तरीका सोचा. मैनेजर के साथ नाना नानी बात कर रहे है. माँ उस तरफ देख रहा है. मैं मेरे और माँ के प्लेट के बीच रखी हुई एक डीश है. मैं चम्मच लेकर उसमेही घुमा रहा था माँ का विज़न एरिया में था, इस्लिये वह अचानक मेरे हाथ पे नज़र डाली. फिर मेरी तरफ आँख उठाके देखि. और वह खुद वह डीश उठाके मुझे सर्वे करने के लिए मेरी तरफ़ थोडा घुमतेहि में चम्मच पकडे हुये हाथ से इशारे में मना करके, लेफ्ट हैंड में पकडे हुये मोबाइल को इशारे में दिखाया.
वह पहले समझि नहि, पर जल्द समझ गयी. और मेरी तरफसे मुस्कुराके नज़र घुमा लिया. मैं समझ नहीं पाया की वह जान ने के बाद भी उनके मन में कोई प्रतिक्रिया या कोई रिएक्शन नहीं हुआ. मुझे माँ के ऊपर गुस्सा आने लगा और दोबारा उनको इशारा करने के लिए मौका ढूँढ़ने लगा. तभी माँ नानी के कान में कुछ बोली. नानी मैनेजर साहब को पूछि की वाशरूम किस तरफ है. मैनेजर बहुत इज़्ज़त से नानी से बात कर रहा था और वह हाथ उठाके दिखाया. तभी माँ अचानक चेयर से उठके अपनी पर्स उठाके चल पडी. और जाते टाइम एकबार मुझे लुक देकर मुस्कुराके गई.
मैं मोबाइल हाथ में लेकर बैठा था मैं समझ गया माँ वहां जाकर मेरा एसएमएस पडेगी. इस लिए यहाँ अलग होकर बैठा था नाना नानी के पास. माँ जाने के बस कुछ टाइम बाद मेरे मोबाइल वाइब्रेट किया. मैं खोला तो माँ का एसएमएस था उन्होंने लिखा था
” धत..बदमाश”
मुझे मालूम है माँ मेरा एसएमएस पढ़कर शर्म से लाल हो गयी होगी. और यह भी मालूम है उनके मन में भी मेरे जैसी चाहत आरही थी. मैं फ़टाफ़ट टाइप किया
” इट्स ट्रू मंजु सोना. आई एम लकी टू हैव यु अस माय बिलवड वाइफ. आई लव यु सो सो मच एंड विल लव यु फॉरऐवर”
ओर तुरंत उनका रिप्लाई आया
” आई लव यु टू सो सो मच जाणु.”
वह यह रिप्लाई उनके दिल से लिखी है, यह में महसुस किया तब, जब वह वापस आयी और उनके चेहरे पे एक अद्भुत नयी दुल्हन का अभास दिखा था माँ को ऐसे रूप में सामने देख के और वह एसएमएस पढ़ के मेरा लिंग एक अद्भुत ख़ुशी से अंडरवेयर के नीचे फुल्ने लगा. मैं बस और थोडा सहन करके उस पल का इंतज़ार करने लगा जब वह शास्त्र सम्मति से मेरी बीवी बन जाएगी.
ओर अब वह घडी आगई.

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