नानाजी का दिया हुआ नया सूट पहनके में तैयार हो रहा था रूम में बस में अकेला था मिरर के सामने खड़े होकर खुदको देखते देखते शायद मेरे मन में एक डर महसुस होने लगा. मैं ज़िन्दगी का सब से बड़ा स्टेप लेने जा रहा हु. शादी करके एक नई ज़िन्दगी में प्रवेश करने जा रहा हु. हमें मालूम नहीं हमारे नसीब में आगे क्या लिखा है. मैं माँ से बहुत प्यार करता हु. वह भी मुझसे बहुत बहुत प्यार करती है यह मुझे मालूम है. अब हम पति पत्नी बनके ज़िन्दगी गुजर ने की कसम खाने जा रहे है. हम एक दूसरे को चाहते है. एक दूसारे के साथ जीना चाहते है. एक दूसरे को ज़िन्दगी की हर ख़ुशी देना चाहते है. नाना नानी भी ऐसे ही रिश्ते दिल से चाह के हम सब को खुश देखना चाहते है. मैं आँख बंध करके प्रे करने लगा. हमारी ज़िन्दगी में कोई रुकावट या कोई बाधा या कोई कस्ट न आये. हम एक साथ पूरी ज़िन्दगी ख़ुशी और शान्ति से जी पाये.
मै कॉटेज से निकल गया. नानाजी और दो चार लोग बाहर खड़े थे, उनके साथ में चलने लगा. मुझे मालूम था की माँ और नानी पहले से ही वहां चले गये. क्यूँ की रिंग और मेहँदी के लिए यह लोग दुल्हन को थोडा बहुत सजाने का प्लान सेट करके रखा है. मेरे अंदर माँ को उस्सी तरह सजी हुई देखने की चाहत पूरे बदन में दौड ने लगी. में किसीको उसकी भनक तक लगने नहीं दे रहा हु.
एक हॉल में यह सेरेमनी का आयोजन किया हुआ है. वहाँ पण्डितजी और कुछ लेडीज थी, इनमे से में हल्दी के टाइम भी कुछ कुछ फेस देखा था मैं जाकर वहां सोफे पे बैठा. एक फोटोग्राफर आकर मेरी फोटो क्लिक करने लगा. मैं थोड़ी बेचैनी फील करने लगा. नानाजीने मेरे हाथ के ऊपर अपना हाथ रखा तो मेंने उनको देखा. उनकी आँखों में एक आश्वासन का इशारा और सब कुछ ईजिली लेने का इशारा देख के में खुद को उस वातावरण के साथ मिलाने लगा. औरतें आपस में बात कर रही है. हस रही है. मैनेजर बीच बीच में नाना से बात कर रहा है. मैं बस सब कुछ देख रहा हु. और दुल्हन का यानि की माँ के आने का इंतज़ार करने लगा.
लेकिन यह इंतज़ार लम्बा होने से पहले ही कुछ औरतों के साथ माँ और नानीने हॉल में एंट्री लि. मैं माँ को देख के चौंक गया. क्या यह वहि लड़की है, जिस को में बचपन से देखते आरहा हु, जो मेरी माँ है, जिसको में जी जान से ज़ादा प्यार करते आरहा हु बचपन से!! थोडे मेकअप के साथ लेहेंगे और चोलीमें और कुछ हलकी ज्वेलरी में वह एकदम परी जैसे लगने लगी थी उनके बॉडी का हर कर्व परफेक्ट है. आज वह और भी सेक्सी लग रही है. लहेंगा पहन ने से उनका सेक्सी फ्लैट पेट् और नभि दिख रहा है. पहली बार उनका नाभि देखके मेरे अंदर सिरसिरानी सुरु हो गया. मेरी नज़र थोड़ी ऊपर होते ही उनका बूब्स पर अटक गयी. आज उनका वह दोनों सुडौल आकर क्लियर व्यू के साथ उनकी सुंदरता और बढा दिया. उनका चेहरा देखा तो वह नज़र झुका के , शर्म और लाज में लाल होकर मेरी तरफ बढ़ते आरही है. यहाँ किसीको मालूम न हो, लेकिन नाना नानी और मेरे सामने वह ज़ादा शर्मा गयी. क्यूँ की हमें ही केवल मालूम है हमारा रिश्ता , हमारी परिचय. हम एक रिश्ते से आज दूसरे एक नए रिश्ते में जुड़ने जा रहे है. मेरे अंदर एक एक्ससाइटटेमेंट तो था ही अंदर ही अंदर, और अब माँ को देख के मेरे मन में एक हलचल मचने लगी. मैं खुद को कण्ट्रोल करते ही जारहा हु केवल यह सोचके की बस और कुछ घंटों के बाद वह परी जैसी लडकि, मेरी बीवी बन के मेरी बन जाएगी.
मा आकर मेरे बगल में सोफे में बैठ गयी, नानी उनके पास बैठी गयी है. माँ अपनी नज़र एक दम झुकाके केवल खुद की गोद में रखे हुये हाथ के ऊपर टिकाके रखि, चारों तरफ एक बार भी नहीं देख रही है. मैं इतना सामने हु, तभी भी नहीं देख रही है, उनके होंठो पे जो मुस्कान है उससे पता चल रहा है वह इस रिश्ते को ख़ुशी ख़ुशी अपनाना चाहती है. बस यह मेहसुस करके मेरा मन उनके ऊपर प्यार से पिघल ने लगा. पंडित जी के पास पहलेही दो रिंग देकर रखे है नानीजी. वह बस एक रिंग उठाके मुझे और दूसरी माँ को दे दि. सारी औरतें ख़ुशी की आवाज़ से हमें इस मुहूर्त का इम्पोर्टेन्स मेहसुस करवाने लगी. मैं बस नानी को देखा तो वह मुझे इशारा कि अंगूठी पहनाने के लिये. मैं एकबार माँ को उनकी झुकि हुई नज़र के साथ उनके चेहरे को देख के मेरा हाथ थोडे आगे करते ही नानीने माँ को धीरे धीरे से कहा
?? मंजू,,??
ओर माँने अपना लेफ्ट हैंड को उठके आगे बढानेलगी. हम दोनों के हाथ बीच में आगये. मैं रिंग को पहनाने के लिए मेरी तीन उँगलियाँ में पकड़ के रखा है. और वह उनके ऊँगली में रिंग पेहनने के लिए बाकि उँगलियाँ को थोडा स्प्रेड करके रखी है. मैंने दोनों के हाथ के ऊपर नज़र डालके देखा. शायद हम दोनों के ही हाथ काँप रहे है. एक तो में पहली बार यह सब कर रहा हु. दूसरी बात हम हमारा रिश्ता बदल ने जा रहे है, और तीसरा हम इस रिश्ते को दिल से चाहके एक एक्ससाइटटेमेंट में डुबे हुए है. इस लिए हम दोनों ही थोडे थोडे काँप रहे है. यह शायद वहां की कुछ लेडीजने देख लिया और वह लोग कुछ आपस में बोलके हस पड़ी और हमे शर्म आइ, माँ अपना सर और नीचे झुका ली. मै धीरे धीरे उनके ऊँगली के पास रिंग ले जाके उनको अंगूठी पहना दिया. सब लोग क्लैप से और ख़ुशी का आवाज़ से हमें अभिनन्दन देणे लगे.
हम दोनों ही हमारे हाथ अपनी तरफ खीच लिए धीरे धीरे. फिर पण्डितजी दुल्हन को पहनाने के लिए बोले. मैं नानाजी को एकबार घूम के देखा . वह बस मेरे बगल में बैठे थे. मैंरे घुमतेहि उनका एक हाथ मेरे कंधे पे रख के स्माइल देणेलगे. मैं स्माइल करके नज़र घुमाके मेरा हाथ आगे किया. माँ शायद यह सब कुछ नहीं देख पा रही है, इस लिए में आगे हाथ करते ही नानीजी माँ के पीठ पे एक ममता भरे हाथ से टच कि . माँने फिर अपना हाथ आगे लाया और दोनों के काँपते हुये हाथ एक साथ हुये. वह मेरे ऊँगली में अंगूठी पहना दि. फिर से एक ख़ुशी का रोला उठा और सब क्लैप करने लगे. मैनेजर नानाजी को बधाइयाँ देणे लगा. कुछ ओल्ड लेडीज नानी को हास के गले मिलाने लगी. और बाकि लोग मुझे और माँ को बधाइयाँ देणे लगे. हम उनको प्यार से उनकी शुभ कामनाओ का धन्यवाद करनेलगे. मैं माँ को चुराके देखा तो वह अब चेहरा उठाकर, नज़र उठके वह सब लेडीज लोगों को स्माइल दे रही है और सब को थैंक यु बोलकर आभार प्रकट कर रही है. उनके चेहरे पे एक ग्लो आगया. और आँखों में एक ख़ुशी की लहर दिखाइ दे रही है. एक बार वह नज़र घुमातेहि हमारी नज़र मिल गयी. मैं उनकी ख़ुशी मेहसुस करके खुद खुश होकर एक स्माइल किया तो वह मुस्कुरा के शर्मा गयी और नज़र झट से हटा ली.
हम वहां से अलग अलग दो रूम में चले गये. मेहँदी होने वाली है. माँ को मेहँदी के लिए सारी औरते ले गयी और कुछ लोग मेरे साथ थे. मैं वहां बैठा . और मेरी मेहँदी सुरु हो गई. मेरे बस दोनों हथेली में थोड़ी थोड़ी मेहँदी लगा दि. और में कहीं नहीं लगवाया. वह लोग फ़टाफ़ट मेरी मेहँदी लगाके मेरी रसम पूरी करदि. नाना और में बाहर आगया. नाना मुझे हास के देखे और बोले
??बेटे तुम यहाँ रहो. मैं मंजु के पास जाकर आता हु.??
मै बस हासके सर हिलाया तो वह चले गये. मुझे भी जाने का मन कर रहा था पर अब पॉसिबल नहीं है. सो में बाहर रिसेप्शन की तरफ आगे बढ़ गया.
थोड़ी देर बाद नानाजी आकर बोले
?? चलो हम कॉटेज में चलते है. वहाँ अभी बहुत टाइम लगेगा. मेहँदी लगाना , गाना बजाना बहुत कुछ चीज़ों का इन्तेज़ाम कर के रखे है यह लोग. ??
नानाजी यह बोलके हास के आगे बढे मैं उनके पीछे पीछे कॉटेज की तरफ चलने लगा. मेहँदी के साथ माँ को कैसे लगेगा वह कल्पना करते करते मन में एक ख़ुशी की लहर उठाके में कॉटेज पहुच गया. मेरा मन बस उनको देखने के इंतज़ार में अंदर ही अंदर छट फ़ट करने लगा.
मेरा यह इंतज़ार लम्बा हुआ , लेकिन ज़ादानही उसदिन रात को डिनर में ही में उनको देख पाया. कॉटेज वालों ने उस दिन हमारे लिए एक ग्रैंड डिनर का बंदोबस्त करके रखा था गेट से आते टाइम हम जो रेस्टोरेंट देखे थे वहां आज का डिनर फिक्स किया हुआ है. मेहँदी के बाद से हम अपने अपने रूम में ही थे सो न में माँ को न वह मुझे देखि. सो जब हम डिनर के लिए वहां जाने के लिए निकले तो तब में माँ को देखा. वह एक ग्रीन कलर की साड़ी पहनी हुई है. जिसमें मरून कलर की बॉर्डर है. साड़ी से मैच करता ब्लाउज , गले में सुबह वाली गोल्ड चेन और हाथ में वहि बँगलस. लेकिन सुबह से एक डिफरेंस है, वह है की उनके हाथ और पैर की मेहंदी. पैर की मेहँदी साड़ी के कारन ज़ादा नज़र नहीं रही है पर हाथ के एल्बो तक सुन्दर डिज़ाइन की मेहँदी लगी हुयी है, जो उनकी ब्यूटी को और निखार रहा है. अब वह सच मुच एक वैसी लड़की लग रही है, जो बस शादी के लिए अब दुल्हन बनने जा रही है.
रेस्टोरेन्ट में पहुच ते ही हम थोडे चौंक गये. इस टाइम इतना बड़ा रेस्टोरेंट आलमोस्ट फुल है. हमें मालूम है परसो एक शादी है, लेकिन उसका सब गेस्ट तो आज आये नहीं सुना था हमारा यह सवाल मैनेजर ने पड़ लिया और वह खुद हमें बताने लगा की यह रेस्टोरेंट सब के लिए ओपन है. बाहर से लोग डिनर करने आते है फॅमिली के साथ. यहाँ डिस्को भी है. सो सब टाइप के लोगों की भीड़ लगी रहती है. वह हमें रास्ता दिखाके एक सेपरेट एरिया में लाया. यहाँ लोग कम है. टेबल्स भी दुर दुर है. और दो चार टेबल भरे हुये है. जहाँ केवल फॅमिली टाइप लोग बैठे हुए है कुछ बच्चों के साथ. यहाँ आवाज़ थोड़ी कम है और उस रेस्टोरेंट से थोड़ी आवाज़ यहाँ तक आ रही है. टेबल पे केवल हम चारो है. दो वेटर हमारे लिए है वहा
मैने टेबल के पास रखी हुई चेयर्स को थोड़ी बाहर निकाल के नानी और माँ को बैठने के लिए हेल्प किया. और नानाजी टेबल के अपोजिट साइड में नानी की सामने बैठे. सो मुझे माँ के अपोजिट में उनके सामने बैठ्ना पडा माँ मुझे नहीं देख रही है. नानी से धीरे धीरे बात कर रही है, या तो नाना को बात करते हुए एक आध बार देख रहा हु. बस मुझसे नज़र हटाके रखी है. मैं उनकी तरफ बार बार देख रहा हु नाना नानी की नज़र छुपाके. एक बार चाह रहा था की वह भी मुझे देखे. हम आमने सामने बैठे है. कल हम शादी कर के पति पत्नी के रिश्ते में जुड़ने जा रहे है. वह मेरी बीवी बनने जा रही है. बस यही सब चिंता मेरे अंदर उनके प्रति चाहत और बढ़ती जा रही है. उनका इस तरह शरमाना, उनके मेहँदी लगे हुये हाथ, होंठो की मुस्कान, सांस के साथ साथ छाती का हल्का हल्का कम्पन ..यह सब मुझे बस उनकी तरफ खिचे जारहा है. मुझे मालूम है की शादी से पहले वह अब मेरी बाँहों में नहीं आने वाली है. पर में उनको एकबार बाहोंमे भरके उनके दिल की धड़कन महसुस करना चाहता हुं.

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