मिस्टर & मिसेस पटेल (माँ-बेटा:-एक सच्ची घटना) | Update 25

मिस्टर & मिसेस पटेल (माँ-बेटा-एक सच्ची घटना) Maa aur Bete me Pyaar
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हम सुबह ५.३० बजे बांद्रा टर्मिनस पे उतर गये. गर्मी का मौसम था सुबह की नरम शीतल हवा से बहुत अच्चा लग रहा है. नाना नानी मुंबई आकर थोडे उदासीन भी हो गये. नाना की शादी के बाद वह लोग कुछ दिन मुंबई में थे. यहाँ नानाजी बिज़नेस सुरु किया था बाद में शिफ़्ट होकर अहमदाबाद चले गये. वहाँ माँ का जनम हुआ. और आज तक वह लोग वहि अपना घर बना लिया . आज यहाँ फिर पूरा फॅमिली के साथ आकर वह लोग थोडे भावूक बन गये. नाना उनके जवानी की बहुत सारी पुराणी बाते बताने लगे. हम स्टेशन से टैक्सी लेकर उसमे सारे लगेज लोड करके रिसोर्ट के लिए चल पडे क़रीब देड घंटे का रास्ता है. माँ सुबह से चुप चाप है. केवल नानी के साथ कुछ बात चित कर रही है. मैं नज़र चुराके दो चार बार उनको देख लिया. मेरा मन अब ख़ुशी से हस रहा है. माँ के अंदर भी एक खुशी की उत्तेजना फैली हुई है, और वह उनका चेहरा देखके, आँखों की हलचल देख के और शारीरिक हलचल देख के पता चलता है. वह नानी के ही आस पास घूम रही है. नानी के साथ ही चल रही है. वह मेरे तरफ देख ही नहीं रही है. मैं सोचता हु की माँ के मन में क्या मेरे लिए , मेरे प्यार के लिए कोई तूफ़ान हो नहीं रहा है!! केवल मेरे अंदर ही है !!! आज बहुत दिन बाद हम पूरी फॅमिली घर से एकसाथ बाहर आकर सब को अच्चा लग रहा है. मैं भी माँ के साथ बहुत दिन ऐसा दुर कहीं आया नहीं था इस लिए आज इस मुंबई शहर में हम एकसाथ आकर हमारे बीच का बॉन्डिंग सब को मेहसुस होने लगा. हम एक फॅमिली है. सब एक दूसरे के लिए ही है. और अब तो और भी नज़्दीक रिलेशन पे जुड़ने जा रहे है. कोई अन्जान लड़की नहि, इस घर की बेटी ही इस घर की बहु बन के आरही है. इसी घर का बेटा इसी घर का दामाद बन के ज़िन्दगी भर एक दूसारे से जुड़े रहने का संपर्क बांध ने जा रहै है. टैक्सी में में ड्राइवर के पास बैठा हु. पीछे नाना, नानी और नानी के पास माँ बैठि हुई है. नानी बीच बीच में माँ को पकड़के रख रही है. माँ के पीछे से हाथ घुमाके उनके दूसरे बाजु पकड़ के अपने पास, अपने दिल के और पास संभाल के रख रही है. एक लौती बेटी. सारा सुख-दुःख उनको घिरके ही है. और आज ऐसा लग रहा है की जैसे उनकी बेटी शादी करके दुर चले जायेगी उनका घर खाली करके, और इस लिए जितना टाइम मिले माँ बेटी एक साथ रहके अपना मन का प्यास मिटा पाई. नानाजी जाते जाते एक एक जगह दिखा रहे है और वह यहाँ क्या क्या किया है वह सब बता रहे है. नानी जी भी बीच बीच में उनका साथ देकर बातों का लिंक जोड़नेलगी. मैं आगे बैठके पीछे नाना का बात सुनने के लिए बीच बीच में पीछे मुड़के देख रहा हु. और तभी एक झलक माँ को देख ले रहा हु. माँ बस बाहर की तरफ नज़र टीका के रखी है . पर मालूम पड़ रही है की उनका मन हमारे बीच में ही है. वह हम सब के बीच होकर भी अकेली हो रही है. उनके होंठो पे हलकी सी स्माइल और आँखों के लाज और शरम की जो छांया दिख रही है, उसमे पता चलता है की वह मन में एक ख़ुशी की अनुभुति मेहसुस कर रही है. पर एक बार भी मुझसे नज़र नहीं मिला रही है. बाहर से हवा आकर माँ के माथे के ऊपर का कुछ बाल उडाके उनके चेहरे पे फेंक रही है. माँ बार बार हाथ से उन बालो को हटाके अपने कान के पीछे ले जाके समेट नेकी कोशिश कर रही है. उनके इस तरह हलकी हलकी मुस्कुराती हुई चेहरे से बाल हटाने का स्टाइल देख के मेरे मन में उनके लिए प्यार और सेक्स दोनों ही जग रही है. एक ओर्गिनेस्स मुझे घिरके रखा है. और उसका पता चलता है मेरे जीन्स के अंदर मेरे लिंग का छटफटानेसे . मैं लिंग को दबाके पैर के उपर दूसरे पैर चढाके , पीछे घुमने के लिए राईट हैंड को हेड रेस्ट के ऊपर रखके तेढा बैठा हुआ हु. नानाजी की बात सुनने से ज़ादा मुझे माँ को चुरा के देखने का ज़ादा ईरादा है. पर में इस तरह पीछे मुड़के बैठा हु, और वह माँ का विज़न एरिया में उनको पता चल रहा है. मेरे तरफ ना देख के भी, वह उनके आय साइड के अंदर हल्का हल्का मेहसुस कर रही है की में उनको भी देख रहा हु बीच बीच मे. और इसलिये वह और भी नज़र बाहर से अंदर के तरफ नहीं कर रही है. लास्ट वीकेंड में घर आकर उनको छु के मेहसुस करने का एक मौका मिला था पर इस बार तो वह मेरे नज़्दीक ही नहीं आई है. मुझे एकबार उनको मेरे बाँहों में भरके मेरे छाति के ऊपर मेहसुस करने का मन कर रही है. और उनके वह उड़ने वाले बालो के अंदर मेरी नाक डूबो के उनके बालो की खुशबू लेने का मन कर रहा है. पर शायद वह हमारे शादी से पहले मुझे मेरी खवाइश पूरी नहीं होगी. और फिर सुहागरात में उनको प्यार और सिर्फ प्यार से उनका पूरा तन मन भर देना चाहता हु. हम सुबह का खाली रोड पकड़ के जल्दी जल्दी रिसोर्ट पहुच गये.

यहाँ हमारे लिए दो आदमी वेट कर रहे थे. हमारे आने का पूरा प्लान उनलोगो ने चेक आउट किया हुआ था जैसे ही टैक्सी पहुंची, वह लोग आगे आकर हमसे परिचय किया और में दूल्हा और माँ को दुल्हन जानके हम दोनों को विश किया. फिर हमें सब बता बता के हमारे रहने की जगह पे ले जाने लगे. टोटल ४ सूटकेस था एक मेरा,दूसरा नाना नानी का, तीसरा शादी का सामान भरा हुआ और चौथा माँ का. माँ यहाँ से सीधा मेरे साथ एमपी जानेवाली है. तोह उनका कुछ सामान, जो वह शादी के बाद भी उसे रखना चाहती है, वह सब सामान, कुछ कपडा वगेरा भरके लायी है. वह लोग रिसोर्ट का दो बॉय को बुलाके हमारा सामान हमारे रूम पे ले जाने के लिए कहा. रिसोर्ट बाहर से देखने में छोटा है. पर अंदर जाते ही बहुत बड़ा एरिया का पता चलता है. लेफ्ट साइड में रेस्टॉरंट, डिस्को और पुलसाइड पब है. सीधा जाके एक बिल्डिंग है. दो मंजिला. और राईट में पूरा एरिया खाली है. घास को मेन्टेन करके रखा है. यहाँ उनलोगों का ओपन मैरिज या और कोई पार्टी होता है. और गेट के बाहर एक पार्किंग एरिया देख के आया हु. हम जैसे थोडे आगे जाकर राईट मुडे, वहां उस बिल्ड़िंग के पीछे विशाल एरिया लेकर बहुत सारे छोटा छोटा टेंट जैसा कॉटेज बना हुआ है. बीच में एक लम्बा नैरो वाटर पूल है. उसमे से फुआरा उठ रही है. और उसके चारों तरफ वह कॉटेज है. वह लोग हमें वहि ले जाकर बताया की वह लोग सारे मैरिज में आने वाले गेस्ट्स और फॅमिली मेंबर्स को यही रुकवाते है. और वह दो मंजिला बिल्डडीग केवल इनसाइड बुफे और शादी के लिए हॉल बना हुआ है. जहाँ पार्टी भी हो सकती है. बाकि एडमिनिस्ट्रेटिव सेक्शन और पीछे किचन और कैटर्रिंग का इंतेजाम. अब फिलहाल दो शादी का अरेंजमेंट चल रहा है. वेडनेस्डे को एक बड़ा शादी का बुकिंग है. उसके कुछ मेहमानआचुके है. और कल की शादीके लिए बस हम लोग. हमारा छोटा प्रोग्राम है. इस लिए वह सब कुछ सामने वाले बिल्डिंग के अंदर ही अरेंज किया हुआ है.

हमारे लिए केवल दो कॉटेज बूक है. दोनों फॅमिली कॉटेज है. एक में माँ और नानी चली गयी और दूसरे में में और नानाजी. उन दो आदमी में से एक आदमी हमारी बुकिंग का हेड है. उनके देख भाल से यह शादी का प्रोग्राम होगा. हम जैसे ही कॉटेज के अंदर घूसे तो चौंक गये. बाहर से पता नहीं लगता की अंदर इतना सुन्दर और सुब्यबस्था है. स्पेसियस एरिया में दो डबल बेड रूम के दोनों साइड पे लगा हुआ है. दो कपबोर्ड है. बैठने का अरेंजमेंट में सोफा और सेंटर टेबल रखा हुआ है. दिवार पे बड़ा एलसीडी टीवी लगा हुआ है. एक फ्रिज है. और अपोजिट वाल पे एक बड़ा विन्डौ. जिसके बाहर पेड़ की सारी लाइन है. और उसके पार खाड़ी है, जहाँ प्राइवेट ज्याट बनाके वह लोग प्राइवेट स्टीमर सुहागरात के लिए देते है. मैं बाथरूम चेक करने गया. और बड़ा बाथरूम में सब मॉडर्न फैसिलिटीज का इन्तेज़ाम है. बाथरूम से बाहर आतेहि वह मैनेजर साहब नानाजी को बताने लगा की क्या क्या और कैसे प्रोग्राम सेट किया हुआ है. एक प्रिंटेड पेपर दिया उन्होंने. उसमे सब डिटेल्ड लिखा हुआ है टाइम के साथ. कब हल्दी का रसम, कब रिंग सेरोमनी, कब रजिस्ट्री सिग्निंग, कब शादी वैगेरा वैगेरा सब कुछ लिखा हुआ है. हमारे गेस्ट नहीं है इस लिए रिसेप्शन और फ़ूड के जगह पे क्रॉस किया हुआ है. मैं उनसे वह लेकर देख रहा था आज दो रसम सेट किआ हुआ है. दोपहर को हल्दी है और शाम को रिंग सरमोनी. वह आदमी बता रहे थे की यहाँ के पण्डितजी के मुताबित , उनका दिया हुआ टाइम मेन्टेन करके हम यह चार्ट बनाते है. सब पूरा रसम और तरीका प्रॉपरली मेन्टेन करके , शास्त्र सम्मत से यहाँ शादी का इन्तेज़ाम होता है. उन्होंने उनका मोबाइल नम्बर भी दिया. कोई भी प्रॉब्लम होगा तो उनको सीधा कॉल कर सकते है. दोपहर में हल्दी रसम ठीक टाइम पे सब रेडी हो जायेगा और हमें लेने के लिए वह आएंगे. वह मैनेजर अब हमें फ्रेश होने को कहा और बताया की रूम पे ही ब्रेकफास्ट भेज देंगे. बोलके वह फिर से और एकबार स्वागत और विश करके निकल गये. नानाजी मुझे फ्रेश होने के लिए कह्के वह एक कॉपी प्रिंटेड चार्ट लेके निकल गए नानी के रूम पे. नानी को भी पूरा चीज़ बतानी है. माँ भी जान जायेंगे कब और कैसे क्या क्या होगा. मैं फ्रेश होने के लिए बाथरूम में चला गया.

जब फ्रेश होकर बाथरूम से निकला तब नानाजी रूम पे वापस आगये. उनके हाथ में कुछ कपडे है. वह नानीजी के रूम में रखी हुई उनके सूटकेस से यह लेके आये है. मुझे बाहर निकलते हुए देखके वह बोले की अब तो सोने को ज़ादा टाइम नहीं मिलगा. ११.३० को हल्दी का रसम है. सो में तुम्हारा नानी को भी बता दिया. वह लोग भी फ्रेश होकर ब्रेकफास्ट करके बस थोड़ी रेस्ट कर लेगी और फिर तैयार हो जायेगी हल्दी के लिये. मैं यह सुन के थोड़ी शर्म और ख़ुशी मेहसुस किया. नाना नानी खुद मेरे और माँ का यह रिश्ता चाहते है. वह लोग अपने हाथों से हमारे इस नये रिश्ते को जोड रहे है और हमें हमारे नए रिश्ते में कदम रखने के रास्ते में हर मोड़ पे हमारा साथ देते हुए आरहे है. वह लोग भी चाहते है की उनकी एक लौती बेटी ज़िन्दगी भर जो दुःख और अकेलेपन के सहारे जी है, अब वह ख़ुशी के पलों में बदल जाये और उनकी ज़िन्दगी हर लड़की की तरह अपने पति के साथ गुजार ने में जो सुख और शान्ति मिलती है, वह पा ले. और फिर में उनका इकलौता पोता भी हु. बचपन से उनका सारा प्यार और ममता मेरे ऊपर ही बरसाया उन्होंने. सो आज वह लोग भी चाहते है की अपना ही पोता अपने ही घर पे दमाद बनके रहेगा और सब मिलके एक ख़ुशी के महल में जिन्दगी गुजरेंगे. इस लिए वह इस शादी को शास्त्र अनुसार सब रसम प्रक्रिया पूरा करके करना चाहते है.

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