मिस्टर & मिसेस पटेल (माँ-बेटा:-एक सच्ची घटना) | Update 15

मिस्टर & मिसेस पटेल (माँ-बेटा-एक सच्ची घटना) Maa aur Bete me Pyaar
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मुझे वहां खड़े खड़े उनके जाने की दिशा में देखते देखते महसुस होने लगा की अगले १६ दीन….बस अब १६ दिन नही, बल्की १६ साल जैसे लगने लगे. नानाजी पण्डितजी से शादी की डेट पता करके आये है. वह शुभ मुहूर्त आज से १६ दिन बाद है.
अब हालत ऐसी है की इतना कुछ होने के बाद अब १६ दिन रहेंगे कैसे. अब मुझे एक भी पल उनको छोड़के रहने का मन नहीं कर रहा था

पर हा…तब मुझे पता नहीं था की इन १६ दिनों में बहुत कुछ होगा, बहुत कुछ मिलेगा हमे, जो हमारे आगे की ज़िन्दगी जीने का रास्ता सहज कर देगा. और साथ में मुझे एक नई चीज़ भी मिलेगी, जो आज तक मेरे नसीब मेंनहीं हुआ था कुछ दिन के लिए मुझे अपनी ही होनेवाली बीवी के साथ छुप छुप के प्यार करने का मौका भी मिल गया था

वास्तव में आज सुबह एमपी पहुँचके ,जल्दी जल्दी फ्रेश होकर दौड़ लगाया साइट की तरफ. ऑफिस की गाड़ी थी मुझे पहुचाने के लिये. मैं वह लेके जब साइट पंहुचा तब सब मेरे लिए ही वेट कर रहे थे ब्रिज कंस्ट्रक्शन चल रहा है. एक तरफ की एंट्री पूरी होने जा रही है , तो उसे सुपरवाइज़ करके देखना पड़ रहा था प्लानिंग और डिज़ाइन के मुताबित सब बराबर जा रहा है की नही. मैं इस काम में नया हुँ. पर कुछ काम ऐसे होते है जो इंसान अपनी बुध्धि, मेधा और कॉमन सेंस लगा के जल्दी पकड़ लेता है. आज का दिन बहुत भारी था पूरा दिन साइट पे बिताके शाम को जब वापस आया , तब बॉडी में कुछ बचा नहीं था घर आके बिस्तर पे लेट गया और बस अब नीद टुटा. दिन भर की थकावट के साथ साथ पिछले कुछ दिन से नीद भी कम हो रहा था आज उसी का असर एकसाथ पड़ गया.
तेज भूक लग रही थी जल्दी से फ्रेश होकर खाने गया तो फस गया. अब याद आया. जो आदमी टिफ़िन सप्लाई करता है, आज वह दिन में ही फ़ोन करके बता दिया था आज रात को खाना दे नहीं पायेगा. पर तब इतना बिजी था की में ‘हउम’, ‘हा’, ‘ठिक है’ बोलके काट दिया था और बाद में एकदम भूल गया. मैं यहाँ एक मोहल्ले के अंदर रहता हुँ. मार्किट थोडी दूर है. ऑफिस के रस्ते मे. सो अब इस हालत में इतनी रात में बाहर जाके खाना खाने को एनर्जी नहीं मिला. मैं किचन में गया. फ्रिज में केवल अंडा मिला. संडे रहने के कारन न दूध न ब्रेड कुछ था नही. उस अंडे और मैगी लेके बनाना शुरू किया. मुझे बस इतना ही पकाना आता है. कभी माँ किचन में जाने ही नहीं दिया. और बैचलर लाइफ का भरोसा मैगी अंडे से ही कभी कभी काम चलाता हुँ. पर अचानक मन में आया की अरे अब तो मेरी बैचलर लाइफ ही ख़तम होने जारही है. अब तो फॅमिली मैन बनने जा रहा हुँ. कुछ ही दिन में मुझे फिर से माँ के हाथ का खाना खाने का सौभाग्य होगा. लेकिन यहाँ मुझे माँ का नही, मेरा पत्नी का, शादी किया हुआ बीवी के हाथ का खाना मिलेगा. मैं मैगी बनाते बनाते कल के बारे में सोच रहा था माँ को मालूम था की में बैग लेने के लिए रूम मै जाऊंगा. इसलिए वह जल्दी से नानी के हाथ टिफ़िन बॉक्स भेजकर , फटा फट पीछे के बरामदे से जाके मेरे रूम में चलि गयी और मेरा इंतज़ार करती रहि. यह सब सोच के मन में एक ख़ुशी का आवेश आने लगा. माँ कल मुझे संमझा दिया की वह हमारे नये रिश्ते के लिए अब कितनी खुश है. वह मुझे दिल से चाहती है. मुझे अपने पति के रूप में प्यार करना शुरू किया. यह सब उनकी हरकतों से और उनकी नज़रों से मुझे संमझा दी. वह चाहती थी की मेरे मन में जो दुविधा, संकोच और बहुत सारे सवालों का तूफ़ान चल रहा था में इस बार एमपी आने से पहले वह सब क्लियर हो जाये. सो लास्ट मोमेंट में खुद आके वह सब कुछ जताके गयी. अब में उनको बीवी के रूप में सोचु यह बात भी उन्हेंने संमझा दी. आज दिन भर इस बारे में सोचने का टाइम ही नहीं था पर अब में उनको मिस करना शुरू किया. न जाने क्यों, अब मुझे उनको मेरी बाँहों में भरके, आँखों में आँखे डालके उनके चेहरे की तरफ बस देखते रहु..बस इस ख्वाब से मन चंचल होने लगा

मैगी बन गई थी बेड रूम में लेकर टेबल पर रखा और बिस्तर पे बैठके वाल पे पीठ टीका के एक एक चम्मच उठा उठा के खाने लगा. पर मन में एक तूफ़ान चलने लगा. अब मुझे माँ का स्पर्श पाने के लिये, उनके दिल की धड़कने महसुस करनेके लिए और उनकी मिठी आवाज़ सुनने के लिए मन बेताब हो रहा था मैं मोबाइल लिया.इस वक्त पौने दस बज रहे थे मैं मोबाइल को एक हाथ से घुमा फिरा रहा था और सोच रहा था की अब इतनी रात को क्या जागी होगी!! अहमदाबाद का घर पर साधारणता हम सब ८.३० में डिनर और ९.३० में सब अपने अपने रूम मे. मैं फिर भी आज मेरा लक ट्राय करने लगा. मैं मोबाइल का मेसेज ऑप्शन में जाके एक एसएमएस टाइप किया ” मुझे अभी तुमसे बात करने के लिए मन चाह रहा है”. जब वापस पडा, मुझे खुद को बेवकूफ लगा. फिर में कुछ टाइम सोचा और डिलीट करके केवल ‘हाय’ लिखा. पिछले एक हप्ते से उनसे मेरा कोई डायरेक्ट कन्वर्सेशन हुआ नही. और अब तो सिचुएशन एकदम अलग है. तो में एहि सही सोचा और माँ को भेज दिया. कल माँ खुद को मेरे पास सरेंडर करके, मेरे लिए उनका प्यार जता दि, फिर भी मेरे मन की सब भावनएं और संकोच अभी तक पूरी तरह दूर नहीं हुआ. कुछ कुछ चीज़ें शर्म बन के मेरे अंदर बैठी हुई है. और में जानता हु वह रहेगा. एक रिश्ते को भूल के दूसरे एक नए रिश्ते में जुड़ने जा रहे है हम दोनो. समय के साथ साथ वह नए रिश्ते हमारे बीच स्ट्रांग होते रहेंगे. मुझे मालूम है की खुद को मेरे पास सरेंडर करने के बाद भी माँ को भी टाइम लगेगा सब कुछ एडजस्ट करने के लिये. इन्ही सब भावनाओं के बीच मेरा खाना हो गया था पर मेरा मन बार बार मोबाइल पे जा रहा है. अब तक कोई रिप्लाई नहीं आया. शायद वह सो गई. मैं सोचा उनको रिंग करु. फिर लगा की अगर उनको उठने में टाइम लगेगा तोह नाना नानी को भी वह आवाज़ सुनाइ देगा. नानी जी अनिद्रा पेशंट है रात में जगा रह्ते है कभी कभी. अगर वह सुन लिया तोह समझ जायेंगे इतनी रात किसका फ़ोन है. क्यूँ की माँ को ज़ादा कोई फ़ोन करता नहीं है, में ही जो करता हुँ. पहले होता तो इतनी रात ठीक था लेकिन अब मुझे एक शर्म आने लगा. मैं निराश हो गया. मैं बाउल और स्पून लेके किचन जाने के लिए जैसे ही उठा एक एसएमएस आया. मेरे मन में एक अजीब अनुभुति फ़ुट ने लगी. मैं तुरंत एसएमएस देखा. माँ ने भेजा है. उन्होंने भी केवल ‘हम्म’ भेजा. मेरे होठो पे मुस्कराहट खेल गई. मैं समझ गया वह जागी हुई है और वह भी मेरे जैसी हर पल भावनाएं और ख़ुशी की एक अद्भुत मिश्रण अनुभुति से घिरा हुआ है. मैं फिर से बेड पे उठके बैठा और गोद में एक तकिया लेके वाल से टेक लगाके रिप्लाई करने लगा. अब जब वह मेरे से बात सुरु कर दिया है, तभी मेरी सब बातें अंदर ही अंदर दौड़ने लगी. सही शब्द ढूँढने लगा में. कुछ न पाके लिख दिया ‘मा तुम अभी भी जागी हो?’. मैं सेंड बटन दबाने ही वाला था की में रुक गया. और एक बार नज़र फिराके टेक्स्ट को करेक्शन किया. क्या तुम अभी भी जागी हो?’ भेज ने के बाद में मोबाइल स्क्रीन पे नज़र लगा के बैठा हु पर दिमाग में और कुछ चल रहा है. मैं इस बार अहमदाबाद जाके भी उनको माँ कह के बुला रहा था पर कल के बाद मुझे लगा की मुझे अब जल्दी पूरी तरह से नये रिश्ते को अपनाना पडेगा. बिप बिप. माँ रिप्लाई भेजीं है ‘हममम’ बोलके. शायद उनको इस सवाल का जवाब देणे में शर्म आया होगा. क्यूँ की उतना लिखने में बहुत टाइम लगा दि. मेरा मन ख़ुशी से भर रहा है. अभी भी जागी है !! शायद वह भी उनके अंदर की जो उनकंफर्टबले चीज़ें है, वह सब को सोच के, उसको तोड़मोड़ करके कुछ उपाय निकाल ने की कोशिश कर रही होंगी. मेरे दोनों हाथो के थंब अब मेरे मोबाइल की पैड के उप्पर नाच रहैं है. मन में तूफ़ान और दिमाग में संकोच. समझ नहीं आया क्या करूँ–कैसे करूँ या डायरेक्ट फ़ोन लगाउ. मैं ने टाइप किया “क्या में तुम को फ़ोन कर सकता हु?’. पहली बार अपनी माँ से इस तरह बात कर रहा हुँ. आज तक जब चाहे, जहाँ से चाहे , उनको फ़ोन किया. न मेरे मन में कोई संकोच , न वह कभी कुछ कहती. आज हम दोनों ज़िन्दगी की राहों में ऐसा एक मोड़ पे खड़े है, की कुछ भी करने से पहल, बोलनेसे पहले मन में दुविधा आ रही है. जैसे हम अन्जान दो इंसान है. इतने सालों का सब कुछ अचानक बदल गया और हम अब नाप तोल के सब कुछ करने में लगे है. लेकिन हा…मैं यह भी जनता हु की में उनके बारे में और वह मेरे बारे में अब तक जितना भी कुछ जाणू ना क्यूं, अब से हम को दूसरे तरिकेसे एक दूसरे को जानना शुरू करना पडेगा. अब एक दूसरे के दिल का दरवाजा, जो दरवाजा केवल ज़िन्दगी में अपने जीवनसाथी केलिए ही खोलते है, उसको खोलना पडेगा. टाइम निकल गया, पर रिप्लाई आया नही. शायद अब माँ फ़ोन पे डायरेक्ट बात करने में शर्मा रही है.

 

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