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मासी का घर

अध्याय 7 – उपद्रवी कौन है? (Who’s the Troublemaker)

पिछले Update में, मैं जब पेशाब करने जा रहा था तब मासी के कमरे में झांकने पर मुझे उनके नग्न अवतार के दर्शन हुए। उन्हें इस रूप में देख मेरा मन काफी ललचाया मगर जब मैंने देखा कि वह नाराज और परेशान है तो मेरी खुशी भी परेशानी में बदल गई।

अब आगे; मासी के उभारों को और उनके बड़े स्तन एवं मुलायम गांड देख कर मेरा लौड़ा उठ कर नाचने लगा। मगर मासी की आंखों में आंसू थे, वे परेशान थी।

उन्हें देख में भी मायूस होकर अपने कमरे में चला गया, यहां तक मैं मूतना ही भूल गया। मगर जैसे ही में अपने बिस्तर पर लेटा, उसका वह नग्न दृश्य मेरे आंखों के सामने झलकने लगा। उनकी उस दशा को याद करके मैंने मुठ मारी और सो गया।

सुबह, शायद 7 बजे के आस पास मुझे मेरी झांटो पर गर्म हवाएं महसूस हुई। मेरे निचले हिस्से में अचानक गर्मी बढ़ने लगी और वह कुछ गिला गिला महसूस हुआ।

मैंने जब उठ कर देखा तो विशाखा ने मेरी काला तलवार अपने मुंह में पकड़ रखी थी। वह मेरे लंड को ऐसे चूस रही थी जैसे straw से कोई कोल्ड ड्रिंक चूस रही हो।

फिर धीरे से उसने उसके मुंह को हिलाना चालू किया और मेरे लौड़े को अंदर-बाहर अंदर-बाहर करने लगी। उसका वह Blowjob वाकई काफी संतुष्टि देने वाला था। वह मेरे लंड को पूरी तरह से उसकी थूंक से भीगा चुकी थी।

मैं कराह (moan) रहा था, तभी मेरे लंड में झनझनाहट हुई और मैंने मेरे पूरा माल उसके मुंह में छोड़ दिया।

मुझे मेरे लिंग पर काफी गिला गिला महसूह हो रहा था। फिर मेरी नींद एकदम से खुली। वह एक सपना था, हकीकत में मेरे कमरे में मेरे अलावा कोई नहीं था।

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मैंने नींद में मेरे लंड का पानी अपनी बॉक्सर में ही निकल दिया था। मेरी चड्डी गीली हो गई थी।

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अब मुझे जल्दी नहाना होगा ताकि इस चीज से मुझे छुटकारा मिले।

मैंने उठकर अपने कपड़े पहने और नीचे हॉल में चला गया। जैसे ही में नीचे पहुंचा वैसी मुझे एक सुंदर लड़की के दर्शन हुए, विशाखा के। उसने अपना योगा outfit पहना हुआ था, शायद वह अभी ही अपनी योगा क्लासेस से वापिस आई थी। वह green tea पी रही थी।

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उसने मुझे देखा और मुस्कुराने लगी। मैं जाकर उसके आगे वाले सोफे पर बैठ गया। उसी समय, मेरी मासी एक सफेद साड़ी पहने हुए और हाथ में एक पूजा की प्लेट ले कर वहां आई।

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उन्होंने अगरबत्ती का धुआं पूरे रूम में फैलाया, लगता है उन्होंने अभी अभी नहाया है और पूजा कर के आई है। उनके चेहरे पर आज खुशी थी। कुछ देर बाद मासी वापिस चली गई।

विशाखा ने मुस्कुराते हुए मुझे देखा और हंस कर बोली,

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विशाखा: “तो क्या सोचा तुमने?”

मुझे समझ नहीं आया वह किस बारे में बात कर रही थी। मैने उससे पूछा,

मैं: “किस बारे में?”

विशाखा (हंसते हुए): “अपने बच्चे के बारे में?”

मैं भी मुस्कराया और मजाक में कहा,

मैं: “अरे पहले शादी तो कर लो!”

विशाखा थोड़ी सीरियस होकर बोली,

विशाखा: “क्या ऐसा हो सकता है? क्या घर वाले मानेंगे?”

सच बताऊं तो ये अपने आप में ही एक तकलीफ थी, अपने ही परिवार में प्यार और शादी, समाज के हिसाब से यह गुनाह है। लेकिन आज के आधुनिक समय में कुछ भी मुमकिन है। फिर मैंने यू ही मजाक में उससे कहा,

मैं: “तो मैं तुम्हे भागकर ले जाऊंगा।”

विशाखा की आंखें बता रही थी कि वह इस मामले में थोड़ी सीरियस हो गई है। उसके आंखों में मेरे लिए जो प्यार था वह पूरी तरह सच्चा था। वह शर्माते हुए उठी और अपना green tea का खाली ग्लास रखने किचन में चली गई।

मैंने काफी देर तक मोबाइल देखा और घंटों बाद नहाने गया। नहाने के बाद जब में अपने कमरे में कपड़े पहन रहा था तभी मेरे पीछे विशाखा आ गई। मेरी नजरे दूसरी तरफ थी तो मुझे एहसास नहीं हुआ लेकिन वह मुझे कुछ कहे बगैर सिर्फ मुझे देखती रही। मैं अधनंगा था, मतलब मैने शर्ट या टीशर्ट कुछ भी नहीं पहना था।

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जब मैं पीछे मुड़ तब अचानक से उसे देखा। वह मुझे ही देखे जा रही थी, साइड वो मेरी बॉडी को देख रही थी।

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मैने मेरी भौंह को उठाकर इशारे में उससे पूछा, ‘क्या हुआ?’। उसने ना के उत्तर में सिर हिलते हुए इशारे में कहा, कुछ नहीं!’। बाद में जब मैंने टीशर्ट पहना तब उसने कहा,

विशाखा: “चलो, खाना तैयार है।”

फिर हम खाना खाने नीचे डायनिंग रूम में चले गए।

डायनिंग टेबल पर मासी पहले से ही बैठी हुई थी। लेकिन उन्हीं अपने कपड़े बदल लिए थे, मगर वे आज खुश और हमेशा जैसी नजर आ रही थी, मैंने उन्हें यूं ही पूछा,

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मैं: “मासी अपने सारे क्यों उतर दी, आप पर अच्छी दिख रही थी।”

मासी (हंसकर): “सच में? लेकिन उसमें गर्मी हो रही थी।”

हमने खाना शुरू किया। खाने के बीच में ही मासी के फोन पर किसका मैसेज आया। उन्होंने उसे देखा और उनकी खुशी मायूसी में बदल गई। उस मैसेज को देख कर मासी का चेहरा फीका पड़ने लगा।

खाना खत्म होने के बाद उस बारे में कोई बात नहीं हुई। विशाखा अपने योगा क्लास की मीटिंग में चली गई और मैं TV देखने लगा। घर पर सिर्फ मासी और मैं था।

तभी मासी के फोन पर कोई कॉल करता है। वह उस कॉल को देख कर और भी परेशान हो जाती है और उसे कट कर देती हैं। 5 मिनट बाद फिर से कॉल आता है और मासी कट कर देती है, ऐसा और 2 बार हुआ। फिर मैंने जा कर पूछ ही लिया,

मैं: “क्या हुआ मासी किसका कॉल है? कबसे कॉल किए जा रहा है, आप उठा क्यों नहीं रही?”

मासी (बेचैन हो कर): “कुछ नहीं बेटा, वो credit card वाले है।”

मैं: “अगर कोई परेशानी हो तो मुझे दीजिए मैं बात करता हूं उनसे।”

मासी: “अरे नहीं नहीं, कोई दिक्कत नहीं है।”

फिर मैं जाकर TV देखने लगा। शायद मासी ने फोन अब साइलेंट कर दिया था लेकिन मुझे समझ आ रहा था कि वह जो कोई है वह बार बार मासी को मैसेज या कॉल करके डरने की कोशिश कर रहा है। वह कोई इंसान है जो मासी के परेशानी की वजह है।

देखते ही देखते दोपहर की शाम हो गई और मैं TV देखने के बहाने मासी पर नजर रख रहा था। अगर कोई दिक्कत हो तो झट से जा सकू। अब विशाखा भी लौट आई थी, बाहर दिन ढल रहा था और अंधेरा हो रहा था।

उस समय, विशाखा छत पर जाकर खुले असमान को देख रही थी। तभी छत से कुछ टूटने की आवाज आई और विशाखा भी चिल्लाई।

मासी और मैं भाग कर ऊपर गए और देखा तो वह किसी ने कांच की बोतल फेंकी हुई थी जो गिर कर टूट गई। विशाखा इस चीज से काफी डर चुकी थी, वह रो रही थी। मैंने उसे शांत करवा कर नीचे लाया और मासी ने उसे अपने पास बैठा कर दिलासा दिया।

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मैं बाहर जाकर देखने लगा कि यह किसने किया और कहा से किया गया है, मगर मेरी हाथ सिर्फ निराशा लगी। फिर में घर के अंदर गया और मासी एवं विशाखा से कहने लगा,

मैं: “ऐसा कौन कर सकता है? जो भी था उसने यह अच्छा नहीं किया।”

मासी: “जाने दो बेटा, शायद ये कोई पिछले गली का शराबी होगा।”

मासी अब भी सच्चाई नहीं बता रही थी। मैं अपने कमरे में गया ताकि खिड़की से पिछली गली में देखा जा सके। लेकिन अब अंधेरा हो चुका था तो कुछ नहीं देखा जा सकता। तभी घर का दरवाजा बजता है, कुछ देर बाद फिर से कोई दरवाजा बजता है।

मैं देखने नीचे पहुंचा और मासी को पूछा कौन था। मासी ने रोने जैसी हालत में कहा,

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मासी: “पता नहीं कौन था, बार बार दरवाजा थोक रहा है और जब खोला तो कोई नजर नहीं आ रहा।”

इस बात को सुन कर में काफी हैरान था, आखिर ऐसा कौन कर रहा था और क्यों।

मैं: “रुको मैं बाहर जाकर देख कर आता हूं।”

मासी (रोते रोते): “नहीं बेटा मत जाओ, मुझे डर लग रहा है।”

मासी की यह बात सुनकर मैं रुक तो गया लेकिन दरवाजा बजाने वाला नहीं रुका। पता नहीं वह हमारे साथ क्या खेल खेल रहा था। मैने मासी को सारे दरवाजे और खिड़कियां बंद करने को कहा।

कुछ समय बाद, मासी ने विशाखा को अपने कमरे में सुला लिया और खुद भी वहां लेट गई। लेकिन मैं जाग रहा था, फिर कुछ घंटों बाद ये सब होना बंद हो गया था। मैने मासी को सोने के लिए कह दिया और खुद जागने की ठान ली।

करीब 12 बजे, मैं पानी पीने के लिए किचन में घुसा और गिलास में पानी भर ही रहा था तभी मेरे पीछे से कुछ गिरने की आवाज आई।

जैसे ही मैं पीछे मुड़, वहां एक आदमी खड़ा था। खिड़की से बाहर ही रोशनी अंदर आ रही थी इसलिए मैं उसका चेहरा नहीं देख पा रहा था। लेकिन ये जो भी था यह सारी परेशानी की जड़ थी।

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