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मासी का घर

अध्याय 6 – वो रात

पिछले update में विशाखा और मेरे बीच रोमांटिक मोमेंट्स के बाद हम घर पहुंचे। घर पहुंचने पर जब मासी मेरे पास आई तो वो काफी चिंतित थी।

अब, मासी मेरे पास आकर मेरे बाजू में बैठ गई। वो मेरे काफी नजदीक बैठी हुई थी और मायूस थी। उन्होंने पूछा,

मासी: “कहां गए थे तुम? विशाखा भी घर पर नहीं है।”

मैं (उन्हें सांत्वना देते हुए): “अरे मासी, इधर बाहर ही तो थे, विशु भी मेरे साथ थी।”

मासी की आंखें भर आई, वे नम हो चुकी थी, उनके आंसू गिरने ही वाले थे। वे काफी डरी हुई, सहमी हुई और चिंतित दिख रही थी।

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मैं (उनके लिए चिंतित): “क्या हुआ मासी? आप रो क्यों रही हैं?”

मासी ने अपने आंसू पोंछे और एक लंबी सांस ली। फ़ुफ़ूसाहट और हल्के रोने के साथ वे बोली,

मासी : “तो बता के जाना था ना, मैं कितनी परेशान हो गई थी।  ऊपर से तुम दोनों का फोन नहीं लग रहा था।”

मैंने उन्हें सांत्वना देने के लिए उसके हाथों को थाम लिया और मेरे कंधों पर उनका सिर रख दिया, एक हल्की मुस्कुराहट के साथ उन्हें कहने लगा,

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मैं: “अरे मासी, इतनी सी बात पर रोते है क्या!? हम इधर ही तो थे। बताओ क्या हुआ!?”

मासी अपने रोने को किसी तरह से रोकती हुई बोली,

मासी: “कुछ नहीं, बस चिंता हो रही थी।”

मैं (उन्हें संभालते हुए) : “ठीक है, अब आ गए हूं न। रुको मैं आपके लिए पानी लेकर आता हूं।”

मैं सोच में पड़ गया था कि जब हम उस दिन घंटों के लिए बाहर गए थे (अध्याय 3 वाले दिन) तब तो मासी इतनी परेशान नहीं हुई थी। लेकिन आज सिर्फ एक घंटे के लिए बाहर क्या गए, वे रोने लगी।

फिर जब मैं उनके लिए पानी लाने किचन में गया, तो वहां कुछ सामान बिखरा पड़ा था, लग रहा था शायद मासी खाना बनाने की तैयारी कर रही थी मगर तभी कुछ हुआ था। किचन पर आटा बिखरा हुआ था, कुछ चीजें इधर उधर थी।

मैंने इन सारी बातों पर इतना ध्यान नहीं दिया, और मासी को पानी देने के बाद उन्हें आराम करने कहा। मगर मासी किचन में चली गई और खाना बनाने लगी।

फिर मैं विशाखा के कमरे में घुसा, वहां कोई नहीं था। शायद वह छत पर होगी, ऐसा सोच कर मैं भी छत पर चल गया।

जब मैंने छत पर देखा, वहां विशाखा बैठ कर तारों को निहार रही थी। वो कुदरती नजरों के लिए सच में पागल है, लेकिन उससे ज्यादा मेरे लिए। आसमान में वो सैकड़ों तारें, उनकी वो चांदनी जो मेरे चांद, मेरी विशाखा पर गिर रही थी काफी सुंदर था वह क्षण, उस दिन का वो चांद भी फीका था विशाखा के सामने।

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मेरे वहां जाते ही उसने पीछे मुड़कर देखा, पता नहीं कैसे उसको पता चल जाता था कि उसके पीछे कोई खड़ा है। मुझे देख कर कुछ कहे बिना ही वो फिर तारों को देखने लगी।

मैंने यूं ही उसे मजाक में कहा,

मैं: “क्या अब मुझसे ज्यादा ये तारे सुंदर नजर आ रहे है तुम्हे?”

वो तारों को ही घूरे जा रही थी, बिना मुझे देखे उसने कहा,

विशाखा: “तुम सुंदर कब थे?”

उसके नजदीक जा कर, उस को चिपक कर बैठ कर मैं बोला,

मैं: “जब तुम्हे ये नजारे ही पसंद है तो मुझमें क्या देखा?”

इस सवाल का जवाब शायद ऐसा हो सकता था जिस के द्वारा मैं मासी को भी पटा सकता था, शायद उन्हें भी वह चीज पसंद आए मेरे अंदर।

विशाखा (मुकरते हुए): “कद्दू, कद्दू देखा तुम्हारे अंदर!”

मैं (खिलखिलाते हुए): “अगर ऐसा है तो कोई सब्जी वाला ही पकड़ लेती, मुझे क्यों पकड़ा?”

विशाखा ने मुझे देखा और कहा,

विशाखा (मुस्कुराई और कहा) : “बुद्धू!”

हम दोनों एक साथ हंसने लगे।

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हंसते हंसते एकदम से मेरी नजर बाजू वाले घर के छत पर पड़ती है।

वो तृषा भाभी का घर था, वहां से कोई हम दोनों को घूरे जा रहा था। वो तृषा भाभी ही थी। उनका हमें ऐसा घूरना काफी अजीब था।

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उन्हें देख कर हम दूर दूर हो गए और कुछ देर बाद हम अपने अपने कमरे में चले गए। मैं अपने बेड पर लेटे हुए मासी के बारे में ही सोच रहा था। मैंने अब तक यह बात विशाखा को भी नहीं बताई थी। खाने का समय हुआ और मासी ने हमें आवाज लगाई।

खाना खाते वक्त मासी एकदम नॉर्मल नजर आ रही थी, वे हमसे काफी हंस के बातें भी कर रही थी।

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खाना खाते वक्त मासी का चिंतित होने पर कोई बात नहीं हुई, ना खाना खाने के बाद उस बारे में बात की गई। मैं अब भी सोच में था कि हुआ क्या है।

खाने के बाद भी घंटों तक मैं अपने बिस्तर पर लेट कर अब भी उसके बारे में सोच रहा था। मैं काफी सोचता हूं। तभी मुझे व्हाट्सएप पर विशाखा का मैसेज आता है।

विशाखा: “सो गए क्या? ”

मैं: “नहीं अब तक, तुम क्यों नहीं सोई?”

विशाखा: “हां अभी सोने ही जा रही हूं । अरे सुनो ना!”

मैं: “क्या हुआ? बताओ! ”

विशाखा: “अरे यार मुझे एक विचार सोने नहीं दे रहा था। ”

मुझे लगा कि वो बात विशाखा को भी पता चल गई।

मैं: “क्या हुआ? ”

विशाखा: “अगर हमारी शादी हुई तो क्या अपने घर वाले मानेंगे? ”

विशाखा (फिर से टाइप करती है): “सोचो अगर हमारे बच्चे हुए ,  तो उनका नाम क्या रखेंगे। ”

मैं: “घर वाले नहीं मानेंगे, अब सो जाओ, अभी काफी समय पड़ा है इन सब चीजों को!! ”

विशाखा: “हां, बेटा हुआ तो अमन नाम अच्छा है । बाय, गुड नाईट।”

मैंने उससे चैटिंग करना बंद किया और शायद फिर वो भी सो गई। मुझे पेशाब आ रही थी तो में उठ कर नीचे टॉयलेट की तरफ जा रहा था।

वैसे तो पूरे घर में अंधेरा था लेकिन मासी के रूम से थोड़ी सी रोशनी उनके थोड़े से खुले दरवाजे से बाहर आ रही थी।

मेरे मन में चूल मची की छुप कर अंदर देखा जाए, मैं मूतना भूल कर अंदर झांकने लगा।

अंदर मासी अपने शीशे के सामने खड़ी हो कर फिर से चिंतित और मायूस नजर आ रही थी। वह अपने आप को देखे जा रही थी और उसके आंखों से हल्के हल्के आंसू टपक रहे थे।

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देखते ही देखते उनकी मायूसी गुस्से में बदल गई और उन्होंने अपने सारे कपड़े उतर के इधर उधर फेंक दिए। उनके शरीर पर एक कपड़ा नहीं था, वह पूरी तरह से नंगी हो गई थी।

उनका वह गदराया, औसत, सुडौल, गोरा शरीर पूरी तरह नग्न होने पर क्या माल देखता है, उनके वो बड़े बड़े बूब्स जिनके बड़ी बड़ी निपल्स थी, मन तो कर रहा था अभी उन्हें चूस लू। उसकी फूली हुई गांड देखने से ही काफी नरम नजर आ रही थी। मेरा तो लवड़ा खड़ा होकर तन चुका था।

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मगर ऐसी हालत में वह रोने लगी, काफी ज्यादा रोने लगी। अब मेरा ध्यान उनके इस उभारों वाले शरीर को छोड़ कर उनको ऐसा परेशान देख खुद परेशान हो रहा था।

वह क्या बात थी जो मासी को इतना परेशान कर रही थी, ऐसा क्या हुआ हमारे घर से जाने के बाद।

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