मासी का घर (सेक्सी मासी और मासी की बेटी) – Update 16

Reading Mode

मासी का घर

अध्याय 16 –  हवस और डर

विशाखा और मेरा मिलन होने ही वाला था, हम दोनों की काम इंद्रियां अपने चरम पर थी, मगर तभी वह कोई औरत आई, जिन्हें देख हम दोनों झट से एक दूसरे से अलग हो गए।

अब आगे;

उस औरत ने हम नौजवानों को नजदीक देखने के बाद उसका चेहरा थोड़ा शरमाया हुआ नजर आ रहा था। उसे दुकान से कुछ सामान चाहिए था, उन्होंने उनकी लिस्ट निकाल कर बताना चालू किया और मैं उस समान को निकालने लगा। 

कुछ सामान लेने के लिए मुझे थोड़ा दूर जाना पड़ा और इसी बीच विशाखा और उस औरत के बीच क्या बातचीत हुई मुझे पता नहीं, लेकिन उनके चेहरे देख कर लग रहा था कि वह बात कुछ गंभीर ही थी।

सामन लेकर मैं फोर्स काउंटर के पास आया और उस औरत को सामान थमा दिया। बिना कोई रुपया दिए वह वहां से चली गई, मैंने विशाखा से पूछने पर उसने बताया कि उनके खाते में लिखा गया है; लेकिन विशाखा इस समय झूठ बोल रही थी, उसने खाते में लिखा ही नहीं था।

फिर विशाखा कुर्सी पर बैठ गई, मगर थोड़ी उदास और गुस्सा। कुछ होने से पहले उसकी काम अग्नि शांत हो चुकी थी। मैंने उसे फिर से गले लगाया मगर उस से कोई प्रतिक्रिया न मिलने पर मैंने भी उसे उसी हालत पर छोड़ दिया। पता नहीं उस औरत ने ऐसा क्या बोल की विशाखा काफी नाराज हो गयी।

ऐसी खामोशी में घंटों बिताने के बाद, श्याम को मासी का कॉल आया। उन्होंने बताया कि वह घर आ चुके है और उन्होंने हमें भी वापस बुलाया है। दुकान बंद कर के हम दोनों फिर से घर चले गए। 

घर पहुंचने पर हमने दुकान की चाबी मौसा जी को दी और वह दुकान के लिए निकल गया। मासी, मैं और विशाखा वहीं सोफे पर बैठ गए। मासी थकी हुई, निराश और पसीने से लथपथ लग रही थी। मासी की बगलें गीली थीं और वो सोफे पर लेटी हुई थी। इस पोज़ में वो बेहद हॉट लग रही थी, उसकी खुशबू मुझे उसकी तरफ खींच रही थी।

1

तभी विशाखा हॉल से निकलकर अपने कमरे में चली गई। वहाँ मासी और मैं अकेले थे। मैं मासी के इस रूप-रंग से एक ही समय आकर्षित और चिंतित था। मैंने पूछा,

मैं: “क्या हुआ मासी? थकी हुई लग रही हो।”

मासी: “अरे ट्रैफिक! ये शोरगुल वाली हॉर्न सुनकर सिर में दर्द हो रहा है।”

मैं: “हम्म… सिर की मालिश करवाना चाहोगी?”

मासी (उत्साह से): “बिल्कुल, कर दो बेटा, थोड़ा आराम पड़ेगा।”

मैं सोफ़े से उठा और उनके पीछे खड़ा होकर उन्हें मालिश देने लगा। लगता है उन्हें मालिश पसंद आ रही थी, उनकी आहें यही बता रही थी। उन्हें छूने के बाद जो गर्माहट महसूस हुई, उसकी आहों की आवाज़ और गर्म साँसे मेरे लंड में जोश भरने के लिए काफी थी।

उन्होंने कहा,

मासी: “आह… सच में मुझे सुकून मिल रहा है! तुम्हारी उंगलियों में जादू है।”

मैं (थोड़ी-सी मजाक करते हुए): “और भी बहुत सी चीजों में जादू है!”

ये शब्द सुनते ही उसके शरीर में गर्मी आ गई, धड़कने तेज़ हो गयी, वो बस चुप हो गई। मेरी बातों का असर हुआ, वो शरमा गई। तभी विशाखा वापस आ गई। मुझे मासी का सिर दबाते देख उसने पूछा कि क्या हुआ? मासी ने भी वही जवाब दिया जो उन्होंने मुझे दिया था। अगर विशाखा वापस नहीं आती, तो यह पक्का था कि मैं मासी की प्यासी फुद्दी को फाड़ सकता था, लेकिन अब यह प्लान फेल हो गया है।

विशाखा मेरी ओर देखकर मुस्कुरा रही थी। वो सोफे पर बैठ गई और मुझे चिढ़ाते हुए बोली,

विशाखा: “ठीक से दबा रहे हो या नहीं?”

मासी: “ओह, वो तो मास्टर है!”

विशाखा: “तो फिर कभी मेरी भी सेवा किया करो।”

मासी: “तुम्हारी क्यों? मेरा भांजा तो सिर्फ़ अपने मासी से प्यार करता है!”

ये दोनों मुझे चिढ़ा रही थी, और मैं इन कुतियाओं से चुदने के सपने देख रहा था। वो पल हमारे लिए बहुत ही प्यारा था। इस पल को देखने के लिए मानो वक्त भी थम सा गया हो। हमारी कभी न खत्म होने वाली बातचीत अभी शुरू हुई थी, और लंबी चलने वाली थी।

विशाखा मेरी तरफ तिरछी नजर करके बोली,

विशाखा: “अपने भांजे से कहो कि अपने लिए थोड़ा प्यार बचाकर रखें, वरना वह अपनी सौभाग्यवती को क्या ठेंगा देंगे।”

मैं (मजाक करते हुए): “प्यार का तो भंडार पड़ा है, तुम उसकी चिंता न करो।”

ऐसी ही बातों बातों में मिनटों के घंटों हो जाते है, अब सूरज भी एक जगह रुक के थक चुका था और नीचे ढल रहा था, श्याम हो गई थी। विशाखा अपने कमरे में अपने कॉलेज का काम करने चली और हॉल में फिर से मासी और मैं अकेले हो जाते है।

मासी भी अपने आसान से उठ जाती है ये मुझे देखने लगती है, मैं भी मासी को देख रहा था। उनके मन में शायद को भूचाल था जो वे व्यक्त नहीं कर पा रही थी। उनकी नजरे मेरी नजरों में काफी अंदर समा गई थी।

फिर एकदम से वह आगे बढ़ी और मेरे होंठों का चुम्बन लेकर अपने कमरे की ओर चली गई। मासी के भीतर चल रहे उनके मन का युद्ध में देख तो नहीं पा रहा था लेकिन समझ सब आ रहा था। 

उनके अंदर सभ्यता का वह डर था जो उन्हें उनकी इच्छाएं मारने को कह रहा था, लेकिन प्यार भी उतना ही ताकतवर था जो उनके मन को हरने नहीं दे रहा था। उनके भीतर नैतिकता और अनैतिकता के सवाल थे जो उनकी बेचैनी बन चुकी थी। एक तरफ उनकी काम इच्छाएं मुझसे चिपक जाने को कहती तो दूसरी ओर सभ्यता उन्हें मुझसे जुदा कर रही थी।

अगर मुझे उनकी गुलाबी बुर को चखना है तो उनके मन से यह सभ्यता का मामला हटाना होगा। क्या है यह सभ्यता, समाज और नैतिक विचार? यह बस पाबंदियां थी जो हमारे प्रेम को सम्मेलन करने से रोक रही है। यह सभ्यता, समाज और उनके अच्छे विचार सिर्फ उनके स्वार्थ देखता है, इन वाचरों ने कभी किसी व्यक्ति को आगे बढ़ने नहीं दिया।

मुझे अब कुछ करना होगा, मासी को इन ख्यालों के बंधन से मुक्ति दिलानी थी या फिर वह इन्हीं विचारों की गुलाम बन के रह जाएगी और कभी भी खुश नहीं हो पाएंगी।

ऐसे ही विचार सोचते-सोचते मेरा सिर भारी हो गया और मुझे आराम की ज़रूरत महसूस होने लगी। अपने कमरे में जाते हुए मैंने विशाखा को उसके कमरे में झांककर देखा। मैंने देखा कि विशाखा बिल्कुल नंगी खड़ी थी, उसका बदन चिकना और चमकदार था। मेरी आँखें बाहर आने को हो रही थीं और मेरा लंड मेरी जींस फाड़ने को तैयार था।

यह वह क्षण था जब मैं अंदर जा सकता था और उसे पीछे से पकड़ सकता था, उसे गले लगा सकता था और उसके स्तनों को पकड़ सकता था, उसके मीठे शरीर का स्वाद ले सकता था, मैं उसे पीछे से backshots दे सकता था… लेकिन मेरा दिमाग काफी बहन का लोडा है जो ऐसे समय काम नहीं करता, presence of mind की कमी के कारण, मैं अपने लंड को मसलता रह गया।

***************

इस बीच, मासी का कमरा मंद रोशनी से जगमगा रहा था, और रोमांस का अंधेरा छा गया था। वह अर्धनग्न अवस्था में अपने बिस्तर पर लेटी हुई थी, अपनी असंतुष्टि को दूर करने के लिए अपनी गुफा में उंगली कर रही थी।

इससे वासना की आग तो शांत नहीं होती, लेकिन यह एक temporary solution था। आखिर वह क्या कर सकती है, जब वह प्रलोभन में पड़ चुकी हो, उसका साथी उसे खुश नहीं कर पा रहा हो, तो उसे दूसरा रास्ता ढूंढना पड़ता है और उसने यह रास्ता अपनाया।

वो एक हफ़्ते से यही कर रही थी, वह किसी अन्य मर्द के बारे में कभी नहीं सोचती थी, न ही उसने कभी मौसा जी के बारे में सोचा, वह मेरे बारे में सोच-सोचकर वह अपनी चुत में उँगलियाँ करती थी। आज, वो फिर से मेरे बारे में सोच रही थी, और अपनी उँगलियाँ तेज़ी से अंदर डाल रही थी। ‘आह्ह्ह उम्म्म्म,’ वो कराह उठी। कुछ ही मिनटों में ही उसकी बुर से सैलाब निकल गया।

वह बिस्तर पर लेट गई, अपनी बाँहें और टाँगें फैला दीं। वह ज़ोर-ज़ोर से साँसें लेने लगी, हाँफने लगी। वह पसीने से भीग गई, और अब उसे बिल्कुल कमजोर सा महसूस हो रहा था। इसे अस्थायी थकान कहते हैं, जो उसे तब से हो रही थी जब से उसने अपनी योनि में नियमित रूप से उंगली करना शुरू किया था, इसलिए वह पिछले कुछ दिनों से कभी-कभी इतनी उदास और थकी हुई रहती थी।

***************

इधर, मैं भी झड़ गया था और थक गया था। मैं अपने कमरे में आकर बिस्तर पर लेट गया। मुझे पता ही नहीं चला कि मैं कब सो गया।

घड़ी के सात बजते ही मेरी पलकें खुल गई। मैं उठा और सबसे पहले विशाखा को ढूंढने लगा। मैं उसके कमरे में घुसा, लेकिन वो वहाँ नहीं थी, मैं सीढ़ियों से नीचे गया, लेकिन वहाँ भी कोई नहीं था। आखिरकार मैंने अपना फोन चेक किया तो विशाखा का मैसेज था कि वो अपनी सहेली के घर जा रही है।

फिर मैं बिना किसी टेंशन के सोफे पर बैठ गया। घर में सन्नाटा सा छा गया था, मैं जानना चाहता था कि वो क्या कर रही है। उसे देखने के लिए मैंने दरवाजा खोला और जो दृश मैंने वहां देखा…

मेमैं मंत्रमुग्ध था, मासी ने अपने टांगों पर कोई कपड़ा नहीं पहना था और वह बिस्तर पर बेहोश पड़ी थी। बदन पर सिर्फ़ कुर्ता पहने वो कितनी प्यारी लग रही थी। मैं आगे बढ़ा, उसके पास गया और उसे गौर से देखा। उसकी चूत से गाढ़ा प्रेम रस गिर रहा था, मैं उससे प्रभावित हो रहा था।

shwetat6

मैं वासना में अंधा हो चुका था। मैंने उसका कुर्ता खींचा और उसकी गुफा चाटने लगा। गुदगुदी के कारण वह जाग गई और चुपचाप मुझे उसकी चूत चाटते हुए देखती रही। वो अपनी कराहें दबाने की पूरी कोशिश कर रही थी। मेरी जीभ जो गुफा में घुस चुकी थी, उसे खाने को ललचा रही थी।

मासी भी इस पल का आनंद लेने लगी थी, वो हल्के से कराह रही थी। मुझे हैरानी हुई कि वो जाग रही थी। लेकिन मैंने उसे चाटना जारी रखा क्योंकि वो मुझे खुद ऐसा करने की इजाज़त कभी नहीं देती।जब भी मैं उसे चोदने का प्लान बनाता हूँ, वो मना कर देती है। दरअसल, टैबू (अनैतिक) होने का डर उसे ऐसा करने से रोकता है।

उसका श्रोणि क्षेत्र गर्म था, मुझे ऐसा लग रहा था जैसे किसी ने मेरे पास हीटर चालू कर दिया हो। वह जोर से कराहने लगी, धीरे-धीरे हरकत करने लगी, बिस्तर की चादर पकड़ ली। उसकी गति शीर्ष पर मसाला थी, गर्म और बहुत आनंददायक।

मासी: “सिर्फ चाटते ही रहोगे क्या?”

उसके शब्द मुझे आगे की कार्रवाई के लिए प्रेरित करने के लिए काफ़ी थे। मैंने उसका कुर्ता उतार दिया और उसके स्तनों से खेलने लगा। वे मुलायम, चमकदार और गर्म थे। मैंने उन्हें चूसा, उनमें से दूध निकला जो स्वाद में बहुत मीठा था।

काफी देर तक उसके स्तनों को सहलाने के बाद, मैंने अपने कपड़े उतार दिए। मेरा लिंग पूरी तरह से कड़क हो गया था, मासी आगे बढ़ी और मेरे लिंग पर अपनी पकड़ बना ली। उसने अपना मुंह चौड़ा खोला और मेरा लिंग अंदर डाल दिया। मैं “आह” कहकर कराह उठा। उसके थूक से मेरा लंड चमक उठा, जिससे वह चिपचिपा और फिसलन भरा हो गया।

कुछ देर बाद वो बिस्तर पर लेट गई, मैं उसके ऊपर आ गया और उसे चूमने लगा। धीरे-धीरे मैंने अपने कूल्हे हिलाए और लिंग को उसकी योनि में प्रवेश कराया। ‘उफ्फ’ के साथ, वह जोर से कराह उठी और मैंने अपना लिंग उसके अंदर धकेलना शुरू कर दिया।

मैं कुछ देर तक उसे चोदता रहा। अचानक मासी के दिमाग में कुछ आया और उसने मुझे झट से धक्का दे दिया। वो रोने लगी और बोली, “तू मेरी बहन का बेटा है… ये सब तेरे साथ हुआ…” मैंने मासी को समझाने की कोशिश की, लेकिन वो नहीं मानी। उसने कहा, “मैं वासना में इतनी अंधी हो गई थी कि मैंने अपने ही भांजा के साथ ये सब कर दिया…” और फूट-फूट कर रोने लगी।

मुझे गुस्सा आ रहा था कि वो अब भी उन्हीं बातों पर विचार कर रही थी। मैंने अपना अंडरवियर पहना और घर से बाहर निकल गया। मुझे समझ नहीं आ रहा था कि कहाँ दस्तक दूँ। मैं सिर्फ़ त्रिशा को जानता था, इसलिए मैंने उसका दरवाज़ा खटखटाया। जब उसने दरवाज़ा खोला, तो मैंने उसे कसकर चूमा और सोफ़े पर लिटा दिया।


Hey guys, Mujhe lagta hai yah update apko pasand nahi aaya hoga. Aisa lgna jayaj hai kyoki yeh update just a ek filler update tha jo story ke aage aane wale hisse ko aur abhi chal rahe hisse blend karta hai. Meri life mein chal rahi situations ke karan mein jyda aacha nahi likh paa raha hoon, maine 2-3 updates mein story ka end plan kiya hai, So give some ADVICE ki ending kaisi honi chaihiye.

Updata short tha aur kahi kahi mistakes bhi ho sakti toh sorry for that. Waise toh update kal aane wale tha lekin aaj jaldi jaldi main complete kar diya.

Is update main pace thodi tej thi kyoki iski writting approach hi aisi thi.

Umeed karta hoon agla update thoda jaldi de paau, long likhu aur isse accha likhu. Thanks for support.

Is baar sirf 30 Likes ka target hai, so do Like. 💕

Please complete the required fields.




Comments

Leave a Reply