मासी का घर
अध्याय 13 – शमा पश्चात संकोच (The Fear after the Fire)
पूरी रात मैं मासी के पीए जूस के बारे में सोचता रहा लेकिन मेरा दिमाग चल नहीं रहा था। मैं समझ ही नहीं सका कि मासी किस जूस की बात कर रही थी।
खैर, मैं सुबह देर से उठा, करीब 8 बजे। सूरज की रोशनी से मेरा कमरा काफी उज्जवल था। नीचे से cooker के सिटी की आवाज आ रही थी, शायद मासी कुछ काम कर रही थी।
मैं उठा और विशाखा को ढूंढने उसके कमरे में घुसा। मैंने जब दरवाजा खोला तो देखा विशाखा उसके कमरे में मौजूद नहीं थी। फिर मुझे याद आया कि आज उसकी फैशन डिजाइनिंग क्लासेस का orientation (उन्मुखीकरण) था तो वह आज देर से आने वाली थी।
उसका कमरा काफी साफ था, चीजों से काफी अच्छी और ऐसे महक आ रही थी जो उसका एहसास कराती है।
उसकी खुशबू तो थी ही, लेकिन कुछ और चीज भी वहां थी जो मुझे आकर्षित कर रही थी। वो चीज थी बेड पर रखी विशाखा की ब्लू कलर की पैंटी। मैं फिर से horny हो गया था, मैने मेरे कदम उसकी रखी पैंटी को ओर बढ़ाए, तभी…
तभी विशाखा के कमरे में रखी हुई अलार्म क्लॉक बजती है। मैं अचानक हुई आवाज को सुनकर बौखला गया। मैंने उस अलार्म क्लॉक को बंद किया और उस क्लॉक को देखता रहा।
मैं उस क्लॉक को काफी घूर कर देख रहा था क्योंकि मेरे दिमाग में एकदम से कुछ hit हुआ था… वो था वक्त। मेरे हाथों से वक्त निकलते जा रहा है, लेकिन मैंने ना ही विशाखा के साथ progress की है ना ही मासी के साथ। मेरे गर्मियों के छुट्टियों का अंत भी होगा ये डर मुझे अंदर से खाए जा रहा था। जैसे ही ये छुट्टियाँ खत्म हो जाएगी मुझे फिर से कॉलेज के लिए रवाना होना पड़ेगा।
इस बात को सोच कर मेरे भीतर और भी ज्यादा तड़प आ गई, मुझे कुछ भी करके मासी को पटना ही होगी और उनके छेद को भेदना ही होगा।
मैं नहाने हेतु बाथरूम में घुसा, शॉवर चालू किया और गर्म पानी की धाराओं के नीचे खड़ा हो गया। वहां कुछ और चीज भी खड़ी थी, मेरा औजार। मेरी नजरे बाथरूम में टांगे हुए मासी के ब्रा पर पड़ती है और मेरे मन में अधूरे काम को पूरा करने का विचार आता है।
मैंने उस ब्रा को उठाया और मेरे लंड से लिपटा कर हिलाने लगा। मैं उस समय मासी की रेशम जैसी मुलायम फुद्दी के बारे में ही सोच रहा था। मेरा माल बाहर आने ही वाला था, मेरा लंड उसकी चरम ऊंचाई (most peak) पर था, काफी कड़क और लंबा, और उसके ऊपर नसे काफी उभर के दिख रही थी…
…तभी मुझे किसी के कदमों की आवाज आई, ऐसा एहसास हुआ कि कोई हॉल में चल रहा है। मेरे हिसाब से तो यह मासी ही होगी क्योंकि घर सिर्फ वे अकेली थी।
मेरे शैतान दिमाग में काफी कामुक विचार आया। मैंने सोचा क्यों न बदन पर एक पकड़ा न पहनते हुए सिर्फ़ एक टॉवेल लपेट कर बाहर निकला जाए, और टॉवेल को भी ढीला छोड़ दूं ताकि जब में बाहर निकल कर उसे भी गिरा दूं तो मासी को मेरे औजार के दर्शन हो जाएंगे।
मैंने इस विचार को सही समझा और ऐसा ही करने का ठान लिया। मैंने फटाफट शॉवर बंद किया और कदमों को सुनने लगा। जैसे ही उनके कदम बाथरूम के पास आयेंगे, मैं बाहर निकल जाऊंगा।
कदम बाथरूम के पास बढ़ते गए, मैंने टॉवेल को लपेट लिया। धीरे धीरे से कदम तेज होते गए। ठीक जब वे कदम बाथरूम के बाहर तक आए मैंने दरवाजा खोल दिया।
…और जैसे ही मैंने उस वक्ती को देखा, मैं हैरान हो गया। वे मासी नहीं थी, बल्कि बाजू वाली तृषा भाभी थी। उन्हे देख कर मैं तो हैरान था ही लेकिन मुझे अर्ध-नग्न देख वे भी अचमबीत थी। तभी मेरा कंबक्खत towel नीचे गिर गया, जैसे ही वो गिरा, भाभी की नजरे मेरे काले सांप के ओर पड़ी। मेरा औजार देख कर वे shock होगई और खिलखिला कर हंसने लगी।

उनकी हंसी की आवाज सुन किचन से मासी ने उन्हें आवाज लगाई,
मासी: “अरे तृषा तू आ गई क्या?”
तृषा (हस्ते हुए): “हाँ, आ गई!”
मैं तो शर्म के मारे लाल हो गया था। बेशक मैं बेशर्म था, लेकिन सिर्फ उनके लिए जिन्हें मुझसे लगाव है। मैंने जल्दी से towel उठाया और अपनी इज्जत बचाते हुए वहाँ से भाग गया। तृषा भाभी की हंसी को सुनकर मासी के मन भी जिज्ञासा आई और उन्होंने किचन से ही उन्हे पूछा,
मासी: “क्या हुआ, इतना क्यों खिल-खिला रही हो?”
तृषा (अपनी हंसी को रोकते हुए): “कुछ नहीं, आप का भतीजा तो काफी तगड़ा है।”
बाद में तृषा भाभी मासी के पास किचन में चली गई और मैं भी अपने कमरे में चला गया। फिर मुझे नहीं पता उनके बीच क्या बातें हुई और क्यों तृषा भाभी हमारे घर आई थी।
मैं काफी समय तक अपने कमरे में ही रहा, दोपहर हो गई थी। फिर मासी ने खाने के लिए मुझे आवाज दी। मासी की आवाज सुन कर मैं दौड़ कर नीचे डायनिंग रूम में चला गया।
अब तक तृषा भाभी भी जा चुकी थी। खाना खाते हुए हमारे बीच कोई भी बात नहीं हुई, न ही मासी ने कोई हलचल की। ऐसा लग रहा था कि वे किसी बात से नाराज है।
मैंने भी खाते वक्त कुछ बात नहीं की, लेकिन जब हमारा खाना खत्म हुआ और मासी हॉल में सोफे पर नाराज हो कर बैठी थी तो मुझसे रहा नहीं गया, मैंने उन्हें उनकी निराशा का कारण पूछ ही लिया,
मैं: “क्या हुआ मासी, आप परेशान क्यों है?”
मासी ने कुछ नहीं कहा, बल्कि अपनी नज़रे फेर ली। वे ऐसे मुंह फूलकर बैठी थी जैसे कोई छोटी बच्ची हो जिस से उसका खिलौना छीन लिया गया है।

इस स्थिति में मासी काफी क्यूट लग रही थी, मेरा दिल पिघल गया। मुझे तो लग रहा था उन्हें कस के एक किस दे दूं।
मैं उसके बाजू में बैठ गया, तब भी उनके मुंह से एक शब्द न निकला। मैंने फिर से उन्हें पूछा,
मैं: “अरे मासी आप बताओगे नहीं तो मुझे पता ही नहीं चलेगा।”
मासी फिर भी कुछ नहीं बोली। फिर मुझे कल के उस जूस के बारे में याद आया जो मासी ने पिया था,
मैं: “मासी वैसे आपने कल वह कोन सा जूस पिया था। वह बात भी मुझे नहीं समझी थी।”
यह बात सुनकर मासी की मुस्कान छूट गई। मैं ये साफ देख सकता था। आखिरकार मासी ने कुछ बोल,
मासी: “जो तुमने वहां गिराया था।”
मासी की इस बात को सुनकर मैं काफी ज्यादा shock हो गया। मैं समझ गया कि कल किसी ने मेरा वीर्य साफ नहीं किया बल्कि मासी ने उसे पी लिया। ये बात मुझे काफी ज्यादा अजीब लग रही थी और हज़म भी नहीं हो रही थी।
मैंने इस बात को मजाक समझ कर साइड में रखा और मासी के नाराजगी का कारण पूछने लगा।
मैं: “मासी यार अब बता भी दो, क्यों मुंह फुलाये बैठी हो!”
मासी: “सुबह, तुम्हारे और तृषा के बीच ऐसा क्या बात हुई थी की वो इतना हंस रही थी?”
अब मैं समझ चुका थी मासी नाराज नहीं बल्कि ईर्ष्या कर रही थी। वे भी बाकी महिलाओं की तरह थी, उन्हें अपने प्रेमी को किसी और से बात करना या कुछ मजाक करना पसंद नहीं। यहां तो मैंने तृषा भाभी से एक शब्द भी नहीं कहा था लेकिन मासी को लग रहा है जैसे हमारे बीच कुछ ज्यादा ही हंसी मजाक हुई हो।
मैं मासी की इस बात को सुन कर मुस्कुराने लगा और कहा,
मैं: “अरे मासी आप तो jealous हो गई। हमारे बीच कुछ नहीं हुआ, बस जब में बाथरूम से बाहर आया तो अधनंगा था और मुझे ऐसी हालत में देख कर तृषा हंसी थी।”
मैं बेशक यह जूठ बोल रहा था, मैं अधनंगा नहीं बल्कि पूरा नंगा था, लेकिन को मासी ये बात नहीं बता सकता था इसलीय मुझे जूठ का सहारा लेना पड़ा।
फिर जाकर मासी का मुंह ठीक हुआ। लेकिन अब भी वह मेरी ओर नहीं देख रही थी। उनका मुंह आगे की ओर था। मैंने उनके दाढ़ी को पकड़ और उनका मुह को बड़ी कोमलता से मेरे ओर किया। हमारे नजरे एक दूसरे को देख रही थी। मैं तो मासी के काले नैनों में डूब ही गया था।
मैंने अपना मुह आगे बढ़ाया, प्रतिक्रिया में मासी ने साथ देते हुए उनका भी मुह आगे किया। हम काफी नजदीक हो गए। मैंने हल्के से मेरे होंठ उनके कोमल मखमली होठों से चिपका दिए। मासी ने अपना मुह खोला और उनकी जीभ को मेरे मुह मे दाखिल किया। उसकी जीभ मेरी जीभ से ऐसे लिपट गई जैसे नाग नागिन संभोग क्रिया में लिपटते हो।

ऐसा लग रहा था जैसे कि उनकी जुबान मेरे मुंह में पिघल गई हो। मैंने मेरे हाथ उसकी सलवार के भीतर घुसए और उसकी नंगी पीठ पर फ़ैरने लगा। लम्हा काफी गरम हो गया था। हम एक दूसरे के कपड़ों को निकालने ही वाले थे तभी दरवाजे की घंटी बजी।
हम अचानक से दूर हो गए, अपने आप को ठीक करते हुए हम सोफ़े से उठ कर खड़े हो गए। मासी ने दरवाजा खोला, दरवाजे पर विशाखा थी। हम विशाखा की तरफ ऐसे देख रहे थे जैसे वह कोई पुलिस ऑफिसर है और हम चोर जो चोरी करते हुए पकड़ा गए। हमें ऐसा चकाचौंध हुआ देख कर विशाखा ने पूछा,
विशाखा: “क्या हुआ? ऐसे क्यों देख रहे हो?”
फिर हम मुस्कुराए और मासी ने विशाखा से कहा,
मासी: “कुछ नहीं।”
विशाखा अंदर आई और वही सोफ़े पर बैठ गई। मैं भी वही बैठ गया और कुछ काम करने का नाटक करने लगा जैसे कि मुझे उस काम को करते हुए समय हो गया हो। मासी भी अपने कमरे में चली गई।
विशाखा वह मोबाईल देख रही थी, मुझे ऐसे काम करता हुआ देख कर वह शैतानी करने लगी और snapchat पर मेरे funny फ़ोटोज़ क्लिक करने लगी। मैं इस समय मजाक करने के mood में नहीं था लेकिन मुझे नाटक करना होगा। आखिर मुझे मेरी दोनों relationships को बराबर संभालना है।
कुछ देर तक यूँ ही काम करने का नाटक करते हुए मैं भी थक गया और सोफे पर फैल के बैठ गया। मुझे ऐसा देख विशाखा ने अपना मोबाइल side में रखा और मेरी ओर देखने लगी।
जब मैंने मेरे भौंहों को ऊपर कर के उसे इशारे में पूछा कि क्या हुआ तो विशाखा कहती है,
विशाखा: “bore हो रहा है न?”
मैने अपना सिर हिलाकर हां में उत्तर दिया।
विशाखा ने मेरा हाथ थाम लिया, और मुझे कहीं ले जाने लगी। हम दोनों घर के बाहर आ गए। मैंने उसे नहीं पूछा कि वह मुझे कहा ले जा रही है, क्योंकि मैं उसकी love language जानता हूं।
विशाखा मुझे आज एक नए रस्ते से ले जा रही थी, शायद वो मुझे किसी नए नजारे से मिला रही थी। उसके प्रेम करने की भाषा ही यही है, एक अच्छा नजारा।
चलते हुए मैंने खामोशी को तोड़ते हुए विशाखा से यूं ही पूछा,
मैं: “तुम्हारा orientation कैसा रहा।”
विशाखा: “बहुत बढ़िया, और मैने अभी सोच लिया है कि कुछ भी हो जाए मैं फैशन डिजाइनिंग करके रहूंगी।”
मैं: “ये काफी अच्छी बात है, वैसे इस रस्ते से कभी हम लोग गुजरे ही नहीं है ना!”
विशाखा: “हां, वही तो। मुझे भी आज ही पता चला। आज जब में घर वापस आ रही थी तो रिक्शा वाले ने यहीं रास्ता चुना था।”
मैं: “अच्छा…”
विशाखा: “वैसे तुम्हारी छुट्टियां कब तक है?”
ये बात सुनकर मेरा मुंह उतर गया। मैने निराशा के साथ उसे बताया,
मैं: “कुछ ज्यादा दिन नहीं।”
इस बात को सुनकर विशाखा को भी बुरा लगा, अब हमारे पास साथ रहने का समय काफी कम था। विशाखा चाहती थी कि इन बचे हुए दिनों में वह मेरे साथ ऐसे यादें बनाए की अगले summer तक भूल नहीं पाए।
चलते चलते हम एक काफी खुली जगह पहुंचे, एक खुले मैदान, श्याम का वह केसरी आसमान जिसमें पक्षी अपने घर की ओर लौट रहे थे। हल्की हवाओं का प्रवाह, और सूर्यास्त। वह नजारा काफी शानदार था।
हमारे आस पास दूर दूर तक कोई व्यक्ति नहीं था। सिर्फ मैं और विशाखा और हमारे हाथ जो एक दूसरे से जुड़े हुए थे। उस लम्हे में प्रेम की शांतता थी, ठंडा ठहराव था और मन को प्रसन्न करने वाले साथी की साथ थी। कुछ देर तक हम दोनों वहां घूमने लगे। अंधेरा होने लगा, हम फिर से घर की ओर रवाना हो गए।
घर पहुंचने पर वही चीजें हुई जो रोजाना होती है, विशाखा ने खाना पकाने में मासी की मदद की, मौसा जी आज भी देर से आने वाले थे और मैं वही बैठ कर टीवी देख रहा था। वक्त बिता, हमरा खाना होने के बाद विशाखा अपने कमरे चली गई और मुझे अब मौका देख रहा था वह काम करने का जो मासी और मैने बीच में ही छोड़ दिया था, मेरा लंड तो भूखा था ही।
मैं मासी के कमरे गया, वहां मासी अपने बेड पर बैठी हुई थी। मुझे देख कर उनके हाव भाव ने कोई बदलाव नहीं आया। मैं उनके नजदीक जाकर बैठ गया और उनसे लिपट गया। मैं हमारे अधूरे बचे काम को पूरा करने आया हूँ ये मासी को समझ गया लेकिन मासी थी कि अब मेरा साथ नहीं दे रही थी। पता नहीं उन्हें बीच बीच में क्या होता है, एकदम से मूड स्विंग होते है।
मासी निराशा दिखाते हुए बोली,
मासी: “विशाल, ये गलत है!”
मैं: “क्या मासी?”
मासी: “तुम मेरे भतीजे हो, और हमारे बीच कुछ ऐसा होना…”
मैं: “मासी आप फिर से रिश्ते, नाते और समाज की बातें करने लगी… मगर आप तो दोपहर को तैयार थी!?”
मासी के आंखों में पानी था, उन्होंने धीरे से कहा,
मासी: “हां, में हवस में अंधी हो गई थी। लेकिन अब नहीं, ये किसी भी दृष्टिकोण से सही नहीं।”
मासी के भीतर समाज का डर फिर से आ गया था। उनके प्यार के ऊपर नैतिकता और अनैतिकता के सवाल थे। मासी के मन वह डर अभी भी नहीं गए था। मुझे इस डर को पूरी तरह समाप्त करना होगा, नहीं तो मेरा लंड और मासी की चुत दोनों भूखे रह जाएंगे।
Note From the Writter:
Main janta hoon ki update ko aane mein deri hogayi lekin uski length bhi kaafi jyada hai.
Shayad readers Trisha ke character ko bhul gye hoge lekin main nahi bhula. Kaafi log ab story ki ending ki chinta karenge lekin wo meri dikkat hai, mujh par chhod do, I’ll handle these three characters very well.
Basically Trisha ka character just ek filler hai, So iske sath main koi detailed arc nahi banaunga ya story ko kheechunga. Wah filler character hone ke wajah se uske sath intimacy ke scene bhi kam rehnge.
Main chije clear krdeta hoon ![]()
Trisha – fully currupt character, aaj use Vishal ka land mila hai toh kal wo kisi aur ka legi; So we are not focusing that much on her.
Masi – Not fully currupt, have some love. Just fear of taboo.
Vishakha – She has pure love, she didn’t want someone else love her Hero.
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