कमरे में पूरा अंधेरा था और दोनो एक दूसरे का हाथ पकड़े बाहर की तरफ चल पड़े। जैसे ही दोनो घर से बाहर निकले तो शहनाज़ का जिस्म चांद की रोशनी से नहा उठा। शहनाज़ के जिस्म पर लिपटी हुई चादर में उसकी चूचियां साफ़ साफ़ नजर आ रही थी और कत्थई रंग के निप्पल भी तन कर खड़े हुए थे। शहनाज़ के खूबसूरत चेहरे पर बाल बिखरे हुए थे और वो बेहद कामुक लग रही थी।
शहनाज़ को ऐसे अवतार में देख कर अजय ने उसका हाथ जोर से दबा दिया तो शहनाज़ ने शिकायती नजरो से उसकी तरफ देखा और बोली:”
:” हाथ पर लिखने की क्या जरूरत थी ? बोल कर भी तो बता सकते थे कि रात में पूजा की कुछ विधि करनी होगी।
अजय:'” बोलने से सब सौंदर्या को पता चल जाता। वो मांगलिक हैं इसलिए शामिल नहीं हो सकती। अगर वो शामिल हुई तो अब तक की सब मेहनत खराब हो जाएगी।
शहनाज़:” अच्छा ये बात हैं तो फिर तो ठीक किया तुमने।
अजय तेजी से चल रहा था जिससे शहनाज़ की चूचियां उछल उछल पड़ रही थी और देखते ही देखते वो दोनो घाट पर पहुंच गए और अजय शहनाज़ को आगे की पूजा और विधि के बारे में सब समझाने लगा। शहनाज़ सब समझ गई कि आज पूजा पूरी होते होते वो पागल सी हो जाएगी। वहां एक बड़े से पत्थर पर एक काफी बड़ा मुलायम गद्दा लगा हुआ था जिसके बीचों बीच में एक केले का बहुत ही बड़ा पत्ता बिछा हुआ था।
केले के पत्ते को देखकर शहनाज़ को कुछ समझ नहीं आया तो उसने अजय की तरफ देखा और
अजय बोला:” शहनाज़ तो फिर आगे पूजा शुरू करे क्या ?
शहनाज़:’ हान लेकिन एक बात का डर लग रहा है कि अगर बीच में सौंदर्या अा गई तो क्या सोचेगी ?
अजय ने आगे बढ़कर शहनाज़ का गोरा गोरा हाथ पकड़ लिया और बोला:” सौंदर्या बिल्कुल भी नहीं अा पाएगी क्योंकि मैंने उसके दरवाजे को बाहर से बंद कर दिया है शहनाज़।
अजय की बात सुनकर शहनाज़ की चूत में मधुर संगीत सा बज उठा और कुछ बूंदे छलक पड़ी। शहनाज़ अजय की आंखो में देखते हुए बोली:” तुम तो बहुत तेज निकले, पहले ही पक्का इंतजाम करके आए हो ।
अजय ने शहनाज़ को खींच कर अपने कर किया और बोला:”
” अब आप देर मत करो, कहीं मुहूर्त निकल गया तो सब पता बेकार हो जाएगा।
शहनाज़ खुद ही उससे लिपट गई और बोली:’ बताओ पहले कौन सी विधि करे ?
अजय: आप एक काम कीजिए, ये चादर औढ़ कर केले के पत्ते पर लेट जाए।
शहनाज़ गद्दे पर जैसी ही चढ़ी तो उसे गद्दे की कोमलता का एहसास हुआ और उसका रोम रोम खुशी से खिल उठा। गद्दा इतना ज्यादा मुलायम था कि उस पर बैठते ही शहनाज़ नीचे की तरफ धंसी और फिर उपर की तरफ उछल पड़ी। शहनाज़ के चेहरे पर खुशी देखते ही बन रही थी और वो धीरे धीरे आराम से केले के पत्ते पर लेट गई। सफेद रंग की पारदर्शी चादर से उसने अपने पूरे जिस्म को ढक लिया।
शहनाज़ के जिस्म पर चादर फैली हुई थी लेकिन चादर इतनी पतली थी कि उसके जिस्म के उभार साफ़ उभर कर नजर अा रहे थे। शहनाज़ को कुछ समझ नहीं आ रहा था कि आगे क्या होने वाला है वो तो बस चादर के अंदर से अजय को ही देख रही थी। अजय थोड़ा सा आगे बढ़ा और उसके पास गद्दे पर ही बैठ गया।
अजय ने एक लोटा निकाला जिसमे कुछ गंगा जल भरा हुआ था और अपनी आंखे बंद कर ली और कुछ मंत्र पढ़े और बोला:”
” शहनाज़ मुझे तुम्हारे जिस्म को इस गंगा जल से पवित्र करना होगा ताकि सौंदर्या के जिस्म से भी मंगल का प्रभाव कम हो सके।
शहनाज़ के तन बदन में हलचल सी मच गई। उफ्फ इसका मतलब अजय अब गंगा जल लगाने के बहाने मेरे जिस्म को छुएगा। ये सोचकर ही उत्तेजना के मारे उसकी सांसे तेज हो गई तो शहनाज़ की छाती पर से चादर बार बार ऊपर नीचे होने लगी। अजय ने थोड़ा सा जल लिया और शहनाज़ के पैरो पर छिड़क दिया तो चादर भीग जाने के कारण उसके पैर पूरी तरह से साफ नजर आने लगे। चादर बस नाम मात्र के लिए ही थी । अजय ने शहनाज़ के तलवो को अपनी उंगली से सहलाया तो शहनाज़ के तन बदन में मीठी मीठी लहर दौड़ गई और वो कांप उठी।
शहनाज की हालत देखकर अजय की आंखे चमक उठी और उसके लंड ने एक जोरदार अंगड़ाई ली। अजय ने जोश में आकर पानी से भरा हुआ लोटा उसके पूरे जिस्म पर पलट दिया और शहनाज़ कांप उठी। चादर उसके जिस्म पर अब सिर्फ नाम के लिए रह गई थी और उसकी गोल गोल ठोस चूचियां पूरी तरह से खिल उठी थी। अजय उसके पैरो के बीच बैठ गया और उसने अपने हाथो को चादर के अंदर घुसा दिया और उसके पैरो को घुटनो से लेकर पंजो तक जल से भिगो रहा था और बहुत ही कामुक तरीके से सहला रहा था जिससे शहनाज़ मस्ती में आती जा रही थी। अजय ने फिर से हाथो में जल लिया और उसकी जांघो को छूआ तो शहनाज़ के मुंह से मस्ती भरी आह निकल पड़ी और उसने अपनी जांघो को पूरी ताकत से कस लिया। अजय ने अपने दोनो हाथों से उसके घुटनो को पकड़ा और खोलने लगा लेकिन शहनाज़ ने और जोर से कस लिया तो अजय ने अपने दोनो हाथों की ताकत लगाई और एक झटके के साथ उसकी जांघों को खोल दिया तो शहनाज़ की सांसे पूरी तरह से तेज हो गई और उसकी चूचियों पर पड़ी हुई चादर हिलने लगी मानो उसकी चूचियां चादर को हटा देना चाहती हो। अजय ने अपने हाथ को आगे बढ़ाया और शहनाज़ की जांघो को छुआ तो शहनाज़ के मुंह से फिर से एक मस्ती भरी आह निकल पड़ी। अजय ने दोनो हाथ से उसकी जांघो को हथेली में भर लिया और जल से भिगोने के बहाने सहलाने लगा। शहनाज़ का जिस्म उसके काबू से बाहर होता जा रहा था और उसकी चूचियां जोर जोर से उछल रही थी।
अजय ने हाथ थोड़ा उपर की तरफ किया और शहनाज़ के जांघो में फंसे हुए मंगल यंत्र को जोर से एक झटका दिया तो उसकी चूत में घुसा हुआ घुंघरू जोर से हिला और शहनाज़ ने एक बार फिर से अजय के हाथो को अपनी जांघो के बीच में कस लिया। शहनाज़ की सांसे पूरी तेज गति से चल रही थी और उसकी आंखे लाल सुर्ख होकर दहक रही थी। उसकी चूचियों पर पड़ी हुई चादर चूचियां हिलने से इधर उधर खिसक गई थी और उसकी चूचियां आधे से ज्यादा बाहर छलक उठी। अजय ने एक बार उसकी चूचियों की तरफ देखा और मंगल यंत्र को पकड़ कर जोर से हिलाते हुए कामुक अंदाज में बोला'”
” मंगल यंत्र ज्यादा परेशान तो नहीं कर रहा है ना शहनाज़?
इतना कहकर उसने जोर जोर से मंगल यंत्र को हिलाया तो घुंघरू शहनाज़ की चूत की फांकों से रगड़ने लगा और उसकी चूचियां के निप्पल उछलते हुए चादर से बाहर निकल गए।

