काफी देर तक दोनो मा बेटी की हंसी भरी आवाज घर में गूंजती रही और फिर कमला बोली
:” अच्छा बेटी चल अब मुझे घर का काम भी देखना हैं और कल तेरा भाई भी घर अा जाएगा उसके लिए कुछ अच्छी अच्छी मिठाई बनानी हैं मुझे।
सौंदर्या:” हान मम्मी, कल अजय भी घर अा रहा हैं, 5 साल हो गए हैं उसे घर आए हुए, पता नहीं कैसा दिखता होगा अब वो।
कमला:” अरे बेटी वो अपनी पढ़ाई को लेकर बहुत ज्यादा गंभीर हैं। और तू तो जानती ही हैं उसने जब से गांव में यहां मुखिया के लड़के को पीट दिया था तो उसे शहर भेजने के अलावा मेरे पास कोई रास्ता नहीं बचा था।
सौंदर्या:” मम्मी आपने सही किया लेकिन आप तो अच्छे से जानती हैं कि मुखिया का लड़का मनोज एक गुंडा किस्म का इंसान हैं और गांव की सारी लडकीयों पर आते जाते गंदे कॉमेंट करता हैं। अजय ने अच्छा ही तो किया था उसे पीट कर। मुझे अपने भाई पर गर्व है।
कमला:” हान बेटी मैं जानती हूं लेकिन तुझे ये बात समझनी चाहिए कि अभी उसकी मारपीट करने की उम्र नहीं हैं, पढ़ लेगा तो कुछ बन जाएगा।
सौंदर्या:” समझती हूं मम्मी, बस इसलिए तो उसे शहर भेज दिया था। नहीं तो आप तो जानती हो कि मैं अपने भाई से कितना प्यार करती हूं।
कमला:” तू अब फिक्र ना कर बेटी, अब तो गांव का मुखिया भी बदल गया है और राम बाबू एक बहुत अच्छे और नेक इंसान हैं। उन्होंने मनोज को पंचायत में ही समझा दिया था कि अपने हरकते बंद करे नहीं तो गांव छोड़ दे।
सौंदर्या:” हान मम्मी ये बात तो हैं, सच में जब से राम बाबू मुखिया बने हैं तब से अपने गांव का तो माहौल ही बदल गया है।
कमला: अच्छा चल ठीक हैं, अब मैं खाना बना लेती हूं, तुम शाम को जाओगी क्या सीमा के घर ?
सौंदर्या:” मम्मी बुलाया तो हैं उसने, देखूंगी अगर मन किया तो चली जाऊंगी।
कमला: चली जाना बेटी, गांव समाज में सबके यहां आना जाना ही सही होता हैं।
इतना कहकर कमला नीचे अा गई और रसोई में घुस गई और रात के खाने का इंतजाम करने में जुट गई।
वहीं सौंदर्या अपने भाई के बारे में सोचने लगी कि जब वो मात्र 17 साल का था तभी उसने मनोज का हाथ तोड़ दिया था क्योंकि मनोज ने मेरा हाथ पकड़ लिया था। सच में मेरा भाई अपनी बहन की मान मर्यादा और सम्मान का सम्मान का रक्षक हैं।
धीरे धीरे रात होने लगी और बाहर अब पूरी तरह से अन्धकार हो गया था और सर्दी के चलते लोग अपने घरों में घुस गए थे। सौंदर्या और कमला दोनो ने खाना खाया।
सौंदर्या:” मम्मी बाहर काफी ठंड हैं, मेरा मन नहीं कर रहा आज सीमा के यहां जाने के लिए।
कमला:” कोई बात नही बेटी, तुम कल चली जाना, वैसे भी देखो ना बाहर कितना ज्यादा अंधेरा हो गया है आज इतनी जल्दी ही।
सौंदर्या अपनी मा की बात सुनकर खुश हो गई और उसके बाद दोनो आराम से रजाई में घुस गई और सो गई।
अगले दिन सुबह सौंदर्या जल्दी ही उठ गई और अजय के कमरे की सफाई में जुट गई। वो जानती थी कि आज उसका भाई वापिस अा रहा हैं इसलिए वो उसके कमरे को बिल्कुल साफ सुथरा कर देना चाहती थी। उसने पूरे कमरे को अच्छे से साफ किया और उसके बाद एक एक सामान और अजय के कपड़ों को ठीक किया और फिर नहाकर पूजा करने चली गई।
पूजा करने के बाद उसने नाश्ता किया और अपने कॉलेज जाने के लिए तैयार हो गई। आज उसके चेहरे पर एक अलग ही तेज और खुशी नजर अा रही थी।
कमला:” क्या बात हैं बेटी आज बहुत खुश नजर आ रही हो ?
सौंदर्या:” मम्मी आज सचुमच एक बहुत खुशी का दिन हैं, मेरा भाई आज घर वापिस अा रहा हैं।
कमला:” ओह अब समझी तेरी ख़ुशी, तेरा भाई अा रहा हैं तो तेरे लिए अच्छा सा सुंदर सा लडका देखकर तेरी शादी कर देगा।
शादी की बात सुनकर सौंदर्या के चेहरा शर्म से लाल हो गया और वो अपना मुंह नीचे करके मंद मंद मुसकाई और फिर बोली:’
” क्या मम्मी, ऐसा कुछ नहीं हैं, आप जब देखो मेरे पीछे ही पड़ी रहती हो।
कमला:” बेटी तेरा चेहरा सब कुछ बयान कर रहा है। अब इसमें मेरा क्या कसूर हैं
सौंदर्या फिर से शर्मा गई और अपना बैग उठाकर बाहर की तरफ चल पड़ीं। आज सचमुच उसके कदम खुशी से उठ रहे थे क्योंकि वो जानती थी कि उसका भाई और उसकी मम्मी मिलकर अब जरूर उसके लिए कोई अच्छा लड़का देख लेंगे।
सौंदर्या को कॉलेज में आए हुए दोपहर हो गई और आज उसका मन किसी भी काम में नहीं लग रहा था। उसे बस रह रहकर अपने भाई की याद आ रही थी।
धीरे धीरे उसकी छुट्टी का समय हो गया और वो अपनी गाड़ी निकाल कर घर की तरफ चल पड़ी। उसने देखा कि बीच रास्ते में भीड़ लगी हुई थी और आगे गाड़ी नहीं जा सकती थी। क्या हुआ ये देखने के लिए सौंदर्या गाड़ी से उतर गई और आगे की तरफ बढ़ गई। तभी उसके कानों में एक लड़की की मार्मिक आह सुनाई दी और उसे खतरे का अंदेशा हुआ और उसके कदम तेजी से आगे बढ़ गए। उसने देखा कि एक करीब 16 साल की लड़की को कुछ गुंडे पीट रहे थे और वहां खड़े हुए सभी लोग तमाशा देख रहे थे और लड़की सबकी तरफ आशा भरी निगाहों से देख रही थी लेकिन गुण्डो दस से ज्यादा थे इसलिए कोई हाथ डालने की हिम्मत नहीं कर रहा था।
एक गुंडे ने लड़की का सूट फाड़ दिया और लड़की बुरी तरह से खौफजदा हो गईं और अपने आपको अपने हाथो से छुपाते हुए बोली:”
” आह भगवान के लिए मुझे छोड़ दो, मैंने क्या बिगाड़ा हैं तुम्हारा ? मुझे मासूम पर दया करो।
एक लड़की ने लड़की की ब्रा की तरफ हाथ बढ़ाया और तभी उसके मुंह पर एक जोरदार थप्पड़ पड़ा और सभी की आंखे उस तरफ उठ गई। सौंदर्या शेरनी की तरह दहाड़ते हुए बोली
” बहुत हो गया तुम्हारा तमाशा, अब हाथ लगाकर दिखाओ इसे, हाथ ना तोड़ दिया तो मेरा नाम भी सौंदर्या नहीं।
एक पल के लिए तो सभी की हालात खराब हो गई लेकिन फिर एक गुंडा हिम्मत करके बोला
” अरे वाह झांसी की रानी, तू तो सच मुच अपने नाम की तरह सुंदर हैं। अब इस लड़की के साथ साथ तुझे भी सबक सिखाना पड़ेगा।
सौंदर्या को उम्मीद थी कि उसके गुंडे को थप्पड़ मारने से भीड़ का आत्म सम्मान जाग जाएगा और गुण्डो पर टूट पड़ेगी लेकिन यहां तो उल्टा हुआ। जैसे ही गुंडे अब उसकी तरफ बढ़े, भीड़ अपने आप पीछे की तरफ खिसक गई। वो मासूम लड़की डर के मारे सौंदर्या के पीछे छिप हुई और थर थर कांपने लगी।
अंदर से तो सौंदर्या की भी हालत खराब हो गई थी लेकिन फिर भी वो अपने आप को तसल्ली दी और बोली:”
” खरबदर जो एक कदम ही आगे बढ़ाया, मुझसे बुरा कोई नहीं होगा।
गुंडा:” तुम तो आज गई काम से, गलत जगह पंगा ले लिया तुमने। आज के बाद सचमुच मुझसे बुरा कोई नहीं होगा। अरे आओ और उठा लो इसे और ले चलो अपने अड्डे पर।
एक साथ कई गुंडे उसकी तरफ बढ़े और सौंदर्या आखिरी बार भीड़ की तरफ देखते हुये बोली:”
” अरे क्या तुम्हे अंदर थोड़ी सी भी शर्म बाकी हैं ? हमारी जगह यदि तुम्हारी अपनी बेटी होती तो क्या तब भी तुम लोगो जैसे ही खड़े रहते ?
गुंडे ने अपनी जेब से चाकू निकाला और भीड़ की तरफ लहराते हुए बोला’”
” अगर किसी को अपनी ज़िंदगी प्यारी नहीं हो तो आगे बढ़े ।
भीड़ आगे तो क्या बढ़ती, लोग अपनी जगह से चार कदम पीछे की तरफ हटने लगे। सौंदर्या समझ गई कि अब उसका बचना मुश्किल हैं और कोई चमत्कार ही उसे बचा सकता हैं।
सौंदर्या की आंखे भीग गई और आखिरी बार उसने भीड़ कि तरफ देखते हुए कहा:
” तुम सबमें क्या कोई मर्द बचा हुआ हैं या सब के सब हिजड़े बन गए हो , भगवान के लिए आगे बढ़ो।
गुंडे जोर जोर से हंसने लगे और सौंदर्या के साथ साथ उसके पीछे खड़ी हुई लड़की जोर से कांपने लगी। तभी एक एक गुंडा आगे की तरफ बढ़ा और इससे पहले कि वो सौंदर्या को छू पाता एक नौजवान बिजली की गति से उछल कर उसके सामने खड़ा हो गया और उसने एक जोरदार लात गुंडे को मारी और गुंडा फिल्मी स्टाइल में उड़ता हुआ दूर जाकर गिरा। लड़के के मुंह पर एक मास्क लगी हुई थी जिससे उसकी शक्ल किसी की पहचान में नहीं अा रही थी लेकिन सौंदर्या और उसके लिए तो वो किसी फ़रिश्ते से कम नहीं था
शेरा ( गुण्डो का सरदार):” कौन हैं बे तू हराम खोर ? तूने बेवजह अपनी मौत को बुला लिया हैं ?
लड़का:” मैं कौन हूं ये तुम छोड़ो, और मैं क्या कर सकता हूं ये देखो। इन लड़कियो को उठाना तो दूर की बात तुम सिर्फ हाथ लगाकर दिखा दो।
शेरा एक डरावनी सी हंसी हंसते हुए बोला:”
” तो तू हमे रोकेगा ? लगता है तेरा इस दुनिया से मन भर गया हैं, अरे देख क्या रहे हो, खत्म कर दो साले को इसे।
एक साथ गुंडे आगे बढ़े और नौजवान की आंखो में चमक उभरी और बिजली की गति से अपनी जगह से उछला और हवा में उड़ता हुआ गुण्डो पर टूट पड़ा, देखते ही देखते सारे गुंडे जमीन पर गिर पड़े। किसी को कुछ समझ नहीं आ रहा था कि ये सब क्या हो रहा हैं और वो लड़का बिजली की गति से हवा में उड़ते हुए लगातार वार पर वार कर रहा था और देखते ही देखते सभी गुंडे सड़क पर पड़े हुए कराह रहे थे। किसी का हाथ तो किसी का पैर टूट चुका था। अपने गुण्डो की ऐसी दुर्दशा देखकर शेरा पसीने पसीने हो गया और उसकी समझ में कुछ नहीं अाया और जान बचाकर भागने लगा।
नौजवान ने उसे देखा और उसके होंठो पर मुस्कान उभर अाई और उसने पूरी ताकत से शेरा के पीछे दौड़ लगा दी और कुछ ही पल बाद शेरा उसकी गिरफ्त में था और एक जोरदार घूसे के साथ ही जमीन पर गिर पड़ा।
लड़के ने उसकी टांगो को पकड़ लिया और उसे घसीटते हुए खीचनें लगा। गुंडे की दर्द भरी आह निकल रही थी और अगले ही पल वो सौंदर्या के पैरो में पड़ा हुआ था और रोते हुए बोला:”
” मुझे माफ़ कर दो बहन, मुझसे गलती हो गई, आज के बाद किसी को लड़की को गलत नजर से नहीं देखूंगा।
सौंदर्या ने नीचे झुकते हुए एक थप्पड़ उसके गाल पर जड़ दिया और गुंडा उसके पैर पकड़कर माफी मांगने लगा और बोला:”
” माफ कर दीजिए। भगवान कसम, आज के बाद सब बुरे काम छोड़ दूंगा बहन जी।
सौंदर्या ने उसकी तरफ नफरत से देखा और फिर लड़के को धन्यवाद बोलने के लिए उसकी तरफ मुड़ी लेकिन वो किसी भूत की तरह गायब हो गया था। उसने चारो तरफ देखा लेकिन उसे लड़का कहीं नजर नहीं आया।
बेसब्री सी होती होती इधर उधर बेचैन निगाहें दौड़ाते हुए वो भीड़ से बोली:”
” अरे वो भाई साहब कहां चले गए जिसने मेरी जान बचाई ?
भीड़ एक दूसरे का मुंह देखने लगी क्योंकि सब की नजर तो सौंदर्या और गुंडे पर टिकी हुई थी और लड़का कब कहां चला गया किसी को पता ही नहीं चला। सौंदर्या समझ गई कि लड़का चला गया है तो उसने एक बार भीड़ कि तरफ घूरा और उदास मन से अपनी गाड़ी की तरफ चल पड़ी।
सौंदर्या गाड़ी चलाते हुए सोच रही थी कि आज कल गुण्डो की हिम्मत इतनी बढ़ गई है कि खुले आम सड़क पर ही लड़की छेड़ रहे हैं और सबसे ज्यादा दुख तो इस बात का हैं कि हजारों की तादाद में होने के बाद भी भीड़ कुछ नहीं करती। कैसे सब लोग तमाशा देख रहे थे, पता नहीं क्या होगा इस देश का ।
अपने विचारो में डूबी हुई सौंदर्या अपने घर पहुंच गई और अपनी मम्मी को देखते ही स्माइल दी और बोली:”
” मम्मी अजय नहीं आया क्या अब तक ?
कमला:” नहीं बेटी, शाम तक अा जाएगा, शहर दूर हैं तुम तो ये बात जानती ही हो और उपर से टाइम पर गाड़ी नहीं मिलती हैं। तुम उसे अपने साथ ही ला सकती थी बेटी।
सौंदर्या को अपनी गलती का एहसास हुआ कि वो तो खुद शहर से अा रही है और उसने अपने भाई को एक कॉल तक नहीं किया। बेचारा अब लोकल बसों में धक्के खाकर आएगा।
सौंदर्या:” ओह मम्मी, मैं तो भूल ही गई, चलो मैं एक बार सीमा के घर होकर आती हूं। रात भी नहीं गई थी। कहीं वो नाराज़ ना हो जाए बेचारी।

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